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Sunday.. इतवार ..रविवार

 इतवार (Sunday)


"आज रांस्ता बना लिया है,
तो कल मंजिल भी मिल जाएगी.
हौसलों से भरी यह कोशिश एक दिन
जरूर रंग लाएगी.. ❤"

जागो फिर एक बार

जागो फिर एक बार
प्यार जगाते हुए हारे सब तारे तुम्हें
अरुण-पंख तरुण-किरण
खड़ी खोलती है द्वार
जागो फिर एक बार

आँखे अलियों-सी
किस मधु की गलियों में फँसी
बन्द कर पाँखें
पी रही हैं मधु मौन
अथवा सोयी कमल-कोरकों में?
बन्द हो रहा गुंजार
जागो फिर एक बार

अस्ताचल चले रवि
शशि-छवि विभावरी में
चित्रित हुई है देख
यामिनीगन्धा जगी
एकटक चकोर-कोर दर्शन-प्रिय
आशाओं भरी मौन भाषा बहु भावमयी

घेर रहा चन्द्र को चाव से
शिशिर-भार-व्याकुल कुल
खुले फूल झूके हुए
आया कलियों में मधुर
मद-उर-यौवन उभार
जागो फिर एक बार

पिउ-रव पपीहे प्रिय बोल रहे
सेज पर विरह-विदग्धा वधू
याद कर बीती बातें
रातें मन-मिलन की
मूँद रही पलकें चारु
नयन जल ढल गये
लघुतर कर व्यथा-भार
जागो फिर एक बार

सहृदय समीर जैसे
पोछों प्रिय, नयन-नीर
शयन-शिथिल बाहें
भर स्वप्निल आवेश में
आतुर उर वसन-मुक्त कर दो
सब सुप्ति सुखोन्माद हो
छूट-छूट अलस
फैल जाने दो पीठ पर
कल्पना से कोमन
ऋतु-कुटिल प्रसार-कामी केश-गुच्छ

तन-मन थक जायें
मृदु सरभि-सी समीर में
बुद्धि बुद्धि में हो लीन
मन में मन, जी जी में
एक अनुभव बहता रहे
उभय आत्माओं मे
कब से मैं रही पुकार
जागो फिर एक बार

उगे अरुणाचल में रवि
आयी भारती-रति कवि-कण्ठ में
क्षण-क्षण में परिवर्तित
होते रहे प्रृकति-पट
गया दिन, आयी रात
गयी रात, खुला दिन
ऐसे ही संसार के बीते दिन, पक्ष, मास
वर्ष कितने ही हजार
जागो फिर एक बार

जागो फिर एक बार कविता की व्याख्या 

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' जी की यह कविता "परिमल" नामक संग्रह से ली गई है। वैसे तो कविता में कहीं भी अंग्रेजों की गुलामी का या भारत देश का नाम नहीं लिया गया है, परंतु इस कविता की जितनी भी व्याख्या किताबों से लेकर इंटरनेट तक उपलब्ध है, उसमें सब जगह देशवासियों को भारत की आजादी के लिए जगाने के संदर्भ में इस कविता की व्याख्या है। 

निराला जी कह रहे हैं कि - ओ प्यारे! सब तारे तुम्हें जगा जगा कर थक गए, हार गए। सूर्य की नवोदित किरण तुम्हारे दर पर खड़ी है, तुम्हारा द्वार खोल रही है, जागो, उठो। 

जो सो रहा है उसकी आंखें भंवरों की तरह हैं। आंखों के फंस जाने का मतलब उलझ जाना है। आंख का उलझ जाना दृष्टि का उलझ जाना है। कवि कह रहे हैं कि किस मधु की गली में क्या चल रहा है चुपचाप? पखना बंद है। आखें मधुपान कर रही हैं या सोई है कमल के फूल में? बाहर गुंजार बंद हो रहा है, उठो, जागो। 

सूर्य अस्त हो चुका है। तारों से भरी हुई चांदनी रात है। रात रानी महकने लगी है। चकोर अपने प्रिय की एक झलक पाने के लिए एकटक निहार रहा है। उसका मौन बहुत से भाव से भरा हुआ है। प्रिय के दरस की आशा घेरती जा रही है। फूलों का कुनबा शीत के भार से व्याकुल हो रहा है। खिले हुए फूल झुके जा रहे हैं। कलियों में यौवन का मद आ गया है। ऐसे में तुम उठो, जागो। 

पपीहा पिउ पिउ बुला रहा है। समीर की तरह तुम वधू के आंसू पोंछ दो। सोने से शिथिल पड़ी हुई उसकी बांह धरकर तुम उसे अपनी गोद में भर लो। उसके ह्रदय की आतुरता का शमन कर दो। सुप्ति को सुख के उन्माद से भर दो। कल्पना की तरह कोमल घुंघराले बालों को पीठ पर इस तरह फैल जाने दो कि सारा आलस्य दूर हो जाए। तन को मन को थंका दो। सुगंधित वायु चल रही है। सूर्य की नवोदित किरण कह रही है कि मैं तुम्हें कब से पुकार रही हूं। बुद्धि को, मन को, प्राण को तृप्ति तोष के सूत्र में बांधने के लिए सब को भय से मुक्त करने के लिए एक बार फिर जागो। 

भारत की जो भारती है, वह हिंदी है। वह अलसुबह के ललमुंहे सूर्य की तरह कवि कंठ में उतर आई है। प्रकृति अपना रूप बदलती रहती है, लेकिन प्रिय का संसार वही एक है। यानी वह नहीं बदला, जबकि उसे समय के साथ बदलना था। दिन, पखवारा, महीना क्या, तुम्हारे उठने की प्रतीक्षा में कितने हजार वर्ष बीत गए। जागो, एक बार फिर उठो।

Sunday.. इतवार ..रविवार
"हौसले के तरकश में
कोशिश का वो तीर जिंदा रखो
हार जाओ चाहे जिन्दगी में सब कुछ,
मगर फिर से जीतने की
उम्मीद जिन्दा रखो.. ❤"

25 जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं / Happy Birthday Wishes Quotes

जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं / Happy Birthday Wishes

 साल का यह एक ऐसा दिन हैं, जो सभी के लिए के खास होता हैं। कुछ बधाई संदेश कुछ खास लोगों के लिए। 
25 जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं / Happy Birthday Wishes Quotes
जिंदगी का हर पल सुख दे आपको,
दिन का हर लम्हा ख़ुशी दे आपको,
जहाँ गम की हवा छू के भी ना गुजरे,
खुदा वो जिंदगी दे आपको.
जन्मदिन की हार्दिक बधाई .. 
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

25 जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं / Happy Birthday Wishes Quotes

खुशी से बीते हर दिन,
आपकी हर रात सुहानी हो,
जिस तरफ आपके कदम पड़े,
सफलता ही सफलता मिले आपको.
जन्मदिन की शुभकामनायें..
🍫🍫🍫🍫🍫🍫🍫🍫🍫🍫

25 जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं / Happy Birthday Wishes Quotes
हो पूरी दिल की हर ख्वाहिश आपकी,
और मिले खुशियों का जहां आपको,
जब कभी आप मांगे आसमान का एक तारा
तो भगवान दे दे सारा आसमां आपको.
जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाये..
🎈🎈🎈🎈🎈🎈🎈🎈🎈🎈

25 जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं / Happy Birthday Wishes Quotes
आसमान की बुलंदियों पर नाम हो आपका,
चांद की धरती पर मुकाम हो आपका,
हम तो रहते हैं छोटी सी दुनिया में,
पर ईश्वर करे सारा जहां हो आपका.
जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाये..
🎉🎉🎉🎉🎉🎉🎉🎉🎉🎉

25 जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं / Happy Birthday Wishes Quotes
सुगन्धित हो जीवन तुम्हारा,
तारों की चमक से सम्मिलित हो जीवन तुम्हारा,
शुभ दिन ये आये आपके जीवन में हजार बार,
और हम आपको जन्मदिन मुबारक कहते रहें हर बार.
जन्मदिन की शुभकामनायें..
🎊🎊🎊🎊🎊🎊🎊🎊🎊🎊

25 जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं / Happy Birthday Wishes Quotes
सजती रहे खुशियों की महफिल,
हर खुशी सुहानी रहे,
आप जिंदगी में इतने खुश रहें,
की हर खुशी आपकी दीवानी रहे.
जन्मदिन मुबारक हो..
💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫

25 जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं / Happy Birthday Wishes Quotes
दुनिया की खुशियाँ आपको मिल जायें,
अपनों से मिलके आपका मन खिल जाये,
चेहरे पर दुःख की कभी शिकन भी न हो,
आपके जन्मदिन पर मेरी दिल से शुभकामनाएं.
जन्मदिन मुबारक हो..
❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️

25 जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं / Happy Birthday Wishes Quotes
जन्मदिन के ये खास लम्हें मुबारक,
आंखों में बसे नए ख्वाब मुबारक,
ज़िंदगी जो लेकर आई है तेरे लिए 
वो तमाम खुशियों की हँसी सौगात मुबारक हो तुम्हें.
जन्मदिन की शुभकामनाएँ..
🕯️🕯️🕯️🕯️🕯️🕯️🕯️🕯️🕯️🕯️

25 जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं / Happy Birthday Wishes Quotes
Wishing you a
beautiful day with
good health and
Happiness forever..
Happy Birthday
🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂

25 जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं / Happy Birthday Wishes Quotes
खुशियों का रहे हमेशा साथ,
ग़म की घटायें कभी तेरे करीब न आएं,
पाने को जिस चीज़ को करे तेरा मन,
चल कर वो खुद तेरे करीब आए.
जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें..
🧁🧁🧁🧁🧁🧁🧁🧁🧁🧁

25 जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं / Happy Birthday Wishes Quotes
हर लम्हा आपके होठों पर मुस्कान रहे,
हर गम से आप अनजान रहें,
जिसके साथ महक उठे सारी जिंदगी आपकी,
हमेशा आपके पास वो इंसान रहे.
जन्मदिन की शुभकामनायें..
🍩🍩🍩🍩🍩🍩🍩🍩🍩🍩

25 जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं / Happy Birthday Wishes Quotes
तू खुश रहे खुदा करे, मेरा दिल यही दुआ करे,
तेरे होंठ मुस्कुराएं सदा तेरी आँख सदा हँसा करे,
आँगन तेरा सदा खुशियों से भरा रहे,
बहार सदा तेरी ही गली रहे,
बस यही दुआ मेरी तेरे लिए रहे.
जन्मदिन मुबारक हो ..
🍦🍦🍦🍦🍦🍦🍦🍦🍦🍦

25 जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं / Happy Birthday Wishes Quotes
पास तो रहे नहीं, चाहे दूर जहाँ भी रहो तुम,
मेरी दुआयें रहेंगी साथ तुम्हारे हर दम,
हो खुशियों का बसेरा तुम्हारे लिए,
बस यही दुआ है तुम्हारे लिए.
जन्मदिन मुबारक हो..
🍰🍰🍰🍰🍰🍰🍰🍰🍰🍰

25 जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं / Happy Birthday Wishes Quotes
हंसी आपकी कोई चुरा न पाए,
कोई कभी जिंदगी में आपको रुला न पाए,
खुशियों का दीप ऐसे जले आपकी जिंदगी में,
कि कोई तूफान भी उसे बुझा ना पाए.
जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं..
🎈🎈🎈🎈🎈🎈🎈🎈🎈🎈

25 जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं / Happy Birthday Wishes Quotes
उगता हुआ सूरज आज दुआ दे आपको,
खिलता हुआ गुलाब आज खुशबू दे आपको,
मैं तो कुछ देने के काबिल नही हूं,
देने वाला एक लंबी उम्र दे आपको.
Happy Birthday..
🍫🍫🍫🍫🍫🍫🍫🍫🍫🍫

