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मकर संक्रांति २०२५ || Makar Sankranti 2025

 मकर संक्रांति (Makar Sankranti)

सर्वप्रथम आप सभी को मकर संक्रांति पर्व की अनेक बधाई।

आज 14 जनवरी को, मकर संक्रांति का पर्व पुरे देश भर में बड़े ही जोश और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस बार तो प्रयागराज में महाकुंभ का भव्य आयोजन पौष पूर्णिमा के साथ शुरू हो गया है। मकर संक्रांति पर महाकुंभ का पहला अमृत स्नान है। 

मकर संक्रांति २०२५ || Makar Sankranti 2025

  हर पतंग जानती है,
अंत में कचरे मे जाना है। 
लेकिन उसके पहले हमें,
आसमान छूकर दिखाना है ।
" बस ज़िंदगी भी यही चाहती है "

मकर सक्रांन्ति पर हार्दिक शुभकामनाएं
✨✨✨✨✨✨✨✨✨
हमारा देश सांस्कृतिक रूप से विश्व के सर्वाधिक सशक्त देशों में से एक है। हमारे देश मे मौसम से जुड़े बहुत त्योहार हैं और इन सभी त्योहारों का अपना एक विशेष महत्त्व है। इन्हें मनाने का तरीका भी अलग -अलग है। नए साल के पहले महीने जनवरी में मकर संक्रांति के महा पर्व की शुरुआत होती है। किसी न किसी रूप में लोग अपनी-अपनी मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति को बहुत हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। वहीं इस खास दिन पर तिल, गुड़ के पकवानों का आनंद लिया जाता है साथ ही आज के दिन स्नान का भी विशेष महत्व होता है। मकर संक्रांति का महापर्व सिर्फ उत्तर भारत में ही नहीं, बल्कि दक्षिण भागों के साथ अलग-अलग राज्यों में अनेक नामों से मनाया जाता है।  क्या आप जानते है कि हम सभी मकर संक्रांति को क्यों मनाते है? अगर नहीं जानते तो इसका कारण समझते हैं।
मकर संक्रांति २०२५ || Makar Sankranti 2025

दरअसल यह खगोल से जुड़ा हुआ है.  मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से निकल अपने पुत्र शनि की राशि मकर में प्रवेश करते हैं। कहा जाता है कि इस खास दिन पर सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने के लिए खुद उनके घर में प्रवेश करते है। इस दौरान एक संक्रांति से दूसरी संक्रांति के बीच का समय ही सौर मास है। वैसे तो सूर्य संक्रांति 12 हैं, लेकिन इनमें से चार संक्रांति  बेहद अहम हैं, जिनमें मेष, कर्क, तुला, मकर संक्रांति हैं। यही कारण है कि इस खास दिन को हम सभी मकर संक्रांति के नाम से जानते है और इसे पर्व के रूप में मनाते है । आज मकर संक्रांति के पर्व की तिथि है। 

देश में मकर संक्रांति के पर्व को कई नामों से जाना जाता है। पंजाब और जम्‍मू-कश्‍मीर के लोग में इसे लोहड़ी के नाम से बड़े पैमाने पर मनाते हैं। लोहड़ी का त्‍योहार मकर संक्रांति के एक दिन पहले मनाया जाता है। जब सूरज ढल जाता है तब घरों के बाहर बड़े-बड़े अलाव जलाए जाते हैं और स्‍त्री-पुरुष,घर के बच्चे  सज-धजकर नए-नए कपड़े पहनकर  जलते हुए अलाव के चारों ओर भांगड़ा डांस  करते हैं और अग्नि को मेवा, तिल, गजक, चिवड़ा आदि की आहुति भी देते हैं। सभी एक-दूसरे को लोहड़ी की शुभकामनाएं देते हुए आपस में भेंट बांटते हैं और प्रसाद बाटते  हैं। प्रसाद में तिल, गुड़, मूंगफली, मक्‍का और गजक होती हैं।
मकर संक्रांति २०२५ || Makar Sankranti 2025

मकर संक्रांति को कई अन्य नामों से भी जाना जाता है. जैसे-  पंजाब में माघी, हिमाचल प्रदेश में माघी साजी, जम्मू में माघी संग्रांद , हरियाणा में सकरत, मध्य भारत में सुकरत, तमिलनाडु में पोंगल, गुजरात के साथ उत्तर प्रदेश में उत्तरायण, ओडिशा में मकर संक्रांति, असम में माघ बिहू, अन्य नामों से संक्रांति को मनाते है। 

वहीं इस खास दिन पर लोग कामना करते हुए  सूर्य को अर्घ्य देते  हैं,भोग लगाते है जिसमे चावल, दाल, गुड़, तिल, रेवड़ी आदि चढ़ाते हैं। इस शुभ  दिन लोग पतंग उड़ाते हैं। दरअसल मकर संक्रांति एक ऐसा दिन है, जब धरती पर एक अच्छे और शुभ दिन की शुरुआत होती है। ऐसा इसलिए कि सूर्य दक्षिण के बजाय अब उत्तर को गमन करने लग जाता है. जब तक सूर्य पूर्व से दक्षिण की ओर गमन करता है तब तक उसकी किरणों का असर खराब माना गया है, लेकिन जब वह पूर्व से उत्तर की ओर गमन करते लगता है तब उसकी किरणें सेहत ,सुख और शांति को बढ़ाती हैं।
मकर संक्रांति २०२५ || Makar Sankranti 2025
आज के दिन तिल, गुड़, मूंगफली, लाई और गजक के साथ ही बिहार में दही चूड़ा और उत्तर प्रदेश में खिचड़ी खाने का प्रचलन है। इस भोजन पीछे भी कई धार्मिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक कारण हैं। 

मकर संक्रांति पर खिचड़ी क्यों बनाई जाती है?

मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाने की परंपरा कई धार्मिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक कारणों से जुड़ी हुई है। खिचड़ी को सूर्य और शनि गृह से जुड़ा हुआ माना जाता है। कहते हैं कि इस दिन खिचड़ी खाने से घर में सुख-समृद्धि आती है। खिचड़ी दाल, चावल और सब्जियों से मिलकर बनती है, जो संतुलित और पौष्टिक आहार है। सर्दियों में शरीर को गर्म और ऊर्जा देने वाला भोजन माना जाता है। खिचड़ी के साथ तिल-गुड़ का सेवन किया जाता है, जो पाचन और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। मकर संक्रांति पर खिचड़ी दान करना बहुत शुभ माना जाता है। गंगा स्नान और खिचड़ी दान का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में भी है।
मकर संक्रांति २०२५ || Makar Sankranti 2025
यह पर्व जनवरी माह की 14 तारीख को मनाया जाता है। चुकी यह त्यौहार सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के दिन मनाया जाता है और सूर्य सामान्यता 12, 13, 14 या 15 जनवरी में से किसी एक दिन मकर राशि में प्रवेश करता है, तो कभी-कभी यह त्यौहार 12, 13 या 15 तारीख को भी मनाया जाता है। इस बार भी यह पर्व 14 को अर्थात आज ही मनाया जाएगा।
मकर संक्रांति २०२५ || Makar Sankranti 2025

मकर संक्रांति के शुभ दिन पर यदि पवित्र नदी गंगा, यमुना, गोदावरी, कृष्णा और कावेर में कोई डुबकी लगता है, तो वह अपने सभी अतीत और वर्तमान पापों को धो देता है और आपको एक स्वस्थ, समृद्ध और खुशहाल  जीवन प्रदान करता है। मकर संक्रांति में गुड़, तेल, कंबल, फल, छाता आदि दान करने से लाभ मिलता है।
एक बार पुनः आप सभी को मकर संक्रांति पर्व की हार्दिक शुभकामनायें। 
आप सभी खुश रहें और स्वस्थ रहें।

 Happy Makar Sankranti

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कार्तिक पूर्णिमा || Kartik Purnima 2024 || देव दीपावली || गुरु पर्व

 कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima)

हिंदू धर्म में पूर्णिमा का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। हिंदू धर्म में हर साल 12 पूर्णिमा होती हैं, जो हर महीनें आती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है, तब इनकी संख्या बढ़कर 13 हो जाती है। कार्तिक महीने में आने वाली पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा, त्रिपुरी पूर्णिमा या गंगा स्नान की पूर्णिमा भी कहते हैं। इस दिन "देव दिवाली" मनाई जाती है। इस दिन को "गुरु पर्व" भी कहा जाता है। इस वर्ष १५ नवंबर आज के दिन "देव दिवाली" का पर्व मनाया जा रहा है। 

कार्तिक पूर्णिमा || Kartik Purnima 2024 || देव दीपावली || गुरु पर्व

कार्तिक पूर्णिमा के दिन क्यों मनाई जाती है देव दीपावली?

दीपावली के ठीक 15 दिन बाद और कार्तिक पूर्णिमा के दिन "देव दीपावली" का पर्व मनाया जाता है। देव दिवाली के दिन काशी और गंगा घाटों पर विशेष उत्सवों के आयोजन किए जाते हैं और गंगा किनारे खूब दीप प्रज्जवलित किए जाते हैं। देव दिवाली मनाने को लेकर ऐसी मान्यता है कि इस दिन देवी-देवता भी स्वर्गलोक से धरती पर आते हैं और दिवाली का पर्व मनाते हैं। 

कार्तिक पूर्णिमा || Kartik Purnima 2024 || देव दीपावली || गुरु पर्व

पौराणिक कथा के अनुसार, त्रिपुरासुर नाम के एक राक्षस ने अपने आतंक से धरतीलोक पर मानवों और स्वर्गलोक में सभी देवताओं को त्रस्त कर दिया था। सभी देवतागण त्रिपुरासुर से परेशान हो गए थे। सभी ने भगवान शिव से त्रिपुरासुर का अंत करने की प्रार्थना की। भगवान शिव ने कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही त्रिपुरासुर राक्षस का वध किया था। त्रिपुरासुर के अंत के बाद उसके आंतक से मुक्ति मिलने पर सभी देवतागण प्रसन्न हुए और उन्होंने स्वर्ग में दीप जलाएं। इस घटना के बाद से ही कार्तिक मास की पूर्णिमा के दिन को "देव दीपावली" कहा जाने लगा। 

इसके साथ ही इस दिन को त्रिपुरासुर नामक असुर का अंत होने के कारण इस दिन को त्रिपुरी पूर्णिमा भी कहते हैं। इसी के बाद से भगवान शिव को त्रिपुरारी के रूप में पूजा जाने लगा था।

कार्तिक पूर्णिमा के दिन क्यों मनाया जाता है गुरु पर्व?

कार्तिक पूर्णिमा || Kartik Purnima 2024 || देव दीपावली || गुरु पर्व

कार्तिक पूर्णिमा को सिख सम्प्रदाय में प्रकाशोत्सव के रूप में मनाया जाता है। सिख धर्म को मानने वाले कार्तिक पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं, क्योंकि इस दिन उनके संस्थापक गुरू नानक देव का जन्म हुआ था। 

इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा को बैकुण्ठ धाम में देवी तुलसी प्रकट हुई थीं और कार्तिक पूर्णिमा को ही देवी तुलसी ने पृथ्वी पर जन्म लिया था। 

सभी पाठकों को कार्तिक पूर्णिमा, गुरुपूर्णिमा और देव दिवाली की हार्दिक शुभकामनायें एवं बधाइयाँ !!

अक्षय नवमी (Akshay Navami) / आंवला नवमी (Amla Navami) 2024

अक्षय नवमी (आंवला नवमी)

अक्षय नवमी का त्यौहार कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अर्थात दीपावली के 8 दिन बाद मनाई जाती है। इस बार अक्षय नवमी आज 10.11.2024 है। इस दिन आंवला के पेड़ की पूजा की जाती है, अतः इसे आंवला नवमी भी कहते हैं।

अक्षय नवमी (Akshay Navami) / आंवला नवमी (Amla Navami) 2024

अक्षय नवमी पर लोग स्नान, दान, पूजा, पाठ करते हैं। अक्षय नवमी के दिन आंवला के पेड़ की पूजा के साथ भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन आंवला के पेड़ के नीचे भोजन बनाकर भगवान विष्णु को उसका भोग लगाकर स्वयं भी यह भोजन प्रसाद के रूप में ग्रहण करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।          

आंवला को अमरता का फल माना जाता है। कहा जाता है कि जो इंसान अक्षय नवमी के दिन आंवले के पेड़ के नीचे बैठ कर भोजन करता है, उसे अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।

