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प्रेम का न रूप है

प्रेम का न रूप है

Rupa Oos ki ek Boond
"प्रेम एक रिश्ते का ऑक्सीजन है
जो दिलों की धड़कन बनके रहता है.. ♥️"

प्रेम का न रूप है...

ना रंग है ना छोर कोई

प्रेम तो एक नशा  है कोई 

जो मन में बसा होता 

जो व्यक्त इसको कर सके

ना समर्थ है भाषा कोई.

हैं शब्द भी असहाय से,

कैसे करें इसको निवेदित

परिभाषा सबकी अलग हैं

भाव हैं इसके असीमित..

प्रेम है संगीत मन का,,

प्रेम ही आराधना है

प्रेम की अनुभूति ही तो

आत्मा की कामना है.🌹❤️

Rupa Oos ki ek Boond

"इश्क़ चंद लम्हों में होता है
यादें सांसों में रह जाती हैं..💕"

मार्ग का साथी : पंचतंत्र || Marg ka Sathi : Panchtantra ||

मार्ग का साथी

नैकाकिना गन्तव्यम् ।

अकेले यात्रा मत करो।

मार्ग का साथी : पंचतंत्र || Marg ka Sathi : Panchtantra ||

एक दिन ब्रह्मदत्त नाम का एक ब्राह्मण अपने गाँव से प्रस्थान करने लगा। उसकी माता ने कहा-पुत्र ! कोई न कोई साथी रास्ते के लिए खोज तो अकेले यात्रा नहीं करनी चाहिए। ब्रह्मदत्त ने उत्तर दिया- डरो मत माँ इस मार्ग में कोई उपद्रव नहीं है। मुझे जल्दी जाना है, इतने में साथी नहीं मिलेगा। मेरे पास साथी खोजने का समय नहीं है। माँ ने कुछ और उपाय न देख पड़ोस से एक कर्कट ले लिया और अपने पुत्र ब्रह्मदत्त को कहा कि यदि तुझे जाना ही है तो इस कर्कट को भी साथ लेता जा यह तुझे बहुत सहायता देगा।

ब्राह्मण-कर्कटक कथा : पंचतंत्र | Brahman aur Kekda : Panchtantra

ब्रह्मदत्त ने माता का कहना मान कर्कट को ही साथी बना लिया। उसे कपूर की डिबिया में रखकर यात्रा के लिए चल दिया।

थोड़ी दूर जाकर वह थक गया और गर्मी बहुत सताने लगी तो उसने मार्ग के एक वृक्ष की छाया में विश्राम लिया। थका हुआ तो था ही, नींद आ गई। उसी वृक्ष के बिल में एक साँप रहता था। जब वह ब्रह्मदत्त के पास आया तो उसे कपूर की गन्ध आ गई। कपूर की गन्ध साँप को प्रिय होती है। साँप ने ब्रह्मदत्त के कपड़ों में से कपूर की डिबिया खोल ली, लेकिन जब उसे खाने लगा, कर्कट ने साँप को मार दिया।

ब्रह्मदत्त जब जागा तो देखा कि पास ही काला साँप मरा पड़ा है। उसके पास कपूर की डिबिया भी पड़ी थी वह समझ गया कि यह काम कर्कट का ही है। प्रसन्न होकर वह सोचने लगा माँ सोच सकती थी कि पुरुष को यात्रा में कभी एकाकी नहीं जाना चाहिए। मैंने श्रद्धापूर्वक माँ का वचन पूरा किया, इसलिए काला साँप मुझे काट नहीं सका; अन्यथा मैं मर जाता।

इस कहानी के बाद स्वर्ण-सिद्धि अपने मित्र चक्रधर को वहीं छोड़कर अपने घर वापस आ गया।

इसके साथ ही पंचतंत्र की कहानियाँ ख़त्म होती हैं। 

लेंग जून एक चीनी कलाकार / Leng Jun a Chinese artist

लेंग जून एक चीनी कलाकार

आपने सुना होगा तस्वीरें बोल पड़ेंगी, बस ऐसी ही कलाकारी है लेंग जून (Leng Jun) के तस्वीरों में, जो कहीं से भी बनी हुई तस्वीर नहीं लगती अपितु कैमरे से खींची हुई सी लगती हैं।

