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Sunderkand-11

सुंदरकांड 
Hanuman Jayanti 2020, Date, Puja Timing, Muhurat & Birth Place Of ...
हनुमानजी सुग्रीव से मिले
चौपाई (Chaupai – Sunderkand)
जौं न होति सीता सुधि पाई।
मधुबन के फल सकहिं कि खाई॥
एहि बिधि मन बिचार कर राजा।
आइ गए कपि सहित समाजा॥
सुग्रीवको आनंद क्यों हुआ? उसका कारण कहते हैं। सुग्रीवने मनमें विचार किया कि जो उनको सीताजीकी खबर नहीं मिली होती तो वे लोग मधुवनके फल कदापि नहीं खाते॥
राजा सुग्रीव इस तरह मनमें विचार कर रहे थे। इतनेमें समाजके साथ वे तमाम वानर बहां चले आये॥ जय सियाराम जय जय सियाराम
आइ सबन्हि नावा पद सीसा।
मिलेउ सबन्हि अति प्रेम कपीसा॥
पूँछी कुसल कुसल पद देखी।
राम कृपाँ भा काजु बिसेषी॥
सबने आकर सुग्रीव के चरणों में सिर नवाया। और आकर उन सभीने नमस्कार किया तब बड़े प्यारके साथ सुग्रीव उन सबसे मिले॥
सुग्रीवने सभीसे कुशल पूंछा तब उन्होंने कहा कि नाथ! आपके चरण कुशल देखकर हम कुशल हैं और जो यह काम बना है सो केवल रामचन्द्रजीकी कृपासे बना है॥ जय सियाराम जय जय सियाराम
नाथ काजु कीन्हेउ हनुमाना।
राखे सकल कपिन्ह के प्राना॥
सुनि सुग्रीव बहुरि तेहि मिलेऊ।
कपिन्ह सहित रघुपति पहिं चलेऊ॥
हे नाथ! यह काम हनुमानजीने किया है। यह काम क्या किया है मानो सब वानरोंके इसने प्राण बचा लिये हैं॥
यह बात सुनकर सुग्रीव उठकर फिर हनुमानजीसे मिले और वानरोंके साथ रामचन्द्रजीके पास आए॥ जय सियाराम जय जय सियाराम
राम कपिन्ह जब आवत देखा।
किएँ काजु मन हरष बिसेषा॥
फटिक सिला बैठे द्वौ भाई।
परे सकल कपि चरनन्हि जाई॥
वानरोंको आते देखकर रामचन्द्रजीके मनमें बड़ा आनन्द हुआ कि ये लोग काम सिद्ध करके आ गये हैं॥ राम और लक्ष्मण ये दोनों भाई स्फटिकमणिकी शिलापर बैठे हुए थे। वहां जाकर सब वानर दोनों भाइयोंके चरणोंमें गिरे॥ जय सियाराम जय जय सियाराम
दोहा (Doha – Sunderkand)
प्रीति सहित सब भेंटे रघुपति करुना पुंज॥
पूछी कुसल नाथ अब कुसल देखि पद कंज ॥29॥
करुणानिधान श्रीरामचन्द्रजी प्रीतिपूर्वक सब वानरोंसे मिले और उनसे कुशल पूँछा. तब उन्होंने कहा कि हे नाथ! आपके चरणकमलोंको कुशल देखकर (चरणकमलोंके दर्शन पाने से) अब हम कुशल हें ॥29॥ जय सियाराम जय जय सियाराम
हनुमानजी और सुग्रीव रामचन्द्रजी से मिले
कब, कहां और कैसे मिले बजरंगबली से ...
चौपाई (Chaupai – Sunderkand)
जामवंत कह सुनु रघुराया।
जा पर नाथ करहु तुम्ह दाया॥
ताहि सदा सुभ कुसल निरंतर।
सुर नर मुनि प्रसन्न ता ऊपर॥
उस समय जाम्बवान ने रामचन्द्रजीसे कहा कि हे नाथ! सुनो, आप जिसपर दया करते हो॥
उसके सदा सर्वदा शुभ और कुशल निरंतर रहते हें। तथा देवता मनुष्य और मुनि सभी उसपर सदा प्रसन्न रहते हैं॥ जय सियाराम जय जय सियाराम
सोइ बिजई बिनई गुन सागर।
तासु सुजसु त्रैलोक उजागर॥
प्रभु कीं कृपा भयउ सबु काजू।
जन्म हमार सुफल भा आजू॥
और वही विजयी (विजय करनेवाला), विनयी (विनयवाला) और गुणोंका समुद्र होता है और उसकी सुख्याति तीनों लोकोंमें प्रसिद्ध रहती है॥
यह सब काम आपकी कृपासे सिद्ध हुआ हैं। और हमारा जन्म भी आजही सफल हुआ है॥ जय सियाराम जय जय सियाराम
नाथ पवनसुत कीन्हि जो करनी।
सहसहुँ मुख न जाइ सो बरनी॥
(
जो मुख लाखहु जाइ न बरणी॥)
पवनतनय के चरित सुहाए।
जामवंत रघुपतिहि सुनाए॥
हे नाथ! पवनपुत्र हनुमानजीने जो काम किया है उसका हजार मुखों से भी वर्णन नहीं किया जा सकता
(
वह कोई आदमी जो लाख मुखोंसे कहना चाहे तो भी वह कहा नहीं जा सकता)॥
हनुमानजीकी प्रशंसाके वचन और कार्य जाम्बवानने रामचन्द्रजीको सुनाये॥ जय सियाराम जय जय सियाराम
सुनत कृपानिधि मन अति भाए।
पुनि हनुमान हरषि हियँ लाए॥
