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सूरज || Sun ||

हर दिन ढलता सूरज

Rupa Os ki ek Boond

हर शाम ढलता सूरज

हर सुबह उगता सूरज 

कुछ तो सन्देश देता है 

हर दिन नई शुरुवात हो सकती है

बिल्कुल खत्म हो कर भी हमसे कुछ कहता सूरज

सूर्य उदय पर दे कर जलधारा 

जीवन का नया सवेरा देता सूरज

जीवन की हर मुश्किल भरी अंधेरी रात के बाद

हौसलों से तरो ताजा हुए विचारों का जीवन देता सूरज

थक हार के आते सुबह से शाम तक जीवन की भागदौड़ से 

मन में चलती रात भर उलझने 

फिक्र कल के जीवन को ले कर

हर रोज सारी उलझनों को सुलझाने में 

बिखेर कर रोशनी अपनी 

हमको हिम्मत देता सूरज

क्या लिखे संक्षिप्त सा कलाम अपने शब्दों में रूपा

जीवन के हर पल में जो महक रही है रोशनी

कभी गम लिए कभी खुशियाँ भरी

इन रोशनियों को हर पल रोशन करता सूरज

अंतिम यही है कहना 

रूपा_ओस_की_एक_बूंद भरी 

अपनी जज़्बातों के अल्फ़ाज़ में 

हो कोई मुश्किल या गम जिंदगी

प्रतिपल मुस्कुराते हुए हौसला देता सूरज

नई ऊर्जा के साथ हर दिन निकलता सूरज

ये हमें है पैगाम देता सूरज 


-रूपा

Rupa Os ki ek Boond

हर दिन मुझे निखारना है, न रुकना है न थकना है, 
सारा आसमान हो मेरी जद में, यूँ सूरज सा चमकना है..❤

Rupa Os ki ek Boond
सूरज की पहली किरण ने
आशा का सवेरा लाया,
चिड़िया चहकी बागों में
दिन का परचम लहराया..❤



ब्रह्मकमल || Brahma Kamal || Saussurea obvallata ||

ब्रह्मकमल

"ब्रह्मकमल (Brahma Kamal)" नाम तो आप सभी ने भी सुना होगा। "ब्रह्मकमल (Brahma Kamal)" का वर्णन वेदों में भी मिलता है। ब्रह्मकमल हिमालय की वादियों में होने वाला एक पुष्प है और सिर्फ रात में ही खिलता है। सुबह होते ही इसका फूल अपने आप बंद हो जाता है। यह पुष्प रात्रि 9:00 से 12:30 के बीच ही खिलता है। इसे खिलते देखना सौभाग्य सूचक होता है। अपनी विशेषताओं की वजह से यह दुनियाभर में लोकप्रिय है और लोग इसको देखने के लिए तरसते हैं। 

ब्रह्मकमल || Brahma Kamal || Saussurea obvallata ||

ब्रह्म कमल की 24 प्रजातियां उत्तराखंड राज्य में मिलती हैं तथा तथा पूरे विश्व में इसकी 210 प्रजातियां पाई जाती हैं। ब्रह्म कमल के पौधों की ऊंचाई 70 से 80 सेंटीमीटर होती है। सफ़ेद रंग का इसका पुष्प टहनियों में ही नहीं बल्कि पीले पत्तियों से निकले कमल पात के पुष्पगुच्छ के रूप में खिलता है। जिस समय यह पुष्प खिलता है वातावरण सुगंध से भर जाता है। ब्रह्म कमल की खुशबू बहुत तीक्ष्ण होती है। 

ब्रह्म कमल केदारनाथ से 2 किलोमीटर ऊपर वासु की ताल के समीप तथा ब्रह्म कमल नामक तीर्थ पर सर्वाधिक उत्पन्न होता है। इसके अतिरिक्त फूलों की घाटी एवं पिंडारी ग्लेशियर, रूपकुंड, हेमकुंड, ब्रज गंगा, फूलों की घाटी में पुष्प बहुतायत पाया जाता है।

ब्रह्मकमल || Brahma Kamal || Saussurea obvallata ||

यह एकमात्र ऐसा फूल है, जिसकी पूजा की जाती है। माना जाता है इसमें खुद देवताओं का वास रहता है। भगवान ब्रह्मा के नाम पर इस फूल का नाम पड़ा था। मान्यता है कि इस फूल के दर्शन मात्र से अनेक इच्छाएं पूरी हो जाती हैं। 

महाकाव्य महाभारत में भी इस पुप्ष का उल्लेख मिलता है। इसकी मादक खुशबू की वजह से द्रोपदी इसको पाने के लिए व्याकुल हो गई थी। महाभारत के वन पर्व में इसे सौगंधिक पुष्प कहा गया है। पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णुजी ने केदारनाथ ज्योतिर्लिंग पर 1008 शिव नामों से 1008 ब्रह्मकमल पुष्पों से शिवार्चन किया और वे, कमलनयन कहलाये। यही इन्हें सुदर्शन चक्र वरदान स्वरूप प्राप्त हुआ था। केदारनाथ शिवलिंग को अर्पित कर प्रसाद के रूप में दर्शनार्थियों को बांटा जाता है।

ब्रह्मकमल || Brahma Kamal || Saussurea obvallata ||

ब्रह्मकमल पुष्प की कोई जड़ नहीं होती अर्थात यह पत्तों से पनपता है। इसकी बुवाई पत्तों से की जाती है। इसे अधिक पानी और गर्मी से बचाना होता है। ब्रह्म पुष्प एक ऐसा फूल है, जिसकी महालक्ष्मी वृद्धि के लिए पूजा की जाती है। जैसा कि हम सभी जानते हैं की कमल पानी (कीचड़) में खिलता है, पर "ब्रह्मकमल (Brahma Kamal)" कभी पानी में नहीं खिलता। इसका वृक्ष होता है, पत्ते बड़े और मोटे होते हैं तथा पुष्प सफेद होता है।

ब्रह्म पुष्प की बिक्री पर प्रतिबंध होने के बावजूद भी इसे तीर्थ यात्रियों को बेचा जाता है। आलम यह है कि वर्तमान में ब्रह्मकमल खत्म होने की कगार पर है क्योंकि जैसे ही इसके फूल खिलते हैं तुरंत तोड़ लिए जाते हैं।

ब्रह्म कमल पुष्प का उपयोग आयुर्वेद में जड़ी-बूटी के रूप में किया जाता है तथा इससे कई प्रकार के रोगों का इलाज भी किया जाता है जिसकी चर्चा हम अगले अंक में करेंगे।

ब्रह्मकमल || Brahma Kamal || Saussurea obvallata ||

English Translate

Brahmakamal

You all must have heard the name "Brahma Kamal". The description of "Brahma Kamal" is also found in the Vedas. Brahmakamal is a flower found in the Himalayas and blooms only at night. Its flower closes on its own in the morning. This flower blooms only between 9:00 to 12:30 at night. Seeing it blooming is a sign of good luck. Because of its features, it is popular all over the world and people crave to see it.

