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विटामिन सी का मुख्य स्रोत "आंवला "

 विटामिन सी का मुख्य स्रोत "आंवला "

आंवला एक ऐसा फल है जो अपने गुणों के कारण भारत में ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय है। कभी आपने सोंचा है हमारे भारत वर्ष में किन किन पेड़ों की पूजा होती है। इनकी संख्या बहुत है और अलग अलग क्षेत्रों को देखा जाये तो ये पेड़ पौधे बहुत हैं। जैसे: पीपलबरगदनीमकेलाआमबेलअशोकनारियलतुलसी आदि। अब अगर औषधीय गुणों को नजर में रखकर देखें तो जिन जिन पेड़ पौधों की पूजा होती है वो सभी औषधीय गुणों से परिपूर्ण हैं, जिनमें आंवला एक नम्बर पर है। 

विटामिन सी का सम्राट "आंवला "

आयुर्वेद में आंवले का बहुत महत्व बताया गया है। यहां तक कि आयुर्वेद में इसे अमृत फल भी कहा गया है। यह एक ऐसा फल है, जिसके अनगिनत लाभ हैं। यह ना सिर्फ त्वचा और बालों के लिए फायदेमंद है बल्कि कई तरह के रोगों के लिए औषधि का काम भी करता है। यह हमारे शरीर की इम्युनिटी भी बढ़ाता है। आंवले का प्रयोग कई तरह से किया जा सकता है जैसे- आमला जूस, आंवल पाउडर, आंवला अचार, आंवला कैंडी आदि।आंवला में प्रचुर मात्रा में विटामिन, मिनरल और न्यूट्रिएंट्स होते हैं जो आंवला को अनमोल गुणों वाला बना देते हैं।

जिस देश में परंपराओं में पूजा पाठ में "विटामिन सी के सम्राट" हैं। पूरी दुनिया में एंटी ऑक्सीडेंट को जब कोई जानता नहीं था" उस एंटी ऑक्सीडेंट और एंटीएजिंग के सम्राट आंवले की हमारे देश भारतवर्ष में पूजा की जाती थी और आंवले को खाना परंपरा माना जाता था, जो आजतक बदस्तूर जारी है। अक्षय नवमी (कल 21.11.2023 को अक्षय नवमी है ) पर आंवले के पेड़ की पूजा कर उसी के नीचे भोजन करने का विधान है। आंवले के पेड़ के नीचे भोजन करना शुभ माना जाता है। आंवले की लकड़ी को कुएं में लगाया जाता हो ताकि जो पानी आए, वह भी एंटी ऑक्सीडेंट से भरपूर आए। 

विटामिन सी का सम्राट "आंवला "

सनातन भारत में सब्जी में खट्टापन लाने के लिये टमाटर के स्थान पर आंवले का प्रयोग होता था। इसलिये सनातन हिंदुओ की हड्डियां महर्षि दधीचि की तरह कठोर होती थीं। इतनी मजबूत होती थी कि महाराणा प्रताप का महावज़नी भाला उठा सकतीं थी। 

जिस मौसम में देशी टमाटर मिले तो ठीक लेकिन अंडे जैसे आकार के अंग्रेजी टमाटर खाने के स्थान पर आंवले का प्रयोग हमारी सब्ज़ी को स्वादिष्ट भी बनाएगा और हमें दवाइयों से दूर भी रखेगा। आंवला ही एक ऐसा फल है जिसमे सब तरह के रस होते है। जैसे आंवला, खट्टा भी है, मीठा भी कड़वा भी है, नमकीन भी। 

आँवले का सनातन संस्कृति में महत्तम इतना है कि दीपावली के कुछ दिन बाद कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अक्षय नवमी जिसको आँवला नवमी भी कहते हैं, मनाई जाती है । 

आंवला के फायदे (Benefits of Gooseberry):-

आंवला बाजार में मिलना काफी दिनों से शुरू हो गया है। मुझे पोस्ट डालने में थोड़ी देरी हो गयी। पर अभी भी बहुत देर नहीं हुई है, जनवरी - फरवरी तक आंवला बाजार में उपलब्ध होता है। ज्यादा से ज्यादा अपने भोजन में इसका उपयोग करें। जबतक बाजार में उपलब्ध है ताज़ा आंवले का सेवन करें। चाहे तो इसे स्टोर करके भी रख सकते हैं - अचार, मुरब्बा, कैंडी और च्यवनप्राश बना के इसको पूरे साल खाया सकता है। इसके औषधीय गुणों की चर्चा पहले ही इस ब्लॉग में कर चुकी हूँ, जिसको यहाँ 👇क्लिक करके पढ़ा जा सकता है। 