कहहु तात केहि भाँति जानकी।
रहति करति रच्छा स्वप्रान की॥
उन वचनोंको सुनकर दयालु श्रीरामचन्द्वजीने उठकर हनुमानजीको अपनी छातीसे लगाया॥
और श्रीरामने हनुमानजीसे पूछा कि हे तात! कहो, सीता किस तरह रहती है? और अपने प्राणोंकी रक्षा वह किस तरह करती है?॥ जय सियाराम जय जय सियाराम
दोहा (Doha – Sunderkand)
नाम पाहरू दिवस निसि ध्यान तुम्हार कपाट।
लोचन निज पद जंत्रित जाहिं प्रान केहिं बाट ॥30॥
हनुमानजीने कहा कि हे नाथ । यद्यपि सीताजीको कष्ट तो इतना है कि उनके प्राण एक क्षणभर न रहे। परंतु सीताजीने आपके दर्शनके लिए प्राणोंका ऐसा बंदोबस्त करके रखा है कि रात दिन अखंड पहरा देनेके वास्ते आपके नामको तो उसने सिपाही बना रखा है (आपका नाम रात-दिन पहरा देनेवाला है)। और आपके ध्यानको कपाट बनाया है (आपका ध्यान ही किवाड़ है)। और अपने नीचे किये हुए नेत्रोंसे जो अपने चरणकी ओर निहारती है वह यंत्रिका अर्थात् ताला है. अब उसके प्राण किस रास्ते बाहर निकलें ॥30॥
हनुमानजी ने श्रीराम को सीताजी का सन्देश दिया
Why Did Lord Rama Deceive Hanuman Ji For Going To Vishnuloka ...
चौपाई (Chaupai – Sunderkand)
चलत मोहि चूड़ामनि दीन्ही।
रघुपति हृदयँ लाइ सोइ लीन्ही॥
नाथ जुगल लोचन भरि बारी।
बचन कहे कछु जनककुमारी॥
और चलते समय मुझको यह चूड़ामणि दिया हे. ऐसे कह कर हनुमानजीने वह चूड़ामणि रामचन्द्रजीको दे दिया। तब रामचन्द्रजीने उस रत्नको लेकर अपनी छातीसे लगाया॥
तब हनुमानजीने कहा कि हे नाथ! दोनो हाथ जोड़कर नेत्रोंमें जल लाकर सीताजीने कुछ वचनभी कहे है सो सुनिये॥ जय सियाराम जय जय सियाराम
अनुज समेत गहेहु प्रभु चरना।
दीन बंधु प्रनतारति हरना॥
मन क्रम बचन चरन अनुरागी।
केहिं अपराध नाथ हौं त्यागी॥
सीताजीने कहा है कि लक्ष्मणजीके साथ प्रभुके चरण धरकर मेरी ओरसे ऐसी प्रार्थना करना कि हे नाथ! आप तो दीनबंधु और शरणागतोके संकटको मिटानेवाले हो॥
फिर मन, वचन और कर्मसे चरणोमें प्रीति रखनेवाली मुझ दासीको आपने किस अपराधसे त्याग दिया है॥
अवगुन एक मोर मैं माना।
बिछुरत प्रान न कीन्ह पयाना॥
नाथ सो नयनन्हि को अपराधा।
निसरत प्रान करहिं हठि बाधा॥
हाँ, मेरा एक अपराध पक्का (अवश्य) हैं और वह मैंने जान भी लिया है कि आपसे बिछुरतेही (वियोग होते ही) मेरे प्राण नही निकल गये॥
परंतु हें नाथ! वह अपराध मेरा नहीं है किन्तु नेत्रोका है; क्योंकि जिस समय प्राण निकलने लगते है उस समय ये नेत्र हठ कर उसमें बाधा कर देते हैं (अर्थात् केवल आपके दर्शनके लोभसे मेरे प्राण बने रहे हैं)॥ जय सियाराम जय जय सियाराम
बिरह अगिनि तनु तूल समीरा।
स्वास जरइ छन माहिं सरीरा॥
नयन स्रवहिं जलु निज हित लागी।
जरैं न पाव देह बिरहागी॥
हे प्रभु! आपका विरह तो अग्नि है, मेरा शरीर तूल (रुई) है। श्वास प्रबल वायु है। अब इस सामग्रीके रहते शरीर क्षणभरमें जल जाय इसमें कोई आश्चर्य नहीं॥
परंतु नेत्र अपने हितके लिए अर्थात् दर्शनके वास्ते जल बहा बहा कर उस विरह की आग को शांत करते हैं, इससे विरह की आग भी मेरे शरीरको जला नहीं पाती॥ जय सियाराम जय जय सियाराम
सीता कै अति बिपति बिसाला।
बिनहिं कहें भलि दीनदयाला॥
हनुमानजी ने कहा कि हे दीनदयाल! सीताकी विपत्ति ऐसी भारी है कि उसको न कहना ही अच्छा है॥ जय सियाराम जय जय सियाराम
दोहा (Doha – Sunderkand)
निमिष निमिष करुनानिधि जाहिं कलप सम बीति।
बेगि चलिअ प्रभु आनिअ भुज बल खल दल जीति ॥31॥
हे करुणानिधान! हे प्रभु! सीताजीके एक एक क्षण, सौ सौ कल्पके समान व्यतीत होते हैं। इसलिए जल्दी चलकर और अपने बाहुबलसे दुष्टोंके दलको जीतकर उनको जल्दी ले आइए ॥31॥ जय सियाराम जय जय सियाराम
मंगलवार के दिन करें ये जबरदस्त टोटके ...
 जय श्री राम 

