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क्या आप जानते है कि विश्व में सबसे अधिक क्षेत्र में फैला मंदिर कौन सा है?

क्या आप जानते है कि विश्व में सबसे अधिक क्षेत्र में फैला मंदिर कौन सा है?

कंबोडिया का हिन्दू सम्राज्य, जहां है विश्व का सबसे बड़ा मंदिर | angkor wat | अंगकोर वाट

ये है अंगकोर वाट का मंदिर प्रांगण जो कि केवल हिन्दू धर्म नहीं, बल्कि सभी धर्मो के धार्मिक स्मारकों में सबसे बड़ा है। आज जानते है कुछ तथ्य हमारी संस्कृति के इस अनसुने अध्याय के बारे में, दुनिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर, 800 साल से भी ज्यादा पुराना है अंगकोर वाट का मंदिर (Angkorwat Temple)

कंबोडिया का हिन्दू सम्राज्य, जहां है विश्व का सबसे बड़ा मंदिर | angkor wat | अंगकोर वाट

1 - अंगकोर वाट का मंदिर कंबोडिया देश में स्थित है, जी हां, सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर भारत में नहीं है।

2 - इसका निर्माण खमेर राजवंश के राजा सूर्यवर्मन द्वारा कराया गया था, जो कि भगवान विष्णु को समर्पित है।

3 - यह प्रांगण 402 एकड़ भूमि में फैला है, आप इसकी भव्यता का अंदाजा इस बात से लगा सकते है कि इस प्रांगण में 227 फुटबाल के मैदान आसानी से समा सकते है।

कंबोडिया का हिन्दू सम्राज्य, जहां है विश्व का सबसे बड़ा मंदिर | angkor wat | अंगकोर वाट

4 - इस मंदिर का कंबोडिया में इतना महत्व है कि आप उनके राष्ट्रीय ध्वज पर इस मंदिर को देख सकते है।

5- मंदिर दो भागो में विभाजित पहला भाग मंदिर की मुख्य इमारत तथा दूसरा भाग उसका बरामदा इस मंदिर की संरचना बाहर से अंदर की ओर जाने पर ऊपर की ओर उठती सी प्रतीत होती है, इसका कारण है कि यह हिन्दू धर्म के मेरु पर्वत का निरूपण करता है।

कंबोडिया का हिन्दू सम्राज्य, जहां है विश्व का सबसे बड़ा मंदिर | angkor wat | अंगकोर वाट

6 - कंबोज के इस मंदिर को मौलिक रूप से शिव को समर्पित किया गया था। लेकिन बाद में इसे विष्णु भगवान से जोड़ दिया गया। हालांकि यहाँ त्रिदेव –ब्रह्मा, विष्णु, महेश की मूर्तियाँ एक साथ मौजूद हैं।

7 - एक समय ऐसा आया कि ये मंदिर खंडहर में तब्दील हो चुका था लेकिन जनवरी 1860 में एक फ्रांसीसी रिसर्चर हेनरी महोत ने इसे फिर से दुनिया की नज़रों में लाने का काम किया। 18 वी सदी में हेनरी मौहोत ने अपने यात्रा वर्णन से पश्चिमी देशों में इस स्मारक का वर्णन कुछ इन शब्दों में किया है।

कंबोडिया का हिन्दू सम्राज्य, जहां है विश्व का सबसे बड़ा मंदिर | angkor wat | अंगकोर वाट

हमारे सनातन धर्म और संस्कृति में 
एक खोजोगे हजार मिलेंगे..

इतिहास को खुद में समेटे कभी गुमनाम रहा ये मंदिर आज यूनेस्को के विश्व धरोहर में शामिल है। मंदिर वास्तुकला के अनुपम नमूना पेश करते हुए भारत की प्राचीनता और कंबोडियाई कनेक्शन को सहेजे हुए है। मीकांग नदी के किनारे सिमरिप शहर में बने इस मंदिर को देखने दुनियाभर से लोग आते हैं। खास बात है कि ये मंदिर 1983 से कंबोडिया के राष्ट्रध्वज पर भी अंकित है। जानकर खुशी होगी कि वर्ष 1986 से लेकर वर्ष 1993 तक भारत के पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने इस मंदिर को संरक्षित करने के साथ ही संवारने का काम किया है। ये अपने आप में अपनापन को दर्शाने के लिए काफी है। जड़ों में जाएँगे तो पाएँगे कि कंबोडिया की धरती को भारत से आए शासकों ने ना केवल आबाद किया है, बल्कि इसे बनाया और सजाया भी है। 

