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तबीयत से उछालो यारों

तबीयत से उछालो यारों

कथाकार और ग़ज़लकार दुष्यंत कुमार त्यागी (01 सितंबर 1931-30 दिसंबर 1975) को कौन नहीं जानता। अपने छोटे से जीवनकाल में इन्होंने हिंदी साहित्य में ऊँचा मुकाम हासिल किया। इनकी 1975 में प्रसिद्ध ग़ज़ल संग्रह "साये में धूप" प्रकाशित हुई थी। इसकी ग़ज़लों को इतनी लोकप्रियता हासिल हुई कि उसके कई शेर कहावतों और मुहावरों के तौर पर लोगों द्वारा व्यवहृत होते हैं। प्रस्तुत है इनकी एक और कविता -   तबीयत से उछालो यारों ....
दुष्यंत कुमार त्यागी
"हर कोई आप को नहीं समझेगा,
यही जिंदगी हैं जनाब.."

तबीयत से उछालो यारों....

यह जो शहतीर है पलकों पे उठा लो यारो,

अब कोई ऐसा तरीक़ा भी निकालो यारो।


दर्दे दिल वक़्त को पैग़ाम भी पहुँचाएगा,

इस क़बूतर को ज़रा प्यार से पालो यारो।


लोग हाथों में लिए बैठे हैं अपने पिंजरे,

आज सय्याद को महफ़िल में बुला लो यारो।


आज सीवन को उधेड़ो तो ज़रा देखेंगे,

आज संदूक से वे ख़त तो निकालो यारो।


कैसे आकाश में सूराख़ नहीं हो सकता,

एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो।


लोग कहते थे कि ये बात नहीं कहने की,

तुमने कह दी है तो कहने की सज़ा लो यारो।

- दुष्यन्त कुमार 

Rupa Oos ki ek Boond
"इस दुनिया में खुशी और मुस्कुराहट ही एकमात्र ऐसा खजाना है,
जिसे जितना बांटो वो और बढ़ता जाएगा.."

तू मेरे ही तो पास है..

तू मेरे ही तो पास है..

तू मेरे ही तो पास है..

तू मेरे ही तो पास है

तू मेरे पास नहीं,

तेरा एहसास जो हर पल साथ है,

कह रहा ये चांद भी मुझसे,

तू मेरे ही तो पास है.. 


ढूंढ़ती हूँ मैं तुझे 

हर जगह हर डगर 

तेरे बिन जो न मिटेगी 

मुझे ऐसी प्यास है,

कह रही ये हवायें मुझसे 

तू मेरे ही तो पास है..


मिले है मंजर हसीन हर मोड़ पर,

इन आँखों को बस तेरी तलाश है,

कह रही है ये रागनी रात की मुझसे 

तू मेरे ही तो पास है..


तुझे मैं बांध के रख लूं,

बस एक यही बाकी आस है,

मेरे आँशुओं को पोंछ कर कह रहा ये समय मुझसे 

तू बैठा क्यों हताश है वो तेरे ही पास है..


कोई तो बताए,

फिर ये दिल क्यों उदास है 

जब तू मेरे पास है तू मेरे पास है..

राजनीतिज्ञ गीदड़: पंचतंत्र || Rajnitigy Gidar : Panchtantra ||

राजनीतिज्ञ गीदड़

उत्तमं प्रणिपातेन शूरं भेदेन योजयेत् । 
नीचमल्पप्रदानेन समशक्तिं पराक्रमैः ॥

उत्कृष्ट शत्रु को विनय से, बहादुर को भेद से, नीच को दान द्वारा और समशक्ति को पराक्रम से वश में लाना चाहिए।

राजनीतिज्ञ गीदड़: पंचतंत्र || Rajnitigy Gidar : Panchtantra ||

एक जंगल में महाचतुरक नाम का गीदड़ रहता था। उसकी दृष्टि में एक दिन अपनी मौत मरा हुआ हाथी पड़ गया। गीदड़ ने उसकी खाल में दाँत गड़ाने की बहुत कोशिश की, लेकिन कहीं से भी उसकी खाल उधेड़ने में उसे सफलता नहीं मिली। उसी समय वहाँ एक शेर आया। शेर को आता देखकर वह साष्टांग प्रणाम करने के बाद हाथ जोड़कर बोला- स्वामी! मैं आपका दास हूँ। आपके लिए ही इस मृत हाथी की रखवाली कर रहा हूँ। आप अब इसका यथेष्ट भोजन कीजिए।

