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पालमपुर (Palampur), Zoo

 पालमपुर (Palampur), चिड़ियाघर

पालमपुर (Palampur) भारत के हिमाचल प्रदेश राज्य के काँगड़ा ज़िले में स्थित एक नगर है। यह चीड़ के वृक्षों से ढका हुआ और झरनों से भरपूर, हिम से ढके धौलाधार पर्वतों के बीच स्थित एक हिल स्टेशन और पर्यटक स्थल है।

पालमपुर (Palampur), चिड़ियाघर

पालमपुर चाय बागान के लिए भी प्रसिद्ध है। अगले पोस्ट में चाय बागान की चर्चा भी यहां करेंगे। हिमाचल यात्रा के दौरान सिर्फ पालमपुर ही एक जगह ऐसा था जहां हमलोग वहां चलने वाली लोकल ट्रेन से गए थे, जिसको वहां पर छोटी ट्रेन कहते हैं।

पालमपुर (Palampur), चिड़ियाघर

पालमपुर के इतिहास पर नजर डाले तो पता चलता है कि पालमपुर को इसका नाम पुलम शब्द से प्राप्त हुआ है, जिसका मतलब होता है - 'प्रचुर मात्रा में पानी'। पालमपुर कभी स्थानीय सिख राज्य का एक हिस्सा था और बाद में यह ब्रिटिश शासन के अधीन आ गया था। ब्रिटिश सरकार ने इसको एक व्यापार और वाणिज्य के केंद्र के रूप में परिवर्तित कर दिया था।

पालमपुर (Palampur), चिड़ियाघर

पर्यटन के साथ साथ पालमपुर में वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद का अनुसंधान केंद्र, हिमालयन जैवसंसाधन प्रौद्योगिकी संस्थान, चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, श्री साई यूनिवर्सिटी, पशु चिकित्शलय पालमपुर होलटा , शहीद कप्तान विक्रम बत्रा डिग्री कोलेज जैसे शिक्षण संस्थानों के कारण भी देश विदेश के विद्यार्थियों के लिए पालमपुर शिक्षा के क्षेत्र में मुख्य आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है।

पालमपुर (Palampur), चिड़ियाघर

आज आपको गोपालपुर चिड़ियाघर लिए चलते हैं जो हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के गोपालपुर गाँव में धर्मशाला-पालमपुर मार्ग के रास्ते में स्थित है। यह हिमालय की धौलाधार श्रेणी से घिरा हुआ है। चिड़ियाघर मेपल के पेड़, शाहबलूत के पेड़, सर्द और हरियाली से सुशोभित है।

पालमपुर (Palampur), चिड़ियाघर

चिड़ियाघर के प्रमुख आकर्षण हैं: एशियाई शेर, तेंदुआ, हिमालयी काला भालू, सांभर हिरण, भौंकने वाला हिरण, गोरल, जंगली सूअर, भूटान ग्रे मोर , चीयर तीतर, लाल जंगल मुर्गी मोर, गिद्ध, चील, आदि।

पालमपुर (Palampur), चिड़ियाघर

गोपालपुर चिड़ियाघर पालमपुर का सबसे प्रसिद्ध स्थल है। चिड़ियाघर में पाई जाने वाली वनस्पतियों और जीवों की सुंदरता के साथ, बर्फ से ढकी धौलाधार पर्वतमाला भी इस जगह को सुंदरता प्रदान करती हैं।

पालमपुर (Palampur), चिड़ियाघर

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Palampur, Zoo

Palampur is a town in Kangra district in the state of Himachal Pradesh, India. It is a hill station and tourist spot, covered with pine trees and full of waterfalls, situated amidst the snow-capped Dhauladhar mountains. Palampur is also famous for tea plantation. In the next post, we will also discuss the tea garden here. During the Himachal journey, Palampur was the only place where we went by the local train running there, which is called a small train there.

पालमपुर (Palampur), चिड़ियाघर

Looking at the history of Palampur, it is known that Palampur has got its name from the word Pulam, which means - 'abundant water'. Palampur was once a part of the local Sikh kingdom and later came under British rule. The British government converted it into a center of trade and commerce.

पालमपुर (Palampur), चिड़ियाघर

Along with tourism, the country is also due to educational institutions like Research Center of Council of Scientific and Industrial Research in Palampur, Himalayan Institute of Bioresource Technology, Chaudhary Sarwan Kumar Himachal Pradesh Agricultural University, Sri Sai University, Veterinary Hospital Palampur Holta, Shaheed Captain Vikram Batra Degree College. For foreign students, Palampur is becoming the main attraction in the field of education.

