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सूखी नारियल || Dry Coconut ||

सूखी नारियल

नारियल का प्रयोग हम लोग कितने ही रूपों में करते हैं। जब नारियल बिल्कुल कच्चा होता है, तो नारियल पानी पीने में उसका उपयोग किया जाता है। उसके पश्चात कच्चे नारियल की गड़ी खाई जाती है और फिर उसको सुखाकर सूखा नारियल बनाया जाता है। सूखे नारियल का प्रयोग पूजा पाठ से लेकर मीठे पकवान बनाने में किया जाता है।

जानते हैं सूखे नारियल के फायदे नुकसान उपयोग और औषधीय गुण

हम में से अधिकतर लोग सूखे नारियल का प्रयोग खीर, हलवा, आइसक्रीम आदि मीठे पकवान और अनेक प्रकार के मिठाइयाँ बनाने में करते हैं। सूखा नारियल जहाँ हमारे मीठे पकवान को स्वादिष्ट बनाता है, वहीं यह सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। आज के इस अंक में हम सूखे नारियल के फायदे और नुकसान के बारे में चर्चा करेंगे।

जानते हैं सूखे नारियल के फायदे नुकसान उपयोग और औषधीय गुणों के बारे में

सूखे नारियल में विटामिन बी6, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, कॉपर, फॉस्फोरस, पोटेशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।

रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने में

सूखे नारियल में पोषक तत्व और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इसे खाने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता अर्थात इम्यूनिटी मजबूत होती है। इसमें फेनोलिक कंपाउंड होते हैं, जिसको खाने से कई तरह की बीमारियों के संक्रमण से हमारी रक्षा होती है।

खून की कमी दूर करने में

सूखे नारियल के सेवन से एनीमिया की शिकायत दूर होती है। इसमें प्रचुर मात्रा में आयरन होता है, जो खून में हीमोग्लोबिन के स्तर को बढ़ाने में मदद करता है। अतः इसे खाने से शरीर में खून की कमी की समस्या काफी हद तक दूर होती है।

पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में

सूखे नारियल का सेवन करने से पेट भी स्वस्थ रहता है, क्योंकि इसमें फाइबर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यदि हम सूखे नारियल का सेवन करते हैं, तो हमारा पाचन तंत्र सही रहता और कब्ज की समस्या भी दूर होती है।

कोलेस्ट्रोल को कंट्रोल करने में

सूखे नारियल का सेवन हमारे हृदय के लिए भी बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। यदि हम नियमित रूप से सूखे नारियल का सेवन करते हैं, तो हमारा हृदय स्वस्थ रहता है और शरीर में कोलेस्ट्रॉल का लेवल सामान्य बना रहता है। इसमें पाए जाने वाले हेल्दी फैट्स कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में सहायक होते हैं।

गठिया में लाभदायक

सूखे नारियल में कैल्शियम पाया जाता है, जो हड्डियों को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद होता है। यदि कोई कमजोर हड्डियों की समस्या तथा घुटनों के दर्द, जोड़ों के दर्द से परेशान है तो नारियल का सेवन उसके लिए लाभदायक हो सकता है।

जानते हैं सूखे नारियल के फायदे नुकसान उपयोग और औषधीय गुण

सूखे नारियल खाने के नुकसान

सूखे नारियल की तासीर गर्म होती है। इसीलिए इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। 

  • अत्यधिक सेवन से उल्टी और पेट दर्द जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
  • सूखे नारियल का अत्यधिक सेवन मधुमेह के रोगियों के लिए नुकसानदायक होता हो सकता है। इसमें शुगर पाई जाती है, जिससे डायबिटीज के रोगियों का शुगर लेवल बढ़ सकता है।
  • यदि हम सूखे नारियल का प्रयोग अधिक मात्रा में करते हैं तो इससे वजन बढ़ सकता है।

English Translate

Dry Coconut

We use coconut in many forms. When the coconut is unripe, it is used to make coconut water. After that the raw coconut kernel is eaten and then it is dried to make dry coconut. Dried coconut is used in making sweet dishes from worship lessons.

