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भारतीय राज्य के राजकीय पक्षियों की सूची || List of State Birds of India ||

भारतीय राज्य के राजकीय पक्षियों की सूची |(List of State Birds of India)

भारत को राज्यों के संघ के रूप में जाना जाता है। हर राज्य की अपनी अलग जलवायु, कला-संस्कृति, पहनावा और खान-पान है। प्रत्येक भारतीय राज्य द्वारा अपनी पहचान के लिए अलग-अलग प्रतीक निर्धारित किये गए हैं। इस लेख में भारत के सभी राज्य के राजकीय पक्षियों का विवरण प्रस्तुत है :-

राज्य                 प्रचलित नाम

अरुणाचल प्रदेश भीमकाय धनेश (Buceros bicornis)             Great-Hornbill

अरुणाचल प्रदेश  और केरल का राजकीय/ राज्य पक्षी || State Bird of Arunachal Pradesh and Kerala ||

असम                 देवहंस (Asarcornis scutulata)                    White-winged.wood.duck

असम का राजकीय/राज्य पक्षी || State Bird Of Assam ||

आंध्र प्रदेश         तोता  (Psittacula krameri)                     Rose-ringed Parrot

आंध्र प्रदेश का राजकीय/राज्य पक्षी || State Bird Of Andhra Pradesh ||

उत्तर प्रदेश         सारस क्रौंच (Grus antigone)                     Saus Crane

उत्तर प्रदेश का राजकीय/राज्य पक्षी || State Bird Of Uttar Pradesh ||

उत्तराखंड                 हिमालयी मोनाल (Lophophorus impejanus) Himalayan Monal

उत्तराखंड  का राजकीय/राज्य पक्षी || State Bird Of Uttarakhand ||

ओडिशा                 नीलकंठ (Coracias benghalensis)             Indian Roller

ओडिशा का राजकीय/राज्य पक्षी || State Bird Of Odisa ||

कर्णाटक                 नीलकंठ (Coracias benghalensis)             Indian Roller

ओडिशा, कर्नाटक और तेलंगाना का राजकीय/राज्य पक्षी || State Bird Of Odisa,  Karnataka and Telangana ||

केरल                 भीमकाय धनेश (Buceros bicornis)               Great-Hornbill.jpg

अरुणाचल प्रदेश  और केरल का राजकीय/ राज्य पक्षी || State Bird of Arunachal Pradesh and Kerala ||

गुजरात                 हंसावर (Phoenicopterus roseus)             Greater flamingo

गुजरात का राजकीय/राज्य पक्षी || State Bird Of Gujarat ||

गोआ                 लालग्रीवा बुलबुल (Pycnonotus gularis)     Flame-throated bulbul

गोवा का राजकीय/राज्य पक्षी || State Bird Of Goa ||

छत्तीसगढ़         पहाड़ी मैना (Gracula religiosa peninsularis) Gracula religiosa robusta

छत्तीसगढ़ का राजकीय/राज्य पक्षी || State Bird Of Chhattisgarh ||

झारखंड                 कोयल (Gracula religiosa peninsularis)     Asian Koel

झारखंड का राजकीय/राज्य पक्षी || State Bird Of Jharkhand ||

तमिलनाडु         मरकती पंडुक (Chalcophaps indica)            Chalcophaps indica

तमिलनाडु का राजकीय/राज्य पक्षी || State Bird Of Tamilnadu ||

तेलंगाना                 नीलकंठ (Coracias benghalensis)                Indian Roller 

ओडिशा, कर्नाटक और तेलंगाना का राजकीय/राज्य पक्षी || State Bird Of Odisa,  Karnataka and Telangana ||

त्रिपुरा                 राजहारिल (Ducula aenea)                            DuculaAenea.