तुलसी । Basil Leaves

तुलसी  । Basil Leaves

तुलसी । Basil Leaves
          सामान्य तौर पर पाई जाने वाली तुलसी हिंदू मान्यताओं के अनुसार पूजनीय होती है, लेकिन यह सिर्फ एक पौधा नहीं है बल्कि इसका इस्तेमाल जड़ी-बूटी के तौर पर भी किया जाता है। तुलसी में बहुत से रोगों से लड़ने की क्षमता होती है इसलिए इसे "क्वीन ऑफ हर्ब्स " कहा जाता है। 
तुलसी । Basil Leaves
           तुलसी दो प्रकार की होती है एक राम तुलसी एक श्याम तुलसी। राम तुलसी हल्के हरे रंग की होती है और श्याम तुलसी का रंग गहरा हरा होता है। कभी-कभी काली भी दिखाई देती है। इसीलिए उनको श्याम तुलसी कहते हैं। श्याम तुलसी में ज्यादा औषधीय गुण हैं और राम तुलसी में ज्यादा औषधीय गुण नहीं है। इसलिए हमेशा श्याम तुलसी ही लगाइए। तुलसी कभी भी लगाई जा सकती है। साल के किसी भी महीने में इसे लगाया जा सकता है। इसे गमले में भी लगा सकते हैं।

Benefits of Tulsi (तुलसी के फायदे ):-

तुलसी । Basil Leaves
  •  तुलसी के सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
  • तुलसी किसी भी तरह के बुखार को समाप्त करती है। चाहे वह वायरल बुखार, सर्दी जुकाम के कारण बुखार हो या ज्यादा शारीरिक श्रम के कारण हो। इसका उपयोग - 15 से 20 श्याम तुलसी के पत्ते की चटनी बनाकर इसका रस निकाल दीजिए। इस रस को गर्म कर दीजिए इसमें थोड़ा सा गुड़ मिलाकर या शहद मिलाकर ले सकते हैं और एक-एक चम्मच सुबह दोपहर शाम को देना है।
  • यह औषधि किसी भी तरह के बुखार को तोड़ सकती है। तेज बुखार में भी इसका काढ़ा देने से आराम मिलता है और बार-बार देने से बुखार ठीक हो जाता है। तुलसी का काढ़ा बनाने के लिए एक कप पानी में 15-20 पत्ते तुलसी के तोड़कर डाल दीजिये।  इस पानी को इतना उबालें कि पानी आधा रह जाए और उसमें गुड़ मिलाकर चाय की तरह पी लें। इससे कितना भी खराब से खराब बुखार तुरंत नीचे आता है। 
  • मासिक धर्म के रोग में इस तुलसी का बहुत अच्छा उपयोग होता है। जिसको भी ल्यूकोरिया की समस्या है वह श्याम तुलसी का काढ़ा बनाकर ले सकता है। रस निकालकर शहद या गुड़ के साथ भी ले सकते हैं।
  • बालों में यदि बहुत ज्यादा रुसी (डेंड्रफ) है या बालों में बहुत अधिक खुजली हो रही है, तो यही श्याम तुलसी का रस निकालकर बालों में अच्छी तरह से लगाएं और 1 घंटे बाद बाल को धो लें, डेंड्रफ बिल्कुल ठीक कर देती है।
तुलसी । Basil Leaves
  • त्वचा संबंधी रोग में भी तुलसी फायदेमंद है। इसके सेवन से कील मुँहासे दूर होकर चेहरा साफ होता है।
  • कई बार बच्चों के पेट में कीड़े हो जाते हैं, जिसके कारण बच्चे बहुत परेशान रहते हैं, ऐसी स्थिति में बच्चे बहुत अच्छा खाना खाते हैं लेकिन उनके शरीर में वह भोजन नहीं लगता है। ऐसी स्थिति में श्याम तुलसी का रस या काढ़ा बच्चों को दे सकते हैं, बहुत लाभ मिलेगा।
  • शरीर पर कहीं घाव हो गया है जिसको व्रण भी कहते हैं, इतना भयंकर घाव हो गया है कि वह भरता नहीं है, उसमें से लस्सी भी निकलती है और खून भी निकलता है तो इस तुलसी की चटनी बनाकर आप उस घाव पर लगा दें तो खराब से खराब घाव भर जाता है।
तुलसी । Basil Leaves

