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चाय पियो कुल्लड़ खाओ || Chai Piyo Kulhad Khao ||

चाय पियो कुल्लड़ खाओ

चाय के शौकीनों के लिए कुल्हड़ में चाय पीना कोई खास बात नही है, पर क्या आपने कभी कुल्हड़ को खाया भी है? है न चौंकाने वाली खबर!!! जी हां ऐसा ही कुछ नजारा देखने को मिला प्रयागराज के किसान मेला में। प्रयागराज के पटेल सेवा संस्थान में 9 दिवसीय किसान मेला चल रहा है। इस किसान मेले में किसानों से संबंधित हर दुकानों की स्टाल लगी है। उन्हीं स्टालों में कुल्हड़ वाली चाय की दुकान लोगों को अपनी ओर खींच रही है। 

चाय पियो कुल्लड़ खाओ || Chai Piyo Kulhad Khao ||

एक तो स्वादिष्ट चाय दूसरे कुल्हड़ खाने की सुविधा, मेले में आने वाले लोगों के लिए उपलब्ध है। उत्तर प्रदेश के देवरिया से आई महिला समूह की महिलाओं ने इस किसान मेले में "चाय पियो कुल्लड़ खाओ" की स्टाल खोली है,जिसमें ऑर्गेनिक चाय के साथ खास तरीके के बने चॉकलेटी स्वाद के कुल्हड़ में ग्राहकों को चाय दिया जा रहा है। चाय तो लोगों को खूब पसंद आ रही है, वहीं इसके कुल्लड़ का स्वाद भी लोगों को खूब भा रहा है।


चाय पियो कुल्लड़ खाओ || Chai Piyo Kulhad Khao ||

कुल्हड़ की ये है खासियत

"चाय पियो कुल्हड़ खाओ" सुनने में बड़ा अजीब सा लग रहा है, पर ये अब बात सच है क्योंकि अब एक ऐसा कुल्लड़ बनाया गया है, जिसमें हम चाय का आनंद ले सकेंगे साथ ही चॉकलेट की तरह उस कुल्हड़ को भी खा सकेंगे, जिससे कि अब इस बात की भी फिक्र नहीं होगी कि चाय बेचने वाले और चाय पीने वाले दोनों लोग कुल्हड़ कहां फेकेने और गंदगी नहीं होने के साथ किसी प्रकार का कोई प्रकृति को नुकसान नहीं पहुंचेगा। दुकादार को ऑर्गेनिक चाय परोसने का ये फायदा है कि चाय की दुकान और आसपास गंदगी नहीं फैलेगी और स्वच्छता का भी ख्याल रखा जा सकेगा। यूँ कह लें कि स्वच्छता और सेहत का ख्याल रखते हुए इस कुल्लड़ को बनाया गया है। यह कुल्हड़ स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा बनाया गया है, जिन्होंने इसे खेतों में उगाए गए मोटे अनाजों को मिलाकर बनाया है।

चाय पियो कुल्लड़ खाओ || Chai Piyo Kulhad Khao ||

इसको बनाते समय मडवा, मक्का, राई जैसे अनाजों का प्रयोग किया गया है। साथ ही इसमें चॉकलेट फ्लेवर को भी मिलाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और बढ़िया हो जाता है। फिलहाल यह कुल्हड़ अभी तो थोड़ा महंगा पड़ रहा है, लेकिन जैसे-जैसे मोटे अनाजों का उत्पादन किसान बढ़ाना शुरू करेंगे और यह कुल्हड़ चलन में आ जाएगा तो इसकी लागत कम हो जाएगी।

drink tea eat kulhad

Drinking tea in Kulhad is not a special thing for tea lovers, but have you ever eaten Kulhad? Isn't it shocking news!!! Yes, such a sight was seen in the Kisan Mela of Prayagraj. A 9-day Kisan Mela is going on at Patel Seva Sansthan in Prayagraj. In this farmer's fair, stalls of every shops related to farmers have been set up. The tea shop with Kulhad in the same stalls is attracting people towards itself.

चाय पियो कुल्लड़ खाओ || Chai Piyo Kulhad Khao ||

One, the facility of eating delicious tea and the other Kulhad, is available for the people coming to the fair. A women's group from Deoria, Uttar Pradesh has opened a stall "Chai Pyo Kullad Khao" in this Kisan Mela, in which tea is being served to the customers in specially made chocolate flavored kulhads made with organic tea. People are liking the tea very much, while the taste of its Kullad is also being liked by the people.

This is the specialty of the Kulhad

"Chai peo kulhad khao" sounds very strange to hear, but it is now true because now such a kulhad has been made, in which we will be able to enjoy tea as well as eat that kulhad like chocolate. That now there will be no worry about where both the tea seller and the tea drinker will throw the ax and there will be no pollution and no harm to nature. The advantage of serving organic tea to the shopkeeper is that dirt will not spread in and around the tea shop and cleanliness can also be taken care of. Just say that this Kullad has been made keeping in mind cleanliness and health. This kulhad is made by the women of the self-help group, who have made it by mixing coarse grains grown in the fields.

चाय पियो कुल्लड़ खाओ || Chai Piyo Kulhad Khao ||

Grains like Madwa, Maize, Rye have been used while making this. Along with this, chocolate flavor is also added to it, which makes it taste even better. At present, this kulhad is getting a bit expensive, but as soon as the farmers start increasing the production of coarse grains and this kulhad comes into use, its cost will come down.