आंवला के फायदे (Benefits of Gooseberry)

आंवला मुरब्बा के फायदे और नुकसान

आंवला मुरब्बा कैसे तैयार होता है

इस प्यारे से बदलते मौसम पर कुछ लाइनें

इस प्यारे से बदलते मौसम पर कुछ लाइनें

Rupa Oos ki ek Boond
"जिंदगी का एक ही उसूल रखो,
मुसीबत चाहे कितनी भी हो हमेशा
चेहरे पर मुस्कान रखो"..❣️

मौसम में मिस्री घोल रहा

अगहन का जाड़ा बोल रहा

पंखा कुलर एसी नहीं

अब काफी चाय पर चर्चा चल रहा

अगहन का जाड़ा बोल रहा ..


लपसी पूरी का स्वाद नहीं 

माता के पंडाल नहीं

दीपों की लरियों में सज कर

बाबा की नगरी डोल रही

हां सच में काशी बोल रही

अगहन का जाड़ा बोल रहा..


तरबुजे खरबुजा नहीं

गन्ना, सुदनी, गंजी का रुतबा बोल रहा

जाड़े की धूप,

टमाटर की सूप

और मूंगफली के दाने

तबीयत नरम, पकौड़े गरम,

चाय पीने का बहाना ढूंढ रहा 

अगहन का जाड़ा बोल रहा..


मंडी सज गयी गोभी, पालक, मेथी, मूली से 

आंवला, अमरुद ठेलों पर 

बगिया में धूम गेंदा गुलदावदी 

खुशबू हवा में घोल रहा 

अगहन का जाड़ा बोल रहा..


आंगन में तुलसी डोल रही

मदमस्त नयन को खोल रही

अब ओढ़ गुलाबी चुनरिया को

अगहन का जाड़ा बोल रहा

मौसम में मिस्री घोल रहा

स्वागत सर्दी के मौसम का ..

इस प्यारे से बदलते मौसम पर कुछ लाइनें

खुशी एक फूल से सुगंध की तरह विकिरण करती है
और सभी अच्छी चीजों को आपकी ओर खींचती है..
❣️

कर्ज वाली लक्ष्मी || Karj wali lakshmi

कर्ज वाली लक्ष्मी

सोशल मीडिया पर एक प्रेरक प्रसंग पढ़ कर अच्छा लगा। यह प्रसंग ज्यादातर लोगों तक पहुंचना चाहिए। अतः इस लेख को यहां साझा कर रही हूं।

एक 15 साल का लड़का अपने पापा से कहा पापा पापा दीदी के होने वाले ससुर और सास कल आ रहे है अभी जीजाजी ने फोन पर बताया। दीदी मतलब उसकी बड़ी बहन की सगाई कुछ दिन पहले एक अच्छे घर में तय हुई थी।

कर्ज वाली लक्ष्मी || Karj wali lakshmi

दीनदयाल जी पहले से ही उदास बैठे थे धीरे से बोले - हां बेटा! उनका कल ही फोन आया था कि वो एक दो दिन में दहेज की  बात करने आ रहे हैं। बोले, दहेज के बारे में आप से ज़रूरी बात करनी है। बड़ी मुश्किल से यह अच्छा लड़का मिला था। कल को उनकी दहेज की मांग इतनी ज़्यादा हो कि मैं पूरी नहीं कर पाया तो ?" कहते कहते उनकी आँखें भर आयीं। 

घर के प्रत्येक सदस्य के मन व चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही थी। लड़की भी उदास हो गयी। खैर, अगले दिन समधी समधिन आए, उनकी खूब आवभगत की गयी। कुछ देर बैठने के बाद लड़के के पिता ने लड़की के पिता से कहा दीनदयाल जी अब काम की बात हो जाए। 