त्रिपुरा का राजकीय/राज्य पक्षी || State Bird Of Tripura ||  हरा शाही कबूतर (Green imperial pigeon)

नागालैंड                 ब्लिथ का ट्रैगोपेन (Tragopan blythii)     Tragopan blythii

नागालैंड का राजकीय/राज्य पक्षी || STATE BIRD OF NAGALAND || ब्लिथ का ट्रैगोपेन (Tragopan blythii /Blyth’s Tragopan )

पंजाब                 राजबाज़ (Accipiter gentilis)                        Northern Goshawk

पंजाब का राज्य पक्षी (State Bird of Punjab) || राजबाज़ (Accipiter gentilis) || उत्तरी गोशाक (Northern Goshawk) ||

पश्चिम बंगाल         श्वेतग्रीवा किलकिला (Halcyon smyrnensis) White-throated kingfisher

पश्चिम बंगाल का राज्य पक्षी (State Bird of West Bangal) || श्वेतग्रीवा किलकिला ( White-throaterd kingfishe) || Halcyon smyrnensis ||

बिहार                 गौरैया (Passer domesticus)                          Indian Sparrow

बिहार और दिल्ली का राजकीय/राज्य पक्षी

मणिपुर                 नांगयिन (Syrmaticus humiae)             Syrmaticus humiae

मणिपुर और मिज़ोरम का राज्य पक्षी  (State Bird of Manipur & Mizoram)

मध्य प्रदेश         दूधराज (Terpsiphone paradisi)             Asian Paradise Flycatcher

मध्य प्रदेश का राजकीय/ राज्य पक्षी || State Bird of Madhya Pradesh ||

महाराष्ट्र                 हरियल (Treron phoenicoptera)             Yellow-footed Green-Pigeon

महाराष्ट्र  का राज्य पक्षी  (State Bird of Maharastra ) || ‘हरियल पक्षी’ (Hariyal Pakshi) ||

मिजोरम                 वावु (Syrmaticus humiae)                     Syrmaticus humiae

मणिपुर और मिज़ोरम का राज्य पक्षी  (State Bird of Manipur & Mizoram)

मेघालय                 पहाड़ी मैना (Gracula religiosa peninsularis) Gracula religiosa robusta

छत्तीसगढ़ का राजकीय/राज्य पक्षी || State Bird Of Chhattisgarh ||

राजस्थान                 सोनचिरैया/Sonchiriya (Ardeotis nigriceps)    Great Indian bustard

राजस्थान का राजकीय/ राज्य पक्षी || State Bird of Rajasthan ||

सिक्किम                 चिलमे (Ithaginis cruentus)/ चिल्मिआ         Blood Pheasant.jpg

सिक्किम का राजकीय/राज्य पक्षी || State Bird Of Sikkim ||

हरियाणा                 काला तीतर (Francolinus francolinus)     Black Francolin

हरियाणा का राज्य पक्षी (State Bird of Haryana) || काला तीतर (Francolinus francolinus)(Black Francolin)

हिमाचल प्रदेश         जुजुराना (Tragopan melanocephalus)     WesternTragopan

हिमाचल प्रदेश का राज्य पक्षी (State Bird of Himachal Pradesh) ||  जुजुराना (Tragopan melanocephalus)(WesternTragopan) ||

केन्द्र शासित प्रदेश

अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह     अंडमान जंगली कबूतर (Columba palumboides)   

अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह का राज्य पक्षी (State Bird of Andaman and Nicobar Islands )

चंडीगढ़                                             भारतीय धूसर धनेश (Ocyceros birostris)   

https://rupaaooskiekboond.blogspot.com/2023/09/state-bird-of-chandigarh-indian-grey.html

जम्मू और कश्मीर                             अभी तक घोषित नहीं

दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव अभी तक घोषित नहीं

दिल्ली                                             गौरैया (Passer domesticus)

बिहार और दिल्ली का राजकीय/राज्य पक्षी

पुदुच्चेरी                                             एशियाई कोयल (Eudynamys scolopaceus)

पुदुच्चेरी का राज्य पक्षी (State Bird of Puducherry) || एशियाई कोयल (Eudynamys scolopaceus)/ Asian Koel

लक्षद्वीप                                             काजल कुररी (Onychoprion fuscatus)

लक्षद्वीप का राज्य पक्षी (State Bird of Lakshadweep || ब्राउन नोडी (एनस स्टोलिडस) || Brown Noddy ||

लद्दाख                                             काली गर्दनवाला सारस (Grus nigricollis)

लद्दाख का राज्य पक्षी (State Bird of Ladakh) || काली गर्दनवाला सारस (Grus nigricollis) || Black-necked stork ||

