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मैंने गाकर दुख अपनाए - हरिवंशराय बच्चन

मैंने गाकर दुख अपनाए

मैंने गाकर दुख अपनाए - हरिवंशराय बच्चन

"जरूरी नहीं कि मिठाई खिलाकर ही दूसरों का मुंह मीठा करें, 
 हम मीठा बोलकर भी लोगों को खुशियां दे सकते हैं.."

मैंने गाकर दुख अपनाए!

कभी न मेरे मन को भाया,

जब दुख मेरे ऊपर आया,

मेरा दुख अपने ऊपर ले कोई मुझे बचाए!

मैंने गाकर दुख अपनाए!


कभी न मेरे मन को भाया,

जब-जब मुझको गया रुलाया,

कोई मेरी अश्रु धार में अपने अश्रु मिलाए!

मैंने गाकर दुख अपनाए!


पर न दबा यह इच्छा पाता,

मृत्यु-सेज पर कोई आता,

कहता सिर पर हाथ फिराता-

’ज्ञात मुझे है, दुख जीवन में तुमने बहुत उठाये!

मैंने गाकर दुख अपनाए!

- हरिवंशराय बच्चन

Good Morning

"ख़ुशी उपलब्धि पाने के उत्त्साह 
और रचनात्मक प्रयास के रोमांच में निहित है.."

कुत्ता, बन्दर और शेर की मज़ेदार कहानी

कुत्ता, बन्दर और शेर की मज़ेदार कहानी

एक दिन एक कुत्ता जंगल में रास्ता खो गया। तभी उसने देखा कि एक शेर उसकी तरफ आ रहा है। कुत्ते की सांस रूक गयी। उसने सोचा - "आज तो मेरा, काम तमाम होगा..!"

कुत्ता, बन्दर और शेर की मज़ेदार कहानी

उसने इधर उधर देखा तो कुछ सुखी हड्डियां पड़ी थी, उन हड्डियों को देखते ही उसके दिमाग में एक तरकीब आई और वो आते हुए शेर की तरफ पीठ कर के बैठ गया और एक सूखी हड्डी को चूसने लगा और जोर जोर से बोलने लगा - "वाह! शेर को खाने का मज़ा ही कुछ और है। एक और मिल जाए तो आज की दावत पूरी हो जायेगी।" और उसने जोर से डकार मारी। 

ये सुन कर शेर सोच में पड़ गया। उसने सोचा- "ये कुत्ता तो शेर का शिकार करता है। जान बचा कर भागने में ही भलाई है।" यही सोंचता हुआ शेर वहां से भाग गया। 

मगर पास के पेड़ पर बैठा एक बन्दर यह सब तमाशा देख रहा था। उसने सोचा यह अच्छा मौका है, शेर को सारी कहानी बता देता हूँ, शेर से दोस्ती भी हो जायेगी और उससे ज़िन्दगी भर के लिए जान का खतरा भी दूर हो जायेगा। वो फटाफट शेर के पीछे भागा। पर कुत्ते ने बन्दर को जाते हुए देख लिया और समझ गया की कुछ तो गड़बड़ है। 

उधर बन्दर ने शेर को सारी कहानी बता दी कि कैसे कुत्ते ने उसे बेवकूफ बनाया है। शेर जोर से दहाडा और बोला -"चल मेरे साथ, अभी उसकी लीला ख़तम करता हूँ।" बन्दर को अपनी पीठ पर बैठा कर शेर कुत्ते की तरफ चल दिया। 

कुत्ते ने शेर को आते देखा तो एक बार फिर उसके आगे जान का संकट आ गया, मगर कुत्ता फिर हिम्मत करके उसकी तरफ पीठ करके बैठ गया और जोर जोर से बोलने लगा - "ये बंदर ना जाने कहां मर गया, उसको गए 1 घंटा हो गया। साला एक शेर को फंसा कर नहीं ला सकता।"

यह सुनते ही शेर ने बंदर को वही पटका और उसको मार दिया और वापस पीछे भाग गया। इस तरह कुत्ते ने अपनी हिम्मत और समझदारी से दो बार अपनी जान बचा ली। साथ ही अपने खिलाफ मौका उठाने का प्रयास कर रहे बंदर को भी अपने दुश्मन के हाथों ही मरवा दिया। 