Most of us use dry coconut to make sweet dishes like kheer, halwa, ice cream, and many other types of sweets. While dry coconut makes our sweet dish delicious, it is also very beneficial for health. In today's issue, we will discuss about the advantages and disadvantages of dry coconut.

जानते हैं सूखे नारियल के फायदे नुकसान उपयोग और औषधीय गुण

Know about the benefits, disadvantages, uses and medicinal properties of dry coconut

Dried coconut is rich in nutrients like vitamin B6, calcium, iron, magnesium, copper, phosphorus, potassium and antioxidants.

in strengthening immunity

Nutrients and antioxidants are found in abundance in dried coconut. Eating this strengthens the body's immunity. It contains phenolic compounds, eating which protects us from infection of many diseases.

to eliminate anemia

The complaint of anemia goes away by consuming dry coconut. It is rich in iron, which helps in increasing the level of hemoglobin in the blood. Therefore, by eating it, the problem of anemia in the body goes away to a great extent.

strengthen the digestive system

Consuming dry coconut also keeps the stomach healthy, as fiber is found in abundance in it. If we consume dry coconut, then our digestive system remains correct and the problem of constipation also goes away.

in controlling cholesterol

Consumption of dry coconut is also considered very beneficial for our heart. If we consume dry coconut regularly, our heart remains healthy and cholesterol level in the body remains normal. Healthy fats found in it are helpful in controlling cholesterol.

beneficial in arthritis

Calcium is found in dry coconut, which is beneficial in making bones strong and healthy. If someone is troubled by the problem of weak bones and knee pain, joint pain, then consuming coconut can be beneficial for him.
जानते हैं सूखे नारियल के फायदे नुकसान उपयोग और औषधीय गुण

disadvantages of eating dry coconut

The effect of dry coconut is hot. That is why it should be consumed in limited quantity only.
  • Excessive consumption can also cause problems like vomiting and abdominal pain.
  • Excessive consumption of dry coconut can be harmful for diabetic patients. Sugar is found in it, due to which the sugar level of diabetic patients can increase.
  • If we use dry coconut in excess, it can lead to weight gain.

अच्छी थी पगडंडी अपनी

अच्छी थी पगडंडी अपनी

Rupa Oos ki ek Boond
"इरादे इतने 
कमज़ोर नहीं होने चाहिए,

कि लोगो की 
बातों से टूट जाएं...❣️"

अच्छी थी पगडंडी अपनी

सड़कों पर तो जाम बहुत है।।


फुर्र हो गई फुर्सत अब तो।

लोगों खातिर काम बहुत है।।


नहीं जरूरत बूढ़ों की अब।

हर बच्चा बुद्धिमान बहुत है।।


उजड़ गए सब बाग-बगीचे।

दो गमलों में शान बहुत है।।


मट्ठा-दही नहीं खाते हैं।

कहते हैं ज़ुकाम बहुत है।।


पीते हैं जब चाय तब कहीं।

कहते हैं आराम बहुत है।।


बंद हो गई चिट्ठी-पत्री।

फोनों पर पैगाम बहुत है।।


आदी हैं ए०सी० के इतने।

कहते बाहर घाम बहुत है।।


झुके-झुके स्कूली बच्चे।

बस्तों में सामान बहुत है।।


सुविधाओं का ढेर लगा है।

पर इंसा परेशान बहुत है।।

Rupa Oos ki ek Boond

"समझनी हैं, जिदंगी तो पीछे देखिए,
जीनी है, जिदंगी तो आगे देखिए..❣️"

आप सभी को मित्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🎉
Rupa Oos ki ek Boond


जब मां सरस्वती ने चूर किया कालिदास का घमंड

जब मां सरस्वती ने चूर किया कालिदास का घमंड

कालीदास का प्रारंभिक जीवन मूर्खतापूर्ण हरकतों से भरा हुआ था, मगर समय का पहिया घूमता है और वह महामूर्ख कालीदास महापंडित कालीदास बन जाते हैं। अपने शास्त्रार्थ के दम पर उन्होंने दुनिया के कई विद्वानों को परास्त किया। उन्हें दुनिया के सबसे विद्वान व्यक्तियों में मान लिया गया। तमाम मान-सम्मान पाकर कालीदास को मतिभ्रम हो गया कि उन्होंने सारी दुनिया को जीत लिया है। अब उन्हें कुछ पाना शेष नहीं रहा। 