शिवदर्शन || Shiv Darshan ||

शिवदर्शन 

निराकार ब्रह्म शिव से इस सृष्टि की रचना हुई और प्रथम पंचतत्व के देवता गणपति , विष्णु , सूर्य , शक्ति और रुद्रदेव की उपासना शुरू हुई। भगवान शिव तथा उनके अवतारों को मानने वालों को शैव कहते हैं। शैव में शाक्त, नाथ, दसनामी, नाग आदि उप संप्रदाय हैं।

शिवदर्शन || Shiv Darshan ||

महाभारत में माहेश्वरों (शैव) के चार सम्प्रदाय बतलाए गए हैं: 
(i) शैव 
(ii) पाशुपत 
(iii) कालदमन 
(iv) कापालिक। 

शैवमत का मूलरूप ॠग्वेद में रुद्र की आराधना में हैं।12 रुद्रों में प्रमुख रुद्र ही आगे चलकर शिव, शंकर, भोलेनाथ और महादेव कहलाए। शिव-मन्दिरों में शिव को योगमुद्रा में दर्शाया जाता है।


भगवान शिव की पूजा करने वालों को शैव और शिव से संबंधित धर्म को शैवधर्म कहा जाता है। शिवलिंग उपासना का प्रारंभिक पुरातात्विक साक्ष्य हड़प्पा संस्कृति के अवशेषों से मिलता है। ऋग्वेद में शिव के लिए रुद्र नामक देवता का उल्लेख है। अथर्ववेद में शिव को भव, शर्व, पशुपति और भूपति कहा जाता है। लिंगपूजा का पहला स्पष्ट वर्णन मत्स्यपुराण में मिलता है। महाभारत के अनुशासन पर्व से भी लिंग पूजा का वर्णन मिलता है।

शिवदर्शन || Shiv Darshan ||

वामन पुराण में शैव संप्रदाय की संख्या चार बताई गई है:

(i) पाशुपत
(ii) काल्पलिक
(iii) कालमुख
(iv) लिंगायत

          पाशुपत संप्रदाय शैवों का सबसे प्राचीन संप्रदाय है। इसके संस्थापक लवकुलीश थे, जिन्‍हें भगवान शिव के 18 अवतारों में से एक माना जाता है।पाशुपत संप्रदाय के अनुयायियों को पंचार्थिक कहा गया, इस मत का सैद्धांतिक ग्रंथ पाशुपत सूत्र है।

          कापालिक संप्रदाय के ईष्ट देव भैरव थे, इस सम्प्रदाय का प्रमुख केंद्र 'शैल' नामक स्थान था। कालमुख संप्रदाय के अनुयायिओं को शिव पुराण में महाव्रतधर कहा जाता है। इस संप्रदाय के लोग नर-कपाल में ही भोजन, जल और सुरापान करते थे और शरीर पर चिता की भस्म मलते थे।

          लिंगायत समुदाय दक्षिण में काफी प्रचलित था। इन्हें जंगम भी कहा जाता है, इस संप्रदाय के लोग शिव लिंग की उपासना करते थे। बसव पुराण में लिंगायत समुदाय के प्रवर्तक वल्लभ प्रभु और उनके शिष्य बासव को बताया गया है, इस संप्रदाय को वीरशिव संप्रदाय भी कहा जाता था दसवीं शताब्दी में मत्स्येंद्रनाथ ने नाथ संप्रदाय की स्थापना की, इस संप्रदाय का व्यापक प्रचार प्रसार बाबा गोरखनाथ के समय में हुआ। दक्षिण भारत में शैवधर्म चालुक्य, राष्ट्रकूट, पल्लव और चोलों के समय लोकप्रिय रहा।

          नायनारों संतों की संख्या 63 बताई गई है जिनमें उप्पार, तिरूज्ञान, संबंदर और सुंदर मूर्ति के नाम उल्लेखनीय है।पल्लवकाल में शैव धर्म का प्रचार प्रसार नायनारों ने किया।ऐलेरा के कैलाश मंदिर का निर्माण राष्ट्रकूटों ने करवाया।चोल शालक राजराज प्रथम ने तंजौर में राजराजेश्वर शैव मंदिर का निर्माण करवाया था। भारशिव नागवंशी शासकों की मुद्राओं पर शिव और नन्दी का एक साथ अंकन प्राप्त होता है।

