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साल के अंतिम गुजरते दिन पर शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ की चन्द अनमोल पंक्तियॉ...

जिस-जिस से पथ पर स्नेह मिला

साल के अंतिम गुजरते दिन पर शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ की चन्द अनमोल पंक्तियॉ...

जिस-जिस से पथ पर स्नेह मिला, उस-उस राही को धन्यवाद !!

जीवन अस्थिर अनजाने ही, हो जाता पथ पर मेल कहीं,

सीमित पग डग, लम्बी मंज़िल, तय कर लेना कुछ खेल नहीं

दाएँ-बाएँ सुख-दुख चलते, सम्मुख चलता पथ का प्रमाद 

जिस-जिस से पथ पर स्नेह मिला, उस-उस राही को धन्यवाद !!


साँसों पर अवलम्बित काया, जब चलते-चलते चूर हुई,

दो स्नेह-शब्द मिल गये, मिली नव स्फूर्ति, थकावट दूर हुई

पथ के पहचाने छूट गये, पर साथ-साथ चल रही याद 

जिस-जिस से पथ पर स्नेह मिला, उस-उस राही को धन्यवाद... !!

साल के अंतिम गुजरते दिन पर शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ की चन्द अनमोल पंक्तियॉ...

इस विशद विश्व-प्रहार में - शिव मंगल सिंह 'सुमन'

इस विशद विश्व-प्रहार में 

Rupa Oos ki ek Boond
"ये बेफिक्र सी सुबह,
और गुनगुनाहट शामों की..

ज़िन्दगी खूबसूरत है अगर 
आदत हो मुस्कुराने की..❣️❣️"

इस विशद विश्व-प्रहार में 

किसको नहीं बहना पड़ा 

सुख-दुख हमारी ही तरह, 

किसको नहीं सहना पड़ा 

फिर व्यर्थ क्यों कहता फिरूँ, 

मुझ पर विधाता वाम है, 

चलना हमारा काम है। 


मैं पूर्णता की खोज में 

दर-दर भटकता ही रहा 

प्रत्येक पग पर कुछ न कुछ 

रोड़ा अटकता ही रहा 

निराशा क्यों मुझे? 

जीवन इसी का नाम है, 

चलना हमारा काम है। 


साथ में चलते रहे 

कुछ बीच ही से फिर गए 

गति न जीवन की रुकी 

जो गिर गए सो गिर गए 

रहे हर दम, 

उसी की सफलता अभिराम है, 

चलना हमारा काम है। 


"शिव मंगल सिंह 'सुमन'"

Rupa Oos ki ek Boond

"भरोसा न करना सुनी सुनाई बातों पर
उसूल जैसे भी हों बदल जाते हैं हालातों पर.
.❣️❣️"

Sunday | इतवार ...मिट्टी की महिमा


इतवार (Sunday)

Sunday | इतवार
❤️❤️कीमत दोनों की चुकानी पड़ती हैै, 
अधिक बोलने की भी और 
अधिक चुप रहने की भी...❤️❤️

मिट्टी की महिमा

निर्मम कुम्हार की थापी से 
कितने रूपों में कुटी पिटी, 
हर बार बिखेरी गई किंतु 
मिट्टी फिर भी तो नहीं मिटी।

आशा में निश्चल पल जाए,
छलना में पड़कर छल जाए,
सूरज दमके तो तप जाए,
रजनी ठुमके तो ढल जाए। 

यूं तो बच्चों की गुड़िया सी भोली, 
मिट्टी की हस्ती क्या,
आंधी आए तो उड़ जाए, 
पानी बरसे तो गल जाए।

फसलें उगती, फसलें कटती,
लेकिन धरती चिर उर्वर है, 
सौ बार बने, सौ बार मिटे, 
लेकिन मिट्टी अविनश्वर है, 
मिट्टी गल जाती पर, 
उसका विश्वास अमर हो जाता है।

--शिव मंगल सिंह 'सुमन'

Sunday | इतवार
❤️❤️एक मिनट में जिंदगी नहीं बदलती..
 पर एक मिनट में सोच कर लिया हुआ 
फैसला ...
पूरी जिंदगी बदल देता है❤️❤️