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महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा / Domestic Violence

घरेलू हिंसा

आज हम 21वीं सदी में जी रहे हैं और हमने देश और दुनिया में बहुत तरक्की की है। आज हमारा भारत जमीन से लेकर आसमान तक हर जगह अपनी कामयाबी के परचम लहरा चुका है, परंतु आज भी हमारे समाज में महिलाओं के साथ यदा-कदा घरेलू हिंसा की बातें सामने आती रहती हैं। वैसे तो हम नारी सशक्तिकरण की बहुत बड़ी-बड़ी बातें किया करते हैं, परंतु क्या उन बातों पर हम सही मायने में अमल कर पा रहे हैं या नहीं। 

महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा / Domestic Violence

यह विषय बहुत ही गंभीर है आज महिलाएं साइकिल से लेकर प्लेन तक चला रही हैं, परंतु कुछ संकुचित मानसिक विचारधारा के लोग आज भी उन्हें हीन भावना से देखते हैं। हिंदुस्तान की लगभग 70% आबादी ग्रामीण क्षेत्र में रहती है। इन ग्रामीण क्षेत्रों में नारी सशक्तिकरण की बात तो दूर है, इन्हें इनका अधिकार भी नहीं दिया जाता। कभी इन्हें दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता है, तो कभी किसी अन्य वजह से। भारतीय संविधान में भारत के सभी नागरिकों को अपना जीवन सम्मान से जीने का अधिकार दिया है, परंतु आज भी हमारे समाज की महिलाएं उन अधिकारों से, उन कर्तव्यों से वंचित हैं। हमारे समाज में कार्यस्थल हो या रोड पर चल रही महिलाएं हों, घर में बैठी कोई महिला हो, कोई भी महिला पूर्ण रूप से सुरक्षित नहीं है। 

महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा / Domestic Violence

कहने के लिए तो दुनिया में अगर महिलाओं को सबसे ज्यादा कोई देश सम्मान देता है, तो वो भारत है। क्योंकि हमारा भारत परंपराओं और संस्कृतिओं का देश है। हमारे यहाँ महिलाओं को देवी का स्वरूप मानकर पूजा जाता है। लेकिन फिर भी भारत में क्यों महिलाओं के खिलाफ अपराध दिन-ब-दिन बढ़ते ही जा रहे हैं। उनके साथ ना सिर्फ घर के बाहर बल्कि घर के अंदर भी घरेलू हिंसा के अपराध हो रहे हैं। आए दिन हम दैनिक समाचार में देखते हैं कि, एक दुल्हन को दहेज के लिए घर में ही मार दिया गया।

महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा / Domestic Violence

घरेलू हिंसा की कानूनी परिभाषा

घरेलू हिंसा के विरुद्ध महिला संरक्षण अधिनियम की धारा, 2005” में घरेलू हिंसा को पारिभाषित किया गया है - "प्रतिवादी का कोई बर्ताव, भूल या किसी और को काम करने के लिए नियुक्त करना, घरेलू हिंसा में माना जाएगा। 

  • क्षति पहुँचाना या जख्मी करना या पीड़ित व्यक्ति को स्वास्थ्य, जीवन, अंगों या हित को मानसिक या शारीरिक तौर से खतरे में डालना या ऐसा करने की नीयत रखना और इसमें शारीरिक, यौनिक, मौखिक और भावनात्मक और आर्थिक शोषण शामिल है; या
  • दहेज़ या अन्य संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति की अवैध मांग को पूरा करने के लिए महिला या उसके रिश्तेदारों को मजबूर करने के लिए यातना देना, नुक्सान पहुँचाना या जोखिम में डालना ; या
  • पीड़ित या उसके निकट सम्बन्धियों पर उपरोक्त वाक्यांश (क) या (ख) में सम्मिलित किसी आचरण के द्वारा दी गयी धमकी का प्रभाव होना; या
  • पीड़ित को शारीरिक या मानसिक तौर पर घायल करना या नुक्सान पहुँचाना"
महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा / Domestic Violence

घरेलू हिंसा को साधारण भाषा में समझें तो, घर में ही किया जाने वाला एक प्रकार का हिंसात्मक व्यवहार। इसमें घर के कोई एक सदस्य को बाकी के सदस्यों द्वारा शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान किया जाता है। घरेलू हिंसा का मुख्य उदेश्य दूसरे व्यक्ति को काबू करना या अपनी इच्छाओं को पूरी करना होता है।

इसमें ज़्यादातर महिलायें शिकार होती है। इसलिए राज्य महिला आयोग के अनुसार यदि परिवार का कोई व्यक्ति महिला के साथ मारपीट या अन्य रूप से प्रताड़ित करे, तो वह महिला घरेलू हिंसा का शिकार कहलाएगी। संयुक्‍त राष्‍ट्र जनसंख्‍या कोष की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की कुल विवाहित महिलाओं में से दो-तिहाई महिला घरेलू हिंसा की शिकार है।

महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा / Domestic Violence

यह एक आंकड़ा मात्र नहीं है। आजाद हिंदुस्तान में जहां सविधान जैसी व्यवस्था लागू है, जिसने सबको अपना जीवन पूर्ण आजादी से जीने का अधिकार प्रदान किया है, स्वतंत्र रूप से बोलने का अधिकार प्रदान किया है, ऐसे व्यापक संविधान के होते हुए कई कानून बनाए जाने के उपरांत भी हमारे समाज में आज घरेलू हिंसा व्यापक स्तर पर महिलाओं के साथ हो रहे हैं। इन्हें रोकने का कार्य सरकार का नहीं है। हमें अपनी सोच अपने विचार अपने आदर्श को बदलना होगा। कुछ समाज के ठेकेदार हिंदुस्तान को पुरुष प्रधान देश समझते हैं। ऐसे ठेकेदारों को पहचानना पड़ेगा तथा उन्हें नारी शक्ति का एहसास कराना होगा। तभी हमारी बहन बेटियां इस समाज में स्वच्छंदता से रह सकेंगी। 

English Translate

domestic violence

Today we are living in the 21st century and we have made a lot of progress in the country and the world. Today, our India has blown the flag of its success everywhere from the ground to the sky, but even today, in our society, there are occasional incidents of domestic violence against women. Although we talk a lot about women empowerment, but are we able to implement those things in real sense or not.

महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा / Domestic Violence

This topic is very serious, today women are driving from bicycle to plane, but people of some narrow mental ideology still look at them with inferiority complex. About 70% of the population of India lives in rural areas. In these rural areas, there is no talk of women empowerment, they are not even given their right. Sometimes they are tortured for dowry, sometimes for some other reason. In the Indian Constitution, all the citizens of India have been given the right to live their life with dignity, but even today the women of our society are deprived of those rights, those duties. In our society, whether it is the workplace or the women walking on the road, whether there is a woman sitting in the house, no woman is completely safe.

महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा / Domestic Violence

To say, if any country in the world respects women the most, then it is India. Because our India is a land of traditions and cultures. Here women are worshiped as the form of Goddess. But still why crimes against women are increasing day by day in India. Crimes of domestic violence are being committed with them not only outside the house but also inside the house. Every day we see in the daily news that a bride was killed at home for dowry.

legal definition of domestic violence

The “Protection of Women Against Domestic Violence Act, 2005” Section 2005 defines domestic violence as “any act, omission or commission of any other act by the respondent, shall amount to domestic violence.

  • causing injury or injuring or endangering the health, life, limb or interest of the aggrieved person mentally or physically or with intent to do so and includes physical, sexual, verbal and emotional and economic abuse; Or
  • Torture, harm or put at risk to compel the woman or her relatives to meet an illegal demand for dowry or other property or valuable security; Or
  • to have the effect of a threat to the victim or his immediate relatives by any of the conduct included in clause (a) or (b) above; Or
  • Injuring or causing harm to the victim physically or mentally"
महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा / Domestic Violence

If we understand domestic violence in simple language, then a type of violent behavior done at home itself. In this, one member of the household is harassed physically and mentally by the other members. The main purpose of domestic violence is to control the other person or to fulfill one's desires.