दारुहरिद्रा | Daruharidra | दारूहल्दी |

दारुहरिद्रा (Daruharidra)

दारू क्या होती है यह तो सभी जानते होंगे, जो शरीर के लिए नुकसानदायक होती है पर क्या आप दारूहल्दी के बारे में जानते हैं जो हमारे लिए बेहद फायदेमंद होती है? दारू हल्दी का दूर-दूर तक दारू से कोई लेना देना नहीं है। यह एक बहुत ही उत्तम जड़ी बूटी है, जो बहुत वर्षों से हमारे आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में उपयोग में लाई जाती रही है। कई पुराने ग्रंथों में चिकित्सा के लिए दारुहरिद्रा के प्रयोग की व्याख्या मिलती है। दारूहल्दी को किनगोड़ भी कहा जाता है।

दारूहल्दी के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

दारूहल्दी अर्थात दारूहरिद्रा क्या है?

दारूहल्दी समुद्र तल से 1200 से 1800 मीटर की ऊंचाई पर उगने वाली एक कंटीली झाड़ी है। दारुहल्दी के तने की छाल खुरदरी खांचयुक्त होती है। इसके पत्ते लंबे चौड़े और चार्मिल होते हैं तथा गहरे हरे रंग के और चमकीले होते हैं। इसके फूल छोटे होते हैं और फल 7 से 10 मिली मीटर लंबे, अंडाकार, लाल या श्याम नीले रंग के होते हैं। इसमें फूल आने का समय मार्च से अप्रैल तथा फल आने का समय मई से जून तक का होता है।

जानते हैं दारूहल्दी के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुणों के बारे में

दारूहल्दी के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

आयुर्वेद में दारूहल्दी के का इस्तेमाल का प्रयोग कान की बीमारी, आंखों के रोग, घाव को सुखाने में, मुंह की बीमारी, चर्म रोग तथा डायबिटीज आदि रोगों में किया जाता है।

बुखार होने पर

दारू हल्दी की जड़ की छाल से काढ़ा बनाएं। 10 से 20 मिलीलीटर की मात्रा में इस काढ़े का सेवन करने से लाभ होता है।

घाव सुखाने के लिए

दारूहल्दी की जड़ की छाल को पीसकर घाव पर लगाने से घाव जल्दी सूख जाता है।

सूजन होने पर

दारू हल्दी की जड़ के पेस्ट को सूजन वाली जगह पर लगाने से लाभ होता है।

दारूहल्दी के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

मधुमेह रोग में

10 से 20 ग्राम दारूहल्दी का काढ़ा बनाकर सेवन करने से मधुमेह के रोग में लाभ होता है।

त्वचा संबंधी समस्या

त्वचा पर घाव, अल्सर, एक्ने आदि की समस्या होने पर नारियल के तेल में दारू हल्दी का चूर्ण मिलाकर प्रभावित स्थान पर लगाने से लाभ होता है।

जोड़ों के दर्द में

अगर जोड़ों में दर्द की समस्या है तो दारू हल्दी को दूध के साथ सेवन उबालकर पीने से लाभ होता है।

पीलिया होने पर

दारुहल्दी के 5-10 मिली रस में निम्बू के पत्ते के रस को 1 चम्मच मधु मिलाकर पीने से भी पीलिया में फायदा होता है।

एनीमिया में

सुबह दारुहल्दी के रस (5-10 मिली) या काढ़ा (10-30 मिली) में मधु मिलाकर सेवन करें। इससे एनीमिया में फायदा होता है। यह पीलिया में भी लाभ पहुंचाता है।
दारूहल्दी के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

विभिन्न भाषाओं में दारूहल्दी के नाम

दारुहरिद्रा का वानस्पतिक नाम बरबेरिस एरिस्टैटा (Berberis aristata DC., Syn-Berberis macrophylla K. Koch), बरबेरीडेसी (Berberidaceae) है। 

Hindi – दारुहलदी, दारुहरदी; उत्तराखण्ड-किंगोरा (Kingora)

English – इण्डियन बर्बेरी (Indian barberry), ट्री टरमेरिक (Tree turmeric), नेपाल बर्बेरी (Nepal barberry)  

Sanskrit – दार्वी, दारुहरिद्रा, पर्जन्या, पर्जनी, पीता, पीतद्रु, पीतद, पीतदारु, पीतक, हरिद्रव

Kannada – दोद्दामरदरिसिन (Doddamaradrisin), बगीसूट्रा (Bagisutra)

Gujarati – दारुहलदर (Daruhaldar)

Telugu – मानिपुसपु (Manipusupu), दारूहरिद्रा (Daruharidra), कस्थूरी पुष्पा (Kasthoori pushpa)

Tamil –  (berberis aristata in tamil) – मर मंजिल (Mar manjal), उसिक्कला (Usikkala)

Bengali – दारुहरिद्रा (Daruharidra)

Nepali – चित्रा (Chitra), केस्से (Kissie)

Punjabi – सुमलु (Sumalu), सीमलु (Simalu)

Marathi – दारुहल्दी (Daruhaldi), जरकि हलद (Jarki halad)

Malayalam (berberis aristata malayalam) – मरदारिसिना (Maradarisina), मरमांजल (Maramanjal)

Himichal Pradesh – काम्मुल (Kammul), काशमल (Kashmal)

Arabic – दार हल्द (Dar hald), आरगीस (Aargis);

Persian – दार चोब (Dar chob), चित्रा (Chitra), जिरिश्क (Zirishk)

दारूहल्दी के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

दारू हल्दी के नुकसान

  • दारू हल्दी रक्त में शर्करा के स्तर को कम करता है, इसलिए मधुमेह वाले लोग इसका उपयोग डॉक्टर की सलाह से करें। 
  • सीमित मात्रा में प्रयोग करने से इसका कोई भी नुकसान नहीं होता है।
English Translate

Daruharidra

Everyone must know what alcohol is, which is harmful for the body, but do you know about turmeric which is very beneficial for us? Daru Haldi has nothing to do with alcohol far and wide. It is a wonderful herb, which has been used in our Ayurvedic system of medicine for many years. Many old texts explain the use of Daruharidra for medicine. Daruhaldi is also known as Kingod.
दारूहल्दी के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

What is Daruhaldi i.e. Daruharidra?