पालमपुर (Palampur), चिड़ियाघर

Today we take you to Gopalpur Zoo which is situated on the way of Dharamshala-Palampur road in Gopalpur village of Kangra district of Himachal Pradesh. It is surrounded by the Dhauladhar range of the Himalayas. The zoo is adorned with maple trees, chestnut trees, chill and greenery.

पालमपुर (Palampur), चिड़ियाघर

The major attractions of the zoo are: Asiatic Lion, Leopard, Himalayan Black Bear, Sambar Deer, Barking Deer, Goral, Wild Boar, Bhutan Gray Peacock, Cheer Pheasant, Red Jungle Chicken Peacock, Vulture, Eagle, etc.

पालमपुर (Palampur), चिड़ियाघर

Gopalpur Zoo is the most famous place of Palampur. Along with the beauty of the flora and fauna found in the zoo, the snow-clad Dhauladhar ranges also add to the beauty of the place.

नूरपुर फोर्ट || Nurpur Fort || कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश ||

नूरपुर फोर्ट

भारतीय इतिहास में देश के अलग-अलग जगहों पर मौजूद किलो का एक महत्वपूर्ण स्थान है। देश में ऐसे बहुत सारे किले हैं, जो वास्तुकला का नायाब उदाहरण हैं और इनकी खूबसूरती किसी को भी अपना दीवाना बना सकती है। इन खूबसूरत इमारतों के पीछे की कहानी काफी दिलचस्प होती है। आज हम यहां ऐसे ही किले की चर्चा करेंगे, जिसको "नूरपुर फोर्ट" कहते हैं। नूरपुर किला परिसर काफी बड़ा है तथा यहां एक भव्य मंदिर के भी खंडहर मौजूद हैं।

नूरपुर फोर्ट || Nurpur Fort || कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश ||

मुगल और सिख राजाओं द्वारा बना किला 

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित ऐतिहासिक किला नूरपुर फोर्ट के नाम से प्रसिद्ध है। नूरपुर किले को पहले धामणी किले के रूप में जाना जाता था। इस खूबसूरत किले का निर्माण 16वीं शताब्दी के अंत में पठानकोट के शासक राजा बसु देव ने करवाया था। आगे चलकर इस किले में कई निर्माण हुए। इस फोर्ट का कुछ हिस्सा मुगल काल में बनाया गया था और कुछ सीख राजाओं के राज में।

नूरपुर फोर्ट || Nurpur Fort || कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश ||

यहाँ सूर्य की लालिमा के साथ तालाब का पानी रंग भी बदलता था

इस किले पर कई राजाओं ने शासन किया। किले का प्रवेश द्वार भी अपने आप में बेहद आकर्षण का केंद्र है। किले के अंदर कुएं व तालाब भी काफी आकर्षक हैं। यहां मौजूद एक तालाब के बारे में कहा जाता है कि यह सूर्य की लालिमा के साथ अपना रंग भी बदलता था, जो अब तालाब में फैली गंदगी के कारण नहीं दिखाई देता। नूरपुर के इस किले में जहांगीर ने भी कुछ समय तक राज किया था। उसी समय जहांगीर की पत्नी नूरजहां यहां आई थी।

इस नूरपुर फोर्ट का संबंध भगवान श्री कृष्ण और उनकी भक्त मीराबाई के साथ भी है। साथ ही मुगल बादशाह जहांगीर की 20वीं और सबसे प्रिय बेगम नूरजहां के साथ भी है।

नूरपुर फोर्ट || Nurpur Fort || कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश ||

यहाँ होती है भगवान कृष्ण के साथ मीराबाई की पूजा 

किले के अंतिम शासक राजा जगत सिंह थे। 16वीं शताब्दी में उनके समय में यहां ब्रिज स्वामी मंदिर की भी स्थापना हुई थी। इस मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की बेहद मनमोहक प्रतिमा व साथ में मीरा की मूर्ति है। नूरपुर  किले में मौजूद इस प्राचीन मंदिर में भगवान श्री कृष्ण और मीरा बाई की मूर्तियां एक साथ मौजूद हैं। यह उन कुछ स्थानों में से एक है जहां भगवान कृष्ण और मीरा बाई दोनों की पूजा साथ होती है। अन्यथा भारत में भगवान श्री कृष्ण के साथ हमेशा देवी राधा की ही पूजा की जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मंदिर में अब भी रात को मीरा के घुंघरूओं की आवाज सुनाई देती है।

