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बचपन का वो ज़माना और था || इतवार (Sunday) ||

बचपन का वो ज़माना और था

बचपन का वो ज़माना और था
"नींद से इतना भी प्यार न करो, 
कि मंज़िल भी ख्वाब बन जाए..❤"

बचपन का वो ज़माना और था.. 

जब दरवाजों पे ताला नहीं भरोसा लटकता था 
जब पड़ोसियों के आधे बर्तन हमारे घर और हमारे बर्तन उनके घर में होते थे
बचपन का वो ज़माना और था.. 
जब पड़ोस के घर बेटी पीहर आती थी तो सारे मौहल्ले में रौनक होती थी
जब गेंहूँ साफ करना किटी पार्टी सा हुआ करता था 
जब ब्याह में मेहमानों को ठहराने के लिए होटल नहीं लिए जाते थे
पड़ोसियों के घर से बिस्तर लगाए जाते थे
बचपन का वो ज़माना और था..  
जब छतों पर किसके पापड़ और आलू चिप्स सूख रहें है बताना मुश्किल था
जब हर रोज़ दरवाजे पर लगा लेटर बॉक्स टटोला जाता था
जब डाकिये का अपने घर की तरफ रुख मन मे उत्सुकता भर देता था 
बचपन का वो ज़माना और था.. 
जब रिश्तेदारों का आना
घर को त्योहार सा कर जाता था
जब आठ मकान आगे रहने वाली माताजी हर तीसरे दिन तोरई भेज देती थीं
और हमारा बचपन कहता था, कुछ अच्छा नहीं उगा सकती थीं ये
बचपन का वो ज़माना और था.. 
जब मौहल्ले के सारे बच्चे हर शाम हमारे घर 'ॐ जय जगदीश हरे' गाते
और फिर हम उनके घर शिव मंत्र गाते थे 
जब बच्चे के हर जन्मदिन पर महिलाएं बधाईयाँ गाती थीं
और बच्चा गले मे फूलों की माला लटकाए अपने को शहंशाह समझता था
जब भुआ और मामा जाते समय जबरन हमारे हाथों में पैसे पकड़ाते थे
और बड़े आपस मे मना करने और देने की बहस में एक दूसरे को अपनी सौगन्ध दिया करते थे
बचपन का वो ज़माना और था.. 
जब शादियों में स्कूल के लिए खरीदे काले नए चमचमाते जूते पहनना किसी शान से कम नहीं हुआ करता था
जब छुट्टियों में हिल स्टेशन नहीं मामा के घर जाया करते थे
और अगले साल तक के लिए यादों का पिटारा भर के लाते थे
जब स्कूलों में शिक्षक हमारे गुण नहीं हमारी कमियां बताया करते थे
और मन में आया तो कूट भी दिया करते थे 
बचपन का वो ज़माना और था.. 
जब शादी के निमंत्रण के साथ पीले चावल आया करते थे
जब बिना हाथ धोये मटकी छूने की इज़ाज़त नहीं थी
बचपन का वो ज़माना और था.. 
जब गर्मियों की शामों को छतों पर छिड़काव करना जरूरी हुआ करता था
और छोटे से लेकर बूढ़े सारे एक लाइन में साथ ही सो लिया करते थे 
जब सर्दियों की गुनगुनी धूप में स्वेटर बुने जाते थे 
और हर सलाई पर नया किस्सा सुनाया जाता था
साथ ही पड़ोस वाली चाची एक घर इधर और चार घर उधर करके स्वेटर का डिज़ाइन बताते बताते चार चक्कर आगे पीछे घुमा दिया करती थीं 
जब रात में नाख़ून काटना मना था
जब संध्या समय झाड़ू लगाना बुरा था
बचपन का वो ज़माना और था.. 
जब बच्चे की आँख में काजल और माथे पे नज़र का टीका जरूरी था
जब रातों को दादी नानी की कहानी हुआ करती थी
जब कजिन नहीं सभी भाई बहन हुआ करते थे
बचपन का वो ज़माना और था.. 
जब डीजे नहीं , ढोलक पर थाप लगा करती थी
जब गले सुरीले होना जरूरी नहीं था, दिल खोल कर बन्ने बन्नी गाये जाते थे
जब शादी में एक दिन का महिला संगीत नहीं होता था आठ दस दिन तक गीत गाये जाते थे
बचपन का वो ज़माना और था.. 
जब बिना AC रेल का लंबा सफर पूड़ी, आलू और अचार के साथ बेहद सुहाना लगता था
वो ज़माना और था.. 
जब चंद खट्टे बेरों के स्वाद के आगे कटीली झाड़ियों की चुभन भूल जाया करते थे
बचपन का वो ज़माना और था.. 
जब सबके घर अपने लगते थे
बिना घंटी बजाए बेतकल्लुफी से किसी भी पड़ोसी के घर घुस जाया करते थे 
जब पेड़ों की शाखें हमारा बोझ उठाने को बैचेन हुआ करती थी
जब एक लकड़ी से पहिये को लंबी दूरी तक संतुलित करना विजयी मुस्कान देता था
जब गिल्ली डंडा, पोसम पा, सतोलिया, गोटी और कंचे खूब खेला करते थे
बचपन का वो ज़माना और था.. 
जब हम डॉक्टर को दिखाने कम जाते थे डॉक्टर हमारे घर आते थे
डॉक्टर साहब का बैग उठाकर उन्हें छोड़ कर आना तहज़ीब हुआ करती थी
जब इमली और कैरी खट्टी नहीं मीठी लगा करती थी
बचपन का वो ज़माना और था.. 
जब बड़े भाई बहनों के छोटे हुए कपड़े ख़ज़ाने से लगते थे
जब लू भरी दोपहरी में नंगे पाँव गालियां नापा करते थे
जब कुल्फी वाले की घंटी पर मीलों की दौड़ मंज़ूर थी 
बचपन का वो ज़माना और था.. 
जब मोबाइल नहीं धर्मयुग, साप्ताहिक हिंदुस्तान, सरिता और कादम्बिनी के साथ दिन बिताया करते थे
जब TV नहीं प्रेमचंद के उपन्यास हमें कहानियाँ सुनाते थे
बचपन का वो ज़माना और था.. 
जब मुल्तानी मिट्टी से बालों को रेशमी बनाया जाता था 
जब दस पैसे की चूरन की गोलियां ज़िंदगी मे नया जायका घोला करती थी 
जब पीतल के बर्तनों में दाल उबाली जाती थी
जब चटनी सिल पर पीसी जाती थी
बचपन का वो ज़माना और था.. 
वो ज़माना वाकई कुछ और था..
बचपन का वो ज़माना और था
"Life Begins - the moment you realize you don't have to prove shit to anyone."
👍🏻Good Morning 👌🏻


बड़े नाम की महिमा : पंचतंत्र || Bade Naam ki Mahima : Panchtantra ||

बड़े नाम की महिमा

त्र्यपदेशेन महतां सिद्धि सञ्जायते परा ।

बड़े नाम के प्रताप से ही संसार के काम सिद्ध हो जाते हैं।

बड़े नाम की महिमा : पंचतंत्र || Bade Naam ki Mahima : Panchtantra ||

एक वन में चतुर्दन्त नाम का महाकाय हाथी रहता था। वह अपने हाथीदल का मुखिया था। बरसों तक सूखा पड़ने के कारण वहाँ के सब झील, तलैया, ताल सूख गए और पेड़ मुरझा गए। सब हाथियों ने मिलकर अपने गजराज चतुर्दन्त को कहा कि हमारे बच्चे भूख-प्यास से मर गए, जो शेष हैं मरने वाले हैं। इसलिए जल्दी ही किसी बड़े तालाब की खोज की जाए।

बहुत देर सोचने के बाद चतुर्दन्त ने कहा- मुझे एक तालाब याद आता है। वह पाताल-गंगा के जल से सदा भरा रहता है। चलो वहीं चलें। पाँच रात की लम्बी यात्रा के बाद सब हाथी वहाँ पहुँचे। तालाब में पानी था। दिन-भर पानी में खेलने के बाद हाथियों का दल शाम को बाहर निकला। तालाब के चारों ओर खरगोशों के अनगिनत बिल थे। उन बिलों से ज़मीन पोली हो गई थी। हाथियों के पैरों से वे सब विल टूट-फूट गए। बहुत-से खरगोश भी हाथियों के पैरों से कुचल गए। किसी की गर्दन टूट गई, किसी का पैर टूट गया। बहुत-से मर भी गए।

हाथियों के वापस चले जाने के बाद उन बिलों में रहने वाले क्षत-विक्षत, लहूलुहान खरगोशों ने मिलकर एक बैठक की। उसमें स्वर्गवासी खरगोशों की स्मृति में दुःख प्रकट किया गया तथा भविष्य के संकट का उपाय सोचा गया। उन्होंने सोचा, आसपास अन्यत्र कहीं जल न होने के कारण ये हाथी अब हर रोज़ इसी तालाब में आया करेंगे और उनके बिलों को अपने पैरों से रौंदा करेंगे। इस प्रकार दो-चार दिनों में ही सब खरगोशों का वंश नाश हो जाएगा। हाथी का स्पर्श ही इतना भयंकर है, जितना साँप का सूँघना, राजा का हँसना और मानिनी का मान।

इस संकट से बचने का उपाय सोचते-सोचते एक ने सुझाव रखा - हमें इस स्थान को छोड़कर अन्य देश में चले जाना चाहिए। यह परित्याग ही सर्वश्रेष्ठ नीति है। देह का परित्याग परिवार के लिए, परिवार का गाँव के लिए, गाँव का शहर के लिए और सम्पूर्ण पृथ्वी का परित्याग अपनी रक्षा के लिए करना पड़े तो भी कर देना चाहिए।

किन्तु दूसरे खरगोश ने कहा - हम तो अपने पिता-पितामह की भूमि न छोड़ेंगे।

कुछ ने उपाय सुझाया कि खरगोशों की ओर से एक चतुर दूत हाथियों के दलपति के पास भेजा जाए। वह उससे यह कहे कि चन्द्रमा में जो खरगोश बैठा है, उसने हाथियों को इस तालाब में आने से मना किया है। चन्द्रमा-स्थित खरगोश की बात को वह मान जाए।

बहुत विचार के बाद लम्बकर्ण नाम के खरगोश को दूत बनाकर हाथियों के पास भेजा गया। लम्बकर्ण तालाब के रास्ते में एक ऊंचे टीले पर बैठ गया; और जब हाथियों का झुण्ड वहाँ आया तो वह बोला- यह तालाब चाँद का अपना तालाब है। यहाँ मत आया करो।

हाथी और खरगोश की कहानी || Hathi aur khargosh ki kahani ||

गजराज- तू कौन है?