शिक्षा : मुश्किल समय में अपना आत्मविश्वास कभी नहीं खोएं। 

हार्ड वर्क के बजाय स्मार्ट वर्क ही करें तभी जीवन की असली सफलता मिलेगी। 

उत्तराखंड का राजकीय/राज्य पक्षी || State Bird Of Uttarakhand ||

उत्तराखंड का राजकीय/राज्य पक्षी

उत्तराखंड अपनी खूबसूरत वादियों के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है। उत्तर प्रदेश के 13 हिमालई जिलों को अलग कर 9 नवंबर 2000 को भारतीय गणतंत्र में 27वें राज्य और हिमालई राज्य में 11वें राज्य के रूप में उत्तराखंड का गठन हुआ। पहले इसका नाम उत्तरांचल था, फिर 1 जनवरी 2007 में इसका नाम बदलकर उत्तराखंड कर दिया गया। "मोनाल (Monal)" को उत्तराखंड राज्य गठन के बाद वर्ष 2000 में राज्य पक्षी का दर्जा दिया गया था। 

उत्तराखंड  का राजकीय/राज्य पक्षी || State Bird Of Uttarakhand ||

हर राज्य की तरह उत्तराखंड राज्य का भी अपना राजकीय पक्षी है। राजकीय पक्षियों के क्रम को आगे बढ़ाते हुए आज बात करते हैं उत्तराखंड के राजकीय पक्षी "मोनाल (Monal)" के बारे में। हिमालय के मयूर के नाम से प्रसिद्ध मोनाल उत्तराखंड का राजकीय पक्षी है। यह पक्षी लगभग संपूर्ण हिमालई क्षेत्र में 2500 से 5000 मीटर के ऊँचाई वाले घने जंगलों में पाए जाते हैं। 'मोनाल' और 'डफिया' एक ही प्रजाति के पक्षी हैं, लेकिन मोनाल मादा पक्षी है और डफिया नर पक्षी।

उत्तराखंड, कश्मीर, असम तथा नेपाल में स्थानीय भाषा में इस पक्षी को "मन्यार" या "मुनाल" के नाम से भी जाना जाता है। पश्चिमोत्तर हिमालय में मुनाल, घुर मुनाल, रतिया कावाँ, रतनल, रतकप, कश्मीर में सुनाल (नर सुनामुर्ग़ तथा मादा हाम), हिमाचल प्रदेश में नीलगुरु या मुनाल (नर नील तथा मादा करेरी), उत्तर प्रदेश में दतिया, मिश्मी भाषा में पिया पदिर या दाफ़े, लेपचा भाषा में फ़ो दौंग, नेपाल में डंगन, भूटान में बुप तथा सिक्किम में चामदौंग के नामों से जाना जाता है।

उत्तराखंड  का राजकीय/राज्य पक्षी || State Bird Of Uttarakhand ||

विभिन्न रंगों के मिश्रण से बनाया यह पक्षी बहुत ही खूबसूरत दिखता है। नीले, काले, हरे आदि रंगों वाले इस पक्षी की पूँछ हरी होती है। मोर की तरह इसके नर के सिर पर एक रंगीन कलगी होता है। यह पक्षी अपना घोंसला नहीं बनाते हैं, चट्टान और पेड़ के छिद्र में अंडे दे देते हैं। वनस्पति, कीड़े मकोड़े, आलू आदि मोनाल के प्रिय भोजन हैं। मोनाल आलू को बेहद शौक से खाते हैं, इसलिए आलू की फसल को यह बहुत नुकसान पहुंचाते हैं।

यह उत्तराखण्ड का राज्य पक्षी होने के साथ-साथ पड़ोसी देश नेपाल का राष्ट्रीय पक्षी भी है। मांस और खाल के लिए मोनाल का शिकार अधिक होता है जिसकी वजह से इनकी संख्या दिन प्रतिदिन घट रही है। 

उत्तराखंड  का राजकीय/राज्य पक्षी || State Bird Of Uttarakhand ||

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State bird of Uttarakhand

Uttarakhand is famous all over the world for its beautiful valleys. Uttarakhand was formed on 9 November 2000 as the 27th state in the Republic of India and the 11th state in the Himalayan region by carving out 13 Himalayan districts of Uttar Pradesh. Earlier its name was Uttaranchal, then on January 1, 2007, its name was changed to Uttarakhand. "Monal" was given the status of state bird in the year 2000 after the formation of Uttarakhand state.