नूरपुर फोर्ट || Nurpur Fort || कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश ||

मुगल शासक जहांगीर की सबसे प्रिय पत्नी नूरजहां पहली बार जब यहां आई थी, तब धामणी शहर का नाम बदलकर नूरपुर रख दिया गया था। नूरजहां को यह किला और यहां का प्राकृतिक सौंदर्य इतना पसंद आया था कि वह धामणी को छोड़कर जाना नहीं चाहती थी और तभी से धामणी को नूरपुर कहा जाने लगा।

संक्रामक रोग का बहाना बनाकर नूरजहां को शहर से निकाला गया 

स्थानीय राजा मुगलों की उपस्थिति यहां नहीं चाहते थे। वहां के राजा मुगलों की उपस्थिति को गुलामी समझते थे। इसलिए उन्होंने एक संक्रामक रोग का बहाना बनाकर नूरजहां को शहर से चले जाने के लिए मना लिया था। अपनी खूबसूरती को बचाने के लिए नूरजहां वहां से चली गई। इस तरह बिना किसी लड़ाई और खून खराबे के ही नूरपुर राजपूत राजाओं के पास रह गया।

नूरपुर फोर्ट || Nurpur Fort || कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश ||

अपने वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध नूरपुर किला 

नूरपुर किले के दीवारों पर पक्षियों, जानवरों, पुरुषों, बच्चों, महिलाओं, राजाओं तथा देवी- देवताओं की आकृतियां उकेरी गई हैं। किले की छत नक्काशीदार है, जो इसकी खूबसूरती को चार चांद लगाती रही होगी। नूरपुर फोर्ट के बगल से रावी नदी गुजरती है, जिसका नजारा बेहद खूबसूरत है।

आज के समय में यह किला एक खंडहर में तब्दील हो चुका है। वैसे तो यहां और पूरी साफ सफाई है। कुछ हिस्सा ही बचा हुआ है, जिसको देख कर उस समय की नक्काशी का अनुमान लगाया जा सकता है। 1849 में यह किला अंग्रेजों के अधीन आ गया था। तब अंग्रेजों ने इस किले का ज्यादातर हिस्सा तहस-नहस कर डाला था और बाकी का हिस्सा 1905 में आए भूकंप के दौरान बर्बाद हो गया। अब इस किले के खंडहर ही इसकी खूबसूरती बयां करते हैं। इसका रखरखाव इन दिनों पुरातत्व विभाग के हाथों है।

नूरपुर फोर्ट || Nurpur Fort || कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश ||

नूरी से जलती थी नूरजहाँ, उसने नूरी की जीभ कटवा दी थी

नूरपुर का किला ना सिर्फ कांगड़ा के गौरवशाली अतीत का अवशेष मात्र है, परंतु यह यहां की एक प्रसिद्ध नर्तकी नूरी की भी याद दिलाता है। नूरी का नाम नूरजहां से प्रभावित होकर रखा गया था। किवदंती है कि वह नूरजहां से भी कहीं बहुत ज्यादा खूबसूरत थी। नूरी की सुंदरता से नूरजहां जलती थी और नूरजहां नहीं चाहती थी कि नूरी किसी भी तरह की नृत्य संगीत को यहां दिखाए। कहा जाता है कि नूरी के पायल की आवाज जब महल में गूंजती थी तो आसपास के इलाके में रहने वाले लोग भी मंत्रमुग्ध हो जाया करते थे । नूरी मात्र नृत्य कला की ही पारंगत नहीं थी, अपितु वह बहुत अच्छा गाना भी गाती थी। बेगम नूरजहां को भी उनका गाना बेहद पसंद था, परंतु वह नूरी की खूबसूरती से जलती थी। नूरजहां को यह शक हुआ कि नूरी आगे चलकर जहांगीर को अपनी सुंदरता से लुभा लेगी, इसी वजह से उसने नूरी की जीभ कटवा दी थी। तब से लेकर आज तक यह किला सुनसान पड़ा है। 

नूरपुर फोर्ट || Nurpur Fort || कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश ||

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Nurpur Fort

The kilos present at different places in the country have an important place in Indian history. There are many such forts in the country, which are unique examples of architecture and their beauty can make anyone crazy. The story behind these beautiful buildings is quite interesting. Today we will discuss such a fort here, which is called "Nurpur Fort". The Nurpur fort complex is quite large and there are also ruins of a grand temple. The fort was built by the Mughal and Sikh kings.