दीनदयाल जी की धड़कन बढ़ गयी। बोले, हां हां समधी जी, जो आप हुकुम करें। 

लड़के के पिताजी ने धीरे से अपनी कुर्सी दीनदयाल जी और खिसकाई ओर धीरे से उनके कान में बोले - "दीनदयाल जी मुझे दहेज के बारे बात करनी है।"

दीनदयाल जी हाथ जोड़ते हुये आँखों में पानी लिए हुए बोले बताईए समधी जी, जो आप को उचित लगे मैं पूरी कोशिश करूंगा। समधी जी ने धीरे से दीनदयाल जी का हाथ अपने हाथों से दबाते हुये बस इतना ही कहा - आप कन्यादान में कुछ भी देगें या ना भी देंगे, थोड़ा देंगे या ज़्यादा देंगे, मुझे सब स्वीकार है, पर कर्ज लेकर आप एक रुपया भी दहेज मत देना, वो मुझे स्वीकार नहीं। क्योंकि जो बेटी अपने बाप को कर्ज में डुबो दे वैसी "कर्ज वाली लक्ष्मी" मुझे स्वीकार नहीं। मुझे बिना कर्ज वाली बहू ही चाहिए। जो मेरे यहाँ आकर मेरी सम्पति को दो गुना कर देगी। मेरे घर परिवार को खुशियों से भरेगी। 

दीनदयाल जी हैरान हो गए, उनसे गले मिलकर बोले - समधी जी बिल्कुल ऐसा ही होगा। 

शिक्षा-  कर्ज वाली लक्ष्मी ना कोई विदा करें न ही कोई स्वीकार करें..!!

जय श्री कृष्ण 🙏

English Translate

Karj wali lakshmi

Nice to read an inspiring story on social media. This topic should reach most people. Therefore, I am sharing this article here.

A 15 year old boy said to his father, Papa, sister's future father-in-law and mother-in-law are coming tomorrow, just now brother-in-law told on the phone. Sister means his elder sister's engagement was fixed a few days ago in a good house.

कर्ज वाली लक्ष्मी || Karj wali lakshmi

Deendayal ji was already sitting sad and said softly - Yes son! I had received a call from him yesterday that he was coming in a day or two to discuss dowry. He said, I need to talk to you about dowry. This good boy was found with great difficulty. What if tomorrow their demand for dowry is so high that I am not able to fulfill it?" His eyes filled with tears while saying this.

Lines of worry were clearly visible on the mind and face of every member of the house. The girl also became sad. Well, the next day Samadhi Samadhin came and he was greatly welcomed. After sitting for some time, the boy's father said to the girl's father, Deendayal ji, now let's talk about work.

Deendayal ji's heartbeat increased. He said, yes, Samadhi ji, whatever you order.

The boy's father slowly moved his chair towards Deendayal ji and whispered in his ear - "Deendayal ji, I want to talk about dowry."

Deendayal ji folded his hands and said with tears in his eyes, tell me, Samadhi ji, whatever suits you, I will try my best. Samadhi ji gently pressed Deendayal ji's hand with his own and said only this - You may or may not give anything in Kanyadaan, you may give a little or you may give a lot, I accept everything, but do not give even a single rupee dowry by taking a loan. Give, I don't accept that. Because a daughter who drowns her father in debt, I do not accept that kind of "Lakshmi with debt". I want a daughter-in-law without debt. Who will come to my place and double my wealth. Will fill my home and family with happiness.

Deendayal ji was surprised, hugged him and said - Samadhi ji, it will be exactly like this.

Education- No one should bid farewell to Lakshmi who is in debt, nor should anyone accept her..!!