ब्रह्माजी के दुर्गा कवच में वर्णित नवदुर्गा के नौ विशिष्ट औषधियों में से एक चंदुसूर (धनिया)

ब्रह्माजी के दुर्गा कवच में वर्णित नवदुर्गा के नौ विशिष्ट औषधियों में से एक चंदुसूर (धनिया)

तुलसी जी को अपने घर बगीचे में जरूर लगाएं

Sunday .. इतवार

इतवार 
Sunday .. इतवार
अवसर और सूर्योदय में एक ही समानता है,
देर करने वाले इसे हमेशा खो देते हैं ❤❤
नव किरण का रथ सजा है 
कलि कुसुम से पथ सजा है 
बादलों से  अनुचरों ने, स्वर्ण की पोषक धारी 
आ रही रवि की सवारी 
विहग बंदी और चारण 
गए रहे कीर्ति गायन 
छोड़कर मैदान भागी, तारकों की फ़ौज सारी 
आ रही रवि की सवारी 
चाहता उछलूँ विजय कह 
पर ठिठकता देख कर यह 
रात राजा खड़ा है, राह पर बन कर भिखारी 
आ रही रवि की सवारी 

Sunday .. इतवार
🌼ख़ुशी हमारे ऐटिट्टूड पर निर्भर करती है 🌼

महाकपि के बलिदान की कहानी (Story of the great sacrificial's sacrifice)

महाकपि के बलिदान की कहानी

महाकपि के बलिदान की कहानी (Story of the great sacrificial's sacrifice)

         हिमालय के फूल अपनी विशेषताओं के लिए सर्वविदित हैं। दुर्भाग्यवश उनकी अनेक प्रजातियां विलुप्त होती जा रही हैं। कुछ तो केवल किस्से -कहानियां तक ही सिमट कर रह गई हैं। यह कहानी उस समय की है, जब हिमालय का एक अनूठा पेड़ अपने फलीय वैशिष्ट्य के साथ, एक निर्जन पहाड़ी नदी के तीर पर स्थित था। उसके फूल थाईलैंड के कुरियन से भी बड़े, चेरी से भी अधिक रसीले और आम से भी अधिक मीठे होते थे। उनकी आकृति और सुगंध भी मन को मोह लेने वाली थी।

        उस पेड़ पर वानरों का एक झुंड रहता था, जो बड़ी ही स्वच्छंदता के साथ उन फूलों का रसास्वादन व उपभोग करते थे। उन वानरों का एक राजा भी था जो अन्य बंदरों की तुलना से कई गुना ज्यादा बड़ा, बलवान, गुणवान प्रज्ञावान और शीलवान था। इसलिए वह महा कपि के नाम से जाना जाता था। अपनी दूर दृष्टया से वह आगे की सोंच कर, समस्त वानरों को सचेत कर रखा था कि उस वृक्ष का कोई भी फल उन टहनियों पर ना छोड़े, जिसके नीचे नदी बहती हो। उसके अनुगामी वानरों ने भी उसकी बातों को पूरा महत्व दिया। क्योंकि अगर कोई फल नदी में गिर कर और बहकर मनुष्य को प्राप्त होता तो उसका परिणाम वानरों के लिए अत्यंत भयंकर होता।
        एक दिन दुर्भाग्यवश उस पेड़ का एक फल पत्तों के बीचो बीच पक कर टहनी से टूट गया और बहती हुई नदी की धारा में प्रवाहित हो गया। उन्हीं दिनों उस देश का राजा अपनी औरतों तथा दास -दसियों  के साथ उसी नदी के तीर पर विहार कर रहा था। वह प्रवाहित फल आकर वहीं रुक गया। उस समय फल की सुगंध से राजा की औरतें सम्मोहित होकर आंखें बंद कर आनंद मग्न हो गईं। राजा भी उस सुगंध से आनंदित हो उठा। शीघ्र ही उसने अपने आदमी उस सुगंध के स्रोत के पीछे दौड़ाए। राजा के आदमी तत्काल उस फल को नदी के तीर पर प्राप्त कर पल भर में राजा के सम्मुख ले आए। फल का परीक्षण कराया गया तो पता चला कि वह एक विशेष फल था। राजा ने जब उस फल का रसास्वादन किया तो उसके हृदय में वैसे फलों तथा उसके वृक्ष को प्राप्त करने की तीव्र लालसा जगी। क्षण भर में सिपाहियों ने वैसे फलों के पेड़ों को भी ढूंढ निकाला। किंतु वानरों की उपस्थिति उन्हें वहां रास नहीं आई। तत्काल उन्होंने तीरों से वानरों को मारना प्रारंभ कर दिया।