लम्बकर्ण- में चाँद में रहने वाला खरगोश हूँ। भगवान् चन्द्र तुम्हारे पास यह कहने के लिए भेजा है कि इस तालाब में तुम न आया करो।

गजराज ने कहा - जिस भगवान् चन्द्र का सन्देश लाए हो वह इस समय कहाँ है?

लम्बकर्ण- इस समय वे तालाब में हैं। कल तुमने खरगोशों के बिलों का नाश कर दिया था। आज वे खरगोशों की बिनती सुनकर यहाँ आए हैं। उन्होंने मुझे तुम्हारे पास भेजा है।

गजराज - ऐसा ही है तो मुझे उनके दर्शन करा दो। मैं उन्हें प्रणाम करके वापस चला जाऊँगा।

लम्बकर्ण अकेले गजराज को लेकर तालाब के किनारे पर गया। तालाब में चाँद की छाया पड़ रही थी। गजराज ने उसे ही चाँद समझकर प्रणाम किया और लौट पड़ा। उस दिन के बाद कभी हाथियों का दल तालाब के किनारे नहीं आया।

कहानी समाप्त होने के बाद कौवे ने कहा-यदि तुम उल्लू जैसे नीच, आलसो, कायर, व्यसनी और पीठ पीछे कटुभाषी पक्षी को राजा बनाओगे तो शश-कपिंजल की तरह नष्ट हो जाओगे।

पक्षियों ने पूछाकैसे?

कौवे ने कहा-सुनो :

बिल्ली का न्याय

   To be continued ...


तेनालीराम - चोरी पकड़ी || Tenali Raman - Chori Pakdi ||

तेनालीराम - चोरी पकड़ी

एक बार विजयनगर राज्य में लगातार चोरी होनी शुरू हुई। हर दिन कहीं न कहीं चोरी की घटनाएं घटने लगी। साधारण जनता तो परेशान थी ही, पर सेठ साहूकार चोरी की घटना से ज्यादा परेशान थे। सेठों ने आकर राजा के दरबार में दुहाई दी - "महाराज! हम लूट गए बरबाद हो गए। रात को ताला तोड़कर चोर हमारी तिजोरी का सारा धन उड़ा ले गए।"

तेनालीराम - चोरी पकड़ी || Tenali Raman - Chori Pakdi ||

राजा कृष्णदेव राय ने इन घटनाओं की जांच कोतवाल से करवाई, पर कुछ भी हाथ नहीं लगा। 

राजा बहुत चिंतित हुए। चोरी की घटनाएं होती रहीं। चोरों की हिम्मत बढ़ती जा रही थी। 

बात को बहुत ज्यादा बिगड़ता देख राजा ने एक सभा बुलाई। महाराज ने सभा में मौजूद दरबारियों पर नाराजगी जताते हुए कहा - "क्या आप में से कोई भी ऐसा नहीं, जो चोरों को पकड़वाने की जिम्मेदारी ले सके?"

सारे दरबारी एक- दूसरे का मुंह देखने लगे। तेनालीराम ने उठकर कहा - महाराज! यह जिम्मेदारी मैं लूंगा। महाराज ने थोड़ी राहत की सांस लेते हुए कहा - तेनालीराम! जल्द से जल्द उन चोरों  लगाओ। 

तेनालीराम वहां से उठकर नगर के एक प्रमुख जौहरी के यहां गए। उस जौहरी से तेनालीराम ने अपनी योजना बताई और घर लौट आये। 

अगले दिन उस जौहरी ने अपने यहां आभूषणों की एक बड़ी प्रदर्शनी लगवाई। रात होने पर उसने सारे आभूषणों को एक तिजोरी में रखकर ताला लगा दिया। आधी रात को चोर आ धमके। ताला तोड़कर तिजोरी में रखे सारे आभूषण थैले में डालकर वे बाहर आए। जैसे ही वे सेठ की हवेली से बाहर जाने लगे सेठ को पता चल गया, उसने शोर मचा दिया। आस-पास के लोग भी आ जुटे। तेनालीराम भी अपने सिपाहियों के साथ वहीं छिपे बैठे थे। चारों तरफ से सभी को घेर लिया गया। 

तेनालीराम ने सैनिकों को आदेश दिया कि जिनके हाथों में लाल रंग लगा हुआ है, उन्हें पकड़ लो। तुरंत ही सारे चोर पकड़े गए। 

अगले दिन चोरों को दरबार में पेश किया गया। सभी के हाथों पर लगे रंग देखकर राजा ने पूछा - "तेनालीराम! यह क्या है?" 

तेनालीराम बोले - "महाराज! हमने तिजोरी पर गीला रंग लगा दिया था ताकि चोरी के इरादे से आए चोरों के शरीर पर रंग चढ़ जाए और हम उन्हें आसानी से पकड़ सकें।"

महाराज ने पूछा - "पर तुम वहां सिपाहियों को तैनात कर सकते थे।"

तेनालीराम बोले - "महाराज! इसमें उनके चोरों से मिल जाने की संभावना थी। दूसरी बात सिपाहियों की भनक लगने से चोर चोरी करने नहीं आते। यह सुनकर राजा कृष्णदेव राय ने तेनालीराम की खूब प्रशंसा की।

English Translate

Chori Pakdi

Once upon a time there was constant piracy in the Vijayanagara kingdom. Every day the incidents of theft started happening somewhere. The general public was upset, but Seth Sahukar was more worried than the incident of theft. The Seths came and cried in the king's court - "Your Majesty! We were robbed and ruined. By breaking the lock at night, the thieves took away all the money in our vault."

तेनालीराम - चोरी पकड़ी || Tenali Raman - Chori Pakdi ||

King Krishna Deva Raya got these incidents investigated by the Kotwal, but nothing worked.

The king was very worried. Incidents of theft continued. The courage of the thieves was increasing.

Seeing things getting worse, the king called a meeting. The Maharaj expressed his displeasure at the courtiers present in the meeting and said - "Isn't there any of you who can take the responsibility of catching the thieves?"

All the courtiers looked at each other's faces. Tenaliram got up and said - Maharaj! I will take this responsibility. The Maharaj, breathing a sigh of relief, said - Tenaliram! Find those thieves as soon as possible.

Tenaliram got up from there and went to a prominent jeweler of the city. Tenaliram told his plan to that jeweler and returned home.

The next day the jeweler got a big exhibition of jewelery set up in his place. At night, he kept all the jewelery in a safe and locked it. Thieves came in the middle of the night. They came out by breaking the lock and putting all the jewelery kept in the safe in the bag. As soon as they started leaving Seth's mansion, Seth came to know about it, he made a noise. Neighbors also gathered. Tenaliram was also sitting there hiding with his soldiers. Everyone was surrounded from all sides.

Tenaliram ordered the soldiers to catch those whose hands were painted red. All the thieves were caught immediately.

The thieves were presented in the court the next day. Seeing the colors on everyone's hands, the king asked - "Tenaliram! What is this?"

Tenaliram said - "Your Majesty! We had put wet paint on the safe so that the thieves who came with the intention of stealing could get paint on their bodies and we could catch them easily."

Maharaj asked - "But you could have posted the soldiers there."

Tenaliram said - "Maharaj! There was a possibility of him joining the thieves. Secondly, because of the knowledge of the soldiers, thieves do not come to steal. On hearing this, King Krishnadevaraya praised Tenaliram very much.

विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस 28 july || World Nature Conservation Day 2022 ||

 विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस 28 july

प्रकृति ईश्वर से प्राप्त सर्वोत्तम आश्चर्य उपहार है।

प्रकृति, प्राकृतिक रूप से मानव की किसी भी प्रकार की सहायता के बिना बनते हैं। इनमें जल,वायु,सूर्य का प्रकाश, भूमि, वन, खनिज, पौधे और साथ ही पशु शामिल हैं। ये सभी प्राकृतिक संसाधन मिलकर पृथ्वी पर जीवन जीने लायक बनाते हैं। इन सभी संसाधनों के बिना पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं होगा।

विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस 28 july || World Nature Conservation Day 2022 ||

प्रकृति का संरक्षण एक ऐसा विषय है जिस पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है प्रकृति के अधिकांश संसाधन तेजी से घट रहे हैं ऐसा इसलिए है क्योंकि इन संसाधनों की मांग अधिक तेजी से बढ़ी है,या दोहन हुआ है,जबकि उनके गठन की दर अपेक्षाकृत काफी कम है।हालांकि यह समझने की जरूरत है कि प्रकृति ने हमें उन सभी चीजों को बहुतायत दी है जिसकी हमें आवश्यकता है। हमें उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का बुद्धिमानी से उपयोग करने की आवश्यकता है।पृथ्वी पर मौजूद प्राकृतिक संसाधनों और उनके संरक्षण के तरीकों पर एक संक्षिप्त नजर इस प्रकार है-

विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस 28 july || World Nature Conservation Day 2022 ||

नियंत्रित उपयोग- पानी और बिजली दो चीजें हैं जो सबसे ज्यादा बर्बाद हो रही हैं। इन दोनों को बचाने के महत्व को समझना आवश्यक है। केवल उतना ही पानी इस्तेमाल करें जितनी आवश्यकता है।यही बात बिजली पर भी लागू होती है। बिजली के उपकरण और बिजली को बुद्धिमानी से उपयोग करें जब उपयोग ना हो तो उन्हें बंद कर दें।इसी तरह अन्य संसाधनों जैसे कागज, पेट्रोलियम और गैसों का उपयोग प्रतिबंधित होना चाहिए।री-साइकिल कागज, कार्डबोर्ड, धातु, टीन, एलुमिनियम, कांच की बोतलें, प्लास्टिक के कंटेनर के साथ-साथ पानी को री साइकिल कर उन्हें पुनः उपयोग किया जा सकता है। सरकार इन चीजों को कचरे से लेने के लिए उन्हें भी साइकिल करने के लिए उपयोग कर रही है, पर जिस हिसाब से यह हमारे पर्यावरण और प्रकृति को दूषित कर रहीं हैं, उस दर से री- साइकिल की संख्या बहुत कम है।

विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस 28 july || World Nature Conservation Day 2022 ||

बड़े-बड़े मांल, बड़े-बड़े बिल्डिंग का निर्माण और विकास के नाम पर हम धड़ाधड़ वनों की कटाई करते जा रहे हैं, जो हमारे भविष्य को गर्त की ओर ले जा रहा। हमें वनों की कटाई को नियंत्रित करना चाहिए।

पानी के पुनः उपयोग के लिए वर्षा जल संचयन प्रणाली को नियोजित करके भी हम जल प्रदूषण और सूखे की समस्या से निपट सकते हैं।आवश्यकता इस बात की है कि सरकार के साथ-साथ हर इंसान को जागरूक होना पड़ेगा, तभी हम अपने आने वाली पीढ़ी को एक सुंदर भविष्य दे सकेंगे।

संतुलित पर्यावरण सुनिश्चित करने के लिए प्रकृति का संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है। हालांकि, दुख की बात यह है कि कई प्राकृतिक संसाधन तेजी से घट रहे हैं। प्रत्येक व्यक्ति को उपयुक्त विधियों को नियोजित करके प्रकृति के संरक्षण में हमें अपना महत्वपूर्ण योगदान देना चाहिए।

विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस 28 july || World Nature Conservation Day 2022 ||

English Translate

world nature conservation day 28 july

Nature is the best wonder gift received from God.

