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सनातन नववर्ष संवत्सर २०८१

 सनातन नववर्ष संवत्सर २०८१

सनातन नववर्ष चैत्र माह की शुक्ल प्रतिपदा (प्रथम) तिथि को मनाया जाता हैं। अंग्रेजी कैलेंडर 2024 के अनुसार 09 अप्रैल को नववर्ष का प्रथम दिवस है। सनातन नववर्ष को नव संवत्सर, वर्ष प्रतिपदा, विक्रम संवत वर्षारंभ, युगादि आदि नामों से भी जाना जाता हैं। ज्योतिष गणना के अनुसार, सनातन नववर्ष का प्रथम दिन जिस वार पर पड़ता है पूरा वर्ष उस ग्रह का स्वामित्व माना जाता हैं। नववर्ष २०८१ मंगलवार से आरंभ हो रहा है, ऐसे में मंगल ग्रह इस पूरे वर्ष के स्वामी मानें जाएंगे।

सनातन नववर्ष संवत्सर २०८१

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का ऐतिहासिक महत्व

१. ब्रह्माजी द्वारा सृष्टि की रचना प्रारंभ

२. चारों युग सत, त्रेता, द्वापर, कलि का प्रथम दिन

३. चैत्र मास नवरात्रि का प्रथम दिन

४. रामायण काल में प्रभु श्री राम और महाभारत काल में पांडव युधिष्ठिर का राज्याभिषेक हुआ

सनातन नववर्ष संवत्सर २०८१

५. महर्षि गौतम जंयती

६. सम्राट विक्रमादित्य ने अपने राज्य की स्थापना की तथा वर्ष ५७ ईसा पूर्व में विक्रम संवत (पंचांग) आरंभ किया था।

विक्रम संवत = ईस्वी वर्ष + ५७

७. सम्राट शालिवाहन या कुषाण शासक कनिष्क द्वारा वर्ष ७८ ईस्वी में शक संवत (पंचांग) आरंभ किया गया। अंग्रेजों से स्वतंत्रता पश्चात भारत सरकार ने शक संवत (पंचांग) को भारत का आधिकारिक राष्ट्रीय कैलेंडर स्वीकार किया।

शक संवत = ईस्वी वर्ष - ७८

८.सिखों के द्वितीय गुरू श्री अंगद देव जी का जन्म दिवस

सनातन नववर्ष संवत्सर २०८१

९. झूलेलाल जयंती / चेटीचंड

सिंध राज्य में इस्लामी आक्रांता मिरखशाह का शासन था और वह गैर मुस्लिमों पर बहुत अत्याचार करता था, एक दिन उसने गैर मुस्लिमों को इस्लाम में परिवर्तित होने का आदेश जारी किया। सिंध के गैर मुस्लिमों ने ४० दिनों तक कठिन जप, तप और साधना की। तब सिंधु नदी से जल देवता वरुण एक विशाल मत्स्य पर बैठे हुए झूलेलाल रुप में प्रकट हुए और जनता को आश्वस्त किया कि वह जन्म लेकर मिरखशाह के अत्याचारों से मुक्ति दिलाएंगे। 

१०. महर्षि दयानंद सरस्वती द्वारा आर्य समाज की स्थापना

सनातन नववर्ष संवत्सर २०८१

सनातन नववर्ष का प्राकृतिक महत्व

१. वसंत ऋतु का आरंभ वर्ष प्रतिपदा से होता हैं जो उल्लास, उमंग, प्रसन्नता से पूर्ण तथा चारों दिशाओं में पुष्पों की सुगंध भरी होती हैं।

२. नक्षत्र शुभ स्थिति में होते हैं अर्थात किसी भी कार्य को आरंभ करने के लिए शुभ मुहूर्त होता है।

३. वर्ष प्रतिपदा चंद्रमा की कला का प्रथम दिवस है। जीवन के मुख्य आधार औषधियों और वनस्पतियों को रस चंद्रमा ही प्रदान करता है।