महाकपि के बलिदान की कहानी (Story of the great sacrificial's sacrifice)

       वीरवान महा कपि ने तब अपने साथियों को बचाने के लिए कूदते हुए उस पेड़ के निकट की एक पहाड़ी पर स्थित एक बांस की लकड़ी को अपने पैरों से फंसा कर, फिर उसी पेड़ की टहनी को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर लेट कर अपने साथियों के लिए एक पुल का निर्माण कर दिया। फिर चिल्लाकर अपने साथियों को अपने ऊपर चढ़कर बेतों वाली पहाड़ी पर कूद कर भाग जाने की आज्ञा दी। इस प्रकार महाकपि के बुद्धि कौशल से सारे वानर दूसरी तरफ की पहाड़ी पर कूद कर भाग गए।

         राजा ने महाकवि के त्याग को बड़े गौर से देखा और सराहा। उसने अपने आदमियों को महाकपि को जिंदा पकड़ने की आज्ञा दी। पर उस समय महाकवि की हालत अत्यंत गंभीर थी। साथी वानरों द्वारा कुचल जाने के कारण उसका सारा शरीर विदीर्ण हो उठा था।

       राजा ने उसके उपचार की सारी व्यवस्था भी करवाई मगर महाकवि की आंखें हमेशा के लिए बंद हो चुकी थीं।


Moral/ शिक्षा  :वीरता और समझदारी हमें  इतिहास के पन्नों में जगह देती है। इसके साथ हमें यह शिक्षा मिलती है कि  मुश्किल घड़ी में समझदारी से काम लेना चाहिए। 

English Translate

Story of the great sacrificial's sacrifice

         The Himalayan flowers are well known for their specialties. Unfortunately many of their species are becoming extinct. Some stories are limited to stories only. This story dates back to the time when a unique Himalayan tree, with its plantar features, was situated on the arrow of a deserted mountain river. Its flowers were larger than the Kurian of Thailand, more juicy than cherries and sweeter than mangoes. His shape and fragrance were also enchanting to the mind.

महाकपि के बलिदान की कहानी (Story of the great sacrificial's sacrifice)

        There used to be a bunch of apes on that tree, who used to taste and consume those flowers with great freedom. There was also a king of those apes who was many times bigger, stronger, better-known, and Sheelawan than the other monkeys. Hence he was known as Maha Kapi. With his distant vision, he thought ahead, alerting all the apes not to leave any fruit of that tree on the branches under which the river flows. His following apes also gave full importance to his talk. Because if any fruit was received by a human by falling into the river and flowing, then the result would be very terrible for the apes.
        One day, unfortunately, one of the fruits of that tree caught in the middle of the leaves broke from the branch and flowed into the stream of a flowing river. At the same time, the king of that country, along with his women and slaves-tenants, was on the arrow of the same river. That flowing fruit came and stopped there. At that time, the king's women became enthralled by the aroma of the fruit and closed their eyes and became blissful. The king also became delighted with that fragrance. Soon he ran his men behind the source of that fragrance. The king's men immediately received the fruit on the river's arrow and brought it to the king in an instant. When the fruit was tested, it was found that it was a special fruit. When the king tasted that fruit, his heart longed to get such fruits and his tree. In a moment, the soldiers also found such fruit trees. But the presence of apes did not appease them there. Immediately he started killing the apes with arrows.
महाकपि के बलिदान की कहानी (Story of the great sacrificial's sacrifice)

       Veerawan Maha Kapi then jumped to save his comrades with a bamboo wood situated on a hill near that tree, with his feet, then holding the branch of the same tree with both his hands and lying down with his companions. Built a bridge for Then shouted and ordered his comrades to climb over him and jump on the son's hill and run away. In this way, all the apes from the wisdom skills of the great queen jumped on the hill on the other side.

         The king watched the great poet's sacrifice with great attention and appreciated it. He commanded his men to capture the great grandpa alive. But at that time the condition of the great poet was very critical. Due to being crushed by fellow apes, his entire body was gutted.
       The king also made arrangements for his treatment, but the poet's eyes were closed forever.

Moral / Education: 

Valor and understanding give us a place in the pages of history. With this we get the education that in a difficult time one should work wisely.

Ayurveda The Synthesis of Yoga and Natural Remedies-34-Marigold

गेंदा(Marigold)
        गेंदा बाग- बगीचा, घर -आंगन और रास्तों के किनारे बहुतायत में उगता हुआ देखा जा सकता है।  भारत के अधिकांश राज्यों में इसके सुंदर फूलों के लिए खेती की जाती है। कहा जाता है कि देवी देवताओं को गेंदा के फूलों से काफी लगाव है। गेंदे के फूलों का इस्तेमाल सजावट और पूजा आदि के लिए भी किया जाता है, लेकिन यह बात शायद कम ही लोग जानते हैं कि गेंदे के फूलों का इस्तेमाल अनेक हर्बल नुस्खों के तौर पर भी किया जाता है। चलिए आज जानते हैं गेंदे से जुड़े हर्बल नुस्खों के बारे में:-
Benefits of Marigold (गेंदे के फूल के फायदे ):-

#  गेंदे के फूल की चटनी बनाकर घाव पर लगाया जाए तो बड़े से बड़ा घाव भी भर जाता है।
#  इस का रस पीने से घाव और भी जल्दी भरता है।
#  यह बहुत बड़ा एंटीसेप्टिक है, इसकी चटनी में एलोवेरा जूस मिलाकर उपयोग करने से बिल्कुल सोने में सुहागे जैसा परिणाम मिलता है।
#  कोढ़ की बीमारी में भी इसका अद्भुत परिणाम है। यह शरीर का गलना बंद कर देता है। किसी भी तरह की चोट में इसका उपयोग कर सकते हैं।
#  गेंदे के फूल त्वचा को गहराई से हिल करने में मदद करते हैं और स्किन सेल्स को रीजेनरेट करते हैं।
#  आंखों के नीचे आई सूजन को कम करने के लिए भी गेंदा फायदेमंद है।
#  एंटीबैक्टीरियल गुण होने के कारण गेंदा चेहरे पर मुहांसों को कम करता है और इन्हें वापस आने से रोकता है।
#   रूखी त्वचा से परेशान हैं, तो गेंदे के फूलों का इस्तेमाल चेहरे पर लगाने में करें तथा गेंदे के फूल का रस का सेवन करें।
#   गेंदे का फूल एक बेहतरीन सौंदर्य उत्पाद है यह त्वचा को लंबे समय तक जवान बनाए रखता है। 
#   गेंदे के फूल का इस्तेमाल इत्र बनाने के लिए भी किया जाता है।
#   सूखे हुए गेंदे के फूल को मिश्री के साथ खाने से दमा और खांसी की शिकायत में आराम मिलता है।
#   बवासीर के रोगी को यदि गेंदा की पत्तियों का रस, काली मिर्च और नमक का घोल पिलाया जाए तो आराम मिलता है।
#  गेंदा के फूल का काढ़ा शाम को भोजन करने के बाद पीने से ट्यूमर को जड़ से नष्ट कर देता है।
#  गेंदा फूल का काढ़ा पीने से बुखार में आराम मिलता है।
#  गेंदा के पत्तों के  20 -30 ग्राम काढ़ा को सुबह शाम कुछ दिनों तक सेवन करने से पथरी गल कर निकल जाती है।

बीरबल ने चोर को पकड़ा - Birbal Ne Chor Pakda

 बीरबल ने चोर को पकड़ा 

बीरबल ने चोर को पकड़ा (Birbal Ne Chor Pakda)
       यह कहानी बादशाह अकबर के जमाने की है। एक बार एक व्यापारी अपने किसी काम से कुछ दिनों के लिए प्रदेश से दूर गया हुआ था। जब वह अपना काम खत्म करके घर पहुंचा, तो देखता है कि उसकी पूरी तिजोरी खाली है। उसकी मेहनत की सारी कमाई चोरी हो चुकी है। व्यापारी घबरा गया और उसने अपने घर के सारे नौकरों को बुलाया। व्यापारी के घर में कुल 5 नौकर थे। व्यापारी की एक आवाज पर सारे नौकर उसके सामने आकर खड़े हो गए।

       व्यापारी ने उनसे पूछा, “तुम लोगों के होते हुए घर में इतनी बड़ी चोरी कैसे हो गई? जब चोर आकर मेरी पूरी तिजोरी साफ कर गया, उस समय कहां थे सब के सब?” एक नौकर ने जवाब दिया, “हमें नहीं पता ये चोरी कब हुई मालिक। हम सो रहे थे।” उसकी यह बात सुनकर व्यापारी गुस्से से आग बबूला हो उठा और बोला, “मुझे तो लगता है कि तुम पांच में से किसी एक ने ही चोरी की है। तुम्हारा हिसाब अब बादशाह अकबर ही करेंगे।” यह कहता हुआ वो महल की ओर चल पड़ा।
बीरबल ने चोर को पकड़ा (Birbal Ne Chor Pakda)
             बादशाह अकबर अपने दरबार में बैठकर जनता की समस्या सुन रहे थे कि तभी व्यापारी वहां पहुंच गया। व्यापारी ने कहा, “न्याय हुजूर, न्याय, मेरी समस्या को दूर करें।” बादशाह ने पूछा, “क्या हुआ? कौन हो तुम और क्या है तुम्हारी समस्या?” व्यापारी बोला, “मैं आप ही के राज्य में रहने वाला एक व्यापारी हूं, महाराज। एक जरूरी काम से कुछ दिनों के लिए प्रदेश से बाहर गया था। जब वापस आया, तो मेरी सारी तिजोरी लुट चुकी थी। मैं बर्बाद हो गया, हुजूर। मेरी मदद करें।”