शेर ने कहा- गीदड़ ! मैं किसी और के हाथों मरे जीव का भोजन नहीं करता। भूखे रहकर भी मैं अपने इस धर्म का पालन करता हूँ । अतः तू ही इसका आस्वादन कर मैंने तुझे भेंट में दिया।

शेर के जाने के बाद वहाँ एक बाघ आया। गीदड़ ने सोचा, एक मुसीबत को तो हाथ जोड़कर टाला था, इसे कैसे टालूँ? इसके साथ भेदनीति का ही प्रयोग करना चाहिए। जहाँ साम-दाम की नीति न चले वहाँ भेद-नीति ही काम करती है। भेद-नीति ही ऐसी प्रबल है कि मोतियों को भी माला में बींध देती है। यह सोचकर वह बाघ के सामने ऊँची गर्दन करके गया और बोला : मामा! इस हाथी पर दाँत न गड़ाना। इसे शेर ने मारा है। अभी नदी पर नहाने गया है और मुझे रखवाली के लिए छोड़ गया है। यह भी कह गया है कि यदि कोई बाघ आए तो उसे बता दूँ, जिससे वह सारा जंगल बाघों से खाली कर दे।

गीदड़ की बात सुनकर बाघ ने कहा- मित्र ! मेरी जीवन-रक्षा कर, प्राणों की भिक्षा दे। शेर से मेरे आने की चर्चा न करना-यह कहकर वह बाघ वहाँ से भाग गया।

बाघ के जाने के बाद वहाँ एक चीता आया। गीदड़ ने सोचा, चीते के दाँत तीखे होते हैं, इससे हाथी की खाल उधड़वा लेता हूँ। वह उसके पास जाकर बोला-भगिनीसुत! क्या बात है, बहुत दिनों में दिखाई दिए हो। कुछ भूख से सताए मालूम होते हो। आओ मेरा आतिथ्य स्वीकार करो। यह हाथी शेर ने मारा है। मैं इसका रखवाला हूँ। तब तक शेर आए, इसका माँस खाकर जल्दी से भाग जाओ। उसके आने की खबर दूर से ही दे दूँगा।

गीदड़ थोड़ी दूर पर खड़ा हो गया और चीता हाथी की खाल उधेड़ने लग गया। जैसे ही चीते ने एक-दो जगहों से खाल उधेड़ी, गीदड़ चिल्ला पड़ा-शेर आ रहा है, भाग जा!-चीता यह सुनकर भाग खड़ा हुआ।

उसके जाने के बाद गीदड़ ने उधड़ी हुई जगहों से माँस खाना शुरू कर दिया। लेकिन अभी एक-दो ग्रास ही खाए थे कि एक गीदड़ आ गया। वह उसका समशक्ति ही था, इसलिए उस पर टूट पड़ा और उसे दूर तक भगा आया। इसके बाद बहुत दिनों तक वह उस हाथी का मांस खाता रहा। यह कहानी सुनकर बन्दर ने कहा-तभी तुझे भी कहता हूँ कि स्वजातीय से युद्ध करके अभी निपट ले, नहीं तो उसकी जड़ जग जाएगी। यही नष्ट कर देगा। स्वाजातियों का यही दोष है कि वही विरोध करते हैं, जैसे कुत्ते ने किया था। मगर ने कहा- कैसे?

बन्दर ने तब कुत्ते की कहानी सुनाई :

कुत्ते का वैरी कुत्ता

To be Continued...

जनवरी की एक सर्द सुबह

जनवरी की एक सर्द सुबह

जनवरी मास की एक सर्द सुबह। ठंड अपने शबाब पर है। मेरी घड़ी में 5 बजकर 20मिनट हो रहे हैं। मैं यहां पार्क की एक बेंच पर बैठी सामने के वृक्षों के पत्तों से टपकती ओस की बूंदों को निहार रही हूं।इतनी जबरदस्त ठंड में भी ओस की बूंदें मुस्कुरा रही हैं और पत्तों से टपककर अपनी जिंदगी कुर्बान कर दे रही हैं। चूंकि सर्दी का सितम बहुत है, इसलिए पार्क में इक्का-दुक्का ही टहलने वाले लोग हैं। जब 5:15 पर मैं आई थी तब मात्र दो ही लोग पार्क में चहलकदमी कर रहे थे, जिसमें एक 45-46 वर्षीय अधेड़ पुरुष और एक 20-22 साल की तरुणी थी। वह तरुणी कुछ देर टहलती फिर कुछ देर अत्यंत वेग से पार्क की परिक्रमा करती है। 