जब मां सरस्वती ने चूर किया कालिदास का घमंड

एक दिन पड़ोसी देश से उन्हें शास्त्रार्थ के लिए बुलावा आया। कालीदास सम्राट विक्रमादित्य से अनुमति लेकर अपने घोड़े पर सवार होकर गंतव्य की ओर रवाना हुए। चटखती गरमी का मौसम था। निरंतर यात्रा से कालीदास थक कर चूर-चूर हो चुके थे। उन्होंने सोचा कहीं प्यास बुझाकर आगे बढ़ेंगे तो आगे का रास्ता आसान हो जाएगा। थोड़ी देर तलाश करने के बाद उन्हें एक झोपड़ी नजर आई। उन्होंने अपना घोड़ा झोपड़े के सामने रोका। झोपड़े के पास ही एक कुंआ था। कुएं पर एक वृद्धा पानी भर रही थी। 

कालिदास बोले - माते! पानी पिला दीजिए बङा पुण्य होगा।

स्त्री बोली - बेटा मैं तुम्हें जानती नहीं, अपना परिचय दो। मैं अवश्य पानी पिला दूंगी।

कालीदास ने कहा - मैं पथिक हूँ, कृपया पानी पिला दें।

स्त्री बोली - तुम पथिक कैसे हो सकते हो, पथिक तो केवल दो ही हैं सूर्य व चन्द्रमा, जो कभी रुकते नहीं हमेशा चलते रहते। तुम इनमें से कौन हो सत्य बताओ।

कालिदास ने कहा - मैं मेहमान हूँ, कृपया पानी पिला दें।

स्त्री बोली - तुम मेहमान कैसे हो सकते हो, संसार में दो ही मेहमान हैं, पहला धन और दूसरा यौवन। इन्हें जाने में समय नहीं लगता। सत्य बताओ कौन हो तुम?

(अब कालिदास सारे तर्क से पराजित हताश तो हो ही चुके थे। )

कालिदास बोले - मैं सहनशील हूं। अब आप पानी पिला दें।

स्त्री ने कहा - नहीं, सहनशील तो दो ही हैं। पहली, धरती जो पापी-पुण्यात्मा सबका बोझ सहती है। उसकी छाती चीरकर बीज बो देने से भी अनाज के भंडार देती है। दूसरे पेड़ जिनको पत्थर मारो फिर भी मीठे फल देते हैं। तुम सहनशील नहीं। सच बताओ तुम कौन हो?

(कालिदास लगभग मूर्च्छा की स्थिति में आ गए और तर्क-वितर्क से झल्लाकर बोले)

कालिदास बोले - मैं हठी हूँ ।

स्त्री बोली - फिर असत्य. हठी तो दो ही हैं- पहला नख और दूसरे केश, कितना भी काटो बार-बार निकल आते हैं। सत्य कहें ब्राह्मण कौन हैं आप?

कालिदास ने कहा - फिर तो मैं मूर्ख ही हूँ ।

स्त्री ने कहा - नहीं तुम मूर्ख कैसे हो सकते? मूर्ख दो ही हैं, पहला राजा जो बिना योग्यता के भी सब पर शासन करता है और दूसरा दरबारी पंडित जो राजा को प्रसन्न करने के लिए ग़लत बात पर भी तर्क करके उसको सही सिद्ध करने की चेष्टा करता है।

(कुछ बोल न सकने की स्थिति में कालिदास वृद्धा के पैर पर गिर पड़े और पानी की याचना में गिड़गिड़ाने लगे)

वृद्धा ने कहा - उठो वत्स (आवाज़ सुनकर कालिदास ने ऊपर देखा तो साक्षात माता सरस्वती वहां खड़ी थी, कालिदास पुनः नतमस्तक हो गए)

माता ने कहा - शिक्षा से ज्ञान आता है न कि अहंकार। तूने शिक्षा के बल पर प्राप्त मान और प्रतिष्ठा को ही अपनी उपलब्धि मान लिया और अहंकार कर बैठे। इसलिए मुझे तुम्हारे चक्षु खोलने के लिए ये स्वांग करना पड़ा।

