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श्री भरत मिलाप मंदिर, चित्रकूट || Shri Bharat Milap Mandir, Chitrakoot ||

श्री भरत मिलाप मंदिर, चित्रकूट (Shri Bharat Milap Mandir, Chitrakoot)

भरत मिलाप मंदिर (Bharat Milap Mandir) मध्यप्रदेश के चित्रकूट में स्थित है। मंदिर कामदगिरि परिक्रमा मार्ग के रास्ते में पड़ता है। इस मंदिर में भगवान श्री राम और भरत जी, लक्ष्मण जी और शत्रुघ्न जी के चरण के चिन्ह देखने को मिलते हैं, जो चट्टानों पर बने है। यहां पर माता सीता और मां कौशल्या के चरण चिन्ह भी देखने को मिलते हैं।

श्री भरत मिलाप मंदिर, चित्रकूट || Shri Bharat Milap Mandir, Chitrakoot ||

भरत मिलाप मंदिर (Bharat Milap Mandir) को उस स्थान के रूप में जाना जाता है, जहां भरत ने भगवान राम से उनके वनवास के दौरान मुलाकात की और उन्हें अयोध्या लौटने और राज्य पर शासन करने के लिए मनाया। किवदंतीओं के अनुसार दोनों भाइयों की मुलाकात इतनी भावभीनी थी कि इससे चित्रकूट की चट्टानों और पहाड़ों तक के आंसू बह निकले। कई चमत्कारों की पहाड़ी के रूप में जानी जाने वाली इस जगह के बारे में कहा जाता है कि राम जी और भरत जी का प्रेम देखकर यहां की चट्टानें भी पिघल गई थी और उनके चरण चिन्ह चट्टानों में उभर गए थे। यहां भगवान राम और उनके भाइयों के पैरों के निशान हैं, जो आज भी प्रतिवर्ष हजारों भक्तों द्वारा देखें और पूजे जाते हैं।

श्री भरत मिलाप मंदिर, चित्रकूट || Shri Bharat Milap Mandir, Chitrakoot ||

भरत मिलाप मंदिर (Bharat Milap Mandir) के बाहर ही भगवान श्री राम, सीता मां, लक्ष्मण जी और भरत जी की प्रतिमाएं हैं, जो बहुत ही खूबसूरत लगती हैं। मंदिर के प्रवेश द्वार पर लिखा है कि आप यहां दर्शन करने जरूर आएं क्योंकि यह मंदिर बहुत ही प्राचीन है और परिक्रमा मार्ग मंदिर के अंदर से भी होकर जाता है।

भरत मिलाप मंदिर में तुलसीदास जी की प्रतिमा भी देखने को मिलती है। इसके साथ ही मंदिर में भगवान श्री राम, भरत जी की प्रतिमा देखने को मिलती है जिसमें राम जी भरत जी को अपनी चरण पादुका दे रहे हैं। 

English Translate

Shri Bharat Milap Mandir, Chitrakoot

Bharat Milap Mandir is situated in Chitrakoot. The temple falls on the way of Kamadgiri Parikrama Marg. In this temple, the footprints of Lord Shri Ram and Bharat ji, Laxman ji and Shatrughan ji are seen, which are made on the rocks. The footprints of Mata Sita and Kaushalya are also seen here.

श्री भरत मिलाप मंदिर, चित्रकूट || Shri Bharat Milap Mandir, Chitrakoot ||

Bharat Milap Mandir is known to be the place where Bharat met Lord Rama during his exile and persuaded him to return to Ayodhya and rule the kingdom. According to the legends, the meeting of the two brothers was so emotional that even the rocks and mountains of Chitrakoot shed tears. Known as the hill of many miracles, it is said about this place that seeing the love of Ram ji and Bharat ji, the rocks here also melted and their footprints emerged in the rocks. Here are the footprints of Lord Rama and his brothers, which are still seen and worshiped by thousands of devotees every year.

श्री भरत मिलाप मंदिर, चित्रकूट || Shri Bharat Milap Mandir, Chitrakoot ||

Outside the Bharat Milap Mandir, there are statues of Lord Shri Ram, Sita Maa, Laxman ji and Bharat ji, which look very beautiful. It is written at the entrance of the temple that you must come here to visit because this temple is very ancient and the circumambulation path also passes through the inside of the temple.

The statue of Tulsidas ji can also be seen in the Bharat Milap temple. Along with this, the statue of Lord Shri Ram, Bharat ji is seen in the temple, in which Ram ji is giving his foot paduka to Bharat ji.

बड़ी इलायची || Black Cardamom || Badi Elaichi ||

बड़ी इलायची

भारतीय मसालों में बड़ी इलायची का अपना एक खास महत्व है। इसका प्रयोग व्यंजन को स्वादिष्ट और सुगंधित बनाने में किया जाता है। रसोई की शान यह मसाले ही हैं, जो व्यंजनों को स्वादिष्ट बनाते हैं। दुनिया भर में विभिन्न प्रकार के मसालों का प्रयोग किया जाता है। उन्हीं में से एक है - बड़ी इलायची, जिसे काली इलायची के नाम से भी जानते हैं।

इलायची के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

बड़ी इलायची क्या है?