The historical fort located in the Kangra district of Himachal Pradesh is famous by the name of Nurpur Fort. Nurpur Fort was earlier known as Dhamani Fort. This beautiful fort was built in the late 16th century by Raja Basu Dev, the ruler of Pathankot. Later many constructions took place in this fort. Some part of this fort was built during the Mughal period and some under the rule of Sikh kings.

नूरपुर फोर्ट || Nurpur Fort || कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश ||

Here the water of the pond used to change color with the redness of the sun.

Many kings ruled this fort. The entrance of the fort is also a center of attraction in itself. The wells and ponds inside the fort are also very attractive. It is said about a pond present here that it also changed its color with the redness of the sun, which is no longer visible due to the dirt spread in the pond. Jahangir also ruled for some time in this fort of Nurpur. At the same time Jahangir's wife Nur Jahan came here.

This Nurpur Fort is also associated with Lord Krishna and his devotee Mirabai. Along with this, the 20th and most beloved Begum of Mughal emperor Jahangir is also with Nur Jahan.

नूरपुर फोर्ट || Nurpur Fort || कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश ||

Here Meerabai is worshiped with Lord Krishna

The last ruler of the fort was Raja Jagat Singh. The Brij Swami temple was also established here during his time in the 16th century. In this temple there is a very beautiful statue of Lord Krishna along with the idol of Meera. The idols of Lord Shri Krishna and Meera Bai are present together in this ancient temple present in the Nurpur Fort. It is one of the few places where both Lord Krishna and Meera Bai are worshiped together. Otherwise Goddess Radha is always worshiped along with Lord Shri Krishna in India. Local people say that even now the sound of Meera's Ghungroos is heard in this temple at night.

When Nur Jahan, the most beloved wife of Mughal ruler Jahangir, came here for the first time, the name of the city of Dhamani was changed to Nurpur. Nur Jahan liked this fort and its natural beauty so much that she did not want to leave Dhamani and since then Dhamani came to be called Nurpur.

नूरपुर फोर्ट || Nurpur Fort || कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश ||

Noor Jahan was expelled from the city on the pretext of infectious disease

The local kings did not want the presence of the Mughals here. The kings there considered the presence of the Mughals as slavery. So he convinced Nur Jahan to leave the city on the pretext of an infectious disease. To save her beauty, Noor Jahan left from there. In this way, Nurpur remained with the Rajput kings without any fight and bloodshed.

Nurpur Fort famous for its architecture

The figures of birds, animals, men, children, women, kings and gods and goddesses have been carved on the walls of Nurpur Fort. The roof of the fort is carved, which must have been adding to its beauty. Ravi river passes through Nurpur Fort, whose view is very beautiful.

In today's time this fort has turned into a ruin. By the way, there is complete cleanliness here. Only some part is left, by looking at which the carving of that time can be estimated. In 1849 this fort came under the British. Then the British destroyed most of this fort and the rest was ruined during the earthquake of 1905. Now only the ruins of this fort tell its beauty. Its maintenance is in the hands of the Archaeological Department these days.

नूरपुर फोर्ट || Nurpur Fort || कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश ||

Noor Jahan was jealous of Nuri, she had Nuri's tongue cut off

The Nurpur Fort is not only a relic of Kangra's glorious past, but it also reminds one of the famous dancers, Noori. Noori was named after being influenced by Nur Jahan. Legend has it that she was far more beautiful than Noor Jahan. Noor Jahan was envious of Nuri's beauty and Noor Jahan did not want Nuri to show any kind of dance music here. It is said that when the voice of Noori's anklets reverberated in the palace, the people living in the surrounding area also used to be mesmerized. Noori was not only well versed in the art of dance, but she also sang very well. Begum Noorjahan also loved her song, but she was envious of Noori's beauty. Noor Jahan suspected that Nuri would later woo Jahangir with her beauty, that is why he had Nuri's tongue cut off. Since then till today this fort has been deserted.