ब्रह्मकमल || Brahma Kamal || Saussurea obvallata ||

24 species of Brahma Kamal are found in the state of Uttarakhand and 210 species are found all over the world. The height of Brahma Kamal plants is 70 to 80 cm. Its white colored flower blooms not only in the twigs but in the form of a bunch of lotus leaves coming out of the yellow leaves. When this flower blooms, the atmosphere is filled with fragrance. The fragrance of Brahma Kamal is very strong.

The Brahma Kamal is grown at a height of 2 km above Kedarnath near the pool of Vasu and at a shrine called Brahma Kamal. Apart from this, flower abundance is found in the Valley of Flowers and Pindari Glacier, Roopkund, Hemkund, Braj Ganga, Valley of Flowers.

This is the only flower which is worshipped. It is believed that the gods themselves reside in it. This flower was named after Lord Brahma. It is believed that a mere sight of this flower fulfills many wishes.

ब्रह्मकमल || Brahma Kamal || Saussurea obvallata ||

This flower is also mentioned in the epic Mahabharata. Draupadi was anxious to get it because of its intoxicating fragrance. In the forest festival of Mahabharata, it is called Saugandhik flower. According to mythological belief, Lord Vishnu worshiped Kedarnath Jyotirlinga with 1008 Brahmakamal flowers with 1008 names of Shiva and he was called Kamalnayan. He had received the Sudarshan Chakra as a boon. Kedarnath is offered to Shivling and distributed to the visitors in the form of prasad.

The Brahma Kamal flower has no root, that is, it grows from the leaves. It is sown from the leaves. It has to be protected from excess water and heat. Brahma Pushpa is one such flower, which is worshiped for the growth of Mahalakshmi. As we all know that lotus blooms in water (mud), but "Brahma Kamal" never blooms in water. It is a tree, the leaves are large and thick and the flowers are white.

ब्रह्मकमल || Brahma Kamal || Saussurea obvallata ||

Despite the ban on the sale of Brahma Pushpa, it is sold to pilgrims. Alam is that at present Brahmakamal is on the verge of extinction because as soon as its flowers bloom, they are immediately plucked.

Brahma Kamal flower is used as a herb in Ayurveda and many types of diseases are also treated with it, which we will discuss in the next issue.

Pls See Bramhkamal in this Video👆

ब्रम्हकमल पुष्प के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुणों के बारे में जानकारी 

ओस की बूँद (Os ki boond)

ओस की बूँद (Os ki boond)

आभार,शुक्रिया,धन्यवाद

आप सभी सहृदय विद्वानों का दिल से।

आज सबसे पहले मेरे इस ब्लॉग से जुड़े लोगों को प्रणाम।

आपलोगों के निरंतर सहयोग का, दिल से निकली दुआओें और आशीर्वाद का ही सुपरिणाम है कि विगत दो वर्षों से निरंतर, बिना किसी बाधा के यह ब्लॉग प्रतिदिन प्रकाशित होता रहा। आपके सतत उत्साहवर्धन के कारण ही आज यह ब्लॉग इस मुकाम पर पहुँच पाया है। किसी भी कार्य को करने पर यदि सराहना मिलती है, तो उस कार्य को और अधिक निष्ठा और लगन से करने की प्रेरणा मिलती है।  पिछले दो वर्षों से लगातार आपलोगाें की प्रतिक्रियाएं मेरे जोश और जज्बे में वृद्धि करती रहीं और ये सिलसिला लगातार बिना थमे,बिना रुके चल रहा है। इस क्रम में बहुत लोग हैं जो शुरू से अभी तक मुझसे जुड़े रहे, मेरी अच्छी- बुरी सभी पोस्ट की सराहना करते रहे और मेरा मनोबल बढ़ाते रहे। दो साल के इस समयान्तराल में  नए-नए लोग जुड़ते रहे और यह कारवां आगे बढ़ता रहा। इस राह में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो कुछ वक्त के लिए ही यहां आए। कदाचित  मेरी तरफ से ही कुछ कमी रही होगी जो मैं उन्हें ब्लॉग पर रोक नहीं सकी। आगे से मेरा प्रयास रहेगा कि इस कमी को भी पूरी कर सकूं और ब्लॉग में कुछ ऐसा जोड़ूँ  ताकि यहां आने वाले यहां रुकें और अपनी अमूल्य प्रतिक्रिया से मेरा उत्साहवर्धन और मार्गदर्शन करते रहें।

Os ki Ek Boond ~ ओस की एक बूँद
 💦यूं तो ओस की बूंद है तो जल की ही बूंद का एक स्वरूप। यह स्वरूप नदी झील, झरने का भी हो सकता है और कभी आंसू का भी। वक्त सुखकारी हो या दुखकारी आंसू बनकर यह हमेशा नयनों में समाई रहती है। सृजन काल से लेकर मुक्ति काल तक सदैव इंसान की सच्ची साथी। कभी पलकों पर मेरा बसेरा होता है तो कभी अधरों पर मेरा आशियाना। एक मां के लिए यह उसके आंचल के साथ क्रीड़ा करती उसकी ममता है, और शायद उस ममता में ही अखिल विश्व समाहित है। जिंदगी इस बूंद के कारण ही चलायमान है। जब इसका आविर्भाव होता है तो प्रकृति भी मुस्कुराती है। मन मयूर नृत्य करने लगता है, हृदय में प्यार का उल्लास जाग उठता है।
Os ki Ek Boond ~ ओस की एक बूँद
            पत्तों से टपकती ओस की बूंदे नाजुक मोती जैसी ही तो है। इन्हें ध्यान से देखिए तो सही। आपको लगेगा जैसे ये आप से बहुत कुछ कहना चाहती हों। आपसे आपका हाल चाल पूछने को शायद ये बैचैन  हैं। लेकिन मिट्टी की सोंधी खुशबू याद करते ही वे पत्तों में भी नहीं ठहरतीं। इस छोटी सी जिंदगी को भी ओस की बूंद की तरह चमकीली होना चाहिए। भले ही वह कम उम्र की हो। ओस की बूंद स्वयं में पूर्ण है। वह स्रोत है नवशक्ति का। ओस की बूंद प्रतीक है जीवन की गति का, जीवन को गुनगुनाने का, निश्छल प्रेम को सहेजने का, जिंदगी के बलिदान का, और अंत में आपके साथ मिलजुल कर बैठने का, कुछ अपनी सुनाने और आपकी सुनने का। 💦
Os ki Ek Boond ~ ओस की एक बूँद
जानी पहचानी "ओस की बूंद"
अनगिनत यादों को समेटे
चमकती मोतियों सी "ओस की बूंद"
महकती यादों को ओढ़े
जाने कितने रिश्ते गढ़ती "ओस की बूंद"
जीवन की आपा धापी को सहेजते
सपनों के घरौंदे सी "ओस की बूंद"
उड़ते दिलों को संभालते
निश्छल बचपन जैसी 
मीठी मीठी यादों को संजोते "ओस की बूंद"