बड़ी इलायची भारत तथा नेपाल के पहाड़ी प्रदेशों में होते हैं। इसका फल तिकोना, गहरे कत्थई रंग का तथा आधा इंच लंबा और बीज छोटी इलायची से कुछ बड़े होते हैं। बड़ी इलायची के सुखाए हुए फल और बीज ही भारतीय तथा अन्य देशों के व्यंजनों में मसाले के रूप में प्रयोग किए जाते हैं।

जानते हैं बड़ी इलायची के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुणों के बारे में

ज्यादातर लोग केवल यह जानते हैं कि बड़ी इलायची का प्रयोग मसाले के तौर पर व्यंजनों को सुगंधित और स्वादिष्ट बनाने के लिए किया जाता है, परंतु इसके साथ ही बड़ी इलायची का औषधीय प्रयोग भी किया जाता है। आयुर्वेद में बड़ी इलायची पित्त शांत करने वाली, नींद लाने वाली, भोजन में रुचि पैदा करने का काम करती है। यह हृदय एवं लिवर को स्वस्थ बनाती है, भूख को बढ़ाती है, भोजन को पचाती है, मुंह के बदबू को भी दूर करती है।

सिर दर्द होने पर 

बड़ी इलायची को पीसकर ललाट पर लेप करने से तथा बीजों को पीसकर सूंघने से सिर दर्द ठीक होता है।

मुंह में छाले होने पर

बड़ी इलायची को पीसकर शहद में मिलाकर मुंह के छालों पर लगाने से मुंह के छाले ठीक होते हैं।

दांत दर्द होने पर

लौंग के तेल में बराबर मात्रा में इलायची मिलाकर दांतों पर मलने से दांत दर्द ठीक होता है।

ज्यादा लार आने की समस्या

यदि मुंह में अधिक थूक आता हो या लार बनती हो, तो बड़ी इलायची और सुपारी को बराबर मात्रा में पीसकर 1 से 2 ग्राम मात्रा में चूसते रहने से थूक कम बनता है और लार बहना बंद हो जाता है।

ज्यादा हिचकी आने की समस्या

यदि किसी को ज्यादा हिचकी आ रही है, तो एक कप पानी में दो बड़ी इलायची को पीसकर उबाल लें। आधा बच जाने पर छान कर ठंडा होने पर पीने से हिचकी में लाभ होता है।

पाचन शक्ति बढ़ाने में

2 ग्राम सौंफ के साथ बड़ी इलायची के 8-10 बीजों का सेवन करने से पाचन शक्ति अच्छी होती है।

पेट में गैस बनने पर

बड़ी इलायची के 5 ग्राम बीज चूर्ण को काले नमक के साथ सेवन करने से पेट दर्द में और पेट के गैस में लाभ होता है।

उल्टी रोकने के लिए

बड़ी इलायची और पुदीना को बराबर मात्रा में मिलाकर 2-3 लीटर पानी में उबालकर थोड़ा-थोड़ा सेवन करने से उल्टी बंद हो जाती है।

पेचिश होने पर

1 ग्राम बड़ी इलायची का चूर्ण 10 ग्राम बेलगिरी के साथ मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से पेचिस में लाभ होता है।

पथरी की समस्या

बड़ी इलायची के बीज के चूर्ण में खरबूजा के बीज का मगज और मिश्री मिलाकर 2 - 3 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से पथरी टूट - टूट कर निकल जाती है।

इलायची के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

बड़ी इलायची के नुकसान (Side Effects of Black Cardamom)

सीमित मात्रा में मसालों के तौर पर बड़ी इलायची का कोई नुकसान नहीं होता है, परंतु इसकी अत्यधिक मात्रा कुछ परिस्थितियों में नुकसान पहुंचा सकती हैं।

  • निम्न रक्तचाप वाले व्यक्ति को बड़ी इलायची का सेवन अत्यधिक नहीं करना चाहिए।
  • लो शुगर वाले व्यक्ति को भी बड़ी इलायची का ज्यादा मात्रा में सेवन नहीं करना चाहिए।

मसालों के तौर पर भोजन को स्वादिष्ट और सुगंधित बनाने के लिए इलायची का सेवन अवश्य करें परंतु दवाओं के तौर पर इसका उपयोग करने के लिए किसी उचित डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।

black cardamom

Big cardamom has its own special importance in Indian spices. It is used to make dishes tasty and aromatic. Spices are the pride of the kitchen, which make the dishes delicious. Various types of spices are used around the world. One of them is - big cardamom, which is also known as black cardamom.

इलायची के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

What is black cardamom?

Large cardamom is found in the mountainous regions of India and Nepal. Its fruit is triangular, dark brown in color and half an inch long and the seeds are slightly larger than small cardamom. The dried fruits and seeds of large cardamom are used as a spice in Indian and other countries' cuisine.

Know about the advantages, disadvantages, uses and medicinal properties of large cardamom

इलायची के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

Most people only know that large cardamom is used as a spice to make dishes aromatic and tasty, but along with this, large cardamom is also used medicinally. In Ayurveda, large cardamom acts as a pacifier, induces sleep, and develops interest in food. It makes the heart and liver healthy, increases appetite, digests food, and removes bad breath.

having a headache

Applying ground cardamom on the forehead and grinding the seeds and smelling it cures headache.

having mouth ulcers

Grind large cardamom and mix it with honey and apply it on mouth ulcers, it cures mouth ulcers.

having a toothache

Mixing equal quantity of cardamom in clove oil and rubbing it on the teeth cures toothache.

problem of excessive salivation

If there is excessive spitting in the mouth or saliva is formed, grinding equal quantity of large cardamom and betel nut and sucking 1 to 2 grams of it reduces the salivation and stops salivation.