सनातन नववर्ष संवत्सर २०८१

४. उपज पकने का समय अर्थात किसान के परिश्रम का फल मिलने का समय।

सनातन नववर्ष के अवसर पर लोग एक दूसरे को तथा परिचित संबंधियों को नववर्ष की शुभकामनाएं एवं बधाइयां देते हैं। इस दिन घरों, प्रतिष्ठानों, पूजा स्थलों पर रंगोली, ऐपण, पत्तों की वंदनवार से सजाया जाता है। घरों की छत पर ध्वजारोहण होता है। इस दिन कुछह लोग पीले या भगवा वस्त्र धारण करते हैं। यह दिन ईश्वर का स्मरण करने का तथा माता पिता, गुरुजनों आदि का आशीर्वाद प्राप्त करने का है।

 इस दिन विभिन्न सांस्कृतिक, धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इस दिन समाज की भलाई के लिए भी कुछ अवश्य करना चाहिए।

सनातन नववर्ष संवत्सर २०८१

 इस दिन धर्म रक्षा, जीवन को उत्तम बनाने तथा समाज में योगदान देने हेतु नवीन प्रवृत्तियों को अपनाने तथा हानिकारक प्रवृत्तियां छोड़ने का संकल्प लेना चाहिए।

आज नवरात्रि का पहला दिन है

🙏🏻माँ शैलपुत्री🙏🏻

ज्योतिषी के अनुसार माँ शैलपुत्री चंद्रमा को दर्शाती हैं, इसलिए उनकी उपासना से चंद्रमा के द्वारा पड़ने वाले बुरे प्रभाव भी निष्क्रिय हो जाते हैं।

🙏🏻मंत्र

ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥

 🙏प्रार्थना

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।

वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

🙏स्तुति

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥🙏


औषधियों में विराजमान नवदुर्गा click here 

सभी पाठकों को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें.. 

1 जनवरी को क्या नया हो रहा है ?

संदेश को ध्यान से पढ़े सभी धर्म से जुड़े त्योहार को मनाये पर अपनी संस्कृति को ना भूलें। 

नववर्ष

1 जनवरी को क्या नया हो रहा है ?

न ऋतु बदली.. न मौसम
न कक्षा बदली... न सत्र
न फसल बदली...न खेती
न पेड़ पौधों की रंगत
न सूर्य चाँद सितारों की दिशा
ना ही नक्षत्र


नया केवल एक दिन ही नहीं होता..

कुछ दिन तो नई अनुभूति होनी ही चाहिए। आखिर हमारा देश त्योहारों का देश है। ईस्वी संवत का नया साल 1 जनवरी को और भारतीय नववर्ष (विक्रमी संवत) चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है। आईये देखते हैं दोनों का तुलनात्मक अंतर: 


1. प्रकृति

1 जनवरी को कोई अंतर नहीं जैसा दिसम्बर वैसी जनवरी। 

और 

चैत्र मास में चारो तरफ फूल खिल जाते हैं, पेड़ो पर नए पत्ते आ जाते हैं। चारो तरफ हरियाली मानो प्रकृति नया साल मना रही हो। 

2. वस्त्र

दिसम्बर और जनवरी में वही वस्त्र, कंबल, रजाई, ठिठुरते हाथ पैर.. 

और 

चैत्र मास में सर्दी जा रही होती है, गर्मी का आगमन होने जा रहा होता है। 

3. विद्यालयों का नया सत्र

दिसंबर जनवरी वही कक्षा कुछ नया नहीं.. 

जबकि मार्च अप्रैल अर्थात चैत्र में स्कूलो का रिजल्ट आता है नई कक्षा नया सत्र यानि विद्यालयों में नया साल। 

4. नया वित्तीय वर्ष

दिसम्बर-जनबरी में कोई खातो की क्लोजिंग नहीं होती.. 