Most of the women are victims of this. Therefore, according to the State Women's Commission, if any person from the family assaults or harassed the woman in any other way, then that woman will be called a victim of domestic violence. According to a report by the United Nations Population Fund, two-thirds of the total married women in India are victims of domestic violence.

महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा / Domestic Violence

This is not just a figure. In independent India, where a system like a constitution is in force, which has given everyone the right to live their life with complete freedom, the right to speak freely, despite having such a comprehensive constitution, many laws have been made in our society. Today domestic violence is happening on a large scale against women. It is not the job of the government to stop them. We have to change our thinking, our thoughts, our ideals. The contractors of some society consider India to be a male dominated country. Such contractors have to be recognized and they have to be made aware of women power. Only then our sisters and daughters will be able to live freely in this society.

महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा / Domestic Violence

घरेलू हिंसा अधिनियम (Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005)

सरसों का साग / Mustard Greens

सरसों का साग

सर्दियों का मौसम आते ही बाजार में हर जगह हरी - हरी सब्जियां नजर आने लगती हैं। सर्दियों में लोग पालक, मेथी, सरसों आदि हरी सब्जियों का सेवन ज्यादा करते हैं। सर्दियों में सबसे ज्यादा सरसों का साग खाया जाता है।

पंजाब प्रांत का बेहद मशहूर डिश है सरसों दा साग ते मक्के दी रोटी। सरसों का साग खनिज और विटामिन का खजाना है और इसमें कैलोरी बहुत कम मात्रा में होती है। वैसे तो यह पूरे भारतवर्ष में प्रयोग में लाई जाती है, परंतु यह पंजाब में मक्के की रोटी के साथ बहुत ही चाव से खाया जाता है। 

सरसों के साग के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

सरसों क्या है?

सरसों एक वर्षीय शाक जातीय पौधा है। इसके पौधे की ऊंचाई 1 से 3 फुट होती है। इसके तने में शाखा प्रशाखा होते हैं। इसमें पीले रंग के संपूर्ण फूल लगते हैं, जो तने और शाखाओं के ऊपरी भाग में स्थित होते हैं। सरसों के तेल में चरपराहट का कारण आइसोथायो सायनेट होता है। फलियां पकने पर फट जाती है और बीज जमीन पर गिर जाते हैं। उपजाति के आधार पर बीज काले और पीले रंग के होते हैं। यह सामान्यतया दिसंबर में बोई जाती है और मार्च-अप्रैल में इसकी कटाई होती है। भारतवर्ष में इसकी खेती पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और गुजरात में अधिक होती है।

सरसों के साग के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

जानते हैं सरसों के साग के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुणों के बारे में

सरसों की पत्तियों में विटामिन सी भरपूर मात्रा में होता है। इसमें फाइबर और माइक्रो न्यूट्रिएंट्स की भरपूर मात्रा होती है और यह लो कैलोरी वाली होती है। इन पत्तियों में तीन एंटीऑक्सीडेंट विटामिन के, ए और सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसके साथ ही यह प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन बी6,  मैग्नीज, फोलेट और विटामिन ई का बेहतरीन स्रोत है।

ह्रदय के लिए

सरसों के साग के सेवन से शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर घटता है और फोलेट का निर्माण अधिक होता है। इससे कार्डियोवैस्कुलर रोगों की आशंका घटती है, जो हृदय रोग के लिए सहायक होती है और यह दिल के स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा होता है।

अस्थमा में

अस्थमा से पीड़ित व्यक्ति में हिस्टामिन का उत्पादन अधिक होता है, जो की सूजन का कारण होता है। सरसों के साग में विटामिन सी पाया जाता है, जो हिस्टामिन को कम करने में सहायक होता है। इसके साथ ही इसमें मौजूद मैग्नीशियम और ब्रोन्कियल ट्यूबों और फेफड़ों को आराम देने में मदद करता है।

एंटीऑक्सीडेंट के लिए

सरसों के साग में तीन एंटीऑक्सीडेंट विटामिन के, विटामिन ए और विटामिन सी होते हैं। इसके साथ ही यह मैग्नीज, फोलेट और विटामिन ई का उत्कृष्ट स्रोत है। विटामिन सी फ्री रेडिकल्स को नष्ट करने में सहायक होते हैं। साथ ही यह अस्थमा, हृदय रोगों और रजोनिवृत्ति के लक्षण से जूझ रहे लोगों के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है।

सरसों के साग के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

हड्डियों के लिए

सरसों के साग में कैल्शियम और पोटैशियम की अच्छी मात्रा होती है, जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है। अतः हड्डियों को कमजोर होने से बचाने के लिए सरसों के साग का प्रयोग करें।

पाचन प्रक्रिया दुरुस्त रखने में

सरसों के साग में फाइबर होता है, जो चयापचय को नियमित करता है और पाचन प्रक्रिया को दुरुस्त रखता है। 

वजन कम करने में

सरसों के साग में उच्च मात्रा में फाइबर होने के कारण इसका सेवन मेटाबॉलिज्म को नियमित करने में सहायक होता है और यह शरीर के वजन को नियंत्रित रखता है।

इम्यूनिटी बढ़ाने में

शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बीमारियों को दूर रखने में मदद करती है। सरसों के साग में विटामिन ए होता है, जिसमें रेटिनोइड्स शामिल है। यह पोषक तत्व रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद करता है।

लिवर के लिए

सरसों का साग लिवर के लिए भी लाभकारी होता है। सरसों के साग में anti-obesity गुण होते हैं, जो मोटापे को कम कर लीवर को स्वस्थ रखते हैं। साथ ही यह लिवर डिटॉक्सिफिकेशन का भी काम करता है।

याददाश्त के लिए

याददाश्त को बेहतर रखने के लिए भी सरसों का साग उपयोगी है। सरसों के साग में विटामिन K होता है, जो यादाश्त को बेहतर बनाने का काम करता है।

सरसों के साग में मौजूद पोषक तत्व 

सरसों के साग में मौजूद पोषक तत्व

सरसों के साग के नुकसान (Side Effects of Mustard Greens)

सरसों के साग का कोई नुकसान नहीं होता है .कुछ विशेष परिस्थितियों में अत्यधिक सेवन करने से इसके नुकसान हो सकते हैं।

  • अगर कोई व्यक्ति लो ब्लड शुगर की समस्या से परेशान है, तो उसे अधिक मात्रा में सरसों के साग का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि सरसों के साग में anti-diabetic गुण होते हैं, जो शुगर लेवल और कम कर सकता है।
  • यदि कोई व्यक्ति रक्त को पतला करने वाली दवाइयां ले रहा है तो उसे भी सरसों के साग के सेवन से बचना चाहिए इसमें विटामिन के की अच्छी मात्रा होती है जो खून को पतला करती है अतः खून पतला करने वाले दवाइयों के साथ इसका सेवन ना करें।

English Translate

mustard greens

As soon as the winter season comes, green vegetables start appearing everywhere in the market. In winter, people consume more green vegetables like spinach, fenugreek, mustard etc. Mustard greens are eaten the most in winter.

सरसों के साग के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

Sarson Da Saag Te Makke Di Roti is a very famous dish of Punjab province. Mustard greens are a treasure trove of minerals and vitamins and are very low in calories. Although it is used all over India, but in Punjab it is eaten with maize roti with great fervor.

What is mustard?

Mustard is an annual herbaceous plant. The height of its plant is 1 to 3 feet. Its stem has branching branches. It bears full yellow flowers, which are located in the upper part of the stem and branches. The reason for spiciness in mustard oil is isothio cyanate. The pods burst when ripe and the seeds fall to the ground. The seeds are black and yellow depending on the subspecies. It is generally sown in December and harvested in March-April. In India, its cultivation is more in Punjab, Rajasthan, Uttar Pradesh, Bihar, West Bengal and Gujarat.