Nature, are formed naturally without any kind of help from human beings. These include water, air, sunlight, land, forests, minerals, plants as well as animals. All these natural resources together make life worth living on earth. Without all these resources life on earth would not be possible.
विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस 28 july || World Nature Conservation Day 2022 ||
Conservation of nature is a subject that needs serious attention. Most of nature's resources are rapidly depleting. This is because the demand for these resources has increased, or exploited, while the rate of their formation is relatively high. However, it needs to be understood that nature has given us abundance of everything that we need. We need to use the available natural resources wisely. A brief look at the natural resources present on the earth and the ways of their conservation are as follows-

Controlled use- Water and electricity are the two things that are being wasted the most. It is necessary to understand the importance of saving both of them. Use only as much water as is needed. The same applies to electricity. Use electrical equipment and electricity wisely, turn them off when not in use. Similarly, the use of other resources such as paper, petroleum and gases should be restricted. Recycle paper, cardboard, metal, tin, aluminum, glass Bottles, plastic containers as well as water can be recycled and reused. The government is also using these things to cycle to take them from the waste, but the rate at which they are contaminating our environment and nature, the number of cycles is very less.
विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस 28 july || World Nature Conservation Day 2022 ||
In the name of development and construction of big buildings, big buildings, we are deforestation, which is taking our future towards the trough. We should control deforestation.

We can also tackle the problem of water pollution and drought by employing rainwater harvesting system for re-use of water. The need is that along with the government, every human being has to be aware, only then we can make our future generation. can give you a beautiful future.

Conservation of nature is of utmost importance to ensure a balanced environment. However, the sad part is that many natural resources are rapidly depleting. We should make a significant contribution to the conservation of nature by employing suitable methods.

30 रोचक जानकारीयां मच्छर के बारे में || 30 Interesting facts about Mosquito ||

मच्छर के बारे में रोचक जानकारी (Interesting facts about Mosquito)

"एक मच्छर साला आदमी को हिजड़ा बना देता है" यह यशवंत फिल्म का नाना पाटेकर का एक बहुत ही प्रसिद्ध डायलॉग था। खैर आज हम नाना पाटेकर के फिल्म की नहीं बल्कि मच्छरों के विषय में कुछ रोचक बातें जानेंगे। शायद ही कोई ऐसा होगा जो इन मच्छरों से परेशान नहीं होगा। इस बरसात के मौसम में इनका प्रकोप और ज्यादा बढ़ जाता है। 
30 रोचक जानकारीयां  मच्छर के बारे में || 30 Interesting facts about Mosquito ||
मच्छर एक बहुत ही हानिकारक कीट है, जो संसार के लगभग सभी भागों में पाया जाता है। यह विभिन्न प्रकार के रोगों को फैलाता है। किसी अन्य जीव जंतु की तुलना में दुनिया में सबसे ज्यादा मौतें इस कीट के कारण होती हैं। यहां तक कि इतिहास में युद्ध से हुई मौतों की तुलना में भी मच्छरों के काटने से हुई मौत से कई गुना अधिक है। यही वजह है कि मच्छरों को शेर या सांप जैसे जानवरों से भी अधिक खतरनाक माना गया है। तो चलिए जानते हैं आज इस मच्छर के विषय में।
30 रोचक जानकारीयां  मच्छर के बारे में || 30 Interesting facts about Mosquito ||
  1. मच्छर (Mosquito), छोटी मक्खी के लिए उपयोग में लाए जाने वाला एक स्पेनिश शब्द है। यह शब्द 16वीं शताब्दी के प्रारंभ में अस्तित्व में आया था।
  2. अफ्रीका न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में मच्छरों को मोजिज (Mozzies) कहा जाता है।
  3. लोगों को नर मच्छर कभी नहीं काटता है, बल्कि हमेशा मादा मच्छर ही काटती है। ऐसा इसलिए क्योंकि मादा मच्छरों को अपने अंडों के विकास के लिए प्रोटीन की आवश्यकता होती है और वह इस जरूरत को इंसानों के खून से पूरा करती हैं। 
  4. नर मच्छर पर पौधों का रस चूसते हैं।
  5. नर मच्छर शाकाहारी होते हैं।
  6. मच्छरों की संख्या का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पृथ्वी के सभी मच्छरों को मारकर यदि किसी मैदान में इकट्ठा कर लिया जाए, तो 5 किलो मीटर ऊंचा ढेर लग जाएगा।
  7. मादा मच्छर एक बार में लगभग 300 अंडे देती हैं।
  8. अपने पूरे जीवन काल में मादा मच्छर तीन बार तक अंडे दे सकती है। 
  9. एक मच्छर की आयु 2 महीने से कम होती है। नर मच्छर 10 दिनों तक और मादा मच्छर 6 से 8 हफ्ते तक जिंदा रहती हैं।
  10. मच्छर लगभग 20 करोड़ साल पहले धरती पर आए थे। 
  11. धरती पर 3500 से भी ज्यादा प्रकार के मच्छर मौजूद हैं।
  12. मच्छरों को इंसान के गंध की पहचान होती है।  ये इंसान के गंध से पहचान लेते हैं कि इस इंसान से उनका  सामना पहले हुआ है या नहीं।
  13. मच्छरों के दांत नहीं होते, इसलिए वह अपने मुंह के नुकीली और लंबे ढंग से काटते हैं। एक मच्छर अपने वजन से 3 गुना ज्यादा खून पी सकता है।
  14. एक शोध के अनुसार बीयर पीने वाले लोगों को अन्य लोगों के मुकाबले मच्छर अधिक काटते हैं।
  15. मच्छरों को सिर्फ बियर पीने वाले ही नहीं, अपितु गर्भवती महिलाएं और 'O' ब्लड ग्रुप वाले लोग भी काफी पसंद आते हैं। ऐसे लोगों को मच्छर ज्यादा काटते हैं।
  16. अगर किसी व्यक्ति को पसीना ज्यादा आता है, तो उसको मच्छर भी ज्यादा ही काटेंगे क्योंकि पसीने की महक मच्छरों को खींचती है।
  17. 1200000 मच्छर मिलकर एक इंसान का पूरा खून चूस सकते हैं। अर्थात किसी इंसान के शरीर का पूरा रक्त चूसने के लिए मच्छर को उस इंसान को लगभग 1.2 मिलियन बार काटना होगा।
  18. मच्छर इस धरती पर डायनासोर के समय से हैं। 251 मिलीयन वर्ष पूर्व ट्राइसिक काल में भी इनका अस्तित्व था।
  19. अगर घर में तुलसी जी का पौधा है, तो इसकी खुशबू से मच्छर उसके पास नहीं आते। मच्छर तुलसी जी के पत्तों से दूर भागते हैं।
  20. तुलसी के पत्तों के अलावा लैवेंडर, गेंदे के फूल और लहसुन की महक मच्छरों को पसंद नहीं होती तथा ऐसी चीजें जिनमें से नींबू जैसी खुशबू आती है, इससे भी मच्छर दूर रहते हैं।
  21. मच्छरों की दृष्टि क्षमता कमजोर होती है, अतः वे गहरे रंग के कपड़े पहनने वाले लोगों को हल्के रंग के कपड़े पहनने वाले लोगों की तुलना में अधिक आसानी से देख पाते हैं।
  22. 2013 में, शोधकर्ताओं ने अमेरिका के मोंटाना में एक पर्वत श्रृंखला के शहर में दो मच्छरों के जीवाश्म की खोज की और पाया कि उन प्रागैतिहासिक मच्छरों और आज के आधुनिक मच्छरों में न्यूनतम अंतर है।
  23. मच्छरों की याददाश्त बहुत तेज होती है। रिसर्च में पता चला है कि जब हम किसी मच्छर को मारने की कोशिश करते हैं, तो वह कम से कम 24 घंटे तक पास नहीं मंडराता है।
  24. जिन्होंने तुरंत केला खाया होता है, मच्छर उन लोगों की तरफ ज्यादा आकर्षित होते हैं।
  25. आइसलैंड दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है, जहां मच्छर नहीं पाए जाते।
  26. अगर मच्छर काटने वाली जगह पर खुजली हो रही हो तो वहां पर चम्मच को थोड़ा गर्म करके लगाने से खुजली बंद हो जाती है।
  27. मच्छर काले और नीले रंग की तरफ ज्यादा आकर्षित होते हैं।
  28. मादा मच्छर अपने एक बार के डंक में .01 से .1 मिलीलीटर खून चूस लेती है।
  29. मच्छर 2 फीट प्रति सेकंड की गति से उड़ते हैं और 40 फीट से ऊपर नहीं उड़ सकते। यह अपने जन्म स्थान से 1 मील तक के एरिया में ही उड़ते हैं।
  30. मच्छरों के पंख 1 सेकंड में 500 बार फड़फड़ाते हैं। यही वजह है कि मच्छर के काटने के पहले उसके भुनभुनाने की आवाज आती है। 
30 रोचक जानकारीयां  मच्छर के बारे में || 30 Interesting facts about Mosquito ||

Interesting facts about Mosquito

“Ek mosquito saa aadmi ko hijra ban hai” was a very famous dialogue of Nana Patekar from Yashwant movie. Well today we will know some interesting things not about Nana Patekar's film but about mosquitoes. There will hardly be anyone who will not be bothered by these mosquitoes. Their wrath increases further during this rainy season.
30 रोचक जानकारीयां  मच्छर के बारे में || 30 Interesting facts about Mosquito ||