          शिवदर्शन || Shiv Darshan ||

          शिव पुराण में शिव के दशावतारों के अलावा अन्य का वर्णन मिलता है। ये दसों अवतार तंत्रशास्त्र से संबंधित हैं:

          (i) महाकाल 
          (ii) तारा 
          (iii) भुवनेश 
          (iv) षोडश 
          (v) भैरव 
          (vi) छिन्नमस्तक गिरिजा 
          (vii) धूम्रवान 
          (viii) बगलामुखी 
          (ix) मातंग 
          (x) कमल। (दशमहाविद्या)

          शिव के अन्य ग्यारह अवतार हैं:

          (i) कपाली 
          (ii) पिंगल 
          (iii) भीम 
          (iv) विरुपाक्ष 
          (v) विलोहित 
          (vi) शास्ता 
          (vii) अजपाद 
          (viii) आपिर्बुध्य 
          (ix) शम्भ 
          (x) चण्ड 
          (xi) भव

          शैव ग्रंथ इस प्रकार हैं:

          (i) श्‍वेताश्वतरा उपनिषद 
          (ii) शिव पुराण 
          (iii) आगम ग्रंथ 
          (iv) तिरुमुराई

          शैव तीर्थ इस प्रकार हैं:

          (i) बनारस 
          (ii) केदारनाथ 
          (iii) सोमनाथ 
          (iv) रामेश्वरम 
          (v) चिदम्बरम 
          (vi) अमरनाथ 
          (vii) कैलाश मानसरोवर

          शैव सम्‍प्रदाय के संस्‍कार इस प्रकार हैं:

          (i) शैव संप्रदाय के लोग एकेश्वरवादी होते हैं।
          (ii) इसके संन्यासी जटा रखते हैं।
          (iii) इसमें सिर तो मुंडाते हैं, लेकिन चोटी नहीं रखते।
          (iv) इनके अनुष्ठान रात्रि में होते हैं।
          (v) इनके अपने तांत्रिक मंत्र होते हैं।
          (vi) यह निर्वस्त्र भी रहते हैं, भगवा वस्त्र भी पहनते हैं और हाथ में कमंडल, चिमटा रखकर धूनी भी रमाते हैं।
          (vii) शैव चंद्र पर आधारित व्रत उपवास करते हैं।
          (viii) शैव संप्रदाय में समाधि देने की परंपरा है।
          (ix) शैव मंदिर को शिवालय कहते हैं जहां सिर्फ शिवलिंग होता है।
          (x) यह भभूति तीलक आड़ा लगाते हैं।

          शैव साधुओं को नाथ, अघोरी, अवधूत, बाबा, औघड़, योगी, सिद्ध कहा जाता है।

          मकर संक्रांति ~ Makar Sankranti 2023

          मकर संक्रांति (Makar Sankranti) 

          आप सभी को मकर संक्रांति के पर्व की बहुत बधाई एवं शुभकामना।

          मकर संक्रांति ~ Makar Sankranti 2023

          सनातन धर्म में मकर संक्रांति पर्व का विशेष महत्व है। पंचांग के अनुसार, सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करने से मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। इसी दिन से सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं। पुराणों के अनुसार इस दिन से देवताओं का दिन और दैत्यों की रात शुरू हो जाती है। आज के ही दिन से सनातन धर्म मे "खरमास" की समाप्ति हो जाती है और सभी मांगलिक कार्य पुनः शुरू हो जाते हैं। आमतौर पर हर साल 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनाते हैं। लेकिन इस बार पंचांग में भेद होने के कारण मकर संक्रांति 15 जनवरी 2023 को मनाई जाएगी। इस दिन स्नान और दान का विशेष महत्व है। 

          मकर संक्रांति ~ Makar Sankranti 2023

          ज्योतिष गणना के अनुसार,सूर्य देव 14 जनवरी 2023 को रात 8 बजकर 20 मिनट पर धनु से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसलिए मकर संक्रांति का मुहूर्त 15 जनवरी 2023 को सुबह करीब 6 बजकर 48 मिनट से शुरू होकर शाम 5 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। इसलिए इस साल मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी 2023 को मनाया जाएगा।