जबकि 31 मार्च को बैंको की क्लोजिंग होती है। नए वही खाते खोले जाते हैं। सरकार का भी नया सत्र शुरू होता है। 

5. कलैण्डर

जनवरी में नया कलैण्डर आता है.. 

चैत्र में नया पंचांग आता है। उसी से सभी भारतीय पर्व, विवाह और अन्य महूर्त देखे जाते हैं। इसके बिना हिन्दू समाज जीबन की कल्पना भी नहीं कर सकता इतना महत्वपूर्ण है ये कैलेंडर यानि पंचांग। 

6. किसानो का नया साल

दिसंबर-जनवरी में खेतो में वही फसल होती है.. 

जबकि मार्च-अप्रैल में फसल कटती है नया अनाज घर में आता है, तो किसानों का उत्साह के साथ नया वर्ष मनता है। 

7. पर्व मनाने की विधि

31 दिसम्बर की रात नए साल के स्वागत के लिए लोग जमकर मदिरा पान करते है, हंगामा करते हैं, रात को पीकर गाड़ी चलने से दुर्घटना की सम्भावना, रेप जैसी वारदात, पुलिस प्रशासन बेहाल और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का विनाश.. 

जबकि भारतीय नववर्ष व्रत से प्रारंभ होता है, पहला नवरात्र होता है। घर घर में माता रानी की पूजा होती है। शुद्ध सात्विक वातावरण बनता है। 

8. ऐतिहासिक महत्त्व

1 जनवरी का कोई ऐतेहासिक महत्व नहीं है.. 

जबकि चैत्र प्रतिपदा के दिन महाराज विक्रमादित्य द्वारा विक्रमी संवत् की शुरुआत, भगवान झूलेलाल का जन्म, नवरात्रे प्रारंम्भ, ब्रहम्मा जी द्वारा सृष्टि की रचना, भगवान श्रीराम जी का राज्याभिषेक, युधिष्ठर जी का राज्याभिषेक,पूजनीय केशव राव बलिराम हेडगेवार जी का जन्म दिवस इत्यादि का संबंध इस दिन से है।


अंग्रेजी कलेंडर की तारीख और अंग्रेज मानसिकता के लोगों के अलावा कुछ नहीं बदला.. 

अपना नव संवत् ही नया वर्ष है। 

नववर्ष

जब ब्रह्माण्ड से लेकर सूर्य चाँद की दिशा, मौसम, फसल, कक्षा, नक्षत्र, पौधों की नई पत्तिया, किसान की नई फसल, विद्यार्थी की नई कक्षा, मनुष्य में नया रक्त संचरण आदि परिवर्तन होते है। जो विज्ञान पर आधारित है। 

विज्ञान आधारित भारतीय काल गणना को पहचाने।

"कैलेंडर को अवश्य बदलें, पर अपनी संस्कृति को याद रखें। 

हम 1 जनवरी को नव वर्ष की बधाई देते हैं, तो हिन्दू नव वर्ष के महत्व को भी अवश्य जानें।

सनातन नववर्ष संवत्सर २०८० || हिन्दू नववर्ष 2023 ||

सनातन नववर्ष संवत्सर २०८०

सनातन नववर्ष चैत्र माह की शुक्ल प्रतिपदा (प्रथम) तिथि को मनाया जाता हैं। अंग्रेजी कैलेंडर 2023 के अनुसार २१ मार्च को रात्रि १० बजकर ५३ मिनट पर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि आरंभ होगी तथा २२ मार्च को नववर्ष का प्रथम दिवस है। सनातन नववर्ष को नव संवत्सर, वर्ष प्रतिपदा, विक्रम संवत वर्षारंभ, युगादि आदि नामों से भी जाना जाता हैं। वैदिक पंचांग गणना के अनुसार नव संवत्सर २०८० का नाम पिंगल है, वर्ष के आरंभ में 'नल' नाम का संवत्सर रहेगा और पिंगल का प्रभाव २४ अप्रैल से आरंभ होगा। ज्योतिष गणना के अनुसार, सनातन नववर्ष का प्रथम दिन जिस वार पर पड़ता है पूरा वर्ष उस ग्रह का स्वामित्व माना जाता हैं। नववर्ष २०८० बुधवार से आरंभ हो रहा है, ऐसे में बुध ग्रह इस पूरे वर्ष के स्वामी मानें जाएंगे।