बाथू की लड़ी (Bathu ki Ladi) || पोंग बांध (Pong Dam) || महाराणा प्रताप सागर ||

बाथू की लड़ी (Bathu ki Ladi) 

आज आपको एक ऐसी जगह लिए चल रहे हैं, जहां दूर-दूर तक नीला आसमान और नीले आसमान के नीचे दूर-दूर तक नीला पानी और जितनी दूर तक नजर जाए उतनी दूर तक मैदान और मैदान के आगे पहाड़ियां नजर आती हैं।

बाथू की लड़ी (Bathu ki Ladi), पोंग बांध (Pong Dam), महाराणा प्रताप सागर

नीले आसमान के नीचे नीला पानी, यह दृश्य घंटों तक आपको यहां रोके रखने के लिए पर्याप्त है। यहां किसी भी तरह का शोर-शराबा, गाड़ियों की हॉर्न या कुछ भी नहीं था, सिर्फ हवाओं की सांए सांए और पानी की कल कल ध्वनि के अलावा। यहां पहुंचने के बाद लग रहा था कि इस दृश्य को आंखों में और कैमरे में हमेशा के लिए कैद कर लिया जाए। 

बाथू की लड़ी (Bathu ki Ladi), पोंग बांध (Pong Dam), महाराणा प्रताप सागर
बाथू की लड़ी (Bathu ki Ladi), पोंग बांध (Pong Dam), महाराणा प्रताप सागर

तो फिर जानते हैं यह दृश्य कहां की है और इस जगह को किस नाम से जानते हैं? यह सुंदर दृश्य हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में है, जो "बाथू की लड़ी (Bathu ki Ladi)" नाम से प्रसिद्ध है। मंदिर का आसपास का नजारा बेहद मनोरम है, जिसकी और कोई भी आकर्षित हो जाए। चारों तरफ पानी और बीच में मंदिरों का समूह बेहद खूबसूरत नजर आता है।

बाथू की लड़ी (Bathu ki Ladi), पोंग बांध (Pong Dam), महाराणा प्रताप सागर

"बाथू की लड़ी (Bathu ki Ladi)" हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जनपद में मंदिरों का एक समूह है। यह मंदिर 1970 में "पोंग बांध (Pong Dam)" निर्माण के कारण बने जलाशय "महाराणा प्रताप सागर" में जलमग्न है। मंदिर समूह तक केवल मई-जून में ही पहुंचा जा सकता है, क्योंकि बाकी के महीनों में यह मंदिर पूरी तरीके से पानी में डूबा रहता है और उसकी चोटी का थोड़ा सा हिस्सा ही पानी के बाहर रहता है। मंदिर समूह तक नाव द्वारा पहुंचा जा सकता है।

बाथू की लड़ी (Bathu ki Ladi), पोंग बांध (Pong Dam), महाराणा प्रताप सागर

बाथू की लड़ी मंदिर की स्थापना छठी शताब्दी में गुलेरिया साम्राज्य के समय की गई थी। बाथू की लड़ी के अंतर्गत मंदिरों में भगवान शिव विराजमान हैं। मंदिरों की उत्पत्ति के बारे में कई लोग कथाएं प्रचलित हैं। मंदिर की स्थापना पांडवों द्वारा की गई थी और वे यहां से स्वर्ग तक सीढ़ी बनाना चाहते थे। 

बाथू की लड़ी (Bathu ki Ladi), पोंग बांध (Pong Dam), महाराणा प्रताप सागर

साल के 8 महीने पानी में डूबा रहता है यह मंदिर 

बाथू की लड़ी अपने आप में किसी अजूबे से कम नहीं है। यह एक ऐसा अनूठा मंदिर है, जो 8 महीने तक पानी के अंदर रहता है और सिर्फ 4 महीने के लिए ही भक्तों को दर्शन देता है। इस मंदिर की इमारत में लगे पत्थर को बाथू का पत्थर कहा जाता है। बाथू मंदिर परिसर में मुख्य मंदिर के अलावा अन्य आठ छोटे मंदिर भी हैं, जिन्हें दूर से देखने पर एक माला में पिरोया हुआ सा प्रतीत होता है। शायद इसीलिए इस खूबसूरत मंदिर को बाथू की लड़ी कहा जाता है। इस मंदिर में शेषनाग भगवान विष्णु की मूर्तियां स्थापित है और बीच में एक मुख्य मंदिर है जो भगवान शिव को समर्पित है।