               यह सुनकर बादशाह ने व्यापारी से कुछ सवाल पूछे, जैसे कितना सामान चोरी हुआ, क्या उसे किसी पर शक है आदि। सवालों के जवाब मिलने के बाद अकबर ने व्यापारी का मामला बीरबल को सौंप दिया और कहा कि असली चोर को पकड़ने में बीरबल उसकी मदद करेंगे।
      अगले दिन बीरबल व्यापारी के घर पहुंचे। उन्होंने सभी नौकरों को बुलाया और उनसे पूछा कि चोरी की रात वो सभी कहां थे? सभी ने कहा कि वो व्यापारी के घर में ही रहते हैं और उस रात भी व्यापारी के घर में ही सो रहे थे।
          बीरबल ने उनकी बात मान ली और कहा, “आप सभी को परेशान होने की जरूरत नहीं है। मेरे हाथ में ये पांच जादुई लकड़ियां हैं। मैं आप सभी को एक-एक लकड़ी दूंगा। जो भी चोर होगा, उसकी लकड़ी आज रात दो इंच लंबी हो जाएगी और चोर पकड़ा जाएगा। हम सभी कल यहीं मिलेंगे।” यह कह बीरबल ने सबसे हाथ में एक-एक लकड़ी पकड़ाई और वहां से चले गए।

        दिन ढल गया। अगले दिन बीरबल फिर से व्यापारी के घर पहुंचे और उन्होंने सभी नौकरों को अपनी अपनी लकड़ी के साथ बुलाया। जब बीरबल ने सबकी लकड़ी देखी, तो उन्होंने देखा कि एक नौकर की लकड़ी दो इंच छोटी है।

बस फिर क्या था। बीरबल ने तुरंत सिपाहियों को उस नौकर को पकड़ने का आदेश दिया। व्यापारी इस पूरी घटना को समझ नहीं पाया और असमंजस से बीरबल की तरफ देखने लगा। बीरबल ने व्यापारी को समझाया कि कोई लकड़ी जादुई नहीं थी, लेकिन चोर को इस बात का डर था कि उसकी लकड़ी दो इंच बड़ी हो जाएगी और इस डर से उसने अपनी लकड़ी को दो इंच काट दिया और वह पकड़ा गया। व्यापारी बीरबल की चतुराई से बहुत प्रभावित हुआ और उसका धन्यवाद किया।

Moral/शिक्षा:- 
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि गलत काम चाहे जितना भी चतुराई से किया जाए, लेकिन वो सभी की नजरों में आ जाता है और उसका अंजाम हमेशा बुरा ही होता है।

English Translate

Birbal caught the thief

बीरबल ने चोर को पकड़ा (Birbal Ne Chor Pakda)
        
  This story is of the era of Emperor Akbar.  Once a businessman was away from the state for a few days for some work.  When he finishes his work and reaches home, he sees that his entire vault is empty.  All his hard earned money has been stolen.  The businessman panicked and called all the servants in his house.  There were a total of 5 servants in the merchant's house.  At the voice of the merchant, all the servants stood before him.

        The businessman asked him, "How did you guys have such a big theft in the house?  When the thief came and cleaned my entire chest, where were all of them at that time? "  A servant replied, "We do not know when the theft took place."  we were sleeping."  On hearing this, the businessman got angry and said, "I think only one of you five has stolen."  Only Emperor Akbar will calculate you.  Saying this, he walked towards the palace.

              Emperor Akbar was sitting in his court listening to the public's problem when the merchant reached there.  The merchant said, "Justice, justice, remove my problem."  The king asked, "What happened?  Who are you and what is your problem? "  The merchant said, "I am a businessman living in your kingdom, Maharaj.  Went out of the state for a few days from an urgent work.  When I came back, all my vault was robbed.  I'm devastated, Huzoor.  Help me. "

                Hearing this, the king asked the businessman some questions, such as how much was stolen, does he suspect anyone etc.  After answering the questions, Akbar handed over the businessman's case to Birbal and said that Birbal would help him in catching the real thief.
       The next day Birbal reached the merchant's house.  He called all the servants and asked them where they were all on the night of the robbery.  Everyone said that they live in the merchant's house and that night they were sleeping in the merchant's house itself.
           Birbal obeyed him and said, "All of you need not get upset.  I have these five magical woods in my hand.  I will give each one of you wood.  Whoever would be a thief, his wood would be two inches long tonight and the thief would be caught.  We will all meet here tomorrow. "  Saying this, Birbal grabbed each wood in his hand and went away.

         The day set.  The next day Birbal again arrived at the merchant's house and called all the servants with their own wood.  When Birbal saw the wood of everyone, he saw that the wood of a servant is two inches smaller.

 There was no second thought after that.  Birbal immediately ordered the soldiers to capture that servant.  The businessman could not understand the whole incident and looked at Birbal with confusion.  Birbal explained to the merchant that no wood was magical, but the thief feared that his wood would grow two inches larger, fearing that he cut his wood two inches and was caught.  The businessman was very impressed by Birbal's cleverness and thanked him.