कंबोडिया का हिन्दू सम्राज्य, जहां है विश्व का सबसे बड़ा मंदिर | angkor wat | अंगकोर वाट

सनातन संस्कृति सनातन धर्म ही सर्वश्रेष्ठ है 🚩🚩

गर्मी में कुछ सावधानी रखें तथा विविध विकारों से दूर रहें

गर्मी में कुछ सावधानी रखें तथा विविध विकारों से दूर रहें 

‘वर्तमान में ग्रीष्म ऋतु चल रहा है। इस समय देह का तापमान बढना, पसीना आना, शक्ति क्षीण होना आदि कष्ट होते हैं । गरमी में होनेवाले विविध विकारों से दूर रहने के लिए सभी के लिए निम्नांकित सावधानी आवश्यक है। 

गर्मी में कुछ सावधानी रखें तथा विविध विकारों से दूर रहें

१. पूरे दिन आवश्यक मात्रा में पानी अथवा तत्सम पेय पीना चाहिए। पानी पीने के लिए प्यास लगने की प्रतीक्षा न करें। गहरे रंग का पेशाब (मूत्र) हो रहा हो, तो अधिक पानी पीना चाहिए। फ्रिज का ठंडा पानी न पीएं। घर से बाहर निकलने से पूर्व एक गिलास पानी पीकर निकलें। बाहर जाते समय अपने साथ पानी की बोतल अवश्य रखें।

२. पानी पीते समय गटागट एक ही बार में न पीकर धीरे-धीरे पीएं। धूप से आने के पश्चात तुरंत पानी पीने की अपेक्षा ५ से १० मिनट शांति से बैठकर तदनंतर पानी पीएं । 

३. चीनी मिश्रित पेय ले सकते हैं; परंतु अधिक चीनीवाला पेय पचने में भारी होने के कारण यथासंभव वह न पीएं। संभव हो तो प्रतिदिन के भोजन में छाछ अथवा उबले हुए कच्चे आम का शरबत लें। बाहर के खाद्यपदार्थाें का सेवन न करें। साथ ही ढीले, फीके रंग के, वजन में हलके संभवतः सूती वस्त्र पहनें ।

४. इन दिनों में अधिक पसीना आने से शीघ्र थकान भी होती है। इसलिए व्यायाम की मात्रा न्यून (कम) करें। धूप हो, तब घर में अथवा जहां छाया हो, वहीं रुकें।

५. वातावरण ठंडा रहे इसके लिए कूलर की (वातानुकूलन यंत्र की) सुविधा हो, तो दिन में कुछ घंटे उसका उपयोग करें । 

६. यथासंभव सवेरे १० से पहले एवं दोपहर ४ बजे के पश्चात ही घर से बाहर निकलें। गरमी का आघात से बचने के लिए बाहर जाते समय आंखों को ‘गॉगल्स’ लगाएं। छाता  या फिर टोपी का उपयोग करें। टोपी उपलब्ध न हो,तो माथे एवं कान पर बडा श्वेत रुमाल बांधें ।

८. जागरण करने से देह में पित्त एवं वायु दोष की मात्रा बढ जाती है। इसलिए अधिक जागरण न करें। (सर्व ऋतुओं में यह सावधानी रखना आवश्यक है।)

जिनकी आयु १ वर्ष से छोटी है, ऐसे बालक तथा ६५ वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों को ऐसे मौसम में ज्यादा सावधानी रखनी चाहिए। 

फादर्स डे 2023

फादर्स डे 2023

माँ की ममता को तो कौन नही जानता! मां ही हमारे जीवन का अस्तित्व है लेकिन माँ के साथ पर्दे के पीछे रहकर जो व्यक्ति आपका व्यक्तित्व निखारता है और आपको अपनी पहचान बनाने में सक्रिय सहयोग करता है वह होता है पिता। बच्चों के लिए अपने सुख का त्याग करने वाला होता है पिता। 

फादर्स डे

उसी पिता के प्रति अपनी भावनाओं को व्यक्त करने और उनके प्रति कृतज्ञता को जाहिर करने के लिए, बच्चों के द्वारा हर साल 'फादर्स डे' मनाया जाता है. ये दिन लगभग सम्पूर्ण विश्व भर में हर साल जून महीने के तीसरे रविवार को ‘फादर्स डे’ के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष ‘फादर्स डे’ 18 जून को मनाया जा रहा है।