25 जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं / Happy Birthday Wishes Quotes
दिल की गहराई से दुआ दी आपको,
जिए आप जब तक, लोग प्यार करें आपको,
चाँद सितारों से भी लंबी ज़िंदगी हो आपकी,
हम रहे ना रहें खुदा सलामत रखे आपको.
🎊🎉🎊🎉🎊🎉🎊🎉🎊🎉

25 जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं / Happy Birthday Wishes Quotes
खुदा तुम्हें खुशियों भरा संसार दे,
जीवन में तरक्की हज़ार दे,
तुम्हारे होंठ कभी न भूले मुस्कुराना,
जन्मदिन पर ऐसा उपहार दे.
जन्मदिन की शुभकामनायें ..
जन्मदिन मुबारक हो..
🕯️🕯️🕯️🕯️🕯️🕯️🕯️🕯️🕯️🕯️

25 जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं / Happy Birthday Wishes Quotes
मिले वो जो आपकी नजर को तलाश हो,
हर सुबह के साथ एक नया एहसास हो,
जिंदगी का हर लम्हा पसंद आये आपको,
जिंदगी गुजरे ऐसे की हर पल खुशियों से मुलाक़ात हो.
जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें..
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

25 जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं / Happy Birthday Wishes Quotes
चांद की तरह तू जगमगाए,
पंछियों की तरह गुनगुनाये;
तेरे जन्मदिन पर दुआ करते हैं,
तू जो चाहे वो तुझे मिल जाये..
Happy Birthday.
🍫🍫🍫🍫🍫🍫🍫🍫🍫🍫

25 जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं / Happy Birthday Wishes Quotes
मिले वो जो आपकी नजर को तलाश हो,
हर सुबह के साथ एक नया एहसास हो,
जिंदगी का हर लम्हा पसंद आये आपको,
जिंदगी गुजरे ऐसे की हर पल खुशियों से मुलाक़ात हो.
जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें..
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

25 जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं / Happy Birthday Wishes Quotes
हर राह बिलकुल आसान हो,
हर राह खुशियों से भरी हो,
हर दिन आपका खूबसूरत हो,
निराला ऐसा ही पूरा जीवन हो,
और इनके जैसा ही आपका जन्मदिन हो.
जन्मदिन की शुभकामनायें..

25 जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं / Happy Birthday Wishes Quotes
गुलाब खिलते रहे जिंदगी की राह में तेरी,
हँसी चमकती रहे  निगाह में तेरी,
खुशी कि लहर मिलें हर कदम पर आपको,
देता हे ये दिल दुआ बार-बार आपको.
जन्मदिन मुबारक हो..
❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️

25 जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं / Happy Birthday Wishes Quotes

प्यार से भरी जिंदगी मिले आपको,
खुशियाँ से भरे पल मिले आपको,
कभी किसी ग़म का सामना ना करना पड़े,
ऐसा आने वाला कल मिले आपको.
जन्मदिन बहुत बहुत मुबारक..
🎈🎈🎈🎈🎈🎈🎈🎈🎈🎈

25 जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं / Happy Birthday Wishes Quotes

हर ख़ुशी पर हक हो आपका,
खुशियों भरा सफ़र हो आपका,
गम कभी करवट न बदले आपकी तरफ,
सदा मुस्कुराता रहे चेहरा आपका.
जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं..
🎉🎊🎉🎊🎉🎊🎉🎊🎉🎊

25 जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं / Happy Birthday Wishes Quotes

हर एक चाह हर पल मिले आपको,
जिंदगी में प्यार ही प्यार मिले आपको,
हर चीज मांगने से पहले मिले आपको,
खुशियों का बसेरा हो जिंदगी में आपके,
साल का हर पल मुबारक हो आपको.
जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें..
💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫

हितैषी की सीख मानो : पंचतंत्र

हितैषी की सीख मानो

सुहृदां हितकामानां न करोतीह यो वचः। 
सकूम इव दुर्बुधिः काष्ठाद् भ्रष्टो विनश्यति ।। 

हितचिन्तक मित्रों की बात पर जो ध्यान नहीं देता वह मूर्ख नष्ट हो जाता है।

हितैषी की सीख मानो : पंचतंत्र


    एक तालाब में कंबूग्रिव नाम का कछुआ रहता था। उसी तालाब में प्रति दिन आने वाले दो हंस, जिनका नाम संकट और विकट था, उसके मित्र थे। तीनों में इतना स्नेह था कि रोज शाम होने तक तीनों मिलकर बड़े प्रेम से कथालाप किया करते थे।
    कूछ दिन बाद वर्षा के अभाव में वह तालाब सूखने लगा। हंसों को यह देखकर कछुए से बड़ी सहानुभूति हुई। कछुए ने भी आंखों में आंसू भरकर कहा - अब यह जीवन अधिक दिन का नहीं है। पानी के बिना इस तालाब में मेरा मरण निश्चित है। तुमसे कोई उपाय बन पाए तो करो। विपत्ति में धैर्य ही काम आता है। यत्न से सब काम सिद्ध हो जाते हैं। 