Mosquito is a very harmful insect, which is found in almost all parts of the world. It spreads various types of diseases. This insect causes more deaths in the world than any other animal. Deaths from mosquito bites are many times higher than even war deaths in history. This is the reason why mosquitoes are considered more dangerous than animals like lions or snakes. So let's know about this mosquito today.
30 रोचक जानकारीयां  मच्छर के बारे में || 30 Interesting facts about Mosquito ||
  1. Mosquito is a Spanish word for a small fly. The term came into existence in the early 16th century.
  2. Mosquitoes are called Mozzies in Africa, New Zealand and Australia.
  3. People are never bitten by male mosquitoes, but always by female mosquitoes. This is because female mosquitoes require protein for the development of their eggs and they meet this need with human blood.
  4. Male mosquitoes suck sap from plants.
  5. Male mosquitoes are herbivores.
  6. The number of mosquitoes can be estimated from the fact that if all the mosquitoes of the earth are killed and collected in a field, then a heap of 5 kilo meters high will be formed.
  7. Female mosquitoes lay about 300 eggs at a time.
  8. A female mosquito can lay eggs up to three times during her lifetime.
  9. The lifespan of a mosquito is less than 2 months. Male mosquitoes live for 10 days and female mosquitoes for 6 to 8 weeks.
  10. Mosquitoes came to Earth about 200 million years ago.
  11. There are more than 3500 types of mosquitoes present on earth.
  12. Mosquitoes recognize the smell of humans. They recognize by the smell of a person whether they have encountered this person before or not.
  13. Mosquitoes don't have teeth, so they bite with the sharp and long side of their mouth. A mosquito can drink 3 times more blood than its own weight.
  14. According to a research, people who drink beer are bitten by mosquitoes more than other people.
  15. Mosquitoes not only like beer drinkers, but also pregnant women and people with 'O' blood group. Mosquitoes bite such people more.
  16. If a person sweats more, then mosquitoes will bite him more because the smell of sweat attracts mosquitoes.
  17. 1200000 mosquitoes together can suck the whole blood of a person. That is, in order to suck all the blood of a person's body, the mosquito will have to bite that person about 1.2 million times.
  18. Mosquitoes have been on this earth since the time of the dinosaurs. They also existed in the Triassic period, 251 million years ago.
  19. If there is a Tulsi plant in the house, then mosquitoes do not come near it because of its fragrance. Mosquitoes run away from Tulsi leaves.
  20. Apart from basil leaves, mosquitoes do not like the smell of lavender, marigold flowers and garlic and things that smell like lemon also keep mosquitoes away.
  21. Mosquitoes have poor vision, so they can see people wearing dark clothes more easily than people who wear light colored clothes.
  22. In 2013, researchers discovered fossils of two mosquitoes in a mountain range town in Montana, US, and found that there was minimal difference between those prehistoric mosquitoes and modern mosquitoes today.
  23. Mosquitoes have a very sharp memory. Research has shown that when we try to kill a mosquito, it does not hover near for at least 24 hours.
  24. Mosquitoes are more attracted to those who have eaten bananas immediately.
  25. Iceland is the only country in the world where mosquitoes are not found.30 रोचक जानकारीयां  मच्छर के बारे में || 30 Interesting facts about Mosquito ||
  26. If there is itching at the mosquito bite area, then applying a little hot spoon there, it stops itching.
  27. Mosquitoes are more attracted towards black and blue colours.
  28. The female mosquito sucks .01 to .1 ml of blood in one sting.
  29. Mosquitoes fly at 2 feet per second and cannot fly above 40 feet. They fly within an area of ​​up to 1 mile from their place of birth.
  30. Mosquitoes flap their wings 500 times in 1 second. This is the reason that before the bite of a mosquito comes the sound of its murmur.

शिव मंदिर, कचनार सिटी, जबलपुर || Shiv Mandir, Kachnar City, Jabalpur ||

शिव मंदिर, कचनार सिटी

जबलपुर को सुनहरे इतिहास में ऐसे कई नाम एवं उपनामों से जाना जाता रहा है। प्राचीन समय में 'जब्बलपोर' या जब्बालीपुरम जैसे नाम से पुकारा जाता था तो वही आजकल संस्कारधानी जैसे उपनामों से जबलपुर को जाना जाता है।

शिव मंदिर, कचनार सिटी, जबलपुर

कचनार सिटी मंदिर मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में विजय नगर में स्थित है। जबलपुर रेलवे स्टेशन से इस मंदिर की दूरी करीब 7 से 8 किलोमीटर की है। जबलपुर में कई बेहतरीन पर्यटन स्थल है, जहां दूर-दूर से लोग घूमने आते हैं। तो चलिए आज हम आपको जबलपुर के कैसे बेहतरीन मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे हम सभी 'कचनार सिटी' के नाम से जानते हैं।

कचनार सिटी मंदिर

कचनार सिटी मंदिर एक भव्य मंदिर है जो कि जबलपुर शहर के पॉश इलाके में स्थित है। यहां भगवान शिव की एक बहुत बड़ी प्रतिमा का निर्माण किया गया है, जिसे देखकर हम सभी मुक्त मंत्रमुग्ध हो जाएंगे। इसकी सुंदरता और बनावट अपने आप में बेजोड़ है। यह मंदिर 6 एकड़ क्षेत्र में बना हुआ है, जिसमें एक बहुत ही बड़ा गार्डन है और इसी गार्डन के बीचो बीच खुले आसमान के नीचे ध्यान मुद्रा में बैठे भगवान शिव की मूर्ति स्थापित की गई है।

सबसे बडी प्रतिमा 72 फुट महादेव

शंकर भगवान की प्रतिमा 76 फीट ऊंची है। इस मूर्ति के नीचे गुफा का निर्माण किया गया है जहां संपूर्ण 12 ज्योतिर्लिंगों के प्रति रूपों को स्थापित किया गया है। इसके अलावा है यहां एक बड़ा गेट और अन्य आकर्षक मूर्तियां भी लगाई गई हैं, जो कि आने वालों के लिए आकर्षण का केंद्र होती है। जबलपुर में इसके निर्माण का ख्याल सबसे पहले कचनार सिटी को बसाने वाले बिल्डर श्री अरुण तिवारी जी को आया था।

सन 2002 में साउथ इंडिया के शिमोगा जिले से खास मूर्ति बनाने वाले प्रमुख मूर्तिकार के.श्रीधर अपने 15 मजदूरों के साथ जबलपुर आए। बुनियादी आवश्यकता की पूर्ति होने के बाद सन् 2003 में कारीगरों द्वारा मूर्ति बनाने का काम शुरू कर दिया गया था। ऊंचाई बढ़ने पर काम करने के लिए खास लिफ्ट का भी प्रयोग किया गया था। मूर्ति बनने में लगभग 3 साल का समय लग गया।अरुण तिवारी जी ने मूर्तिकार के. श्रीधर से लगभग 81 फीट ऊंचाई वाली मूर्ति की इच्छा जताई थी लेकिन मूर्ति बन कर तैयार होने के बाद इसकी ऊंचाई 72 फुट थी। भगवान शिव का वाहन नंदी जी को भी यहां स्थापित किया गया है।

कचनार सिटी में भोलेनाथ ki विशाल प्रतिमा

12 बड़ी मूर्ति का निर्माण करने वाले के श्रीधर या मानते हैं कि कचनार सिटी किया मूर्तिउनके द्वारा बनाई गई अन्य मूर्तियों से ज्यादा आकर्षक है। के. श्रीधर खुद भी चार-पांच साल में एक बार यहां जरूर आते हैं।

यह मंदिर यहां आने वाले श्रद्धालुओं एवं शिव भक्तों के लिए हमेशा खुला रहता है। लोग वैसे तो अक्सर दूर-दूर से यहां घूमने आते रहते हैं, लेकिन नए साल के दिन, महाशिवरात्रि, नाग पंचमी एवं सावन महीने में यहां बहुत ही भारी भीड़ उमड़ती है।

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Shiv Mandir, Kachnar City

Jabalpur has been known by many such names and surnames in the golden history. In ancient times it was called by name like 'Jabbalpore' or Jabbalipuram, whereas nowadays Jabalpur is known by nicknames like Sanskardhani.

Kachnar City Temple is located at Vijay Nagar in Jabalpur district of Madhya Pradesh. The distance of this temple from Jabalpur railway station is about 7 to 8 kilometers. There are many great tourist places in Jabalpur, where people from far and wide come to visit. So today we are going to tell you about the best temple of Jabalpur which we all know as 'Kachnar City'.

Shiv Mandir, Kachnar City, Jabalpur

Kachnar City Temple

Kachnar City Temple is a grand temple situated in the posh area of ​​Jabalpur city. A huge statue of Lord Shiva has been constructed here, seeing which we will all be free to be mesmerized. Its beauty and texture is unmatched in itself. This temple is built in an area of ​​6 acres, in which there is a very big garden and in the middle of this garden the idol of Lord Shiva sitting in meditation posture has been installed under the open sky.

The idol of Lord Shankar is 76 feet high. A cave has been constructed under this idol where the forms have been installed for the entire 12 Jyotirlingas. Apart from this, a big gate and other attractive sculptures have also been installed here, which is the center of attraction for the visitors. The idea of ​​its construction in Jabalpur first came to the builder Shri Arun Tiwari ji, who settled Kachnar City.

Shiv Mandir, Kachnar City, Jabalpur

In 2002, K.Sridhar, a prominent sculptor who made a special idol from Shimoga district of South India, came to Jabalpur with 15 of his laborers. After fulfilling the basic requirement, the work of making idols by the artisans was started in 2003. A special lift was also used to do the work as the height increased. It took about 3 years to make the idol. The idol was about 81 feet in height from Sridhar, but after the idol was ready, its height was 72 feet. Nandi ji, the vehicle of Lord Shiva, has also been installed here.

K Sridhar, who built the 12 big idol, believes that the Kachnar City Kiya Murti is more attractive than the other idols made by him. Of. Sridhar himself definitely comes here once in four-five years.

This temple is always open for the devotees and Shiva devotees who come here. Although people often come from far and wide to visit here, but there is a huge crowd on New Year's Day, Mahashivratri, Nag Panchami and in the month of Sawan.