          मकर संक्रांति के दिन तिल का विशेष महत्व है। इसी कारण इस दिन को तिल संक्रांति के नाम से भी जानते हैं। इस दिन तिल का दान करने के साथ सेवन करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। तिल सेवन का सीधा संबंध हमारे स्वास्थ्य से है। चूंकि तिल की प्रकृति उष्ण होती है अतः सर्दियों में तिल के सेवन से मनुष्य के स्वास्थ्य की रक्षा होती है।

          मकर संक्रांति ~ Makar Sankranti 2023

           तिल का दान करने को लेकर एक पौराणिक कथा प्रचलित है। इसके अनुसार, शनिदेव ने अपने क्रोधित पिता सूर्य देव को शांत करने के लिए काले तिल का इस्तेमाल किया था। ऐसे में सूर्यदेव ने प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देते हुए कहा था कि वह जब मकर राशि में आएंगे, तो पूजा में तिल का इस्तेमाल करने से शनि दोष से मुक्ति मिल जाएगी। आज के दिन किसी भी पवित्र सरोवर में स्नान करने के बाद खिचड़ी का दान करना भी शुभ माना जाता है। चावल में काली उड़द की दाल मिलाकर दान करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। इसके अतिरिक्त मकर संक्रांति के दिन गुड़ का दान करने से जीवन मे शुभता प्राप्त होती है।

          मकर संक्रांति ~ Makar Sankranti 2023

          मकर संक्रांति पर्व पर मौसम में बहुत ठंडक होती है अतः ऐसे में जरूरतमंद को गर्म कपड़ों का दान । माना जाता है कि मकर संक्रांति के दिन ऊनी कपड़ों का दान करने से जीवन मे सफलता के द्वार खुलते हैं।

          आप सभी उत्साह एवं उमंग के साथ मकर संक्रांति के त्योहार को मनाएं, इसी आशा कामना के साथ एक बार पुनः आप सभी को मकर संक्रांति की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। 

          घमण्ड का सिर नीचा: पंचतंत्र || Ghamand ka ser Nicha : Panchtantra ||

          घमण्ड का सिर नीचा

          सतां वचनमादिष्टं मदेन न करोति यः । 
          स विनाशमवाप्नोति घष्टोष्ट्र इव सत्वरम्।।

          सज्जन की सलाह न माननेवाला और दूसरों से विशेष बनाने का यत्न करनेवाला मारा जाता है।

          घमण्ड का सिर नीचा: पंचतंत्र || Ghamand ka ser Nicha : Panchtantra ||

          एक गाँव में उज्जवलक नाम का बढ़ई रहता था। वह बहुत गरीब था। गरीबी से तंग आकर वह गाँव छोड़कर दूसरे गाँव के लिए चल पड़ा। रास्ते में घना जंगल पड़ता था। वहाँ उसने देखा कि एक ऊँटनी प्रसवपीड़ा से तड़फड़ा रही थी। ऊँटनी ने जब बच्चा दिया तो वह ऊँट के बच्चे और ऊँटनी को लेकर अपने घर आ गया। वहाँ घर के बाहर ऊँटनी को खूँटी से बाँधकर वह उसके खाने के लिए पत्तों-भरी शाखाएँ काटने वन में गया। ऊँटनी ने हरी-हरी कोमल कोपलें खाईं। बहुत दिन इसी तरह हरे-हरे पत्ते खाकर ऊँटनी स्वस्थ और पुष्ट हो गई। ऊँट का बच्चा भी बढ़कर जवान हो गया। बढ़ई ने उसके गले में एक घण्टा बाँध दिया, जिससे वह कहीं खो न जाए। दूर से ही उसकी आवाज़ सुनकर बढ़ई उसे घर लिवा लाता था। ऊँटनी के दूध से बढ़ई के बाल-बच्चे भी पलते थे। ऊँट भार ढोने के भी काम आने लगा ।

          उस ऊँट ऊँटनी से ही उसका व्यापार चलता था। यह देख उसने एक धनिक से कुछ रुपया उधार लिया और गुर्जर देश में जाकर वहाँ से एक और ऊँटनी ले आया। कुछ दिनों में उसके पास अनेक ऊँट-ऊँटनियाँ हो गईं। उनके लिए रखवाला भी रख लिया गया। बढ़ई का व्यापार चमक उठा। घर में दूध की नदियाँ बहने लगीं।

