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मणिपुर में अफीम की खेती हिंसा का मुख्य कारण

मणिपुर में अफीम की खेती भी हिंसा का मुख्य कारण

मई महीने में राज्य और केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि मणिपुर में जातीय हिंसा की शुरुआत अफीम की खेती पर कार्रवाई की वजह से हुई, जिसमें म्यांमार के अवैध प्रवासी और पहाड़ी ज़िलों में नशीली दवाओं का कारोबार भी जुड़ा हुआ था।

मणिपुर में अफीम की खेती हिंसा का मुख्य कारण

मणिपुर में बसी एक विदेशी मूल की जाति कुकी है, जो मात्र डेढ़ सौ वर्ष पहले पहाड़ों में आ कर बसी थी। ये मूलतः मंगोल नस्ल के लोग हैं। जब अंग्रेजों ने चीन में अफीम की खेती को बढ़ावा दिया तो उसके कुछ दशक बाद अंग्रेजों ने ही इन मंगोलों को वर्मा के पहाड़ी इलाके से ला कर मणिपुर में अफीम की खेती में लगाया। आश्चर्य की बात यह है कि तमाम कानूनों को धत्ता बता कर ये अब भी अफीम की खेती करते हैं और कानून इनका कुछ नहीं बिगाड़ पाता। इनके व्यवहार में अब भी वही मंगोली क्रूरता है और व्यवस्था के प्रति प्रतिरोध का भाव है। मतलब नहीं मानेंगे, तो नहीं मानेंगे।

अधिकांश कुकी यहाँ अंग्रेजों द्वारा बसाए गए हैं, पर कुछ उसके पहले ही रहते थे। उन्हें वर्मा से बुला कर मैतेई राजाओं ने बसाया था। क्यों? क्योंकि तब ये सस्ते सैनिक हुआ करते थे। अब भी कुकी अवैध तरीके से वर्मा से आ कर मणिपुर के सीमावर्ती जिलों में बस रहे हैं। सरकार इस घुसपैठ को रोकने का प्रयास कर रही है, पर पूर्णतः सफल नहीं है।

आजादी के बाद जब उत्तर पूर्व में मिशनरियों को खुली छूट मिली तो उन्होंने इनका धर्म परिवर्तन कराया और अब लगभग सारे कुकी ईसाई हैं। और यही कारण है कि इनके मुद्दे पर एशिया-यूरोप सब एक सुर में बोलने लगते हैं। इन लोगों का एक विशेष गुण है। नहीं मानेंगे, तो नहीं मानेंगे। क्या सरकार, क्या सुप्रीम कोर्ट? 

सरकार कहती है, अफीम की खेती अवैध है। ये कहते हैं, "तो क्या हुआ? हम करेंगे।" कोर्ट ने कहा, "मैतेई भी अनुसूचित जाति के लोग हैं।" ये कहते हैं, "कोर्ट कौन? हम कहते हैं कि वे अनुसूचित नहीं हैं, मतलब नहीं हैं। हमीं कोर्ट हैं।

मैती, मैतेई या मैतई... ये मणिपुर के मूल निवासी हैं। सदैव वनवासियों की तरह प्राकृतिक वैष्णव जीवन जीने वाले लोग। पुराने दिनों में सत्ता इनकी थी, इन्हीं में से राजा हुआ करते थे। अब राज्य नहीं है, जमीन भी नहीं है। मणिपुर की जनसंख्या में ये आधे से अधिक हैं, पर भूमि इनके पास दस प्रतिशत के आसपास है। उधर कुकीयों की जनसंख्या 30% है, पर जमीन 90% है।

90% जमीन पर कब्जा रखने वाले कुकीयों की मांग है कि 10% जमीन वाले मैतेई लोगों को जनजाति का दर्जा न दिया जाय। वे लोग विकसित हैं, सम्पन्न हैं। यदि उनको अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया गया तो हमारा विकास नहीं होगा। हमलोग शोषित हैं, कुपोषित हैं। 

अब मैतेई भाई बहनों की दशा ये है कि जनसंख्या इनकी अधिक है, विधायक इनके अधिक हैं, सरकार इनके समर्थन की है। पर कोर्ट से आदेश मिलने के बाद भी ये अपना हक नहीं ले पा रहे हैं। 

यह बात तो हुई मणिपुर में हुए हिंसा की। अब बात करते हैं अफीम की।  क्या वाकई में अफीम सिर्फ एक नशा है?

पोस्ता दाना का प्रयोग लगभग हर घर में मसाले के रूप में होता है और अफीम (Afeem) पोस्त के डोडों से प्राप्त की जाती है। एक तरफ तो इसके फायदों के लिए इसका उपयोग मसाले के तौर पर होता तो वहीं दूसरी तरफ नशे के लिए। नशे से बचिए, फायदे के तरफ चलते हैं। 

जानते हैं अफीम के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुणों के बारे में

पोस्त के बीजों में हल्के पीले रंग का मीठा स्थिर तेल होता है, जिसे रोगन खसखस कहते हैं। अफीम में मार्फिन, नर्कोटीन एवं कोडीईन आदि एलकेलाइट्स पाए जाते हैं। इसके अतिरिक्त इसमें अनेक प्राथमिक तथा द्वितीयक एलकेलाइट्स, कार्बनिक अम्ल, लेक्टिक एसिड एवं मेकोनिक एसिड आदि ऑर्गेनिक अम्ल, जल, ग्लूकोज, वसा, उड़नसील तेल आदि तत्व पाए जाते हैं।

अफीम के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

सिर दर्द में

1 ग्राम अफीम और दो लौंग पीसकर मस्तक पर लेप करने से वादी तथा सर्दी की वजह से होने वाले सिर दर्द में आराम होता है।

नेत्र रोग में

आंख के दुखने और आंख के दूसरे रोगों में इसका लेप बहुत लाभकारी होता है।

नकसीर की समस्या

अफीम तथा कुंदरू गोंद दोनों बराबर मात्रा में पानी के साथ पीसकर सूंघने से नकसीर बंद होती है।

बालों के लिए

पोस्ट के बीजों को दूध में पीसकर सिर पर लगाने से, सर में होने वाले फोड़े फुंसी एवं रूसी साफ हो जाते हैं।

दांत दर्द में

16 मिलीग्राम अफीम और 125 मिलीग्राम नौसादर, दोनों को दाढ़ में रखने से दाढ़ की पीड़ा मिटती है और दांत के छेद में रखने से  दंत शूल मिटता है।

खुजली की समस्या

अफीम को तिल के तेल में मिलाकर मालिश करने से खुजली मिटती है।

जोंक का डंक 

जोंक का डंक अगर पक जाए तो, उस पर इसके दानों को पीसकर लेप करने से आराम मिलता है।

बुखार में

अफीम के 1 डोडे और 7 काली मिर्च को औटाकर दोनों समय पिलाने से बुखार मिटता है।

अफीम के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

स्वरभंग की समस्या 

अफीम के डोडे और अजवाइन को औंटकर गरारा करने से बैठी हुई आवाज़ खुल जाती है। 

खांसी की समस्या 

बीजों सहित इसके 60 ग्राम डोडे का क्वाथ बनाकर 50 ग्राम बुरा मिलाकर शर्बत बनाकर पिलाने से खांसी मिटती है। 

गर्भाशय की पीड़ा 

प्रसव के बाद अफीम के डोडों का क्वाथ पिलाने से गर्भाशय की पीड़ा मिटती है। 

अफीम के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

अफीम के नुकसान (Side Effects of Opium)

  • अफीम का अधिक मात्रा में सेवन उपद्रवकारी है और इससे मृत्यु तक हो जाती है।
  • अफीम का लगातार सेवन से नपुंसकता हो सकती है।
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Opium

You all know the use of opium for intoxication, but today here we will discuss about the medicinal properties of opium. Opium (Afeem) is obtained from poppy shoots, which are grown on cultivated plants. Poppy is cultivated in Bihar, eastern Uttar Pradesh, central and western India and Malwa in India. When poppy buds are fully developed, but are in raw state, then a condensed milk or latex comes out by making an incision in them. It is collected and dried. This is the commercial and medicinal opium. Poppy seeds are cool, mild, receptive, bitter, astringent, phlegmatic, phlegmatic and dry, drying metals, seductive and generating interest.

