बसंत ऋतु की एक सुहानी सुबह
हमारा देश विविधताओं वाला देश है। यहां का प्रत्येक मौसम अपने आप में विशिष्ट होता है। यहां हर ऋतु में सुबह की सैर का अपना अलग आनंद होता है। ग्रीष्म ऋतु में जहां लोग सुबह की सैर का आनंद इसके कूलिंग इफ़ेक्ट के कारण लेते हैं, वहीं शीत ऋतु में सुबह के समय जब ओस की बूंदे बालों से टकराती हैं तो हृदय को एक असीम आनंद से भर देती हैं। वर्षा ऋतु में बारिश की रिमझिम फुहारें तन और मन को आह्लादित करती हैं।
ऋतुराज बसंत की प्रतीक्षा वर्ष भर लोग करते हैं। बसंत ऋतु में सुबह के समय कोयल के मधुर गीत से वतावरण गुंजायमान होता है। यह मधुर ध्वनि कानों से होते हुए सभी के दिलो दिमाग को तरोताजा कर देती हैं। इस मौसम में प्रकृति अपने पूर्ण प्रस्फुटन पर होती है। हर जगह फूल ही फूल खिले होते हैं। इन फूलों की सुषमा को देखकर सबका तन और मन प्रफुल्लित हो जाता है।
कुछ सुगंधित फूल वहां की आबोहवा को महकाते रहते हैं और सुबह की सैर का मजा कई गुना कर देते हैं। कभी कभी पेड़ की सबसे ऊंची चोटी पर मोर को बैठे देखकर मेरा मन-मयूर भी नृत्य करने लगता है। उस मोर को अपनी चोंच से अपने पंखों को साफ करते देखना मन में एक सुखद अनुभूति जगाता है। कदाचित मोर को पेड़ की सबसे ऊंची चोटी बेहद पसंद है और इसलिए वह सबसे ऊँची छोटी पर बैठकर दुनिया-जहान को निहारता रहता है। पेड़ की सबसे ऊंची चोटी पर बैठे मोर को देखकर मेरी छोटी बेटी अति प्रसन्न होती है और उत्साह में उसके मुंह से निकलता है
"मोर ऑन हिज अड्डा।"
अंत मे मैं सभी से यही कहना चाहूंगी कि प्रातः काल की सैर हमारे तन और मन दोनों को स्वस्थ रखने में बहुत सहायक है। प्रकृति के साहचर्य की अनुभूति जितनी प्रातः काल होती है, उतनी अन्य समय पर नहीं होती। इसलिए जो दिनचर्या "अर्ली टू बेड अर्ली टू राइज" से बदलकर लेट टू बेड लेट टू राइज हो गई है, इसको पुनः बदलकर अर्ली टू बेड अर्ली टू राइज करें और सुबह के सुहाने मौसम का लुत्फ़ उठाएं और साथ ही अपने तन और मन को चुस्त-दुरुस्त बनाए रखें।
आज यहीं विराम देती हूं, फिर मिलते हैं एक नई ओस की बूंद से, फिर एक नई सुबह।