लेंग जून एक चीनी कलाकार / Leng Jun a Chinese artist

कलाकार लेंग जून एक प्रभावशाली चीनी समकालीन कलाकार हैं, जो अपनी अति यथार्थवादी पेंटिंग और ड्राइंग के लिए प्रसिद्ध हैं। लेंग जून का जन्म चीन के सिचुआन में 1963 में हुआ था। उन्होंने वुहान नॉर्मल कॉलेज के हांकौ शाखा में कला का अध्ययन किया।

लेंग जून एक चीनी कलाकार / Leng Jun a Chinese artist

लेंग जून वर्तमान में बीजिंग में रहते हैं और काम करते हैं।

उनके काम को चीन के राष्ट्रीय कला संग्रहालय में एक प्रदर्शनी में दिखाया गया था। कलाकृति के आकार और माध्यम के आधार पर $0 USD से $4,703,168 USD तक की वास्तविक कीमतों के साथ, लेंग जून के काम को कई बार नीलामी में पेश किया गया है। 

आज यहां प्रस्तुत है लेंग जून की कुछ नायाब पेंटिंग्स। 

लेंग जून एक चीनी कलाकार / Leng Jun a Chinese artist
2006 के बाद से नीलामी में इस कलाकार की रिकॉर्ड कीमत PORTRAIT के लिए $4,703,168 USD है, जिसे 2010 में Poly International Auction Co. में बेचा गया था।
लेंग जून एक चीनी कलाकार / Leng Jun a Chinese artist

Leng Jun a Chinese artist

You must have heard that pictures will speak, just such is the artistry in Leng Jun's photographs, which do not appear to be photographs made from anywhere, but appear to have been taken from a camera.

लेंग जून एक चीनी कलाकार / Leng Jun a Chinese artist

Artist Leng Jun is an influential Chinese contemporary artist, renowned for his hyperrealistic paintings and drawings. Leng Jun was born in 1963 in Sichuan, China. He studied art at the Hankou branch of Wuhan Normal College.

लेंग जून एक चीनी कलाकार / Leng Jun a Chinese artist

Leng Jun currently lives and works in Beijing.

His work was featured in an exhibition at the National Art Museum of China. Leng Jun's work has been offered at auction many times, with actual prices ranging from $0 USD to $4,703,168 USD depending on the size and medium of the artwork.

लेंग जून एक चीनी कलाकार / Leng Jun a Chinese artist

The artist's record price at auction since 2006 is $4,703,168 USD for a PORTRAIT, sold in 2010 by Poly International Auction Co. was sold in

संपूर्ण श्रीमद्भगवद्गीता ||अध्याय नौवाँ- राजविद्याराजगुह्य योग || अनुच्छेद 20 - 34 ||

श्रीमद्भगवद्गीता || अध्याय नौवाँ- राजविद्याराजगुह्य योग ||

नवमोऽध्यायः- राजविद्याराजगुह्ययोग

अध्याय नौ के अनुच्छेद 20-34 

अनुच्छेद 20-25 में  सकाम और निष्काम उपासना के फल का वर्णन है।

संपूर्ण श्रीमद्भगवद्गीता || Sampurn Shrimad Bhagwat Geeta ||

त्रैविद्या मां सोमपाः पूतपापायज्ञैरिष्ट्‍वा स्वर्गतिं प्रार्थयन्ते।
ते पुण्यमासाद्य सुरेन्द्रलोकमश्नन्ति दिव्यान्दिवि देवभोगान्‌ ॥9.20॥

भावार्थ : 
तीनों वेदों में विधान किए हुए सकाम कर्मों को करने वाले, सोम रस को पीने वाले, पापरहित पुरुष (यहाँ स्वर्ग प्राप्ति के प्रतिबंधक देव ऋणरूप पाप से पवित्र होना समझना चाहिए) मुझको यज्ञों के द्वारा पूजकर स्वर्ग की प्राप्ति चाहते हैं, वे पुरुष अपने पुण्यों के फलरूप स्वर्गलोक को प्राप्त होकर स्वर्ग में दिव्य देवताओं के भोगों को भोगते हैं॥20॥

ते तं भुक्त्वा स्वर्गलोकं विशालंक्षीणे पुण्य मर्त्यलोकं विशन्ति।
एवं त्रयीधर्ममनुप्रपन्ना गतागतं कामकामा लभन्ते ॥9.21॥