excessive hiccups

If someone is having hiccups, boil two large cardamoms in a cup of water after grinding them. When it is half left, filter it and drink it after cooling, it is beneficial in hiccups.

in increasing digestive power

Digestive power is good by taking 8-10 seeds of big cardamom with 2 grams of fennel.

the stomach

Taking 5 grams seed powder of big cardamom with black salt provides relief in stomachache and gas.

to stop vomiting

Mix equal quantity of large cardamom and mint and boil it in 2-3 liters of water and take it little by little, it stops vomiting.

having dysentery

Mixing 1 gram powder of large cardamom with 10 grams of belgiri and taking it twice a day provides relief in dysentery.

calculus problem

By mixing the pulp of melon seeds and sugar candy in the powder of large cardamom seeds and taking 2-3 grams of it, the stone breaks and comes out.

इलायची के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

विभिन्न भाषाओं में बड़ी इलायची के नाम (Name of Badi Elaichi in Different Languages)

बड़ी इलायची का लैटिन नाम एमोमम् सुब्युलेटम (Syn-Cardamomum subulatum (Roxb.) Kuntz.,   Amomum subulatum Roxb.) है। यह जिंजिबेरेसी (Zingiberaceae) कुल का है। इसके देश और विदेश में अन्य ये नाम भी हैंः-

English  – Indian cardamom, Black cardamom, Bengal cardamom, Nepal or Greater cardamom 

Tamil      – पेरेलम (Perelam), पेरियायेलम (Periyayelam)

Hindi  – बड़ी इलायची, पूर्वी इलायची, लाल इलायची, काली इलायची

Sanskrit – स्थूला, बहुला, पृथ्वीका, त्रिपुटा, भद्रैला, बृहदेला, चन्द्रबाला, दिव्यगंधा, निष्कुटि, स्थूलैला

Urdu – इलायची कलान (Ilayachi kallan)

Oriya – बड़ा एलका (Bada elaka)

Kannada – डोड्डाऐलक्की (Doddayelaki)

Gujarati – एलचा (Elcha), मोटी इलायची (Moti elachi), एलचो (Elcho)

Telugu – पेडडायेलाकी (Peddayelaki), अडावी एलक्के (Adavi elakkay)

Bengali – बड़ो एलाची (Baro elachi)

Nepali – अलैचि (Alaichi)

Marathi – मोटे वेलदोड़े (Moteveldode)

Malayalam – पेरेलम (Perelam), पेरिया एलाट्टारी (Periya-elattari)

Arabic – क्याक्यीहाहेकीबार (Qaqihahekibar), हेलजाकर (Helzakar)

Persian – हेलकलान (Hailkallan), क्याकील्हे-कलान (Qakilahe-kalan)

बड़ी इलायची से होने वाले फायदे के विषय में और अधिक विस्तृत जानकारी के लिए इस लाइन पर क्लिक करें।

भारत की नारी

भारत की नारी

आजकल लगातार आ रही खबरों ने आपलोगों को भी आहत किया होगा? लड़की को मारना, जलाना या फिर कहीं वीरान जगहों पर मार के फेक देना, ये सब बातें सुनने में आती थीं। अब टुकड़ों में काट देते। जानवरों को काटने वालों को तो कसाई कहते हैं, इन जल्लादों को क्या कहेंगे? इसमें गलती लड़कियों की भी है, जो उन्हें ऐसा करने का मौका देती हैं। प्रस्तुत है वर्तमान हालात पर कुछ पंक्तियाँ :-

भारत की नारी

खुब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी

क्या तुने नहीं सुनी ये कहानी थी

भारत की नारी हो कर तू

 टुकड़ों में काटी जाती क्यूँ 

प्रेम प्रीति में फंस कर

अपना अस्तित्व मिटाती क्यूं

सृष्टि की र्निमाता तू

क्यूं स्वयं से स्नेह ना कर पाई

दानव के चंगुल में पड़ कर

क्यूं अपनी हयात गंवा आई

आर्यावर्त की वनिता तू

कहीं दुर्गा, कहीं काली तू 

कहीं लक्ष्मी, सरस्वती

कहीं पे झांसी वाली रानी तू 

तू कोमल है कमजोर नहीं,

क्यूं बीहड़ में फेंकी जाती है

कैसे भुली तू संस्कृति अपनी

अपने घर की मर्यादा को

कुछ सीख मिला था मां से तेरे

मानव में कितने दानव हैं 

उस सीख को कैसे भुल गई

बाबा की पगड़ी भुल गई

अम्मा का आंचल भूल गई

क्या अपनी शक्ति भी भूल गई

मुठ्ठी भींच साहस भर कर

शीश काट तू ले आती

बिटिया तू फिर 

झांसी वाली रानी बन जाती

झांसी वाली रानी बन जाती 

भारत की नारी

संगीतविशारद गधा : पंचतंत्र || Sangeet Visharad Gadha : Panchtantra ||

संगीतविशारद गधा

साघु मातुल! गीतेन मया प्रोक्तोऽपि न स्थितः। 
अपूर्वोऽयं मणिर्बद्धः सप्राप्तं गीतलक्षणम्॥