उत्तराखंड  का राजकीय/राज्य पक्षी || State Bird Of Uttarakhand ||

Like every state, the state of Uttarakhand also has its own state bird. Taking forward the sequence of state birds, today let's talk about the state bird of Uttarakhand "Monal". Monal, popularly known as the Peacock of the Himalayas, is the state bird of Uttarakhand. These birds are found in dense forests with an altitude of 2500 to 5000 meters in almost the entire Himalayan region. 'Monal' and 'Daphia' are birds of the same species, but Monal is a female bird and Daphia is a male bird.

In Uttarakhand, Kashmir, Assam and Nepal, this bird is also known as "Manyar" or "Munal" in the local language. Munal, Ghur Munal, Ratia Kawan, Ratnal, Ratkap in North-Western Himalayas, Sunal (male Sunamurgh and female Ham) in Kashmir, Nilguru or Munal (male Neel and female Kareri) in Himachal Pradesh, Datia in Uttar Pradesh, Piya Padir in Mishmi language Or Dafe, known as Pho Doung in Lepcha language, Dangan in Nepal, Bup in Bhutan and Chamdong in Sikkim.

This bird made by mixing different colors looks very beautiful. The tail of this bird with colors like blue, black, green etc. is green. Like a peacock, its male has a colorful crest on its head. These birds do not make their nests, they lay eggs in holes in rocks and trees. Vegetables, insects, potatoes etc. are Monal's favorite food. Monal eats potatoes very fondly, so it causes a lot of damage to the potato crop.

उत्तराखंड  का राजकीय/राज्य पक्षी || State Bird Of Uttarakhand ||

Apart from being the state bird of Uttarakhand, it is also the national bird of the neighboring country Nepal. Monal's hunting is more for meat and skin, due to which their number is decreasing day by day.

भारत के सभी राज्यों के राजकीय पक्षियों की सूची |(List of State Birds of India)

श्रीमद्भगवद्गीता (Shrimad Bhagwat Geeta)

 श्रीमद्भगवद्गीता || अध्याय दसवाँ -  विभूतियोग ||

अथ दशमोऽध्याय:- विभूतियोग

अध्याय दस के अनुच्छेद 12 - 18

अर्जुन द्वारा भगवान की स्तुति तथा विभूति और योगशक्ति को कहने के लिए प्रार्थना

श्रीमद्भगवद्गीता (Shrimad Bhagwat Geeta)

अर्जुन उवाच

परं ब्रह्म परं धाम पवित्रं परमं भवान्‌ ।
पुरुषं शाश्वतं दिव्यमादिदेवमजं विभुम्‌ ॥10.12॥
आहुस्त्वामृषयः सर्वे देवर्षिर्नारदस्तथा ।
असितो देवलो व्यासः स्वयं चैव ब्रवीषि मे ॥10.13॥

भावार्थ : 

अर्जुन बोले- आप परम ब्रह्म, परम धाम और परम पवित्र हैं, क्योंकि आपको सब ऋषिगण सनातन, दिव्य पुरुष एवं देवों का भी आदिदेव, अजन्मा और सर्वव्यापी कहते हैं। वैसे ही देवर्षि नारद तथा असित और देवल ऋषि तथा महर्षि व्यास भी कहते हैं और आप भी मेरे प्रति कहते हैं॥10.12-10.13॥

सर्वमेतदृतं मन्ये यन्मां वदसि केशव ।
न हि ते भगवन्व्यक्तिं विदुर्देवा न दानवाः ॥10.14॥

भावार्थ : 

हे केशव! जो कुछ भी मेरे प्रति आप कहते हैं, इस सबको मैं सत्य मानता हूँ। हे भगवन्‌! आपके लीलामय (गीता अध्याय 4 श्लोक 6 में इसका विस्तार देखना चाहिए) स्वरूप को न तो दानव जानते हैं और न देवता ही॥10.14॥

स्वयमेवात्मनात्मानं वेत्थ त्वं पुरुषोत्तम ।
भूतभावन भूतेश देवदेव जगत्पते ॥10.15॥

भावार्थ : 