सरसों के साग के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

Know about the advantages, disadvantages, uses and medicinal properties of mustard greens

Mustard leaves are rich in Vitamin C. It is rich in fiber and micronutrients and is low in calories. Three antioxidant vitamins K, A and C are found in abundance in these leaves. Along with this, it is an excellent source of protein, calcium, vitamin B6, manganese, folate and vitamin E.

for the heart

Consumption of mustard greens reduces the level of cholesterol in the body and increases the formation of folate. This reduces the risk of cardiovascular diseases, which is helpful for heart disease and is also good for heart health.

in asthma

A person suffering from asthma has an increased production of histamine, which causes inflammation. Vitamin C is found in mustard greens, which is helpful in reducing histamine. Along with this, the magnesium present in it helps in relaxing the bronchial tubes and lungs.

सरसों के साग के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

for antioxidants

Mustard greens contain three antioxidants vitamin K, vitamin A and vitamin C. In addition, it is an excellent source of manganese, folate and vitamin E. Vitamin C helps in destroying free radicals. Along with this, it is also very beneficial for people suffering from asthma, heart diseases and menopausal symptoms.

for bones

Mustard greens contain a good amount of calcium and potassium, which helps in making bones strong. Therefore, to protect the bones from weakening, use mustard greens.

to maintain digestion process

Mustard greens contain fiber, which regulates the metabolism and keeps the digestion process in order.

in losing weight

Due to the high amount of fiber in mustard greens, its consumption is helpful in regulating metabolism and it controls body weight.

immunity

The immune system of the body helps to keep diseases away. Mustard greens contain vitamin A, which includes retinoids. This nutrient helps to strengthen immunity.

for the liver

Mustard greens are also beneficial for the liver. Mustard greens have anti-obesity properties, which keep the liver healthy by reducing obesity. In addition, it also works for liver detoxification.

for memory

Mustard greens are also useful for improving memory. Mustard greens contain vitamin K, which works to improve memory.

सरसों के साग के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

Sunday.. इतवार ..रविवार

 इतवार (Sunday)

Sunday.. इतवार ..रविवार
"जीवन में हमेशा इंतज़ार ही नहीं करना चाहिए,
क्योंकि सही वक्त कभी नहीं आता उसे लाना पड़ता है...❤"

प्रेयसी 

घेर अंग-अंग को
लहरी तरंग वह प्रथम तारुण्य की
ज्योतिर्मयि-लता-सी हुई मैं तत्काल
घेर निज तरु-तन

खिले नव पुष्प जग प्रथम सुगन्ध के
प्रथम वसन्त में गुच्छ-गुच्छ
दृगों को रँग गयी प्रथम प्रणय-रश्मि
चूर्ण हो विच्छुरित
विश्व-ऐश्वर्य को स्फुरित करती रही
बहु रंग-भाव भर
शिशिर ज्यों पत्र पर कनक-प्रभात के
किरण-सम्पात से

दर्शन-समुत्सुक युवाकुल पतंग ज्यों
विचरते मञ्जु-मुख
गुञ्ज-मृदु अलि-पुञ्ज
मुखर उर मौन वा स्तुति-गीत में हरे

प्रस्रवण झरते आनन्द के चतुर्दिक
भरते अन्तर पुलकराशि से बार-बार
चक्राकार कलरव-तरंगों के मध्य में
उठी हुई उर्वशी-सी
कम्पित प्रतनु-भार
विस्तृत दिगन्त के पार प्रिय बद्ध-दृष्टि
निश्चल अरूप में

हुआ रूप-दर्शन
जब कृतविद्य तुम मिले
विद्या को दृगों से
मिला लावण्य ज्यों मूर्ति को मोहकर
शेफालिका को शुभ हीरक-सुमन-हार
श्रृंगार
शुचिदृष्टि मूक रस-सृष्टि को

याद है, उषाकाल
प्रथम-किरण-कम्प प्राची के दृगों में
प्रथम पुलक फुल्ल चुम्बित वसन्त की
मञ्जरित लता पर
प्रथम विहग-बालिकाओं का मुखर स्वर
प्रणय-मिलन-गान
प्रथम विकच कलि वृन्त पर नग्न-तनु
प्राथमिक पवन के स्पर्श से काँपती

करती विहार
उपवन में मैं, छिन्न-हार
मुक्ता-सी निःसंग
बहु रूप-रंग वे देखती, सोचती
मिले तुम एकाएक
देख मैं रुक गयी
चल पद हुए अचल
आप ही अपल दृष्टि
फैला समाष्टि में खिंच स्तब्ध मन हुआ

दिये नहीं प्राण जो इच्छा से दूसरे को
इच्छा से प्राण वे दूसरे के हो गये
दूर थी
खिंचकर समीप ज्यों मैं हुई
अपनी ही दृष्टि में
जो था समीप विश्व
दूर दूरतर दिखा

मिली ज्योति छबि से तुम्हारी
ज्योति-छबि मेरी
नीलिमा ज्यों शून्य से
बँधकर मैं रह गयी
डूब गये प्राणों में
पल्लव-लता-भार
वन-पुष्प-तरु-हार
कूजन-मधुर चल विश्व के दृश्य सब
सुन्दर गगन के भी रूप दर्शन सकल
सूर्य-हीरकधरा प्रकृति नीलाम्बरा
सन्देशवाहक बलाहक विदेश के
प्रणय के प्रलय में सीमा सब खो गयी

बँधी हुई तुमसे ही
देखने लगी मैं फिर
फिर प्रथम पृथ्वी को
भाव बदला हुआ
पहले ही घन-घटा वर्षण बनी हुई
कैसा निरञ्जन यह अञ्जन आ लग गया

देखती हुई सहज
हो गयी मैं जड़ीभूत
जगा देहज्ञान
फिर याद गेह की हुई
लज्जित
उठे चरण दूसरी ओर को
विमुख अपने से हुई

चली चुपचाप
मूक सन्ताप हृदय में
पृथुल प्रणय-भार
देखते निमेशहीन नयनों से तुम मुझे
रखने को चिरकाल बाँधकर दृष्टि से
अपना ही नारी रूप, अपनाने के लिए
मर्त्य में स्वर्गसुख पाने के अर्थ, प्रिय
पीने को अमृत अंगों से झरता हुआ
कैसी निरलस दृष्टि

सजल शिशिर-धौत पुष्प ज्यों प्रात में
देखता है एकटक किरण-कुमारी को
पृथ्वी का प्यार, सर्वस्व उपहार देता
नभ की निरुपमा को
पलकों पर रख नयन
करता प्रणयन, शब्द
भावों में विश्रृंखल बहता हुआ भी स्थिर
देकर न दिया ध्यान मैंने उस गीत पर
कुल मान-ग्रन्थि में बँधकर चली गयी
जीते संस्कार वे बद्ध संसार के
उनकी ही मैं हुई

समझ नहीं सकी, हाय
बँधा सत्य अञ्चल से
खुलकर कहाँ गिरा
बीता कुछ काल
देह-ज्वाला बढ़ने लगी
नन्दन निकुञ्ज की रति को ज्यों मिला मरु
उतरकर पर्वत से निर्झरी भूमि पर
पंकिल हुई, सलिल-देह कलुषित हुआ
करुणा को अनिमेष दृष्टि मेरी खुली
किन्तु अरुणार्क, प्रिय, झुलसाते ही रहे
भर नहीं सके प्राण रूप-विन्दु-दान से
तब तुम लघुपद-विहार
अनिल ज्यों बार-बार

वक्ष के सजे तार झंकृत करने लगे
साँसों से, भावों से, चिन्ता से कर प्रवेश
अपने उस गीत पर
सुखद मनोहर उस तान का माया में
लहरों में हृदय की
भूल-सी मैं गयी
संसृति के दुःख-घात
श्लथ-गात, तुममें ज्यों
रही मैं बद्ध हो

किन्तु हाय
रूढ़ि, धर्म के विचार
कुल, मान, शील, ज्ञान
उच्च प्राचीर ज्यों घेरे जो थे मुझे
घेर लेते बार-बार
जब मैं संसार में रखती थी पदमात्र
छोड़ कल्प-निस्सीम पवन-विहार मुक्त
दोनों हम भिन्न-वर्ण
भिन्न-जाति, भिन्न-रूप
भिन्न-धर्मभाव, पर
केवल अपनाव से, प्राणों से एक थे