आप सभी को "फादर्स डे" की ढेर सारी बधाई एवं शुभकामना। पिता के प्रेम और कर्तव्यों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करने के लिए इस दिन को मनाया जाता है।  पहली बार वर्ष 1907 में ‘फादर्स डे’ मनाया गया था जबकि आधिकारिक रूप से इसकी शुरुआत वर्ष 1910 में हुई थी। इस दिन को मनाने का प्रस्ताव अमेरिका की रहने वाली महिला सोनोरा स्मार्ट डोड ने पेश किया था। परंतु उस वक्त लोगों ने इस स्वीकार नहीं किया था और डोड पर हास्यास्पद कमेंट करके उनका उपहास भी उड़ाया था। कुछ समय के बाद लोगों  पिता के महत्त्व को समझा और तब से जून महीने के तृतीय रविवार को ‘फादर्स डे’ मनाया जाता है।

फादर्स डे

किसी के लिए भी अपने माता-पिता के प्रेम और समर्पण को शब्दों में बयां करना असंभव है फिर भी साल में एक दिन मां और एक दिन पिता के नाम पर रखकर हम उनके प्रति अपने प्यार और सम्मान को व्यक्त करते है। 

इस अवसर पर बच्चे अपने पिता को उपहार भेंट करते हैं और अपने पिता की पसंद  के अनुसार इस दिन को मनाने का प्रयास करते हैं। कहा जाता है कि जब डोड छोटी थीं तो उनकी माँ का निधन हो गया था। उनके पिता ने ही उन्हें माँ और बाप दोनों का प्यार दिया था। अतः उन्हें सम्मान देने के लिए ही डोड ने सर्वप्रथम "फादर्स डे" मनाया था।

फादर्स डे

एक बार पुनः आप सभी को "फादर्स डे" की बधाई।

हमारा समाज और नारी स्वतंत्रता

हमारा समाज और नारी स्वतंत्रता

हमारा समाज नारी स्वतंत्रता को लेकर बड़ी बड़ी बातें करता है, परंतु एक कटु सत्य यह है कि जब भी कोई महिला खुले हुए कम आयतन के परिधान में नज़र आती है, तो उसी समाज के 90 प्रतिशत लोग उसकी पोशाक को देखकर आनंदित होते हैं। उस समय वो यह विस्मरण कर देते हैं कि यदि वही पोशाक उनकी मां, बेटी अथवा बहन पहने तो उनकी मनःस्थिति कैसी होगी?

हमारा समाज और नारी स्वतंत्रता

 नारी स्वतंत्रता पर सच्चाई को समझने के लिए एक कहानी है-

एक दिन मोहल्ले में किसी ख़ास अवसर पर महिला सभा का आयोजन किया गया। सभा स्थल पर महिलाओं की संख्या अधिक और पुरुषों की कम थी। मंच पर तकरीबन पच्चीस वर्षीय खुबसूरत युवती आधुनिक वस्त्रों से सुसज्जित, माइक थामें कोस रही थी पुरुष समाज को। वही पुराना आलाप कम और छोटे कपड़ों को जायज और कुछ भी पहनने की स्वतंत्रता का बचाव करते हुए पुरुषों की गन्दी सोंच और खोटी नीयत का दोष बतला रही थी। 

तभी अचानक सभा स्थल से तीस बत्तीस वर्षीय सभ्य, शालीन और आकर्षक से दिखते नवयुवक ने खड़े होकर अपने विचार व्यक्त करने की अनुमति मांगी। अनुमति स्वीकार कर माइक उसके हाथों मे सौप दिया गया। हाथों में माइक आते ही उसने बोलना शुरु किया - "माताओं, बहनों और भाइयों, मैं आप सबको नहीं जानता और आप सभी मुझे नहीं जानते कि आखिर मैं कैसा इंसान हूं? लेकिन पहनावे और शक्ल सूरत से मैं आपको कैसा लगता हूँ बदमाश या शरीफ? सभास्थल से कई आवाजें गूंज उठीं - पहनावे और बातचीत से तो आप शरीफ लग रहे हो.. शरीफ लग रहे हो.. शरीफ लग रहे हो..