सनातन नववर्ष संवत्सर २०८० || हिन्दू नववर्ष 2023 ||

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का ऐतिहासिक महत्व

१. ब्रह्माजी द्वारा सृष्टि की रचना प्रारंभ
२. चारों युग सत, त्रेता, द्वापर, कलि का प्रथम दिन
३. चैत्र मास नवरात्रि का प्रथम दिन
४. रामायण काल में प्रभु श्री राम और महाभारत काल में पांडव युधिष्ठिर का राज्याभिषेक हुआ
५. महर्षि गौतम जंयती
६. सम्राट विक्रमादित्य ने अपने राज्य की स्थापना की तथा वर्ष ५७ ईसा पूर्व में विक्रम संवत (पंचांग) आरंभ किया था।
विक्रम संवत = ईस्वी वर्ष + ५७
७. सम्राट शालिवाहन या कुषाण शासक कनिष्क द्वारा वर्ष ७८ ईस्वी में शक संवत (पंचांग) आरंभ किया गया। अंग्रेजों से स्वतंत्रता पश्चात भारत सरकार ने शक संवत (पंचांग) को भारत का आधिकारिक राष्ट्रीय कैलेंडर स्वीकार किया।
शक संवत = ईस्वी वर्ष - ७८
८.सिखों के द्वितीय गुरू श्री अंगद देव जी का जन्म दिवस
९. झूलेलाल जयंती / चेटीचंड

सिंध राज्य में इस्लामी आक्रांता मिरखशाह का शासन था और वह गैर मुस्लिमों पर बहुत अत्याचार करता था, एक दिन उसने गैर मुस्लिमों को इस्लाम में परिवर्तित होने का आदेश जारी किया। सिंध के गैर मुस्लिमों ने ४० दिनों तक कठिन जप, तप और साधना की। तब सिंधु नदी से जल देवता वरुण एक विशाल मत्स्य पर बैठे हुए झूलेलाल रुप में प्रकट हुए और जनता को आश्वस्त किया कि वह जन्म लेकर मिरखशाह के अत्याचारों से मुक्ति दिलाएंगे। 

१०. महर्षि दयानंद सरस्वती द्वारा आर्य समाज की स्थापना

सनातन नववर्ष संवत्सर २०८० || हिन्दू नववर्ष 2023 ||

सनातन नववर्ष का प्राकृतिक महत्व

१. वसंत ऋतु का आरंभ वर्ष प्रतिपदा से होता हैं जो उल्लास, उमंग, प्रसन्नता से पूर्ण तथा चारों दिशाओं में पुष्पों की सुगंध भरी होती हैं।

२. नक्षत्र शुभ स्थिति में होते हैं अर्थात किसी भी कार्य को आरंभ करने के लिए शुभ मुहूर्त होता है।

३. वर्ष प्रतिपदा चंद्रमा की कला का प्रथम दिवस है। जीवन के मुख्य आधार औषधियों और वनस्पतियों को रस चंद्रमा ही प्रदान करता है।

४. उपज पकने का समय अर्थात किसान के परिश्रम का फल मिलने का समय।

सनातन नववर्ष के अवसर पर लोग एक दूसरे को तथा परिचित संबंधियों को नववर्ष की शुभकामनाएं एवं बधाइयां देते हैं। इस दिन घरों, प्रतिष्ठानों, पूजा स्थलों पर रंगोली, ऐपण, पत्तों की वंदनवार से सजाया जाता है। घरों की छत पर  ध्वजारोहण होता है। इस दिन कुछह लोग पीले या भगवा वस्त्र धारण करते हैं। यह दिन ईश्वर का स्मरण करने का तथा माता पिता, गुरुजनों आदि का आशीर्वाद प्राप्त करने का है।