किन्तु दिन रात का
जल और पृथ्वी का
भिन्न सौन्दर्य से बन्धन स्वर्गीय है
समझे यह नहीं लोग
व्यर्थ अभिमान के
अन्धकार था हृदय
अपने ही भार से झुका हुआ, विपर्यस्त
गृह-जन थे कर्म पर
मधुर प्रात ज्यों द्वार पर आये तुम
नीड़-सुख छोड़कर मुझे मुक्त उड़ने को संग
किया आह्वान मुझे व्यंग के शब्द में

आयी मैं द्वार पर सुन प्रिय कण्ठ-स्वर
अश्रुत जो बजता रहा था झंकार भर
जीवन की वीणा में
सुनती थी मैं जिसे
पहचाना मैंने, हाथ बढ़ाकर तुमने गहा
चल दी मैं मुक्त, साथ
एक बार की ऋणी
उद्धार के लिए
शत बार शोध की उर में प्रतिज्ञा की

पूर्ण मैं कर चुकी
गर्वित, गरीयसी अपने में आज मैं
रूप के द्वार पर
मोह की माधुरी
कितने ही बार पी मूर्च्छित हुए हो, प्रिय
जागती मैं रही
गह बाँह, बाँह में भरकर सँभाला तुम्हें

– सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'

Sunday.. इतवार ..रविवार

"नदी के किनारे पर खड़े रहने से नदी पार नहीं होती,
उसे पार करने के लिए उसके अंदर जाना पड़ता है...❤"

बगुला भगत : पंचतंत्र / Bagula Bhagat : Panchtantra

 4. बगुला भगत (बगुला और केकड़े की कहानी)

उपायेन जयो यादृग्रिपोस्तादृड् न हेतिभिः 

उपाय से शत्रु को जीतो, हथियार से नहीं। 

एक जंगल में बहुत सी मछलियों से भरा एक तालाब था। एक बगुला वह दिनवहाँ प्रतिदिन मछलियों को खाने के लिए आता था, किंतु वृद्ध होने के कारण मछलियों को पकड़ नहीं पाता था। इस तरह भूख से व्याकुल हुआ वह एक दिन अपने बुढ़ापे पर रो रहा था कि एक केकड़ा उधर आया। उसमें बगुले को निरंतर आंसू बहाते देखा तो कहा - "मामा! आज तुम पहले की तरह आनंद से भोजन नहीं कर रहे और आंखों में आंसू बहाते हुए बैठे हो। इसका क्या कारण है? 
बगुला भगत : पंचतंत्र / Bagula Bhagat : Panchtantra
बगुले ने कहा - "मित्र! तुम ठीक कहते हो। मुझे मछलियों को भोजन बनाने से विरक्ति हो चुकी है। आजकल अनशन कर रहा हूं। इसी से मैं पास में आई मछलियों को भी नहीं पकड़ता। 

केकड़े ने यह सुनकर पूछा - "मामा! इस वैराग्य का कारण क्या है? 
बगुला बोला - "मित्र! बात यह है कि मैंने इस तालाब में जन्म लिया। बचपन से ही यही रहा हूं और यही मेरी उम्र गुजरी। इस तालाब और तालाब वासियों से मेरा प्रेम है। किंतु मैंने सुना है कि अब बड़ा भारी अकाल पड़ने वाला है।  12 वर्षों तक वृष्टि नहीं होगी। 

केकड़ा - किससे सुना है?

बगुला - एक ज्योतिषी से सुना है। शनिश्चर जब शकटाकार रोहिणी तारक मंडल को खंडित करके शुक्र के साथ एक राशि में जाएगा, तब 12 वर्ष तक वर्षा नहीं होगी। पृथ्वी पर पाप फैल जाएगा। माता - पिता अपनी संतान का भक्षण करने लगेंगे। इस तालाब में पहले ही पानी कम है। यह बहुत जल्दी सूख जाएगा। इसके सूखने पर मेरे सब बचपन के साथी, जिनके बीच मैं इतना बड़ा हुआ हूं, मर जाएंगे। उनके वियोग दुख की कल्पना से ही मैं इतना रो रहा हूं और इसीलिए मैंने अनशन किया है। दूसरे जलाशयों से भी जलचर अपने छोटे - छोटे तालाब छोड़कर बड़ी-बड़ी झीलों में चले जा रहे हैं। बड़े-बड़े जलचर तो स्वयं ही चले जाते हैं। छोटों के लिए ही कुछ कठिनाई है। दुर्भाग्य से इस जलाशय के जलचर बिल्कुल निश्चिंत बैठे हैं। मानो कुछ होने वाला ही नहीं है। उनके लिए ही मैं रो रहा हूं।  उनका वंश नाश हो जाएगा। 

केकड़े ने बगुले के मुंह से यह बात सुनकर अन्य सब मछलियों को भी भावी दुर्घटना की सूचना दे दी। सूचना पाकर जलाशय के सभी जलचरों, मछलीयों, कछुओं आदि ने बगुले को घेरकर पूछना शुरू कर दिया। मामा क्या किसी उपाय से हमारी रक्षा हो सकती है?

बगुला बोला - यहां से थोड़ी दूर पर एक प्रचुर जल से भरा जलाशय है। वह इतना बड़ा है कि 24 वर्ष सूखा पड़ने पर भी ना सूखेगा। तुम यदि मेरी पीठ पर चढ़ जाओगे, तो तुम्हें वहां ले चलूंगा। 

यह सुनकर सभी मछलियां, कछुआ और अन्य जल जीवों ने बगुले को भाई, मामा, चाचा पुकारते हुए चारों ओर से घेर लिया और चिल्लाना शुरू कर दिया - 'पहले मुझे', 'पहले मुझे'। 
बगुला भगत : पंचतंत्र / Bagula Bhagat : Panchtantra
वह दुष्ट सब को बारी-बारी अपनी पीठ पर बिठाकर जलाशय से कुछ दूर ले जाता और वहां एक शिला पर उन्हें पटक-पटक कर मार देता था। उन्हें खाकर दूसरे दिन वह फिर जलाशय में आ जाता और नए शिकार ले जाता। कुछ दिन बाद केकड़े ने बगुले से कहा - "मामा! मेरी तुमसे पहले पहल भेंट हुई थी, फिर भी आज तक मुझे नहीं ले गए। अब प्रायः सभी जलाशय तक पहुंच चुके हैं। आज मेरा भी उद्धार कर दो। 

केकड़े की बात सुनकर बगुले ने सोचा मछलियां खाते-खाते मेरा मन भी उठ गया है। केकड़े का मांस चटनी का काम करेगा। आज इसका भी आहार करूंगा। यह सोचकर उसने केकड़े को गर्दन पर बिठा लिया और चल दिया। 

केकड़े ने जब दूर से ही एक शिला पर मछलियों की हड्डी का पहाड़ देखा, तो समझ गया कि यह बगुला किस अभिप्राय से मछलियों को यहां लाता था। फिर भी वह असली बात को छुपाकर बोला, मामा! यह जलाशय कितनी दूर रह गया है। मेरे भार से तुम काफी थक गए होगे। इसलिए पूछ रहा हूं। 

बगुले ने सोचा, अब इसे सच्ची बात कह देने में भी कोई हानि नहीं है। इसलिए वह बोला केकड़े साहब! दूसरे जलाशय की बात अब भूल जाओ। यह तो मेरी प्राण यात्रा चल रही थी। अब तेरा भी काल आ गया है। अंतिम समय में देवता का स्मरण कर ले। इसी शिला पर पटक कर तुझे भी मार डालूंगा और खा जाऊंगा। 

बगुला अभी यह बात कह ही रहा था कि, केकड़े ने अपने तीखे दांत बगुले की नर्म मुलायम गर्दन पर गड़ा दिए।  बगुला वही मर गया। उसकी गर्दन कट गई। केकड़ा मृत बगुले की गर्दन लेकर धीरे-धीरे अपने पुराने जलाशय पर ही आ गया। उसे देख कर उसके भाई बंधु ने उसे घेर लिया और पूछने लगे क्या बात है? आज मामा नहीं आए? हम सब उनके साथ जलाशा पर जाने को तैयार बैठे हैं। 
बगुला भगत : पंचतंत्र / Bagula Bhagat : Panchtantra
केकरे ने हंसकर उत्तर दिया, मूर्खों! उस बगुले ने सभी मछलियों को यहां से ले जाकर एक शिला पर पटक कर मार दिया है। यह कह कर उसने अपने पास से बगुले की कटी हुई गर्दन दिखाई और कहा अब चिंता की कोई बात नहीं है, तुम सब यहां आनंद से रहोगे। 

गीदड़ ने जब यह कथा सुनाई तो कौवे ने पूछा - मित्र! उस बगुले की तरह यह सांप भी किसी तरह मर सकता है क्या?