मणिपुर चक्र : नाभि केन्द्र || शरीर विज्ञान व सातचक्र ||

मणिपुर चक्र : नाभि केन्द्र

मणि = गहना
पुर = स्थान, शहर

शरीर विज्ञान व सातचक्र

मणिपुर चक्र नाभि के पीछे स्थित है। इसका मंत्र है रम। जब हमारी चेतना मणिपुर चक्र में पहुंच जाती है, तब हम स्वाधिष्ठान के निषेधात्मक पक्षों पर विजय प्राप्त कर लेते हैं। मणिपुर चक्र में अनेक बहुमूल्य मणियां हैं जैसे स्पष्टता, आत्मविश्वास, आनन्द, आत्म भरोसा, ज्ञान, बुद्धि और सही निर्णय लेने की योग्यता जैसे गुण।

मणिपुर चक्र का रंग पीला है। मणिपुर का प्रतिनिधित्व करने वाला पशु मेढ़ा (मेष)है। इसका अनुरूप तत्त्व अग्नि है, इसलिए यह 'अग्नि' या 'सूर्य केन्द्र' के नाम से भी जाना जाता है। शरीर में अग्नि तत्त्व सौर मंडल में गर्मी के समान ही प्रकट होता है। मणिपुर चक्र स्फूर्ति का केन्द्र है। यह हमारे स्वास्थ्य को सुदृढ़ और पुष्ट करने के लिए हमारी ऊर्जा नियंत्रित करता है। इस चक्र का प्रभाव एक चुंबक की भांति होता है, जो ब्रह्माण्ड से प्राण को अपनी ओर आकर्षित करता है।

मणिपुर चक्र : नाभि केन्द्र

पाचक अग्नि के स्थान के रूप में, यह चक्र अग्न्याशय और पाचक अवयवों की प्रक्रिया को विनियमित करता है। इस केन्द्र में अवरोध कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं, जैसे पाचन में खराबियां, परिसंचारी रोग, मधुमेह और रक्तचाप में उतार-चढ़ाव। तथापि, एक दृढ़ और सक्रिय मणिपुर चक्र अच्छे स्वास्थ्य में बहुत सहायक होता है और बहुत सी बीमारियों को रोकने में हमारी मदद करता है। जब इस चक्र की ऊर्जा निर्बाध प्रवाहित होती है तो प्रभाव एक शक्तिपुंज के समान, निरन्तर स्फूर्ति प्रदान करने वाला होता है - संतुलन और शक्ति बनाए रखता है।

मणिपुर चक्र के प्रतीक चित्र में दस पंखुडिय़ों वाला एक कमल है। यह दस प्राणों, प्रमुख शक्तियों का प्रतीक है जो मानव शरीर की सभी प्रक्रियाओं का नियंत्रण और पोषण करती है। मणिपुर का एक अतिरिक्त प्रतीक त्रिभुज है, जिसका शीर्ष बिन्दु नीचे की ओर है। यह ऊर्जा के फैलाव, उद्गम और विकास का द्योतक है। मणिपुर चक्र के सक्रिय होने से मनुष्य नकारात्मक ऊर्जाओं से मुक्त होता है और उसकी स्फूर्ति में शुद्धता और शक्ति आती है।

मणिपुर चक्र : नाभि केन्द्र

इस चक्र के देवता विष्णु और लक्ष्मी हैं। भगवान विष्णु उदीयमान मानव चेतना के प्रतीक हैं, जिनमें पशु चारित्रता बिल्कुल नहीं है। देवी लक्ष्मी प्रतीक है-भौतिक और आध्यात्मिक समृद्धि की, जो भगवान की कृपा और आशीर्वाद से फलती-फूलती है।

अनाहत चक्र हृदय के निकट सीने के बीच में स्थित है। इसका मंत्र यम(YAM)है। अनाहत चक्र का रंग हलका नीला, आकाश का रंग है। इसका समान रूप तत्त्व वायु है। वायु प्रतीक है-स्वतंत्रता और फैलाव का। इसका अर्थ है कि इस चक्र में हमारी चेतना अनंत तक फैल सकती है।

अनाहत चक्र आत्मा की पीठ (स्थान) है। अनाहत चक्र के प्रतीक चित्र में बारह पंखुडिय़ों का एक कमल है। यह हृदय के दैवीय गुणों जैसे परमानंद, शांति, सुव्यवस्था, प्रेम, संज्ञान, स्पष्टता, शुद्धता, एकता, अनुकंपा, दयालुता, क्षमाभाव और सुनिश्चिय का प्रतीक है। तथापि, हृदय केन्द्र भावनाओं और मनोभावों का केन्द्र भी है। इसके प्रतीक छवि में दो तारक आकार के ऊपर से ढाले गए त्रिकोण हैं। एक त्रिकोण का शीर्ष ऊपर की ओर संकेत करता है और दूसरा नीचे की ओर। जब अनाहत चक्र की ऊर्जा आध्यात्मिक चेतना की ओर प्रवाहित होती है, तब हमारी भावनाएं भक्ति, शुद्ध, ईश्वर प्रेम और निष्ठा प्रकट करती है। तथापि यदि हमारी चेतना सांसारिक कामनाओं के क्षेत्र में डूब जाती है, तब हमारी भावनाएं भ्रमित और असंतुलित हो जाती हैं। तब होता यह है कि इच्छा, द्वेष-जलन, उदासीनता और हताशा भाव हमारे ऊपर छा जाते हैं।

अनाहत, ध्वनि (नाद) की पीठ है। इस चक्र पर एकाग्रता व्यक्ति की प्रतिभा को लेखक या कवि के रूप में विकसित कर सकती है। अनाहत चक्र से उदय होने वाली दूसरी शक्ति संकल्प शक्ति है जो इच्छा पूर्ति की शक्ति है। जब आप किसी इच्छा की पूर्ति करना चाहते हैं, तब अपने हृदय में इसे एकाग्रचित्त करें। आपका अनाहत चक्र जितना अधिक शुद्ध होगा उतनी ही शीघ्रता से आपकी इच्छा पूरी होगी।

अनाहत चक्र का प्रतीक पशु कुरंग (हिरण) है जो अत्यधिक ध्यान देने और चौकन्नेपन का हमें स्मरण कराता है। इस चक्र के देवता शिव और पार्वती हैं, जो चेतना और प्रकृति के प्रतीक हैं। इस चक्र में दोनों को सुव्यवस्था में एक हो जाना चाहिए।

शरीर विज्ञान व सातोंचक्रों को एक साथ यहाँ क्लिक करके पढ़ें 

मंगल-आह्वान - रामधारी सिंह दिनकर || इतवार (Sunday) ||

मंगल-आह्वान

मंगल-आह्वान  - रामधारी सिंह दिनकर
"खुद पर विश्वास करना एक जादू जैसा है, 
अगर हम ये कर सकते हैं तो कुछ भी कर सकते हैं..❤️"

भावों के आवेग प्रबल
मचा रहे उर में हलचल।

कहते, उर के बाँध तोड़
स्वर-स्त्रोत्तों में बह-बह अनजान,
तृण, तरु, लता, अनिल, जल-थल को
छा लेंगे हम बनकर गान।

पर, हूँ विवश, गान से कैसे
जग को हाय ! जगाऊँ मैं,
इस तमिस्त्र युग-बीच ज्योति की
कौन रागिनी गाऊँ मैं?

बाट जोहता हूँ लाचार
आओ स्वरसम्राट ! उदार

पल भर को मेरे प्राणों में
ओ विराट्‌ गायक ! आओ,
इस वंशी पर रसमय स्वर में
युग-युग के गायन गाओ।

वे गायन, जिनके न आज तक
गाकर सिरा सका जल-थल,
जिनकी तान-तान पर आकुल
सिहर-सिहर उठता उडु-दल।

आज सरित का कल-कल, छल-छल,
निर्झर का अविरल झर-झर,
पावस की बूँदों की रिम-झिम
पीले पत्तों का मर्मर,

जलधि-साँस, पक्षी के कलरव,
अनिल-सनन, अलि का गुन-गुन
मेरी वंशी के छिद्रों में
भर दो ये मधु-स्वर चुन चुन।

दो आदेश, फूँक दूँ श्रृंगी,
उठें प्रभाती-राग महान,
तीनों काल ध्वनित हो स्वर में
जागें सुप्त भुवन के प्राण।

गत विभूति, भावी की आशा,
ले युगधर्म पुकार उठे,
सिंहों की घन-अंध गुहा में
जागृति की हुंकार उठे।

जिनका लुटा सुहाग, हृदय में
उनके दारुण हूक उठे,
चीखूँ यों कि याद कर ऋतुपति
की कोयल रो कूक उठे।

प्रियदर्शन इतिहास कंठ में
आज ध्वनित हो काव्य बने,
वर्तमान की चित्रपटी पर
भूतकाल सम्भाव्य बने।

जहाँ-जहाँ घन-तिमिर हृदय में
भर दो वहाँ विभा प्यारी,
दुर्बल प्राणों की नस-नस में
देव ! फूँक दो चिनगारी।

ऐसा दो वरदान, कला को
कुछ भी रहे अजेय नहीं,
रजकण से ले पारिजात तक
कोई रूप अगेय नहीं।

प्रथम खिली जो मघुर ज्योति
कविता बन तमसा-कूलों में
जो हँसती आ रही युगों से
नभ-दीपों, वनफूलों में;

सूर-सूर तुलसी-शशि जिसकी
विभा यहाँ फैलाते हैं,
जिसके बुझे कणों को पा कवि
अब खद्योत कहाते हैं;

उसकी विभा प्रदीप्त करे
मेरे उर का कोना-कोना
छू दे यदि लेखनी, धूल भी
चमक उठे बनकर सोना॥

- रामधारी सिंह दिनकर
मंगल-आह्वान  - रामधारी सिंह दिनकर
"आँसुओं के माध्यम से संघर्ष करने वाली मुस्कान
से अधिक सुंदर कुछ भी नहीं है.. ❤️"

उल्लू का अभिषेक : पंचतंत्र

उल्लू का अभिषेक

एक एव हितार्थाय तेजस्वी पार्थिवो भुवः

एक राजा के रहते दूसरे को राजा बनाना उचित नहीं 

उल्लू का अभिषेक : पंचतंत्र

एक बार हंस, तोता, बगुला, कोयल, चातक, कबूतर, उल्लू आदि सब पक्षियों ने सभा करके यह सलाह की कि उनका राजा वैनतेय केवल वासुदेव की भक्ति में लगा रहता है, व्याधों से उनकी रक्षा का कोई उपाय नहीं करता, इसलिए पक्षियों का कोई अन्य राजा चुन लिया जाए। कई दिनों की बैठक के बाद सबने यह सम्मति से सर्वांग सुन्दर उल्लू को राजा चुना।