Jai Shri Krishna 🙏

बिहार का राज्य पशु गौर/बैल

बिहार का राज्य पशु गौर/बैल

बैल बिहार का राजकीय पशु है। इसे बिहार की राज्य सरकार द्वारा 2013 में राजकीय पशु घोषित किया गया था। बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है और बैल बिहार के कृषि की प्रधानता का प्रतीक है क्योंकि भारत में सदियों से बेल का प्रयोग कृषि कार्यों में किया जाता रहा है।  यह खेत की जुताई में काम आने वाला और सामान को ढोने के लिए उपयोग में लाया जाने वाला सबसे उपर्युक्त पशु होता है।

बिहार का राज्य पशु गौर/बैल

बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है और बैल बिहार के कृषि की प्रधानता का प्रतीक है क्योंकि भारत में सदियों से बैल का प्रयोग कृषि कार्यों में किया जाता रहा है। विभाजन के बाद राज्य के वर्तमान भौगोलिक परिवेश, वनस्पति प्रजातियों तथा प्राणियों की उपलब्धता एवं उनके संरक्षण की जरूरत महसूस की गयी। खेती के यंत्रीकरण के चलते बैलों का उपयोग कम होता जा रहा है। इससे उनके अस्तित्व पर ही संकट खड़ा हो गया है। यही वजह है कि सरकार द्वारा इन्हें संरक्षित व संवर्धित करने की प्रयास की जा रही है।  

गौर केवल बिहार का ही नहीं बल्कि गोवा का भी राजकीय पशु है। यह गौरवंश का विशालतम प्राणी है। कंधे तक 6 फुट की ऊंचाई वाले वयस्क नर का वजन 650 से 1000 किग्रा. तक होता है। पूंछ को छोड़कर इसकी लंबाई करीब सवा नौ फुट होती है।

मादा नर से थोड़ी छोटी होती है। नर का रंग काला एवं मादा ललछौंह भूरे रंग की होती है जो गौर की एक स्पष्ट पहचान है। इसके चारों पैरों का खुर से लेकर घुटने तक का रंग सफेद होता है। घुटने तक सफेद पैर नर एवं मादा दोनों के होते हैं। नर के सिर पर एक जोड़ी मजबूत घुमावदार सींग होते हैं जो लगभग 45 से 46 इंच तक लंबे हो सकते हैं। मादा के सींग अपेक्षाकृत पतले एवं नर से छोटे होते हैं

English Translate

Bihar's state animal Gaur/Bull

Bull is the state animal of Bihar. It was declared the state animal by the state government of Bihar in 2013. Bihar is an agricultural state and the bull is a symbol of the importance of agriculture in Bihar because the bull has been used in agricultural activities for centuries in India. This is the most important animal used for plowing the fields and carrying goods.

Bihar's state animal Gaur/Bull

Bihar is an agricultural state and the bull is a symbol of the importance of agriculture in Bihar because bulls have been used in agricultural work for centuries in India. After partition, the need was felt for the present geographical environment of the state, availability of plant species and animals and their conservation. Due to mechanization of farming, the use of oxen is decreasing. Due to this their very existence is in danger. This is the reason why the government is making efforts to preserve and promote them.

Gaur is the state animal not only of Bihar but also of Goa. This is the largest animal of Gaur dynasty. The weight of an adult male with height of 6 feet at the shoulder is 650 to 1000 kg. Happens till.  Excluding the tail, its length is about nine and a quarter feet.

The female is slightly smaller than the male. The color of the male is black and that of the female is brown, which is a clear identity of Gaur. The color of its four legs from hoof to knee is white. Both males and females have white legs up to the knees. The male has a pair of strong curved horns on his head that can grow to about 45 to 46 inches long. The horns of the female are relatively thinner and smaller than those of the male.

भारतीय राज्य के राजकीय पशुओं की सूची || List of State Animals of India ||

भारतीय राज्य के राजकीय पक्षियों की सूची |(List of State Birds of India)

श्रीमद्भगवद्गीता (Shrimad Bhagwat Geeta) अध्याय - 18 (01 - 12)

 श्रीमद्भगवद्गीता (Shrimad Bhagwat Geeta)

इस ब्लॉग के माध्यम से हम सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता प्रकाशित कर रहे हैं, इसके तहत हम सभी 18 अध्यायों और उनके सभी श्लोकों का सरल अनुवाद हिंदी में प्रकाशित करेंगे। 

श्रीमद्‍भगवद्‍गीता के 18 अध्यायों में से अध्याय 1,2,3,4,5, 6, 7, 8,9, 10,11,12,14, 15,16 और 17 के पूरे होने के बाद आज प्रस्तुत है, अध्याय 18 के सभी अनुच्छेद।   

अथाष्टादशोऽध्यायः- मोक्षसंन्यासयोग

श्रीमद्भगवद्गीता (Shrimad Bhagwat Geeta)