हमारा समाज और नारी स्वतंत्रता

बस यही सुनकर, अचानक ही उसने अजीबोगरीब हरकत कर डाली। एक एक करके उसने मंच पर ही अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए। कुछ ही देर में ये देख कर पूरा सभा स्थल आक्रोश से गूंज उठा। "मारो-मारो गुंडा है, बदमाश है, बेशर्म है, शर्म नाम की चीज नहीं है इसमें, मां बहन का लिहाज नहीं है इसको, नीच इंसान है, ये छोड़ना मत इसको।" ये आक्रोशित शोर सुनकर अचानक वो माइक पर गरज उठा - "रुको! पहले मेरी बात सुन लो, फिर मार भी लेना, चाहे तो जिंदा जला भी देना मुझको। 

अभी अभी तो ये बहन जी कम कपड़े, तंग और बदन नुमाया छोटे-छोटे कपड़ों की पक्ष के साथ साथ स्वतंत्रता की दुहाई देकर गुहार लगाकर "नीयत और सोच में खोट" बता रही थी। तब तो आप सभी तालियां बजा-बजाकर सहमति जता रहे थे, फिर मैंने क्या किया है? सिर्फ कपड़ों की स्वतंत्रता ही तो दिखलायी है। 

"नीयत और सोच" की खोट तो नहीं ना और फिर मैंने तो, आप लोगों को मां, बहन और भाई भी कहकर ही संबोधित किया था, फिर मेरे कपड़े उतारना शुरू करते ही आप में से किसी को भी मुझमें "भाई और बेटा" क्यों नहीं नजर आया? मेरी नीयत में आप लोगों को खोट कैसे नजर आ गया? मुझमें, आपको भाई, बेटा या दोस्त क्यों नहीं नजर आया? आप में से तो किसी की "सोच और नीयत" भी खोटी नहीं थी. फिर ऐसा क्यों? "

सभा स्थल पर सन्नाटा छा गया था। किसी के मुंह से कुछ नहीं निकल रहा था। उस व्यक्ति ने बोलना जारी रखा। "सच तो यही है कि झूठ बोलते हैं लोग कि "वेशभूषा" और "पहनावे" से कोई फर्क नहीं पड़ता। हकीकत तो यही है कि मानवीय स्वभाव है कि यदि कोई पुरुष या स्त्री कम वस्त्रों में हों तो मन मे दूषित विचार उत्पन्न हो सकते हैं।हमें अपनी इन्द्रियों को वश में रखने का प्रयत्न करना चाहिए। रूप, रस, शब्द, गन्ध, स्पर्श ये बहुत प्रभावशाली कारक हैं। एक रूपवती स्त्री को देखकर “विस्वामित्र” जैसे आध्यात्मिक ऋषि के मस्तिष्क में विकार पैदा हो गया था, तो आम मनुष्यों के मन मे तो हो ही सकता है।

दुर्गा शप्तशती के देव्या कवच में श्लोक 38 में भगवती से इन्हीं कारकों से रक्षा करने की प्रार्थना की गई है - 

“रसे_रुपे_च_गन्धे_च_शब्दे_स्पर्शे_च_योगिनी।
सत्त्वं_रजस्तमश्चैव_रक्षेन्नारायणी_सदा।।”

रस, रूप, गंध, शब्द, स्पर्श इन विषयों का अनुभव करते समय योगिनी देवी रक्षा करें तथा सत्वगुण, रजोगुण, तमोगुण की रक्षा नारायणी देवी करें। 

भारतीय हिन्दु महिलाओं को ,भारतीय संस्कृति के अनुरूप वस्त्रों का चयन करना चाहिए। महिलाओं को यह समझना होगा कि सभ्य, शालीन वस्त्र पहनने से उनकी स्वतंत्रता का हनन नहीं होगा। सोशल मीडिया पर उत्तेजक वस्त्रों में अपनी नुमाइश करती ज्यादातर महिलाओं को यह समझना होगा कि इससे वे समाज में हंसी की पात्र बनती हैं। फैशन के नाम पर "कुछभी" पहनना कहीं से भी उचित नहीं है। 

अब समय सचेत होने का है, आँखे खोलने का है। अपने आप को और अपने समाज को और अधिक सशक्त बनाना है। भारतीय समाज और संस्कृति का आधार नारीशक्ति है। नारी के सम्मान में यदि कमी आयी तो समाज का पतन हो जायेगा, जिसके फलस्वरूप देश का भी पतन निश्चित है।