अभिषेक की तैयारियाँ होने लगी। विविध तीर्थों से पवित्र जल मंगाया गया, सिंहासन पर रत्न जड़े गए, स्वर्णघट भरे गए, मंगलपाठ शुरू हो गया, ब्राह्मणों ने वेद-पाठ शुरू कर दिया, नर्तकियों ने नृत्य की तैयारी कर ली; उलूकराज राज्यसिंहासन पर बैठने ही वाले थे कि कहीं से एक कौवा आ गया।

उल्लू का अभिषेक : पंचतंत्र

कौवे ने सोचा, यह समारोह कैसा? यह उत्सव किसलिए? पक्षियों ने भी कौवे को देखा तो आश्चर्य में पड़ गए। उसे तो किसी ने बुलाया ही नहीं था। फिर भी उन्होंने सुन रखा था कि कौवा सबसे चतुर कूट राजनीतिज्ञ पक्षी है; इसलिए उससे मन्त्रणा करने के लिए सब पक्षी उसके चारों ओर इकट्ठे हो गए।

उलूकराज ने राज्याभिषेक की बात सुनकर कौवे ने हँसते हुए कहा-यह चुनाव ठीक नहीं हुआ। मोर, हँस, कोयल, सारस, चक्रवाक, शुक आदि सुन्दर पक्षियों के रहते दिवान्ध उल्लू और टेढ़ी नाक वाले अप्रियदर्शी पक्षी को राजा बनाना उचित नहीं है। वह स्वभाव से ही रौद्र है और कटुभाषी है। फिर अभी तो वैनतेय राजा बैठा है। एक राजा के रहते दूसरे को राज्यासन देना विनाशक है। पृथ्वी पर एक ही सूर्य होता है; वह अपनी आभा से सारे संसार की प्रकाशित कर देता है। एक से अधिक सूर्य होने पर प्रलय हो जाती है। प्रलय में बहुत-से सूर्य निकल आते हैं; उनसे संसार में विपत्ति ही आती है, कल्याण नहीं।

राजा एक ही होता है। उसके नाम-कीर्तन से ही काम बन जाते हैं, चन्द्रमा के नाम से ही खरगोशों ने हाथियों से छुटकारा पाया था।

पक्षियों ने पूछा- कैसे?

कौवे ने तब खरगोश और हाथी की यह कहानी सुनाई।

बड़े नाम की महिमा

      To be continued ...

तेनालीराम - कंजूस सेठ और चित्रकार || Tenali Raman - kanjus seth aur Chitrkaar ||

 तेनालीराम - कंजूस सेठ और चित्रकार

एक समय पर राजा कृष्णदेव राय के राज्य में एक कंजूस सेठ हुआ करता था। उसके पास धन की कोई कमी न थी, पर एक पैसा भी जेब से निकालते समय मानो उसकी जान जाती थी। एक बार उसके कुछ मित्रों ने हंसी-हंसी में एक कलाकार से अपना चित्र बनवाने के लिए उसे राजी कर लिया। उसके सामने वह मान तो गया, पर जब चित्रकार उसका चित्र बनाकर लाया तो सेठ की हिम्मत न पड़ी कि चित्र के मूल्य के रूप में चित्रकार को सौ स्वर्ण मुद्राएं दे दे।

तेनालीराम - कंजूस सेठ और चित्रकार

 चित्रकार को आया देखकर सेठ अंदर गया और कुछ ही क्षणों में अपना चेहरा बदलकर बाहर आया। उसने चित्रकार से कहा - "तुम्हारा चित्र जरा भी ठीक नहीं बना है। तुम्हीं बताओ, क्या तुम्हारे द्वारा बनाया गया चित्र मेरे चेहरे से जरा भी मिलता है?" 

चित्रकार ने देखा, सचमुच चित्र सेठ के चेहरे से जरा भी नहीं मिलता था।

तभी कंजूस सेठ बोला - "जब तुम ऐसा चित्र बनाकर लाओगे, जो ठीक मेरी शक्ल से मिलेगा, तभी मैं उसे खरीदूंगा।"

दूसरे दिन चित्रकार एक और चित्र बनाकर लाया, जो हूबहू सेठ के उस चेहरे से मिलता था, जो सेठ ने पहले दिन बना रखा था। इस बार फिर सेठ ने अपना चेहरा बदल लिया और चित्रकार के चित्र में कमी निकालने लगा। 

चित्रकार बड़ा लज्जित हुआ। उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि इस तरह की गलती उसके चित्र में क्यों हो रही है? अगले दिन वह फिर एक नया चित्र बनाकर ले गया, पर उसके साथ फिर वही हुआ। अब तक चित्रकार की समझ में सेठ की चाल आ चुकी थी। 

वह जानता था कि यह मक्खीचूस सेठ असल में पैसे नहीं देना चाहता है, पर चित्रकार अपनी कई दिनों की मेहनत भी बेकार नहीं जाने देना चाहता था। बहुत सोंच-विचार कर चित्रकार तेनालीराम के पास पहुंचा और अपनी समस्या उनसे कह सुनाई।

कुछ समय सोचने के बाद तेनालीराम ने कहा - "कल तुम उसके पास एक शीशा लेकर जाओ और कहो कि इस बार बिल्कुल असली तस्वीर लेकर आया हूं। अच्छी तरह मिलाकर देख लीजिए। कहीं कोई अंतर आपको नहीं मिलेगा। बस, फिर अपना काम हुआ ही समझो।"

अगले दिन चित्रकार ने ऐसा ही किया। वह शीशा लेकर सेठ के यहां पहुंचा और उसके सामने रख दिया। देखिये सेठजी, आपका बिल्कुल सही चित्र। गलती की इसमें जरा भी गुंजाइश नहीं है। चित्रकार ने अपनी मुस्कराहट पर काबू पाते हुए कहा। 

लेकिन यह तो शीशा है,सेठ ने झुंझलाते हुए कहा। 

चित्रकार बोला - "आपकी असली सूरत शीशे के अलावा बना भी कौन सकता है? अब जल्दी से मेरे चित्रों का मूल्य एक हजार स्वर्ण मुद्राएं मुझे दे दीजिये।  

सेठ समझ गया कि यह सब तेनालीराम की सूझबूझ का परिणाम है। उसने तुरंत एक हजार स्वर्णमुद्राएं चित्रकार को दे दीं। इसतरह चित्रकार के मेहनत के पैसे उसे मिल  गए। 

English Translate

Tenaliram and Kanjus Seth

Once upon a time there used to be a miserly Seth in the kingdom of King Krishna Deva Raya. He had no shortage of money, but while taking out a single penny from his pocket, it was as if he had lost his life. Once some of his friends laughingly persuaded an artist to get him painted. He agreed in front of him, but when the painter brought him a picture, Seth did not dare to give a hundred gold coins to the painter as the value of the picture.

तेनालीराम - कंजूस सेठ और चित्रकार

 Seeing the painter coming, Seth went inside and within a few moments came out with his face changed. He said to the painter - "Your picture is not made right at all. Tell me, does the picture made by you resemble my face at all?"

The painter saw that the picture really did not match Seth's face at all.

Then the miser Seth said - "When you will bring such a picture, which will match my face, only then I will buy it."

On the second day the painter brought another painting which was exactly the same as the face of Seth that Seth had drawn on the first day. This time again Seth changed his face and began to find fault with the portrait of the painter.

The painter was ashamed. He could not understand why such a mistake is happening in his picture. The next day he took a new picture again, but the same thing happened to him again. By now Seth's trick had come to the painter's understanding.

He knew that this scoundrel Seth really did not want to give money, but the painter did not want to let his many days of hard work go in vain. After much deliberation, the painter approached Tenaliram and narrated his problem to him.

After thinking for some time, Tenaliram said - "Tomorrow you go to him with a mirror and say that this time I have come with a real picture. Mix it well and you will not find any difference. That's it, then your work is done." understand."

The next day the painter did the same. He reached Seth's place with the mirror and placed it in front of him. See Sethji, your perfect picture. There is no room for error in this. The painter said, controlling his smile.

But this is a mirror, Seth said angrily.

The painter said - "Who can make your real face apart from the mirror? Now quickly give me one thousand gold coins worth my paintings.

Seth understood that all this was the result of Tenaliram's wisdom. He immediately gave one thousand gold coins to the painter. In this way he got the money for the painter's hard work.

श्रीमद्भगवद्गीता || Shrimad Bhagwat Geeta || अध्याय एक के अनुच्छेद 12-19

श्रीमद्भगवद्गीता || अध्याय एक ~ अर्जुनविषादयोग ||

अथ प्रथमोऽध्यायः- अर्जुनविषादयोग

अध्याय एक के अनुच्छेद 12-19

अध्याय एक के अनुच्छेद 12-19 दोनों सेनाओं की शंख-ध्वनि का वर्णन किया गया है।

श्रीमद्भगवद्गीता || Shrimad Bhagwat Geeta || अध्याय एक के अनुच्छेद 12-19

तस्य सञ्जनयन्हर्षं कुरुवृद्धः पितामहः ।
सिंहनादं विनद्योच्चैः शंख दध्मो प्रतापवान्‌ ||1.12 ||

भावार्थ :  
कौरवों में वृद्ध बड़े प्रतापी पितामह भीष्म ने उस दुर्योधन के हृदय में हर्ष उत्पन्न करते हुए उच्च स्वर से सिंह की दहाड़ के समान गरजकर शंख बजाया॥12॥

ततः शंखाश्च भेर्यश्च पणवानकगोमुखाः ।
सहसैवाभ्यहन्यन्त स शब्दस्तुमुलोऽभवत्‌ ॥1.13॥

भावार्थ : इसके पश्चात शंख और नगाड़े तथा ढोल, मृदंग और नरसिंघे आदि बाजे एक साथ ही बज उठे। उनका वह शब्द बड़ा भयंकर हुआ॥13॥

ततः श्वेतैर्हयैर्युक्ते महति स्यन्दने स्थितौ ।
माधवः पाण्डवश्चैव दिव्यौ शंखौ प्रदध्मतुः ॥1.14॥

भावार्थ : इसके अनन्तर सफेद घोड़ों से युक्त उत्तम रथ में बैठे हुए श्रीकृष्ण महाराज और अर्जुन ने भी अलौकिक शंख बजाए॥ 1.14॥

पाञ्चजन्यं हृषीकेशो देवदत्तं धनञ्जयः ।
पौण्ड्रं दध्मौ महाशंख भीमकर्मा वृकोदरः ॥1.15॥

भावार्थ :  श्रीकृष्ण महाराज ने पाञ्चजन्य नामक, अर्जुन ने देवदत्त नामक और भयानक कर्मवाले भीमसेन ने पौण्ड्र नामक महाशंख बजाया॥15॥