अक्षय नवमी (Akshay Navami) / आंवला नवमी (Amla Navami) 2024

कैसे शुरू हुआ यह पर्व 

आंवला नवमी पर आंवले के वृक्ष की पूजा और इसके वृक्ष के नीचे भोजन करने की प्रथा की शुरुआत करने वाली माता लक्ष्मी मानी जाती हैं। प्रचलित कथा के अनुसार एक बार माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करने आईं। रास्ते में भगवान विष्णु और शिव की पूजा एक साथ करने की उनकी इच्छा हुई। लक्ष्मी मां ने विचार किया कि एक साथ विष्णु और शिव की पूजा कैसे हो सकती है। तभी उन्हें ख्याल आया कि तुलसी और बेल के गुण एक साथ आंवले में पाया जाता है। तुलसी भगवान विष्णु को प्रिय है और बेल शिव को। आंवले के वृक्ष को विष्णु और शिव का प्रतीक चिह्न मानकर मां लक्ष्मी ने आंवले के वृक्ष की पूजा की। पूजा से प्रसन्न होकर विष्णु और शिव प्रकट हुए। लक्ष्मी माता ने आंवले के वृक्ष के नीचे भोजन बनाकर विष्णु और भगवान शिव को भोजन कराया। इसके बाद स्वयं ने भोजन किया। जिस दिन यह घटना हुई उस दिन कार्तिक शुक्ल नवमी थी तभी से यह परम्परा चली आ रही है।

ब्लॉग के सभी पाठकों को आंवला नवमी की हार्दिक शुभकामनायें। 
श्री हरि की कृपा सभी पर बनी रहे, सभी निरोगी और स्वस्थ रहें। 

गोवर्धन पूजा - 2024 || Gowardhan Puja - 2024

 गोवर्धन पूजा (Gowardhan Puja)

गोवर्धन पूजा को अन्नकूट पूजा भी कहा जाता है। सामान्यतया यह पर्व दीपावली के दूसरे दिन मनाया जाता है। इस बार गोवर्धन पूजा दीपावली के अगले दिन ना मनाकर उदया तिथि के अनुसार 2 नवंबर 2024 दिन शनिवार को मनाया जा रहा है। 

गोवर्धन पूजा - 2024 || Gowardhan Puja - 2024

इस दिन गोवर्धन पर्वत, श्री कृष्ण और गाय की पूजा की जाती है। इसी दिन अन्नकूट का पर्व भी मनाया जाता है। गोवर्धन पूजा का हिन्दू धर्म में बेहद ही खास महत्व है। यह हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार हैजिसे लोग असीम श्रद्धा और विश्वास के भाव से मनाते हैं। इस दिन पूरे विधि-विधान से लोग गोवर्धन पूजा करते हैं। इस त्योहार को दिवाली के बाद कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा पर मनाते हैं। उत्तर प्रदेश में इस पर्व को बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है।. मान्यता है कि श्री कृष्ण भगवान ने देवराज इंद्र के अंहकार का नाश करने के लिए गोकुल निवासियों को गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के लिए प्रेरित किया था। मुख्य रूप से सुबह के समय ही गोवर्धन पूजा की जाती है। इस दिन गोबर से गोवर्धन पर्वत की रचना की जाती है। उसे पुष्प आदि से सजाते हैं। सुबह समय न मिल पाए तो लोग शाम में भी यह पूजा कर सकते हैं। यह पूजा भगवान श्री कृष्ण और प्रकृति को समर्पित है।.

गोवर्धन पूजा वाले दिन

गोवर्धन पूजा - 2024 || Gowardhan Puja - 2024

गोवर्धन पूजा वाले दिन गोबर से घर के आंगन में गोवर्धन बनाकर उसे फूलों से सजाया जाता है। वहां दीप, जल, नैवेद्य, धूप, अगरबत्ती, फल, फूल आदि अर्पित किया जाता है। गोवर्धन जी की आकृति गोबर से एक लेटे हुए पुरुष के रूप में बनाई जाती है तथा बीच में दीपक रखा जाता है.।पूजा के दौरान इसी दीपक में बताशे, दही, दूध, गंगाजल, शहद आदि डाला जाता है.।प्रसाद के तौर पर इन्हीं चीजों को सभी में बांट दिया जाता है। पूजा संपन्न होने के बाद लोग गोवर्धन जी की सात बार परिक्रमा करते हैं।. परिक्रमा करते समय लोटे से पानी भी गिराया जाता है और जौ बोया जाता है.। मान्यता है कि जो भी गोवर्धन पूजा पूरे श्रद्धा भाव से करता है, उसके घर में सुख-संपदा, धन, संतान की प्राप्ति होती है।

गोवर्धन पूजा - 2024 || Gowardhan Puja - 2024


शुभ दीपावली || Shubh Dipawali 2024

दीपावली

शरद पूर्णिमा के साथ पवित्र कार्तिक मास शुरू हो गया। इसी के साथ सुबह गुलाबी ठंडक और शामें और अधिक सुहानी होने लगीं। वैसे इस बार तो मानो गर्मी जाने का नाम ही नहीं ले रही है, खैर जाना तो है ही। ऐसे मौसम में कुछ लोग डेंगू से परेशान हैं, तो कुछ लोग मौसम जनित बीमारियों से। लेकिन आने वाले त्योहार का संभावित उल्लास लोगों में छाया है।

शुभ दीपावली || Shubh Dipawali 2024

जी हां दीपोत्सव दीवाली की आप सभी को बहुत बधाई एवं शुभकामना।

दीपावली का संस्कृत अर्थ है दीपावलिः = दीप + अवलिः = दीपकों की पंक्ति, या पंक्ति में रखे हुए दीपक। यह शरद ऋतु में हर वर्ष मनाया जाने वाला एक प्राचीन सनातन त्यौहार है। यह कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है और भारत के सबसे बड़े और सर्वाधिक महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। आध्यात्मिक रूप से यह 'अन्धकार पर प्रकाश की विजय' को दर्शाता है।

शुभ दीपावली || Shubh Dipawali 2024 

दिया जलना, घर की सजावट, खरीददारी, आतिशबाज़ी, पूजा, उपहार, दावत और मिठाइयाँ इस त्योहार के प्रमुख आकर्षण हैं। यह पंच दिवसीय त्योहार है। त्योहार का आरंभ धनतेरस से होता है, उसके बाद नरक चौदस फिर दीपावली और फिर प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा के बाद अंतिम दिन भैया दूज के साथ इस त्योहार का समापन होता है। दीपावली के दिन बंगाल में काली पूजा की धूम रहती है।

शुभ दीपावली || Shubh Dipawali 2024

भारतवर्ष में मनाए जाने वाले सभी त्यौहारों में दीपावली का सामाजिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से अत्यधिक महत्त्व है। इसे दीपोत्सव भी कहते हैं। ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ अर्थात (हे भगवान!) मुझे अन्धकार से प्रकाश की ओर ले जाइए। यह उपनिषदों की आज्ञा है। इसे सिख, बौद्ध तथा जैन धर्म के लोग भी मनाते हैं। जैन धर्म के लोग इसे महावीर के मोक्ष दिवस के रूप में मनाते हैं तथा सिख समुदाय इसे बन्दी छोड़ दिवस के रूप में मनाता है।