त्याग का विषय

अर्जुन उवाच

सन्न्यासस्य महाबाहो तत्त्वमिच्छामि वेदितुम्‌ ।
त्यागस्य च हृषीकेश पृथक्केशिनिषूदन || 18.01 ||

भावार्थ : 

अर्जुन बोले- हे महाबाहो! हे अन्तर्यामिन्‌! हे वासुदेव! मैं संन्यास और त्याग के तत्व को पृथक्‌-पृथक्‌ जानना चाहता हूँ। 

श्रीभगवानुवाच

काम्यानां कर्मणा न्यासं सन्न्यासं कवयो विदुः ।
सर्वकर्मफलत्यागं प्राहुस्त्यागं विचक्षणाः || 18.02 ||

भावार्थ : 

श्री भगवान बोले- कितने ही पण्डितजन तो काम्य कर्मों के (स्त्री, पुत्र और धन आदि प्रिय वस्तुओं की प्राप्ति के लिए तथा रोग-संकटादि की निवृत्ति के लिए जो यज्ञ, दान, तप और उपासना आदि कर्म किए जाते हैं, उनका नाम काम्यकर्म है।) त्याग को संन्यास समझते हैं तथा दूसरे विचारकुशल पुरुष सब कर्मों के फल के त्याग को (ईश्वर की भक्ति, देवताओं का पूजन, माता-पितादि गुरुजनों की सेवा, यज्ञ, दान और तप तथा वर्णाश्रम के अनुसार आजीविका द्वारा गृहस्थ का निर्वाह एवं शरीर संबंधी खान-पान इत्यादि जितने कर्तव्यकर्म हैं, उन सबमें इस लोक और परलोक की सम्पूर्ण कामनाओं के त्याग का नाम सब कर्मों के फल का त्याग है) त्याग कहते हैं৷

त्याज्यं दोषवदित्येके कर्म प्राहुर्मनीषिणः ।
यज्ञदानतपःकर्म न त्याज्यमिति चापरे || 18.03 ||

भावार्थ : 

कई एक विद्वान ऐसा कहते हैं कि कर्ममात्र दोषयुक्त हैं, इसलिए त्यागने के योग्य हैं और दूसरे विद्वान यह कहते हैं कि यज्ञ, दान और तपरूप कर्म त्यागने योग्य नहीं हैं৷

निश्चयं श्रृणु में तत्र त्यागे भरतसत्तम ।
त्यागो हि पुरुषव्याघ्र त्रिविधः सम्प्रकीर्तितः || 18.04 ||

भावार्थ : 

हे पुरुषश्रेष्ठ अर्जुन ! संन्यास और त्याग, इन दोनों में से पहले त्याग के विषय में तू मेरा निश्चय सुन। क्योंकि त्याग सात्विक, राजस और तामस भेद से तीन प्रकार का कहा गया है৷

यज्ञदानतपःकर्म न त्याज्यं कार्यमेव तत्‌ ।
यज्ञो दानं तपश्चैव पावनानि मनीषिणाम्‌ || 18.05 ||

भावार्थ : 

यज्ञ, दान और तपरूप कर्म त्याग करने के योग्य नहीं है, बल्कि वह तो अवश्य कर्तव्य है, क्योंकि यज्ञ, दान और तप -ये तीनों ही कर्म बुद्धिमान पुरुषों को (वह मनुष्य बुद्धिमान है, जो फल और आसक्ति को त्याग कर केवल भगवदर्थ कर्म करता है।) पवित्र करने वाले हैं৷

एतान्यपि तु कर्माणि सङ्‍गं त्यक्त्वा फलानि च ।
कर्तव्यानीति में पार्थ निश्चितं मतमुत्तमम्‌ || 18.06 ||

भावार्थ : 

इसलिए हे पार्थ! इन यज्ञ, दान और तपरूप कर्मों को तथा और भी सम्पूर्ण कर्तव्यकर्मों को आसक्ति और फलों का त्याग करके अवश्य करना चाहिए, यह मेरा निश्चय किया हुआ उत्तम मत है ৷৷18.6॥