कालिदास को अपनी गलती समझ में आ गई और भरपेट पानी पीकर वे आगे चल पड़े।

शिक्षा :- विद्वत्ता पर कभी घमण्ड न करें, यही घमण्ड विद्वत्ता को नष्ट कर देता है।

मणिपुर और मिज़ोरम का राज्य पक्षी (State Bird of Manipur ) || नांगयिन ( Nongin/Syrmaticus humiae) ||

मणिपुर और मिजोरम का राज्य पक्षी  (State Bird of Manipur & Mizoram)

जब हम छोटे होते हैं तो हमारे मन में एक बार यह ख्याल जरूर आता है कि काश हमारे पास भी पंख होते और हम नीले आकाश में इन पंछियों की तरह स्वच्छंद उड़ते। चिड़ियों की रंग बिरंगी दुनिया और उनका स्वच्छंद नीले गगन में उड़ना मन को प्रफुल्लित कर जाता है। खैर, आते हैं धरती पर और चर्चा करते हैं मणिपुर के राजकीय पक्षी की जिसका नाम नॉगिन (धारीदार पूँछ वाला तीतर या ह्यूम तीतर) है। नोंगिन को बार-टेल्ड तीतर या ह्यूम तीतर के नाम से भी जाना जाता है।

मणिपुर और मिज़ोरम का राज्य पक्षी  (State Bird of Manipur & Mizoram)

नोंगिन ( सिरमैटिकस हुमिया ), एक शानदार पक्षी को 1989 में मणिपुर का राज्य पक्षी घोषित किया गया था।  यह भारतीय राज्य मणिपुर और मिज़ोरम का भी राज्य पक्षी है। श्री एलन ऑक्टेवियन ह्यूम की पत्नी श्रीमती एओ ह्यूम के सम्मान में इस पक्षी का नाम मिसेज ह्यूम तीतर भी रखा गया है। श्री ह्यूम उन्नीसवीं सदी के सबसे प्रभावशाली पक्षी विज्ञानी थे और उन्होंने 1881 में मणिपुर में अपने अभियान के दौरान इस पक्षी को वैज्ञानिक रूप से रिकॉर्ड किया था।

धारीदार पूँछ वाला यह तीतर या ह्यूम तीतर (अंग्रेजी नाम: Mrs. Hume's pheasant; द्विपद नाम: Syrmaticus humiae), भारत के पूर्वोत्तर हिमालय तथा चीन, म्यांमार तथा थाइलैंड में पाया जाने वाला तीतर प्रजाति का पक्षी है। 

मणिपुरी में नोंगिन का अर्थ वह है जो बारिश के रास्ते का अनुसरण करता है। ' नोंग ' का अर्थ है बारिश और ' इन ' का अर्थ है अनुसरण करना। नोंगिन एक विशाल वन तीतर है, जिसका सिर भूरा-भूरा, नंगी लाल चेहरे की त्वचा, शाहबलूत-भूरा पंख, पीली चोंच, भूरा-नारंगी परितारिका, सफेद पंख पट्टियाँ और धात्विक नीले गर्दन पंख होते हैं, जिनकी लंबाई 90 सेमी तक हो सकती है। नर की एक लंबी भूरे रंग की सफेद पूंछ होती है, जिसमें काले और भूरे रंग की धारियां होती हैं। मादा एक शाहबलूत भूरे रंग की पक्षी है, जिसकी पूंछ सफेद होती है और गर्दन पीली होती है। 

मणिपुर और मिज़ोरम का राज्य पक्षी  (State Bird of Manipur & Mizoram)

इसका आहार मुख्य रूप से पौधों की सामग्री से बना होता है। मादा द्वारा पत्तियों, टहनियों और पंखों के घोंसले में तीन से बारह मलाईदार सफेद अंडे दिए जाते हैं। जहाँ इसे क्रमश: नांगयिन (मणिपुरी) और वावु (मिज़ो भाषा) नाम से जाना जाता है। लगातार हो रही पर्यावास हानि, विरल आबादी और शिकार के कारण, इस तीतर का मूल्यांकन IUCN की लाल सूची में संकटासन्न के रूप में किया गया है। यह CITES के परिशिष्ट I पर सूचीबद्ध है। 

English Translate

State Bird of Manipur & Mizoram

When we are small, once in our mind this thought definitely comes that I wish we too had wings and we could fly freely like these birds in the blue sky. The colorful world of birds and their free flight in the blue sky makes the mind happy. Well, let's come down to earth and discuss the state bird of Manipur called Noggin (Striped Tailed Pheasant or Hume Pheasant). Nongin is also known as Bar-tailed Pheasant or Hume Pheasant.