हे भूतों को उत्पन्न करने वाले! हे भूतों के ईश्वर! हे देवों के देव! हे जगत्‌ के स्वामी! हे पुरुषोत्तम! आप स्वयं ही अपने से अपने को जानते हैं॥10.15॥

वक्तुमर्हस्यशेषेण दिव्या ह्यात्मविभूतयः ।
याभिर्विभूतिभिर्लोकानिमांस्त्वं व्याप्य तिष्ठसि ॥10.16॥

भावार्थ : 

इसलिए आप ही उन अपनी दिव्य विभूतियों को संपूर्णता से कहने में समर्थ हैं, जिन विभूतियों द्वारा आप इन सब लोकों को व्याप्त करके स्थित हैं॥10.16॥

कथं विद्यामहं योगिंस्त्वां सदा परिचिन्तयन्‌ ।
केषु केषु च भावेषु चिन्त्योऽसि भगवन्मया ॥10.17॥

भावार्थ : 

हे योगेश्वर! मैं किस प्रकार निरंतर चिंतन करता हुआ आपको जानूँ और हे भगवन्‌! आप किन-किन भावों में मेरे द्वारा चिंतन करने योग्य हैं?॥10.17॥

विस्तरेणात्मनो योगं विभूतिं च जनार्दन ।
भूयः कथय तृप्तिर्हि श्रृण्वतो नास्ति मेऽमृतम्‌ ॥10.18॥

भावार्थ : 

हे जनार्दन! अपनी योगशक्ति को और विभूति को फिर भी विस्तारपूर्वक कहिए, क्योंकि आपके अमृतमय वचनों को सुनते हुए मेरी तृप्ति नहीं होती अर्थात्‌ सुनने की उत्कंठा बनी ही रहती है॥10.18॥

हेन्नीगुया साल्मिनीकोला (henniguay salminicola) - बिना सांस लेने वाला रहस्यमई जीव

हेन्नीगुया साल्मिनीकोला (Henniguay Salminicola) 

बिना सांस लेने वाला रहस्यमई जीव

चलते हैं जीवों की अजब गजब दुनिया की तरफ।
हेन्नीगुया साल्मिनीकोला (henniguay salminicola) बिना सांस लेने वाला रहस्यमयी जीव है, जिनकी जिंदगी मछलियों पर अटकी होती है। ये एक तरह का परजीवी है। इस जीव की खोज इजारइल की अवीव यूनिवर्सिटी ने की है। 
हेन्नीगुया साल्मिनीकोला (henniguay salminicola) - बिना सांस लेने वाला रहस्यमई जीव
दुनिया में कई ऐसे रहस्यमयी जीव हैं, जिनकी कल्पना करना भी हमारे लिए मुमकिन नहीं है। ऐसा ही एक जीव वैज्ञानिकों ने खोजा है। जिसका नाम हेन्नीगुया साल्मिनीकोला है। ये एक परजीवी है। हैरानी की बात यह है कि इसके शरीर में श्वांस नली नहीं है। इसलिए ये बिना ऑक्सीजन के जिंदा (without oxygen) रह सकता है। हालांकि इसका जीवन मछलियों पर निर्भर करता है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक इस परजीवी में माइट्रोकॉन्ड्रियल जीनोम नहीं होता है। ये वो भाग होता है जिसके जरिए जीव सांस लेते हैं। इस भाग की कमी के चलते ही यह परजीवी बिना सांस लिए भी जीवित रह सकता है। इस रहस्यमयी जीव की खोज इजरायल के अवीव यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की टीम ने की है। उनके मुताबिक यह जीव मछलियों से ऊर्जा प्राप्त करता है। ये परजीवी ज्यादातर साल्मन फिश में पाए जाते हैं। ये तब तक जिंदा रहते हैं, जब तक कि मछली सही सलामत रहती हैं।
हेन्नीगुया साल्मिनीकोला (henniguay salminicola) - बिना सांस लेने वाला रहस्यमई जीव
शोधकर्ता डयाना याहलोमी के मुताबिक यह परजीवी इंसानों या दूसरे जीवों के लिए बिल्कुल भी नुकसानदायक नहीं हैं। हालांकि यह विकसित कैसे हुआ और बिना ऑक्सीजन के ये जिंदा कैसे रहता है ये जांच का विषय है। यह जीव इतने छोटे होते हैं कि इन्हें केवल फ्लोरेसेंस माइक्रोस्कोप से देखा जा सकता है। इस जीव की तरह वैज्ञानिकों ने साल 2010 में भी एक रहस्यमयी जीव की खोज की थी। जो बिना सांस लिए जिंदा रह सकता था। इसकी खोज इटली के वैज्ञानिकों ने की थी।