          शेष सब तो ठीक था-किन्तु जिस ऊँट के गले में घण्टा बँधा था, वह बहुत गर्वित हो गया था। वह अपने को दूसरों से विशेष समझता था। सब ऊँट वन में पत्ते खाने को जाते तो वह सबको छोड़कर अकेला ही जंगल में घूमा करता था।

          किधर है। सबने उसे मना किया, वह गले से घण्टा उतार दे, लेकिन वह उसके घण्टे की आवाज़ से शेर को यह पता लग जाता था कि ऊँट नहीं माना।

          एक दिन जब सब ऊट वन में पत्ते खाकर तालाब में पानी पीने के बाद गाँव की ओर वापस आ रहे थे तब वह सबको छोड़कर जंगल की सैर करने अकेला चल दिया। शेर ने भी घण्टे की आवाज़ सुनकर उसका पीछा किया। और जब वह वापस आया तो उस पर झपटकर उसे मार दिया। बन्दर ने कहा-तभी मैंने कहा था कि सज्जनों की बात अनसुनी करके जो अपनी ही करता है, वह विनाश को निमन्त्रण देता है।

          मगरमच्छ बोला-तभी तो तुझसे पूछता हूँ । सज्जन है, साधु है, किन्तु सच्चा साधु तो वही है जो अपकार करनेवालों के साथ भी साधुता करे, कृतघ्नों को भी सच्ची राह दिखलाए। उपकारियों के साथ तो सभी साधु होते हैं।

          यह सुनकर बन्दर ने कहा—तब मैं तुझे यही उपदेश देता हूँ कि तू जाकर उस मगर से, जिसने तेरे घर पर अनुचित अधिकार कर लिया है, युद्ध कर। नीति कहती है कि शत्रु बली है तो भेद-नीति से, नीच है तो दाम से, और समशक्ति है तो पराक्रम से उस पर विजय पाए ।

          मगर ने पूछा- यह कैसे ?

          तब बन्दर ने गीदड़, शेर और बाघ की यह कहानी सुनाई :

          राजनीतिज्ञ गीदड़

          To be continued ...

          सफलता क्या है || What is Success ||

          सफलता क्या है

          हम अक्सर दैनिक जीवन में सफल असफल व्यक्ति के बारे में सुनते - कहते आपस में बातें करते हैं, परंतु विचार कीजिये वास्तव में सफलता क्या है? या सफल व्यक्ति कौन है ?

          सफलता क्या है

          सफलता क्या है?

          4 वर्ष की आयु में सफलता यह है कि आप अपने कपड़ों को गीला नहीं करते।

          8 वर्ष की आयु में सफलता यह है कि आप अपने घर वापिस आने का रास्ता जानते हैं।

          12 वर्ष की आयु में सफलता यह है कि आप अपने अच्छे मित्र बना सकते हैं।

          18 वर्ष की आयु में मदिरा और सिगरेट से दूर रह पाना सफलता है।

          25 वर्ष की आयु तक रोजगार सृजन अथवा नौकरी पाना सफलता है।

          28 वर्ष की आयु में एक पारिवारिक व्यक्ति बन जाना सफलता है।

          35 वर्ष की आयु में आपने कुछ जमापूंजी बनाना सीख लिया ये सफलता है।

          45 वर्ष की आयु में सफलता यह है कि आप अपना युवावस्था बरकरार रख पाते हैं।

          55 वर्ष की आयु में सफलता यह है कि आप अपनी जिम्मेदारियाँ पूरी करने में सक्षम हैं।

          65 वर्ष की आयु में सफलता है निरोगी रहना।

          70 वर्ष की आयु में सफलता यह है कि आप आत्मनिर्भर हैं किसी पर बोझ नहीं।

          75 वर्ष की आयु में सफलता यह है कि आप अपने पुराने मित्रों से सम्बन्ध स्थापित रखे हुए हैं।

          80 वर्ष की आयु में सफलता यह है कि आपको अपने घर वापस आने का रास्ता पता है।

          और 85 वर्ष की आयु में फिर सफलता ये है कि आप अपने कपड़ों को गीला नहीं करते।

          अंततः यही तो जीवन चक्र है, जो घूम फिर कर वापस वहीं आ जाता है। जहाँ वह आरम्भ हुआ था और यही जीवन का परम सत्य है।


          What is Success

          We often hear and talk among ourselves about successful unsuccessful person in daily life, but think what is success really? Or who is a successful person?
          सफलता क्या है

          What is success?