शुभ दीपावली || Shubh Dipawali 2024

माना जाता है कि दीपावली के दिन अयोध्या के राजा भगवान राम अपने चौदह वर्ष के वनवास के पश्चात घर लौटे थे। अयोध्यावासियों का हृदय अपने परम प्रिय राजा के आगमन से प्रफुल्लित हो उठा था। श्री राम के स्वागत में अयोध्यावासियों ने घी के दीपक जलाए थे। कार्तिक मास की सघन काली अमावस्या की वह रात्रि दीयों की रोशनी से जगमगा उठी। तब से आज तक भारतीय प्रति वर्ष यह प्रकाश-पर्व हर्ष व उल्लास से मनाते हैं। सनातन का मूल सिद्धांत है कि सत्य की सदा जीत होती है तथा झूठ का नाश होता है। दीपावली यही चरितार्थ करती है। दीपावली स्वच्छता व प्रकाश का पर्व है। कई सप्ताह पूर्व ही दीपावली की तैयारियाँ आरंभ हो जाती हैं। लोग अपने घरों, दुकानों आदि की सफाई का कार्य आरंभ कर देते हैं। घरों में मरम्मत, रंग-रोगन, सफेदी आदि का कार्य होने लगता है। लोग दुकानों को भी साफ-सुथरा कर सजाते हैं। बाजारों में गलियों को भी सुनहरी झंडियों से सजाया जाता है। दीपावली से पहले ही घर-मोहल्ले, बाजार सब साफ-सुथरे व सजे-धजे नज़र आते हैं।

शुभ दीपावली || Shubh Dipawali 2024

आइए, प्रकाश पर्व की इस पावन वेला में हम सब भी खुशी खुशी, हर्ष उल्लास और उत्साह के साथ दीपावली मनाएं।

शुभ दीपावली 🪔🪔🪔🪔

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी || Shree Krishna Janmashtami 26 aug

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी जिसे जन्माष्टमी या गोकुलाष्टमी के रूप में भी जाना जाता है। यह जन्माष्टमी विष्णु जी के 10 अवतारों में से 8 वें और 24 अवतारों में से 22 वें अवतार श्री कृष्ण के जन्म के आनंदोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह त्यौहार हिंदी मास के भाद्रपद के कृष्ण पक्ष (अंधेरा पख्वाडा) आठवें (अष्टमी) को मनाया जाता है।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2024 || Shri Krishna Janmashtami 2024 ||

श्री कृष्ण जन्माष्टमी भारत का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। कृष्ण देवकी और वासुदेव आनकदुंदुभी के पुत्र हैं और इनके जन्मदिन को हिंदुओं द्वारा जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है।

जब भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था,उस समय अराजकता अपने चरम पर थी।यह एक ऐसा समय था जब उत्पीड़न बड़े पैमाने पर था, सभी अपनी स्वतंत्रता से वंचित थे, बुराई सब ओर थी। या यूं कहें कि इस बुराई का नाश करने के लिए भगवान कृष्ण ने अवतार लिया था।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2024 || Shri Krishna Janmashtami 2024 ||

कृष्ण जी भगवान विष्णु जी के अवतार हैं जो तीन लोक के 3 गुणों सतगुण, रजगुण तथा तमोगुण में सतगुण के लिए जाने जाते हैं। श्री कृष्ण के माता पिता वासुदेव और देवकी जी के विवाह के समय जब मामा कंस अपनी बहन देवकी को ससुराल पहुंचाने जा रहा था तभी आकाशवाणी हुई थी कि देवकी का आठवां पुत्र कंस को मारेगा। इस आकाशवाणी के बाद कंस ने देवकी और वासुदेव को अपने कारागार में डाल दिया और उनके सभी सातों पुत्रों का जन्म होते ही वध कर दिया। 

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2024 || Shri Krishna Janmashtami 2024 ||

लेकिन देवकी और वासुदेव को जेल में रखने के बावजूद कंस उनके आठवें पुत्र को नहीं मार पाया। मथुरा की जेल में जन्म के तुरंत बाद श्री कृष्ण के पिता वासुदेव कृष्ण को यमुना पार अपने मित्र नंद और उनकी पत्नी यशोदा के पास ले जाते हैं। वृंदावन में श्री कृष्ण का लालन पोषण नंदलाल और यशोदा मां मिलकर बहुत प्रेम से करते है। श्री कृष्ण की अद्भुत और अलौकिक छवि से पूरा वृंदावन मोहित रहता है। गोवर्धन पर्वत को अपनी एक उंगली पर उठाकर श्री कृष्ण ने पूरे वृंदावन वासियों की रक्षा की थी और इंद्र का घमंड तोड़ा था।यह बात मथुरा के राजा कंस के पास पहुंचती है, तो वह समझ जाता है कि यही बालक मेरा भी वध करेगा। 

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2024 || Shri Krishna Janmashtami 2024 ||

इसलिए उसने एक महायज्ञ के बहाने अपना एक मंत्री अक्रूर सिंह जी को भेजकर श्रीकृष्ण को यज्ञ में आमंत्रण देता है। श्री कृष्ण जी मथुरा आते हैं। दरवाजे पर एक ऐसा धनुष रखा था जिसे कोई साधारण इंसान उठा नहीं पाता। भगवान श्री कृष्णा उस धनुष को ऐसे तोड़ा जैसे बच्चा अपने खिलौने से खेलता है। कंस समझ गया कि ये कोई साधारण बालक नहीं। इसलिए उन्हें मारने के लिए उसने दैवीय राक्षस भेजें। अंत में कंस खुद लड़ने आया और उसका श्री कृष्ण ने वध कर दिया। बाल्यावस्था से ही श्रीकृष्ण की कई सारी लीलाएं और कथाएं हैं, जिनकी चर्चा हम एक ब्लाग में नहीं कर सकते।

सभी लोगों को श्री कृष्ण जन्मोत्सव पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। भगवान श्री कृष्ण सभी को सुख समृद्धि दें, स्वस्थ रखें।

स्वतंत्रता दिवस २०२४ || Independence day 2024

स्वतंत्रता दिवस

15 अगस्त 2024 को राष्ट्र अपना 78वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। अपने देश मे मनाया जाने वाला यह प्रमुख  राष्ट्रीय त्योहार है और हम इसे बड़े उत्साह और देशभक्ति के साथ मनाते हैं। आप सभी सुधी पाठकों को 78वें स्वतंत्रता दिवस की अनेक बधाई।