Rupa Oos Ki Ek Boond

घड़ी अब 5.45 का समय बता रही है। सूरज भी इस ठिठुरन में मानो आलस्य की चादर ओढ़े लेटे हैं। उनके दर्शन अभी भी दुर्लभ हैं। वहीं पार्क में चहल-पहल बढ़ने लगी है। अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कुछ लोग एक तरफ बैठ के योग कर रहे हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये सभी 65-70 वर्षीय बुजुर्ग हैं। अपने जोश, उत्साह, जीवन के प्रति सकारात्मक रवैया से ये युवाओं को भी मात दे रहे हैं। इन्हें देखकर सचमुच प्रतीत हो रहा है कि उम्र सिर्फ एक संख्या है और कुछ नही। ऐसी सर्द सुबह में भी इनके साथ इनकी चटाई, व्यायाम और ध्यान के प्रति इनकी दीवानगी प्रकट करती है। इनमें से दो लोगों को पैर की शायद घुटनों की समस्या है तो वो कुर्सी पर बैठ के योग कर रहे हैं। ये एक आवश्यक संदेश भी हमें दे रहे हैं कि इंसान को अपना कर्म अंतिम सांस तक करना चाहिए। 

जैसे जैसे समय बढ़ रहा है वैसे वैसे पार्क में टहलने वाले बढ़ते जा रहे हैं और धीरे धीरे एक भीड़ की शक्ल लेते जा रहे हैं। मुझे यहाँ आये लगभग 30 मिनट हो गए हैं। इतनी देर में मेरे बालों पर इतनी ओस पड़ चुकी है कि वह बूंद का रूप लेकर मेरे कानों के ऊपर के केसुओं से होती हुई मेरे कांधे पर टपक रही है और मेरे कानों में हौले से मानो कह रही है कि तुम्हारी खुशी में लिए में अपनी जिंदगी कुर्बान कर रही हूँ। 

Rupa Oos Ki Ek Boond

यहां लगभग सभी ने अपने अपने सर को ठंड से बचाने का पूरा इंतज़ाम कर रखा है। कोई हिमाचली टोपी पहनकर मुस्कुरा रहा है तो कोई वानर टोपी लगाकर चिंंतित मुद्रा में खड़ा है। कुछ लोग सर के साथ अपनी नाक बचाने के लिए एक मफलर को सर के साथ नाक तक लपेटकर शान के साथ सर्दी को चुनौती देते हुए खड़े हैं। परंतु मुझे इन ओस की बूंदों से कुछ ज्यादा ही लगाव है। इनकी सुंदरता को देखने और इनसे बातें करने के लिए,अपने कानों से इनका मधुर संगीत सुनने के लिए कदाचित मैं टोपी नहीं लगाती।

आज यहीं विराम देती हूं, फिर मिलते हैं एक नई ओस की बूंद से, फिर एक नई सुबह। 

श्रीमद्भगवद्गीता ||अध्याय छः - आत्मसंयमयोग || अनुच्छेद 11 - 15 ||

 श्रीमद्भगवद्गीता ||अध्याय छः - आत्मसंयमयोग ||

अथ षष्ठोऽध्यायः  ~ आत्मसंयमयोग 

अध्याय छः के अनुच्छेद 11 - 15

अध्याय छः के अनुच्छेद 11-15 में आसन विधि, परमात्मा का ध्यान, योगी के चार प्रकार का वर्णन है। 

संपूर्ण श्रीमद्भगवद्गीता || Sampurn Shrimad Bhagwat Geeta ||

शुचौ देशे प्रतिष्ठाप्य स्थिरमासनमात्मनः ।
नात्युच्छ्रितं नातिनीचं चैलाजिनकुशोत्तरम्‌ ॥

भावार्थ : 