          Success at age 4 is that you don't wet your clothes.

          Success at the age of 8 is that you know your way back home.

          The key to success at age 12 is that you can make good friends.

          Being able to stay away from alcohol and cigarettes at the age of 18 is a success.

          Employment generation or getting a job till the age of 25 is a success.

          Being a family man at the age of 28 is success.

          At the age of 35, you have learned to make some savings, this is success.

          Success at 45 is that you retain your youth.

          Success at the age of 55 is that you are able to fulfill your responsibilities.

          Success at the age of 65 is to remain healthy.

          Success at the age of 70 is that you are self-reliant and not a burden on anyone.

          Success at the age of 75 is that you keep in touch with your old friends.

          Success at the age of 80 is that you know your way back home.

          And at the age of 85, success is again that you don't wet your clothes.

          After all, this is the cycle of life, which goes around and comes back there. Where it started and this is the ultimate truth of life.

          श्रीमद्भगवद्गीता ||अध्याय छः - आत्मसंयमयोग || अनुच्छेद 05 - 10 ||

           श्रीमद्भगवद्गीता ||अध्याय छः आत्मसंयमयोग ||

          अथ षष्ठोऽध्यायः  ~ आत्मसंयमयोग 

          अध्याय छः के अनुच्छेद 05 - 10

          अध्याय छः के अनुच्छेद 05-10 में आत्म-उद्धार की प्रेरणा और भगवत्प्राप्त पुरुष के लक्षण एवं एकांत साधना का महत्व बताया गया है। 

          संपूर्ण श्रीमद्भगवद्गीता || Sampurn Shrimad Bhagwat Geeta ||

          उद्धरेदात्मनाऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्‌ ।
          आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः ॥

          भावार्थ : 

          अपने द्वारा अपना संसार-समुद्र से उद्धार करे और अपने को अधोगति में न डाले क्योंकि यह मनुष्य आप ही तो अपना मित्र है और आप ही अपना शत्रु है॥5॥

          बन्धुरात्मात्मनस्तस्य येनात्मैवात्मना जितः ।
          अनात्मनस्तु शत्रुत्वे वर्तेतात्मैव शत्रुवत्‌ ॥

          भावार्थ : 

          जिस जीवात्मा द्वारा मन और इन्द्रियों सहित शरीर जीता हुआ है, उस जीवात्मा का तो वह आप ही मित्र है और जिसके द्वारा मन तथा इन्द्रियों सहित शरीर नहीं जीता गया है, उसके लिए वह आप ही शत्रु के सदृश शत्रुता में बर्तता है॥6॥

          जितात्मनः प्रशान्तस्य परमात्मा समाहितः ।
          शीतोष्णसुखदुःखेषु तथा मानापमानयोः ॥

          भावार्थ : 

          सरदी-गरमी और सुख-दुःखादि में तथा मान और अपमान में जिसके अन्तःकरण की वृत्तियाँ भलीभाँति शांत हैं, ऐसे स्वाधीन आत्मावाले पुरुष के ज्ञान में सच्चिदानन्दघन परमात्मा सम्यक्‌ प्रकार से स्थित है अर्थात उसके ज्ञान में परमात्मा के सिवा अन्य कुछ है ही नहीं॥7॥

          ज्ञानविज्ञानतृप्तात्मा कूटस्थो विजितेन्द्रियः ।
          युक्त इत्युच्यते योगी समलोष्टाश्मकांचनः ॥

          भावार्थ : 

          जिसका अन्तःकरण ज्ञान-विज्ञान से तृप्त है, जिसकी स्थिति विकाररहित है, जिसकी इन्द्रियाँ भलीभाँति जीती हुई हैं और जिसके लिए मिट्टी, पत्थर और सुवर्ण समान हैं, वह योगी युक्त अर्थात भगवत्प्राप्त है, ऐसे कहा जाता है॥8॥

          सुहृन्मित्रार्युदासीनमध्यस्थद्वेष्यबन्धुषु ।
          साधुष्वपि च पापेषु समबुद्धिर्विशिष्यते ॥

          भावार्थ : 