मणिपुर और मिज़ोरम का राज्य पक्षी  (State Bird of Manipur & Mizoram)

Nongin (Syrmaticus humia), a spectacular bird was declared the state bird of Manipur in 1989. It is also the state bird of the Indian states of Manipur and Mizoram. The bird is also named Mrs Hume's Pheasant in honor of Mrs AO Hume, wife of Mr Allan Octavian Hume. Mr. Hume was the most influential ornithologist of the nineteenth century and scientifically recorded this bird during his expedition to Manipur in 1881.

This striped-tailed pheasant or Hume pheasant (English name: Mrs. Hume's pheasant; binomial name: Syrmaticus humiae), is a pheasant species found in the northeastern Himalayas of India and China, Myanmar and Thailand.

Nongin in Manipuri means one who follows the path of rain. 'Nong' means rain and 'in' means to follow. The nongin is a large forest pheasant, with a greyish-brown head, bare red facial skin, chestnut-brown plumage, yellow beak, brownish-orange iris, white wing bars and metallic blue neck feathers, which can be up to 90 cm in length. Is. The male has a long greyish white tail, with black and brown streaking. The female is a chestnut brown bird with a white tail and a yellow neck.

मणिपुर और मिज़ोरम का राज्य पक्षी  (State Bird of Manipur & Mizoram)

Its diet is mainly composed of plant material. Three to twelve creamy white eggs are laid by the female in a nest of leaves, twigs and feathers. Where it is known as Nangyin (Manipuri) and Vavu (Mizo language) respectively. Due to ongoing habitat loss, sparse populations and hunting, this pheasant is assessed as Endangered on the IUCN Red List. It is listed on Appendix I of CITES.

भारत के सभी राज्यों के राजकीय पक्षियों की सूची |(List of State Birds of India)

श्रीमद्भगवद्गीता (Shrimad Bhagwat Geeta) अध्याय ग्यारह के अनुच्छेद 51 - 55

श्रीमद्भगवद्गीता || अध्याय ग्यारह विश्वरूपदर्शनयोग ||

अथैकादशोऽध्यायःविश्वरूपदर्शनयोग

अध्याय ग्यारह के अनुच्छेद 51 - 55

श्रीमद्भगवद्गीता (Shrimad Bhagwat Geeta)


बिना अनन्य भक्ति के चतुर्भुज रूप के दर्शन की दुर्लभता का और फलसहित अनन्य भक्ति का कथन

अर्जुन उवाच

दृष्ट्वेदं मानुषं रूपं तव सौम्यं जनार्दन।
इदानीमस्मि संवृत्तः सचेताः प्रकृतिं गतः || 11.51 || 

भावार्थ : 

अर्जुन बोले- हे जनार्दन! आपके इस अतिशांत मनुष्य रूप को देखकर अब मैं स्थिरचित्त हो गया हूँ और अपनी स्वाभाविक स्थिति को प्राप्त हो गया हूँ॥51॥

अर्जुन उवाच

सुदुर्दर्शमिदं रूपं दृष्टवानसि यन्मम।
देवा अप्यस्य रूपस्य नित्यं दर्शनकाङ्‍क्षिणः || 11.52 || 

भावार्थ : 

श्री भगवान बोले- मेरा जो चतुर्भज रूप तुमने देखा है, वह सुदुर्दर्श है अर्थात्‌ इसके दर्शन बड़े ही दुर्लभ हैं। देवता भी सदा इस रूप के दर्शन की आकांक्षा करते रहते हैं॥52॥

नाहं वेदैर्न तपसा न दानेन न चेज्यया।
शक्य एवं विधो द्रष्टुं दृष्ट्वानसि मां यथा  || 11.53 || 