और धर्म विरोधी, अधर्मी, चांडाल (बॉलीवुड, वामपंथ), दुष्ट प्रकृति के लोग हमारे समाज के आधार को तोड़ने का षड्यंत्र कर रहे हैं, जिसे हमें सफल नहीं होने देना है। हमारे मनीषियों ने सच ही कहा है -

"यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते
      रमन्ते तत्र देवताः।" 

जय माता दी 

गोवा का राजकीय/राज्य पक्षी || State Bird Of Goa ||

गोवा का राजकीय/राज्य पक्षी
 लालग्रीवा बुलबुल (Pycnonotus gularis)

गोवा राज्य की राजकीय पक्षी हल्के पीले रंग वाली बुलबुल पक्षी है। इसे फ्लेम -थ्रोटेड बुलबुल भी कहते हैं, जो गौरैया पक्षियों के बुलबुल परिवार का एक सदस्य है। गोवा राज्य सरकार के द्वारा इस पक्षी को साल 2020 में गोवा राज्य के राजकीय पक्षी के रूप में चुना गया था। इस पक्षी का वैज्ञानिक नाम पाईक्नोनोटस गुलारिस है। यह पक्षी जैतून पीले रंगो के साथ हल्के चमकीले पीले रंगों का होता है। इस पक्षी की गर्दन काफी छोटी होता है। इसका आकार 17 सेमी-20 सेमी के बीच होता है। पैर भूरे रंग के होते हैं और गैप पीले-गुलाबी होते हैं। चोंच गहरे भूरे से काले रंग की होती है। युवा पक्षियों की पंखों का वर्णन नहीं किया गया है। साथ ही यह पक्षी प्रवासी पक्षी की श्रेणी में नहीं आती है। यह केवल दक्षिणी भारत में पश्चिमी घाट के जंगलों में पाया जाता है। 

गोवा का राजकीय/राज्य पक्षी || State Bird Of Goa ||

इन पक्षियों का मुख्य भोजन कीड़े मकोड़े और फल फूल आदि होता है । साथ ही माना जाता है को ये पक्षियों अमृत की भी इक्कठा करती है । यह पक्षी मुख्य रूप से भारत के गोवा, केरल, कर्नाटक, ओडिसा, तमिलनाडु आदि के राज्यों में देखा जा सकती हैं । इन पक्षियों का जीवन चट्टानों और ठंडे पर्णपाती जंगलों में रहता है । परंतु ये सदाबहार जैसे क्षेत्रों में अधिक देखी जाती हैं।  इस पक्षी का उल्लेख वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-IV में किया गया है।

गोवा का राजकीय/राज्य पक्षी || State Bird Of Goa ||

फ्लेम-थ्रोटेड बुलबुल आमतौर पर गोवा, पूर्वी केरल, पूर्वी कर्नाटक, उड़ीसा और कुछ हद तक तमिलनाडु के उत्तरी भाग में पाई जाती है। इस क्षेत्र को दक्षिणी प्रायद्वीप के रूप में भी जाना जाता है। फ्लेम थ्रोटेड बुलबुल का निवास स्थान चट्टानी और शुष्क पर्णपाती जंगल है। यह सदाबहार क्षेत्रों में भी पाया जाता है। इसकी ध्वनि स्वरों को एक गहरी सीटी और तेज पिकविक ध्वनि के रूप में वर्णित किया जा सकता है। फ्लेम-थ्रोटेड बुलबुल की घोंसला बनाने की प्रक्रिया 6 से 10 दिनों तक चलती है।

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State bird of goa

The light yellow bulbul bird is the state bird of the state of Goa. It is also called flame-throated bulbul, a member of the bulbul family of sparrow birds. This bird was selected as the state bird of the state of Goa in the year 2020 by the Goa state government. The scientific name of this bird is Pycnonotus gularis. This bird is of light bright yellow color with olive yellow color. The neck of this bird is very short. Its size varies between 17 cm-20 cm. The legs are brown and the gape is yellowish-pink. The beak is dark brown to black in colour. The plumage of young birds is not described. Also, this bird does not come under the category of migratory bird. It is found only in the forests of the Western Ghats in southern India.