हंस और मूर्ख कछुआ की कहानी: पंचतंत्र


    बहुत विचार के बाद यह निश्चय किया गया कि दोनों हंस जंगल से एक बांस की छड़ी लाएंगे। कछुआ उस छड़ी के मध्य भाग को मुख से पकड़ लेगा। हंसों का यह काम होगा कि वे दोनों ओर से छड़ी को मजबूती से पकड़ कर दूसरे तालाब के किनारे तक उड़ते हुए पहुंचेंगे। 
    यह निश्चित होने के बाद दोनों हंसों ने कछुए को कहा - मित्र! हम तुझे इस प्रकार उड़ते हुए दूसरे तालाब तक ले जाएंगे, किंतु एक बात का ध्यान रखना कहीं बीच में लकड़ी का छोड़ मत देना, नहीं तो तुम गिर जाओगे। कुछ भी हो पूरा मौन बनाए रखना। प्रलोभनों की ओर ध्यान ना देना। यही तेरी परीक्षा का मौका है। 
    हंसों ने लकड़ी को उठा लिया। कछुए ने उसे मध्य भाग से दृढ़तापूर्वक पकड़ लिया। इस तरह निश्चित योजना के अनुसार वे आकाश में उड़े जा रहे थे कि कछुए ने नीचे झुककर नागरिकों को देखा जो गर्दन उठाकर आकाश में हंसों के बीच किसी चक्राकार वस्तु को उड़ता देखकर कौतूहलवश शोर मचा रहे थे। 
हंस और मूर्ख कछुआ की कहानी: पंचतंत्र
    उस शोर को सुनकर कंबूग्रिव से नहीं रहा गया। वह बोल उठा - अरे! यह कैसा शोर है। 
    यह कहने के लिए मुंह खोलने के साथ ही कछुए के मुंह से लकड़ी की छड़ी छूट गई और कछुआ जब नीचे गिरा तो लोगों ने उसकी बोटी बोटी कर डाली। 
    टिटिहरी ने यह कहानी सुनाकर कहा - इसलिए मैं कहती हूं कि अपने हितचिंतकों की राय पर न चलने वाला व्यक्ति नष्ट हो जाता है। बल्कि बुद्धिमान में भी वही बुद्धिमान सफल होते हैं जो बिना आई हुई विपत्ति की पहले से ही उपाय सोचते हैं और वे भी उसी प्रकार सफल होते हैं जिनकी बुद्धि तत्काल अपनी रक्षा का उपाय सोच लेती है। पर "जो होगा, देखा जाएगा" कहने वाले शीघ्र ही नष्ट हो जाते हैं। 
    टिटिहरे ने पूछा - यह कैसे ?
    टिटिहरी ने कहा - सुनो :

दूरदर्शी बनो

                                                          To be continued ...

Gulab : गुलाब / Rose

Gulab : गुलाब

प्रकृति की बेहद खूबसूरत सौगात फूलों का राजा गुलाब (Rose)। गुलाब का नाम सुनते ही होंठो पर एक हल्की  मुस्कान आ जाती है, है न। इसकी खूबसूरती और सुगंध मन को मोहने वाली होती है। गुलाब (Rose) एक ऐसा फूल है, जिसका पौधा कंटीला होने के बावजूद  फूल इतना मनमोहक होता है कि सबका दिल महक और सुंदरता से मोह लेता है। इसके मुग्ध रूप के अलावा औषधीय गुण भी अनगिनत हैं। आयुर्वेद में  गुलाब (Rose) का इस्तेमाल कई बीमारियों के लिए इलाज के रूप में प्रयोग किया जाता है। चलिये इसके बारे में आगे विस्तार से जानते हैं। 

गुलाब के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

गुलाब क्या है? 

गुलाब एक बहुवर्षीय, झाड़ीदार, कंटीला, पुष्पीय पौधा है जिसमें बहुत सुंदर सुगंधित फूल लगते हैं। इसकी 100 से अधिक जातियां हैं, जिनमें से अधिकांश एशियाई मूल की हैं। जबकि कुछ जातियों के मूल प्रदेश यूरोप, उत्तरी अमेरिका तथा उत्तरी पश्चिमी अफ्रीका भी है। भारत सरकार ने 12 फरवरी को 'गुलाब-दिवस' घोषित किया है। इसके फूलों से गुलकन्द तथा कई प्रकार के सुगन्धित इत्र बनाए जाते हैं।

गुलाब के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

जानते हैं गुलाब के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुणों के बारे में

इसका आँख, कान, तरह-तरह के चर्म रोग, बुखार के इलाज में आम तौर पर इस्तेमाल किया हाता है। गुलाब देखने में सुंदर होने के बावजूद, विशेष रूप से बिच्छु और साँप के विष के प्रभाव को कम करने में असरदार तरीके से काम करता है। गुलाब मधुर, कड़वा, तीखा, शीतल, लघु, चिकना, वातपित्त कम करने वाला, लिबिडो, हृदय संबंधी बीमारी, पौष्टिकता सोखने का गुण, रुचिकारक, खाना पचाने में सहायक, आँखों के लिए फायदेमंद, दीपन तथा रसायन गुण से भरपूर होता है। 

गुलाब के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

मुँह संबंधी रोगों के लिए 

गुलाब के फूलों का हिम बनाकर गरारा करने से मुँह के सूजन, सांस की बदबू, तथा गले के दर्द के इलाज में मदद मिलती है। इसके अलावा गुलाब के पत्तों को चबाने से भी मुँह और होंठों की सूजन कम होती है। 

सिर के घाव में

गुलाब के पत्तों को पीसकर लेप करने से सिर में होने वाले घाव में लाभ पहुँचाता है। 

गुलाब के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

पलको की सूजन कम करने में 

गुलाब के फूलों को पीसकर लगाने से पलकों की सूजन कम होने लगती है। 

दांत संबंधी समस्या

गुलाब के फूलों की पंखुड़ियों को दांत पर मलने से दांत संबंधी रोगों से निजात पाने में मदद मिलती है। इसके अलावा गुलाब के अर्क को 2-2 बूंद आंखों में डालने से आँखों के बीमारी से राहत दिलाने में बहुत फायदेमंद होता है। 

ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) के इलाज में फायदेमंद

गुलाब के फूलों का प्रयोग फेफड़ों की बीमारी, टी.बी. की चिकित्सा में किया जाता है। इससे इस रोग के इलाज में मदद मिलती है। 

गुलाब के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

पेट संबंधी रोग में फायदेमंद

2-4 ग्राम गुलाब फूल के चूर्ण को शहद के साथ सेवन करने से कब्ज, उदावर्त तथा अतिसार या दस्त में लाभ होता है। 

गुदाशोथ के इलाज में लाभकारी

गुलाब के फूलों के तेल में पकाकर, छानकर, तेल को गुदा पर लगाने से गुदा की सूजन कम हो जाती है। 

यकृत रोग के इलाज में

लाल गुलाब के फूलों का प्रयोग रक्तज-विकार तथा यकृत् से संबंधित बीमारियों की चिकित्सा में किया जाता है। 