भावार्थ : 

जिस प्रकार तुमने मुझको देखा है- इस प्रकार चतुर्भुज रूप वाला मैं न वेदों से, न तप से, न दान से और न यज्ञ से ही देखा जा सकता हूँ॥53॥

भक्त्या त्वनन्यया शक्य अहमेवंविधोऽर्जुन ।
ज्ञातुं द्रष्टुं च तत्वेन प्रवेष्टुं च परन्तप  || 11.54 || 

भावार्थ : 

परन्तु हे परंतप अर्जुन! अनन्य भक्ति (अनन्यभक्ति का भाव अगले श्लोक में विस्तारपूर्वक कहा है।) के द्वारा इस प्रकार चतुर्भुज रूपवाला मैं प्रत्यक्ष देखने के लिए, तत्व से जानने के लिए तथा प्रवेश करने के लिए अर्थात एकीभाव से प्राप्त होने के लिए भी शक्य हूँ॥54॥

मत्कर्मकृन्मत्परमो मद्भक्तः सङ्‍गवर्जितः ।
निर्वैरः सर्वभूतेषु यः स मामेति पाण्डव  || 11.55 || 

भावार्थ : 

हे अर्जुन! जो पुरुष केवल मेरे ही लिए सम्पूर्ण कर्तव्य कर्मों को करने वाला है, मेरे परायण है, मेरा भक्त है, आसक्तिरहित है और सम्पूर्ण भूतप्राणियों में वैरभाव से रहित है (सर्वत्र भगवद्बुद्धि हो जाने से उस पुरुष का अति अपराध करने वाले में भी वैरभाव नहीं होता है, फिर औरों में तो कहना ही क्या है), वह अनन्यभक्तियुक्त पुरुष मुझको ही प्राप्त होता है॥55॥

बैंगनी मेंढक (purple frog) - देश के पश्चिमी घाट में पाए जाने वाला मेंढक

बैंगनी मेंढक (Purple Frog)

वैसे तो आप सभी ने कई तरह के मेंढक देखे होंगे, परंतु आज जिस मेंढक की चर्चा करने जा रही हूं, वह कम लोगों ने ही देखा होगा। मैंने भी नहीं देखा। क्या आपने कभी बैंगनी रंग का मेंढक देखा है? नहीं ना... ऐसा इसलिए क्योंकि यह मेंढक दिखता ही बहुत कम है। यह अपनी जिंदगी का ज्यादातर समय जमीन के नीचे ही बिताता है। इसे साल 2003 में खोजा गया था। बैंगनी मेंढक सिर्फ भारत के पश्चिमी घाट में ही पाए जाते हैं। साल 2008 में इसे दुनिया के 20 सबसे अजीबोगरीब जीवों की सूची में शामिल किया गया था। इसका वैज्ञानिक नाम - नासिकाबत्राचस सह्याड्रेन्सिस। 
बैंगनी मेंढक (purple frog) - देश के पश्चिमी घाट में पाए जाने वाला मेंढक
बैंगनी मेंढक का शरीर मजबूत और फूला हुआ दिखाई देता है और अन्य चपटे मेंढकों की तुलना में अपेक्षाकृत गोल होता है। उनका चपटा शरीर उन्हें जलमग्न चट्टानों और पत्थरों से चिपके रहने में मदद करता है, जो अनिवार्य रूप से उन्हें मजबूत धाराओं से लड़ने में मदद करता है, जिससे उन्हें धारा तटों के पास रहने में आसानी होती है जहां वे आम तौर पर रहते हैं। इसके हाथ और पैर फैले हुए हैं। अन्य मेंढकों की तुलना में इसका सिर छोटा और असामान्य नुकीला थूथन होता है। वयस्क आमतौर पर गहरे बैंगनी-भूरे रंग के होते हैं। नर मादाओं की लंबाई का लगभग एक तिहाई होते हैं।