          सुहृद् (स्वार्थ रहित सबका हित करने वाला), मित्र, वैरी, उदासीन (पक्षपातरहित), मध्यस्थ (दोनों ओर की भलाई चाहने वाला), द्वेष्य और बन्धुगणों में, धर्मात्माओं में और पापियों में भी समान भाव रखने वाला अत्यन्त श्रेष्ठ है॥9॥

          योगी युञ्जीत सततमात्मानं रहसि स्थितः ।
          एकाकी यतचित्तात्मा निराशीरपरिग्रहः ॥

          भावार्थ : 

          मन और इन्द्रियों सहित शरीर को वश में रखने वाला, आशारहित और संग्रहरहित योगी अकेला ही एकांत स्थान में स्थित होकर आत्मा को निरंतर परमात्मा में लगाए॥10॥

          भारतीय इतिहास की 6 शक्तिशाली और महानतम महिलाएं

          भारतीय इतिहास की 6 शक्तिशाली और महानतम महिलाएं! 

          1. अहिल्याबाई होल्कर (अहिल्याबाई होलकर): उनका जन्म 31 मई, 1725 को ग्राम चुंडी, मराठा साम्राज्य में हुआ था। उन्हें भारतीय इतिहास की सबसे बेहतरीन महिला शासकों में से एक माना जाता है।

          अहिल्याबाई होल्कर

          2. सरोजिनी नायडू: उनका जन्म 13 फरवरी, 1879 को हैदराबाद, ब्रिटिश भारत के राज्य में हुआ था। वह एक भारतीय राजनीतिक कार्यकर्ता और कवि थीं। 

          3. सावित्रीबाई फुले : उनका जन्म 3 जनवरी, 1931 को महाराष्ट्र के नायगांव गांव में हुआ था। उन्हें भारत में पहली नारीवादियों, एक अग्रणी शिक्षिका और एक जाति-विरोधी भेदभाव कार्यकर्ता के रूप में गिना जाता है। 

          सावित्रीबाई फुले

          4. आनंदी गोपाल जोशी (आनंदीबाई जोशी): उनका जन्म 31 मार्च, 1865 को कल्याण, बॉम्बे प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत में हुआ था। उन्हें संयुक्त राज्य अमेरिका में पश्चिमी चिकित्सा का अध्ययन करने वाली पहली भारतीय महिला माना जाता है और वह देश की शुरुआती महिला चिकित्सकों में से एक थीं। 

          5. सुचेता कृपलानी: उनका जन्म 25 जून, 1908 को अंबाला, पंजाब, ब्रिटिश भारत में हुआ था। वह एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और राजनीतिज्ञ थीं। वह भारत की पहली महिला मुख्यमंत्री भी थीं और उन्होंने 1963 से 1967 तक उत्तर प्रदेश सरकार की प्रमुख के रूप में कार्य किया। 

          सुचेता कृपलानी

          6. कल्पना चावला: उनका जन्म 17 मार्च, 1962 को करनाल, पूर्वी पंजाब, भारत में हुआ था। वह एक भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री और इंजीनियर थीं। वह अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय मूल की पहली महिला थीं।

          6 Powerful and Greatest Women in Indian History


          1. Ahilyabai Holkar: She was born on May 31st, 1725 in Gram Chundi, Maratha Empire. She is regarded as one of the finest female rulers in Indian history. 

          2. Sarojini Naidu: She was born on February 13th, 1879 in Hyderabad, State of British India. She was an Indian political activist and poet.

          सरोजिनी नायडू

          3. Savitribai Phule: She was born on January 3, 1931, in Naigaon village in Maharashtra. She is counted among the first feminists in India, a pioneering teacher, and an anti-caste discrimination activist.

          4. Anandi Gopal Joshi: She was born on March 31, 1865 in Kalyan, Bombay Presidency, British India. She is considered the first Indian female to study western medicine in the United States and was one of the earliest female physicians in the country.

          आनंदी गोपाल जोशी

          5. Sucheta Kripalani: She was born on June 25, 1908, in Ambala, Punjab, British India. She was an Indian freedom fighter and politician. She was also the first woman Chief Minister of India and served as the head of the Uttar Pradesh government from 1963 to 1967.

          6. Kalpana Chawla: She was born on March 17, 1962, in Karnal, East Punjab, India. She was an Indian-born American astronaut and engineer. She was the first woman of Indian origin to go to space.

          कल्पना चावला