शुद्ध भूमि में, जिसके ऊपर क्रमशः कुशा, मृगछाला और वस्त्र बिछे हैं, जो न बहुत ऊँचा है और न बहुत नीचा, ऐसे अपने आसन को स्थिर स्थापन करके॥11॥

तत्रैकाग्रं मनः कृत्वा यतचित्तेन्द्रियक्रियः ।
उपविश्यासने युञ्ज्याद्योगमात्मविशुद्धये ॥

भावार्थ : 

उस आसन पर बैठकर चित्त और इन्द्रियों की क्रियाओं को वश में रखते हुए मन को एकाग्र करके अन्तःकरण की शुद्धि के लिए योग का अभ्यास करे॥12॥

समं कायशिरोग्रीवं धारयन्नचलं स्थिरः ।
सम्प्रेक्ष्य नासिकाग्रं स्वं दिशश्चानवलोकयन्‌ ॥

भावार्थ : 

काया, सिर और गले को समान एवं अचल धारण करके और स्थिर होकर, अपनी नासिका के अग्रभाग पर दृष्टि जमाकर, अन्य दिशाओं को न देखता हुआ॥13॥

प्रशान्तात्मा विगतभीर्ब्रह्मचारिव्रते स्थितः ।
मनः संयम्य मच्चित्तो युक्त आसीत मत्परः ॥

भावार्थ :

 ब्रह्मचारी के व्रत में स्थित, भयरहित तथा भलीभाँति शांत अन्तःकरण वाला सावधान योगी मन को रोककर मुझमें चित्तवाला और मेरे परायण होकर स्थित होए॥14॥

युञ्जन्नेवं सदात्मानं योगी नियतमानसः ।
शान्तिं निर्वाणपरमां मत्संस्थामधिगच्छति ॥

भावार्थ : 

वश में किए हुए मनवाला योगी इस प्रकार आत्मा को निरंतर मुझ परमेश्वर के स्वरूप में लगाता हुआ मुझमें रहने वाली परमानन्द की पराकाष्ठारूप शान्ति को प्राप्त होता है॥15॥

उत्तर प्रदेश का राजकीय/राज्य पक्षी || State Bird Of Uttar Pradesh ||

उत्तर प्रदेश  का राजकीय/राज्य पक्षी

सारस (saras)/Crane

काश कि मैं भी चिड़िया होती, खुला आसमान ऊंची उड़ान। खैर आज उत्तर प्रदेश के राजकीय पक्षी के बारे में जानते हैं। मैं भी उत्तर प्रदेश की निवासी हूं और मेरे ज्यादातर पाठक भी उत्तर प्रदेश से ही हैं। आज हम जानते हैं सारस के विषय में जो उत्तर प्रदेश का राजकीय पक्षी है और विश्व का सबसे लंबा उड़ने वाला पक्षी है।
उत्तर प्रदेश का राजकीय/राज्य पक्षी || State Bird Of Uttar Pradesh ||

सारस को संस्कृत में क्रौंच कहा जाता है। यह लंबी टांगों वाला और लंबे गले वाला एक पक्षी है। सारस कुल में तीन वंशों (ऐंटिगोनी, बेलैरिका, ग्रुस) में संगठित 15 ज्ञात जातियाँ हैं, जो अंटार्कटिका और दक्षिण अमेरिका को छोड़कर हर महाद्वीप में पाए जाते हैं।

सारस भारत का एकमात्र गैर प्रवासी पक्षी है। इसकी कई खूबियां हैं, जो इन्हें दूसरे पक्षियों से अलग बनाती हैं। खड़े होने पर इसकी ऊंचाई तकरीबन 156 सेंटीमीटर अर्थात 5 फुट 2 इंच होती है। ये खुली भूमि और दलदली इलाकों में रहना पसंद करते हैं। यह सर्वाहारी पक्षी हैं, जो मेंढक, कीड़े-मकोड़े, सरीसृप, मछलियां, अंडे, छोटे फल, बीज, और पौधों की जड़ें सब कुछ खा लेते हैं। सारस की उड़ने की क्षमता अधिक होती है। यह 52 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ते देखे गए हैं, इनके बड़े आकार के कारण इन्हें आसानी से देखा जा सकता है। 