Daruhaldi is a thorny shrub growing at an altitude of 1200 to 1800 meters above sea level. The bark of barberry stem is rough and grooved. Its leaves are long, wide and charmil and are dark green in color and shiny. Its flowers are small and the fruits are 7 to 10 mm long, oval, red or dark blue in colour. The flowering time is from March to April and the fruiting time is from May to June.

Know about the advantages, disadvantages, uses and medicinal properties of Daru Haldi

In Ayurveda, the use of turmeric is used in ear disease, eye disease, drying of wounds, mouth disease, skin disease and diabetes etc.

having a fever

Make a decoction from the bark of turmeric root. Consuming this decoction in the quantity of 10 to 20 ml is beneficial.

to dry wounds

Grinding bark of turmeric root and applying it on the wound dries it quickly.

when swollen

Applying the paste of turmeric root on the swollen area is beneficial.

in diabetes

Consuming a decoction of 10 to 20 grams of turmeric is beneficial in diabetes.

skin problem

If there is a problem of wound, ulcer, acne etc. on the skin, mixing liquor and turmeric powder in coconut oil and applying it on the affected area is beneficial.

in joint pain

If there is a problem of pain in the joints, then boiling turmeric with milk and drinking it is beneficial.

having jaundice

Drinking 5-10 ml juice of barberry mixed with 1 spoon of lemon leaf juice is also beneficial in jaundice.

in anemia

Take barberry juice (5-10 ml) or decoction (10-30 ml) mixed with honey in the morning. This is beneficial in anemia. It is also beneficial in jaundice.

कभी - कभी बेवजह कुण्डी खट-खटाया करो

 कभी - कभी बेवजह कुण्डी खट-खटाया करो

Rupa Oos ki ek Boond

"अपने हौसलों को ये मत बताओ कि तुम्हारी परेशानी कितनी बड़ी है,
 बल्कि अपनी परेशानी को ये बताओ कि तुम्हारा हौसला कितना बड़ा है..❣️"

आसपास के लोगों से मिलते रहा करो,

उनकी थोड़ी खैर खबर भी रखा करो..


जाने कौन कितने अवसाद में जी रहा है,

पता नहीं कौन बस पलों को गिन रहा है..


कभी निकलो अपने घरोदों से,

औरों के आशियानें में भी जाया करो..


कभी कभी अपने पड़ोसियों की कुण्डी,

तुम बेवजह ही खट-खटाया करो..


कभी यों ही किसी के कंधे पर हाथ रख,

साथ होने का अहसास दिलाया करो..


कभी बिन मतलब लोगों से बतियाया करो,

बिना जज किये बस सुनते जाया करो..


बहुत कुछ टूटे मिलेंगे, कुछ रूठे मिलेंगे,

जिन्दगी से मायूस भी मिलेंगे..


बस कुछ प्यारी सी उम्मीदें,

कभी उनके दिलों में जगाया करो..


ऐसा न हो फिर वक्त ही न मिले,

और मुट्ठी की रेत की तरह लोग फिसलते रहे..


यूं वक्त-बेवक्त ही सही,

लोगों को गले तो लगाया करो..


कभी कभी बेवजह कुण्डी खट-खटाया करो

Rupa Oos ki ek Boond
"त्याग के बिना कुछ भी पाना
संभव नहीं है, क्योंकि
एक सांस लेने के लिए भी पहली सांस
छोड़नी पड़ती है..❣️"

बिना विचारे जो करे : पंचतंत्र || Bina Vichare jo kare : Panchtantra ||

 बिना विचारे जो करे

अपरीक्ष्य न कर्तव्यं कर्तव्यं सुपरीक्षितम् । पश्चाद्भवति सन्तापो ब्राह्मण्या न कुलाद्य यथा । 

अपरीक्षित काम का परिणाम बुरा होता है

बिना विचारे जो करे : पंचतंत्र || Bina Vichare jo kare : Panchtantra ||

एक बार देवशर्मा नाम के ब्राह्मण के घर जिस दिन पुत्र का जन्म हुआ उसी दिन उसके घर में रहने वाली नकुली ने भी एक नेवले का जन्म दिया । देवशर्मा की पत्नी बहुत दयालु स्वभाव की स्त्री थी। उसने उस छोटे नेवले को भी अपने पुत्र के समान ही पाला-पोसा और बड़ा किया। यह नेवला सदा उसके पुत्र के साथ खेलता था। दोनों में बड़ा प्रेम था। देवशर्मा की पत्नी भी दोनों के प्रेम को देखकर प्रसन्न थी। किन्तु उसके मन में यह शंका हमेशा रहती थी कि कभी यह नेवला उसके पुत्र को न काट खाए। पशु के बुद्धि नहीं होती, मूर्खतावश वह कोई भी अनिष्ट कर सकता है।