नियतस्य तु सन्न्यासः कर्मणो नोपपद्यते ।
मोहात्तस्य परित्यागस्तामसः परिकीर्तितः|| 18.07 ||

भावार्थ : 

(निषिद्ध और काम्य कर्मों का तो स्वरूप से त्याग करना उचित ही है) परन्तु नियत कर्म का (इसी अध्याय के श्लोक 48 की टिप्पणी में इसका अर्थ देखना चाहिए।) स्वरूप से त्याग करना उचित नहीं है। इसलिए मोह के कारण उसका त्याग कर देना तामस त्याग कहा गया है৷

दुःखमित्येव यत्कर्म कायक्लेशभयात्त्यजेत्‌ ।
स कृत्वा राजसं त्यागं नैव त्यागफलं लभेत्‌ || 18.08 ||

भावार्थ : 

जो कुछ कर्म है वह सब दुःखरूप ही है- ऐसा समझकर यदि कोई शारीरिक क्लेश के भय से कर्तव्य-कर्मों का त्याग कर दे, तो वह ऐसा राजस त्याग करके त्याग के फल को किसी प्रकार भी नहीं पाता ৷৷18.8॥

कार्यमित्येव यत्कर्म नियतं क्रियतेअर्जुन ।
सङ्‍गं त्यक्त्वा फलं चैव स त्यागः सात्त्विको मतः|| 18.09 ||

भावार्थ : 

हे अर्जुन! जो शास्त्रविहित कर्म करना कर्तव्य है- इसी भाव से आसक्ति और फल का त्याग करके किया जाता है- वही सात्त्विक त्याग माना गया है ৷৷18.9॥

न द्वेष्ट्यकुशलं कर्म कुशले नानुषज्जते ।
त्यागी सत्त्वसमाविष्टो मेधावी छिन्नसंशयः || 18.10 ||

भावार्थ : 

जो मनुष्य अकुशल कर्म से तो द्वेष नहीं करता और कुशल कर्म में आसक्त नहीं होता- वह शुद्ध सत्त्वगुण से युक्त पुरुष संशयरहित, बुद्धिमान और सच्चा त्यागी है৷

न हि देहभृता शक्यं त्यक्तुं कर्माण्यशेषतः ।
यस्तु कर्मफलत्यागी स त्यागीत्यभिधीयते  || 18.11 ||

भावार्थ : 

क्योंकि शरीरधारी किसी भी मनुष्य द्वारा सम्पूर्णता से सब कर्मों का त्याग किया जाना शक्य नहीं है, इसलिए जो कर्मफल त्यागी है, वही त्यागी है- यह कहा जाता है৷

अनिष्टमिष्टं मिश्रं च त्रिविधं कर्मणः फलम्‌ ।
भवत्यत्यागिनां प्रेत्य न तु सन्न्यासिनां क्वचित्‌  || 18.12 ||

भावार्थ : 

कर्मफल का त्याग न करने वाले मनुष्यों के कर्मों का तो अच्छा, बुरा और मिला हुआ- ऐसे तीन प्रकार का फल मरने के पश्चात अवश्य होता है, किन्तु कर्मफल का त्याग कर देने वाले मनुष्यों के कर्मों का फल किसी काल में भी नहीं होता৷

जर्सी डेविल || Jersey Devil (दुनिया के रहस्यमई जीव जंतु || Mysterious animals of the world )

जर्सी डेविल

दुनिया के कुछ रहस्यमई जीव जंतुओं के क्रम में आज एक और विचित्र और भयानक प्राणी "जर्सी डेविल" के बारे में चर्चा करेंगे। पहली नजर में तस्वीरों को देखकर आपलोगों को लगेगा कि किसी कार्टून के कैरेक्टर की चर्चा हो रही है, परंतु ऐसा नहीं है।

जर्सी डेविल || Jersey Devil (दुनिया के  रहस्यमई जीव जंतु || Mysterious animals of the world )

"जर्सी डेविल" इस रहस्यमयी, विचित्र और भयानक प्राणी को न्यू जर्सी में दक्षिणी क्षेत्र के देवदार वृक्ष वाले घने जंगलों में देखा गया था। इस रहस्यमयी, विचित्र और डरावने प्राणी के बारे में 1800 से लेकर 20 वीं सदी तक अलग अलग घटनाये सामने आती रही थी।