मित्र की सलाह मानो ।

संगीतविशारद गधा : पंचतंत्र || Sangeet Visharad Gadha : Panchtantra ||

एक गाँव में उद्धत नाम का गधा रहता था। दिन में धोबी का भार ढोने के बाद रात को वह स्वेच्छा से खेतों में घूमा करता था। पर सुबह वह स्वयं धोबी के पास आ जाता था। रात को खेतों में घूमते-घूमते उसकी जान-पहचान एक गीदड़ से हो गई। गीदड़ मैत्री करने में बड़े चतुर होते हैं। गधे के साथ गीदड़ भी खेतों में जाने लगा। खेत की बाड़ को तोड़कर गधा अन्दर चला जाता और वहाँ गीदड़ के साथ मिलकर कोमल-कोमल ककड़ियाँ खाकर सुबह अपने घर आ जाता था।

एक दिन गधा उमंग में आ गया। चाँदनी रात थी। दूर तक खेत लहलहा रहे थे। गधे ने कहा-मित्र आज कितनी निर्मल चाँदनी खिली है। जी चाहता है, आज खूब गीत गाऊँ। मुझे सब राग-रागिनियाँ आती हैं। तुझे जो गीत पसन्द हो, वही गाऊँगा। भला कौन सा गीत गाऊँ, तू ही बता। 

गीदड़ ने कहा- मामा ! इन बातों को रहने दो। क्यों अनर्थ बखेरते हो? अपनी मुसीबत आप बुलाने से क्या लाभ? शायद, तुम भूल गए कि हम चोरी से खेत में आए हैं। चोर को तो खाँसना भी मना है, और तुम ऊँचे स्वर से राग-रागिनी गाने की सोच रहे हो। और शायद तुम यह भी भूल गए कि तुम्हारा स्वर मधुर नहीं है। तुम्हारी शंखध्वनि दूर-दूर तक जाएगी। इन खेतों के बाहर रखवाले सो रहे हैं। वे जाग गए तो तुम्हारी हड्डियाँ तोड़ देंगे। कल्याण चाहते हो तो इन उमंगों को भूल जाओ। आनन्दपूर्वक अमृत जैसी मीठी ककड़ियों से पेट भरो। संगीत का व्यसन तुम्हारे लिए अच्छा नहीं है।

गीदड़ की बात सुनकर गधे ने उत्तर दिया-मित्र! तुम वनचर हो, जंगलों में रहते हो, इसीलिए संगीत-सुधा का रसास्वादन तुमने नहीं किया है। तभी तुम ऐसी बात कह रहे हो।

गीदड़ ने कहा-मामा! तुम्हारी बात ही ठीक सही, लेकिन तुम संगीत तो नहीं जानते, केवल गले से ढींचू-ढींचू करना ही जानते हो ।

गधे को गीदड़ की बात पर क्रोध तो बहुत आया किन्तु क्रोध को पीते हुए गधा बोला- गीदड़! यदि मुझे संगीत विद्या का ज्ञान नहीं तो किसको होगा? मैं तीनों ग्रामों, सातों स्वरों, इक्कीस मूर्छनाओं, उनचास तालों, तीनों लयों और तीन मात्राओं के भेदों को जानता हूँ। राग में तीन यति विराम होते हैं, नौ रस होते हैं। छत्तीस राग-रागनियों का मैं पण्डित हूँ। चालीस तरह के संचारी व्यभिचारी भावों को भी मैं जानता हूँ। तब भी तू मुझे रागी नहीं मानता। कारण, कि तू स्वयं राग-विद्या से अनभिज्ञ है।

गीदड़ ने कहा- मामा ! यदि यही बात हैं तो मैं तुझे नहीं रोकूँगा। मैं खेत के दरवाज़े पर खड़ा चौकीदारी करता हूँ, तू जैसा जी चाहे, गाना गा ।

गीदड़ के जाने के बाद गधे ने अपना अलाप शुरू कर दिया। उसे सुनकर खेत के रखवाले दाँत पीसते हुए भागे आए। वहाँ आकर उन्होंने गधे को लाठियों से मार-मारकर ज़मीन पर गिरा दिया। उन्होंने उसके गले में सॉकली भी बाँध दी। गधा भी थोड़ी देर कष्ट में तड़पने के बाद उठ बैठा। गधे का स्वभाव है कि वह बहुत जल्दी कष्ट की बात भूल जाता है। लाठियों की मार की याद मुहूर्त-भर ही उसे सताती है।

गधे ने थोड़ी देर में साँकली तुड़ा ली और भागना शुरू कर दिया। गीदड़ भी उस समय दूर खड़ा तमाशा देख रहा था। मुसकराते हुए वह गधे से बोला- क्यों मामा! मेरे मना करते-करते भी तुमने अलापना शुरू कर दिया ! इसीलिए तुम्हें यह दण्ड मिला। मित्रों की सलाह का ऐसा तिरस्कार करना उचित नहीं है।

चक्रधर ने इस कहानी को सुनने के बाद स्वर्णसिद्धि से कहा- मित्र! बात तो सच है। जिसके पास न स्वयं बुद्धि है और न जो मित्र की सलाह मानता है, वह मन्थरक नाम के जुलाहे की तरह तबाह हो जाता है। स्वर्ण-सिद्धि ने पूछा- वह कैसे? चक्रधर ने तब यह कहानी सुनाई:-

मित्र की शिक्षा मानो

कल्पना चावला || Kalpana Chawla

कल्पना चावला

सर्वविदित है कि कल्पना चावला भारतीय मूल की एक अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री थीं। कल्पना चावला को किसी भी परिचय की आवश्यकता नहीं है। यह एक ऐसा नाम है, जो सिर्फ भारत देश में ही नहीं अपितु पूरी दुनिया पर अपने नाम का डंका बजा चुका है। यह एक ऐसा नाम है जो हर लड़की के लिए प्रेरणा रही है, जबकि वह अब इस दुनिया में नहीं हैं।