एक दिन इस आशंका का बुरा परिणाम निकल आया। उस दिन देवशर्मा की पत्नी अपने पुत्र को एक वृक्ष की छाया में सुलाकर स्वयं पास के जलाशय से पानी भरने गई थी। जाते हुए वह अपने पति देवशर्मा से कह गई थी कि वहीं ठहरकर वह पुत्र की देख-रेख करे, कहीं ऐसा न हो कि नेवला उसे काट खाए। पत्नी के जाने के बाद देवशर्मा ने सोचा कि नेवले और बच्चे में गहरी मैत्री है, नेवला बच्चे को हानि नहीं पहुँचाएगा। यह सोचकर वह अपने सोए हुए बच्चे और नेवले को वृक्ष की छाया में छोड़कर स्वयं भिक्षा के लिए लोभ से कहीं चल पड़ा।

दैववश उसी समय एक काला नाग पास के बिल से बाहर निकला । नेवले ने उसे देख लिया। उसे डर हुआ कि कहीं यह उसके मित्र को न इस ले, इसलिए वह काले नाग पर टूट पड़ा, और स्वयं बहुत क्षत-विक्षत होते हुए भी उसने नाग के खण्ड-खण्ड कर दिए। साँप के मरने के बाद वह उसी दिशा में चल पड़ा, जिधर देवशर्मा की पत्नी पानी भरने गई थी। उसने सोचा कि वह उसकी वीरता की प्रशंसा करेगी, किन्तु हुआ उसके विपरीत । उसकी खून से सनी देह को देखकर ब्राह्मणी-पत्नी का मन उन्हीं पुरानी आशंकाओं से भर गया कि कहीं इसने उसके पुत्र की हत्या न कर दी हो। यह विचार आते ही उसने क्रोध से सिर पर उठाए घड़े को नेवले पर फेंक दिया। छोटा-सा नेवला जल से भरे घड़े की चोट खाकर वहीं मर गया। ब्राह्मण-पत्नी वहाँ से भागती हुई वृक्ष के नीचे पहुँची। वहाँ पहुँचकर उसने देखा कि उसका पुत्र बड़ी शान्ति से सो रहा है और उससे कुछ दूरी पर एक काले साँप का शरीर खण्ड-खण्ड हुआ पड़ा है। तब उसे नेवले की वीरता का ज्ञान हुआ। पश्चात्ताप से उसकी छाती फटने लगी।

इस बीच ब्राह्मण देवशर्मा भी वहाँ आ गया। वहाँ आकर उसने अपनी पत्नी को विलाप करते देखा तो उसका मन भी सशंक्ति हो गया। किन्तु पुत्र को कुशलतापूर्वक सोते देख उसका मन शान्त हुआ। पत्नी ने अपने पति देवशर्मा को रोते-रोते नेवले की मृत्यु का समाचार सुनाया और कहा- मैं तुम्हें यहीं ठहराकर बच्चे की देखभाल के लिए कह गई थी। तुमने भिक्षा के लोभ से मेरा कहना नहीं माना। इसी से यह परिणाम हुआ।

मनुष्य को अतिलोभ नहीं करना चाहिए। अतिलोभ से कई बार मनुष्य के मस्तक पर चक्र लग जाता है?

ब्राह्मण ने पूछा- यह कैसे ? ब्राह्मणी ने तब निम्न कथा सुनाई:

लालच बुरी बला

To be continued...


Lucknow G-20/ जी-20 और GIS (Global Investors Summit) शिखर सम्मेलन

जी - 20 और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 10 से 15 फरवरी को जी-20 और जीआईएस शिखर सम्मेलन का आयोजन होने हो रहा है। इस दौरान देश-विदेश के कई बड़े नेता राजधानी लखनऊ में शिरकत करेंगे। प्रदेश में 10 से 12 फरवरी तक ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और 13 से 15 फरवरी तक जी-20 की बैठकें हो रही हैं। 

Lucknow G-20/ जी-20 और GIS (Global Investors Summit) शिखर सम्मेलन

G 20 व GIS के दौरान देश विदेश के मेहमान राजधानी लखनऊ में होंगे। विदेशी मेहमानों को लुभाने के लिए जिला प्रशासन पूरे जोर-शोर से लगी हुई है। लखनऊ में हर जगह साफ सफाई अभियान चल रहे हैं। रोड किनारे सजावटी लाइटें लगाई जा रही हैं। रेलिंग तक भी चमकाये जा रहे हैं। सभी ऐतिहासिक इमारतों की नवीनीकरण की जा रही है। सड़क किनारे पेड़ों पर फसाद लाइट लगाई गई हैं। दीवारों पर वॉल पेंटिंग की जा रही है, जो लखनवी तहजीब को दर्शाती है। इसके साथ ही लखनऊ के डिवाइडर और सड़कों का भी सौंदर्यीकरण किया जा रहा है।

Lucknow G-20/ जी-20 और GIS (Global Investors Summit) शिखर सम्मेलन

लखनऊ के सड़कों के किनारे खूबसूरत फूलों के पौधे लगाए जा रहे हैं। लखनऊ की पहचान बड़ा इमामबाड़ा G -20 सम्मेलन में आ रहे विदेशियों को अपनी और आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला है। बड़ा इमामबाड़ा को दूधिया लाइट से जगमग किया गया है। इसकी खूबसूरती को बढ़ाने के लिए इसके आसपास की खाली पड़ी दीवारों पर भी वॉल पेंटिंग की गई है।

Lucknow G-20/ जी-20 और GIS (Global Investors Summit) शिखर सम्मेलन

भारत में स्वस्थ जीवन के लिए योग का हमेशा से ही प्रचार प्रसार होता रहा है। ऐसे में G 20 व जीआईएस से पहले योगा के विभिन्न आसनों को दर्शाती हुई मूर्तियां भी लगाई गई हैं।