 इस दिन विभिन्न सांस्कृतिक, धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इस दिन समाज की भलाई के लिए भी कुछ अवश्य करना चाहिए।

सनातन नववर्ष संवत्सर २०८० || हिन्दू नववर्ष 2023 ||

 इस दिन धर्म रक्षा, जीवन को उत्तम बनाने तथा समाज में योगदान देने हेतु नवीन प्रवृत्तियों को अपनाने तथा हानिकारक प्रवृत्तियां छोड़ने का संकल्प लेना चाहिए।

सभी पाठकों को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें.. 

चैत्र नवरात्र एवं हिंदू नव वर्ष 2079

 "चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का ऐतिहासिक महत्व"

    🚩नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं🚩

वैदिक नववर्ष, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रमी संवत् 2079 (2 अप्रैल, 2022)" की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ 

नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं (Hindu New Year)

चैत्र शुक्लपक्ष की प्रतिपदा तिथि से नया हिंदू नववर्ष प्रारंभ हो जाता है। 2 अप्रैल, शनिवार से नवसंवत्सर 2079 का शुभारंभ हो रहा है। चैत्र का महीना हिंदू कैलेंडर का पहला महीना माना जाता है। चैत्र प्रतिपदा से नवरात्रि का पर्व भी आरंभ होता है। महाराष्ट्र में हिंदू नववर्ष को गुड़ी पड़वा के नाम से मनाया जाता है। हेमाद्रि के ब्रह्म पुराण के अनुसार ब्रह्मा जी ने पृथ्वी की रचना चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा के दिन की थी। इसलिए पंचांग के अनुसार हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को नववर्ष शुरू हो जाता है। इसे नव संवत्सर भी कहा जाता है। इसकी शुरुआत शकरि महाराज विक्रमादित्य ने की थी, इसलिए इसे विक्रम संवत भी कहा जाता है। नव सवंत्सर 2079 के आगमन और नया हिंदू वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं ..

आइये जानते हैं चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का ऐतिहासिक महत्व :-

  • इसी दिन सृष्टि संवत मानव की उत्पत्ति 1,96,08,53,123 वर्ष पूर्व हुई थी। 
  • मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का राज्याभिषेक भी इसी दिन हुआ था।    
  • महाराज युधिष्ठिर का राज्याभिषेक इसी दिन हुआ।
  • 2079 वर्ष पूर्व सम्राट विक्रमादित्य ने इसी दिन अपना राज्य स्थापित किया। उसी दिन से प्रसिद्ध विक्रमी संवत् प्रारंभ हुआ।
  • 148 वर्ष पूर्व महर्षि दयानंद सरस्वती जी ने इसी दिन को आर्य समाज की स्थापना दिवस के रूप में चुना। आर्य समाज वेद प्रचार का महान कार्य करने वाला एकमात्र संगठन है।
  • विक्रमादित्य की भांति शालिवाहन ने हूणों को परास्त कर दक्षिण भारत में श्रेष्ठतम राज्य स्थापित करने हेतु यही दिन चुना।
  • राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार जी का जन्म भी 134 वर्ष पूर्व इसी दिन हुआ था।
  • अंग्रजी कैलेंडर से 57 साल आगे विक्रम संवत- राजा विक्रमादित्य के शासनकाल में सबसे बड़े खगोल शास्त्री वराहमिहिर थे, जिनकी सहायता से संवत के प्रसार में मदद मिली। ये अंग्रेजी कैलेंडर से 57 वर्ष आगे है, 2022+57= 2079 विक्रम संवत चल रहा है। 

नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं (Hindu New Year)

इसके साथ ही जानते हैं चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (वैदिक नववर्ष) का प्राकृतिक महत्व :-