कल्पना चावला

कल्पना चावला पहली भारतीय महिला अंतरिक्ष यात्री थीं। कल्पना चावला के पास हवाई जहाज और ग्लाइडर रेटिंग के साथ ही उड़ान प्रशिक्षक का लाइसेंस, एकल और बहू इंजन भूमि और सीप्लेन के लिए वाणिज्यिक पायलट का लाइसेंस था। इन्हें एरोबैटिक्स और टेलव्हील हवाई जहाज उड़ाने में मजा आता था। 

कल्पना चावला का जन्म 17 मार्च 1962 को हरियाणा के करनाल में हुआ था उनके पिताजी बनारसी लाल चावला एक व्यवसाई थे और माता संयोगिता साधारण गृहणी थीं। उड़ने का शौक रखने वाली कल्पना चावला बचपन से ही बहुत ही साहसी थी। 13 साल की उम्र में उन्होंने उड़ान सीखने की इच्छा व्यक्त की थी। उनका बचपन अन्य लड़कियों से बिल्कुल अलग था। अन्य लड़कियां जिस उम्र में बार्बी डॉल से खेलने और  सजने सवरने का शौख रखती हैं, उस उमर में कल्पना चावला हवाई जहाजों की स्केचिंग और पेंटिंग बनाती थी। 

कल्पना चावला की प्रारंभिक शिक्षा टैगोर पब्लिक स्कूल करनाल में हुई थी आगे की शिक्षा व मानिक अभियांत्रिकी में पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज चंडीगढ़ में हुई। उन्हें 1982 में अभियांत्रिकी स्नातक की उपाधि मिली। वे संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए 1982 में चली गई और 1984 में वैमानिक अभियांत्रिकी में विज्ञान स्नातक की उपाधि टेक्सास विश्वविद्यालय आर्लिंगटन से प्राप्त की। 1986 में कल्पना चावला दूसरी विज्ञान में स्नातक की उपाधि पाए और 1988 में कोलोराडो विश्वविद्यालय बोल्डर से वैज्ञानिक अभियंत्रिकी में विद्या वाचस्पति की उपाधि पाई। 

कल्पना चावला मार्च 1995 में नासा के अंतरिक्ष यात्री कोर में शामिल हुई और वह 1997 में अपनी पहली उड़ान के लिए चुनी गई थी उनका पहला अंतरिक्ष मिशन 19 नवंबर 1997 को अंतरिक्ष यात्री दल के हिस्से के रूप में अंतरिक्ष शटल कोलंबिया की उड़ान से शुरू हुआ। कल्पना चावला अंतरिक्ष में उड़ने वाली प्रथम भारत में जन्मे महिला थी और अंतरिक्ष में उड़ान भरने वाली भारतीय मूल की दूसरी व्यक्ति थी प्रथम व्यक्ति राकेश शर्मा थे जिन्होंने 1984 में सोवियत अंतरिक्ष यान में एक उड़ान भरी थीं।

2000 में कल्पना चावला को sts-107 में अपनी दूसरी उड़ान के लिए कर्मचारी के तौर पर चुना गया। अभियान लगातार पीछे सरकता रहा क्योंकि विभिन्न कार्यों के नियोजित समय में टकराव होता रहा और कुछ तकनीकी समस्याएं भी आईं। 16 जनवरी 2003 को कल्पना चावला ने अंततः कोलंबिया पर चढ़कर sts-107 मिशन का आरंभ किया। उनकी जिम्मेदारियों में शामिल थे स्पेस हैब/बल्ले बल्ले/ फीस्टार लघु गुरुत्व प्रयोग, जिसके लिए कर्मचारी दल ने 80 प्रयोग किए। जिसके जरिए पृथ्वी व अंतरिक्ष विज्ञान उन्नत तकनीक विकास व अंतरिक्ष यात्री स्वास्थ्य व सुरक्षा का अध्ययन हुआ।

कल्पना चावला की दूसरी अंतरिक्ष यात्रा ही उनकी अंतिम यात्रा हो गई सभी तरह के अनुसंधान तथा विचार विमर्श के उपरांत वापसी के समय पृथ्वी के वायुमंडल में अंतरिक्ष यान के प्रवेश के समय जिस तरह की भयंकर घटना घटी अब वह इतिहास बन चुकी है नासा तथा विश्व के लिए यह एक दर्दनाक घटना थी 1 फरवरी 2003 को कोलंबिया अंतरिक्ष यान पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश करते ही टूट कर बिखर गया देखते ही देखते अंतरिक्ष यान और उसमें सवार 7 यात्रियों के अवशेष टैक्सास नामक शहर पर बरसने लगे और सफल कहलाया जानेवाला अभियान दर्दनाक सत्य बन गया यह अंतरिक्ष यात्री तो सितारों की दुनिया में विलीन हो गए, लेकिन उनके अनुसंधान का लाभ पूरे विश्व को अवश्य मिला।

कल्पना चावला कहती थी कि मैं अंतरिक्ष के लिए ही बनी हूं प्रत्येक पल अंतरिक्ष के लिए ही बिताया है और इसी के लिए ही मरूंगी। अंततः 1 फरवरी 2003 को उनकी यह बात सत्य हो गई।