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Henniguay salminicola (henniguay salminicola)

mysterious creature without breathing


Henniguay salminicola is a mysterious creature without breathing, whose life is stuck on fish. It is a kind of parasite. This creature has been discovered by Israel's Aviv University.
हेन्नीगुया साल्मिनीकोला (henniguay salminicola) - बिना सांस लेने वाला रहस्यमई जीव
There are many such mysterious creatures in the world, which are not even possible for us to imagine. One such creature has been discovered by scientists. Whose name is Henniguya salminicola. It is a parasite. Surprisingly, there is no windpipe in its body. That's why it can live without oxygen. Although its life depends on the fishes.

According to scientists, this parasite does not have a mitochondrial genome. This is the part through which the living beings breathe. Due to the lack of this part, this parasite can survive even without breathing. This mysterious creature has been discovered by a team of researchers from Israel's Aviv University. According to them, this creature gets energy from fishes. These parasites are mostly found in salmon fish. They remain alive as long as the fish remains intact.
हेन्नीगुया साल्मिनीकोला (henniguay salminicola) - बिना सांस लेने वाला रहस्यमई जीव
According to researcher Diana Yahlomi, these parasites are not at all harmful to humans or other organisms. However, how it evolved and how it survives without oxygen is a matter of investigation. These organisms are so small that they can only be seen with a fluorescence microscope. Like this creature, scientists had also discovered a mysterious creature in the year 2010. Who could live without breathing. It was discovered by Italian scientists.

अन्नपूर्णा मंदिर, इंदौर, मध्यप्रदेश || Annapurna Temple, Indore, Madhya Pradesh ||

अन्नपूर्णा मंदिर, इंदौर, मध्यप्रदेश (Annapurna Temple, Indore, Madhya Pradesh)

भोजन हिंदू धर्म में भगवान के रूप में पूजनीय है। हिन्दू धर्म में अन्नपूर्णा देवी को भोजन की देवी माना गया है। भारत में कई सारे अन्नपूर्णा मंदिर हैं। आज हम इंदौर के प्रसिद्ध मंदिर अन्नपूर्णा देवी मंदिर के बारे में जानेंगे। 

अन्नपूर्णा मंदिर, इंदौर, मध्यप्रदेश (Annapurna Temple, Indore, Madhya Pradesh)

इंदौर में स्थित मां अन्नपूर्णा मंदिर सबसे प्रसिद्ध और पुराने मंदिरों में से एक माना जाता है। इस मंदिर का निर्माण 1959 में महामंडलेश्वर स्वामी प्रबानंदगिरिमाराज ने करवाया था। यह मंदिर भोजन की देवी अन्नपूर्णा को समर्पित है, और इसमें शिव, हनुमान और कालभैरव की मूर्तियां हैं। इसमें कमल की स्थिति में भगवान शिव की 14.5 फीट ऊंची मूर्ति भी है।

अन्नपूर्णा मंदिर, इंदौर, मध्यप्रदेश (Annapurna Temple, Indore, Madhya Pradesh)

अन्नपूर्णा मंदिर 2 एकड़ में फैला है, यह आर्यन और द्रविड़ वास्तुकला के शानदार समायोजन का एक सुंदर उदाहरण है। अन्नपूर्णा मंदिर की ऊंचाई 100 फीट से भी ज्यादा है। भव्य प्रवेश द्वार जटिल नक्काशी के साथ हाथियों की चार आदमकद मूर्तियों से सुशोभित है। मंदिर की बाहरी दीवारों पर रंगीन पौराणिक चित्रों को उकेरा गया है। मंदिर की दीवारों पर कृष्ण लीला का चित्रण है। अन्नपूर्णा मंदिर के अंदर मां काली और मां सरस्वती के साथ जगमगाती मां अन्नपूर्णा की मूर्ति है।