Koyal (कोयल) || Sunday.. इतवार ..रविवार ||

इतवार (Sunday)

Rupa Os ki Boond
"खोल दे पंख मेरे कहता है परिंदा,
अभी और उड़ान बाकी है, 
जमीन नहीं है मंजिल मेरी,
अभी पूरा आसमान बाकी है..❤"
Koyal (कोयल)

 अमवा की डाली पे,

बोले कोयलिया काली।

मानस की हृदय को अत्यंत ही भाती है,

सुनकरके कूक कूक सबही के मुदित मन।

लोग कहें देखो ये कितना सुंदर गाती है।

शरद के गमन से अमवा बौराए हैं, 

होली में शरद जरी, वृक्षों पे कोपल नई।

अमवा की वाली सी डाली गदराई है, 

कोयलिया काली का मन रोये विरहातुर,

लोग कहें धुन कैसी कोयलिया ने गाई है।

कोयल (Cuckoo)|| Koyal ||
"कामयाबी सुबह के
जैसी होती है,
मांगने पर नहीं, 
जागने पर मिलती है..❤"

कोयल कब कूकती है? कभी आपने सोचा है,क्या बसंत ऋतु के बाद कोयल कहीं चली जाती है? कोयल की आवाज बसंत ऋतु के बाद क्यों नहीं सुनाई देती?

कोयल बसंत ऋतु में ही कूकती हैं और बाद में भी हमारे आस पास रहती है पर आवाज़ नहीं निकाल पाती। बसंत ऋतु में कोयल की कूकने की मीठी बोली सुनाई देती है, जिसे सभी बहुत पसंद करते हैं। पर वसंत के जाते ही उसका कूकना सुनाई देना बंद हो जाता है, तो क्या वसंत के बाद कोयल कहीं चली जाती है? नहीं, ऐसा नहीं है, कोयल बसंत ऋतु के बाद भी कही नहीं जाती है, हमारे आस-पास ही रहती है, लेकिन मौसम में बदलाव के वजह से उसका गला फट जाता है और वह बोल नहीं पाती है। वह सिर्फ बसंत में ही बोल पाती है।

When does the cuckoo cook? Have you ever wondered, do cuckoos go somewhere after the spring season? Why is the cuckoo's voice not heard after the spring season?

Cuckoos chirp only in the spring and remain around us even later, but cannot make a sound. In the spring, the sweet speech of the cuckoo's cooking is heard, which is very much liked by all. But as soon as the spring leaves, its sound stops, so does the cuckoo go somewhere after the spring? No, it is not like that, the cuckoo does not go anywhere even after the spring season, it stays around us, but due to the change in weather, its throat breaks and she is unable to speak. She can speak only in the spring.

कोयल (Cuckoo)|| Koyal ||

प्रभात की छटा || Sunday.. इतवार ..रविवार ||

  इतवार (Sunday)

"इतवार में भी कुछ यूँ हो गयी है मिलावट,
छुट्टी तो दिखती है,
पर सुकून नजर नहीं आता..❤"

प्रभात की छटा

है प्रभात की छटा निराली,

पवन मंद मुस्काये.

रिमझिम तारे चंदा जग से,

टाटा कहते जाएँ.

शांत तिमिर छटता जाता है,

आभा विमल विखरती .

ऐसा लगता है सागर से,

सृष्टि की दृष्टि निखरतीं.

चिड़ियों ने पर खोले अपने,

जग को है चहकाया.

फूलों ने है ली अंगड़ाई,

यौवन को महकाया.

अटल शांति छायी है जग में,

नई ऊर्जा है तन मन में..

शुभ प्रभात.

इतवार (Sunday)

"नदी के किनारे पर खड़े रहने से नदी पार नही होती,
 उसे पार करने के लिए उसके अंदर जाना पड़ता है..❤"

यूलन मैगनोलिया फूल, जो सुंदर पक्षियों की तरह दिखते हैं/ Magnolia Flower

 यूलन मैगनोलिया फूल, जो सुंदर पक्षियों की तरह दिखते हैं

इस तस्वीर को देखकर आप सचमुच सोच में पड़ गए होंगे ! यह अद्भुत से फूल दिखने में बिल्कुल पक्षियों की तरह लग रहे हैं। बता दें कि इस फूल का नाम यूलान मैगनोलिया (Yulan Magnolia) है। यह यूलान मैगनोलिया के फूल सुंदर पक्षियों की तरह दिखाई देते हैं। यह खासतौर पर चीन में पाया जाता है और इनके बारे में कहा जाता है कि यह फूल शुद्धता के प्रतीक के रूप में देखे जाते हैं।

गुलाबी फूल या फिर पेड़ की टहनियों पर बैठे पक्षियों का झुंड?

मैगनोलिया डेनुडेटा, लिलीट्री या युलन मैगनोलिया मध्य और पूर्वी चीन का मूल निवासी है। इसकी खेती 600 ईस्वी से चीनी बौद्ध मंदिर उद्यानों में की जाती रही है।

यह आँखों का भ्रम है, जो हमें प्रकृति में देखने को मिलता है और यह बहुत अच्छा है। ये विशेष फूल हैं, जो पक्षियों के समान दिखते हैं। फूल यूलन मैगनोलियास के हैं, जो एक प्रजाति है, जो चीन की मूल निवासी है। सुंदर और नाजुक गुलाबी फूल में एक खट्टे सुगंध के साथ-साथ एक बहुत लंबा इतिहास जुड़ा है। ये फूल कई वर्षों से बौद्ध मंदिरों के बगीचों में (लगभग 1,500 वर्षों से) उगाए जा रहे हैं। 

इन फूलों को पवित्रता के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। चीन में तांग राजवंश के दौरान, इन मैगनोलिया को सम्राट के महल के साथ लगाया गया था। युलान मैगनोलिया अक्सर वसंत ऋतु में खिलते हैं और यह छोटे छोटे पक्षियों की तरह दिखते हैं। जैसे ही प्रत्येक फूल की पंखुड़ियाँ खुलने लगती हैं, वे इस ऑप्टिकल भ्रम को (पक्षी की तरह दिखना) खो देते हैं। लेकिन थोड़ी देर के लिए, उनकी एक तस्वीर आपके मन में सवाल उठा सकती है कि क्या यह किसी पक्षी की तस्वीर है?