गीदड़ - एक काम करो। तुम नगर के राज महल में चले जाओ। वहां से रानी का कंठहार उठाकर सांप के बिल के पास रख दो। राजा के सैनिक कंठहार की खोज में आएंगे और सांप को मार देंगे। 

दूसरे ही दिन कौवी राज महल के अंतःपुर में जाकर एक कंठ हार उठा लाई। राजा ने सिपाहियों को उस कौवी का पीछा करने का आदेश दिया। कौवी ने वह कंठ हार सांप के बिल के पास रख दिया। सांप ने उस हार को देख कर उस पर अपना फन फैसला दिया। सिपाहियों ने सांप को लाठियों से मार दिया और कंठ हार ले लिया। 

उस दिन के बाद कौवा कौवी की संतान को किसी सांप ने नहीं खाया। तभी मैं कहता हूं कि उपाय से ही शत्रु को वश में कर लेना चाहिए। 
अक्ल बड़ी या भैंस (सांप और कौवे की कहानी)
दमनक ने फिर कहा - सच तो यह है कि बुद्धि का स्थान बल से बहुत ऊंचा है। जिसके पास बुद्धि है, वही बली है।  बुद्धिहीन का बल भी व्यर्थ है। बुद्धिमान निर्बुद्धि को उसी तरह हरा देते हैं जैसे खरगोश ने शेर को हरा दिया था। 

करटक ने पूछा कैसे ?

दमनक ने तब "शेर और खरगोश" की कथा सुनाई।

5. सबसे बड़ा बल : "बुद्धि बल" (शेर और खरगोश की कथा)

To be continued ...

पारिजात / हरसिंगार / Harsingar/ Parijat

पारिजात / हरसिंगार

पारिजात, जिसको हरसिंगार भी कहते हैं, यह एक फूल है जिससे आप सभी अवगत होंगे। सामान्यतया हमारे भारतीय घरों में पूजा पाठ में भगवान को फूल अर्पण करने का प्रावधान है। ज्यादातर लोग इसे पूजा में उपयोग में लाते हैं। पारिजात का पेड़ बाग - बगीचों में पाया जाता है। इसके फूल बहुत ही मनमोहक, खुशबूदार और आकर्षक होते हैं। आज यहां पारिजात या हरसिंगार के औषधीय गुणों के बारे में जानेंगे।

पारिजात / हरसिंगार / Harsingar/ Parijat

हरसिंगार क्या है?

हरसिंगार का जिक्र कई प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। इसके फूल अत्यधिक सुगंधित छोटे पंखुड़ियों वाले और सफेद रंग के होते हैं तथा फूल के नीचे बीच में चमकीला नारंगी रंग की छोटी सी डंठल होती है। हरसिंगार का पौधा झाड़ीदार होता है। हरसिंगार के पौधे दक्षिण पूर्वी और दक्षिणी एशिया में उगते हैं। यह अक्टूबर से लेकर दिसंबर तक फूलों से लदे रहते हैं। इसके फल भूरे रंग के गोल और छोटे छोटे होते हैं।

जानते हैं हरसिंगार के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुणों के बारे में 

खुशबूदार फूल होने के साथ ही हरसिंगार के पौधे की पत्तियां, फूल, छाल आदि हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। हरसिंगार के पत्तों के साथ इसके फूल में भी औषधीय गुण होते हैं। हरसिंगार के फूल आंखों की समस्या में फायदेमंद होते हैं। साथ ही भूख को बढ़ाने, पाचन शक्ति विकारों को दूर करने में सहायक है। 

बुखार में

  • हरसिंगार के पत्ते का काढ़ा बनाकर 10 से 30 मिलीलीटर काढ़ा में अदरक का चूर्ण तथा मधु मिलाकर सेवन करने से साधारण बुखार के साथ-साथ गंभीर बुखार में भी लाभ होता है।
  • 5 से 10 मिलीलीटर हरसिंगार के पत्ते के रस में 1 से 2 ग्राम त्रिकटु चूर्ण मिलाकर सेवन करने से गंभीर बुखार उतर जाता है।

रूसी की समस्या

बालों में रूसी होना एक आम समस्या है। पारिजात के बीजों का पेस्ट बनाकर उसे सिर पर लगाने से रूसी की परेशानी खत्म होती है।

खांसी की समस्या

500 मिलीग्राम पारिजात की छाल का चूर्ण बनाकर सेवन करने से खांसी ठीक होती है।

रक्त स्राव की समस्या

कुछ लोगों को नाक और कान आदि से खून बहने की समस्या होती है। पारिजात की जड़ को मुंह में रखकर चबाने से नाक, कान, कंठ आदि से निकलने वाला खून बंद हो जाता है।

पेट में कीड़े की समस्या

बच्चे हों या वयस्क सभी को पेट में कीड़े की समस्या हो जाती है। ऐसे में हरसिंगार के पेड़ के ताजे पत्ते का रस बनाकर चीनी के साथ सेवन करने से पेट और आंतों में रहने वाले हानिकारक कीड़े खत्म हो जाते हैं।

बार-बार पेशाब आने की समस्या

पारिजात के पेड़ के तने, पत्ते, जड़ और फूल का काढ़ा बनाएं। इससे 10 से 30 मिलीलीटर की मात्रा में सेवन करने से यह परेशानी खत्म होती है।

घाव होने पर

पारिजात के बीज का पेस्ट बनाकर शरीर की त्वचा पर होने वाले फोड़े फुंसी या अन्य घाव पर लगाने से घाव ठीक होता है।

मधुमेह / डायबिटीज की समस्या

पारिजात का पेड़ डायबिटीज में बहुत लाभदायक होता है। 10 से 30 मिलीलीटर पारिजात के पत्ते का काढ़ा बनाकर सेवन करने से मधुमेह रोग में लाभ होता है।

गठिया रोग में

  • हरसिंगार की जड़ का काढ़ा बनाकर 10 से 30 मिलीलीटर मात्रा में सेवन करने से गठिया रोग में आराम मिलता है।
  • हरसिंगार के पत्ते को पीसकर गुनगुना करके लेप लगाने से जोड़ों के दर्द में आराम होता है। 

दाद की समस्या

हरसिंगार के पत्तों का रस निकालकर इसको दाद वाले अंग पर लगाने से दाद ठीक होता है।

त्वचा रोग में

हरसिंगार के पत्तों का काढ़ा एवं पेस्ट बना लें। इसको दाद, खुजली, घाव तथा कुष्ठ रोग आदि त्वचा विकारों पर लगाने से लाभ होता है।

बवासीर की समस्या

हरसिंगार के बीज का प्रयोग करने से बवासीर की समस्या दूर होती है।

तनाव दूर करने में

तनाव का मुख्य कारण वात का प्रकोप बढ़ना होता है और हरसिंगार में वात को शांत करने का गुण होता है। इसलिए हरसिंगार के सेवन से तनाव को दूर किया जा सकता है।