गुलाब के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

कुष्ठ के इलाज में

गुलाब के फूल कई रंग के होते हैं, उसमें सफेद रंग का फूल कुष्ठ के इलाज में काम आता है। सफेद गुलाब के पुष्पों को पीसकर लगाने से कुष्ठ तथा अन्य पित्तज विकार नष्ट होते हैं। 

चेचक के इलाज में फायदेमंद

गुलाब के फूलों को सुखाकर चूर्ण या पाउडर की तरह बनाकर चेचक से पीड़ित व्यक्ति के बिस्तर पर डालने से चेचक के व्रण या घाव जल्दी सूख जाते हैं। 

घाव को ठीक करने में

गुलाब के फलों को पीसकर घाव के ऊपर डालने से घाव से बहता हुआ खून कम होने लगता है और घाव जल्दी सूखने लगता है। 

बुखार से राहत दिलाने में

अगर बुखार कम होने का नाम नहीं ले रहा है तो गुलाब से बने गुलकन्द का सेवन करने से पित्त ज्वर में लाभ होता है। 

गुलाब के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

शीतपित्त के इलाज में

15-25 ग्राम गुलकन्द में 2 ग्राम सौंफ चूर्ण तथा 10 मिली सिरका मिलाकर सुबह शाम दो बार खिलाने से शीतपित्त में लाभ होता है। 

बिच्छु के विष के असर को कम करने में 

लाल गुलाब के फूलों को पीसकर दंश स्थान पर लगाने से वृश्चिक दंश जन्य वेदना तथा सूजन से राहत मिलती है।

सांप के विष को कम करने में

गुलाब की जड़ को पीसकर सर्पदंश स्थान पर लगाने से दंश के कारण होने वाली वेदना (पीड़ा), दाह (जलन) तथा शोथ (सूजन) में लाभ होता है। 

गुलाब के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

विभिन्न भाषाओं में गुलाब के नाम

गुलाब का वानास्पतिक नाम Rosa centifolia (रोजा सेन्टिफोलिया) 

Sanskrit -    तरुणी, देवतरुणी, शतपत्री, कर्णिका, चारुकेशरा, गन्धाढ्या, महाकुमारी, लाक्षापुष्पा; 
Hindi -       गुलाब; 
Kannada -  गुलाबि (Gulabi); 
Gujrati -     गुलाब (Gulab); 
Tamil -      इरोजा (Irosa), रोजा (Roja), गोलप्पु (Golappu); 
Telugu -   गुलाबीपुवु (Gulabipuvu), रोजापुत्वू (Rojaputvu); 
Bengali -  गोलाम (Golam), गोलाप (Golap); 
Nepali -    गुलाब (Gulab); 
Punjabi -  गुलाब (Gulab), गुलेसुर्ख (Gulesurkh); 
Malayalam -गुलाबपुष्पम (Gulabpushpam), पनीनिरपुष्पम (Paninirpushpam)।
English -  Cabbage rose, Hundred leaved rose, French rose, Provence rose
Arbi -        वर्द (Vard), अलिका (Alika); 
Persian -  गुले सुर्ख (Gule surkh), गुल (Gul)

गुलाब का इस्तेमाल कैसे करना चाहिए (How to Use Gulab in Hindi)

यदि आप किसी ख़ास बीमारी के घरेलू इलाज के लिए गुलाब का इस्तेमाल करना चाहते हैं तो बेहतर होगा कि किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही इसका उपयोग करें। चिकित्सक के सलाह के अनुसार 3-6 ग्राम चूर्ण, 20-40 मिली (गुलाब अर्क) अर्क, 10-20 ग्राम गुलकंद (गुलाब की पंखुड़ी से बने) ले सकते हैं। 

गुलाब के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

गुलाब के नुकसान (Side Effects of Oleander)

गुलाब का कोई भी नुकसान नहीं होता है, सिवाय इसके कि उसके तनों में कांटे होते हैं। 

English Translate

Gulab : Rose

The most beautiful gift of nature is the rose, the king of flowers. On hearing the name of rose, a slight smile comes on the lips, isn't it? Its beauty and aroma are mind-blowing. Rose is such a flower, whose plant despite being thorny, the flower is so adorable that everyone's heart is fascinated by the fragrance and beauty. Apart from its enchanting form, medicinal properties are also innumerable. Rose is used in Ayurveda as a treatment for many diseases. Let us know about it in further detail.

गुलाब के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

What is rose?

Rose is a perennial, bushy, thorny, flowering plant with very beautiful fragrant flowers. It has over 100 species, most of which are of Asian origin. While the native regions of some species are also Europe, North America and North West Africa. The Government of India has declared February 12 as 'Rose-Day'. Gulkand and many types of fragrant perfumes are made from its flowers.

Know about the advantages, disadvantages, uses and medicinal properties of roses

गुलाब के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

It is commonly used in the treatment of eye, ear, various skin diseases, fever. Rose, though beautiful to look at, works especially effectively in reducing the effects of scorpion and snake venom. Rose is sweet, bitter, pungent, cold, short, oily, reducing gastritis, libido, heart disease, nutrient absorption, palatable, helpful in digestion, beneficial for eyes, rich in light and chemical properties.

for oral diseases

Gargling with rose flowers by making snow helps in the treatment of swelling of the mouth, bad breath, and sore throat. Apart from this, chewing of rose leaves also reduces swelling of the mouth and lips.

in head wound

Grinding rose leaves and applying it provides relief in head wounds.

to reduce swelling of the eyelids

Grinding rose flowers and applying it reduces the swelling of the eyelids.

गुलाब के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

dental problem

Rubbing the petals of rose flowers on the teeth helps in getting rid of dental diseases. Apart from this, putting 2-2 drops of rose extract in the eyes is very beneficial in getting relief from eye disease.

Beneficial in treating tuberculosis (TB)

Use of rose flowers to treat lung disease, TB is used in medicine. This helps in the treatment of this disease.

Beneficial in stomach related diseases

Taking 2-4 grams powder of rose flower with honey is beneficial in constipation, bloating and diarrhea or diarrhoea.