गुलाबी फूल या फिर पेड़ की टहनियों पर बैठे पक्षियों का झुंड?

यूलन मैगनोलिया फूल :

मैगनोलिया की खेती व्यावसायिक रूप से की जाती है, इसका उपयोग सजावटी फूलों के रूप में किया जाता है। पूरी दुनिया में इसकी लगभग 250 से अधिक प्रजातियां पायी आती है।जिस समय यह फूल पेड़ पर खिलते है, तो ऐसे लगते है, जैसे की गुलाबी पक्षियों का एक समूह पेड़ पर बैठा है। मैगनोलिया के पेड़ की फूलों से लदी तस्वीर वास्तव में अद्भुत होती है।

यूलन मैगनोलिया पेड़ :

मैगनोलिया का पेड़ सुगन्धयुक्त होता है। इसके फूलों से एक मीठी सुगंध आती है। इन पेड़ो का आकर लगभग 10 से 12 मीटर तक होता है, और यह 15 से 18 मीटर के व्यास में फैलते है। मैगनोलिया के पेड़ और छोटे पौधे आसानी से सड़को के किनारे या बगीचों में नजर आ जाते है। यह पेड़ झाड़ीदार होते है।

इस पेड़ को पूरी तरह बढ़ने में लगभग दस साल तक का समय लग जाता है। लेकिन इस पेड़ की शुरुआत से अच्छी देखभाल और कटाई, छटाई की जाए तो यह बहुत जल्दी बड़े हो जाते है। मैगनोलिया के पेड़ का जीवन काल कितना होता है? मैगनोलिया का पेड़ अगर अच्छी मिटटी में लगाया जाए, तो यह लगभग 100 साल से ज्यादा दिन तक जीवित रह सकता है।

मैगनोलिया फूल या पक्षी? देखकर आप भी दंग रह जाएंगे

मैगनोलिया फूल के रंग

मैगनोलिया फूल अलग अलग रंगो का होता है।
  • बैंगनी मैगनोलिया 
  • पीला मैगनोलिया 
  • लाल मैगनोलिया 
  • गुलाबी मैगनोलिया
कुदरत की खूबसूरत कलाकारी है यूलान मैगनोलिया फ्लावर

मैगनोलिया फूल का उपयोग और फायदे 

  • मैगनोलिया के फूल और छाल में कई ऐसे तत्व पाए जाते है, जो की मानव शरीर के मसूड़ो के लिए फायदेमंद होते है। यह मसूड़ो में होने वाली समस्यांओ के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
  • चीनी परम्पराओं के अनुसार मैगनोलिया से बनी आयुर्वेदिक ओषधियाँ खांसी और कफ की समस्यांओ को दूर करने में फायदेमंद होती है।
  • मैगनोलिया त्वचा सम्बन्धी रोगो के लिए भी फायदेमंद होता है।
  • मैगनोलिया पाचन तंत्र को मजबूत करने में भी फायदा करता है।

English Translate

Yulan Magnolia Flowers Look Like Beautiful Birds

Magnolia denudata, the lilytree or Yulan magnolia is native to central and eastern China. It has been cultivated in Chinese Buddhist temple gardens since 600 AD. 

We all love a good trick of the eye. There is one optical illusion that has been brought to us courtesy of Mother Nature. And it’s pretty cool! These particular flowers also happen to look very similar to birds.

मैगनोलिया फूल या पक्षी? देखकर आप भी दंग रह जाएंगे

The flowers are those of the Yulan magnolias, a species that is native to China. The beautiful and fragile pink flower has a citrus scent, as well as a very long history. These flowers date back many, many years – having been raised for almost 1,500 years in the gardens of Buddhist temples. These flowers are seen as a symbol of purity. During the Tang Dynasty in China, these magnolias were planted along the emperor’s palace.

The Yulan magnolias will often bloom in the springtime. And it turns out that when their blossoms appear, they have an appearance of looking like tiny little birds. They lose this optical illusion as soon as the petals of each blossom start to open up. But for a little while, a photo of them could have you questioning if it’s a photo of a bird.

प्रकृति के अनोखे रंग : चिडियों की आकृति वाले फूल

Yulan Magnolia Flowers:

Magnolia is cultivated commercially, it is used as an ornamental flower. There are more than 250 species of it all over the world. When this flower blooms on the tree, it looks as if a group of pink birds is sitting on the tree. The flower-laden picture of a magnolia tree is truly amazing.

Yulan Magnolia Trees:

Magnolia tree is fragrant. A sweet fragrance emanates from its flowers. The size of these trees is about 10 to 12 meters, and it spreads in the diameter of 15 to 18 meters. Magnolia trees and small plants are easily seen along roadsides or in gardens. This tree is bushy.

It takes about ten years for this tree to grow fully. But from the beginning of this tree, if good care is taken and harvesting, pruning is done, then it grows very quickly. What is the life span of a Magnolia tree? If planted in good soil, Magnolia tree can live for more than 100 years.

magnolia flower colors

Magnolia flowers are of different colors.