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The main food of these birds is insects, fruits and flowers etc. Also, it is believed that these birds also collect nectar. This bird can be seen mainly in the Indian states of Goa, Kerala, Karnataka, Odisha, Tamil Nadu etc. The life of these birds lives in rocks and cold deciduous forests. But these are seen more in areas like evergreens. This bird is mentioned in Schedule-IV of the Wildlife (Protection) Act, 1972.

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The flame-throated bulbul is commonly found in Goa, eastern Kerala, eastern Karnataka, Orissa and to some extent in the northern part of Tamil Nadu. This region is also known as the Southern Peninsula. The habitat of the Flame Throated Bulbul is rocky and dry deciduous forests. It is also found in mangrove areas. Its vocalizations can be described as a deep hissing and sharp pickwick sound. The nesting process of the flame-throated bulbul lasts from 6 to 10 days.

भारत के सभी राज्यों के राजकीय पक्षियों की सूची |(List of State Birds of India)

श्रीमद्भगवद्गीता (Shrimad Bhagwat Geeta)

श्रीमद्भगवद्गीता || अध्याय ग्यारह विश्वरूपदर्शनयोग ||

अथैकादशोऽध्यायःविश्वरूपदर्शनयोग

अध्याय ग्यारह के अनुच्छेद 05 - 08

श्रीमद्भगवद्गीता (Shrimad Bhagwat Geeta)


अध्याय ग्यारह के अनुच्छेद  05 - 08 में भगवान द्वारा अपने विश्व रूप का वर्णन है। 

श्रीभगवानुवाच

पश्य मे पार्थ रूपाणि शतशोऽथ सहस्रशः ।
नानाविधानि दिव्यानि नानावर्णाकृतीनि च || 11.5 || 

भावार्थ : 

श्री भगवान बोले- हे पार्थ! अब तू मेरे सैकड़ों-हजारों नाना प्रकार के और नाना वर्ण तथा नाना आकृतिवाले अलौकिक रूपों को देख॥5॥

पश्यादित्यान्वसून्रुद्रानश्विनौ मरुतस्तथा ।
बहून्यदृष्टपूर्वाणि पश्याश्चर्याणि भारत || 11.6 || 

भावार्थ : 

हे भरतवंशी अर्जुन! तू मुझमें आदित्यों को अर्थात अदिति के द्वादश पुत्रों को, आठ वसुओं को, एकादश रुद्रों को, दोनों अश्विनीकुमारों को और उनचास मरुद्गणों को देख तथा और भी बहुत से पहले न देखे हुए आश्चर्यमय रूपों को देख॥6॥

इहैकस्थं जगत्कृत्स्नं पश्याद्य सचराचरम्‌ ।
मम देहे गुडाकेश यच्चान्यद्द्रष्टमिच्छसि || 11.7 || 

भावार्थ : 

हे अर्जुन! अब इस मेरे शरीर में एक जगह स्थित चराचर सहित सम्पूर्ण जगत को देख तथा और भी जो कुछ देखना चाहता हो सो देख॥7॥ (गुडाकेश- निद्रा को जीतने वाला होने से अर्जुन का नाम 'गुडाकेश' हुआ था)

न तु मां शक्यसे द्रष्टमनेनैव स्वचक्षुषा ।
दिव्यं ददामि ते चक्षुः पश्य मे योगमैश्वरम्‌ || 11.8 || 

भावार्थ : 

परन्तु मुझको तू इन अपने प्राकृत नेत्रों द्वारा देखने में निःसंदेह समर्थ नहीं है, इसी से मैं तुझे दिव्य अर्थात अलौकिक चक्षु देता हूँ, इससे तू मेरी ईश्वरीय योग शक्ति को देख॥8॥

ब्राज़ीलियन व्हाइट बैलबर्ड (Brazilian White Ballbird)

ब्राज़ीलियन व्हाइट बैलबर्ड (Brazilian White Ballbird)

बिल्कुल काले रंग की कोयल से तो हम सभी परिचित हैं, परंतु आज यहां बात करेंगे बिल्कुल सफेद रंग की चिड़िया (ब्राज़ीलियन व्हाइट बैलबर्ड /Brazilian White Ballbird) के बारे में। कोयल जहां अपनी मधुर आवाज के लिए जानी जाती है, वही पर यह ब्राजीलियन वाइट बेलबर्ड अपनी तीखी और तेज आवाज के लिए दुनिया भर में लोकप्रिय है। जी हां, आप बिल्कुल सही पढ़ रहे हैं। मनुष्य 85 डेसीबल की आवाज सहन कर सकता है और यह ब्राजीलियन वाइट बेलबर्ड 126 डेसीबल की ध्वनि निकलती है। लगभग 126 डेसीबल की ध्वनि निकालते हुए यह चिड़िया एक चैन शो मशीन अथवा रॉक बैंड को भी पीछे छोड़ सकता है। 