स्वतंत्रता दिवस २०२४  || Independence day 2024

आज के दिन पूरे भारत में ध्वजारोहण समारोह, परेड और राष्ट्रगान के गायन के साथ मनाया जाता है। प्रधानमंत्री पुरानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले में ध्वजारोहण समारोह का नेतृत्व करते हैं, उसके बाद पुलिस और सशस्त्र बलों की परेड होती है। राज्य की राजधानियों में भी सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, और स्कूलों, आवासीय परिसरों और कार्यालयों में ध्वजारोहण समारोह आयोजित किए जाते हैं। राष्ट्रीय राजधानी में सरकारी कार्यालय बंद रहते हैं, लेकिन उत्सव के दौरान रोशनी की जाती है। 

15 अगस्त वर्ष 1947 को भारत के इतिहास को स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया। इसी दिन देश के आजाद होने पर भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लाल किले पर झंडा फहराया था। तभी से प्रत्येक वर्ष देश के प्रधानमंत्री लाल किले पर झंडा फहराते है, राष्ट्रगान गाते है। इस अवसर पर सभी शहीद स्वतंत्रता सेनानियों को 21 तोपों से श्रद्धांजलि दी जाती है। देश के प्रधानमंत्री हर साल देशवासियों को अपने भाषण के द्वारा सम्बोधित करते है और सेना द्वारा अपना शक्ति प्रदर्शन और परेड मार्च किया जाता है। स्वतंत्रता दिवस के दिन सभी भारतवासियों के मन में देशभक्ति की भावना के साथ-साथ पूर्ण जोश रहता है। परंतु यह भावना और देश प्रेम का जज्बा ,उसके बाद कमज़ोर हो जाता है। हमे इस जज्बे को हमेशा बनाये रखना है। देश की एकता और अखंडता के लिए यह परमावश्यक है।

स्वतंत्रता दिवस २०२४  || Independence day 2024

आजादी के बाद भारत देश अब तक बहुत उन्नति कर चुका है। इन 78 वर्षों में भारत एक विकासशील देश से विकसित देश होने की दिशा में बहुत मजबूती के साथ आगे बढ़ा है। 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के दिन सभी विद्यालय, कॉलिज, संस्थान, बाजार, कार्यालय और कारखाने आदि बंद रहते है। इस दिन सरकारी छुट्टी होती है। जगह-जगह पर झंडा फहराया जाता है। स्कूलों, कॉलिजों आदि में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है जिसमें सभी छात्र-छात्राएं भाग लेते है और देशभक्ति के गीत गाते है, कोई कविता सुनाता है तो कोई सांस्कृतिक गीतों पर नृत्य करते है। इन सारे कार्यक्रमों का उद्देश्य भी आज की युवा पीढ़ी के अंदर देश प्रेम की लौ को जलाए रखना ही है।

एक बार पुनः आप सभी को 78वें स्वतंत्रता दिवस की बधाई एवं शुभकामनाएं।

English Translate

Independence Day

The nation is celebrating its 78th Independence Day on 15 August 2024. This is the major national festival celebrated in our country and we celebrate it with great enthusiasm and patriotism. Many congratulations to all you readers on the 78th Independence Day.

स्वतंत्रता दिवस २०२४  || Independence day 2024

This day is celebrated across India with flag hoisting ceremonies, parades and singing of the national anthem. The Prime Minister leads the flag hoisting ceremony at the historic Red Fort in Old Delhi, followed by a parade of the police and armed forces. Cultural programs are also held in state capitals, and flag hoisting ceremonies are held in schools, residential complexes and offices. Government offices in the national capital remain closed, but are illuminated during the celebration.

The history of India was written in golden letters on 15 August 1947. On this day, when the country became independent, the first Prime Minister of India, Pandit Jawaharlal Nehru, hoisted the flag at the Red Fort. Since then, every year the Prime Minister of the country hoists the flag at the Red Fort and sings the national anthem. On this occasion, tribute is paid to all the martyred freedom fighters with 21 gun shots. The Prime Minister of the country addresses the countrymen every year through his speech and the army shows its power and marches in a parade. On Independence Day, all Indians are filled with patriotism and enthusiasm. But this feeling and passion of patriotism weakens after that. We have to maintain this passion always. It is essential for the unity and integrity of the country.

स्वतंत्रता दिवस २०२४  || Independence day 2024

India has progressed a lot since independence. In these 78 years, India has moved forward very strongly from being a developing country to a developed country. On 15th August, Independence Day, all schools, colleges, institutes, markets, offices and factories etc. remain closed. There is a government holiday on this day. The flag is hoisted at many places. Cultural programs are organized in schools, colleges etc. in which all students participate and sing patriotic songs, some recite poems and some dance on cultural songs. The purpose of all these programs is to keep the flame of patriotism burning in today's young generation.


Once again, congratulations and best wishes to all of you on the 78th Independence Day.

नाग पंचमी 2024 (Nag Panchami 2024)

 नाग पंचमी (Nag Panchami 2024)

नाग पंचमी (Nag Panchami) हिंदुओं का एक प्रमुख त्योहार है। हिंदू पंचांग के अनुसार सावन माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी को नाग पंचमी (Nag Panchami) के रूप में यह त्यौहार मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता या सर्प की पूजा की जाती है और उन्हें दूध और धान के लावा से स्नान कराया जाता है। शास्त्रों में नागों को दूध पिलाने की नहीं बल्कि दूध से स्नान कराने को कहा गया है। इस दिन अष्टनागों की पूजा की जाती है। इस साल नाग पंचमी (Nag Panchami) 09 अगस्त 2024 को मनाया जा रहा है।

नाग पंचमी 2024 (Nag Panchami 2024)

नाग पंचमी के दिन भगवान शिव और नाग देवता की विधिपूर्वक पूजा करने से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

वासुकिः तक्षकश्चैव कालियो मणिभद्रकः।ऐरावतो धृतराष्ट्रः कार्कोटकधनंजयौ ॥एतेऽभयं प्रयच्छन्ति प्राणिनां प्राणजीविनाम् ॥ (भविष्योत्तरपुराण – ३२-२-७)(अर्थ: वासुकि, तक्षक, कालिया, मणिभद्रक, ऐरावत, धृतराष्ट्र, कार्कोटक और धनंजय - ये प्राणियों को अभय प्रदान करते हैं।)

नाग पंचमी 2024 (Nag Panchami 2024)