श्रीमद्भगवद्गीता ||अध्याय आठ - अक्षरब्रह्मयोग योग || अनुच्छेद 08 - 22 ||

श्रीमद्भगवद्गीता ||अध्याय आठ अक्षरब्रह्मयोग योग ||

अथाष्टमोऽध्यायः- अक्षरब्रह्मयोग

अध्याय आठ के अनुच्छेद 08 - 22

अध्याय आठ के अनुच्छेद 08 - 22 में  भगवान का परम धाम और भक्ति के सोलह प्रकार का वर्णन है।   

श्रीमद्भगवद्गीता || Shrimad Bhagwat Geeta ||

अभ्यासयोगयुक्तेन चेतसा नान्यगामिना ।
परमं पुरुषं दिव्यं याति पार्थानुचिन्तयन्‌ || 8.8 ||

भावार्थ : 

हे पार्थ! यह नियम है कि परमेश्वर के ध्यान के अभ्यास रूप योग से युक्त, दूसरी ओर न जाने वाले चित्त से निरंतर चिंतन करता हुआ मनुष्य परम प्रकाश रूप दिव्य पुरुष को अर्थात परमेश्वर को ही प्राप्त होता है॥8.8॥

कविं पुराणमनुशासितार-मणोरणीयांसमनुस्मरेद्यः ।
सर्वस्य धातारमचिन्त्यरूप-मादित्यवर्णं तमसः परस्तात्‌ || 8.9 ||

भावार्थ : 

जो पुरुष सर्वज्ञ, अनादि, सबके नियंता (अंतर्यामी रूप से सब प्राणियों के शुभ और अशुभ कर्म के अनुसार शासन करने वाला) सूक्ष्म से भी अति सूक्ष्म, सबके धारण-पोषण करने वाले अचिन्त्य-स्वरूप, सूर्य के सदृश नित्य चेतन प्रकाश रूप और अविद्या से अति परे, शुद्ध सच्चिदानन्दघन परमेश्वर का स्मरण करता है॥8.9॥

प्रयाण काले मनसाचलेन भक्त्या युक्तो योगबलेन चैव ।
भ्रुवोर्मध्ये प्राणमावेश्य सम्यक्‌- स तं परं पुरुषमुपैति दिव्यम्‌ || 8.10 ||

भावार्थ : 

वह भक्ति युक्त पुरुष अन्तकाल में भी योगबल से भृकुटी के मध्य में प्राण को अच्छी प्रकार स्थापित करके, फिर निश्चल मन से स्मरण करता हुआ उस दिव्य रूप परम पुरुष परमात्मा को ही प्राप्त होता है॥8.10॥

यदक्षरं वेदविदो वदन्ति विशन्ति यद्यतयो वीतरागाः ।
यदिच्छन्तो ब्रह्मचर्यं चरन्ति तत्ते पदं संग्रहेण प्रवक्ष्ये || 8.11 ||

भावार्थ : 

वेद के जानने वाले विद्वान जिस सच्चिदानन्दघनरूप परम पद को अविनाश कहते हैं, आसक्ति रहित यत्नशील संन्यासी महात्माजन, जिसमें प्रवेश करते हैं और जिस परम पद को चाहने वाले ब्रह्मचारी लोग ब्रह्मचर्य का आचरण करते हैं, उस परम पद को मैं तेरे लिए संक्षेप में कहूँगा॥ 8.11॥

सर्वद्वाराणि संयम्य मनो हृदि निरुध्य च ।
मूर्ध्न्याधायात्मनः प्राणमास्थितो योगधारणाम्‌ || 8.12 ||
ओमित्येकाक्षरं ब्रह्म व्याहरन्मामनुस्मरन्‌ ।
यः प्रयाति त्यजन्देहं स याति परमां गतिम्‌ || 8.13 ||

भावार्थ : 

सब इंद्रियों के द्वारों को रोककर तथा मन को हृद्देश में स्थिर करके, फिर उस जीते हुए मन द्वारा प्राण को मस्तक में स्थापित करके, परमात्म संबंधी योगधारणा में स्थित होकर जो पुरुष 'ॐ' इस एक अक्षर रूप ब्रह्म को उच्चारण करता हुआ और उसके अर्थस्वरूप मुझ निर्गुण ब्रह्म का चिंतन करता हुआ शरीर को त्यागकर जाता है, वह पुरुष परम गति को प्राप्त होता है॥8.12-8.13॥

अनन्यचेताः सततं यो मां स्मरति नित्यशः ।
तस्याहं सुलभः पार्थ नित्ययुक्तस्य योगिनीः  || 8.14 ||

भावार्थ : 

हे अर्जुन! जो पुरुष मुझमें अनन्य-चित्त होकर सदा ही निरंतर मुझ पुरुषोत्तम को स्मरण करता है, उस नित्य-निरंतर मुझमें युक्त हुए योगी के लिए मैं सुलभ हूँ, अर्थात उसे सहज ही प्राप्त हो जाता हूँ॥8.14॥

मामुपेत्य पुनर्जन्म दुःखालयमशाश्वतम्‌ ।
नाप्नुवन्ति महात्मानः संसिद्धिं परमां गताः || 8.15 ||

भावार्थ : 

परम सिद्धि को प्राप्त महात्माजन मुझको प्राप्त होकर दुःखों के घर एवं क्षणभंगुर पुनर्जन्म को नहीं प्राप्त होते॥8.15॥