जी -20 और GIS के मद्देनजर लखनऊ में 9 फरवरी से 16 फरवरी तक वीवीआईपी मूवमेंट के कारण बड़े पैमाने पर ट्रैफिक डायवर्जन रहेगा। इसके लिए लखनऊ डीसीपी ट्रैफिक की तरफ से कई दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं। 1 हफ्ते के लिए सुबह 7:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे कार्यक्रम की समाप्ति तक यह डायवर्जन लागू रहेगा।

प्रदेश में 10 से 12 फरवरी तक ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और 13 से 15 फरवरी तक जी-20 की बैठक के मद्देनजर लखनऊ मंडल के समूह क व ख के ज्यादातर अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। इस दौरान किसी भी महकमे में कार्य के प्रति कोई लापरवाही न हो, इसके लिए हर डिपार्टमेंट में अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए ऑफिस ऑर्डर जारी किए गए हैं। बीएसएनएल का ऑफिस ऑर्डर..

जी - 20 और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट

यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (UP Global Investors Summit)

आज दिनांक 10 फरवरी 2023 को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पीएम नरेंद्र मोदी यूपी के पहले अंतरराष्ट्रीय निवेशक सम्मेलन का शुभारंभ करेंगे। लखनऊ की वृंदावन योजना में सुबह 10:30 पर पीएम मोदी UP Global Investors Summit का उद्घाटन करेंगे। इसके साथ ही वह ग्लोबल ट्रेंड शो का लोकार्पण करेंगे और साथ ही प्रधानमंत्री इन्वेस्ट यूपी 2.0 भी लॉन्च करेंगे। आज (10 फरवरी 2023) सुबह 10:15 पर पीएम मोदी जीआईएस के आयोजन स्थल पर पहुंचकर 10:30 पर दीप प्रज्वलित कर इस कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे। इस मौके पर शीर्ष उद्यमी मुकेश अंबानी, कुमार मंगलम बिरला, चंद्रशेखरन और डेनियल भीषण यूपी में निवेश के संबंध में बड़ी घोषणाएं करेंगे। इस कार्यक्रम में भारत और लगभग 41 देशों के लगभग 10000 प्रतिनिधि भाग लेंगे। 

G - 20 है क्या?

1999 में एशियाई वित्तीय संकट के बाद वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नर रोग के लिए वैश्विक आर्थिक और वित्तीय मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक मंच के रूप में जी -20 की स्थापना की गई थी। G -20 शिखर सम्मेलन प्रतिवर्ष क्रमिक अध्यक्षता में आयोजित किया जाता है। प्रारंभ में जी-20 व्यापक आर्थिक मुद्दों पर केंद्रित था, परंतु बाद में इसके एजेंडे में विस्तार हुआ और इसमें अन्य बातों के साथ व्यापार, जलवायु परिवर्तन, सतत विकास, स्वास्थ्य, कृषि ऊर्जा, पर्यावरण, जलवायु प्रदूषण और भ्रष्टाचार विरोध शामिल किया गया। 

Lucknow G-20/ जी-20 और GIS (Global Investors Summit) शिखर सम्मेलन

ग्रुप ऑफ ट्वेंटी (G20) बीस वित्त मंत्रियों और सेंट्रल बैंक के गवर्नर्स का समूह है, जो कि विश्व की 20 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के वित्त मंत्रीयों और केंद्रीय बैंक के गवर्नर्स का एक संगठन है, जिसमें 19 देश (भारत, अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, इंडोनेशिया, इटली, जापान, कोरिया गणराज्य, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्किये, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका) और यूरोपीय संघ शामिल हैं। 

प्रत्येक वर्ष स्पेन के अलावा, जी-20 के मेहमानों में आसियान देशों के अध्यक्ष, दो अफ्रीकी देश (अफ्रीकी संघ के अध्यक्ष और अफ्रीका के विकास के लिए नई साझेदारी के प्रतिनिधि) और एक देश (कभी-कभी एक से अधिक) जी-20 के अध्यक्ष द्वारा आमंत्रित किया जाता है। आमतौर पर वे अपने ही क्षेत्र से होते हैं। भारत 30 दिसम्बर 2023 तक G20 का अध्यक्ष बना रहेगा जिसके अध्यक्ष श्री नरेन्द्र दामोदर दास मोदी हैं। 

English Translate

G-20 and Global Investors Summit

The G-20 and GIS summit is being organized from February 13 to 15 in Lucknow, the capital of Uttar Pradesh. During this, many big leaders of the country and abroad will participate in the capital Lucknow. Global Investors Summit and G-20 meetings are being held in the state from February 10 to 12 and from February 13 to 15.

During the G20 and GIS, guests from the country and abroad will be in the capital Lucknow. To woo foreign guests, the district administration is busy in full swing. Cleanliness drives are going on everywhere in Lucknow. Decorative lights are being installed along the road. Even the railings are being polished. All historical buildings are being renovated. Fasad lights have been installed on the roadside trees. Wall painting is being done on the walls, which reflects the Lucknowi Tehzeeb. Along with this, the dividers and roads of Lucknow are also being beautified. Saplings of beautiful flowers are being planted along the roads of Lucknow. Bada Imambara, the identity of Lucknow, is going to play an important role in attracting more foreigners coming to the G-20 conference. Bara Imambara is illuminated with milky lights. To enhance its beauty, wall painting has also been done on the vacant walls around it.

Lucknow G-20/ जी-20 और GIS (Global Investors Summit) शिखर सम्मेलन

Yoga has always been promoted for a healthy life in India. In such a situation, before G 20 and GIS, sculptures depicting various asanas of Yoga have also been installed.