ब्राज़ीलियन व्हाइट बैलबर्ड (Brazilian White Ballbird)
मनुष्य के लिए 85 डेसिबेल्स की आवाज ही सुरक्षित मानी जाती है। इससे तेज आवाज हमारे कान के पर्दे फाड़ देती है। तो इससे बच के रहना। यह गुयाना में, वेनेजुएला में छोटी संख्या में और ब्राजील के पारा राज्य में पाया जाता है। 

व्हाइट बेलबर्ड (प्रोक्नियास अल्बस), कोटिंगिडे परिवार में पक्षी की एक प्रजाति है। प्रजाति का नर एक लंबे काले मांसल वाटल के साथ शुद्ध सफेद होता है, जो समान शुद्ध सफेद पंखों से ढका होता है। मांसल वाटल उसकी चोंच के ऊपर से नीचे की तरफ लटकती है। आमतौर पर उसकी चोंच के दाईं ओर से लटकती है। प्रजाति की मादा आम तौर पर जैतून के रंग की होती है, जिसके पेट पर पीले रंग की धारियाँ होती हैं।
ब्राज़ीलियन व्हाइट बैलबर्ड (Brazilian White Ballbird)
संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्राजील के पक्षीविज्ञानियों की एक जोड़ी ने अब तक का सबसे ऊंचा पक्षी गीत (125.4 डीबी तक) रिकॉर्ड किया है, जिसे सफेद बेलबर्ड (प्रोक्नियास अल्बस) के नर द्वारा बनाया गया है। बेलबर्ड गानों में चीखने वाले पिहा (लिपौगस वोसिफेरन्स) की तुलना में लगभग 3 गुना अधिक ध्वनि निकालता है। सफेद बेलबर्ड एक अमेज़ॅन पक्षी प्रजाति है, जो दूसरे सबसे बड़े पक्षी गायक के रूप में प्रलेखित है।

मैसाचुसेट्स एमहर्स्ट विश्वविद्यालय में जैव ध्वनिकी के विशेषज्ञ डॉ. जेफ पोडोस ने कहा, "बेलबर्ड गाने इतने गगनभेदी हैं कि वे सबसे ऊंचे मानव वाद्ययंत्रों के बराबर डेसिबल स्तर तक पहुंच जाते हैं।"

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Brazilian White Ballbird

We are all familiar with the completely black cuckoo, but today we will talk about the completely white bird (Brazilian White Ballbird). Where the cuckoo is known for its melodious voice, this Brazilian white bellbird is famous all over the world for its shrill and loud voice. Yes, you are reading absolutely right. Humans can tolerate a sound of 85 decibels and this Brazilian white bellbird emits a sound of 126 decibels. This bird can leave behind even a chain show machine or a rock band, making a sound of about 126 decibels.
ब्राज़ीलियन व्हाइट बैलबर्ड (Brazilian White Ballbird)
The sound of 85 decibels is considered safe for humans. This loud sound tears our eardrums. So stay away from it. It is found in Guyana, in small numbers in Venezuela, and in the state of Pará in Brazil.

The white bellbird (Procnias albus) is a species of bird in the family Cotingidae. The male of the species is pure white with a long black fleshy wattle, which is covered with similarly pure white feathers. Fleshy wattles hang down from the top of its beak. Usually hangs from the right side of his beak. The female of the species is generally olive in colour, with yellow streaks on the belly.
ब्राज़ीलियन व्हाइट बैलबर्ड (Brazilian White Ballbird)
A pair of ornithologists from the United States and Brazil have recorded the loudest bird song ever recorded (up to 125.4 dB), made by a male of the white bellbird (Procnias albus). The bellbird emits about 3 times more vocal sounds than the chirping piha (Lipaugus vociferans). The white bellbird is an Amazonian bird species, documented as the second largest bird singer.

"Bellbird songs are so deafening that they reach decibel levels comparable to the loudest human instruments," said Dr. Jeff Podos, an expert in bioacoustics at the University of Massachusetts Amherst.