नाग पंचमी के पावन पर्व पर वाराणसी (काशी) में नाग कुआं नामक स्थान पर बहुत बड़ा मेला लगता है। किवदंती है कि इस स्थान पर तक्षक गरुड़ जी के भय से बालक रूप में काशी संस्कृत की शिक्षा लेने हेतु आए,परंतु गरुड़ जी को इसकी जानकारी हो गई, और उन्होंने तक्षक पर हमला कर दिया, परंतु अपने गुरु जी के प्रभाव से गरुड़ जी ने तक्षक नाग को अभय दान दे दिया, उसी समय से नाग पंचमी के दिन यहां नाग पूजा की जाती है। यह मान्यता है कि जो भी नाग पंचमी के दिन यहां पूजा - अर्चना कर नागकुआं का दर्शन करता है, उसकी जन्मकुंडली के सर्प दोष का निवारण हो जाता है

नाग पंचमी के ही दिन अनेक गांवों व कस्बों में कुश्ती का आयोजन होता है, जिसमें आसपास के पहलवान भाग लेते हैं। गाय, बैल आदि पशुओं को इस दिन नदी तालाब में ले जाकर नहलाया जाता है।

नाग पंचमी 2024 (Nag Panchami 2024)

कथा

नाग पंचमी के दिन नाग पूजा को लेकर भविष्य पुराण के पंचमी कल्प में एक रोचक कथा मिलती है। कथा के अनुसार राजा परीक्षित के पुत्र जनमेजय ने अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने का फैसला किया था। राजा परीक्षित की मृत्यु तक्षक नाग के काटने से हुई थी। इसलिए जनमेजय ने यज्ञ से संसार के सभी सांपों की बलि चढ़ाने का निश्चय किया।(महाभारत युद्ध के समय जब अभिमन्यु मारे गए तब उनकी पत्नी उत्तरा गर्भवती थीं और उन्होंने एक पुत्र को जन्म दिया जो आगे चलकर हस्तिनापुर के राजा हुए जिनका नाम परीक्षित था और परीक्षित के ही पुत्र राजा जनमेजय हैं।)

राजा जनमेजय का यज्ञ इतना शक्तिशाली था कि उसके प्रभाव से सभी सांप अपने आप खींचे चले आए। तक्षक नाग इस यज्ञ के भय से पाताल लोक में जाकर छुप गए। राजा जनमेजय मैं यज्ञ करने वाले रिसीव से मंत्रों की शक्ति को बढ़ाने के लिए कहा जिससे अग्नि का ताप बढ़ सके। तब इंद्र ने तक्षक केसाथ यज्ञ स्थल पर जाने का निश्चय किया इसके बाद तक्षक के जीवन को बचाने के अंतिम प्रयास में देवताओं ने सड़कों की देवी मनसा देवी का आह्वान किया।देवताओं की पुकार पर मनसा देवी ने अपने बेटे अस्टिका को भेजा और जनमेजय से यज्ञ को रोकने की विनती करने के लिए कहा। जनमेजय के यज्ञ को रोकने के लिए राजी करना आसान काम नहीं था, लेकिन अष्टिका सर्प यज्ञ को रोकने में सक्षम रहे। इस प्रकार सांपों के राजा तक्षक का जीवन बच गया, ये नवी वर्धिनी पंचमी का दिन था, तभी से इस दिन को जीवित बचे सर्पों को श्रद्धांजलि देने रूप में नाग पंचमी का त्यौहार मनाया जाने लगा।

नाग पंचमी 2024 (Nag Panchami 2024)

कृष्ण और कालिया

इसी तिथि से जुड़ी एक और कथा भगवान श्री कृष्ण के जीवन से जुड़ी है।एक बार श्री कृष्ण वृंदावन के चरवाहों के साथ खेल रहे थे, इसी बीच उनका खिलौना यमुना नदी में गिर गया और समस्या यह थी कि नदी में कालिया सांप रहता था।खिलौना लेने के लिए जब कृष्ण नदी में गए तो कालिया सांप ने उन पर हमला किया और दोनों के बीच युद्ध हुआ। कृष्ण ने करारा जवाब देते हुए कालिया को युद्ध में पछाड़ दिये और कालिया सांप (जिसके कई सारे सिर थे) के सिर पर नृत्य करते हुए नदी से बाहर आए‌। कृष्ण ने कालिया सांप को इस शर्त पर जाने दिया कि वह वृंदावन में कभी वापस नहीं आएगा और यहां के लोगों को कभी परेशान नहीं करेगा। शास्त्रों के अनुसार वह दिन भी पंचमी का दिन था।

नाग पंचमी 2024 (Nag Panchami 2024)

शास्त्रों के अनुसार, अगर किसी की कुंडली में कालसर्प दोष है, तो नाग पंचमी के दिन उपाय करने से व्यक्ति को इस दोष से मुक्ति मिल सकती है।

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Nag Panchami 2021

Nag Panchami is a major festival of Hindus. According to the Hindu calendar, this festival is celebrated on the fifth day of Shukla Paksha of Sawan month as Nag Panchami. On this day the serpent or snake is worshipped and bathed with milk and paddy lava. In the scriptures, the serpents have not been told to drink milk, but to bathe with milk. Ashtnagas are worshiped on this day. This year Nag Panchami is being celebrated on 09 August 2024.

By worshipping Lord Shiva and the serpent god on the day of Nag Panchami, one gets the blessings of happiness and prosperity.

नाग पंचमी 2024 (Nag Panchami 2024)

Vasuki: Takshaschaiva Kaliyo Manibhadrakah. (Bhavishyottara Purana – 32-2-7) (Means: Vasuki, Takshaka, Kaliya, Manibhadrak, Airavata, Dhritarashtra, Karkotaka and Dhananjaya – they bestow fearlessness on living beings.)

On the holy festival of Nag Panchami, a big fair is held in Varanasi (Kashi) at a place called Nag Kuan. Legend has it that because of the fear of Takshak Garuda ji at this place the child…

On the day of Nag Panchami, wrestling is organized in many villages and towns, in which nearby wrestlers participate. Animals like cows, bulls etc. are taken to the river pond on this day and bathed.

नाग पंचमी 2024 (Nag Panchami 2024)

Story

An interesting story is found in the Panchami Kalpa of Bhavishya Purana regarding Nag Puja on the day of Nag Panchami. According to the legend, King Parikshit's son Janamejaya had decided to avenge his father's death. King Parikshit died due to the bite of the snake Takshak. Therefore Janamejaya decided to sacrifice all the snakes of the world by yajna. King Janamejaya is the son of Parikshit.