घटनाओं के अनुसार कहा जाता है कि इस विचित्र प्राणी (जर्सी डेविल) के दो पैर थे और घोड़े के जैसा विचित्र मुंह था। कहा जाता है की जर्सी डेविल ने वहा के इलाके के कई जानवरों को मारा था और उसके विचित्र पद चिन्ह वहां पाए गए थे और वह अजीब प्रकार की डरावनी आवाज़ भी निकालता था।

जर्सी डेविल || Jersey Devil (दुनिया के  रहस्यमई जीव जंतु || Mysterious animals of the world )

न्यू जर्सी और उसके आसपास के कई इलाके के लोगों ने इस विचित्र और भयानक प्राणी को देखने का दावा किया था। इस विचित्र प्राणी से जुड़ी एक दंतकथा भी स्थानिक लोगो में प्रचलित है। लोकप्रिय लोककथाओं के अनुसार, जर्सी डेविल की उत्पत्ति पाइन बैरेंस निवासी जेन लीड्स से हुई, जिन्हें "मदर लीड्स" के नाम से जाना जाता है।

किंवदंती में कहा गया है कि मदर लीड्स के बारह बच्चे थे और जब उन्हें पता चला कि वह तेरहवीं बार गर्भवती हैं, तो उन्होंने निराशा में बच्चे को श्राप दिया और घोषणा की कि बच्चा "शैतान" होगा । 1735 में, एक तूफानी रात में मदर लीड्स प्रसव पीड़ा में थीं, जबकि उनके दोस्त उनके आसपास इकट्ठे थे। एक सामान्य बच्चे के रूप में जन्मा तेरहवां बच्चा खुर, बकरी के सिर, चमगादड़ के पंख और कांटेदार पूंछ वाले प्राणी में बदल गया। गुर्राते और चिल्लाते हुए, बच्चे ने चिमनी से उड़कर पाइंस में जाने से पहले अपनी पूंछ से सभी को पीटा। किंवदंती के कुछ संस्करणों में यह भी कहा गया है कि स्थानीय पादरी ने बाद में पाइन बैरेंस से उस प्राणी को भगाने का प्रयास किया। 

कुछ लोग इस प्राणी को सच मानते है और कुछ लोग इसे अफ़वाह मानते है।

दुनिया के  रहस्यमई जीव जंतु || Mysterious animals of the world

English Translate

Jersey Devil

"Jersey Devil" This mysterious, strange and terrifying creature was seen in the dense pine forests of the southern region of New Jersey. From 1800 to the 20th century, different incidents were coming to light about this mysterious, strange and scary creature.

"Jersey Devil" This mysterious, strange and terrifying creature was seen in the dense pine forests of the southern region of New Jersey. From 1800 to the 20th century, different incidents were coming to light about this mysterious, strange and scary creature.

दुनिया के  रहस्यमई जीव जंतु || Mysterious animals of the world

According to the events, it is said that this strange creature (Jersey Devil) had two legs and a strange mouth like a horse. It is said that the Jersey Devil had killed many animals in the area and its strange footprints were found there and it also used to make strange scary sounds.

People from many areas in and around New Jersey claimed to have seen this strange and terrifying creature. A legend related to this strange creature is also popular among the local people. According to popular folklore, the Jersey Devil originated with Pine Barrens resident Jane Leeds, known as "Mother Leeds".

दुनिया के  रहस्यमई जीव जंतु || Mysterious animals of the world

Legend states that Mother Leeds had twelve children and when she discovered she was pregnant for the thirteenth time, she cursed the child in despair and declared that the child would be "devilish". In 1735, Mother Leeds was in labor on a stormy night while her friends gathered around her. The thirteenth child, born as an ordinary child, transformed into a creature with hooves, a goat's head, bat's wings, and a forked tail. Growling and screaming, the baby beat everyone with his tail before flying out of the chimney and into the pines. Some versions of the legend also state that the local priest later attempted to banish the creature from the Pine Barrens.

Some people consider this creature to be true and some people consider it to be a rumour.