  • purple magnolia
  • yellow magnolia
  • red magnolia
  • pink magnolia
कुदरत की खूबसूरत कलाकारी है यूलान मैगनोलिया फ्लावर

Uses and Benefits of Magnolia Flowers

  • Many such elements are found in the flower and bark of Magnolia, which are beneficial for the gums of the human body. It is very beneficial for gum problems.
  • According to Chinese traditions, Ayurvedic medicines made from magnolia are beneficial in relieving cough and phlegm problems.
  • Magnolia is also beneficial for skin related diseases.
  • Magnolia also benefits in strengthening the digestive system.
प्रकृति के अनोखे रंग : चिडियों की आकृति वाले फूल

"प्रकृति की सुंदरता " (A things of beauty is a joy forever)

 "प्रकृति की सुंदरता" 

आप सभी को पता है कि हम जिस धरती पर रहते हैं, वह सबसे सुंदर गृह है। हरियाली युक्त सुंदर और आकर्षक है। कुदरत हमारी सबसे अच्छी साथी होती है। जो हमें इस धरती पर जीवन जीने के लिए सभी संसाधन उपलब्ध कराती है। प्रकृति हमें सांस लेने के लिए हवा, पीने के लिए पानी और खाने के लिए खाना और रहने के लिए जमीन देती है। प्रकृति हमारे जीवन के लिए अति महत्वपूर्ण संसाधन है। पेड़ - पौधे, पशु - पक्षी के सब हमारे जीवन को बेहतर करने के लिए आवश्यक है। परंतु प्रकृति का अभिशाप प्रकृति बिगाड़ने वाले होते हैं और यह कोई और नहीं हम स्वयं हैं।

"प्रकृति की सुंदरता " (A things of beauty is a joy forever)

सूरज की तपती गर्मी को लगातार ,ग्रहण करने की वजह से आज हमारी पृथ्वी दिनों दिन गर्म होती जा रही है।  जिसकी वजह से कार्बन डाई ऑक्साइड का स्तर बढ़ता जा रहा है। इसके लिए लोगों को इसे कारण और प्रभाव का पता होना चाहिए, जिससे इसका समाधान हो सके। आज पृथ्वी पर प्रकृति का अभिशाप वायुमंडल के रूप में ग्लोबल वार्मिंग है, जिसकी वजह से धरती का तापमान बढ़ रहा है। ऐसा आकलन किया जा रहा है कि अगले 50 से 100 साल में धरती का तापमान इतना बढ़ जाएगा कि जीवन के लिए इस धरती पर कई मुश्किलें उत्पन्न हो जाएंगी, जो की कार्बन डाई आक्साइड की वजह से है।

जब पाप अधिक बढ़ता है, तो धरती कांपने लगती है। यह भी कहा गया है कि धरती घर का आंगन है। आसमान छत है, सूर्य चंद्र ज्योति देने वाले दीपक है, महासागर पानी के मटके हैं और पेड़ - पौधे आहार के साधन। हमारा प्रकृति के साथ किया गया कुछ वादा है - हम जंगल को नहीं उजाड़ेंगे, प्रकृति से आनावश्यक खिलवाड़ नहीं करेंगे,  ऐसी फसलें नहीं उगायेगा जो धरातल का पानी सोख लेती है, बात बे बात पहाड़ों की कटाई नहीं करेंगे।

"प्रकृति की सुंदरता " (A things of beauty is a joy forever)

स्मरण रखिए, प्रकृति किसी के साथ भेदभाव और पक्षपात नहीं करती। इसके द्वार सबके लिए समान रूप से खुले हैं। लेकिन जब हम प्रकृति से अनावश्यक खिलवाड़ करते हैं, तब उसका गुस्सा भूकंप, सूखा ,बाढ़, सैलाब, तूफान की शक्ल में हमारे सामने आता है, फिर लोग काल के गर्त में समा जाते हैं।

कालिदास की शकुंतला: कालिदास की शकुंतला में शकुंतला जो वन में पली-बढ़ी होती है, जब विदा होकर ससुराल जाती है, तो ऋषि प्रकृति का मानवीकरण करते हुए कहते हैं कि - "देवी देवताओं से भरे वन वृक्षों को शकुंतला जल पिलाये बिना स्वयं जल नहीं पीती थी, जो आभूषण प्रिय होने पर भी स्नेह के कारण तुम्हारे कोमल पत्तों को नहीं तोड़ती थी,जो तुम्हारे पुष्पित होने के समय उत्सव मनाती थी, वह शकुंतला अपने पति के घर जा रही है। तुम सब मिलकर इसे विदा करो।"

English Translate

"beauty of nature"

You all know that the earth we live on is the most beautiful planet. The greenery is beautiful and attractive. Nature is our best friend. Which provides us all the resources to live life on this earth. Nature gives us air to breathe, water to drink and food to eat and land to live in. Nature is a very important resource for our life. Trees - plants, animals - birds are all necessary to improve our life. But the curses of nature are nature spoilers and it is none other than we ourselves.

"प्रकृति की सुंदरता " (A things of beauty is a joy forever)

Due to continuous absorption of the scorching heat of the sun, today our earth is getting hot day by day. Due to which the level of carbon dioxide is increasing. For this people should know its cause and effect, so that it can be resolved. Today the curse of nature on earth is global warming in the form of atmosphere, due to which the temperature of the earth is increasing. It is being estimated that in the next 50 to 100 years, the temperature of the earth will increase so much that many problems will arise for life on this earth, which is due to carbon dioxide.

"प्रकृति की सुंदरता " (A things of beauty is a joy forever)

When sin abounds, the earth trembles. It is also said that the earth is the courtyard of the house. The sky is the roof, the sun moon is the lamp giving light, the oceans are the pots of water and the trees and plants are the means of food. We have some promise made with nature - we will not destroy the forest, will not play with nature unnecessarily, will not grow such crops which absorbs the water of the surface, will not cut down the mountains unnecessarily.

Remember, nature does not discriminate and favor anyone. Its doors are equally open to all. But when we play with nature unnecessarily, then its anger comes in front of us in the form of earthquake, drought, flood, inundation, storm, then people get absorbed in the pit of time.

"प्रकृति की सुंदरता " (A things of beauty is a joy forever)

Shakuntala of Kalidasa: Shakuntala, who grew up in the forest, when she leaves and goes to her in-laws' house, the sage personifies nature and says - "Water herself without giving Shakuntala water to the forest trees full of gods and goddesses." Shakuntala is going to her husband's house, who used to celebrate when you were flowering, who did not pluck your tender leaves because of affection even though she loved ornaments.

सूरज की पहली किरण (First ray of sun)
बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Purnima)
कोयल (Cuckoo)  
आसमाँ (Asman)
Mountain (पर्वत)
पेड़ का दिल  (The Heart of the Tree)
"प्रकृति की सुंदरता " (A things of beauty is a joy forever)
पर्यावरण (Environment)
पीपल, बरगद,पकड़ी और नीम
गिलहरी  (Squirrels, Gilhari)
बरसात - कहीं हर्ष कहीं विषाद / ठण्ड की बरसात 

बरसात - कहीं हर्ष कहीं विषाद / ठण्ड की बरसात

 ठण्ड की बरसात 

जीवन के आरंभ से ही मनुष्य सुख और दुःख की कश्ती पर सवार होता है। कभी यह कश्ती तूफानों के बीच हिचकोले खाते हुए चलती है और कभी शांत,मनोहारी वातावरण में,मृदुल पवन के मंद मंद झोकों के साथ सुख की अनुभूति करते हुए ।

मानव जीवन की यही विडंबना है कि कहीं दिन ढलता है, तो कहीं उजाले होते हैं। यहां सुख और दुःख समय और परिस्थितियों पर निर्भर होते हैं। कुछ पंक्तियाँ आते जाते मौसम की। 

बरसात - कहीं हर्ष कहीं विषाद / ठण्ड की बरसात

कल सारी रात बरसात हुई 

कुछ पुरानी खट्टी मीठी यादों को ताज़ा कर गई..