अनन्तविजयं राजा कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिरः ।
नकुलः सहदेवश्च सुघोषमणिपुष्पकौ ॥1.16॥

भावार्थ :
कुन्तीपुत्र राजा युधिष्ठिर ने अनन्तविजय नामक और नकुल तथा सहदेव ने सुघोष और मणिपुष्पक नामक शंख बजाए॥16॥

काश्यश्च परमेष्वासः शिखण्डी च महारथः ।
धृष्टद्युम्नो विराटश्च सात्यकिश्चापराजितः ॥৷1.17॥
द्रुपदो द्रौपदेयाश्च सर्वशः पृथिवीपते ।
सौभद्रश्च महाबाहुः शंखान्दध्मुः पृथक्पृथक्‌ ॥1.18॥

भावार्थ : 
श्रेष्ठ धनुष वाले काशिराज और महारथी शिखण्डी एवं धृष्टद्युम्न तथा राजा विराट और अजेय सात्यकि, राजा द्रुपद एवं द्रौपदी के पाँचों पुत्र और बड़ी भुजावाले सुभद्रा पुत्र अभिमन्यु- इन सभी ने, हे राजन्‌! सब ओर से अलग-अलग शंख बजाए॥17-18॥

स घोषो धार्तराष्ट्राणां हृदयानि व्यदारयत्‌ ।
नभश्च पृथिवीं चैव तुमुलो व्यनुनादयन्‌ ॥1.19॥

भावार्थ : 
और उस भयानक शब्द ने आकाश और पृथ्वी को भी गुंजाते हुए धार्तराष्ट्रों के अर्थात आपके पक्षवालों के हृदय विदीर्ण कर दिए॥19॥

20 रोचक जानकारीयां हाथी के बारे में || 20 Interesting facts about Elephant ||

हाथी के बारे में रोचक जानकारी (Interesting facts about Elephant)

E से न जाने कितने ही शब्द होंगे, पर जब हम बच्चे को इंग्लिश अल्फाबेट पढ़ाना शुरू करते हैं तो बच्चा E for Elephant ही पढता है।

20 रोचक जानकारीयां हाथी के बारे में || 20 Interesting facts about Elephant ||

हाथी का नाम सुनते ही एक विशालकाय छवि हमारे जेहन में उतर आती है। बचपन में जब कभी सड़क से कोई हाथी गुजरता था, तो उसको देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती थी। उस भीड़ में एक मैं भी हुआ करती थी। शायद आपलोगों में से भी कुछ लोग होंगे। खैर आज हाथी से सम्बंधित कुछ बातें शेयर कर रही हूँ, जो शायद आपलोगों के लिए नई हो और कुछ लोग इससे वाकिफ भी होंगे। 

20 रोचक जानकारीयां हाथी के बारे में || 20 Interesting facts about Elephant ||

हाथी जमीन पर रहने वाला सबसे विशाल और ताकतवर स्तनपायी जानवर है। वैसे तो हाथी एक जंगली जानवर है लेकिन मनुष्य के द्वारा हाथी को उचित ट्रेनिंग देकर सदियों से पालतू बनाया जाता रहा है। यह एलीफेंन्टिडी कुल और प्रोबोसीडिया गण का प्राणी है। आज एलीफेंन्टिडी कुल में केवल 2 प्रजातियां जीवित हैं एंलिफस तथा लाक्सोडांण्टा। तीसरी प्रजाति मैमथ विलुप्त हो चुकी है।तो, आज हाथी के बारे में कुछ रोचक तथ्य जानने की कोशिश करते हैं-

20 रोचक जानकारीयां हाथी के बारे में || 20 Interesting facts about Elephant ||

  1. एशियाई सभ्यताओं में हाथी बुद्धिमता का प्रतीक माना जाता है और अपनी स्मरण शक्ति तथा बुद्धिमानी के लिए प्रसिद्ध है, जहां उनकी बुद्धिमानी डॉल्फिन तथा वनमानुष के बराबर मानी जाती है।
  2. पर्यवेक्षण से पता चला है कि हाथी का कोई प्राकृतिक परभक्षी नहीं होता है, हालांकि सिंह का समूह शावक या कमजोर जीव का शिकार करते देखा गया है।
  3. हाथी की सूंड की मांसपेशियां बहुत ही मजबूत होती है इसकी सूंड बहुत ही उपयोगी है, जो नहाने और खाना तोड़कर खाने में काम आती है। हाथी के सूंड का वजन 130 किलोग्राम के आस पास होता है।
  4. हाथी सूंड मिलाकर एक-दूसरे का अभिवादन करते है।     
  5.  एक तरफ तो हाथी की सूंड इतनी संवेदनशील होती है कि घास का एक तिनका भी उठा लेती है तो दूसरी तरफ इतनी मजबूत भी होती है कि पेड़ की टहनियां भी उखाड़ ले।
  6. हाथी अपनी सूंड में एक बार में करीब 14 लीटर पानी खींच लेता है और फिर उसे अपने मुँह में उड़ेल देता है। नहाने के लिए भी हाथी इसी विधि का इस्तेमाल करता है। 
  7. हाथी के शरीर का सबसे मुलायम हिस्सा उसके कान के पीछे होता है, इसलिए उसे कान से ही काबू में किया जाता है।
  8. हाथी की उम्र लगभग 100 साल से भी अधिक होती है। हाथी अपने भारी शरीर का वजन पैरों से उठाता है जो खंभे के आकार के होते हैं तथा बहुत मजबूत होते हैं। हाथी आठ फीट से भी ज्यादा ऊंचे होते हैं।
  9. हाथिनियों में गर्भावस्था 18 से 22 माह तक की होती है। प्रत्येक मिनट हाथी दो से तीन बार सांस लेता और छोड़ता है।
  10. धरती पर हाथी की प्रजातियां को दो भागों में बांट सकते हैं- एक एशियाई हाथी और दूसरा अफ्रीकी हाथी।
  11. हाथी एक ऐसा जानवर है जो कूद नहीं सकता है जिसका मुख्य वजह उसका भारी-भरकम शरीर है जो इसे ऐसा करने से रोकता है।
  12. बुद्धिमता, सुनने की अच्छी क्षमता और सुंघने की बेहतर क्षमता होने के बाद भी हाथी की देखने की क्षमता बहुत कमजोर होती है, जिसके कारण इसे कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
  13. हाथी ज्यादातर समय खड़े होकर ही सोते हैं, क्योंकि इन्हें बैठने में भी दिक्कत होती है और उससे ज्यादा दिक्कत वापस खड़ा होने में होती है।
  14. हाथी की चमड़ी 1 इंच मोटी होती है, लेकिन इनकी त्वचा बहुत ज्यादा संवेदनशील होती है इसलिए हाथी मिट्टी और कीचड़ में लोटते रहते हैं क्योंकि उन्हें सूर्य की तपिश तथा अन्य परजीवियों से त्वचा को बचानी होती है।
  15. अफ्रीका के हाथी का वजन 6000 किलो तक होता है, जबकि भारतीय हाथियों का वजन 5000 किलो तक होता है।
  16. हाथी के दांत से आभूषण और सजावट के सामान बड़ी आसानी से बन जाते हैं, जिस कारण हाथियों का शिकार भी बहुत होता है।
  17. हाथी दिन भर खाते ही रहते हैं और यह एक दिन में करीब 120 किलो तक भोजन चट कर जाते हैं। शायद इसलिए कहावत है कि हाथी लेना आसान है, पर उसको रखना कठिन। 
  18. हाथी बहुत अधिक लगभग 5 मील की दूरी से एक दूसरे की आवाज को सुन सकते हैं।
  19. अपने भारी-भरकम वजन के बावजूद भी हाथी एक बहुत अच्छा तैराक होता है।
  20. नर हाथी वयस्क होते ही अकेले रहना शुरू कर देते हैं, जबकि मादा हाथी समूह में रहती है। समूह का नेतृत्व करने वाली हथिनी को कुल माता भी कहा जाता है।
20 रोचक जानकारीयां हाथी के बारे में || 20 Interesting facts about Elephant ||

प्राचीन समय में भारत के राजा-महाराजा हाथियों पर बैठकर युद्ध किया करते थे। हाथी उनका मुख्य पशु हुआ करता था। वे हाथियों को युद्ध के लिए विशेष तौर पर प्रशिक्षित करवाते थे क्योंकि इनकी त्वचा बहुत ही मोटी होती है और इन पर साधारण हथियारों का आसानी से असर भी नहीं होता था, जिसके कारण यह युद्ध में अजेय होते थे।

20 रोचक जानकारीयां हाथी के बारे में || 20 Interesting facts about Elephant ||

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Interesting facts about Elephant

There will be many words from E, but when we start teaching English alphabet to the child, then the child reads only E for Elephant.

On hearing the name of the elephant, a giant image comes to our mind. In childhood, whenever an elephant used to pass through the road, people used to crowd to see it. I used to be one in that crowd. Maybe some of you will too. Well today I am sharing some things related to elephant, which may be new for you and some people will also be aware of it.