बाथू की लड़ी (Bathu ki Ladi), पोंग बांध (Pong Dam), महाराणा प्रताप सागर

पानी में डूबने के बाद ऊपरी सिरा नजर आता है 

8 महीने पानी में पूरे डूबने के बाद भी इसका ऊपरी सिरा शेष रह जाता है। यह मंदिर कभी भी पूरी तरीके से नहीं डूबता। इस मंदिर को लेकर कई किवदंती या प्रसिद्ध है जिसकी जानकारी वहां के स्थानीय लोगों से मिलती है। 

बाथू की लड़ी (Bathu ki Ladi), पोंग बांध (Pong Dam), महाराणा प्रताप सागर

पांडवों द्वारा बनाई गई स्वर्ग जाने की सीढियां

यहां प्रसिद्ध लोक कथाओं के अनुसार जब पांडव अज्ञातवास पर थे, तब उन्होंने यहां स्वर्ग जाने की सीढ़ियां तैयार की थी। अज्ञातवास पर निकले पांडव यहां पहुंचकर पहले शिव मंदिर यानी बाथू की लड़ी का निर्माण किए, फिर यहीं उन्होंने स्वर्ग जाने के लिए सीढ़ियां बनाने का फैसला लिया।

बाथू की लड़ी (Bathu ki Ladi), पोंग बांध (Pong Dam), महाराणा प्रताप सागर

भगवान कृष्ण ने 6 महीने की एक रात बना दी 

पांडवों ने इस मंदिर के साथ स्तम्भी की अनुकृति जैसा भवन बनाकर स्वर्ग तक जाने के लिए सीढियाँ भी बनाई थी, जिनका निर्माण उन्हें एक रात में करना था और एक रात में स्वर्ग तक सीढ़ियां बना पाना असंभव था। इसके लिए उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से मदद की गुहार की। फलस्वरूप भगवान श्री कृष्ण ने 6 महीने की एक रात कर दी, परंतु 6 महीने की एक रात में स्वर्ग की सीढ़ियां बनकर तैयार ना हो सकी थी। सिर्फ ढाई सीढ़ियों का काम अधूरा रह गया था और सुबह हो गई थी। आज भी इस मंदिर में स्वर्ग की ओर जाने वाली सीढियाँ नजर आती हैं, जिसमें 40 सीढ़ियां मौजूद हैं।

बाथू की लड़ी (Bathu ki Ladi), पोंग बांध (Pong Dam), महाराणा प्रताप सागर

40 सीढियाँ चढ़कर ऊपर जाने बाद पानी में देख़ने से लग रहा था मानो मंदिर पानी में घूम रही हो। यह नजारा कुछ ज्यादा ही मनोरंजक था, पर ऊंचाई से पानी में देखने से डर भी लग रहा था।  

बाथू की लड़ी (Bathu ki Ladi), पोंग बांध (Pong Dam), महाराणा प्रताप सागर

सूर्य की किरणें शिवलिंग के चरण स्पर्श करती हैं 

वहां के प्रसिद्ध लोक कथाओं के मुताबिक इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि जब सूर्य अस्त होने वाला होता है, तब सूर्य की किरणें बाथू की लड़ी मंदिर में स्थित शिवलिंग के चरण स्पर्श करती हैं। भारत देश का यह चमत्कारिक अद्भुत मंदिर की सुंदरता को देखने के लिए भारत देश से ही नहीं अपितु विदेशों से भी पर्यटक आते हैं। 

पत्थर से निकलता है खून

यहां से कुछ दूरी पर एक पत्थर मौजूद है। कहा जाता है कि भीम द्वारा यह पत्थर फेंका गया था। इस पत्थर पर कंकड़ मारने से इस पत्थर से खून निकलता है। इस मंदिर के बारे में ऐसे कई राज दफन हैं।