Beneficial in treating anus

Cooking in rose flower oil, filtering, applying the oil on the anus, reduces the swelling of the anus.

in the treatment of liver disease

Red rose flowers are used in the treatment of blood disorders and diseases related to liver.

गुलाब के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

in the treatment of leprosy

Rose flowers are of many colours, white colored flower is used in the treatment of leprosy. Leprosy and other pittaja disorders are destroyed by applying the powder of white rose flowers.

Beneficial in the treatment of smallpox

After making dry rose flowers like powder or powder, putting them on the bed of a person suffering from smallpox, the ulcers or wounds of smallpox dry up quickly.

to heal wounds

Grinding the fruits of rose and putting it on the wound, the blood flowing from the wound starts decreasing and the wound starts drying up quickly.

to relieve fever

If the fever is not taking its name, then consuming Gulkand made from roses is beneficial in gall fever.

गुलाब के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

in the treatment of hives

Mixing 2 grams fennel powder and 10 ml vinegar in 15-25 grams of gulkand and feeding it twice in the morning and evening, it is beneficial in cold pitta.

To reduce the effect of scorpion venom

Grinding red rose flowers and applying it on the bite provides relief from pain and swelling due to Scorpio bite.

reducing snake venom

Grinding the root of rose and applying it on the snakebite place is beneficial in pain (pain), burning (burning) and inflammation (swelling) caused by the bite.

गुलाब के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

तेनालीराम - बाढ़ और राहत बचाव कार्य। Tenali Raman - Baadh Aur Bachav Karya

बाढ़ और राहत बचाव कार्य

एक बार की बात है, महाराज कृष्णदेव राय के राज्य विजयनगर में बहुत भयानक बाढ़ आई। इस बाढ़ में राज्य के कई गांव डूब गए। इस वजह से राज्य का काफी नुकसान हुआ। इस प्राकृतिक आपदा के बारे में जब महाराज कृष्णदेव राय को पता चला, तो उन्होंने एक मंत्री को फौरन बाढ़ से पीड़ित लोगों की मदद करने का आदेश दिया और कहा, ‘बाढ़ से हुए नुकसान को पूरा करने के लिए जितने भी धन की जरूरत हो, वह उसे शाही खजाने से निकलवा ले। मगर, जल्द से जल्द सभी पीड़ितों की सहायता की जाए। साथ ही कृष्णदेव ने मंत्री से बाढ़ की वजह से टूटे पुल, सड़क और लोगों के घरों की मरमम्त कराने को भी कहा।’

तेनालीराम - बाढ़ और राहत बचाव कार्य। Tenali Raman - Baadh Aur Bachav Karya

महाराज का आदेश पाकर मंत्री ने शाही खजाने से ढेर सारा धन निकाला और लंबे समय के लिए गायब हो गया। काफी समय तक मंत्री के दिखाई न देने पर महाराज और अन्य दरबारियों को लगा कि मंत्री बाढ़ पीड़ितों की मदद करने में जुटा होगा, इस वजह से वह इतने दन से दिखाई नहीं दिया।

मगर, तेनालीराम को मंत्री का लंबे समय तक गायब होना हजम नहीं हुआ। इसलिए तेनालीराम ने मंत्री के गायब होने की असल हकीकत जानने का मन बनाया। इसके बाद से तेनालीराम रोज की तरह दिन में दरबार पहुंचता और रात को राज्य में शामिल सभी गांवों में घूमकर किए गए राहत कार्य का मुआयना करता।

कुछ हफ्तों के बाद एक दिन मंत्री जी दरबार में हाजिर हुए और गांव में किए गए अपने काम को महाराज कृष्णदेव के सामने बढ़ा-चढ़ा कर बताने लगे। यह सब सुनकर महाराज और दरबार में मौजूद अन्य मंत्री बहुत खुश हुए। सभी नें मंत्री के काम की काफी प्रसंशा की। वहीं तेनालीराम ने भी सभी के सुर में सुर मिलाते हुए मंत्री की प्रशंसा कर दी। कुछ देर बाद जब दरबार का कार्य खत्म हुआ। सभी दरबारी अपने-अपने घर चले गए, लेकिन तेनालीराम वहीं अपनी जगह पर बिल्कुल शांत बैठा रहा।

तेनालीराम को इस स्थिति में देख महाराज कृष्णदेव ने पूछा, ‘तेनालीराम तुम घर क्यों नहीं गए, क्या बात है?’

इसपर तेनालीराम बोला, ‘महाराज मंत्री ने राज्य में जो राहत और बचाव कार्य किया वह अपनी जगह है, लेकिन यदि आप प्रजा से मिलेंगे तो उन्हें इससे ज्यादा खुशी होगी।’

तेनालीराम की यह बात महाराज को पसंद आई। उन्होंने अगले दिन ही तेनालीराम के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने का फैसला किया।

अगले दिन सुबह होते ही महाराज और तेनालीराम बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के लिए तैयार हो गए। दोनों ने अपने-अपने घोड़े की सवारी की और आगे बढ़ने लगे। कुछ दूरी पर महाराज रूक गए और चौंककर तेनालीराम से पूछा, ‘ये शाही बाग में लगे सुंदर पेड़ और फलदार वृक्ष कहां गए?’ तेनाली ने कटाक्ष करते हुए कहा, ‘हो सकता है महाराज यह पेड़ बाढ़ के साथ बह गए हो।’

तेनालीराम की यह बात सुनकर महाराज खामोश हो गए और आगे बढ़ने का इशारा किया। दोनों कुछ दूर आगे बढ़ ही पाए थे कि महाराज की नजर वहां मौजूद नालों पर पड़ी। नालों पर मंत्री जी को पुल बनवाने को कहा गया था, लेकिन वहां पुल की जगह पेड़ों के तने डाले गए थे। महाराज समझ गए कि मंत्री ने शाही बागों के वृक्षों के तनों को नालों पर डलवा दिया है।