नाग पंचमी 2024 (Nag Panchami 2024)

King Janamejaya's yajna was so powerful that all the snakes were automatically pulled away under its influence. Takshak Nag hid in the Hades due to the fear of this sacrifice. King Janamejaya I asked the receiver who performed the yajna to increase the power of the mantras so that the heat of the fire could increase. Then Indra decided to accompany Takshak to the Yagya site, after which the gods invoked Manasa Devi, the goddess of the roads, in a last attempt to save Takshak's life. requested to stop. It was not an easy task to persuade Janamejaya to stop the Yagya, but Ashtika Sarpa was able to stop the Yagya. Thus the life of the king of snakes, Takshak, was saved, it was the day of Navi Vardhini Panchami, since then the festival of Nag Panchami was celebrated on this day as a tribute to the surviving snakes.

नाग पंचमी 2024 (Nag Panchami 2024)

Krishna and Kalia

Another story related to this date is related to the life of Lord Krishna. When Krishna went to the river to get the toy, Kaliya snake attacked him and a fight ensued between the two. Krishna, giving a befitting reply, defeated Kaliya in the battle and Kaliya came out of the river dancing on the head of the snake (which had many heads). Krishna let the Kaliya snake go on the condition that he would never return to Vrindavan and would never disturb the people here. According to the scriptures, that day was also the day of Panchami.

नाग पंचमी 2024 (Nag Panchami 2024)

According to the scriptures, if someone has Kaal Sarp Dosh in his horoscope, then by taking remedies on the day of Nag Panchami, one can get rid of this defect.

बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Purnima).....23.05.2024

बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Purnima)

बुद्ध पूर्णिमा भारतवर्ष में मनाये जाने वाला बौद्ध धर्म का सबसे प्रमुख त्योहार है। आज बुद्ध पूर्णिमा है। आज आसमान में पूरा चाँद दिखेगा। 

बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Purnima).....23.05.2024

आज रात्रि नीले गगन में खिले हुए पूर्णिमा के रुपहले चाँद का अवश्य दीदार करियेगा। आप निश्चित समझिए कि आज आप उसके मोह पाश में बंधने जा रहे हैं।कितना सुंदर,कितना पावन,कितना निर्मल है आज का चांद। आज रात की केसरिया चांदनी आपको मूक निमंत्रण देगी चाँद से बातें करने का,अपने दिल के हर कहे अनकहे किस्से सुनाने और सुलझाने का।आज रात चाँद के साथ सपनों की आकाश गंगा मे विचरिये,अपने ख्वाबों की रुपहली राह पर चलिये,चाँद से बरसती शीतल अमृत धारा का पान करिये। आज चाँद के चमकीले उजास में किसी की मधुर स्मृतियों की झालर को पलकों के किनारे झूलने दीजिये। आज चाँद का सौंदर्य आपके मन का सितार बन कर झन झनायेगा।

बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Purnima).....23.05.2024

खैर चलिए अब जान लेते हैं बुद्ध पूर्णिमा क्यों मनाया जाता है और इसका क्या महत्व है?

बुद्ध पूर्णिमा क्यों मनाया जाता है?

वैशाख पूर्णिमा के दिन ही भगवान बुद्ध का जन्म लुंबिनी में हुआ था, जो बुद्धत्व की प्राप्ति के बाद गौतम बुद्ध के नाम से प्रसिद्ध हुए। गौतम बुद्ध का जन्म वैशाख पूर्णिमा के दिन होने से इस दिन को बुद्ध पूर्णिमा भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बुद्ध देवता को भगवान विष्णु का नवां अवतार माना जाता है। इसलिए बुद्ध पूर्णिमा को बौद्ध धर्म के अनुयायियों के साथ हिंदू धर्म के लोग भी मनाते हैं।
बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Purnima).....23.05.2024

बुद्ध पूर्णिमा का महत्व

गौतम बुद्ध का जीवनकाल 563- 483 ईसवी पूर्व के मध्य माना जाता है। पूरी दुनिया में महात्मा बुद्ध को सत्य की खोज के लिए जाना जाता है। मानना है कि गौतम बुद्ध राजसी ठाट छोड़कर बरसों वन में भटकते रहे और उन्होंने कठोर तपस्या कर बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे सत्य का ज्ञान प्राप्त किया। महात्मा बुद्ध का जन्म ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण यह तीनों एक ही दिन अर्थात वैशाखी पूर्णिमा के दिन ही हुआ। ऐसा किसी अन्य महापुरुष के साथ नहीं हुआ है। बौद्ध लोग इस तिथि  को बुद्ध पूर्णिमा के नाम से मनाते हैं।

वैशाख पूर्णिमा के दिन पवित्र नदी में स्नान करने का बहुत महत्व होता है इससे पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख शांति आती है आज के दिन भगवान विष्णु की भी पूरे विधि विधान के साथ पूजा की जाती है। इस दिन दान पुण्य और धर्म कर्म कार्य किए जाते हैं। बुद्ध पूर्णिमा को सत्य विनायक पूर्णिमा भी कहा जाता है। आज का दिन बहुत ही पवित्र और फलदाई माना जाता है।
बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Purnima).....23.05.2024

बुद्ध पूर्णिमा भगवान बुद्ध के जन्म, मृत्यु और उनके द्वारा संसार को दिए गए ज्ञान का स्मरण करने का दिन है। आप सभी को बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनायें। 



रामनवमी 2024 (Ram Navami 2024)

रामनवमी (Ram Navami)

सभी पाठकों को राम नवमी की हार्दिक शुभकामनायें एवं बधाइयाँ 

सुबह-सुबह लो राम का नाम,
पूरे होंगे बिगड़े अधूरे काम
राम जिनका नाम है, अयोध्या जिनका धाम है,
ऐसे रघुनंदन को हमारा प्रणाम है।

रामनवमी 2024 (Ram Navami 2024)

रामनवमी (Ram Navami ) का त्यौहार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को मनाया जाता है, इस दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम जी का जन्म हुआ था। हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार इस दिन त्रेता युग में रावण के अत्याचारों को समाप्त करने के लिए तथा धर्म की पुनः स्थापना के लिए भगवान विष्णु ने मृत्यु लोक में श्री राम के रूप में अवतार लिया था। श्री रामचंद्र जी का जन्म चैत्र शुक्ल की नवमी के दिन पुनर्वसु नक्षत्र तथा कर्क लग्न में रानी कौशल्या की कोख से राजा दशरथ के घर में हुआ था।

रामनवमी 2024 (Ram Navami 2024)