बाथू की लड़ी (Bathu ki Ladi), पोंग बांध (Pong Dam), महाराणा प्रताप सागर

उद्दंडता की सजा मिलती है 

बाथू की लड़ी मंदिर के समीप में स्थित एक गांव में एक बुजुर्ग महिला जो करीब 90 वर्ष की हैं, उन्होंने एक चौंकाने वाला तथ्य बताया या कह सकते हैं किवदंती कथा बताई। वहां की लोक कथाओं में यह व्याख्या है कि इस मंदिर के आसपास पानी बहुत गहरा है और मंदिर से कुछ दूरी पर दूसरी तरफ पानी में नौका विहार के दौरान यदि कोई शांति से जाता और आता है, तो उसे किसी भी तरह की परेशानी नहीं होती, परंतु यदि कोई उद्दंडता करता है, तो वह इस पानी में कहां डूब जाता है, उसका पता भी नहीं लगता। इसके पीछे की घटना यह थी कि बहुत पहले वहां एक माँ के साथ उसका बेटा डूब गया था और यही माँ बलि लेती है। यहां हर साल इस तरह की अनहोनी सुनाई देती है और  जिस बच्चे की बलि लेती है, वह अपने माता-पिता का इकलौता लड़का होता है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह घटना यहां प्रतिवर्ष होती है। 

बाथू की लड़ी (Bathu ki Ladi), पोंग बांध (Pong Dam), महाराणा प्रताप सागर

महाराणा प्रताप के सम्मान में नामित यह जलाशय या झील (1572–1597) एक प्रसिद्ध वन्यजीव अभयारण्य है और रामसर सम्मेलन द्वारा भारत में घोषित 25 अंतरराष्ट्रीय आर्द्रभूमि साइटों में से एक है। जलाशय 24,529 हेक्टेयर (60,610 एकड़) के एक क्षेत्र तक फैला हुआ है, और झीलों का भाग 15,662 हेक्टेयर (38,700 एकड़) है।

पौंग जलाशय और गोविन्दसागर जलाशय हिमाचल प्रदेश में हिमालय की तलहटी में दो सबसे महत्वपूर्ण मछली वाले जलाशय हैं। इन जलाशयों में हिमालय राज्यों के भीतर मछली के प्रमुख स्रोत हैं।

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खज्जियार (Khajjiar) || मिनी स्विटजरलैंड (Mini Switerland) ||

खज्जियार (मिनी स्विटजरलैंड)

मैं कभी स्वीटजरलैंड नहीं गई, पर सुना था की हिमाचल प्रदेश के खूबसूरत वादियों में बसा एक अद्भुत हिल स्टेशन खज्जियार (Khajjiar) है, जो मिनी स्विटजरलैंड (Mini Switerland) के नाम से प्रसिद्ध है। जी हां, हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में स्थित एक छोटा सा पर्यटन स्थल है, जो डलहौजी से लगभग 24 किलोमीटर दूर है और समुंदर तल से 6500 फीट की ऊंचाई पर है। खज्जियार घने चीड़ और देवदार के जंगलों से घिरा हुआ यह छोटा सा सुरम्य तस्करी के आकार का दुनिया भर के 160 स्थानों में से एक है, जिसे मिनी स्विट्जरलड के नाम से जाना जाता है। खजियार अपनी खूबसूरती और मनमोहक वातावरण के लिए दुनिया भर में मशहूर है।

खज्जियार (Khajjiar)  || मिनी स्विटजरलैंड (Mini Switerland) ||

खज्जियार (Khajjiar) भारत के हिमाचल प्रदेश राज्य के चम्बा ज़िले में स्थित एक गाँव है। यह पर्वतों से घिरा एक रमणीय पर्वतीय मर्ग या मैदान है, जिसमें एक सुंदर झील स्थित है। प्राकृतिक सौन्दर्य के कारण इसे भारत का "छोटा स्विटजरलैंड (मिनी स्विटजरलैंड)" कहा जाता है।

खज्जियार (Khajjiar)  || मिनी स्विटजरलैंड (Mini Switerland) ||

खज्जियार (Khajjiar) में प्रवेश करते ही घास का बहुत बड़ा मैदान दिखाई देता है, जो चारों तरफ से चीड़ देवदार के के घने जंगलों से घिरा हुआ है। इस बड़े से घास के मैदान के बीच में एक छोटा सा झील भी है। 

खज्जियार (Khajjiar)  || मिनी स्विटजरलैंड (Mini Switerland) ||

यहां मुख्य आकर्षण का केंद्र पैराग्लाइडिंग है। यहां ट्रैकिंग भी कर सकते हैं। मैदान के एक तरफ घोड़े की सवारी भी की जा रही थी तथा यहां बाल - रोल जोरविंग हो रही थी, जो मैंने यहां से पहले कभी कहीं दूसरी जगह नहीं देखी थी। इस बाल - रोल जोरविंग में एक बड़े से बॉल के अंदर बैठकर गोल गोल घूमना होता है। 