तभी तेनालीराम ने चुटकी ली और बोला, ‘महाराज हो सकता है कि बाढ़ के कारण पेड़ के तने यहां आ गए और अटक गए। मंत्री जी जिस पुल के निर्माण की बात कर रहे थे, वह आगे होगा।’

इस पर भी महाराज कुछ नहीं बोले और आगे बढ़कर एक गांव में पहुंचे। गांव में चारो ओर बाढ़ का पानी भरा हुआ था। वहां मौजूद लोग बाढ़ के कारण बेहाल थे। कुछ लोगों जान बचाने के लिए अपने घरों पर पड़ी खपरैल पर चढ़े हुए थे, तो कुछ पेड़ों पर रह रहे थे।

यह नजारा देख तेनालीराम बोला, ‘देखिए महाराज! मंत्री ने इन लोगों को पेड़ों और घर की छतों पर चढ़ा दिया है, ताकि भविष्य में भी इन्हें बाढ़ से कोई नुकसान न पहुंचे।’

अब महाराज कृष्णदेव राय के सब्र का बांध टूट गया और वह गुस्सा से तिलमिला उठे। बिना देर किए वह वापस अपने महल आए और उस मंत्री को दरबार में हाजिर होने का संदेश भिजवा दिया।

मंत्री डरते-डरते दरबार पहुंचा। उसे देख महाराज का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने मंत्री को खूब फटकार लगाई और जल्द से जल्द सारा धन शाही खजाने में जमा कराने का आदेश दिया। वहीं महाराज ने अब राज्य में राहत और बचाव कार्य कराने का जिम्मा तेनालीराम को सौंपा दिया। साथ ही उसे धन के हिसाब-किताब का भी काम दिया और मंत्री किनारे मुंह लटकाए खड़ा रहा।

English Translate

flood relief and rescue operations

Once upon a time, there was a terrible flood in Vijayanagara, the kingdom of Maharaja Krishna Deva Raya. Many villages in the state were submerged in this flood. Due to this, the state suffered a lot. When Maharaja Krishna Deva Raya came to know about this natural calamity, he immediately ordered a minister to help the people affected by the floods and said, 'All the money needed to cover the damage caused by the floods,' Get him out of the royal treasury. But all the victims should be helped as soon as possible. Along with this, Krishnadev also asked the minister to repair the broken bridge, road and people's houses due to floods.

तेनालीराम - बाढ़ और राहत बचाव कार्य। Tenali Raman - Baadh Aur Bachav Karya

The minister took out a lot of money from the royal treasury after getting the Maharaj's order and disappeared for a long time. After the minister was not visible for a long time, Maharaj and other courtiers felt that the minister would be busy helping the flood victims, due to this he did not appear for so long.

However, Tenaliram could not digest the long disappearance of the minister. So Tenaliram made up his mind to know the real reality of the minister's disappearance. Since then, Tenaliram would reach the court as usual during the day and visit all the villages in the state at night to inspect the relief work.

After a few weeks, one day the minister appeared in the court and began to exaggerate his work done in the village in front of Maharaja Krishnadev. Hearing all this, the Maharaj and the other ministers present in the court were very happy. Everyone greatly appreciated the work of the minister. At the same time, Tenaliram also praised the minister, shaking everyone's tone. After some time when the work of the court was over. All the courtiers went to their respective homes, but Tenaliram remained silent at his place there.

Seeing Tenaliram in this condition, Maharaja Krishnadeva asked, 'Tenaliram, why didn't you go home, what's the matter?'

To this, Tenaliram said, 'The relief and rescue work done by Maharaj Minister in the state has its place, but if you meet the people, they will be more than happy.'

Maharaj liked this thing of Tenaliram. He decided to visit the flood affected areas with Tenaliram the very next day itself.

The next morning, Maharaj and Tenaliram agreed to visit the flood-affected areas. Both of them rode their respective horses and started moving forward. At some distance, Maharaj stopped and asked Tenaliram in shock, 'Where did these beautiful trees and fruit trees in the royal garden go?' Tenali said with a sarcasm, 'Maharaj, this tree may have been washed away by the flood.'

On hearing this talk of Tenaliram, Maharaj became silent and gestured to move forward. Both of them were able to move forward some distance that Maharaj's eyes fell on the drains present there. The minister was asked to build a bridge over the drains, but instead of the bridge, tree trunks were inserted. Maharaj understood that the minister had got the trunks of the trees of the royal gardens dumped on the drains.

Then Tenaliram quipped and said, 'Maharaj, it may be that due to the flood, the trunk of the tree came here and got stuck. The bridge that the minister was talking about will be built next.

Even on this the Maharaj did not say anything and went ahead and reached a village. There was flood water all around the village. The people present there were suffering due to the flood. Some people were climbing on the tiles lying on their houses to save their lives, while some were living on the trees.

Seeing this sight, Tenaliram said, 'Look, my lord! The minister has mounted these people on trees and on the roofs of the house, so that in future also they are not harmed by floods.

तेनालीराम - बाढ़ और राहत बचाव कार्य। Tenali Raman - Baadh Aur Bachav Karya

Now the dam of patience of Maharaja Krishnadev Raya broke and he trembled with anger. Without delay, he came back to his palace and sent a message to that minister to be present in the court.

The minister reached the court in fear. Seeing him, Maharaj got angry. He reprimanded the minister and ordered to deposit all the money in the royal treasury at the earliest. At the same time, Maharaj has now entrusted the task of carrying out relief and rescue work in the state to Tenaliram. Along with this, he was also given the task of accounting for money and the minister stood hanging on the side.