फूलों की कुछ बूंदों से मुलाकात हुई 

कुछ पुरानी दीवारों में सीलन पड़ गई..

कुछ पुराने अजीज रिश्ते पीछे छूट गए

तो कुछ नये रिश्तों की भी शुरुआत हो गई..

इक चुपचाप से कमरे की छत पर शोर हुआ रिमझिम का

इक चुपचाप से दिल के गुनगुनाने की आवाज हुई..

आधी रात को चुल्हे पर चाय बनाई हमनें 

उसकी यादों से भी बहुत देर तलक बात हुई..

कोई जगता रहा बारिश की खुशी में रात भर

किसी की नींद बारीश की वजह से खराब हो गई..

Barsaat Quotes /बरसात Quotes /बरसात शायरी

Barsaat Quotes /बरसात Quotes /बरसात शायरी


पीपल (Pipal ), बरगद (Bargad), नीम (Neem)

 पीपल, बरगद,पकड़ी और नीम

क्या कभी आपने सोचा हैं की इस देश में पीपल (Pipal ), बरगद (Bargad), नीम (Neem) आदि पेड़ों को क्यो लगवाना बंद किया आइये जाने आज का ज्ञान .

पिछले 68 सालों में पीपल, बरगद,पकड़ी और नीम के पेडों को सरकारी स्तर पर लगाना बन्द किया गया है, जबकि पीपल (Sacred fig) कार्बन डाई ऑक्साइड का 100% अवशोषण करता है, बरगद (Banyan) 80% और नीम (Neem) 75 % , फिर भी हमलोगों ने इन पेड़ों से दूरी बना ली तथा इसके बदले विदेशी यूकेलिप्टस को लगाना शुरू कर दिया जो जमीन को जल विहीन कर देता है। आज हर जगह यूकेलिप्टस, गुलमोहर और अन्य सजावटी पेड़ो ने ले ली है। अब जब वायुमण्डल में रिफ्रेशर ही नही रहेगा तो गर्मी तो बढ़ेगी ही और जब गर्मी बढ़ेगी तो जल भाप बनकर उड़ेगा ही। हर 500 मीटर की दूरी पर एक पीपल का पेड़ लगाया जाये तो आने वाले कुछ साल भर बाद प्रदूषण मुक्त हिन्दुस्तान होगा। वैसे एक और बात, पीपल के पत्ते का फलक अधिक और डंठल पतला होता है, जिसकी वजह शांत मौसम में भी पत्ते हिलते रहते हैं और स्वच्छ ऑक्सीजन देते रहते हैं। पीपल को वृक्षों का राजा कहते है। 

पीपल (Pipal ), बरगद (Bargad), नीम (Neem)

अब करने योग्य कार्य

इन जीवनदायी पेड़ों को ज्यादा से ज्यादा लगायें तथा यूकेलिप्टस पर बैन लगाया जाय। वैसे बैन लगाना तो सरकार का काम है, पर आप हम ये तो कर ही सकते हैं कि इन विदेशी वृक्षों को बढ़ावा देने की जगह पीपल, बरगद और नीम को बढ़ावा दें। हम सब मिलकर अपने "हिंदुस्तान" को प्राकृतिक आपदाओं से बचाएँ. बहुत कुछ न सही पर कुछ तो कर ही सकते हैं। जिन लोगों के पास भी सुविधा है, जमीन है वे इस विषय पर अवश्य सोचें। सबके छोटे छोटे प्रयास से ही एक बड़ा योगदान होगा पर्यावरण को बचाने में।  

पीपल (Pipal ), बरगद (Bargad), नीम (Neem)

पर्यावरण के लिए और स्वास्थ्य के लिए 

अपने व अपने बच्चों के जन्मदिन पर पीपल ,नीम, बरगद का पौधा जरूर लगायें। राजीव दीक्षित अपने भारत के लिए इसी तरह के कार्य चाहते थे आइए उनके कार्यों में हिस्सेदार बने। हमारी बहुत बड़ी समस्या है कि जो चीजें मुफ्त है हम उसकी कदर नहीं करते जैसे हवा, पानी। और जब यह पानी बोतल में और ऑक्सीजन सिलिंडर में बंद होके मिलता तब हमें इसकी कीमत पता चलती। कोरोना के दूसरे लहर में ऑक्सीजन की कमी से आम जनता के साथ - साथ सरकारी संस्था का भी इस ओर ध्यान गया। जब ऑक्सीजन की कमी हुई और सांसे टूटने लगी तो लोगों को प्राणवायु देने वाले पौधों की सुध आई। गांव में लगी नीम दवा बन गई, पत्तियों का काढ़ा पी कर लोगों ने मौसमी बीमारियों से निजात पाई, पत्तियों को सुलगा कर मच्छरों और अन्य कीट - पतंगों से निजात मिली।

पीपल (Pipal ), बरगद (Bargad), नीम (Neem)

कोई जरूरी नहीं है कि वृक्षारोपण दिवस और पर्यावरण दिवस के अवसर पर ही पेड़ पौधे लगाए जाएं। यह तो किसी भी बहाने से लगाया जा सकता है। चाहे वह अवसर जन्मदिन, सालगिरह, किसी विशेष उपलब्धि, त्यौहार या अन्य अवसरों पर। ऐसे अवसरों पर वृक्षारोपण कर इन को यादगार बनाएं। मानव जीवन के साथ-साथ पशु पक्षियों के लिए भी वन क्षेत्र बढ़ाना बेहद जरूरी है। सभी को इसके महत्व को समझना चाहिए और पेड़ पौधों संरक्षण और वृक्षारोपण करना चाहिए। पेड़ पौधों की संख्या कम होने से तरह-तरह की बीमारियां तो होती ही है साथ ही भूजल स्तर भी नीचे गिरता है, जिसे बचाना भी आवश्यक है।

उम्मीद है आपको यह छोटा सा आर्टिकल पसंद आया होगा। इसको अधिक से अधिक लोगों तक पहुचायें और इसपर अमल करें। जब भी जहाँ भी अवसर हो वृक्ष लगायें। 