In view of G-20 and GIS, there will be massive traffic diversion in Lucknow from February 9 to 16 due to VVIP movement. For this, many guidelines have also been issued by Lucknow DCP Traffic. This diversion will be in force for 1 week from 7:00 am till the end of the program at 3:00 pm.

Lucknow G-20/ जी-20 और GIS (Global Investors Summit) शिखर सम्मेलन

UP Global Investors Summit

Today, on 10 February 2023, PM Narendra Modi will inaugurate UP's first international investor conference in Lucknow, the capital of Uttar Pradesh. PM Modi will inaugurate the UP Global Investors Summit at 10:30 am in Lucknow's Vrindavan scheme. Along with this, he will inaugurate the Global Trend Show and also launch Prime Minister Invest UP 2.0. Today (10 February 2023) at 10:15 am, PM Modi will inaugurate this program by lighting the lamp at 10:30 after reaching the venue of GIS. On this occasion, top entrepreneurs Mukesh Ambani, Kumar Mangalam Birla, Chandrasekharan and Daniel Bhishan will make big announcements regarding investment in UP. Around 10000 delegates from India and around 41 countries will participate in this event.

What is G-20?

The G-20 was established after the Asian financial crisis in 1999 as a forum for finance ministers and central bank governors to discuss global economic and financial issues. The G-20 summit is held annually under successive presidency. Initially the G20 focused on macroeconomic issues, but later its agenda expanded to include, inter alia, trade, climate change, sustainable development, health, agriculture, energy, the environment, climate pollution and anti-corruption.

The Group of Twenty (G20) is a group of twenty finance ministers and central bank governors, an association of finance ministers and central bank governors from 20 of the world's major economies, including 19 countries (India, Argentina, Australia, Brazil, Canada, China, France, Germany, Indonesia, Italy, Japan, Republic of Korea, Mexico, Russia, Saudi Arabia, South Africa, Turkey, the United Kingdom and the United States) and the European Union.

Lucknow G-20/ जी-20 और GIS (Global Investors Summit) शिखर सम्मेलन

In addition to Spain, each year the G-20 guests include the presidents of the ASEAN countries, two African countries (the chair of the African Union and the representative of the New Partnership for Africa's Development) and one country (sometimes more than one) from the G-20. is invited by the Chairman. Usually they are from their own region. India will continue to chair the G20 till 30 December 2023, which is headed by Shri Narendra Damodar Das Modi.

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श्रीमद्भगवद्गीता ||अध्याय छः - आत्मसंयमयोग || अनुच्छेद 33 - 47 ||

 श्रीमद्भगवद्गीता ||अध्याय छः - आत्मसंयमयोग ||

अथ षष्ठोऽध्यायः  ~ आत्मसंयमयोग 

अध्याय छः के अनुच्छेद 33 - 47

अध्याय छः के अनुच्छेद 33-36 में मन के निग्रह विषय का वर्णन है। 

संपूर्ण श्रीमद्भगवद्गीता || Sampurn Shrimad Bhagwat Geeta ||

अर्जुन उवाच

योऽयं योगस्त्वया प्रोक्तः साम्येन मधुसूदन ।
एतस्याहं न पश्यामि चञ्चलत्वात्स्थितिं स्थिराम्‌ ॥

भावार्थ : 

अर्जुन बोले- हे मधुसूदन! जो यह योग आपने समभाव से कहा है, मन के चंचल होने से मैं इसकी नित्य स्थिति को नहीं देखता हूँ॥33॥

चञ्चलं हि मनः कृष्ण प्रमाथि बलवद्दृढम्‌ ।
तस्याहं निग्रहं मन्ये वायोरिव सुदुष्करम्‌ ॥

भावार्थ : 

क्योंकि हे श्रीकृष्ण! यह मन बड़ा चंचल, प्रमथन स्वभाव वाला, बड़ा दृढ़ और बलवान है। इसलिए उसको वश में करना मैं वायु को रोकने की भाँति अत्यन्त दुष्कर मानता हूँ॥34॥

श्रीभगवानुवाच

असंशयं महाबाहो मनो दुर्निग्रहं चलम्‌ ।
अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृह्यते ॥

भावार्थ : 

श्री भगवान बोले- हे महाबाहो! निःसंदेह मन चंचल और कठिनता से वश में होने वाला है। परन्तु हे कुंतीपुत्र अर्जुन! यह अभ्यास (गीता अध्याय 12 श्लोक 9 की टिप्पणी में इसका विस्तार देखना चाहिए।) और वैराग्य से वश में होता है॥35॥

असंयतात्मना योगो दुष्प्राप इति मे मतिः ।
वश्यात्मना तु यतता शक्योऽवाप्तुमुपायतः ॥

भावार्थ : 

जिसका मन वश में किया हुआ नहीं है, ऐसे पुरुष द्वारा योग दुष्प्राप्य है और वश में किए हुए मन वाले प्रयत्नशील पुरुष द्वारा साधन से उसका प्राप्त होना सहज है- यह मेरा मत है॥36॥

अध्याय छः के अनुच्छेद 37-47 में योगभ्रष्ट पुरुष की गति का विषय और ध्यानयोगी की महिमा का वर्णन है। 

अर्जुन उवाच

अयतिः श्रद्धयोपेतो योगाच्चलितमानसः ।
अप्राप्य योगसंसिद्धिं कां गतिं कृष्ण गच्छति ॥

भावार्थ : 

अर्जुन बोले- हे श्रीकृष्ण! जो योग में श्रद्धा रखने वाला है, किन्तु संयमी नहीं है, इस कारण जिसका मन अन्तकाल में योग से विचलित हो गया है, ऐसा साधक योग की सिद्धि को अर्थात भगवत्साक्षात्कार को न प्राप्त होकर किस गति को प्राप्त होता है॥37॥