उत्तर प्रदेश का राजकीय/राज्य पक्षी || State Bird Of Uttar Pradesh ||

सारस पक्षी का अपना विशिष्ट सांस्कृतिक महत्व भी है। विश्व के प्रथम ग्रंथ रामायण की प्रथम कविता का श्रेय सारस पक्षी को जाता है। रामायण का आरंभ एक प्रणयरत सारस-युगल के वर्णन से होता है। प्रातःकाल की बेला में महर्षि वाल्मीकि इसके द्रष्टा हैं तभी एक आखेटक द्वारा इस जोड़े में से एक की हत्या कर दी जाती है। जोड़े का दूसरा पक्षी इसके वियोग में प्राण दे देता है। ऋषि उस आखेटक को श्राप देते हैं।

उत्तर प्रदेश का राजकीय/राज्य पक्षी || State Bird Of Uttar Pradesh ||

भारत में सारस को दांपत्य प्रेम का प्रतीक भी माना जाता है। नर और मादा युगल एक दूसरे के प्रति पूर्णतः समर्पित होते हैं। इसे 'साथी बर्ड' के रूप में भी जाना जाता है। यह आमतौर पर जोड़े में देखे जाते हैं और इनका समर्पण इतना अद्भुत है कि एक बार जोड़ा बनाने के बाद ये जीवन भर साथ रहते हैं। अगर किसी दुर्घटना में किसी एक साथी की मृत्यु हो जाए तो दूसरा अकेले ही रहता है या फिर एक की मौत पर दूसरा साथी भी अपने प्राण त्याग देता है। 

सारस से जुडी और भी रोचक जानकारियाँ हैं, जिसकी चर्चा अगले अंक में होगी। 

उत्तर प्रदेश का राजकीय/राज्य पक्षी || State Bird Of Uttar Pradesh ||

English Translate

state bird of uttar pradesh

I wish I was also a bird, flying high in the open sky. Well today we know about the state bird of Uttar Pradesh. I am also a resident of Uttar Pradesh and most of my readers are also from Uttar Pradesh. Today we know about the crane which is the state bird of Uttar Pradesh and the longest flying bird in the world.

The crane is called 'Krauncha' in Sanskrit. It is a bird with long legs and long neck. The crane family has 15 known species organized into three genera (Antigoni, Bellarica, Grus), found on every continent except Antarctica and South America.

उत्तर प्रदेश का राजकीय/राज्य पक्षी || State Bird Of Uttar Pradesh ||

The crane is the only non-migratory bird in India. It has many characteristics, which make it different from other birds. When standing, its height is about 156 centimeters i.e. 5 feet 2 inches. They like to live in open land and marshy areas. These are omnivorous birds, which eat frogs, insects, reptiles, fish, eggs, small fruits, seeds, and roots of plants. The flying ability of the crane is high. They have been seen flying at a speed of 52 kilometers per hour, due to their large size they can be easily seen.

Crane bird also has its own specific cultural significance. The credit for the first poem of the Ramayana, the world's first book, goes to the stork. The Ramayana begins with a description of a courting crane couple. Maharishi Valmiki is its seer in the early morning when one of the couple is murdered by a hunter. The other bird of the pair dies in its separation. The sage curses that hunter.

उत्तर प्रदेश का राजकीय/राज्य पक्षी || State Bird Of Uttar Pradesh ||

In India, the crane is also considered a symbol of conjugal love. The male and female couple are completely devoted to each other. It is also known as 'companion bird'. They are usually seen in pairs and their devotion is so amazing that once they form a pair, they stay together for life. If one of the companions dies in an accident, then the other remains alone or on the death of one the other companion also sacrifices his life.

There are other interesting facts related to stork, which will be discussed in the next issue.

भारत के सभी राज्यों के राजकीय पक्षियों की सूची |(List of State Birds of India)

बिहार और दिल्ली का राजकीय/राज्य पक्षी || State Bird Of Bihar & Delhi ||

बिहार और दिल्ली का राजकीय/राज्य पक्षी

गौरैया (Sparrow)/Gauraiya

चिड़ियों की दुनिया भी कितनी निराली है, खुला आसमान ऊंची उड़ान। गौरैया पक्षी से तो सभी परिचित हैं, पर क्या आप जानते हैं कि बिहार का राजकीय अर्थात राज्य पक्षी गौरैया है? गौरैया बिहार के साथ ही भारत की राजधानी दिल्ली का भी राजकीय पक्षी है। जैसा की विदित है हर राज्य का राजकीय पक्षी होता है। अगले कुछ अंकों में अलग-अलग राज्यों के राजकीय पक्षियों की चर्चा करेंगे। 