कबीर साहिब जी आदि राम की परिभाषा बताते हैं कि आदि राम वह अविनाशी परमात्मा हैं जो सबका सृजनहार व पालनहार हैं, जिसके एक इशारे पर धरती और आकाश काम करते हैं, जिसके स्तुति में 33 करोड़ देवी देवता नतमस्तक रहते हैं जो पूर्ण मोक्ष दायक वह स्वयंभू है।

"एक राम दशरथ का बेटा,
एक राम घट घट में बैठा,
एक राम का सकल उजियारा
एक राम जगत से न्यारा" ।।
रामनवमी 2024 (Ram Navami 2024)

इस बार 17 अप्रैल को नवमी का त्यौहार मनाया जा रहा है। यह पर्व भारत में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। राम नवमी के दिन ही चैत्र नवरात्र की समाप्ति भी हो जाती है। हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान श्री राम जी का जन्म हुआ था। अतः इस शुभ तिथि को भक्त लोग रामनवमी के रूप में मनाते हैं एवं पवित्र नदियों में स्नान करके पुण्य के भागीदार होते हैं।

सनातन नववर्ष संवत्सर २०८१

 सनातन नववर्ष संवत्सर २०८१

सनातन नववर्ष चैत्र माह की शुक्ल प्रतिपदा (प्रथम) तिथि को मनाया जाता हैं। अंग्रेजी कैलेंडर 2024 के अनुसार 09 अप्रैल को नववर्ष का प्रथम दिवस है। सनातन नववर्ष को नव संवत्सर, वर्ष प्रतिपदा, विक्रम संवत वर्षारंभ, युगादि आदि नामों से भी जाना जाता हैं। ज्योतिष गणना के अनुसार, सनातन नववर्ष का प्रथम दिन जिस वार पर पड़ता है पूरा वर्ष उस ग्रह का स्वामित्व माना जाता हैं। नववर्ष २०८१ मंगलवार से आरंभ हो रहा है, ऐसे में मंगल ग्रह इस पूरे वर्ष के स्वामी मानें जाएंगे।

सनातन नववर्ष संवत्सर २०८१

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का ऐतिहासिक महत्व

१. ब्रह्माजी द्वारा सृष्टि की रचना प्रारंभ

२. चारों युग सत, त्रेता, द्वापर, कलि का प्रथम दिन

३. चैत्र मास नवरात्रि का प्रथम दिन

४. रामायण काल में प्रभु श्री राम और महाभारत काल में पांडव युधिष्ठिर का राज्याभिषेक हुआ

सनातन नववर्ष संवत्सर २०८१

५. महर्षि गौतम जंयती

६. सम्राट विक्रमादित्य ने अपने राज्य की स्थापना की तथा वर्ष ५७ ईसा पूर्व में विक्रम संवत (पंचांग) आरंभ किया था।

विक्रम संवत = ईस्वी वर्ष + ५७

७. सम्राट शालिवाहन या कुषाण शासक कनिष्क द्वारा वर्ष ७८ ईस्वी में शक संवत (पंचांग) आरंभ किया गया। अंग्रेजों से स्वतंत्रता पश्चात भारत सरकार ने शक संवत (पंचांग) को भारत का आधिकारिक राष्ट्रीय कैलेंडर स्वीकार किया।

शक संवत = ईस्वी वर्ष - ७८

८.सिखों के द्वितीय गुरू श्री अंगद देव जी का जन्म दिवस

सनातन नववर्ष संवत्सर २०८१

९. झूलेलाल जयंती / चेटीचंड

सिंध राज्य में इस्लामी आक्रांता मिरखशाह का शासन था और वह गैर मुस्लिमों पर बहुत अत्याचार करता था, एक दिन उसने गैर मुस्लिमों को इस्लाम में परिवर्तित होने का आदेश जारी किया। सिंध के गैर मुस्लिमों ने ४० दिनों तक कठिन जप, तप और साधना की। तब सिंधु नदी से जल देवता वरुण एक विशाल मत्स्य पर बैठे हुए झूलेलाल रुप में प्रकट हुए और जनता को आश्वस्त किया कि वह जन्म लेकर मिरखशाह के अत्याचारों से मुक्ति दिलाएंगे। 

१०. महर्षि दयानंद सरस्वती द्वारा आर्य समाज की स्थापना

सनातन नववर्ष संवत्सर २०८१

सनातन नववर्ष का प्राकृतिक महत्व

१. वसंत ऋतु का आरंभ वर्ष प्रतिपदा से होता हैं जो उल्लास, उमंग, प्रसन्नता से पूर्ण तथा चारों दिशाओं में पुष्पों की सुगंध भरी होती हैं।

२. नक्षत्र शुभ स्थिति में होते हैं अर्थात किसी भी कार्य को आरंभ करने के लिए शुभ मुहूर्त होता है।

३. वर्ष प्रतिपदा चंद्रमा की कला का प्रथम दिवस है। जीवन के मुख्य आधार औषधियों और वनस्पतियों को रस चंद्रमा ही प्रदान करता है।

सनातन नववर्ष संवत्सर २०८१

४. उपज पकने का समय अर्थात किसान के परिश्रम का फल मिलने का समय।

सनातन नववर्ष के अवसर पर लोग एक दूसरे को तथा परिचित संबंधियों को नववर्ष की शुभकामनाएं एवं बधाइयां देते हैं। इस दिन घरों, प्रतिष्ठानों, पूजा स्थलों पर रंगोली, ऐपण, पत्तों की वंदनवार से सजाया जाता है। घरों की छत पर ध्वजारोहण होता है। इस दिन कुछह लोग पीले या भगवा वस्त्र धारण करते हैं। यह दिन ईश्वर का स्मरण करने का तथा माता पिता, गुरुजनों आदि का आशीर्वाद प्राप्त करने का है।

 इस दिन विभिन्न सांस्कृतिक, धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इस दिन समाज की भलाई के लिए भी कुछ अवश्य करना चाहिए।

सनातन नववर्ष संवत्सर २०८१

 इस दिन धर्म रक्षा, जीवन को उत्तम बनाने तथा समाज में योगदान देने हेतु नवीन प्रवृत्तियों को अपनाने तथा हानिकारक प्रवृत्तियां छोड़ने का संकल्प लेना चाहिए।

आज नवरात्रि का पहला दिन है

🙏🏻माँ शैलपुत्री🙏🏻

ज्योतिषी के अनुसार माँ शैलपुत्री चंद्रमा को दर्शाती हैं, इसलिए उनकी उपासना से चंद्रमा के द्वारा पड़ने वाले बुरे प्रभाव भी निष्क्रिय हो जाते हैं।

🙏🏻मंत्र

ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥

 🙏प्रार्थना

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।

वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

🙏स्तुति

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥🙏


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सभी पाठकों को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें..