Cricket News: Latest Cricket News, Live Scores, Results, Upcoming match Schedules | Times of India

Sportstar - IPL

Showing posts with label Oos ki Boond. Show all posts
Showing posts with label Oos ki Boond. Show all posts

Os ki Boond Quotes / ओस की बूंद शायरी (Shayari)

ओस की बूँद

💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧
💧💧💧💧💧

आज भीगी हैं पलके किसी की याद में 
आकाश भी सिमट गया है अपने आप में..
ओस की बूँद ऐसी गिरी है जमीन पर, 
मानो चाँद भी रोया है उनकी याद में..💧

Os ki Boond Quotes / ओस की बूंद शायरी (Shayari)

💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧
💧💧💧💧💧

सुबह की ओस जैसे हो तुम,
बस दिखते हो मग़र छू नहीँ सकते..
करीब हो के भी करीब रह नहीं सकते,
जो भी हो दिल के पास हो तुम
जानते हो बहुत खास हो तुम..💧
Os ki Boond Quotes / ओस की बूंद शायरी (Shayari)
💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧
💧💧💧💧💧


सुबह से तेरी य़ादों की ओस कुछ ज़मीं सी है, 
फिजायें करे तस्दीक की तेरी कमी सी है..
तस्सवुर में भोर की आँखों में कुछ नमी सी है, 
फिजायें करे तस्दीक की तेरी कमी सी है..💧
हमने सपनों को दूर होते देखा है ,
जो मिला भी नहीं उसे खोते देखा है..
लोग कहते हैं कि रात को ओस गिरती है,
मगर हमने रात में फूलों को रोते देखा है..💧

Os ki Boond Quotes / ओस की बूंद शायरी (Shayari)

💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧
💧💧💧💧💧
बार बार आईना पोंछा,
मगर हर तस्वीर धुंधली थी..
न जाने आईने पर ओस थी,
या हमारी आँखें गीली थीं..💧
Os ki Boond Quotes / ओस की बूंद शायरी (Shayari)
💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧
💧💧💧💧💧

आधे आकाश में,
आज दर्ज हुई बारिश..
आधा 
चाँद के नाम रहा,
आधी बारिश और आधी चाँदनी में,
भीगता रहा 
पूरा शहर..💧
Os ki Boond Quotes / ओस की बूंद शायरी (Shayari)
💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧
💧💧💧💧💧

तारों में छोड़कर आए थे,
हम अपना दु:ख..
यहाँ इस जगह लेटकर,
इसीलिए देखते रहते हैं तारे, 
गिरती रहती है 
'ओस की बूंद'..💧
Os ki Boond Quotes / ओस की बूंद शायरी (Shayari)
💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧
💧💧💧💧💧

ठहर जरा ओस की बूंद पलभर,
नमी तुम्हारी घड़ी पहर है..
चढ़ेगी ज्यों ही जरा सी किरणें,
तुम्हारा घर फिर कहां इधर है..💧
Os ki Boond Quotes / ओस की बूंद शायरी (Shayari)
💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧
💧💧💧💧💧

भोर की पहली किरण,
चुन रही तुसार कण..
बांधकर असंख्य मोती,
उड़ चली फिर से गगन..
चढ़ रहा दिनमान उपर,
मृयमान होते जीव जलचर..
उष्णता की ताप में,
जीवन पथिक की सांस दूभर..
चेतना निस्तेज,
प्राणों का आक्लांत क्रंदन..
मेघ आज फिर घिर आओ,
बनकर ओस (बारिश) की बूंदें..💧
Os ki Boond Quotes / ओस की बूंद शायरी (Shayari)
💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧
💧💧💧💧💧

ओस की बूंदें हैं,
आंखों में नमी है..
ना उपर आसमान है,
ना नीचे जमीन है..
ये कैसा मोड़ है,
जिंदगी का..
जो लोग खास हैं,
उनकी ही कमी है..💧
Os ki Boond Quotes / ओस की बूंद शायरी (Shayari)
💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧
💧💧💧💧💧

ओस की हर एक बूँद देखो, अनजानी सी हो गई है, 
समय की गर्त में दबी यादें, कुछ बेमानी सी हो गई है..
आज सुबह की भोर घास पे, 
चमकते मोतियों को देखा, 
तबसे बिसरी यादों की खुशबू, 
पहचानी सी हो गयी है..
सर्द सुबह में भी जब भागना, 
मटर के खेतों के यूँ बीच, 
हर ओस की बूँद को चाहना, 
कर ले मुट्ठी भीतर भींच..
अंजाने रिश्तों को सींचती, 
ये अब कहानी सी हो गई है, 
जिन्दगी की आपाधापी में, 
ये आनी जानी सी हो गई है..
फिर भी दिल आज उड़ चला, 
उन प्यारी यादों के पास, 
फिर बुनते हुए अनगिनत, 
ख्वाबों के घरोंदे कुछ खास..
वो पल निश्छल बचपन की,
जैसे निशानी सी हो गई है, 
फिर उन्हीं पलों में जी लेना, 
आदत पुरानी सी हो गई है..💧
Os ki Boond Quotes / ओस की बूंद शायरी (Shayari)
💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧
💧💧💧💧💧

ओस में डूबता अन्तरिक्ष विदा ले रहा है, अँधेरों पर गिरती तुषार और कोहरों की नमी से..
और यह बूँद न जाने कब तक जिएगी इस लटकती टहनी से जुड़े पत्ते के आलिंगन में..
धूल में जा गिरी तो फिर मिट के जाएगी कहाँ?
ओस की एक बूँद बस चुकी है कब की,
मेरे व्याकुल मन में..💧
Os ki Boond Quotes / ओस की बूंद शायरी (Shayari)
💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧
💧💧💧💧💧


बूँदे ओस की सीप पर मोती सी नक्षत्र स्वाति,
बूँदे प्रेम की मन सागर भरे जीवन तृप्ति.. 
बूँदे बरसी सारी रात टपकी निर्धन कुटी, 
धरा की प्यास विरह पीर उठे बूँद की आस..💧
Os ki Boond Quotes / ओस की बूंद शायरी (Shayari)
💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧
💧💧💧💧💧

कुछ बारिश की बूंदे थी कुछ उसकी यादों की..

कुछ बारिश की बूंदे थी कुछ उसकी यादों की..

❣❣

आज बड़े दिन के बाद बारिश लाजवाब हुई

मेरी अपने पुराने दिनों से मुलाकात हुई,

मैं भीग गई पूरी तरबतर, कुछ बारिश की बूंदें थी, कुछ उसकी यादों की.. 

मैं बिना रुके चलती रही, उसकी यादें भी मेरे साथ -साथ रही

यकायक तेज रूप ले बारिश का रुख ऐसा बदला जैसे अभी अभी 

उससे मेरी फिर मुलाकात हुई

लोग छिप रहे थे बारिश से 

पेड़ो की आड़ ले कर 

तो कुछ अपनी धुन में चल रहे थे बारिश की मौज ले कर

मेरा मन भी देख कर यही सारी हलचल,

कभी कहता रुक जा किसी पेड़ की आड़ ले कर 

कभी कहता तेरे साथ कुछ बारिश की यादें हैं, चलती जा उनको साथ ले कर

एक टपरी नज़र आई चलते - चलते, लोगों की हुजूम से भरी हुई

उस पर महकती चाय अदरक का लजीज ली हुई

मेरे गाड़ी के पहिये जैसे जाम हो गए 

मैं भी रुक गयी और एक यादों का सैलाब आया लिपट कर

उसके साथ टपरी की चाय पर एक शाम बिताई हुई 

मैं फिर उस यादों के पिंजरों को समेट कर चल पड़ी

एक चाय ली और चुस्कियों के साथ यादों में खो पड़ी

यूं तो अपने घर के रास्ते जाते - जाते किसी और राह पर बड़ी दूर

निकल आयी थी, उसकी यादों को साथ फिर समेट ले आयी थी

मैं भीग गयी थी बारिश में 

कुछ बारिश की बूंदें थी, कुछ उसकी यादों की

मौसम का रुख ही कुछ ऐसा था मैं सब भूल आयी थी

क्या कहे भला रूपा इस बारिश की बूंद पर

"रूपा ओस की एक बूंद" थी और बारिश की बूंदों से तरवतर साथ ले कर 

उसकी यादें आज फिर जी भर के मुस्कुराई थी

भीग गयी मैं पूरे तरीके से बरसात में कुछ बारिश की बूंदे थी कुछ उसकी यादों की 

आज भीग गई मैं पूरे तरीके से बरसात में

कुछ बारिश की बूंदें थी, कुछ उसकी यादों की.. 

- रूपा 

❣❣

❣❣

❣❣

❣❣

❣❣

❣❣

❣❣

सांझ ढले कभी

सांझ ढले कभी

सांझ ढले कभी,
तो आओ बैठो साथ मेरे
एक चाय की प्याली के साथ
तुम्हें हाले दिल सुनाएं..
चाय पर शायरी (Chai Par Shayari)
कैसे बीते ये दिन, महीने, साल
तेरे बिन
उस हर एक पल का
तुम्हें एहसास कराएं..
चाय पर शायरी (Chai Par Shayari)

पतझड़ में जब
पेड़ों से पीले पत्ते गिरे
बिछड़ते उस मंजर को
अपनी आंखों में दिखाएं..
चाय पर शायरी (Chai Par Shayari)
वसंत ऋतु में जब
कोयल कूकी
विरह की उस गीत को
तुम्हें गा के सुनाएं..
चाय पर शायरी (Chai Par Shayari)
सावन के महीने में
जब मेरे बदन पर
पानी की बूंदे पड़ी
उन बूंदों की जलन बताएं..
चाय पर शायरी (Chai Par Shayari)
ओस की बूंदे जब
मेरे बालों पर गिरी
उन ओस की बूंदों में
तुम्हें तेरा ही अक्स दिखाएं..
चाय पर शायरी (Chai Par Shayari)

गर्मी की तपिश में
पसीने की बूंदों के साथ
आंसू कैसे मिलते,
अरमान कैसे पिघलते तुम्हें बताएं..
चाय पर शायरी (Chai Par Shayari)

सांझ ढले कभी
तो आओ बैठो साथ मेरे
एक चाय की प्याली के साथ
तुम्हें हाले दिल सुनाएं..
चाय पर शायरी (Chai Par Shayari)

ओस की बूंद || Os ki Boond ||

ओस की बूंद || Os ki Boond ||

हमने कभी स्वप्न में भी नहीं सोचा था कि हम कभी लिख भी सकते हैं। कुछ समय पूर्व मेरे एक शुभचिंतक ने मुझे डायरी लिखने की सलाह दी, तो मैंने उनकी बात को हँसी में उड़ा दिया। लेकिन कोरोना काल में जब दिन उदासी भरे थे और रातें दहशत भरी तब मन को एकाग्र करने के लिए कुछ अच्छा, ज्ञानवर्धक और सबके लिए हितकारी लिखने का फैसला किया। जैसा आप सभी जानते ही हैं कि उसके बाद ही ब्लॉग लिखने का क्रम शुरू हुआ। चंद दिनों में ही आप सभी से मिले बेशुमार स्नेह की बदौलत ब्लॉग राइटिंग मेरे शौक के साथ-साथ मेरी जरूरत भी बन गया। 

ओस की बूंद || Os ki Boond ||
मंजिलें बड़ी ज़िद्दी होती हैं हासिल कहाँ नसीब से होती हैं मगर
वहाँ तूफान भी हार जाते हैं जहाँ कश्तियाँ ज़िद पर होती हैं..🛶

मेरे ब्लॉग के लिए आप लोगों के बहुमूल्य सुझाव भी आने लगे। इन्हीं सुझावों में से एक सुझाव था कि सप्ताह में एक दिन कुछ ऐसा रोचक और ज्ञानवर्धक लिखा जाए, जिसे पढ़कर बच्चे, युवा, वृद्ध और महिलाएं सभी प्रसन्न हों। उसी के बाद ब्लॉग में एक दिन "अमेजिंग फैक्ट्स" लिखने का सिलसिला शुरू हुआ। तब से ही दिल के किसी कोने में यह चाहत भी थी कि इसे संकलित करके एक पुस्तक का स्वरूप प्रदान किया जाए। 

ओस की बूंद || Os ki Boond ||

बड़ों के आशीर्वाद और आप सभी के सहयोग से मेरे ब्लॉग संकलन का एक अंश पुस्तक के स्वरूप में प्रकाशित हुआ है। इस पुस्तक में दो भाग हैं। पहले भाग में मेरी साहित्यक अभिरुचियों वाले प्रसंग हैं और दूसरे भाग में सभी का पसंदीदा "अमेजिंग फैक्ट्स" है। जहां पुस्तक का एक भाग पूर्णतः साहित्य को समर्पित है, वहीं इसका भाग 2 मनोरंजन के साथ- साथ सामान्य ज्ञान की वृद्धि भी करता है।

ओस की बूंद || Os ki Boond ||

मुझे आशा ही नहीं बल्कि विश्वास है कि आप सभी लोग इस पुस्तक को पढ़ेंगे। आपके पुस्तक पढ़ने से मुझे अच्छा लगेगा और मेरा हौसला भी बढेगा।

ओस की बूंद || Os ki Boond ||

फिर देर किस बात की है, पुस्तक मंगवाने के लिए व्हाट्सप्प नंबर

9415040456 पर आर्डर करें। यहां आर्डर करने पर डिलीवरी फ्री रहेगी।

बहुत जल्द पुस्तक अमेज़न पर भी बिक्री के लिए उपलब्ध होगी।

ओस की बूंद || Os ki Boond ||

ओस की बूंद

आज तुम साथ होते,

तो बात और होती.

खुशियां चौगुनी होती

सारी रात बात होती और

चर्चा "ओस के बूंद" की होती..💧

ओस की बूंद || Os ki Boond ||
अकेले ही तय करने होते हैं कुछ सफर,
ज़िंदगी के हर सफर में हमसफ़र नहीं मिला करते..❤

ओस की बूँद (Os ki boond)

ओस की बूँद (Os ki boond)

आभार,शुक्रिया,धन्यवाद

आप सभी सहृदय विद्वानों का दिल से।

आज सबसे पहले मेरे इस ब्लॉग से जुड़े लोगों को प्रणाम।

आपलोगों के निरंतर सहयोग का, दिल से निकली दुआओें और आशीर्वाद का ही सुपरिणाम है कि विगत दो वर्षों से निरंतर, बिना किसी बाधा के यह ब्लॉग प्रतिदिन प्रकाशित होता रहा। आपके सतत उत्साहवर्धन के कारण ही आज यह ब्लॉग इस मुकाम पर पहुँच पाया है। किसी भी कार्य को करने पर यदि सराहना मिलती है, तो उस कार्य को और अधिक निष्ठा और लगन से करने की प्रेरणा मिलती है।  पिछले दो वर्षों से लगातार आपलोगाें की प्रतिक्रियाएं मेरे जोश और जज्बे में वृद्धि करती रहीं और ये सिलसिला लगातार बिना थमे,बिना रुके चल रहा है। इस क्रम में बहुत लोग हैं जो शुरू से अभी तक मुझसे जुड़े रहे, मेरी अच्छी- बुरी सभी पोस्ट की सराहना करते रहे और मेरा मनोबल बढ़ाते रहे। दो साल के इस समयान्तराल में  नए-नए लोग जुड़ते रहे और यह कारवां आगे बढ़ता रहा। इस राह में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो कुछ वक्त के लिए ही यहां आए। कदाचित  मेरी तरफ से ही कुछ कमी रही होगी जो मैं उन्हें ब्लॉग पर रोक नहीं सकी। आगे से मेरा प्रयास रहेगा कि इस कमी को भी पूरी कर सकूं और ब्लॉग में कुछ ऐसा जोड़ूँ  ताकि यहां आने वाले यहां रुकें और अपनी अमूल्य प्रतिक्रिया से मेरा उत्साहवर्धन और मार्गदर्शन करते रहें।

Os ki Ek Boond ~ ओस की एक बूँद
 💦यूं तो ओस की बूंद है तो जल की ही बूंद का एक स्वरूप। यह स्वरूप नदी झील, झरने का भी हो सकता है और कभी आंसू का भी। वक्त सुखकारी हो या दुखकारी आंसू बनकर यह हमेशा नयनों में समाई रहती है। सृजन काल से लेकर मुक्ति काल तक सदैव इंसान की सच्ची साथी। कभी पलकों पर मेरा बसेरा होता है तो कभी अधरों पर मेरा आशियाना। एक मां के लिए यह उसके आंचल के साथ क्रीड़ा करती उसकी ममता है, और शायद उस ममता में ही अखिल विश्व समाहित है। जिंदगी इस बूंद के कारण ही चलायमान है। जब इसका आविर्भाव होता है तो प्रकृति भी मुस्कुराती है। मन मयूर नृत्य करने लगता है, हृदय में प्यार का उल्लास जाग उठता है।
Os ki Ek Boond ~ ओस की एक बूँद
            पत्तों से टपकती ओस की बूंदे नाजुक मोती जैसी ही तो है। इन्हें ध्यान से देखिए तो सही। आपको लगेगा जैसे ये आप से बहुत कुछ कहना चाहती हों। आपसे आपका हाल चाल पूछने को शायद ये बैचैन  हैं। लेकिन मिट्टी की सोंधी खुशबू याद करते ही वे पत्तों में भी नहीं ठहरतीं। इस छोटी सी जिंदगी को भी ओस की बूंद की तरह चमकीली होना चाहिए। भले ही वह कम उम्र की हो। ओस की बूंद स्वयं में पूर्ण है। वह स्रोत है नवशक्ति का। ओस की बूंद प्रतीक है जीवन की गति का, जीवन को गुनगुनाने का, निश्छल प्रेम को सहेजने का, जिंदगी के बलिदान का, और अंत में आपके साथ मिलजुल कर बैठने का, कुछ अपनी सुनाने और आपकी सुनने का। 💦
Os ki Ek Boond ~ ओस की एक बूँद
जानी पहचानी "ओस की बूंद"
अनगिनत यादों को समेटे
चमकती मोतियों सी "ओस की बूंद"
महकती यादों को ओढ़े
जाने कितने रिश्ते गढ़ती "ओस की बूंद"
जीवन की आपा धापी को सहेजते
सपनों के घरौंदे सी "ओस की बूंद"
उड़ते दिलों को संभालते
निश्छल बचपन जैसी 
मीठी मीठी यादों को संजोते "ओस की बूंद"



सांझ ढले कभी

सांझ ढले कभी


सांझ ढले कभी,
तो आओ बैठो साथ मेरे
एक चाय की प्याली के साथ
तुम्हें हाले दिल सुनाएं..

कैसे बीते ये दिन, महीने, साल
तेरे बिन
उस हर एक पल का
तुम्हें एहसास कराएं..

पतझड़ में जब
पेड़ों से पीले पत्ते गिरे
बिछड़ते उस मंजर को
अपनी आंखों में दिखाएं..

वसंत ऋतु में जब
कोयल कूकी
विरह की उस गीत को
तुम्हें गा के सुनाएं..

सावन के महीने में
जब मेरे बदन पर
पानी की बूंदे पड़ी
उन बूंदों की जलन बताएं..

ओस की बूंदे जब
मेरे बालों पर गिरी
उन ओस की बूंदों में
तुम्हें तेरा ही अक्स दिखाएं..

गर्मी की तपिश में
पसीने की बूंदों के साथ
आंसू कैसे मिलते,
अरमान कैसे पिघलते तुम्हें बताएं..

सांझ ढले कभी
तो आओ बैठो साथ मेरे
एक चाय की प्याली के साथ
तुम्हें हाले दिल सुनाएं..
❣❣

❣❣

❣❣

❣❣

ओस की बूंद (Os ki Boond)

 ओस की बूंद (Os ki Boond)

ओस की बूंद (Os ki Boond)
"ठिठुर रही है धरती
दुनिया थम सी गयी है,
सर्दी बहुत है
अल्फाज भी जम से गये हैं..💧"

ओस की बूंद


आज ओस की बूंद से मुलाकात हुई
फिर हम दोनों की लंबी बात हुई,
वो बहुत खुश थी मुझसे मिल के
मानो सावन की घटा हो छाई
बदरा को देख के..

मेरे केसुओं से होती हुई वह
कानों के पास आई,
हौले से मुस्कुराई
और फिर बोल उठी..

चंद पलों का ये साथ तेरा
खुशियां बटोरे ये दिल मेरा,
इससे पहले की मेरा वजूद मिट जाए
मुझे इस साथ को...इस पल को...
जी लेने दो खुलकर..

माना कि मैं कुछ पल ही तेरे साथ हूं,
ये पल बहुत खास है..
क्योंकि तू मेरे साथ है,
मेरे साथ आ और
इस खूबसूरत पल को तू भी जी ले..

इसके बाद जहां में मैं न होऊंगी,
तेरे साथ सिर्फ मेरी यादें होंगी..
कैद कर लो इस साथ को,
अपनी कलम में, अपनी लेखनी में,
और अमर कर दो
तेरे मेरे साथ को
इस मुलाकात को..

कल फिर सुबह होगी,
ओस तो फिर गिरेगी..
लेकिन तुम्हारा साथ,
बस आज है, अभी है
सूर्य की पहली किरण के साथ
मेरा वजूद खत्म हो जाएगा..💧

                              –  रूपा 
       
ओस की बूंद (Os ki Boond)
 "चादर ओढ़े ओस की,
             प्रकृति करे विश्राम..
              तन-मन भी पुलकित हुआ,
              दृश्य देख अभिराम..💧"

ओस की बूंद (Os ki Boond)

 ओस की बूंद (Os ki Boond)

इन ठिठुरन भरी सर्दियों की एक अलसायी सुबह, प्रकृति के मनोहारी सानिध्य में उसकी अनुपम छटा को निहारते हुए, "ओस की बूंदों" के दुर्लभ सामीप्य में बैठकर "ओस की बूंद" पर ब्लॉग लिखने का एहसास कितना रोमांचकारी है, इसे चंद शब्दों में नही बयां नही किया जा सकता। सच मानिए,यह अप्रतिम अनुभव सबसे अलहदा है। बहुधा मैं इस बात पर मंथन करती थी कि साहित्यकारों की लेखनी में इतनी जीवंतता कहाँ से आती है। इस अलौलिक अनुभव के द्वारा  सहज ही मेरी जिज्ञासा का समाधान हो गया।

ओस की बूंद (Os ki Boond)
"हरी हरी दूब पर 
ओस की बूंदें  
अभी थी, 
अभी नहीं है..
ऐसी खुशियां, 
जो हमेशा हमारा साथ दें 
कभी नहीं थी, 
कभी नहीं हैं ..💧"

वातावरण में चहुं ओर लिपटी कोहरे की चादर......, यही तो है "ओस की बूंद".... शांत, स्निग्ध, पावन।

प्रकृति का ऐसा रमणीय रूप अद्भुत है। इसे शांत मन के साथ  बस निहारते रहिए और इसके अनुपम रूप में विचरते रहिए। मेरा दावा है कि आप अपने स्थान से हिल नही पाएंगे। यह घना कोहरा ही कुछ समय बाद बूंद का रूप ले लेता है। देखते देखते मेरे केश में भी ओस की बूंदे बन गयी हैं। मेरे चेहरे के साथ अठखेलियाँ करती यह बूंदे अपने अस्तित्व को और अधिक पुख्ता करती प्रतीत होती हैं। 

ओस की बूंद (Os ki Boond)

दूर पेड़ की सबसे ऊंची चोटी पर प्रकृति की आभा का आनंद लेते मोर को देखकर मेरा मन-मयूर भी आनंदित हो रहा है। चिड़ियों की चहचहाहट इन ओस की बूंदों में संगीत घोल रही है। एक डाल से दूसरे डाल फुदकते हुए चीं चीं करते चिड़ियों के झुंड को देखने की अनुभूति वर्णनातीत है।

इन ओस की बूंदों को बाखूबी पता होता है कि उनकी उत्पत्ति ही कुछ क्षण के लिए हुई है। सूर्य की पहली किरण के साथ उनका अस्तित्व समाप्त हो जाना है। 

"पत्तों पर पड़ी ओस की बूंदें... 
और बूंदों पर पड़ती यह दिवाकर की किरणें..💧"

देखा जाए तो सुबह की ओस और धूप का रिश्ता, शमा और परवाने जैसा ही है। दोनों ही रिश्तों में समर्पण की भावना प्रधान है। परवाना, शमा के प्रति समर्पित भाव से अपना जीवन कुर्बान कर देता है, तो ओस भी धूप के संपर्क में आते ही कुछ ही क्षण में अपना जीवन समाप्त कर लेती है। शायद प्रकृति का नियम ही यही है।

ओस की बूंद (Os ki Boond)

"जिंदगी बेशक दो लम्हे की थी...
पर खूबसूरत इतनी जैसे 'ओस की एक बूंद'.."
💧

ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)

Rupa
❤️ओस की बूंद की तरह इतरा कर चमक उठे हम, तुम्हारी चकाचौंध में.. 
तुम सूर्य जैसे चमकते रहे.. 
तुम्हारे ताप से मुस्कुराते हुए मिट गए हम चुपचाप से 
किसी के सबब आई लबों पर मुस्कान कोई 
याद आ गई मुझे ओस गुमनाम कोई..💧

"ओस की बूंद"

हरी हरी दूब पर 
ओस की बूंदें  
अभी थी, 
अभी नहीं है..
ऐसी खुशियां, 
जो हमेशा हमारा साथ दें 
कभी नहीं थी, 
कभी नहीं हैं ..
 
क्काँयर की कोख से 
फूटा बाल सूर्य 
जब पूरब की गोद में 
पांव फैलाने लगा.. 
तो मेरी बगीची का 
पत्ता -पत्ता जगमगाने लगा 
मैं उगते सूर्य को नमस्कार करूं 
या उसके ताप से भाप बनी 
ओस की बूंदों को ढूंढूँ ?

सूर्य एक सत्य है 
जिसे झूठलाया नहीं जा सकता, 
मगर ओस भी तो एक सच्चाई है ..
यह बात अलग है कि ओस छणिक है 
क्यों ना मैं छन छन को जिऊँ ?
कण कण में बिखरे सौंदर्य को पिऊं ? 

सूर्य तो फिर भी उगेगा, 
धूप तो फिर भी खिलेगी.. 
लेकिन मेरी बगीची की हरी - हरी दूब पर 
"ओस की बूंद" हर मौसम में नहीं मिलेगी..

"अटल बिहारी बाजपेयी" 
Sunday ~ Rose
❤️कोमल धूप का स्पर्श मिला जब, महक उठी जमीन सारी 
कलियां लग गई खिलने, पक्षी लगे पहचाने 
ओस की बूंदे उड़ने लगी तब..💧

इस ब्लॉग के माध्यम से "आयुर्वेद" के अमृतमय ज्ञान को, जिसे हम लोगों ने अपनी भागमभाग लाइफ स्टाइल के कारण विस्मृत कर दिया है, आप सब के मध्य पहुँचाने का प्रयास किया है।

सदियों से हमारी "समृद्ध भारतीय सभ्यता और संस्कृति" अखिल विश्व के आकर्षण का केंद्र रही है। हमारी संस्कृति की माला में अनगिनत बेशकीमती मोती हैं, जिसमे से एक है हमारे देश के प्राचीन मंदिर और उनकी वास्तु कला तथा स्थापत्य कला। 

ब्लॉग में प्रत्येक गुरुवार को मनोरंजन के साथ - साथ ज्ञान वर्धन के लिए "अकबर - बीरबल" के किस्से को भी आप सभी ने हाथों हाथ लिया। वास्तव में ये किस्से कभी पुराने नहीं होते। 

हर शनिवार को "जातक कथा" को पढ़ने की उत्सुकता मुझे बहुत प्रेरणा देती है। इन कथाओं में भगवान बुद्ध के पूर्व जन्मों की कथाएं हैं और हर कथाओं के माध्यम से कोई ना कोई संदेश दिया गया है। जातक कथाएं बौद्ध ग्रंथ त्रिपिटक का भाग हैं। 

आप में से ही कुछ मित्रों के आग्रह पर कुछ दिन पहले शुरू हुआ "अमेजिंग फैक्ट्स" - "अद्भुत संसार" को भी व्यापक समर्थन मिला है। 

अकबर बीरबल की ही तरह "तेनालीरमन" के किस्से भी हमारा मनोरंजन करने के साथ साथ शिक्षाप्रद भी होते हैं, जो मुश्किल से मुश्किल परेशानियों से आसानी से बाहर निकलने का मार्ग दिखती हैं। 

कुछ कविता की पंक्तियों के साथ "इतवार" की पोस्ट को भी पसंदीदा बनाने का प्रयास रहता है। यह ब्लॉग भी सुबह की चाय की तरह ही आप में से बहुत से लोगों के जीवन का एक हिस्सा बन गया है और मेरे जीवन का तो अभिन्न हिस्सा बन ही चुका है। 
ब्लॉग से जुड़े सभी सदस्यों को मेरा सहयोग करने तथा उत्साह बढ़ाने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद 😊😊🙏

ओस की बूंद (Os ki boond) Wallpaper

ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)
ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)
  
ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)
ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)
ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)
ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)
ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)
ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)ओस की बूंद (Os ki boond)

ओस की बूंद (Os ki boond)