पारिजात / हरसिंगार / Harsingar/ Parijat

हरसिंगार में पाए जाने वाले पोषक तत्व

हरसिंगार की पत्तियों में बेंजोइक एसिड,फ्रक्टोज,ग्लूकोस, कैरोटीन, एमोरफस रेजिन, एस्कोरबिक एसिड, मिथाइल सेलिसीलेट, टैनिक एसिड,ओलेनोइक एसिड और फ्लेवनॉल ग्लाइकोसाइड्स पाए जाते हैं। इसकी पत्तियों के अलावा फूल भी बहुत फायदेमंद होते हैं क्योंकि इनमें कुछ ऐसे ऐसेंशियल ऑइल्स और ग्लाइकोसाइड्स पाए जाते हैं। हरसिंगार के बीजों में पामिटिक, ओलेइक और मायरिस्टिक एसिड पाए जाते हैं। पत्तियों और फूलों के साथ ही इस पौधे की छाल भी बहुत फायदेमंद होती है। इसकी छाल में अल्कलॉइड्स और ग्लाइकोसाइड पाए जाते हैं। फूलों से निकलने वाले एक्सट्रैक्ट, एंटीफंगल और एंटीवायरल गुण होते हैं। इसके साथ ही इसमें हिपैटोप्रोटेक्टिव और इम्यूनोस्टिम्युलेंट गुण भी पाए जाते हैं।

अन्य भाषाओं में हरसिंगार के नाम

Hindi –               हरसिंगार, पारिजात, कूरी, सिहारु, सेओली
English –            ट्री ऑफ सैडनेस (Tree of sadness), Musk flower, Coral jasmine, Night jasmine
Sanskrit –          पारिजात, पुष्पक, प्राजक्त, रागपुष्पी, खरपत्रक
Uttrakhand –     कुरी (Kuri), हरसिंगार (Harsingar)
Oriya –              गोडोकोडीको (Godokodiko), गंगा सेयोली (Ganga seyoli)
Urdu –               गुलेजाफारी (Gulejafari), हरसिंगार (Harsingar)
Assemia –         सेवाली (Sewali)
Konkani –         पारिजातक (Parizatak), पारडिक (Pardic)
Kannada –         गोली (Goli), पारिजात (Parijata)
Gujarati  -          हारशणगार (Harshangar), जयापार्वती (Jayaparvati)
Tamil –             मंझाटपू (Manjatpu), पवलमल्लिकै (Pavalmallikae)
Telugu –           सेपाली (Sepali), पगडमल्ले (Pagadamallae), कपिलानागदुस्तु (Kapilanagadustu)
Bengali –          हरसिंघार (Harsinghar), सेफालिका (Sephalika), शेउली (Seuli)
Nepali –            पारिजात (Parijat)
Punjabi –          हरसिंघार (Harsinghar), कूरी (Kuri), पकुरा (Pakura)
Marathi –         पारिजातक (Parijatak), खुरस्ली (Khursali)
Malayalam –    पविलामल्लि (Pavilamalli), परिजातकम (Parijatakam)

English Translate
पारिजात / हरसिंगार / Harsingar/ Parijat

Parijat / Harsingar

Parijat, also known as Harsingar, is a flower of which you all will be aware. Generally, in our Indian homes, there is a provision to offer flowers to God in the worship text. Most of the people use it in worship. Parijat tree is found in gardens. Its flowers are very attractive, fragrant and attractive. Today here we will learn about the medicinal properties of Parijat or Harsingar.

What is Harsingar?

Harsingar is mentioned in many ancient texts. Its flowers are highly fragrant with small petals and white in color and the bottom of the flower has a small stalk of bright orange color in the middle. Harsingar plant is bushy. Harsingar plants grow in Southeast and South Asia. It is laden with flowers from October to December. Its fruits are round brown in color and small.
पारिजात / हरसिंगार / Harsingar/ Parijat

Know about the advantages, disadvantages, uses and medicinal properties of Harsingar

Apart from having aromatic flowers, the leaves, flowers, bark etc. of Harsingar plant are very beneficial for our health. Along with the leaves of Harsingar, its flower also has medicinal properties. Harsingar flowers are beneficial in the problem of eyes. Along with this, it is helpful in increasing appetite, removing digestive power disorders.

in fever

  • Make a decoction of Harsingar leaves and mix ginger powder and honey in 10 to 30 ml decoction and take, it provides relief in moderate fever as well as severe fever.
  • Mixing 1 to 2 grams of Trikatu churna in 5 to 10 ml juice of Harsingar leaf and taking it ends severe fever.

Dandruff problem

Dandruff is a common problem in the hair. Making a paste of Parijat seeds and applying it on the head ends the problem of dandruff.

cough problem

Cough is cured by taking 500 mg powder of Parijat bark.

bleeding problems

Some people have problem of bleeding from nose and ears etc. By keeping the root of Parijat in the mouth, chewing stops the blood coming out of the nose, ears, throat etc.

worm problem in stomach

Be it children or adults, everyone gets the problem of worms in the stomach. In such a situation, making juice of fresh leaves of Harsingar tree and consuming it with sugar kills harmful worms living in stomach and intestines.

frequent urination problems

Make a decoction of the trunk, leaves, roots and flowers of Parijat tree. By taking 10 to 30 ml of this, this problem ends.

in case of wound

Make a paste of Parijat seeds and apply it on boils or other wounds on the skin of the body, the wound is cured.

Diabetes problem

Parijat tree is very beneficial in diabetes. Taking 10 to 30 ml decoction of Parijat leaves is beneficial in diabetes.

in gout

  • Make a decoction of Harsingar root and take it in 10 to 30 ml quantity, it provides relief in arthritis.
  • Grind the leaves of Harsingar and apply the paste after making it lukewarm, it provides relief in joint pain.

ringworm problem

Taking out the juice of Harsingar leaves and applying it on the affected part ends ringworm.

in skin diseases

Make a decoction and paste of Harsingar leaves. It is beneficial to apply it on skin disorders like ringworm, itching, wounds and leprosy.

piles problem

Harsingar seeds are used to end the problem of piles.

to relieve stress

The main reason for stress is the increase in the outbreak of Vata and Harsingar has the property of pacifying Vata. Therefore, stress can be removed by the consumption of Harsingar.
पारिजात / हरसिंगार / Harsingar/ Parijat

तेनालीराम और राजगुरू । Tenali Raman aur Rajguru

तेनालीराम और राजगुरू

तेनालीराम जब बड़े हुए, तो उनकी बुद्धिमानी के चर्चे पूरे गाँव में होने लगे। गाँव में जब भी कोई किसी समस्या में पड़ता, तो तेनालीराम के पास उसके समाधान हेतु चला आता। तेनालीराम भी अपनी बुद्धिमत्ता के बल पर चुटकी बजाते ही समस्या का समाधान कर देते।

तेनालीराम और राजगुरू । Tenali Raman aur Rajguru

तेनालीराम बुद्धिमान तो थे ही, साथ ही एक श्रेष्ठ कवि भी थे। उनकी वाकपटुता का तो कोई सानी ही नहीं था।गाँववाले अक्सर उनसे कहा करते कि उन्हें महाराज कृष्णदेव राय के दरबार की शोभा बढ़ानी चाहिए। तब तक तेनालीराम का विवाह "शारदा" नामक कन्या से हो चुका था। अपने परिवार के उज्जवल भविष्य की कामना में तेनालीराम के मन में भी महाराज कृष्णदेव राय के दरबार में जाने की आकांक्षा बलवती होने लगी, किंतु उन्हें ज्ञात नहीं था कि किस तरह वे महाराज के दरबार तक पहुँचे?