What is opium?

Poppy is a semi-annual plant from one and a half feet to four feet, in which the leaves are 4 inches long - wide, sessile, heart-shaped and the trunk is attached. The flower is single, blueish white, the underside is purple. The fruits are round oval like pomegranate. It has a griva at the bottom and a fringed peak at the top. When the fruit is ripe, small small holes are formed at the bottom of the kangoor for dehiscence.

Mainly according to the color of flowers it is of three types-

  • Powdered white (poppy white)
  • Red (Poppy Mansoor)
  • black or blue (poppy seed)
अफीम के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

Know about the benefits, harms, uses and medicinal properties of opium

Poppy seeds contain a sweet, stable oil of light yellow color, which is called rogan poppy seed. Alkalites are found in opium like morphine, narcotine and codeine. Apart from this, many primary and secondary alkalites, organic acids, lactic acid and meconic acid etc., organic acids, water, glucose, fat, flaxseed oil etc. are found in it.

in headache

Grind one gram opium and two cloves and apply it on the head, it provides relief in headache and headache due to cold.

in eye disease

Its paste is very beneficial in eye pain and other eye diseases.

nosebleeds problem

Grind both opium and kundru gum with equal quantity of water and sniff it, it stops nosebleeds.

अफीम के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

for hair

Grinding the seeds of post in milk and applying it on the head, boils and dandruff are cleared on the head.

in toothache

Putting both 16 mg opium and 125 mg Nausadar in the molar ends the pain of the molar and keeping it in the hole of the tooth cures colic.

itching problem

Mixing opium with sesame oil and massaging it ends itching.

leech sting

If the sting of a leech is cooked, then grinding its grains on it and applying it provides relief.

in fever

Fever is cured by taking 1 ball of opium and 7 black peppercorns and giving it both times.

hoarseness problem

By gargling opium balls and carom seeds, the sitting voice is opened.

cough problem

Make a quart of 60 grams of lozenges along with seeds, mix 50 grams of bad and take it after making sherbet, it ends cough.

uterine pain

The pain of the uterus ends by taking opium bales after delivery.

अफीम के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

Side Effects of Opium

  • Consumption of opium in excessive quantity is nuisance and it leads to death.
  • Continuous consumption of opium can cause impotence.

अफीम (Afeem/Opium)

आदित्‍य एल-1 (Aditya-L1)

आदित्‍य एल-1 (Aditya-L1)


चाँद के बाद सूरज के पास चलते हैं। जी हाँ आदित्य एल1 सूर्य का अध्ययन करने वाला मिशन है। ISROने 2 सितंबर को देश का पहला सूर्य मिशन आदित्‍य एल-1 (Aditya-L1) लॉन्‍च किया। इसरो ने इसे पहला अंतरिक्ष आधारित वेधशाला श्रेणी का भारतीय सौर मिशन कहा है।
आदित्‍य एल-1 (Aditya-L1)
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने चांद के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 को सफलतापूर्वक उतारकर इतिहास रच दिया। इसी उत्साह को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी ने शनिवार (2 सितंबर) को आदित्य-एल1 मिशन को लॉन्च किया। इस मिशन का उद्देश्य सूर्य का अध्ययन करना है। 11 बजकर 50 मिनट पर इस मिशन को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्‍पेस सेंटर से लॉन्‍च कियागया था। आदित्‍य यान को पीएसएलवी-सी57 रॉकेट के जरिए लॉन्‍च कियागया। इसके बाद ये 4 महीने का सफर पूरा करते हुए L1 पॉइंट तक पहुंचेगा। 
आदित्‍य एल-1 (Aditya-L1)
भारत का आदित्‍य L1 पूरी तरह से स्‍वदेशी है। इस मिशन को बेंगलुरु के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स (IIA) ने तैयार किया है। इसरो के मुताबिक, आदित्य L-1 अपने साथ फोटोस्फीयर, क्रोमोस्फीयर और सूर्य की सबसे बाहरी परतों का निरीक्षण करने के लिए सात पेलोड ले गया, जिसमें से 4 पेलोड सूरज पर नज़र रखेंगे, बाकी 3 एल-1 पॉइंट के आसपास का अध्ययन करेंगे। 
आदित्‍य एल-1 (Aditya-L1)

आदित्य-एल1 क्या है?

आदित्य एल1 सूर्य का अध्ययन करने वाला मिशन है। इसके साथ ही इसरो ने इसे पहला अंतरिक्ष आधारित वेधशाला श्रेणी का भारतीय सौर मिशन कहा है। अंतरिक्ष यान को सूर्य-पृथ्वी प्रणाली के लैग्रेंजियन बिंदु 1 (एल1) के चारों ओर एक प्रभामंडल कक्षा में स्थापित करने की योजना है जो पृथ्वी से लगभग 15 लाख किमी दूर है। दरअसल, लैग्रेंजियन बिंदु वे हैं जहां दो वस्तुओं के बीच कार्य करने वाले सभी गुरुत्वाकर्षण बल एक-दूसरे को निष्प्रभावी कर देते हैं। इस वजह से एल1 बिंदु का उपयोग अंतरिक्ष यान के उड़ने के लिए किया जा सकता है।

मिशन के उद्देश्य क्या हैं?

भारत का महत्वाकांक्षी सौर मिशन आदित्य एल-1 सौर कोरोना (सूर्य के वायुमंडल का सबसे बाहरी भाग) की बनावट और इसके तपने की प्रक्रिया, इसके तापमान, सौर विस्फोट और सौर तूफान के कारण और उत्पत्ति, कोरोना और कोरोनल लूप प्लाज्मा की बनावट, वेग और घनत्व, कोरोना के चुंबकीय क्षेत्र की माप, कोरोनल मास इजेक्शन (सूरज में होने वाले सबसे शक्तिशाली विस्फोट जो सीधे पृथ्वी की ओर आते हैं) की उत्पत्ति, विकास और गति, सौर हवाएं और अंतरिक्ष के मौसम को प्रभावित करने वाले कारकों का अध्ययन करेगा।
आदित्‍य एल-1 (Aditya-L1)

सूर्य का अध्ययन जरूरी क्यों?

सूर्य निकटतम तारा है और इसलिए अन्य तारों की तुलना में इसका अधिक विस्तार से अध्ययन किया जा सकता है।  इसरो के मुताबिक, सूर्य का अध्ययन करके हम अपनी आकाशगंगा के तारों के साथ-साथ कई अन्य आकाशगंगाओं के तारों के बारे में भी बहुत कुछ जान सकते हैं। सूर्य एक अत्यंत गतिशील तारा है जो हम जो देखते हैं उससे कहीं अधिक फैला हुआ है। इसमें कई विस्फोटकारी घटनाएं होती हैं इसके साथ ही सौर मंडल में भारी मात्रा में ऊर्जा भी छोड़ता है।

भारतीय रेलवे || Indian Railway ||

भारतीय रेलवे (Indian Railway)

भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्कों में से एक है। इसे दुनिया में 8वें सबसे बड़े नौकरीदाता के रूप में भी मान्यता प्राप्त है। आज हम यहाँ एक ऐसे रेलवे स्टेशन के बारे में बात करने जा रहे हैं, जिसका नाम बहुत कम लोग पढ़ पाते है।

भारतीय रेलवे || Indian Railway ||

भारतीय रेलवे से जुड़े कई ऐसे रोचक तथ्य हैं, जिनसे शायद सभी लोग परिचित नहीं होंगे। इनमें से कुछ के बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं। 

सबसे लंबे नाम वाला रेलवे स्टेशन-

वेंकटनारसिम्हाराजुवरिपेटा (Venkatanarasimharajuvaripeta) इतना बड़ा नाम कि पढ़ते-पढ़ते जुबान भी लड़खड़ा सकती है। भारत के सभी रेलवे स्टेशनों का नाम वेंकटनारसिम्हाराजुवरिपेटा रेलवे स्टेशन के नाम से छोटा है। यह रेलवे स्टेशन अपने नाम के लिए मशहूर है। गौर करने वाली बात यह है कि इसमें 28 अक्षर हैं। छोटे वाक्य 28 से कम अक्षर में खत्म हो जाते हैं। इससे ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि रेलवे स्टेशन का नाम कितना बड़ा है। बोलने में आसानी हो इसलिए लोग इसे वेंकटनारसिंह राजुवरिपेट के नाम से भी बुलाते हैं। वेंकटनारसिम्हाराजुवरिपेटा आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में तमिलनाडु की सीमा पर स्थित है। 

सबसे छोटे नाम वाला रेलवे स्टेशन-

भारतीय रेलवे || Indian Railway ||

अभी आप ने देश के सबसे बड़े नाम वाले रेलवे स्टेशन के बारे में जाना। अब हम आपको देश के सबसे छोटे नाम वाले रेलवे स्टेशन के बारे में बताते हैं। सबसे छोटे नाम वाला रेलवे स्टेशन इब (IB) है। ओडिशा के झारसुगुडा में स्थित 'इब' रेलवे स्टेशन सिर्फ दो अक्षर में सिमट जता है। 'इब' हावड़ा-नागपुर-मुंबई रेलवे लाइन पर स्थित है। इस स्टेशन पर सिर्फ 2 प्लेटफार्म हैं। यही कारण है कि इस स्टेशन से ज्यादा ट्रेनें नहीं गुजरती, ट्रेनों का स्टॉपेज भी सिर्फ दो मिनट का ही है। 

भारतीय रेलवे से जुड़े कुछ और रोचक तथ्य इस प्रकार हैं।

  1. भारत का सबसे लंबा रेल-रोड ब्रिज असम में ब्रह्मपुत्र नदी पर बना बोगीबील ब्रिज है। 
  2. जम्मू और कश्मीर के मध्य में हिमालय के पीर पंजाल क्षेत्र में स्थित पीर पंजाल रेल सुरंग भारत की सबसे लंबी रेल सुरंग है। 
  3. भारतीय रेलवे में चार यूनेस्को-मान्यता प्राप्त विश्व धरोहर स्थल हैं। 
  4. 7 रेलवे लाइनें मथुरा जंक्शन से एक साथ निकलती हैं, जो कि अधिकतम रेल मार्गों वाला जंक्शन है। 
  5. भारतीय रेलवे का सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशन हावड़ा जंक्शन है, जिसमें सबसे अधिक प्लेटफॉर्म हैं। 
  6. गोरखपुर में दुनिया का सबसे लंबा प्लेटफॉर्म है, जिसकी लंबाई 4,483 फीट है।
गोरखपुर में दुनिया का सबसे लंबा प्लेटफॉर्म है, जिसकी लंबाई 4,483 फीट है।
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Indian Railways

Indian Railways is one of the largest rail networks in the world. It is also recognized as the 8th largest employer in the world. Today we are going to talk about such a railway station here, whose name very few people can read.

There are many such interesting facts related to Indian Railways, which probably not everyone will be familiar with. Today we are going to tell you about some of these.
भारतीय रेलवे || Indian Railway ||

Railway station with the longest name

Venkatanarasimharajuvaripeta (Venkatanarasimharajuvaripeta) is such a big name that even the tongue can falter while reading. The names of all railway stations in India are shortened to Venkatanarasimharajuvaripeta Railway Station. This railway station is famous for its name. The thing to note is that it has 28 letters. Short sentences end in less than 28 syllables. It can be estimated from this that how big is the name of the railway station. It is easy to speak, so people also call it by the name of Venkatnarasimha Rajuvaripet. Venkatanarasimharajuvaripeta is located in the Chittoor district of Andhra Pradesh bordering Tamil Nadu.

Railway station with the shortest name-

Now you have come to know about the railway station with the biggest name of the country. Now let us tell you about the railway station with the shortest name in the country. The railway station with the shortest name is IB. The 'IB' railway station located in Jharsuguda, Odisha is limited to just two letters. 'IB' is situated on the Howrah-Nagpur-Mumbai railway line. There are only 2 platforms at this station. This is the reason that not many trains pass through this station, the stoppage of trains is also of only two minutes.
भारतीय रेलवे || Indian Railway ||

Some more interesting facts related to Indian Railways are as follows.

  1. India's longest rail-road bridge is the Bogibeel Bridge over the Brahmaputra River in Assam.
  2. The Pir Panjal Rail Tunnel, located in the Pir Panjal region of the Himalayas in the middle of Jammu and Kashmir, is the longest rail tunnel in India.
  3. Indian Railways has four UNESCO-recognised World Heritage Sites.
  4. 7 railway lines simultaneously originate from Mathura Junction, which is the junction with the maximum number of rail routes.
  5. The busiest railway station of Indian Railways is Howrah Junction, which has the largest number of platforms.
  6. Gorakhpur has the longest platform in the world with a length of 4,483 feet.

"पंडित शिवकुमार शर्मा (Pandit Shiv Kumar Sharma)" का दिल का दौरा पड़ने से निधन

 "पंडित शिवकुमार शर्मा (Pandit Shiv Kumar Sharma)" का दिल का दौरा पड़ने से निधन

जन्म:13 जनवरी, 1938: मृत्यु- 10 मई, 2022

संजीत जगत में शोक का माहौल। प्रख्यात संगीतकार और संतूर वादक "पंडित शिवकुमार शर्मा (Pandit Shiv Kumar Sharma)" का दिल का दौरा पड़ने से कल  (10.05.2022) मुंबई में निधन हो गया। पंडित शिवकुमार शर्मा 84 वर्ष के थे। भारतीय संगीत को उनके खास अंदाज की वजह से अतंर्राष्ट्रीय पहचान मिली थी। पंडित शिव कुमार शर्मा ने फिल्मों में भी योगदान दिया था। 

"पंडित शिवकुमार शर्मा (Pandit Shiv Kumar Sharma)" का दिल का दौरा पड़ने से निधन जन्म:13 जनवरी, 1938: मृत्यु- 10 मई, 2022

भारत की महान शास्त्रीय संगीत परंपरा में संतूर एक अभिन्न अंग है, लेकिन इस लोक वाद्ययंत्र को शास्त्रीय परंपरा के एक अहम वाद्य के रूप में स्थापित करने का श्रेय पंडित शिवकुमार शर्मा जी को जाता है। 

खबरों के अनुसार, उनकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई है।  इतना ही नहीं, वह पिछले कई महीनों से किडनी से संबंधित समस्या से भी जूझ रहे थे, जिससे उन्हें डायलिसिस भी करानी पड़ती थी। उनका जन्म 13 जनवरी 1938 को जम्मू में हुआ था।  उनके पिता उमा दत्त शर्मा भी एक गायक थे। उन्होंने ही पांच साल की उम्र से बेटे शिव कुमार को तबला और संगीत सिखाना शुरू किया था। शिवकुमार शर्मा ने एक साक्षात्कार में बताया था कि उनकी माँ का यह सपना था कि वे भारतीय शास्त्रीय संगीत को संतूर पर बजाने वाले प्रथम संगीतज्ञ बनें। इस प्रकार उन्होंने 13 वर्ष की आयु में संतूर सीखना शुरू कर दिया तथा अपनी माँ का सपना पूरा किया।

"पंडित शिवकुमार शर्मा (Pandit Shiv Kumar Sharma)" का दिल का दौरा पड़ने से निधन जन्म:13 जनवरी, 1938: मृत्यु- 10 मई, 2022

शिवकुमार शर्मा को कई राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है-

  • सन 1985 में उन्हें अमरीका के बोल्टिमोर शहर की सम्माननीय नागरिकता प्रदान की गई।
  • सन 1986 में शिवकुमार शर्मा को 'संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार' से सम्मानित किया गया।
  • सन 1991 में उन्हें 'पद्मश्री पुरस्कार' से सम्मानित किया गया।
  • सन 2001 में उन्हें 'पद्म विभूषण पुरस्कार' से सम्मानित किया गया।
"पंडित शिवकुमार शर्मा (Pandit Shiv Kumar Sharma)" का दिल का दौरा पड़ने से निधन जन्म:13 जनवरी, 1938: मृत्यु- 10 मई, 2022
RIP 

सीडीएस जनरल बिपिन रावत / CDS General Bipin Rawat

सीडीएस जनरल बिपिन रावत

सीडीएस जनरल बिपिन रावत यह कोई साधारण नाम नहीं है, अपितु शौर्य और साहस का दूसरा नाम है। 8 दिसंबर से सबके जुबान पर एक ही नाम है जनरल बिपिन रावत। देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत तमिलनाडु के कुन्नूर में सेना के चौक पर विमान हादसे में दुनिया को अलविदा कह गए। जनरल बिपिन रावत के साथ ही इस हादसे में उनकी पत्नी मधुलिका रावत और 11 सैन्य अधिकारी नहीं रहे।

देश सेवा में अहम् योगदान देने वाले CDS विपिन रावत को शत शत नमन

जनरल बिपिन रावत एक बार और सुर्खियों में रहे थे, जब उन्होंने सेना की कमान संभालने के दौरान पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक, डोकलाम में चीनी सेना को पीछे धकेलना और जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 लगने के बाद माहौल को संभालने समेत कई कारनामे को अंजाम दिया था। यह गोरखा रेजीमेंट के चौथे अधिकारी थे, जो देश के सेना अध्यक्ष बने।

जनरल बिपिन रावत PVSM, UYSM, AVSM, SM, VSM, ADC (16 मार्च 1958 से 8 दिसंबर 2021) भारत के पहले रक्षा प्रमुख या चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ थे। उन्होंने 1 जनवरी 2020 को रक्षा प्रमुख के पद का भार ग्रहण किया। इससे पूर्व वह भारतीय थल सेनाध्यक्ष के पद पर 31 दिसंबर 2016 से 31 दिसंबर 2019 तक रहे। 8 दिसंबर 2021 को एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में 63 वर्ष की आयु में जनरल रावत का निधन हो गया। 

जनरल बिपिन रावत 2019 में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ सीडीएस का पद संभालने वाले भारतीय सशस्त्र बलों के पहले अधिकारी बने। जनरल बिपिन रावत के कार्यों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सरकार ने सेना प्रमुख पद से उनकी सेवानिवृत्ति से ठीक पहले उन्हें CDS के लिए नामित कर दिया। CDS में उनका कार्यकाल 2022 में खत्म होना था, लेकिन इससे पहले ही उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।
देश सेवा में अहम् योगदान देने वाले CDS विपिन रावत को शत शत नमन

गोरखा रेजीमेंट से सेना प्रमुख तक का सफर

जनरल बिपिन रावत गोरखा रेजीमेंट के चौथे अधिकारी थे, जो सेना अध्यक्ष बने थे। सीडीएस के रूप में जनरल रावत सेना से संबंधित मामलों पर सरकार के एकल बिंदु सलाहकार थे। इस भूमिका में जनरल रावत ने सशस्त्र बलों के 3 विंग भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना और भारतीय नौसेना के बीच बेहतर तालमेल पर ध्यान केंद्रित किया। जनरल रावत को। 30 दिसंबर 2016 को सेनाध्यक्ष नियुक्त किया गया था। 30 दिसंबर 2019 को जनरल रावत को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ नियुक्त किया गया था।
गोरखा रेजीमेंट से सेना प्रमुख तक का सफर

जनरल बिपिन रावत का बेदाग सैन्य करियर

जनरल रावत ने एक ब्रिगेड कमांडर, जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ (जीओसी - सी) दक्षिणी कमान, सैन्य संचालन निदेशालय में जनरल स्टाफ ऑफिसर, कर्नल सैन्य सचिव और उप सैन्य सचिव की सेवा में चार दशक बिताएं। जनरल रावत जूनियर विंग में सचिव की शाखा और वरिष्ठ प्रशिक्षक के पद पर भी रहे। वह संयुक्त राष्ट्र शांति सेना यूएनपीएफ का भी हिस्सा थे और उन्होंने कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में एक बहुराष्ट्रीय ब्रिगेड की कमान संभाली थी।
जनरल बिपिन रावत का बेदाग सैन्य करियर

2015 में उग्रवादियों को सफलतापूर्वक जवाब दिया

2015 में भारतीय सेना ने नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड - खापलांग (NSCN-K) के उग्रवादियों द्वारा किए गए घात का सफलतापूर्वक जवाब दिया। जनरल रावत ने उस मिशन की निगरानी की थी, जिसे III कोर आयोजित किया गया था।

2016 सर्जिकल स्ट्राइक में उड़ाई पार्क की नींद

अपने बेहद सफल कैरियर में जनरल बिपिन रावत के नाम कई उपलब्धियां है। जनरल रावत ने पूर्वोत्तर में उग्रवाद को नियंत्रित करने, म्यांमार में 2015 सीमा पर ऑपरेशन की निगरानी और 2016 के सर्जिकल स्ट्राइक की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

2017 लोकलाम में चीन को पीछे धकेला

2017 में लोकनाम में भारतीय और चीनी सेनाएं आमने-सामने थी। चीन लोकलाम में के एक हिस्से में सड़क बना रहा था, लेकिन भारतीय सेना के कड़े विरोध के बाद दोनों सेनाओं के बीच युद्ध जैसी स्थिति आ गई थी। 70 से ज्यादा दिनों तक यह विवाद चला लेकिन सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत की अगुवाई में भारतीय सेना ने चीनी सेना का डटकर सामना किया और चीन को पीछे होने पर मजबूर किया।
जनरल बिपिन रावत का बेदाग सैन्य करियर