कच्चिन्नोभयविभ्रष्टश्छिन्नाभ्रमिव नश्यति ।
अप्रतिष्ठो महाबाहो विमूढो ब्रह्मणः पथि ॥

भावार्थ : 

हे महाबाहो! क्या वह भगवत्प्राप्ति के मार्ग में मोहित और आश्रयरहित पुरुष छिन्न-भिन्न बादल की भाँति दोनों ओर से भ्रष्ट होकर नष्ट तो नहीं हो जाता?॥38॥

एतन्मे संशयं कृष्ण छेत्तुमर्हस्यशेषतः ।
त्वदन्यः संशयस्यास्य छेत्ता न ह्युपपद्यते ॥

भावार्थ : 

हे श्रीकृष्ण! मेरे इस संशय को सम्पूर्ण रूप से छेदन करने के लिए आप ही योग्य हैं क्योंकि आपके सिवा दूसरा इस संशय का छेदन करने वाला मिलना संभव नहीं है॥39॥

श्रीभगवानुवाच

पार्थ नैवेह नामुत्र विनाशस्तस्य विद्यते ।
न हि कल्याणकृत्कश्चिद्दुर्गतिं तात गच्छति ॥

भावार्थ : 

श्री भगवान बोले- हे पार्थ! उस पुरुष का न तो इस लोक में नाश होता है और न परलोक में ही क्योंकि हे प्यारे! आत्मोद्धार के लिए अर्थात भगवत्प्राप्ति के लिए कर्म करने वाला कोई भी मनुष्य दुर्गति को प्राप्त नहीं होता॥40॥

प्राप्य पुण्यकृतां लोकानुषित्वा शाश्वतीः समाः ।
शुचीनां श्रीमतां गेहे योगभ्रष्टोऽभिजायते ॥

भावार्थ : 

योगभ्रष्ट पुरुष पुण्यवानों के लोकों को अर्थात स्वर्गादि उत्तम लोकों को प्राप्त होकर उनमें बहुत वर्षों तक निवास करके फिर शुद्ध आचरण वाले श्रीमान पुरुषों के घर में जन्म लेता है॥41॥

अथवा योगिनामेव कुले भवति धीमताम्‌ ।
एतद्धि दुर्लभतरं लोके जन्म यदीदृशम्‌ ॥

भावार्थ : 

अथवा वैराग्यवान पुरुष उन लोकों में न जाकर ज्ञानवान योगियों के ही कुल में जन्म लेता है, परन्तु इस प्रकार का जो यह जन्म है, सो संसार में निःसंदेह अत्यन्त दुर्लभ है॥42॥

तत्र तं बुद्धिसंयोगं लभते पौर्वदेहिकम्‌ ।
यतते च ततो भूयः संसिद्धौ कुरुनन्दन ॥

भावार्थ : 

वहाँ उस पहले शरीर में संग्रह किए हुए बुद्धि-संयोग को अर्थात समबुद्धिरूप योग के संस्कारों को अनायास ही प्राप्त हो जाता है और हे कुरुनन्दन! उसके प्रभाव से वह फिर परमात्मा की प्राप्तिरूप सिद्धि के लिए पहले से भी बढ़कर प्रयत्न करता है॥43॥

पूर्वाभ्यासेन तेनैव ह्रियते ह्यवशोऽपि सः ।
जिज्ञासुरपि योगस्य शब्दब्रह्मातिवर्तते ॥

भावार्थ : 

वह (यहाँ 'वह' शब्द से श्रीमानों के घर में जन्म लेने वाला योगभ्रष्ट पुरुष समझना चाहिए।) श्रीमानों के घर में जन्म लेने वाला योगभ्रष्ट पराधीन हुआ भी उस पहले के अभ्यास से ही निःसंदेह भगवान की ओर आकर्षित किया जाता है तथा समबुद्धि रूप योग का जिज्ञासु भी वेद में कहे हुए सकाम कर्मों के फल को उल्लंघन कर जाता है॥44॥

प्रयत्नाद्यतमानस्तु योगी संशुद्धकिल्बिषः ।
अनेकजन्मसंसिद्धस्ततो यात परां गतिम्‌ ॥

भावार्थ : 

परन्तु प्रयत्नपूर्वक अभ्यास करने वाला योगी तो पिछले अनेक जन्मों के संस्कारबल से इसी जन्म में संसिद्ध होकर सम्पूर्ण पापों से रहित हो फिर तत्काल ही परमगति को प्राप्त हो जाता है॥45॥

तपस्विभ्योऽधिको योगी ज्ञानिभ्योऽपि मतोऽधिकः ।
कर्मिभ्यश्चाधिको योगी तस्माद्योगी भवार्जुन ॥

भावार्थ : 

योगी तपस्वियों से श्रेष्ठ है, शास्त्रज्ञानियों से भी श्रेष्ठ माना गया है और सकाम कर्म करने वालों से भी योगी श्रेष्ठ है। इससे हे अर्जुन! तू योगी हो॥46॥

योगिनामपि सर्वेषां मद्गतेनान्तरात्मना ।
श्रद्धावान्भजते यो मां स मे युक्ततमो मतः ॥

भावार्थ : 

सम्पूर्ण योगियों में भी जो श्रद्धावान योगी मुझमें लगे हुए अन्तरात्मा से मुझको निरन्तर भजता है, वह योगी मुझे परम श्रेष्ठ मान्य है॥47॥

