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हम ऐसी दुनिया में क्यों जीते हैं ?

हम ऐसी दुनिया में क्यों जीते हैं ?

Rupa Oos ki ek Boond

हम ऐसी दुनिया में क्यों जीते हैं ?

दस्तूर-ए-दुनिया कुछ ऐसा ही नज़र आता है

कोई ताक़त से तो कोई ज़बान से वार करता है

दोनो ही सूरत में

इन्सान घायल होता है

पर ज़बानी हमलों से शायद

ज़्यादा दर्द झेलता है

फिर भी हम सब कुछ सहते हैं

हम ऐसी दुनिया में क्यों जीते हैं ?


जिस पर आँखें मूँद कर हम

भरोसा करते हैं

वो ही उम्र भर के लिए

हमारी आँखें खोल देता है

और हमें सब कुछ

शफ़्फ़ाफ़ दिखने लगता है,

हद तो तब होती है

जब अपना पेट पालने के लिए ऐसे कुछ लोग

किसी के आँचल से

सूखी रोटी भी छीन लेते हैं

हम ऐसी दुनिया में क्यों जीते हैं ?


मेहनत मुशक़्क़त किए बग़ैर 

आमदनी होती रहे

इस फ़लसफ़े पर आज कई लोग

अमल करते हैं 

हद तो तब होती है जब

जिससे माली इ’आनत मिलती है

उसी की क़द्र नहीं करते हैं

हम ऐसी दुनिया में क्यों जीते हैं ?


घर में चाहे रोटी न हो

पर अक्सर लोग

मुफ़्त में मिले लज़ीज़ पकवान में भी

ख़ामियाँ तलाशते हैं

हम ऐसी दुनिया में क्यों जीते हैं ?


ऐसे बेशुमार सवालात हमारे ज़ेहन में 

हमेशा से उठते आए हैं

और हम युगों युगों से

इसी दुनिया में जीते आए हैं !

13 comments:

  1. जीने के गलत तरीकों का विश्लेषण करती और बहुत कुछ सोचने पर विवश करती भावपूर्ण कविता।

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  2. बिना मतलब के तो
    दिलासे भी नहीं मिलते यहाँ,
    लोग दिल में भी दिमाग लिए फिरते हैं

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  3. आखिर हम ऐसी मतलबी दुनिया में क्यों जीते हैं

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  4. बहुत अच्छा।
    हम ऐसी दुनिया में क्यों जीते है।

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  5. दस्तूर-ए-दुनिया कुछ ऐसा ही नज़र आता है..

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  6. 🙏🙏💐💐शुभरात्रि 🕉️
    🙏जय श्री कृष्ण🚩🚩🚩
    🚩🚩राधे राधे 🚩🚩
    👌👌👌भावपूर्ण.... हम ऐसी दुनिया मे क्यों जीते है.... अपना और अपनों का ख्याल रखिये, स्वस्थ रहिये, मस्त रहिये.... शायद बहुत से सवालों का जवाब ढूढ़ना ही नहीं चाहिए.... हमेशा खुश रहो 🙏🙏

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  7. मतलबी दुनिया 🙏😔🙏

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  8. ये दुनिया है दुनिया में जैसे भी हो
    अपनी ये जिंदगी जीनी पड़ती है
    दवा अगर कितनी भी कड़वी हो
    ठिक होने के लिए पीनी पड़ती है
    चोट लग जाए या जख्म हो जाए
    दर्द खुद को ही सहना पड़ता है
    हर हाल में इस मतलबी दुनिया में
    जैसे भी हो हमें रहना ही पड़ता है
    दिल टूट जाए तो टुटे हुए दिल को
    हमें खुद ही सहलाना पड़ता है
    किसी चीज की कमी हो तो उस
    कमी से ही दिल बहलाना पड़ता है
    🙏नरेश"राजन"हिंदुस्तानी🙏

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