कठोर हथेलियों वाले इसके छोटे और मांसल अग्रअंग इसे भूमिगत खोदने में मदद करते हैं। अन्य मेंढकों के विपरीत, इसके पिछले पैर बहुत छोटे होते हैं, जो इसे एक स्थान से दूसरे स्थान पर छलांग लगाने की अनुमति नहीं देते हैं। परिणामस्वरूप, यह किसी भी दूरी को लंबे डगों के साथ तय करता है। भूमिगत मिट्टी के दीमकों का शिकार करने के लिए यह अपनी गंध की क्षमता पर अधिक निर्भर करता है।
बैंगनी मेंढक (purple frog) - देश के पश्चिमी घाट में पाए जाने वाला मेंढक
बिल में रहने वाला यह मेंढक तालाबों और खाइयों या झरनों के करीब ढीली, नम और अच्छी तरह हवादार मिट्टी पसंद करता है। इस प्रजाति के केवल 135 मेंढक ज्ञात हैं, जिनमें से केवल 3 मादाएँ हैं। इसके लिए सबसे बड़ा खतरा मानव अतिक्रमण के कारण निवास स्थान का नुकसान है।

English Translate

Purple Frog

Although all of you must have seen many types of frogs, but the frog that I am going to discuss today, only a few people must have seen it. I haven't seen either. Have you ever seen a purple frog? No no... That's because this frog is very less visible. It spends most of its life under the ground. It was discovered in the year 2003. Purple frogs are found only in the Western Ghats of India. In the year 2008, it was included in the list of 20 most strange creatures in the world. Its scientific name is Nasikabatrachus sahyadrensis.
बैंगनी मेंढक (purple frog) - देश के पश्चिमी घाट में पाए जाने वाला मेंढक
The purple frog's body appears strong and bloated and is relatively round compared to other flattened frogs. Their flattened body helps them cling to submerged rocks and boulders, which essentially helps them fight strong currents, making it easier for them to stay near stream banks where they typically live. Its arms and legs are spread. It has a small head and an unusually pointed snout compared to other frogs. Adults are usually dark purple-brown. Males are about one-third the length of females.

Its short and fleshy forelimbs with hard palms help it to dig underground. Unlike other frogs, its hind legs are very short, which do not allow it to jump from place to place. As a result, it covers any distance with long strides. It relies heavily on its sense of smell to hunt termites underground.

This burrowing frog prefers loose, moist and well-aerated soil near ponds and ditches or streams. Only 135 frogs of this species are known, of which only 3 are females. The biggest threat to it is habitat loss due to human encroachment.

रुद्रावतार श्री हनुमान जी

रुद्रावतार श्री हनुमान जी

संसार के सर्वत्र देवस्थानों में हम आञ्जनेय महावली रामभक्त श्री हनुमान जी की आराधन, पूजन एवं वंदन करते चले आ रहे हैं। सभी वर्ण, आश्रम एवं सम्प्रदाय के लोग पवनसुत हनुमान जी के जयघोष में आनंदित हो जाते हैं। विभिन्न प्रकार की कामनाओं की पूर्णता के लिए विशिष्ट पद्धति का अवलम्बन कर महावीर हनुमान जी की उपासना विद्वज्जनों में प्रचलित है। हनुमान जी ही भगवान शिव के पूर्ण रूप हैं और वस्तुतः त्रिदेवों का एक संयुक्त रूप हैं। इस धरा पर जिन सात मनीषियों को अमरत्व का वरदान प्राप्त है, उनमें बजरंगबली भी हैं। हनुमान जी का अवतार भगवान राम की सहायता के लिये हुआ। हनुमान जी के पराक्रम की असंख्य गाथाएँ प्रचलित हैं। इन्होंने जिस तरह से राम के साथ सुग्रीव की मैत्री कराई और फिर वानरों की मदद से असुरों का मर्दन किया, वह अत्यन्त प्रसिद्ध है।

रुद्रावतार श्री हनुमान जी

स्वयं ब्रम्हा स्वयं विष्णु साक्षाद्वेदो महेश्वरः अर्थात वह जो भगवान ब्रह्मा हैं, वह जो भगवान विष्णु हैं और वह जो स्वयं भगवान महेश्वर हैं। 