बिहार और दिल्ली का राजकीय/राज्य पक्षी

पिछले कुछ वर्षों से लगातार गौरैया की संख्या में गिरावट के कारण गौरैया के संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता के लिए प्रति वर्ष 20 मार्च को "विश्व गौरैया दिवस" मनाया जाता है।

गौरैया एक छोटी चिड़िया है। इसके पंख हल्के भूरे होते हैं और पैर का रंग पीला होता है। घरेलू गौरैया की लंबाई सामान्यतः 14 से 18 सेंटीमीटर होती है तथा वजन 24 से 39 ग्राम तक होता है।

बिहार और दिल्ली का राजकीय/राज्य पक्षी

नर गौरैया को चिड़ा और मादा को चिड़ि या चिड़िया कहते हैं। आकार में नर गौरैया मादा से थोड़े बड़े होते हैं। नर में एक भूरे रंग का मुकुट, काली बिब तथा लाल भूरे रंग की पीठ पर काले और भूरे रंग के धब्बे होते हैं, जबकि मादा की भूरी धारीदार पीठ होती है। नर गौरैया के सिर का ऊपरी भाग, शरीर के नीचे का भाग और पेट के आसपास का रंग भूरा होता है। गले के पास काला धब्बा होता है। इसकी चोंच और आंखों का रंग काला होता है और पैर भूरे होते हैं। मादा गौरैया की भूरे रंग की धारीदार पीट होती है। नर गौरैया की पहचान उसके गले के पास के काले धब्बे से की जा सकती है।

गौरैया सामान्यतः यूरोप, भूमध्यसागरीय क्षेत्र और एशिया के अधिकांश भागों में पाए जाते हैं। यह अमेरिका के अधिकांश स्थानों, अफ्रीका के कुछ स्थानों, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में भी पाया जाता है।

बिहार और दिल्ली का राजकीय/राज्य पक्षी

गौरैया विविध आवासों और जलवायु में पाए जाते हैं। जहां - जहां मनुष्य रहते हैं, यह अपना बसेरा वहीं बना लेते हैं। शहरों, कस्बों, गांव, खेतों के आसपास यह ज्यादातर पाए जाते हैं तथा निर्जन पहाड़ी स्थानों, जंगलों, रेगिस्तान में इनकी संख्या कम ही पाई जाती है।

English Translate

State bird of Bihar and Delhi

The world of birds is also so unique, flying high in the open sky. Everyone is familiar with the sparrow bird, but do you know that the state bird of Bihar is the sparrow? Sparrow is the national bird of Bihar as well as Delhi, the capital of India. As it is known that every state has a state bird. In the next few points, we will discuss the state birds of different states.

बिहार और दिल्ली का राजकीय/राज्य पक्षी

Due to the continuous decline in the number of sparrows for the past few years, "World Sparrow Day" is celebrated every year on 20 March to create awareness among people about the conservation of sparrows.

Sparrow is a small bird. Its wings are light brown and the color of the leg is yellow. The length of the house sparrow is usually 14 to 18 cm and the weight ranges from 24 to 39 grams.

The male sparrow is called Chida and the female is called Chidiya or Chidiya. Male sparrows are slightly larger in size than females. The male has a brown crown, black bib and reddish brown back with black and brown spots, while the female has a brown striped back. The upper part of the head, lower part of the body and around the belly of the male sparrow are brown. There is a black spot near the throat. Its beak and eyes are black in color and legs are brown. The female sparrow has brown striped plumage. The male sparrow can be identified by the black spot near its throat.

बिहार और दिल्ली का राजकीय/राज्य पक्षी

Sparrows are commonly found in Europe, the Mediterranean region and most parts of Asia. It is also found in most of the Americas, some places in Africa, New Zealand and Australia.

Sparrows are found in a wide variety of habitats and climates. Wherever humans live, they make their abode there. They are mostly found around cities, towns, villages, farms and their numbers are rarely found in deserted hilly places, forests, deserts.

World Sparrow Day (विश्व गौरैया दिवस)

गौरैया (Gauraiya) के बारे में 14 रोचक तथ्य || 14 Interesting facts about Sparrow ||