नीम के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

पर्यावरण (Environment)

पर्यावरण (Environment)

              सदियों से मनुष्य पर्यावरण के साथ सामंजस्य बिठाता आया है और इससे उसे सकारात्मक परिणाम भी प्राप्त हुए हैं। पर्यावरण से हमें  अगणित लाभ प्राप्त होते हैं।मनुष्य अपने सम्पूर्ण जीवन काल में भी उनका ऋण नहीं चुका सकता। इतिहास गवाह है कि जब जब मनुष्य ने पर्यावरण के साथ खिलवाड़ करने की चेष्टा की उसे सदैव मुँह की ही खानी पड़ी। पर्यावरण इस चराचर जगत के सभी प्राणियों को चलायमान रखता है, उन्हें जीवंत रखता है। पृथ्वी के जीवन की भिन्न- भिन्न परिस्थितयों में यह तादात्म्य स्थापित करता है।मानव के जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं रोटी, कपड़ा, मकान इत्यादि को यह पूरा करता है। इंसान का पूरा जीवन पर्यावरण पर ही निर्भर होता है। पृथ्वी के विभिन्न जीवन चक्रों को यह बनाये रखता है। पृथ्वी पर विद्यमान प्राकृतिक सौंदर्य का यह अद्भुत स्त्रोत है। धरती के समस्त जीवों और वातावरण के मध्य संतुलन आवश्यक होता है। यदि यह असंतुलित हो जाए तो इसका मानव जीवन पर बहुत गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
पर्यावरण (Environment)

           आजकल का सभ्य समाज विकास और आधुनिकता के पीछे भाग रहा है। विकास के नाम पर वह प्रकृति का जमकर दोहन कर रहा है। विकास और आधुनिकता की इस अंधी दौड़ में पर्यावरण बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। मशीनों और तकनीक पर निर्भरता से मनुष्य का जीवन कुछ हद तक सुगम भले ही हुआ है, लेकिन पर्यावरण पर इसके दूर गामी परिणाम अंततः भयावह ही होंगें। आइये हम सब मिलकर पर्यावण की रक्षा करें ।इसके लिए ज्यादा वृक्ष लगाएं, प्लास्टिक का उपयोग कम  से कम करें, प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करें, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें, वर्षा जल संचयन करें और लोगों को इसके बारे में जागरूक करें।
पर्यावरण (Environment)
"आओ हम सब मिलकर
         इक सुंदर सा जहां बनाएं
 इंसानी तहज़ीब की रक्षा में
         हां, अब पर्यावरण बचाएं।"❤

 English Translate

Environment

   The environment gives us countless benefits that we can’t repay our entire life. The environment has helped us and other living beings to flourish and grow from thousands of years. We truly cannot understand the real worth of the environment. It plays a vital role in keeping living things healthy in the environment.
It maintains the ecological balance that will keep check of life on earth. It provides food, shelter, air, and fulfills all the human needs whether big or small. Moreover, the entire life support of humans depends wholly on the environmental factors. In addition, it also helps in maintaining various life cycles on earth. Most importantly, our environment is the source of natural beauty and is necessary for maintaining physical and mental health.
पर्यावरण (Environment).
         The environment regulates various natural cycles that happen daily. These cycles help in maintaining the natural balance between living things and the environment. Disturbance of these things can ultimately affect the life cycle of humans and other living beings.
The increasing rate of modernization and urbanization has taken a heavy toll on environment. Due to modernization in the lifestyle of people, the condition of environment is degrading day by day. Where on one hand, technology is doing wonders to bring more comfort in life, environment on the other hand is facing all the negative repercussions.
पर्यावरण (Environment)
1. Grow more Trees
2. Say No to Plastics
3. Use Alternative Sources of Energy
4. Use Public Transport
5. Do not Litter your Surroundings
6. Save Natural Resources
7. Rainwater Harvesting
8. Recycle
9. Spread Awareness       
  Lets start an affair,
  Taking steps upstair,
  Making people aware,
  For the environment welfare,
  Planting trees with care,
                                                              Making clean atmosphere.              
                                    
पर्यावरण (Environment)

"प्रकृति की सुंदरता " (A things of beauty is a joy forever)

"प्रकृति की सुंदरता"

"प्रकृति की सुंदरता " (A things of beauty is a joy forever)
कभी आप शांतचित्त होकर प्रकृति की अनुपम सुंदरता का अवलोकन कीजिये। प्रकृति सम्पूर्ण जगत के लिए ईश्वर द्वारा प्रदत्त एक अनमोल उपहार है।इसे महसूस किया जा सकता है।प्रकृति की सुंदरता अलौकिक, अतुल्य और असीमित है। कभी उषाकाल में उठकर उदित होते सूर्य की कोमल रश्मियों को अपने हृदय में आत्मसात कीजिये,पक्षियों के कलरव का मधुर संगीत सुनिए।सूर्यास्त की अप्रतिम सुषमा को देखिए।।शीतल चंद्रमा की रोशनी में ,अम्बर में टिमटिमाते सितारों को निहारिये। कभी नीले नीले अम्बर को यूं ही देखिए। वर्षा के बाद धूप खिलने पर सतरंगा इंद्रधनुष जब आसमान में खिलता है तो यकीन मानिए उससे सुंदर और न्यारा कुछ भीनही। कभी महासागर में लहराती,बलखाती,उत्ताल तरंगों को देखिए,मन मे रोमांच उत्पन्न होगा।
"प्रकृति की सुंदरता " (A things of beauty is a joy forever)
    प्रकृति की सुंदरता बिना ऋतुराज बसंत की चर्चा के अधूरी रहेगी। बसंत ऋतु में पूरी प्रकृति ही मतवाली हो जाती है। सम्पूर्ण प्रकृति दुल्हन की तरह श्रृंगार करती है। पेड़ों में नई कोपलें फूटती हैं, तो  उसकी पत्तियां अपने रंग बदलकर उसे रिझाती हैं। प्रकृति हमे प्रेम,शांति,सरलता,और आशा के साथ जीवन जीने का मंत्र प्रदान करती है। परंतु अभागा मानव आज  तथाकथित विकास के नाम पर प्रकृति के साथ ही खिलवाड़ पर उतारू है।प्राकृतिक असंतुलन का खामियाजा भी वह भुगत रहा है। सर्व शक्तिमान ईश्वर ने इतनी सुंदर प्रकृति हमे प्रदान की है।आओ हमसब मिलकर उसकी रक्षा करें।हम प्रकृति के साथ समन्वय स्थापित करके जीना सीखें और जीवन का असली आनंद लें।