खज्जियार (Khajjiar)  || मिनी स्विटजरलैंड (Mini Switerland) ||
खज्जियार (Khajjiar)  || मिनी स्विटजरलैंड (Mini Switerland) ||

कुल मिलाकर खजियार का ट्रिप भी बेहद मनोरंजक रहा। और हां यहां बच्चों के लिए एक और चीज भी थी। कुछ पहाड़ी वहां बास्केट में कुछ फूल और खरगोश को लिए घूम रहे थे और जिसको भी इच्छा होती थी, खरगोश और फूल के बास्केट के साथ फोटो खींचाते थे, जिसमें बच्चों को बहुत आनंद आ रहा था।

खज्जियार (Khajjiar)  || मिनी स्विटजरलैंड (Mini Switerland) ||

खजियार को आधिकारिक तौर पर 7 जुलाई 1992 को स्विस राजदूत द्वारा नाम दिया गया था और रिकॉर्ड के अनुसार, यहां से एक पत्थर लिया गया था और स्विट्जरलैंड की राजधानी बर्न में बनी पत्थर की मूर्तिकला का हिस्सा बनाया गया था।

खज्जियार (Khajjiar)  || मिनी स्विटजरलैंड (Mini Switerland) ||

चंबा के खजियार की खूबसूरत वादियां चीड़ देवदार के ऊंचे और घने जंगलों के बीच चारों ओर हरी-भरी मुलायम और आकर्षक घास खजियार को सुंदरता प्रदान करती हैं और इसे मनमोहक और आकर्षक बनाती हैं। यही वजह है कि सैलानी इस मनमोहक परिदृश्य का आनंद उठाने वहाँ पहुंचते हैं। 

खज्जियार (Khajjiar)  || मिनी स्विटजरलैंड (Mini Switerland) ||

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Khajjiar (Mini Switzerland)

I have never been to Switzerland, but had heard that Khajjiar is a wonderful hill station situated in the beautiful plains of Himachal Pradesh, which is famous as Mini Switzerland. Yes, there is a small tourist place located in Chamba district of Himachal Pradesh, which is about 24 km from Dalhousie and at an altitude of 6500 feet above sea level. Khajjiar Surrounded by dense pine and deodar forests, this small picturesque smuggling-shaped place is one of 160 places around the world, known as Mini Switzerland. Khajjiar is famous all over the world for its beauty and enchanting environment.

खज्जियार (Khajjiar)  || मिनी स्विटजरलैंड (Mini Switerland) ||

Khajjiar is a Village in Chamba District of Himachal Pradesh State, India. It is an idyllic mountain marg or plain surrounded by mountains, in which a beautiful lake is situated. Due to its natural beauty, it is called "Little Switzerland (Mini Switzerland)" of India.

खज्जियार (Khajjiar)  || मिनी स्विटजरलैंड (Mini Switerland) ||

Upon entering Khajjiar, a vast plain of grass is visible, which is surrounded by dense forests of pine deodar on all sides. There is also a small lake in the middle of this large meadow.

खज्जियार (Khajjiar)  || मिनी स्विटजरलैंड (Mini Switerland) ||

The main attraction here is paragliding. You can also do tracking here. Horse riding was also being done on one side of the field, and there was ball-roll joring going on, which I had never seen anywhere else before here. In this ball-roll jorving, one has to sit inside a big ball and spin round it.

खज्जियार (Khajjiar)  || मिनी स्विटजरलैंड (Mini Switerland) ||

Overall, the trip to Khajjiar was also very enjoyable. And of course there was one more thing here for the kids as well. Some hills were roaming there with some flowers and rabbits in baskets and whoever wished, took photos with rabbits and flower baskets, in which the children were enjoying a lot.

खज्जियार (Khajjiar)  || मिनी स्विटजरलैंड (Mini Switerland) ||

Khajjiar was officially named by the Swiss Ambassador on 7 July 1992 and according to records, a stone was taken from here and made part of a stone sculpture built in Bern, the capital of Switzerland.

खज्जियार (Khajjiar)  || मिनी स्विटजरलैंड (Mini Switerland) ||

The beautiful valleys of Khajjiar of Chamba, amidst the high and dense forests of pine deodar, lush green soft and attractive grass gives beauty to Khajjiar and makes it charming and attractive. This is the reason why tourists reach there to enjoy this enchanting landscape.

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