  • वसंत ऋतु का आरंभ वर्ष प्रतिपदा से ही होता है, जो उल्लास, उमंग, खुशी तथा चारों तरफ पुष्पों की सुगंध से भरी होती है।
  • फसल पकने का प्रारंभ यानि किसान की मेहनत का फल मिलने का भी यही समय होता है।

देश भर की आर्य समाज मंदिरों में इस दिन विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

       🚩सभी भारतवासियों को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं🚩

English Translate 

"Historical Significance of Chaitra Shukla Pratipada"

नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं (Hindu New Year)

Wishing you all a very Happy Vedic New Year, Chaitra Shukla Pratipada Vikrami Samvat 2079 (April 2, 2022)"

The new Hindu New Year begins from the Pratipada date of Chaitra Shukla Paksha. Navsamvatsar 2079 is starting from Saturday, April 2. The month of Chaitra is considered to be the first month of the Hindu calendar. The festival of Navratri also starts from Chaitra Pratipada. In Maharashtra, the Hindu New Year is celebrated as Gudi Padwa. According to Brahma Purana of Hemadri, Brahma ji created the earth on the day of Pratipada of Shukla Paksha of Chaitra month. Therefore, according to the Panchang, every year the new year begins on the Pratipada date of Shukla Paksha of Chaitra month. It is also called Nav Samvatsar. It was started by Shakri Maharaj Vikramaditya, hence it is also called Vikram Samvat. Happy New Year 2079 and New Hindu Year..

Let us know the historical importance of Chaitra Shukla Pratipada :-

  • On this day, the creation of the human world took place 1,96,08,53,123 years ago.
  • The coronation of Maryada Purushottam Shri Ram also took place on this day.
  • The coronation of Maharaja Yudhishthira took place on this day.
  • 2079 years ago, Emperor Vikramaditya established his kingdom on this day. The famous Vikrami Samvat started from that day.
  • 148 years ago, Maharishi Dayanand Saraswati ji chose this day as the foundation day of Arya Samaj. Arya Samaj is the only organization doing the great work of propagating Vedas.
  • Like Vikramaditya, Shalivahana chose this day to defeat the Hunas and establish the best state in South India.
  • Rashtriya Swayamsevak Sangh founder Dr. Keshavrao Baliram Hedgewar ji was also born on this day 134 years ago.
  • Vikram Samvat 57 years ahead of the English calendar - Varahamihira was the greatest astronomer during the reign of King Vikramaditya, whose help helped in the spread of the Samvat. This is 57 years ahead of the English calendar, 2022 + 57 = 2079 Vikram Samvat is going on.

नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं (Hindu New Year)

Along with this, know the natural importance of Chaitra Shukla Pratipada (Vedic New Year) :-

  • The spring season begins with Pratipada, which is full of gaiety, ecstasy, happiness and the fragrance of flowers all around.
  • This is also the time to get the fruits of the hard work of the farmer.

Special programs are being organized on this day in Arya Samaj temples across the country.

       Happy New Year 

आज नवरात्रि का पहला दिन है

🙏🏻माँ शैलपुत्री🙏🏻
ज्योतिषी के अनुसार माँ शैलपुत्री चंद्रमा को दर्शाती हैं, इसलिए उनकी उपासना से चंद्रमा के द्वारा पड़ने वाले बुरे प्रभाव भी निष्क्रिय हो जाते हैं।
🙏🏻मंत्र
ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
 🙏प्रार्थना
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
🙏स्तुति
या देवी सर्वभू‍तेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥🙏

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Happy New Year ..नव वर्ष 2021 मंगलमय हो