इस लाइन को क्लिक कीजिये - दिए गए लिंक में जर्सी डेविल से जुड़े कई वीडियो शेयर किये गए हैं। 

14 रहस्यमयी, विचित्र और भयानक जीव :-

  1. जर्सी डेविल (Jersey Devil)
  2. लिजार्डमैन (Lizard Man)
  3. फ्लैटवुड मॉन्स्टर (Flat woods Monster)
  4. डोवर डीमन (Dover Demon)
  5. आउलमैन (Owlman)
  6. गॉटमैन (Goatman)
  7. कन्वै आईलैंड मॉन्स्टर (Canvey Island Monster)
  8. पोप लिक मॉन्स्टर (Pop Lick Monster)
  9. यति (Yeti)
  10. लोच मॉन्स्टर (Loch Monster)
  11. छुपाकाबरा (Chupacabra)
  12. मोथमैन (Mothman)
  13. परियाँ (Fairies)
  14. सिगबिन (Sigbin)

गोवर्धन पूजा - 2023 || Gowardhan Puja - 2023 ||

गोवर्धन पूजा (Gowardhan Puja)

गोवर्धन पूजा को अन्नकूट पूजा भी कहा जाता है। सामान्यतया यह पर्व दीपावली के दूसरे दिन मनाया जाता है। इस बार गोवर्धन पूजा 13 और 14 नवंबर दोनों दिन मनाई रही है। कार्तिक मास में हर साल शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को गोवर्धन पूजा मनाई जाती है। दिवाली के ठीक एक दिन बाद यह पर्व मनाया जाता है और इसके अगले दिन ही भाई दूज मनाया जाता है। गोवर्धन पूजा के दिन गोवर्धन भगवान की पूजा की जाती है और गिरिराज जी के साथ ही भगवान श्री कृष्ण की पूजा करने का विधान है। भारत के कई राज्यों में गोवर्धन पूजा को अन्नकूट भी कहा जाता है। 

गोवर्धन पूजा - 2023 || Gowardhan Puja - 2023 ||

गोवर्धन पूजा का हिन्दू धर्म में बेहद ही खास महत्व है। यह हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार हैजिसे लोग असीम श्रद्धा और विश्वास के भाव से मनाते हैं। इस दिन पूरे विधि-विधान से लोग गोवर्धन पूजा करते हैं। इस त्योहार को दिवाली के बाद कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा पर मनाते हैं। उत्तर प्रदेश में इस पर्व को बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है।. मान्यता है कि श्री कृष्ण भगवान ने देवराज इंद्र के अंहकार का नाश करने के लिए गोकुल निवासियों को गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के लिए प्रेरित किया था। मुख्य रूप से सुबह के समय ही गोवर्धन पूजा की जाती है। इस दिन गोबर से गोवर्धन पर्वत की रचना की जाती है। उसे पुष्प आदि से सजाते हैं। सुबह समय न मिल पाए तो लोग शाम में भी यह पूजा कर सकते हैं। यह पूजा भगवान श्री कृष्ण और प्रकृति को समर्पित है। 

गोवर्धन पूजा वाले दिन

गोवर्धन पूजा - 2023 || Gowardhan Puja - 2023 ||

गोवर्धन पूजा वाले दिन गोबर से घर के आंगन में गोवर्धन बनाकर उसे फूलों से सजाया जाता है। वहां दीप, जल, नैवेद्य, धूप, अगरबत्ती, फल, फूल आदि अर्पित किया जाता है। गोवर्धन जी की आकृति गोबर से एक लेटे हुए पुरुष के रूप में बनाई जाती है तथा बीच में दीपक रखा जाता है।पूजा के दौरान इसी दीपक में बताशे, दही, दूध, गंगाजल, शहद आदि डाला जाता है.।प्रसाद के तौर पर इन्हीं चीजों को सभी में बांट दिया जाता है। पूजा संपन्न होने के बाद लोग गोवर्धन जी की सात बार परिक्रमा करते हैं। परिक्रमा करते समय लोटे से पानी भी गिराया जाता है और जौ बोया जाता है।

गोवर्धन पूजा - 2023 || Gowardhan Puja - 2023 ||

 मान्यता है कि जो भी गोवर्धन पूजा पूरे श्रद्धा भाव से करता है, उसके घर में सुख-संपदा, धन, संतान की प्राप्ति होती है।