20 रोचक जानकारीयां हाथी के बारे में || 20 Interesting facts about Elephant ||

Elephant is the largest and most powerful mammal living on land. Although elephant is a wild animal, but elephant has been domesticated by humans for centuries by giving proper training. It is an animal of Elephantidae family and Proboscidea family. There are only 2 species alive in the Elephantidae family today, Elephas and Laxodonta. The third species mammoth has become extinct. So, today let's try to know some interesting facts about elephant-

20 रोचक जानकारीयां हाथी के बारे में || 20 Interesting facts about Elephant ||

  1. In Asian civilizations, elephants are considered a symbol of intelligence and are famous for their memory and intelligence, where their intelligence is considered equal to that of dolphins and orangutans.
  2. Observations have shown that elephants have no natural predators, although groups of lions have been observed to hunt cubs or vulnerable creatures.
  3. The muscles of the trunk of an elephant are very strong, its trunk is very useful, which is used for bathing and eating after breaking food. The weight of an elephant's trunk is around 130 kg.
  4. Elephants greet each other with a trunk.
  5.  On the one hand, the trunk of an elephant is so sensitive that it can lift even a straw of grass and on the other hand it is strong enough to uproot even the branches of a tree.
  6. The elephant draws about 14 liters of water in its trunk at a time and then pours it into its mouth. The elephant also uses this method for bathing.
  7. The softest part of an elephant's body is behind its ear, so it is controlled by the ear.
  8. The lifespan of an elephant is more than 100 years. The elephant carries the weight of its heavy body with its legs which are pillar shaped and very strong. Elephants are more than eight feet tall.
  9. The pregnancy in elephants lasts from 18 to 22 months. Every minute the elephant inhales and exhales two to three times.
  10. Elephant species on earth can be divided into two parts - one Asian elephant and the other African elephant.
  11. An elephant is an animal that cannot jump, mainly because of its massive body which prevents it from doing so.
  12. Despite having good sense of intelligence, good hearing and better smelling ability, the elephant's ability to see is very weak, due to which it has to face many problems.
  13. Elephants sleep standing up most of the time, because they have trouble sitting and standing back more than that.
  14. Elephant's skin is 1 inch thick, but their skin is very sensitive, so elephants keep rolling in mud and mud because they have to protect the skin from the heat of the sun and other parasites.
  15. The African elephant weighs up to 6000 kg, while the Indian elephant weighs up to 5000 kg.
  16. Jewelry and decoration items are easily made from ivory, due to which there is a lot of hunting of elephants.
  17. Elephants keep on eating throughout the day and they eat up to 120 kg of food in a day. Maybe that's why there is a saying that it is easy to take an elephant, but it is difficult to keep it.
  18. Elephants can hear each other's voices from a distance of about 5 miles.
  19. Despite its heavy weight, the elephant is a very good swimmer.
  20. Male elephants start living alone as soon as they become adults, while female elephants live in groups. The elephant leading the group is also called Kul Mata.
20 रोचक जानकारीयां हाथी के बारे में || 20 Interesting facts about Elephant ||

In ancient times, the kings and emperors of India used to fight on elephants. The elephant was their main animal. They used to make elephants specially trained for war because their skin is very thick and they were not easily affected by ordinary weapons, due to which they were invincible in battle.

20 रोचक जानकारीयां हाथी के बारे में || 20 Interesting facts about Elephant ||

गणेश मंदिर, खजराना || Ganesh Mandir, Khajrana ||

गणेश मंदिर खजराना

खजराना गणेश मंदिर भारत के मध्य प्रदेश राज्य के इंदौर में गणेश जी को समर्पित एक तीर्थ स्थल है। गर्भ गृह के द्वार, बाहरी और ऊपरी दीवारें चांदी से बनी हैं, और इस पर विभिन्न मनोदशाओं और त्योहारों को दर्शाया गया है।भगवान गणेश की आंखें हीरे से बनी हैं, जो इंदौर के एक व्यापारी द्वारा दान की गई थीं। इस मंदिर परिसर में 33 छोटे-बड़े मंदिर बने हुए हैं, जहां भगवान राम, शिव, मां दुर्गा, साईंबाबा,हनुमान जी सहित अनेक देवी देवताओं के मंदिर हैं।मंदिर परिसर में पीपल का एक प्राचीन पेड़ भी है।

गणेश मंदिर, खजराना || Ganesh Mandir, Khajrana ||

खजराना गणेश मंदिर को बहुत ही चमत्कारिक माना जाता है। इस मंदिर में गणेश जी के मंदिर के पीछे की दीवार यानी गणेश जी के पीठ पर उल्टा स्वास्तिक बनाने से भक्त गण की हर मनोकामना पूरी होती है।कहते हैं कि यह चलन यहां पर कई सालों से चला आ रहा है।मनोकामना पूर्ण होने पर भक्त सीधा स्वास्तिक बनाकर भगवान गणेश का आशीर्वाद लेते हैं। एक अन्य मान्यता है कि मंदिर के तीन परिक्रमा लगाते हुए धागा बांधने से भी इच्छा पूर्ति होती है। ज्यादातर बुधवार और रविवार को विशाल संख्या में इस मंदिर में दर्शन करने के लिए लोग आते हैं।

284 साल पुराने इस मंदिर में गणेशजी की पीठ पर उल्टा स्वस्तिक बनाने से होती है मुराद पूरी

मंदिर का इतिहास

यह मंदिर 1735 में होल्कर वंश की बहादुर मराठा महारानी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा बनवाया गया था। ऐसा माना जाता है कि औरंगजेब से मूर्ति की रक्षा के लिए मूर्ति को एक कुएं में छिपा दिया गया था। कुछ समय बाद भगवान गणेश जी स्वयं मंगल भट्ट नामक भक्त को स्वप्न में एक विशेष जगह पर खुदाई करने को कहा। यह बात उसने सबको बताई। माता अहिल्या बाई ने भक्त के बताए गए स्थान पर खुदाई शुरू करवाई तो पाषाण युग की एक प्रतिमा प्राप्त हुई। माता अहिल्या खुद विराट शिवभक्त थीं।वह भगवान गणेश की मूर्ति पाकर अत्यंत प्रसन्न हुईं, और इस मूर्ति की स्थापना राजवाड़े पर करवाना चाहती थीं।इस वजह से उन्होंने कई मजदूरों को उस मूर्ति को खजराना से राजवाड़ा पहुंचाने का आदेश दे दिया, लेकिन जब मजदूरों ने इस मूर्ति को उठाने का प्रयास किया तो वह उसे हिला भी नहीं सके। इसके बाद भक्त भट्ट ने माता अहिल्या से अनुमति मांग कर कहा कि 'भगवान गणेश का आदेश इसी जगह स्थापित करने का है', लिहाजा माता अहिल्या ने भी इसकी अनुमति दे दी। जैसे ही मंदिर के स्थान पर लाने के लिए मजदूर और अन्य भक्तों मूर्ति उठाने पहुंचे तो भार एकदम कम हो गया। वहां मौजूद सभी ईश्वर के इस चमत्कार से दंग रह गए। खजराना गांव में ही भगवान की स्थापना की गई। खजराना गणेश मंदिर की मान्यता है कि यहां आने वाले हर भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती है।

इच्छापूर्ति के लिए प्रसिद्ध है खजराना गणेश मंदिर, विदेशों से भी लगती हैं अर्जियां

विश्व प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर की अपनी अनोखी महिमा है। यह एक ऐसा मंदिर है जहां भगवान की चौखट पर पट नहीं है, यहां भक्तों के लिए सदैव पट खुले रहते हैं।भक्तों के लिए 24 घंटे दर्शन की व्यवस्था है। हर वक्त एक विशेष मंत्र का जाप होता रहता है। मान्यता है कि जब भी किसी पर कोई विपत्ति आती है तो यहां पुजारियों के द्वारा एक विशेष अनुष्ठान और पूजन किया जाता है। धीरे-धीरे यह मंदिर तीर्थ स्थल का रूप ले लिया और यहां देश-विदेश से भी भक्त दर्शन करने आते हैं। मंदिर को नियमित रूप से दान के रुप में धन, सोना, हीरे और अन्य कीमती रत्न प्राप्त होते हैं।

गणेश मंदिर, खजराना उल्टा स्वास्तिक बनाने से पूरी होती हैं सभी इच्छाएं

गणेश चतुर्थी के दिन यहां भक्तों की संख्या सामान्य से कई गुना अधिक बढ़ जाती है। गणेश चतुर्थी के दिन भगवान का नित्य अभिषेक किया जाता है, और स्वर्ण मुकुट धारण करवाया जाता है। इसके साथ ही 51000 मोदक का भोग लगाया जाता है।गणेश चतुर्थी के दिन यहां मोदक का खास भोग कई वर्षों से लगाया जा रहा है। विशेष तरह का फूल और आकर्षक विद्युत सज्जा की जाती है।

गणेश मंदिर, खजराना इस गणेश मंदिर को माना जाता है चमत्कारी

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Ganesh Mandir, Khajrana

Khajrana Ganesh Temple is a pilgrimage site dedicated to Ganesha in Indore in the state of Madhya Pradesh, India. The gates, outer and upper walls of the sanctum sanctorum are made of silver, and depict various moods and festivals. Lord Ganesha's eyes are made of diamonds, which were donated by a merchant from Indore. There are 33 small and big temples in this temple complex, where there are temples of many deities including Lord Rama, Shiva, Maa Durga, Saibaba, Hanuman ji. There is also an ancient Peepal tree in the temple premises.

गणेश मंदिर, खजराना || Ganesh Mandir, Khajrana ||

Khajrana Ganesh Temple is considered to be very miraculous. In this temple, by making an inverted swastika on the back wall of Ganesh ji's temple, every wish of the devotee Gana is fulfilled. It is said that this practice has been going on here for many years. By making a straight swastika, take the blessings of Lord Ganesha. There is another belief that tying a thread while doing three rounds of the temple also fulfills the wish. People visit this temple in huge numbers mostly on Wednesdays and Sundays.

History of the Temple

This temple was built in 1735 by the brave Maratha Maharani Ahilyabai Holkar of the Holkar dynasty. It is believed that the idol was hidden in a well to protect the idol from Aurangzeb. After some time Lord Ganesha himself asked a devotee named Mangal Bhatt to dig a particular place in his dream. He told this to everyone. When Mata Ahilya Bai started excavation at the place mentioned by the devotee, a stone age statue was found. Mother Ahilya herself was a great devotee of Shiva. She was very pleased to get the idol of Lord Ganesha, and wanted to get this idol installed at the Rajwada. Because of this, she ordered many laborers to take that idol from Khajrana to Rajwada, but when the laborers When he tried to lift this idol, he could not even move it. After this, Bhakta Bhatt sought permission from Mother Ahilya and said that 'Lord Ganesha's order is to be established at this place', so Mother Ahilya also gave her permission. As soon as the laborers and other devotees arrived to lift the idol to bring it to the place of the temple, the load reduced drastically. Everyone present there was stunned by this miracle of God. God was established in Khajrana village itself. Khajrana Ganesh Temple has the belief that the wishes of every devotees who come here are fulfilled.

गणेश मंदिर, खजराना || Ganesh Mandir, Khajrana ||

The world famous Khajrana Ganesh Temple has its own unique glory. This is such a temple where there is no door on the door of the Lord, here the doors are always open for the devotees. There is a system of 24 hours darshan for the devotees. Every time a special mantra is chanted. It is believed that whenever there is any calamity on anyone, a special ritual and worship is performed by the priests here. Gradually this temple took the form of a pilgrimage site and devotees from all over the country and abroad also come here to visit. The temple receives regular donations of money, gold, diamonds and other precious gems.

On the day of Ganesh Chaturthi, the number of devotees here increases many times more than usual. On the day of Ganesh Chaturthi, the Lord is regularly anointed, and a golden crown is worn. Along with this, 51000 modaks are offered. On the day of Ganesh Chaturthi, special bhog of modak is being offered here for many years. Special flowers and attractive electrical decorations are done.