आब्रह्मभुवनाल्लोकाः पुनरावर्तिनोऽर्जुन ।
मामुपेत्य तु कौन्तेय पुनर्जन्म न विद्यते || 8.16 ||

भावार्थ : 

हे अर्जुन! ब्रह्मलोकपर्यंत सब लोक पुनरावर्ती हैं, परन्तु हे कुन्तीपुत्र! मुझको प्राप्त होकर पुनर्जन्म नहीं होता, क्योंकि मैं कालातीत हूँ और ये सब ब्रह्मादि के लोक काल द्वारा सीमित होने से अनित्य हैं॥8.16॥

सहस्रयुगपर्यन्तमहर्यद्ब्रह्मणो विदुः ।
रात्रिं युगसहस्रान्तां तेऽहोरात्रविदो जनाः || 8.17 ||

भावार्थ : 

ब्रह्मा का जो एक दिन है, उसको एक हजार चतुर्युगी तक की अवधि वाला और रात्रि को भी एक हजार चतुर्युगी तक की अवधि वाला जो पुरुष तत्व से जानते हैं, वे योगीजन काल के तत्व को जानने वाले हैं॥8.17॥

अव्यक्ताद्व्यक्तयः सर्वाः प्रभवन्त्यहरागमे ।
रात्र्यागमे प्रलीयन्ते तत्रैवाव्यक्तसंज्ञके || 8.18 ||

भावार्थ : 

संपूर्ण चराचर भूतगण ब्रह्मा के दिन के प्रवेश काल में अव्यक्त से अर्थात ब्रह्मा के सूक्ष्म शरीर से उत्पन्न होते हैं और ब्रह्मा की रात्रि के प्रवेशकाल में उस अव्यक्त नामक ब्रह्मा के सूक्ष्म शरीर में ही लीन हो जाते हैं॥8.18॥

भूतग्रामः स एवायं भूत्वा भूत्वा प्रलीयते ।
रात्र्यागमेऽवशः पार्थ प्रभवत्यहरागमे || 8.19 ||

भावार्थ : 

हे पार्थ! वही यह भूतसमुदाय उत्पन्न हो-होकर प्रकृति वश में हुआ रात्रि के प्रवेश काल में लीन होता है और दिन के प्रवेश काल में फिर उत्पन्न होता है ॥8.19॥

परस्तस्मात्तु भावोऽन्योऽव्यक्तोऽव्यक्तात्सनातनः ।
यः स सर्वेषु भूतेषु नश्यत्सु न विनश्यति || 8.20 ||

भावार्थ : 

उस अव्यक्त से भी अति परे दूसरा अर्थात विलक्षण जो सनातन अव्यक्त भाव है, वह परम दिव्य पुरुष सब भूतों के नष्ट होने पर भी नष्ट नहीं होता॥8.20॥

अव्यक्तोऽक्षर इत्युक्तस्तमाहुः परमां गतिम्‌ ।
यं प्राप्य न निवर्तन्ते तद्धाम परमं मम || 8.21 ||

भावार्थ : 

जो अव्यक्त 'अक्षर' इस नाम से कहा गया है, उसी अक्षर नामक अव्यक्त भाव को परमगति कहते हैं तथा जिस सनातन अव्यक्त भाव को प्राप्त होकर मनुष्य वापस नहीं आते, वह मेरा परम धाम है || 8.21 ||

पुरुषः स परः पार्थ भक्त्या लभ्यस्त्वनन्यया ।
यस्यान्तः स्थानि भूतानि येन सर्वमिदं ततम्‌ || 8.22 ||

भावार्थ : 

हे पार्थ! जिस परमात्मा के अंतर्गत सर्वभूत है और जिस सच्चिदानन्दघन परमात्मा से यह समस्त जगत परिपूर्ण है (गीता अध्याय 9 श्लोक 4 में देखना चाहिए), वह सनातन अव्यक्त परम पुरुष तो अनन्य (गीता अध्याय 11 श्लोक 55 में इसका विस्तार देखना चाहिए) भक्ति से ही प्राप्त होने योग्य है ॥8.22॥

साइप्रिपेडियम कैलकेलस (जंगली ऑर्किड) || Cypripedium calcareous (wild orchid) || दुनिया का सबसे अनोखा फूल ||

साइप्रिपेडियम कैलकेलस (जंगली ऑर्किड)

शायद ही कोई ऐसा होगा जिसे खिले हुए फूल देखकर प्रसन्नता ना होती हो। खिले हुए फूलों को देख कर सबका मन प्रफुल्लित हो उठता है फूलों की खूबसूरती और खुशबू हर किसी को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं परंतु इस दुनिया में कुछ ऐसे भी फूल हैं, जो हैरान कर देने वाली है। आज दुनिया के ऐसे ही अजीबोगरीब फूल के बारे में जानते हैं, जिसकी एक डाली की कीमत 5000 अमेरिकी डॉलर अर्थात 3 लाख 35 हजार 7सौ 49 रुपए है।

साइप्रिपेडियम कैलकेलस (जंगली ऑर्किड) || Cypripedium calcareous (wild orchid) || दुनिया का सबसे अनोखा फूल ||