“Beauty of Nature”

"प्रकृति की सुंदरता " (A things of beauty is a joy forever)
            As for the theme, today's blog is all about the beauty of nature. ‘Nature is a god gift to this world. Its beauty is not only seen, hear or smell by us, it’s a feeling that can’t be erased. No man made beauty replaces the natural beauty. Beauties of nature are unlimited.
             Nature give us many valuable and important things. Every early morning is with a beautiful sunrise. A beautiful sunset nearby oceans, seas, beautiful night with twinkling stars , a beautiful clear blue sky and how can I forget about rainbows . The dew drops on the blades of grass look like iridescent pearls. The silvery moon and the twinkling stars bedeck the sky. The roaring waves in the vast ocean and the lakes which look like sheets of water add to the glorious treasure.
     Even if each season comes with its beauty, autumn has an extraordinary place in nature’s art. Beautiful and clear colors on the trees like bright yellow, browns. Many people love autumn for the changing colors of the leaves. Trees that were once green explode into beautiful hues of orange, red and gold.
"प्रकृति की सुंदरता " (A things of beauty is a joy forever)
       Nature teaches man the lesson of peace, innocence, purity, love, harmony, simplicity, hope and faith in the glory of God. God, as the divine artist, has created beautiful nature to live in and enjoy it.

 "नीले नभ का आँचल
            चाँद सूरज का ताज
सोंधी खुशबू माटी की
           रचती नदी इक साज
पर है वो  खामोश
              सहमी डरी  है आज
हसरतों का प्यासा इंसान
       कर न दे इसे बर्बाद ।।"

 

पेड़ का दिल (The Heart of the Tree)

पेड़ का दिल (The Heart of the Tree)पेड़ का दिल  (The Heart of the Tree)

      पेड़ लगाने वाला केवल पेड़ ही नहीँ लगाता है। पेड़ लगाने वाला सूर्य और आकाश दोनों के लिए एक मित्र भी बना देता है।ठंडी हवा के झोकों में पेड़ की पत्तियां लहराते हुए झंडे के समान हिलती हैं और इसके तने ऊंची मीनारों जैसे। पेड़ लगाने वाला आकाश के समीप एक घर का निर्माण  कर लेता है। पेड़ पक्षियों के लिए एक सुरक्षित घर होते हैं जिसके तनों मे बैठकर प्रकृति और ब्रह्मांड के साथ तारतम्य  जोड़कर वे सुंदर गान गाती हैं। पेड़ों से वर्षा होती है, जो मानव तथा ज़मीन के लिए लाभदायक होती है। अपनी नई कोपलों के सृजन के लिए बीज भी बोये जाते हैं।  भविष्य के लिए   फसलें भी  उगाई जाती हैं। पेड़ लगाना पुण्य का कार्य है और पूरे विश्व को और भी अधिक अच्छा बनाता है। पेड़ लगाने से हम परमात्मा के फरिश्ते की तरह हो जाते हैं और संसार  के भविष्य को और भी अधिक बेहतर बना सकते हैं।

पेड़ का दिल  (The Heart of the Tree)

The Heart of the Tree

          He who plants a tree does not plants just a trees. One who plants a tree plants a friend for sun and sky and provides a companion to both. Leaves of branches of the tree are like a flag fluttering in the cool breeze and its trunk is like into a high towering. One who plants a tree plants a home nearer to the sky. The tree provides a safe home to the bird who can rest on its branches and sing songs which are notes in music of Heaven's harmony.  The planter plants cool shade and and tender rain for both human beings and soil. The planter of a tree also plants seeds and bud for the upcoming generation. Planting a tree ensure a  harvest for the future generation. The planter of tree does not only plants sources for future in the form of sap and leaves and wood but also plants his virtues within the tree. By planting a tree, one plants the forethought of doing some good to the the citizens and making the world a better place. Planting a tree allows us to act as an agent of god's blessing and also enables us to bless the world in a godlike manner by creating a better future and leaving the world in a little better shape.

"A nation's growth from sea to sea 
Stirs in his heart who plants a tree."❤
पेड़ का दिल  (The Heart of the Tree)

"पृथ्वी के श्रृंगार हैं पेड़
     सृष्टि के उपहार है  पेड़
जीवन की मुस्कान हैं पेड
  औषधियों की खान हैं पेड़
आओ मिलकर पेड़ लगाएं
धरती माँ को स्वर्ग बनाएं।।"❤

Mountain (पर्वत )

Mountain (पर्वत )Mountain (पर्वत )


 पर्वतों की ऊंची ऊंची चोटियां सदैव से ही मनुष्य के आकर्षण का केंद्र रही हैं । अगर इन चोटियों पर हिम का भी वास हो तो फिर क्या कहने। प्रातः काल जब भगवान भास्कर मुस्कुराकर अपनी सुनहरी प्रथम रश्मियां इस पर डालते हैं तो उस वक्त इसकी  अद्भुत छटा देखते ही बनती है। पर्वतों के आंचल में ही एक तरफ कल-कल करती नदियां खेलती हैं तो दूसरी तरफ हिम भी यहां ठिठोली करती है। कितने ही आंधी तूफान आ जाएं पर पर्वत अपनी जगह पर अविचल और अडिग खड़ा  मुस्कुराता रहता है । पर्वत सदियों से हमारे सौंदर्य और संरक्षण के प्रतीक हैं। कभी आप पर्वतों के सौंदर्य को पास से निहारिये ,आप विश्वास मानिए उनसे आप नजरें नहीं हटा पाएंगे ।

Mountain (पर्वत )

 चार पंक्तियाँ पर्वतों से शिक्षा के रूप में -
 " इतने ऊंचे उठो कि
        छू लो पर्वत की चोटियां
 रहो शांत और स्थिर सदा
       हराओ  संकट की आंधियां"।❤

Coronavirus: mountain

English Translate

Mountain

  The high peaks of the mountains have always been the center of attraction of man.  What to say if snow is also inhabited on these peaks.  In the morning, when Lord Bhaskar smiles and puts his golden first rashi on it, then at that time its amazing shade is made.  On the one side of the mountains, only the rivers play tomorrow and tomorrow, on the other side, the snow also chills here.  No matter how many storms come, the mountain keeps smiling and standing steadfast in its place.  


Mountain (पर्वत )

Mountains have been a symbol of our beauty and protection for centuries.  Sometimes you admire the beauty of the mountains from near, you believe that you will not be able to remove eyes from them.


  Four lines as education from the mountains -
  "Get up so high that
         Touch the mountain peaks
  Stay calm and steady forever
        Beat the storms of distress ".