संयोग से एक दिन महाराज कृष्णदेव राय के दरबार के राजगुरु तेनालीराम के गाँव पधारे। तेनालीराम को जब ये ज्ञात हुआ, तो वह भागे-भागे राजगुरू के पास पहुँचे और उन्हें अपने घर भोज पर आमंत्रित कर लिया। राजगुरू जब तेनालीराम के घर आये, तो तेनालीराम और उनकी पत्नि ने उनका बहुत आदर-सत्कार किया। उनकी बहुत सेवा-सुश्रुषा की। तेनालीराम ने उन्हें अपनी कवितायें सुनाई और अपनी वाकपटुता से उनका मनोरंजन भी किया।उन्हें पूर्ण आशा थी कि उनकी सेवा और कला से प्रसन्न होकर राजगुरू अवश्य महाराज कृष्णदेव राय के दरबार तक पहुँचने में उनकी सहायता करेंगे। 

राजगुरू ने गाँव से प्रस्थान करने के पूर्व तेनालीराम को आश्वासन दिया कि वह नगर पहुँचते ही महाराज से उनकी सिफ़ारिश करेंगे और इस संबंध में उन्हें शीघ्र ही संदेश भेजेंगे तेनालीराम प्रसन्न हो गये और उसके बाद से प्रतिदिन राजगुरू के संदेश की प्रतीक्षा करने लगे। लेकिन राजगुरू का संदेश न आना था, न ही आया। वास्तव में राजगुरू तेनालीराम की बुद्धिमानी देखकर भयभीत हो गए थे। उन्हें भय था कि यदि तेनालीराम राजदरबार में आ गए, तो उनकी स्वयं की प्रतिष्ठा कम हो जायेगी। इसलिए उन्होंने तय कर लिया था कि वे तेनालीराम के संबंध में महाराजा कृष्णदेव राय से तो क्या किसी भी अन्य राज दरबारी से चर्चा नहीं करेंगे।

इधर दिन गुजरते जा रहे थे और तेनालीराम का धैर्य टूटता जा रहा था। गाँव के लोग भी उन्हें चिढ़ाने लगे थे। अंत में तेनालीराम ने निश्चय किया कि अब वे राजगुरू के संदेश के भरोसे नहीं रहेंगे और स्वयं राजगुरु से मिलने नगर जायेंगे। उन्होंने अपनी पत्नि को सामान बांधने को कहा और अगले ही दिन परिवार सहित विजयनगर की राह पकड़ ली। विजय नगर पहुँचकर अपने परिवार को एक धर्मशाला में ठहराकर वे राजगुरू से मिलने निकल गये। उनका पता पूछकर जब वे उनके निवास पर पहुँचे, तो देखा कि वहाँ लोगों की लंबी कतार लगी हुई है।

तेनालीराम भी कतार में लग गये। उन्हें पूर्ण विश्वास था कि राजगुरू उन्हें देखते ही पहचान लेंगे और उनका स्वागत करेंगे। किंतु जब वे राजगुरू के समक्ष पहुँचे, तो राजगुरू ने उन्हें नहीं पहचानने का ढोंग किया।तेनालीराम ने उन्हें अपना परिचय देते हुए उन्हें अपनी पिछली मुलाकात स्मरण करवाने का प्रयास किया, किंतु राजगुरू ने सेवकों से कहकर उन्हें अपने घर से बाहर निकलवा दिया। तेनालीराम अपने इस अपमान से बहुत दु:खी हुए। उन्होंने तय कर लिया कि चाहे कुछ भी हो जाये, वे महाराज से मिलकर ही रहेंगे और राजगुरू से भी अपने अपमान का बदला लेंगे।

अगले दिन किसी तरह वह पहरेदारों को बहला-फ़ुसलाकर राजदरबार में पहुँच गए। वहाँ जीवन के वैराग्य और सत्य-असत्य पर ज्ञानियों और पंडितों की गहन चर्चा चल रही थी। राजगुरू भी उस चर्चा में सम्मिलित थे।राजगुरू कह रहे थे, "ये संसार मिथ्या है, जो भी यहाँ घटित हो रहा है, सब एक दिवास्वप्न है। ये मन का भ्रम है कि कुछ हो रहा है। यदि जो घटित हो रहा है, हम उसमें सम्मिलित न भी हों, हम वह न भी करें, तो कोई अंतर नहीं पड़ेगा।"

यह सुनना था कि तेनालीराम बोल पड़े, "राजगुरू जी! क्या सचमुच सब कार्य भ्रम है?" तेनालीराम को राजदरबार में देखकर राजगुरू चकित हो गये। उनके मन में आवेश का ज्वार उठ खड़ा हुआ। वे उसी क्षण द्वारपालों से कहकर तेनालीराम को दरबार से बाहर फिकवा देना चाहते थे, किंतु महाराज के समक्ष वे ऐसा नहीं कर सकते थे।इसलिए स्वयं के आवेश पर नियंत्रण रखते हुए वे मृदु स्वर में बोले, "ये सत्य है कि समग्र कार्य भ्रम है। चाहे कुछ किया जाए या न किया जाए, कोई अंतर नहीं पड़ता।"

तेनालीराम मुस्कुराते हुए बोला- "यदि ऐसी बात है, तो राजगुरू आज दोपहर महाराज के साथ हम सब मिलकर भोजन करेंगे और आप दूर बैठकर देखना और सोचना कि आपने भोजन ग्रहण कर लिया। अब से प्रतिदिन ही ऐसा करना। क्योंकि कुछ किया जाये या न किया जाए, कोई अंतर तो पड़ता ही नहीं है।" 

ये सुनना था कि महाराज और सारे दरबारी हँस पड़े। राजगुरू का सिर लज्जा से झुक गया। महाराज कृष्णदेव राय तेनालीराम के तर्क से बहुत प्रभावित हुए थे। उन्होंने उनका परिचय पूछा। तेनालीराम ने अपना परिचय देते हुए गाँव में राजगुरू से मिलने और गाँव से राजदरबार पहुँचने का वृतांत सुना दिया। पूरा वृतांत सुनकर महाराज राजगुरू पर बहुत क्रोधित हुए।

महाराज तेनालीराम की वाकपटुता और बुद्धिमानी से अति-प्रसन्न थे. उन्होंने उन्हें राज्य का मुख्य-सलाहकार बना दिया और इस तरह तेनालीराम महाराज कृष्णदेव राय के "अष्ट-दिग्गजस" का अभिन्न अंग बन गए।

 English Translate

Tenali Raman aur Rajguru

When Tenaliram grew up, his wisdom started being discussed in the whole village. Whenever anyone in the village fell into any problem, he would come to Tenaliram for his solution. Tenaliram would also solve the problem as soon as he took a pinch on the strength of his intelligence.

तेनालीराम और राजगुरू । Tenali Raman aur Rajguru

Tenaliram was not only intelligent, but also a great poet and his eloquence had no match. The villagers often told him that he should beautify the court of Maharaja Krishna Deva Raya.

By then Tenaliram was married to a girl named "Sharda". In wishing for the bright future of his family, Tenaliram's desire to go to the court of Maharaja Krishna Deva Raya started growing strong in his mind. But they did not know how they reached the court of Maharaj.

Coincidentally, one day Maharaj came to the village of Tenaliram, the Rajguru of the court of Krishna Deva Raya. When Tenaliram came to know about this, he ran to the Rajguru and invited him to his house for a banquet.


When Rajguru came to Tenaliram's house, Tenaliram and his wife gave him a lot of respect and service to him. Tenaliram recited his poems to him and entertained him with his eloquence. He had full hope that Rajguru would surely help him to reach the court of Maharaja Krishnadev Raya, pleased with his service and art.

Before leaving the village, Rajguru assured Tenaliram that he would recommend him to Maharaj as soon as he reached the city and would send him a message in this regard soon. Tenaliram was pleased and from then onwards started waiting for Rajguru's message every day.

But Rajguru's message did not come, nor did it come. In fact, Rajguru was horrified to see Tenaliram's wisdom. He was afraid that if Tenaliram came to the court, his own prestige would be reduced. That's why he had decided that he would not discuss Tenaliram with Maharaja Krishnadev Raya or with any other royal courtier.


Days were passing by and Tenaliram's patience was getting worse. The people of the village also started teasing him. In the end Tenaliram decided that he would no longer rely on Rajguru's message and would himself go to the city to meet him.

He asked his wife to pack his belongings and the very next day he took his way to Vijayanagar with his family. After reaching Vijay Nagar, staying with his family in a dharamsala, he went out to meet Rajguru. When he reached his residence after asking his address, he saw that there was a long queue of people there.