2017 में कश्मीर में ऑपरेशन ऑल आउट

जम्मू कश्मीर में पाकिस्तान की तरफ से फैलाए जा रहे आतंक में पिछले कुछ दशकों से अपनी जड़े जमा ली हैं।  विपिन रावत के कमान संभालने के बाद 2017 में भारतीय सेना की तरफ से "ऑपरेशन ऑल आउट" लांच किया गया। इस ऑपरेशन के जरिए जम्मू कश्मीर में कई आतंकी संगठनों को ठिकाने लगाया गया।

2019 में जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद संभाला मोर्चा

केंद्र सरकार ने 2019 में जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटा दिया था। इस दौरान मोदी सरकार के सामने घाटी में शांति की कड़ी चुनौती थी। ऐसे में सरकार ने बड़ी संख्या में सेना के जवान कश्मीर में तैनात किए। तब सेना प्रमुख बिपिन रावत ने ही पूरी जिम्मेदारी संभाली और कश्मीर में मोर्चा संभाला था।

परम विशिष्ट सेवा मेडल, उत्तम युद्ध सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, विशिष्ट सेवा मेडल, युद्ध सेवा मेडल और सेना मेडल से अलंकृत जनरल बिपिन रावत ने भारतीय सेना में विशिष्ट सेवा की थी।
सीडीएस जनरल बिपिन रावत की अंतिम यात्रा में शामिल हुए 4 पड़ोसी देशों के टॉप कमांडर

सीडीएस जनरल बिपिन रावत की अंतिम यात्रा में शामिल हुए 4 पड़ोसी देशों के टॉप कमांडर

देश के शीर्ष सैन्य अधिकारी सीडीएस जनरल बिपिन रावत की अंतिम यात्रा में हजारों लोग शामिल हुए। इस अंतिम यात्रा में आम लोगों के साथ ही पड़ोसी देश श्रीलंका, भूटान, बांग्लादेश और नेपाल के टॉप कमांडर भी शामिल हुए।

सीडीएस जनरल बिपिन रावत की प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

विपिन लक्ष्मण सिंह रावत का जन्म 16 मार्च 1958 को उत्तराखंड के गढ़वाल जिले के पौड़ी में हुआ था। इनका परिवार कई पीढ़ियों से भारतीय सेना में सेवा दे रहा था। इनके पिता लक्ष्मण सिंह रावत पौड़ी गढ़वाल जिले के सैंजी गांव से थे और लेफ्टिनेंट जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए। इनकी माता उत्तरकाशी जिले से थी और उत्तरकाशी विधानसभा से विधायक रह चुके किशन सिंह परमार की पुत्री थी।
सीडीएस जनरल बिपिन रावत की प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

जनरल रावत की शुरुआती शिक्षा देहरादून के कैंब्रियन हॉल स्कूल और शिमला के सेंट एडवर्ड स्कूल में हुई। इसके बाद उन्होंने खड़कवासला स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में दाखिला लिया। इसके बाद रावत ने भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून से प्रथम श्रेणी में स्नातक की उपाधि प्राप्त की और यहां उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए 'सोर्ड ऑफ ऑनर' अवार्ड दिया गया। 
सीडीएस बिपिन रावत के 8 बयान जो भर देते हैं जोश

रावत ने डिफेंस सर्विसेज, स्टाफ कॉलेज वेलिंगटन से भी स्नातक की शिक्षा ली और फ़ोर्ट लेवेनवर्थ, कन्सा, स्थित यूनाइटेड स्टेट आर्मी कमांड एवं जनरल ऑफ कॉलेज से 1997 में उपाधि ग्रहण की। बाद में रावत ने मद्रास विश्वविद्यालय से रक्षा अध्ययन विषय में एमफिल की उपाधि एवं प्रबंधन एवं कंप्यूटर अध्ययन में डिप्लोमा भी प्राप्त किया। वर्ष 2011 में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से इन्हें सैन्य मीडिया अध्ययन के क्षेत्र में शोध के लिए पीएचडी की मानद उपाधि दी गई।

सीडीएस बिपिन रावत के 8 बयान जो भर देते हैं जोश

जनरल रावत की स्पीच, जो हर किसी को जोश से भर दे:-
सीडीएस बिपिन रावत के 8 बयान जो भर देते हैं जोश
  • कश्मीर में मानवाधिकारों के हनन पर एक रिपोर्ट आई थी। उस पर जनरल बिपिन रावत ने कहा था - "मुझे नहीं लगता है कि हमें इस रिपोर्ट को गंभीरता से लेनी चाहिए। इसमें से कई रिपोर्ट दुर्भावना से प्रेरित होती हैं। मानवाधिकारों को लेकर भारतीय सेना का रिकॉर्ड काफी बेहतर है।
  • मैं नहीं मानता कि रेडिकलाइजेशन से मुकाबला नहीं किया जा सकता। जो भी चीज शुरू हुई है उसका अंत भी तय है। रेडिकलाइजेशन से निपटा जा सकता है। इसके लिए आपको वहां नजर रखनी होगी, जहां यह हो रहा है ? कौन लोग इस काम को अंजाम दे रहे हैं ? यह काम स्कूलों, यूनिवर्सिटी और धार्मिक स्थानों में हो रहा है। कुछ लोगों का समूह है, जो इस कट्टरता को फैला रहा है।
सीडीएस बिपिन रावत के 8 बयान जो भर देते हैं जोश
  • हम जानते हैं कि संघर्ष में केवल परिणाम होता है, जो जीत है। जंग का एक ही उसूल है, वह है जीत। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि हम इसे हर कीमत पर पूरा करेंगे।
  • हम नया करने और स्वदेशी बनाने के लिए दृढ़ है। हम समाधान के साथ ही युद्ध लड़ने के लिए दृढ़ है। खामोशी से बनाते रहो पहचान अपनी, हवा खुद तुम्हारा तराना गाएगी।
  • जनरल बिपिन रावत ने पड़ोसी देश पाकिस्तान को किसी भी साहस की कोशिश ना करने की चेतावनी देते हुए कहा था - "सीमाओं पर घुसपैठ कम हुई है क्योंकि इस्लामाबाद अच्छी तरह जानता है कि अगर वह घुसपैठ करते हैं, तो उन्हें फिर से वापस लौटना होगा।"
  • सभी रक्षा सेवाओं को हर समय तैयार रहने का आह्वान करते हुए जनरल बिपिन रावत ने कहा था - "किसी स्थिति की भविष्यवाणी करना मुश्किल है। सेना हमेशा किसी भी काम के लिए तैयार रहती है, जो उन्हें सौंपा जा सकता है।"
  • जनरल रावत सेना में भर्ती होने के इच्छुक जवानों के लिए कहते हैं कि - "सेना में नौकरी के लिए मत आना। नौकरी के लिए और भी बहुत क्षेत्र हैं, जहां आप रोजगार कमा सकते हैं। अगर आपको आर्मी में आना है, तो खुद को तन और मन से सुदृढ़ बनाएं।"
  • जनरल बिपिन रावत ने दुश्मनों को चुनौती देते हुए कहा था कि पहली गोली हमारी नहीं होगी, परंतु उसके बाद हम गोलियों की गिनती भी नहीं करेंगे।
सीडीएस जनरल बिपिन रावत  /  CDS General Bipin Rawat

देश सेवा में अहम् योगदान देने वाले CDS विपिन रावत को शत शत नमन 

सोनू सूद के चौकानेवाले कारनामें / Shocking Feats of Sonu Sood

सोनू सूद के चौकानेवाले कारनामें

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि सोनू सूद पिछले साल लॉकडाउन में हजारों लोगों को बस सेवा देने, विदेश में जो बच्चे फंसे थे उन्हें स्वदेश वापस आने की व्यवस्था और कई तरह की बीमारियों में लोगों की मदद करने इत्यादि में काफी चर्चा में रहे, और इस साल इनकम टैक्स रेड की वजह से चर्चा में आ गए हैं।