पुराणों एवं ऐतिहासिक ग्रन्थों में हनुमान जी की उत्पत्ति तथा चरित्र के विषय में वर्णन विभिन्न प्रकार से उपलब्ध होता है। श्री हनुमानजी शंकर- सुवन, केशरी नन्दन और पवनसुत आदि विभिन्न नामों से वर्णित होते हैं। सन्त शिरोमणि गोस्वामी तुलसीदास जी हनुमान चालीसा में 'शंकर सुवन केशरी नन्दन' तथा 'अंजनि-पुत्र पवन सुत नामा' के रूप में स्पष्ट रूप से शंकर- सुबन, केशरी नन्दन एवं पवन सुत नामों से स्तुति करते हैं।

वायुपुराण के आधार पर हनुमान जी भगवान् शिव स्वरूप हैं। 

‘आश्विनस्यासिते पक्षे स्वात्यां भौमे चतुर्दशी ।
मेष लग्नेऽब्जनी गर्भात् स्वयं जातो हरः शिवः ।।’

अगस्त्य संहिता में

‘ऊर्जे कृष्णचतुर्दश्यां भौमे स्वात्यां कपीश्वरः ।
मेषलग्नेऽब्जनी गर्भात् प्रादुर्भूतः स्वयं शिवः ।।’

कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी, भौमवार, स्वाती नक्षत्र मेपलग्न में अञ्जनी के गर्भ से स्वयं भगवान् शिव के प्रकट होने के कारण श्री हनुमान् जी को रुद्रावतार माना गया है। 

'रुद्रावतार संसार दुःख भारापहारक !, 
लोटला गुलपातेन मातीन् निपातय ।' 

उपरोक्त से रुद्रावतार की स्पष्टता प्रकट होती है।

प्राणवायु के रूप में राम-भक्त हनुमान का शास्त्रीय प्रमाण विभिन्न पुराणों और अन्य शास्त्रों से प्राप्त किया जा सकता है।

गरुड़ पुराण 3.16.68 

अतो रोचनानमासौ मरुदंशः 
प्रकीर्तितः रामावतार हनुमानरामकार्यार्थसाधकः | 
स एव भीमसेनस्तु जातो भूमियाम् महाबलः ||

जब भगवान राम पृथ्वी पर अवतरित हुए, तो राम की सहायता करने के लिए वायु ने हनुमान के रूप में जन्म लिया। 

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि मुख्य प्राणवायु के सभी अवतार श्रीहरि की सेवा और भक्ति का प्रसार करने के लिए ही साकार होते हैं। हनुमान के रूप में, वायु ने माँ जानकी की खोज में परम भगवान राम की सहायता की।

श्री हनुमान दशोत्तर शतनामस्तोत्रम् में भी कहा गया है~

रामावतारजाताय हनुमद्रुपिणे नमः। 
वासुदेवस्य भक्ताय भीमसेनाय ते नमः ॥
दिव्यरूपाय शान्ताय नमस्ते यतिरूपिणे अज्ञानतिमिरार्काय व्यासशिष्याय ते नमः॥

अर्थ -

जब भगवान विष्णु ने राम के रूप में अवतार लिया; उनकी सेवा के लिए वायु ने हनुमान के रूप में अवतार लिया। द्वापर युग में, वायु ने भगवान वासुदेव (कृष्ण) की सेवा के लिए भीमसेन के रूप में अवतार लिया।

ततश्च समये तस्माद्धनुमानिति नामभाक्र:। 
शम्भुर्जज्ञे कपित्नुर्महबलपराक्रमः॥

शिव के अंश से उत्पन्न बुद्धिमान वानर सुग्रीव का मंत्री बन गया और उसने हर तरह से उसके लिए लाभकारी कार्य किया।

-शतरुद्र-संहिता, शिवपुराण

तारासरोपनिषत् से आगे, शुक्ल यजुर्वेद से जुड़ा एक पाठ –

ॐ यो ह वै श्रीपरमात्मा नारायणः स भगवानमकरवाच्यः
शिवस्वरूपो हनुमानभूर्भुवः सुवस्तस्मै वै नमोनमः ।।

ॐ. वह जो श्री-परमात्मा, नारायण और (अक्षर) 'म' द्वारा वर्णित भगवान हैं, शिव हैं, जो हनुमान और भू:, भुव: और सुव: के रूप में हैं ; उनको नमस्कार!

जय श्री राम 🚩
जय बजरंगबली 🚩