Tenaliram also joined the queue. He had full faith that Rajguru would recognize him and welcome him on seeing him. But when he reached before Rajguru, Rajguru pretended not to recognize him. While introducing himself, Tenaliram tried to remind him of his previous meeting, but Rajguru asked the servants to get him out of his house.

Tenaliram was deeply saddened by his humiliation. He decided that no matter what happens, he will stay with the Maharaj and will also take revenge for his insult from Rajguru.


The next day, somehow he reached the court by luring the guards. There was an intense discussion of the wise and the pundits on the dispassion of life and the truth and untruth. Rajguru was also involved in that discussion.

Rajguru was saying, “This world is false. Whatever is happening here is a daydream. It is an illusion of the mind that something is happening. Even if we don't participate in what is happening, even if we don't do it, it won't make any difference."

It was to be heard that Tenaliram said, "Rajguruji, is all work really an illusion?"

Rajguru was astonished to see Tenaliram in the court. A tide of passion rose in his mind. At that very moment he wanted to throw Tenaliram out of the court by asking the gatekeepers. But he could not do this in front of Maharaj. Therefore, keeping control of his own passion, he said in a soft voice, “It is true that all work is an illusion. Whether something is done or not, it doesn't matter."


 “If that is the case, then we will all have dinner together with Rajguru Maharaj this afternoon and you sit away and watch and think that you have had your meal. Do this every day from now on. Because whether something is done or not, it doesn't make any difference. Tenaliram said with a smile.

It was to be heard that the Maharaj and all the courtiers laughed. Rajguru's head bowed in shame.

Maharaja Krishnadeva Raya was greatly influenced by Tenaliram's logic. He asked for his introduction. Introducing himself, Tenaliram narrated the story of meeting Rajguru in the village and reaching the royal court from the village. Hearing the whole story, Maharaj became very angry with Rajguru.

Maharaj was very pleased with Tenaliram's eloquence and intelligence. He made him the chief-advisor of the state and thus Tenalirama Maharaja became an integral part of Krishnadeva Raya's 'Ashta-diggajas'.

रानी की वाव / Rani ki Vav

रानी की वाव

भारत के गुजरात राज्य के पाटन जिले में स्थित प्रसिद्ध बावड़ी (सीढ़ीदार कुआं) है। जुलाई 2018 में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा 100 की नोट पर इसे चित्रित किया गया है। 23 जून 2014 को इसे यूनेस्को के विश्व विरासत स्थल में सम्मिलित किया गया।

रानी की वाव / Rani ki Vav

कहानी भारत के एक ऐसे कुंआ की, जिसके अंदर बनी है 30 किलोमीटर लंबी खुफिया सुरंग

इतिहास

रानी की वाव को रानी उदयमति ने अपने पति राजा भीमदेव की याद में वर्ष 1063 ईस्वी में बनवाया था। राजा भीमदेव गुजरात के सोलंकी राजवंश के संस्थापक थे। भूगर्भीय बदलाव के कारण आने वाली बाढ़ और लुप्त हुई सरस्वती नदी के कारण यह बहुमूल्य धरोहर तकरीबन 700 सालों तक गाद की परतों में दबी रही। 

कहानी भारत के एक ऐसे कुंआ की, जिसके अंदर बनी है 30 किलोमीटर लंबी खुफिया सुरंग

बाद में करीब 80 के दशक में भारतीय पुरातत्व विभाग ने इसे खोजा और साफ करवाया। वाव के खंभे सोलंकी वंश और उसके आर्किटेक्चर के नायाब नमूने हैं। वाव की दीवारों और खंभों पर ज्यादातर नक्काशियां राम,वामन, महिषासुरमर्दिनी, कल्कि जैसे और अवतारों के कई रूप में भगवान विष्णु को समर्पित हैं। 

कहानी भारत के एक ऐसे कुंआ की, जिसके अंदर बनी है 30 किलोमीटर लंबी खुफिया सुरंग

इसके साथ-साथ बावड़ी में नागकन्या और योगिनी जैसी सुंदर अप्सराओं की कलाकृतियां भी बनाई गई हैं। सरस्वती नदी के तट पर बनी सात तालों की यह वाव 64 मीटर लंबी 20 मीटर चौड़ी तथा 27 मीटर गहरी है। इस वाव में एक छोटा द्वार भी है, जहां से 30 किलोमीटर लंबी रहस्यमईसुरंग निकलती है। रानी की वाव ऐसी इकलौती बावड़ी है, जो विश्व धरोहर सूची में शामिल हुई है।

कहानी भारत के एक ऐसे कुंआ की, जिसके अंदर बनी है 30 किलोमीटर लंबी खुफिया सुरंग

दरअसल, रानी की वाव भूमिगत जल संसाधन और जल संग्रह प्रणाली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो भारतीय महाद्वीप में बहुत लोकप्रिय रही है। इस तरह के सीढ़ीदार कुएं का ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी से यहां निर्माण किया जा रहा है। सात मंजिला इस वाव में मारु- गुर्जर स्थापत्य शैली का सुंदर उपयोग किया गया है, जो जल संग्रह की तकनीक, बारीकियों और अनुपातों की अत्यंत सुंदर कला क्षमता की जटिलता को दर्शाया है। वाव की दीवारों और खंभों पर सैकड़ों नक्काशियां की गई हैं। सात तलों में विभाजित इस सीढीदारकुएं में नक्काशी की गई 500 से अधिक बड़ी मूर्तियां हैं, और 1000 से अधिक छोटी मूर्तियां हैं। इसका चौथा तल सबसे गहरा है जो एक 9.5 मीटर से 9.4 मीटर के आयताकार टैंक तक जाता है।

रानी की वाव का इतिहास और रोचक तथ्य

English Translate 

Queen's Vav


 There is a famous stepwell (step well) located in Patan district of Gujarat state of India. It is featured on the Rs 100 note by the Reserve Bank of India in July 2018. It was included in the UNESCO World Heritage Site on 23 June 2014.

रानी की वाव का इतिहास और रोचक तथ्य

History

The story of a well in India, inside which is a 30 km long secret tunnel

 Rani Ki Vav was built by Queen Udayamati in the memory of her husband King Bhimdev in the year 1063 AD. King Bhimdev was the founder of the Solanki dynasty of Gujarat. Due to floods due to geological changes and the disappearing Saraswati river, this valuable heritage remained buried in layers of silt for about 700 years. Later in the 80s, the Archaeological Department of India discovered it and got it cleaned. The pillars of the Vav are a unique specimen of the Solanki dynasty and its architecture. 

रानी की वाव का इतिहास और रोचक तथ्य

 Most of the carvings on the walls and pillars of the vav are dedicated to Lord Vishnu in various forms like Rama, Vamana, Mahishasuramardini, Kalki and many more. Along with this, artifacts of beautiful Apsaras like Nagakanya and Yogini have also been made in the stepwell. Built on the banks of Saraswati river, this Vav of seven locks is 64 meters long, 20 meters wide and 27 meters deep. There is also a small gate in this vav, from where the 30 km long mysterious tunnel emerges. Rani ki Vav is the only stepwell that has been included in the World Heritage List.

रानी की वाव का इतिहास और रोचक तथ्य,कहानी भारत के एक ऐसे कुंआ की, जिसके अंदर बनी है 30 किलोमीटर लंबी खुफिया सुरंग

 Actually, Rani ki Vav is a classic example of underground water resource and water harvesting system, which has been very popular in the Indian continent. Such terraced wells are being constructed here since the 3rd century BC. The seven-storeyed vav has a beautiful use of the Maru-Gurjara architectural style, which shows the complexity of the technique of water collection, the exquisite art ability of nuances and proportions. Hundreds of carvings have been done on the walls and pillars of the vav. Divided into seven levels, this stepwell has more than 500 large carved sculptures, and more than 1000 small sculptures. Its fourth floor is the deepest which leads to a rectangular tank of 9.4 m by 9.5 m.

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