राजस्थान का राजकीय/ राज्य पक्षी || State Bird of Rajasthan ||

राजस्थान का राजकीय/ राज्य पक्षी

"गोडावण (The Great Indian Bustard) सोनचिरैया/Sonchiriya"

राजकीय पक्षियों के क्रम को आगे बढ़ाते हुए आज बात करते हैं, राजस्थान के राजकीय पक्षी की। इसमें कोई संदेह नहीं कि पक्षियों को देखकर मन प्रसन्न हो उठता है। उनकी चहचहाहट संगीत के ध्वनियों की तरह मन मस्तिष्क को प्रफुल्लित करती हैं। 

राजस्थान का राजकीय/ राज्य पक्षी || State Bird of Rajasthan ||

राजस्थान का राजकीय पक्षी "गोडावण" है, जिसे अंग्रेजी में "द ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (The Great Indian Bustard)" कहा जाता है। राजस्थान राज्य ने वर्ष 1981 में गोडावण को अपने राज्य का राजकीय पक्षी चिन्हित किया था। यह एक विशाल आकार वाला तथा उड़ने वाला पक्षी है, जो पक्षियों में सबसे भारी होता है। यह स्वभाव से शर्मिला और शांत होता है। वर्तमान परिपेक्ष में यह विलुप्त होने की कगार पर है।

राजस्थान का राजकीय/ राज्य पक्षी || State Bird of Rajasthan ||

"द ग्रेट इंडियन बस्टर्ड" एक बड़े आकार का धरती पर पाया जाने वाला पक्षी है। इसकी गर्दन लंबी होती है और लम्बे टांगों के कारण यह शुतुरमुर्ग जैसा दिखाई देता है। इसकी ऊंचाई लगभग 1 मीटर होती है और वजन 8 ग्राम से 14 से 14.5 ग्राम तक हो सकता है। इसकी पूँछ 13 से 15 इंच तक लंबी होती है। इसका रंग भूरा या बादामी रंग का होता है। इसके पंखों पर काले भूरे और स्लेटी रंग के धब्बे होते हैं। इसकी गर्दन सफेद पीलापन लिए हुए हल्के रंग की होती है और सिर के ऊपर काले रंग का किरीट होती है।

राजस्थान का राजकीय/ राज्य पक्षी || State Bird of Rajasthan ||

"द ग्रेट इंडियन बस्टर्ड" अर्थात गोडावण को अन्य कई नामों से भी पुकारा जाता है। इसे सोहन चिड़िया, हुकना, गगनभेर या गुरायिन भी कहते हैं। चूँकि यह स्वभाव से शांत और शर्मिला पक्षी है, इसलिए इसे "शर्मिला पक्षी" भी कहा जाता है। डर का आभास होने पर यह हुक जैसी आवाज निकालता है। इस कारण उत्तरी भारत में इसे कई क्षेत्रों में "हुकना" भी कहा जाता है। कई बार इसको बादलों की गरज जैसी या बाघ के गर्जन जैसी आवाज निकालने के कारण "गगनभेर या गुरायिन" भी कहते हैं।

राजस्थान का राजकीय/ राज्य पक्षी "गोडावण (The Great Indian Bustard) सोनचिरैया/Sonchiriya"

आकार में मादा गोडावण नर गोडावण से छोटी होती है। यदि नर गोडावण  की लंबाई 110 से 120 सेंटीमीटर और वजन 8 ग्राम से 14.5 ग्राम तक है, तो मादा गोडावण की लंबाई 92 सेंटीमीटर से 95 सेंटीमीटर और वजन 2.5 ग्राम से 6.5 ग्राम तक होता है।

राजस्थान का राजकीय/ राज्य पक्षी || State Bird of Rajasthan ||

गोडावण पक्षी पहले भारत के पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु में बहुतायत पाए जाते थे, परंतु वर्तमान में यह आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और राजस्थान में ही दिखते हैं। यह मुख्यतः भारत और पाकिस्तान में भी पाए जाते थे, पर शिकार और संरक्षण के अभाव के कारण पाकिस्तान से लुप्तप्राय हो गए हैं। 2013 में किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार पाकिस्तान में नाममात्र के ही गोडावण शेष रह गए हैं।

"गोडावण (The Great Indian Bustard)"

गोडावण मुख्यतः शुष्क घास के मैदानों, कटीली झाड़ियों और ऊंची घास में पाए जाते हैं। सिंचित क्षेत्रों से यह दूर ही रहते हैं। यह एक सर्वाहारी पक्षी हैं, जो गेहूं, ज्वार, बाजरा आदि के साथ ही बेल फल और टिड्डी जैसे कीड़े भी बड़े चाव से खाता है। इसके अतिरिक्त यह सांप, छिपकली, बिच्छू जैसे जीवों को भी बड़े आराम से खा लेता है।

"गोडावण (The Great Indian Bustard)"

वर्तमान में गोडावण विलुप्त होने के कगार पर है। राजस्थान सरकार द्वारा वर्ष 2013 में गोडावण के संरक्षण के लिए जीआईबीपी (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड प्रोजेक्ट) प्रारंभ किया गया था, जो 12 करोड़ 90 लाख का प्रोजेक्ट था। इसके विज्ञापन में प्रयुक्त वाक्यांश था "मेरी उड़ान ना रोकें"। वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 9 सी के तहत गोडावण को प्रथम श्रेणी में स्थान दिया गया है। गोडावण का शिकार करने वाले को 10 वर्ष की सजा तथा ₹25000 जुर्माने का प्रावधान भी है।

भारत के सभी राज्यों के राजकीय पक्षियों की सूची |(List of State Birds of India)