सदा सच बोलो / साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप

सदा सच बोलो

झूठ बोलने का तात्पर्य कुछ ऐसा कहने से होता है, जो व्यक्ति जानता है कि गलत है या जिसकी सत्यता पर व्यक्ति ईमानदारी से विश्वास नहीं करता और यह इस इरादे से कहा जाता है कि व्यक्ति उसे सत्य मानेगा। 

सदा सच बोलो / साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप

सदा सच बोलने का पाठ हमें बचपन से पढाया जाता है, पर हमें सबसे बडा झटका उस वक्त लगता है, जब सच बोलने पर हमें पहली बार डांट पडती है और यहीं से हमारे सामाजिक जीवन में झूठ की एंट्री होती है। छोटी उम्र में ही हमें किताबी उपदेशों और व्यावहारिक जीवन का फर्क बखूबी समझ आने लगता है।

सच बोलना सचमुच बहुत अच्छी बात है, लेकिन ऐसा सच किस काम का जिससे किसी मासूम बच्चे का दिल टूट जाए, किसी के रिश्ते में दरार पड जाए..। ऐसा सच, सच तो जरूर है, पर प्रिय नहीं। तभी तो कहा गया है-

सदा सच बोलो / साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप
सत्यम् प्रियम् ब्रूयात्,
न ब्रूयात् सत्यम् अप्रियम्।
प्रियंच नानृतम् ब्रूयात्
एष धर्म: सनातना।।

मानव-स्वभाव को ध्यान में रखते हुए कहा जा सकता है कि अपनी सुविधाओं के अनुसार मनुष्य झूठ बोलने से बाज नहीं आता, जिससे उसे तो राहत मिल जाती है, लेकिन व्यापक स्तर पर अन्य सदस्यों को इसकी कीमत चुकानी पड़ती है, इसलिए लोगों के बीच यह सूक्ति प्रचलित एवं प्रचारित है कि ‘सच बोलने से बड़ा दूसरा कोई तप (तपस्या) नहीं और झूठ बोलने से बड़ा कोई पाप नहीं’ ।

कहा जा सकता है कि सत्य बोलना बहुत हद तक सामाजिक मूल्यों की कुंजी है, जिससे सभी सामाजिक मूल्य सम्बन्धित हैं । इसके ठीक विपरीत झूठ बोलना सबसे बढ़ा व्यक्तिगत एवं सामाजिक दुर्गुण है ।

सदा सच बोलो / साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप

राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के दर्शन के दो ही मूल आधार हैं- सत्य एवं अहिंसा । गाँधीजी ने इस तथ्य को पहचाना कि यदि लोगों में सत्य के प्रति आस्था जगा दी जाए, तो समाज की नैतिकता का स्तर स्वतः ही अत्यधिक ऊँचा उठ जाएगा ।

सभी नैतिकताओं की जड़ यही है, इसलिए उन्होंने सत्य बोलने पर इतना अधिक जोर दिया । वस्तुतः सत्य के मार्ग पर चलने वाले साहसी एवं वीर, जबकि सत्य से दूर भागने वाले भीरु एवं कायर कहलाते हैं ।

सत्य आत्मसम्मान का प्रतीक है और यह मनुष्य को स्वाभिमानी बनाता है, जबकि असत्य आत्मग्लानि को विकसित करता है । ‘सत्य’ को ‘ईश्वर’ का पर्याय मानते हुए ‘कबीरदास’ ने कहा है-

सदा सच बोलो / साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप
साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप ।
जाके हिरदै साँच है, ताके हिरदै आप ।।”

आज के उत्तर-आधुनिक समाज में जहाँ उपभोक्तावादी संस्कृति की प्रधानता के कारण भौतिक सुख-सुविधाओं की उपलब्धि ही एकमात्र अन्तिम लक्ष्य बन गया है, वहाँ भौतिक सफलताओं की प्राप्ति के लिए झूठ बोलना एक सामान्य प्रचलन है ।

ऐसी स्थिति में समाज के सदस्यों की नैतिकता का पतन अपरिहार्य है। आज सामाजिक मूल्यों का ह्रास स्पष्टतः परिलक्षित है। सामाजिक मूल्यों को क्षयशील होने से बचाने के लिए ‘सत्यता’ का पालन करना अनिवार्य है, हालाँकि सत्य कथन का पालन करना सबसे कठिन ‘तप’ है ।

English Translate

always speak the truth

Lying refers to saying something that a person knows is wrong or the truth of which the person does not sincerely believe and it is said with the intention that the person will believe it to be true.

The lesson of always telling the truth is taught to us from childhood, but we get the biggest shock when we get scolded for the first time for speaking the truth and from here the entry of lies in our social life. At an early age, we begin to understand the difference between book teachings and practical life.

Telling the truth is really a good thing, but what is the use of such a truth that breaks the heart of an innocent child, breaks someone's relationship... Such is the truth, of course it is true, but not dear. That's why it is said-

सदा सच बोलो / साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप

Satyam Priyam Bruyat,
Na bruyat satyam apriyam.
Priyancha Nanritham Bruyat
Ash Dharma: Sanatana.

Keeping in mind the human nature, it can be said that according to his convenience, a man does not desist from lying, which gives him relief, but on a large scale other members have to pay the price, so there is a difference between the people. This proverb is popular and propagated that 'there is no greater austerity (penance) than telling the truth and there is no greater sin than telling a lie'.

It can be said that speaking the truth is to a large extent the key to social values, to which all social values ​​are related. On the contrary, lying is the biggest personal and social evil.

The philosophy of the Father of the Nation Mahatma Gandhi has only two basic foundations - truth and non-violence. Gandhiji recognized the fact that if the faith in the truth is instilled in the people, the morality level of the society would automatically rise to a very high level.

This is the root of all morality, which is why he laid so much emphasis on speaking the truth. In fact, those who walk on the path of truth are called courageous and brave, while those who run away from truth are called fearful and cowardly.

Truth is a sign of self-respect and makes a man self-respecting, whereas falsehood develops self-contempt. Considering 'Truth' as ​​synonymous with 'God', 'Kabir Das' has said-

सदा सच बोलो / साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप
Mold does not equal penance, lie equals sin.
Jake hirdai saanch hai, ke hirdai you aap.

In today's post-modern society, where the achievement of material comforts has become the only ultimate goal due to the predominance of consumerist culture, there is a common practice to lie for the attainment of material successes.

In such a situation the degradation of morality of the members of the society is inevitable. Today the decline of social values ​​is clearly reflected. To save social values ​​from decaying, it is necessary to follow 'truthfulness', although the most difficult to follow truth statement is 'tapas'.