सोनू सूद के चौकानेवाले कारनामें क्या हैं

सोनू सूद को लेकर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का दावा है कि क्राउड फंडिंग के जरिए ₹20 करोड़ की निधि जमा की है इसके अलावा  ₹65 करोड़ नकली कांट्रैक्ट के माध्यम से जुटाए हैं और 175 करोड़ रुपए के सर्कुलर और संदेहास्पद ट्रांजैक्शन किए हैं। कुल मिलाकर उन पर ढाई सौ करोड़ रुपए के वित्तीय अनियमितताएं का आरोप लगा है।

तो आज हम इस ब्लॉग के माध्यम से जानेंगे कि सोनू सूद के चौकानेवाले कारनामें क्या हैं-

जैसा कि आप जानते हैं पिछले साल मोदी जी लॉकडाउन लगाया, लॉकडाउन लगाते ही बसें, ट्रेनें सब कुछ बंद, लोगों का आना जाना बंद, घर से बाहर निकलना बंद। उस समय हजारों-लाखों की संख्या में बेचारे गरीब मजदूर सड़कों पर आ गए और 100 किलोमीटर 1000 किलोमीटर की पैदल यात्रा करके अपने घर पहुंचने की कोशिश कर रहे थे। उस समय ना किसी नेता ने, कोई एमपी, कोई एमएलए ने घर से निकल कर इनकी मदद की, ना कोई टैक्सी दिया ना कोई बस दिया। जब रैली करते हैं तो हजारों की संख्या में बसों में भर भर के लोगों को ले जाते हैं पर उस समय किसी ने भी इन मजदूरों की मदद नहीं की, लेकिन उस पीरियड में ये मसीहा निकल के आए जिनका नाम सोनू सूद है, हीरो थे, पर नो लाइट, नो कैमरा सिर्फ एक्शन लेना शुरू कर दिये।सोनू सूद का उस समय का एक्शन था जब हर नेता, हर मंत्री, हर कोई अपने घर में दुबका हुआ बैठा था, उस समय ये सड़क पर निकले और उन्होंने हजारों लाखों व्यक्तियों को बस के द्वारा उनके घर तक पहुंचाया,यही नहीं पूरे lock-down भर ये बाहर घूमते रहे और काफी सारे लोगों को खाना-पीना और रहने की व्यवस्था करते रहे। उस समय काफी सारे लोगों ने उन्हें मसीहा बना डाला।

कई सारे कैंपेन भी चलाये जिसमें सोनू सूद का IlajIndia कैंपेन था जो असमर्थ थे पैसे खर्च करने में उनके इलाज भी करवाया।

'पैसे के अभाव में अब किसी का इलाज नहीं रुकेगा'

उसके बाद उन्होंने एक सीनियर सिटीजन के लिए एक ड्राइव चलाया जिसका नाम 'Ruk Jana Nahi' है, जिनके घुटने में समस्या है,चल नहीं पा रहे,उनका इलाज करवाना शुरू किया।

फिर 'Free Graduation 'इसके अंतर्गत जिन बच्चों को एमबीबीएस, इंजीनियरिंग,आईएएस का कोचिंग करना है पर पैसे की कमी से नहीं कर पा रहे हैं, तो उनकी मदद करना शुरू किए।

A Sonu Sood Initiative - Free Graduation

इसके अलावा किसी को ट्रैक्टर या ऑटो रिक्शा या छोटे-मोटे काम करने के लिए साधन की जरूरत पड़ती है, इस तरह से काफी तरह की मदद इन्होंने की।

एक और कैंपेन चलाया 'Pravasi Rozgar Yojna'जो प्रवासी भारतीय थे उन को रोजगार देने का काम शुरू किया।

A Sonu Sood Initiative - 'Pravasi Rozgar Yojna'

यह सब काम किया सोनू सूद ने, इसके बाद उनके यहां इनकम टैक्स की रेड पड़ती है। इस रेड में उनके 28 प्रॉपर्टीज पर पूरे 4 दिन तक रेड चली है। पूरा भयंकर तरीके से पैसा इकट्ठा किया ये सब पुण्य का काम करके, इसलिए इनके यहां 4 दिन तक रेड चली।

जब रेड पड़ी सोनू सूद के घर पर तो इनकम टैक्स वालों को 1. 53000 मदद के लिए ईमेल मिले

             2.8000 लीवर/कीडनी फेल्योर के व्हाट्सएप मैसेजेस मिले,और पेपर मिले जिसका उन्होंने इलाज करवाया है।

             3. कई सारे एजुकेशन पेपर मिले, जिन बच्चों को एजुकेशन दिलवाया है। 

इनकम टैक्स वालों ने पाया कि 18.94 करोड़ रुपए चंदे से कलेक्ट किए गए जिसमें से 1.9 करोड़ खर्च हो पाए।

इसके ऊपर सोनू सूद का कहना है कि ये पैसे पिछले 4 महीने में इकट्ठे हुए हैं, इन पैसों को आराम से खर्च करूंगा यह देखकर कि ज़रूरतें कैसी हैं, जैसे-जैसे मुझे जरूरत होगी इसको खर्च करूंगा।

दूसरा इल्जाम इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने लगाया है कि F.C.R.A के तहत 2.1 करोड़ का रकम लिया है।

इसपर सोनू सूद का कहना है कि जब मेरा एफसीआरए में रजिस्ट्रेशन ही नहीं है तो यहां मैंने चंदा लिया ही नहीं है।

तीसरा ये है  कि इन्होंने बोगस रिसिप्ट से ₹65 करोड़ इकट्ठे किए हैं।

यह भी इल्जाम बाद में गलत ही साबित होगा।

चौथा यह है कि उन्होंने ₹175करोड़ डॉउट फूल ट्रांजैक्शन किया है जो कि Joint Venture (JV) कंपनी के साथ मिलकर की है।

यह भी एक बोगस इल्जाम है, यह साबित नहीं हो सकता।

पांचवा है कि ₹20करोड़ अनपेड है, मतलब इनकम टैक्स चोरी है।

यह भी कोर्ट में जब जाएगा तो साबित नहीं हो पाएगा।

अब सच्चाई यह है कि 2018-19 में हमारे देश की जो सात नेशनल पार्टी है उनको जो चंदा मिला है उसका 67%  की कोई जानकारी नहीं है कि वह कहां से आया है, इसमें सिर्फ बीजेपी को 1612 करोड़ मिले हैं। 1 साल में 1612 करोड़ रुपए का पता ही नहीं है कि ये आया कहां से है।

मतलब, ये पॉलिटिकल पार्टियां अपने हिसाब से हजारों करोड़ों रुपया ले सकतीं हैं, मगर कोई इंसान मदद के लिए ले तो इन्हें दिक्कत होती है, इनकम टैक्स की रेड पड़ती है।

अब आइए जानते हैं कि सोनू सूद ने ऐसा क्या गुनाह कर दिया कि इनके ऊपर 4 दिन तक 28 ठिकानों पर इनकम टैक्स की रेड पड़ी-

पहला गुनाह ये है, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोनू सूद को 'देश का  मेंटर' यानी दिल्ली का ब्रांड एंबेस्डर बना दिया।

दूसरा गुनाह यह है कि सोनू सूद जी पंजाब चले गए और वहां पर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सोनू सूद को 'कोविड वैक्सीनेशन ड्राइव' का ब्रांड अंबेसडर बना दिया।

इसके अलावा जब अखबार मीडिया और जगह-जगह चैनल पर यह हेडलाइंस आने लगते हैं 'सोनू सूद टैक्स चोर है' इससे समाज में अविश्वास की लहर उठती है कि  "हर आदमी चोर है, भलाई के पीछे सब अपना मतलब निकलता है, कौन बिना मतलब के दूसरे की भलाई करना चाहता है आज के समय में।"

         इससे जो सोशल ब्रेक होता है तो वो लोग यही चाहते हैं की "तोड़ो और राज करो"।

हर कोई इतनी बारीकी से एनालाइज नहीं कर पाता है, उन्हें जो दिखाया जाता है वही सच्चाई समझ लेते हैं। इससे समाज के बहुत बड़े हिस्से में अविश्वास फैल जाता है, और धर्म की आड़ में भी सोशल ब्रेकिंग करके एक दूसरे से तोड़ा जाता है जिससे वह तोड़ो और राज करो की पद्धति अपना सकें।मेरी यही विनती है इन सब चीजों को समाज में ज्यादा से ज्यादा फैलाए जिससे लोगों में विश्वास की भावना बनी रहे।

जय हिंद जय भारत!

English Translate

Shocking Feats of Sonu Sood

As we all know that Sonu Sood was in a lot of discussion last year for providing bus service to thousands of people in lockdown, arranging for children who were stranded abroad to come back home and helping people in many diseases etc., and This year income tax has come into the limelight because of the raid.

सोनू सूद की जरूरी योजनाएं जो कम लोग ही जानते हैं

Regarding Sonu Sood, the Income Tax Department claims that it has deposited a fund of ₹ 20 crore through crowd funding, besides ₹ 65 crore has been raised through fake contracts and circular and suspicious transactions of Rs 175 crore have been made. In all, he has been accused of financial irregularities of Rs.

So today we will know through this blog what are the shocking exploits of Sonu Sood-


As you know, last year Modi ji imposed a lockdown, buses, trains, everything stopped as soon as the lockdown was imposed, people stopped coming and going out of the house. At that time thousands and lakhs of poor laborers came on the roads and were trying to reach their homes after traveling 100 kms 1000 kms. At that time no leader, no MP, no MLA came out of the house and helped them, neither gave any taxi nor gave any bus. When they rally, they take thousands of people in buses, but at that time no one helped these laborers, but in that period this messiah came out, whose name is Sonu Sood, he was a hero, But no light, no camera just started taking action. Sonu Sood's action was at that time when every leader, every minister, everyone was sitting lurking in his house, at that time he came out on the road and he killed thousands and lakhs of people. He was taken to his house by bus, not only this, he roamed outside throughout the entire lock-down and kept arranging food and drink and lodging for many people. At that time many people made him the Messiah.


He also ran many campaigns, including Sonu Sood's UlajIndia campaign, who were unable to spend the money, also got him treated.

After that he did a drive for a senior citizen named 'Ruk Jana Nahi', who has knee problem, unable to walk, started getting him treated.

'Ruk Jana Nahi' A Sonu Sood Initiative

Then under 'Free Graduation', children who want to do MBBS, Engineering, IAS coaching but are unable to do it due to lack of money, then started helping them.

Apart from this, one needs tractor or auto rickshaw or means to do small work, in this way they helped a lot.

Another campaign launched 'Pravasi Rozgar Yojna' started the work of providing employment to those who were NRIs.

A Sonu Sood Initiative - 'Pravasi Rozgar Yojna'

Sonu Sood did all this work, after this there is a raid of income tax here. In this raid, their 28 properties have been raided for a full 4 days. Collected money in a terrible way by doing all this virtuous work, so the raid went on for 4 days.

When the raid took place at Sonu Sood's house, the income tax people got 1.53000 emails for help

             2.8000 WhatsApp messages of liver/kidney failure were found, and papers were found for which he has got treatment.

             3. Many education papers were found, children who have got education.

A Sonu Sood Initiative

Income Tax officials found that Rs 18.94 crore was collected from donations out of which 1.9 crore could be spent.

On this Sonu Sood says that this money has been collected in the last 4 months, I will spend this money comfortably seeing how the needs are, I will spend it as and when I need it.

The second allegation has been made by the Income Tax Department that an amount of 2.1 crores has been taken under F.C.R.A.

On this, Sonu Sood says that when I do not have registration in FCRA, then I have not taken donations here.

The third is that they have collected ₹ 65 crores from bogus receipts.

This allegation would later prove to be false.

Fourth is that he has done ₹175 crore doubtful transaction which is done in association with Joint Venture (JV) company.

This is also a bogus allegation, it cannot be proved.

The fifth is that ₹ 20 crore is unpaid, which means income tax evasion.


This too will not be proved when it goes to court.

Now the truth is that 67% of the donations received by the seven national parties of our country in 2018-19 have no idea where it has come from, in which only BJP has got 1612 crores. Rs 1612 crore in 1 year is not known from where it came.

Meaning, these political parties can take thousands of crores of rupees according to their own accord, but if someone takes someone for help, they face problems, there is a raid of income tax.

Now let us know that what crime did Sonu Sood commit that for 4 days there was an income tax raid on 28 places-


The first crime is that, Delhi Chief Minister Arvind Kejriwal made Sonu Sood the 'mentor of the country' i.e. the brand ambassador of Delhi.

The second crime is that Sonu Sood went to Punjab and there Chief Minister Captain Amarinder Singh made Sonu Sood the brand ambassador of 'Covid Vaccination Drive'.

Apart from this, when these headlines start appearing in newspapers, media and channels, 'Sonu Sood is a tax thief', this creates a wave of disbelief in the society that "every man is a thief, everyone has their own meaning behind goodness, who is without any meaning." wants to do good to others in today's time."

         The social break that happens due to this is what those people want to "break and rule".

मोटेरा स्टेडियम ~ नरेंद्र मोदी स्टेडियम ~ सरदार पटेल स्टेडियम

मोटेरा स्टेडियम ~ नरेंद्र मोदी स्टेडियम ~ सरदार पटेल स्टेडियम

मोटेरा स्टेडियम ~ नरेंद्र मोदी स्टेडियम ~ सरदार पटेल स्टेडियम

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 24 फरवरी 2021 ( बुधवार) को गुजरात के अहमदाबाद में विश्व के सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम (मोटेरा स्टेडियम ~ नरेंद्र मोदी स्टेडियम ~ सरदार पटेल स्टेडियम) का उद्घाटन किया। उद्घाटन में मोटेरा स्टेडियम का नाम बदलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर रखा गया। इसे अब तक सरदार पटेल या मोटेरा स्टेडियम के नाम से जाना जाता था। अहमदाबाद के मोटेरा इलाके में स्थित सरदार पटेल क्रिकेट स्टेडियम अब दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट ग्राउंड हो गया है। (मोटेरा स्टेडियम ~ नरेंद्र मोदी स्टेडियम ~ सरदार पटेल स्टेडियम)


मोटेरा स्टेडियम ~ नरेंद्र मोदी स्टेडियम ~ सरदार पटेल स्टेडियम

इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री और गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित शाह, गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत,खेल मंत्री किरण रिजिजू और बीसीसीआई सचिव जय शाह मौजूद रहे।

 कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि-"आज भारत के खेल जगत का स्वर्णिम दिन है। आज भारत के राष्ट्रपति जी के कर -कमलों से लौह पुरुष भारत रत्न सरदार पटेल जी के नाम से जोड़कर एक बड़े स्पोर्ट्स एनक्लेव का भूमि पूजन हुआ है"। उन्होंने कहा कि "सरदार पटेल स्पोर्ट्स एनक्लेव में विश्व की सभी खेलों की व्यवस्था होगी। देश और दुनिया के सभी खेलों के सभी खिलाड़ियों की ट्रेनिंग और रहने की सुविधा भी होगी"। अमित शाह जी ने कहा कि "यहां 3000 बच्चों के एक साथ खेलने और रहने की व्यवस्था होगी"। उन्होंने बताया कि "सरदार पटेल स्पोर्ट्स एनक्लेव, नरेंद्र मोदी स्टेडियम और नारायणपुरा में बनने वाले स्पोर्ट्स कंपलेक्स यह तीनों मिलाकर किसी भी अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में खेलने वाले सभी खेलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने की पूरी व्यवस्था एक ही शहर में एक ही स्थान पर होगी, और अहमदाबाद को अब एक स्पोर्ट्स सिटी के नाम से जाना जाएगा"। अमित शाह जी ने कहा कि "सरदार पटेल स्पोर्ट्स एनक्लेव का भी भूमि पूजन आज किया है। हमारे देश को जरूरत है कि हमारे देश के युवा अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में दिखाई दे और मेडल जीते।मोदी जी ने इस स्पोर्ट्स एनक्लेव को बनाकर इस क्षेत्र को बहुत बड़ा उपहार दिया है"।

मोटेरा स्टेडियम ~ नरेंद्र मोदी स्टेडियम ~ सरदार पटेल स्टेडियम

मोटेरा स्टेडियम की खास बातें-

 * अहमदाबाद के साबरमती तट के निकट स्थिति यह स्टेडियम आधुनिक खेल सुविधाओं से सुसज्जित है और यहां एक साथ 1.32 लाख लोग बैठकर मैच देख सकते हैं। 

* यह स्टेडियम 63 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। स्टेडियम में चार ड्रेसिंग रूम और तीन प्रैक्टिस ग्राउंड है।

* क्रिकेट मैदान के साथ यहां पर 236 एकड़ में फैले इस मोटेरा स्टेडियम में एथलेटिक्स ट्रेक एंड फील्ड, फुटबॉल स्टेडियम, हॉकी तथा टेनिस का मैदान, वेलड्रम, स्केटिंग, वॉलीबॉल, बोटिंग सेंटर आदि भी बनाए गए हैं।

* यहां इनडोर और आउटडोर दोनों प्रैक्टिस की सुविधा है।

* यहां का ड्रेनेज सिस्टम इतना अत्याधुनिक है कि बारिश बंद होने के आधे घंटे बाद ही मैच शुरू हो सकता है।

* देश का पहला ऐसा है स्टेडियम है जहां पर एक खास तरह की एलईडी फ्लड लाइट लगाई गई है।

* पुर्ननिर्मित इस स्टेडियम में करीब 800 करोड़ रुपए की लागत लगी है।

* बताया जाता है कि यह ओलंपिक आकार के 32 फुटबॉल स्टेडियमों के बराबर है।

 इतिहास

मोटेरा स्टेडियम का इतिहास काफी रोचक रहा है। इस मैदान पर भारत के महान क्रिकेटर सुनील गावस्कर ने टेस्ट में 10000 रन पूरे किए थे। इसके अलावा मोटेरा की पिच पर 1987, 1996 और 2011 के आईसीसी वनडे क्रिकेट वर्ल्ड कप के मैचों का आयोजन किया जा चुका है।

इस ऐतिहासिक मैदान पर भारत की टीम अपने टेस्ट क्रिकेट के इतिहास का डे-नाइट टेस्ट मैच खेलने 24 फरवरी 2021को उतरी है। वहीं भारत में यह दूसरा डे-नाइट टेस्ट मैच खेला जा रहा है। इसी ग्राउंड पर 24 फरवरी 2020 को नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम का आयोजन भी हुआ था, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का स्वागत किया था।


English Translate


Motera Stadium ~ Narendra Modi Stadium ~ Sardar Patel Stadium


 President Ram Nath Kovind inaugurated the world's largest cricket stadium in Ahmedabad, Gujarat on 24 February 2021 (Wednesday). At the inauguration, the Motera Stadium was renamed after Prime Minister Narendra Modi. It was till now known as Sardar Patel or Motera Stadium. The Sardar Patel Cricket Stadium, located in Motera area of ​​Ahmedabad, has now become the largest cricket ground in the world.

मोटेरा स्टेडियम ~ नरेंद्र मोदी स्टेडियम ~ सरदार पटेल स्टेडियम

 Union Home Minister and President of Gujarat Cricket Association Amit Shah, Gujarat Governor Acharya Devvrat, Sports Minister Kiran Rijiju and BCCI Secretary Jay Shah were present on the occasion.


 Addressing the program, Amit Shah said that- "Today is the golden day of India's sports world. Today the land worship of a big sports enclave by the name of President of India, Iron Man Bharat Ratna Sardar Patel ji. Has happened". He said that "Sardar Patel Sports Enclave will have the facilities for all the sports of the world. All the players of all sports in the country and the world will also have training and accommodation". Amit Shah said that "there will be a system for 3000 children to play and live together". He explained that "The sports complex built at Sardar Patel Sports Enclave, Narendra Modi Stadium and Narayanpura together will be a complete arrangement to play all the games in any international event at the international level in one place, and Ahmedabad will now be known as a sports city ”. Amit Shah ji said that "Sardar Patel Sports Enclave is also performed bhoomi pujan today. Our country needs that the youth of our country can appear in international competitions and win medals. Modiji has made this field very much by making this sports enclave. Has given a big gift ".

 Special features of Motera Stadium

 * Situated near the Sabarmati coast of Ahmedabad, this stadium is equipped with modern sports facilities and here 1.32 lakh people can sit and watch matches together.

 * This stadium is spread over an area of ​​63 acres. The stadium has four dressing rooms and three practice grounds.

 * Along with the cricket ground, the Mottera Stadium spread over 236 acres here has an athletics track and field, football stadium, hockey and tennis ground, welldrum, skating, volleyball, boating center etc.

 * It has both indoor and outdoor practice facilities.

 * The drainage system here is so state-of-the-art that the match can start only half an hour after the rain stops.

 * The first such stadium in the country is where a special type of LED Flood Light has been installed.

 * The reconstructed stadium has cost around Rs 800 crore.

 * It is said that this is equivalent to 32 football stadiums of Olympic size.


 History


 The history of Motera Stadium has been quite interesting. On this ground, India's great cricketer Sunil Gavaskar had completed 10,000 runs in Tests. Apart from this, matches of 1987, 1996 and 2011 ICC ODI Cricket World Cup have been organized on Motera's pitch.


 On this historic ground, India's team landed on 24 February 2021 to play a day-night Test match of their Test cricket history. This is the second day-night Test match being played in India. The Namaste Trump program was also organized on this ground on 24 February 2020, in which Prime Minister Narendra Modi welcomed the then US President Donald Trump.

मोटेरा स्टेडियम ~ नरेंद्र मोदी स्टेडियम ~ सरदार पटेल स्टेडियम


Motera Stadium Capacity                  नरेंद्र मोदी स्टेडियम                       Motera Stadium New Look         

 सरदार पटेल स्टेडियम                         Motera Stadium Dimensions            मोटेरा स्टेडियम 

World Biggest Cricket Stadium                            विश्व का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम 

Motera Cricket Stadium             मोटेरा क्रिकेट स्टेडियम                  World Biggest Stadium  

       दुनिया का सबसे बड़ा स्टेडियम