अन्नपूर्णा मंदिर, इंदौर, मध्यप्रदेश (Annapurna Temple, Indore, Madhya Pradesh)

मंदिर केवल धार्मिक आगंतुकों के लिए ही नहीं है, बल्कि उन लोगों के लिए भी है, जो प्राचीन भारतीय कला और हिंदू धर्म के वर्चस्व के बारे में जानना चाहते हैं।

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Annapurna Temple, Indore, Madhya Pradesh

Food is revered as a god in Hinduism. In Hindu religion, Annapurna Devi is considered the goddess of food. There are many Annapurna temples in India. Today we will learn about the famous temple Annapurna Devi Temple of Indore.

अन्नपूर्णा मंदिर, इंदौर, मध्यप्रदेश (Annapurna Temple, Indore, Madhya Pradesh)

Maa Annapurna Temple located in Indore is considered to be one of the most famous and old temples. This temple was built in 1959 by Mahamandaleshwar Swami Prabanandagirimaraj. The temple is dedicated to Annapurna, the goddess of food, and has idols of Shiva, Hanuman and Kalabhairava. It also houses a 14.5 ft high idol of Lord Shiva in the lotus position.

अन्नपूर्णा मंदिर, इंदौर, मध्यप्रदेश (Annapurna Temple, Indore, Madhya Pradesh)

The Annapurna Temple, spread over 2 acres, is a beautiful example of a fine amalgamation of Aryan and Dravidian architecture. The height of Annapurna temple is more than 100 feet. The grand entrance is adorned with four life-size statues of elephants with intricate carvings. Colorful mythological paintings are carved on the outer walls of the temple. Krishna Leela is depicted on the walls of the temple. Inside the Annapurna temple, you will see the idol of Maa Annapurna shining with Maa Kali and Maa Saraswati.

The temple is not only for religious visitors but also for those who want to know about the ancient Indian art and supremacy of Hinduism.

सम्मान समारोह और मातृ दिवस

सम्मान समारोह और मातृ दिवस

"रूपा ओस की बूंद" पुस्तक का सम्मान समारोह

"रूपा ओस की बूंद" पुस्तक का सम्मान समारोह


सम्मान समारोह और मातृ दिवस

कल का दिन मेरे लिए दोहरी खुशियों वाला रहा और बहुत ज्यादा व्यस्त रहा। बहुत विशेष दिन था मेरे लिए, एक तरफ पुस्तक "रूपा ओस की एक बूंद" के लिए मुझे सम्मान मिला तो दूसरी तरफ सम्मान पाकर शाम घर पहुंची तो मातृ दिवस पर यानी मदर्स डे पर बच्चों द्वारा सरप्राइस भी मिला। वाकई में कल का दिन बहुत सुखद रहा।

सम्मान समारोह और मातृ दिवस

सम्मान समारोह और मातृ दिवस

कल मुझे लोकरंजन प्रकाशन द्वारा मेरी पुस्तक "रूपा ओस की एक बूंद" के लिए प्रयागराज में होटल ऑर्चर्ड वन में एक भव्य समारोह में सम्मानित किया गया। शाम को जब मैं प्रयागराज से वापस अपने आशियाने में लौटी तो सामने देवरिया से आई हुई मेरी माता श्री को देखकर मुझे सुखद आश्चर्य की अनुभूति हुई। फिर मैंने बच्चों के साथ और मां के साथ केक काटकर मातृ दिवस की खुशियां मनाईं।

सम्मान समारोह और मातृ दिवस

सम्मान समारोह और मातृ दिवस

प्रयागराज के जिस सम्मान समारोह में मुझे सम्मानित किया गया उसके मुख्य अतिथि प्रोफेसर एस एन सिंह थे जोकि ट्रिपल आईटी ग्वालियर के निदेशक हैं। उनके हाथों सम्मान पाकर मैं अभिभूत थी। लोकरंजन प्रकाशन का तहे दिल से शुक्रिया।

सम्मान समारोह और मातृ दिवस

पोस्ट डालने में देर हो गई क्यूंकि कल का दिन बहुत व्यस्त रहा। लिखना तो बहुत कुछ चाहती हूं पर आज बस इतना ही।

सम्मान समारोह और मातृ दिवस