 Moral / Education: -

 This story teaches us that no matter how cleverly the wrong is done, it gets in the eyes of everyone and its consequences are always bad.

Ayurveda The Synthesis of Yoga and Natural Remedies-33- Aloe Vera

एलोवेरा
      एलोवेरा के बारे में हम सभी लोग बहुत अच्छे से जानते हैं। इसका रस इस्तेमाल किया जाता है। इसका पत्ता  काटते ही रस निकलता है और छीलने पर ज्यादा रस निकलने लगता है। यह रस इकट्ठा करके कई तरह के उपयोग में लाया जा सकता है।इसको ग्वारपाठा और घृतकुमारी नाम से भी जाना जाता है। इसके गुणों का कोई अंत नहीं है। 
            एलोवेरा सबसे ज्यादा भारत में ही होता है। खेत के चारों तरफ इसे लगाने से कोई भी जंतु उस खेत में नहीं आते। इसका रस निकालने के लिए एक छोटी मशीन भी आती है। इसके रस का कोई एक्सपायरी डेट नहीं है। इसे कांच की बोतल में भरकर रख सकते हैं। लगभग 53 बीमारियों में एलोवेरा का जूस काम आता है इसलिए इसे अपने घर और बगीचे में जरूर लगाएं।

Benefits of Aloe Vera (एलोवेरा के फायदे ):-

#  इसका सबसे बड़ा उपयोग है, मधुमेह में। चार- पांच चम्मच सुबह खाली पेट मधुमेह के रोगी को इसका सेवन करना चाहिए।
#  जिसके शरीर में फोड़े-फुंसियाँ  बहुत होते हैं, उनके लिए भी इसका रस बहुत काम आता है।
#  बालों में यदि रूसी है, तो इसका रस बालों में लगाएं, बहुत अद्भुत काम करता है।
#  समय से पहले बाल झड़ रहे हैं या टूट रहे हैं, तो एलोवेरा का रस इसमें भी बहुत फायदा करता है। कम से कम हफ्ते में एक दिन जरूर बालों में एलोवेरा रस लगाएं और 1 घंटे के लिए छोड़ दें। उसके बाद बालों को धो लें, तो बाल टूटने बंद हो जाएंगे।

#   शरीर के अंग का कोई भी हिस्सा जो सड़ रहा हो, जैसे गैंग्रीन आदि में एलोवेरा का रस घाव पर लगाएं अद्भुत परिणाम मिलेगा।
#   रक्त में एसिडिटी बढ़ गई या अम्लता बढ़ गई हो, जिसके कारण चर्म रोग की कई बीमारियां आती हैं जैसे- सोरायसिस, इन्जिओसिस,एग्जिमा आदि में इसका रस देने से बहुत अच्छा परिणाम मिलेगा।
#  चर्म रोगों में इसके रस की शरीर पर मालिश करना बहुत अच्छा होता है और बहुत जल्दी ठीक करता है।
#  इसके रस से अल्सर और पेप्टिक अल्सर में भी बहुत लाभ मिलता है।
#  कान में कैसा भी दर्द हो, बच्चे को या बड़े को, इस रस की एक से दो बूंद कान में डाल दीजिए तुरंत आराम मिलेगा।
#  कान से पस निकलना या कान बहने की बीमारी में यह रस 3 से 4 दिन तक एक से दो बूंद कान में डालिए, अद्भुत परिणाम मिलेगा।
#   मुंह से बास आती हो तो सुबह उठकर एलोवेरा के रस से मसूड़ों पर मालिश करें और उसके बाद मुंह धो लें तो मुंह से बास आना बंद हो जाएगी।
#  पायरिया होने पर इसके रस को दातों पर एवं मसूड़ों पर रगड़ने से कुछ ही दिनों में यह बीमारी ठीक होती है।
#  किसी भी स्थान पर जल जाने पर वहाँ एलोवेरा जेल लगा देने से, जलन में तुरंत आराम मिलता है और जले का निशान भी नहीं पड़ता। 
#  त्वचा के लिए भी यह बहुत अच्छा है। इसको लगाने से सन बर्न से बच सकते हैं। स्किन पर होने वाले टैंनिग को दूर करता है तथा चेहरे के दाग धब्बों तथा झुर्रियों को भी मिटाता है।
#  ज्यादा देर तक कंप्यूटर, टीवी और मोबाइल का उपयोग करने से आँखों को जो समस्या होती है, वो भी एलोवेरा के इस्तेमाल से ठीक होती। यह आँखों पर तथा इसके चारों तरफ लगा भी सकते और इसका रस पी भी सकते।
#  इसके निरंतर सेवन से जोड़ों की समस्या से भी निजात मिलता है।
#  इसके रस के सेवन से कब्ज से छुटकारा मिलता है। 
       औषधि की दुनिया में इसे संजीवनी भी कहा जाता है। अतः इसका इस्तेमाल करें और दैनिक जीवन में इसका उपयोग करें।