साइप्रिपेडियम कैलकेलस नाम का ये जंगली ऑर्किड कभी पूरे यूरोप में मिलता था, लेकिन अब यह सिर्फ ब्रिटेन में होता है। पीले और जामुनी से रंग वाला ये फूल अब अब इतना दुर्लभ है कि इसकी एक डाली 5 हजार अमेरिकी डॉलर और 3 लाख 35 हजार 7 सौ 49 रुपये में मिलती है।  

साइप्रिपेडियम कैलकेलस (जंगली ऑर्किड) || Cypripedium calcareous (wild orchid) || दुनिया का सबसे अनोखा फूल ||

यह यूरोप में सबसे बड़े फूलों वाली ऑर्किड प्रजाति है, जो 60 सेंटीमीटर तक लंबी होती है। इसके फूल 9 सेमी तक चौड़े होते हैं। फूलों से पहले, यह अन्य ऑर्किड से बड़े आकार की होती है और इसकी अंडाकार पत्तियां 18 सेमी लंबी और 9 सेमी चौड़ी होती हैं, जो अन्य ऑर्किड की तरह समानांतर शिराओं का प्रदर्शन करते हैं। प्रत्येक शूट में चार पत्तियां और फूलों की एक छोटी संख्या (1-2) होती है, जिसमें लाल-भूरे से काले (शायद ही कभी हरे) और एक चप्पल के आकार का पीला लेबेलम होता है, जिसके भीतर लाल डॉट्स दिखाई देते हैं। यह एक लंबे समय तक रहने वाला बारहमासी फूल है और क्षैतिज तनों (प्रकंद) का उपयोग करके फैलता है। 

साइप्रिपेडियम कैलकेलस (जंगली ऑर्किड) || Cypripedium calcareous (wild orchid) || दुनिया का सबसे अनोखा फूल ||

इसका व्यापक वितरण यूरोप पूर्व से एशिया के माध्यम से स्पेन से प्रशांत तक है। यह आम तौर पर नम मिट्टी पर खुले वुडलैंड में पाया जाता है। महाद्वीपीय यूरोप में यह चूना पत्थर पर अर्ध-छायांकित वुडलैंड कवर के विघटित धरण में भी पाया जाता है। इसकी सीमा के अधिकांश यूरोपीय भाग में गिरावट आई है, और इसके परिणामस्वरूप कई देशों में कानूनी रूप से संरक्षित है। इसकी ऊपरी ऊंचाई सीमा 2100 मीटर है। फाइटोसिया द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार, यह जलभराव या सीधे दोपहर के सूरज से नहीं बच सकता है।

  लेडीज स्लिपर ऑर्किड (Lady’s Slipper Orchid)

यह अनोखा फूल इतना खास है कि हर साल आयोजित होने वाले चेल्सी फ्लावर शो में इसका एक पर्सनल बॉडीगार्ड होता है। इसकी पीली पंखुड़ी जो एक छोटे क्लॉग या जूते की तरह दिखती है, के कारण इसे ‘लेडीज़ स्लिपर’ का उपनाम दिया गया है। यह सबसे असामान्य फूलों में से एक है जिसे यूके में देख सकते हैं।

साइप्रिपेडियम कैलकेलस (जंगली ऑर्किड) || Cypripedium calcareous (wild orchid) || दुनिया का सबसे अनोखा फूल ||

अगले हफ्ते मिलते हैं ऐसे ही अनोखे फूल से...

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Cypripedium calcareous (wild orchid)


There will hardly be anyone who is not happy to see the flowers in bloom. Seeing the blossomed flowers, everyone's mind gets elated, the beauty and fragrance of flowers attract everyone towards them, but there are some such flowers in this world, which are astonishing. Today we know about such a strange flower of the world, the cost of one branch of which is 5000 US dollars i.e. 3 lakh 35 thousand 7 hundred and 49 rupees.

साइप्रिपेडियम कैलकेलस (जंगली ऑर्किड) || Cypripedium calcareous (wild orchid) || दुनिया का सबसे अनोखा फूल ||

This wild orchid, Cypripedium calculus, was once found throughout Europe, but is now only found in Britain. This yellow and purple colored flower is now so rare that one branch of it is available for 5 thousand US dollars and 3 lakh 35 thousand 7 hundred and 49 rupees.

It is the largest flowering orchid species in Europe, growing up to 60 cm tall. Its flowers are up to 9 cm wide. Before flowering, it is larger than other orchids and has oval leaves up to 18 cm long and 9 cm broad, which exhibit parallel venation like other orchids. Each shoot bears four leaves and a small number (1–2) of flowers, which have a reddish-brown to black (rarely green) and a slipper-shaped yellow labellum, within which red dots are visible. It is a long-lived perennial flower and spreads using horizontal stems (rhizomes).

साइप्रिपेडियम कैलकेलस (जंगली ऑर्किड) || Cypripedium calcareous (wild orchid) || दुनिया का सबसे अनोखा फूल ||

It has a wide distribution from Europe east through Asia from Spain to the Pacific. It is generally found in open woodland on moist soils. In continental Europe it is also found on limestone in decomposed humus of semi-shaded woodland cover. It has declined in much of the European part of its range, and is consequently legally protected in many countries. Its upper altitude limit is 2100 m. According to the instructions provided by Phytosia, it cannot survive waterlogging or direct afternoon sun.

Lady’s Slipper Orchid

This unique flower is so special that it has a personal bodyguard at the Chelsea Flower Show held every year. It is nicknamed the 'lady's slipper' because of its yellow petals that look like a tiny clog or shoe. This is one of the most unusual flowers you can see in the UK.

See you next week with such a unique flower...