बाय  बाय 2020 वेलकम 2021

Happy New Year 2021

 स्वागतम नव वर्ष

आज नए साल का प्रथम दिन है आप सभी को नूतन वर्ष 20 21 की अशेष बधाइयां। याद कीजिये, साल 2019 की 31 दिसंबर की रात घरों से लेकर शहर की सड़कों तक जमकर उल्लास छाया था। सभी लोगों ने हर बार की तरह नए साल 2020 के आने की खुशी मनाई थी। ईश्वर से कामना हुई थी की सभी के जीवन में सुख- समृद्धि आए। समाज में  संस्कार और भी अधिक पल्लवित, पोषित हों। लेकिन हुआ ठीक उल्टा।

Happy New Year 2021

कोविड-19 की 2020 में ऐसी महामारी आई कि जीवन में हम सभी को प्रथम बार लॉक डाउन का सामना करना पड़ा। लॉक डाउन शब्द ही भयावह लगता है। साल 2020 ने इतिहास में खुद को दर्ज कराया है क्योंकि इस साल इंसान के जीने की राह में बेशुमार मुश्किलें खड़ी हुई। कोरोनावायरस संक्रमण के चलते अर्थव्यवस्थाएं फेल हो गई, बहुत से लोगों के रोजगार छिन गए। इसके अलावा बाढ़, तूफान, और भूकंप के झटके भी हमें डराते रहे। पड़ोसी मुल्क से सीमा पर खूनी झड़प हुई।

फिर भी प्राथमिक से उच्च  तकनीक, के हर क्षेत्र में हमने नए आयाम गढ़े। सब काम ऑनलाइन हो गए। यहां तक कि इतिहास में पहली बार क्लासरूम को भी जेब में कर दिया गया।

नए साल में नए जोश, नई उम्मीदों और जिंदगी के नए आयाम की सभी ने अपेक्षा कर रखी है। इस साल पूरी दुनिया ने योग और आयुर्वेद की महत्ता समझी है। आज अपनी जिजीविषा व अनुशासन के चलते देश में धीरे-धीरे चीजें पटरी पर आ गई है। उम्मीद है नया वर्ष हम सभी के जीवन में खूब चमक  बिखेरेगा। आइए एक नए जुनून, नए उत्साह, नई आशा और नए जज्बे के साथ स्वागत करें नव वर्ष 2021 का।

Happy New Year 2021

आप सभी के लिए नव वर्ष 2021 मंगलमय हो।

यही आशा है, यही विश्वास है और यही ईश्वर से प्रार्थना है।

🍁🍁🌹🌹एक खूबसूरती, एक ताजगी, 

एक सपना, एक सच्चाई,

 एक कल्पना, एक एहसास,

 एक आस्था, एक विश्वास,

 यही है एक अच्छे साल की शुरुआत🍁🍁🌹🌹

English Translate

Happy New Year 2021

Today is the first day of the new year. Special greetings to all of you for the year 20 21. Remember, the night of 31st December of 2019, from the houses to the city streets, there was a lot of gaiety. Everyone celebrated the coming of the new year 2020 like every time. God wished that happiness and prosperity should come in everyone's life. Cultures flourish in society even more. But the opposite happened.

Happy New Year 2021

 In 2020, an epidemic of Covid-19 occurred that for the first time in life we ​​all faced lock down. The word lock down sounds terrible. The year 2020 has recorded itself in history because this year created immense difficulties in the way of human life. Due to coronavirus infection, economies failed, many people lost their jobs. In addition, floods, hurricanes, and earthquake tremors also frightened us. There was a bloody clash on the border with the neighboring country.

Happy New Year 2021

 Nevertheless, we created new dimensions in every field, from primary to high technology. All work went online. Even for the first time in history, classrooms were pocketed.

 In the new year, everyone has expected new enthusiasm, new expectations and a new dimension of life. This year, the whole world has understood the importance of Yoga and Ayurveda. Today, things have slowly come back on track in the country due to their livelihood and discipline. Hopefully, the new year will shine a lot in the lives of all of us. Let us welcome the New Year 2021 with a new passion, new enthusiasm, new hope and new spirit.

 Happy New Year 2021 to all of you.

 This is hope, this is faith and this is prayer to God.

Happy New Year 2021