भावार्थ : 
वे उस विशाल स्वर्गलोक को भोगकर पुण्य क्षीण होने पर मृत्यु लोक को प्राप्त होते हैं। इस प्रकार स्वर्ग के साधनरूप तीनों वेदों में कहे हुए सकामकर्म का आश्रय लेने वाले और भोगों की कामना वाले पुरुष बार-बार आवागमन को प्राप्त होते हैं, अर्थात्‌ पुण्य के प्रभाव से स्वर्ग में जाते हैं और पुण्य क्षीण होने पर मृत्युलोक में आते हैं॥21॥

अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते ।
तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्‌ ॥9.22॥

भावार्थ : 
जो अनन्यप्रेमी भक्तजन मुझ परमेश्वर को निरंतर चिंतन करते हुए निष्कामभाव से भजते हैं, उन नित्य-निरंतर मेरा चिंतन करने वाले पुरुषों का योगक्षेम (भगवत्‌स्वरूप की प्राप्ति का नाम 'योग' है और भगवत्‌प्राप्ति के निमित्त किए हुए साधन की रक्षा का नाम 'क्षेम' है) मैं स्वयं प्राप्त कर देता हूँ॥22॥

येऽप्यन्यदेवता भक्ता यजन्ते श्रद्धयान्विताः ।
तेऽपि मामेव कौन्तेय यजन्त्यविधिपूर्वकम्‌ ॥9.23॥

भावार्थ : 
हे अर्जुन! यद्यपि श्रद्धा से युक्त जो सकाम भक्त दूसरे देवताओं को पूजते हैं, वे भी मुझको ही पूजते हैं, किंतु उनका वह पूजन अविधिपूर्वक अर्थात्‌ अज्ञानपूर्वक है॥23॥

अहं हि सर्वयज्ञानां भोक्ता च प्रभुरेव च ।
न तु मामभिजानन्ति तत्त्वेनातश्च्यवन्ति ते ॥9.24॥

भावार्थ : 
क्योंकि संपूर्ण यज्ञों का भोक्ता और स्वामी भी मैं ही हूँ, परंतु वे मुझ परमेश्वर को तत्त्व से नहीं जानते, इसी से गिरते हैं अर्थात्‌ पुनर्जन्म को प्राप्त होते हैं॥24॥

यान्ति देवव्रता देवान्पितृन्यान्ति पितृव्रताः ।
भूतानि यान्ति भूतेज्या यान्ति मद्याजिनोऽपि माम्‌ ॥9.25॥

भावार्थ : 
देवताओं को पूजने वाले देवताओं को प्राप्त होते हैं, पितरों को पूजने वाले पितरों को प्राप्त होते हैं, भूतों को पूजने वाले भूतों को प्राप्त होते हैं और मेरा पूजन करने वाले भक्त मुझको ही प्राप्त होते हैं। इसीलिए मेरे भक्तों का पुनर्जन्म नहीं होता (गीता अध्याय 8 श्लोक 16 में देखना चाहिए)॥25॥


अनुच्छेद 26 -34 में निष्काम भगवद् भक्ति की महिमा का वर्णन है।


पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति ।
तदहं भक्त्युपहृतमश्नामि प्रयतात्मनः ॥9.26॥

भावार्थ : 
जो कोई भक्त मेरे लिए प्रेम से पत्र, पुष्प, फल, जल आदि अर्पण करता है, उस शुद्धबुद्धि निष्काम प्रेमी भक्त का प्रेमपूर्वक अर्पण किया हुआ वह पत्र-पुष्पादि मैं सगुणरूप से प्रकट होकर प्रीतिसहित खाता हूँ॥26॥

यत्करोषि यदश्नासि यज्जुहोषि ददासि यत्‌ ।
यत्तपस्यसि कौन्तेय तत्कुरुष्व मदर्पणम्‌ ॥9.27॥

भावार्थ : 
हे अर्जुन! तू जो कर्म करता है, जो खाता है, जो हवन करता है, जो दान देता है और जो तप करता है, वह सब मेरे अर्पण कर॥27॥

शुभाशुभफलैरेवं मोक्ष्य से कर्मबंधनैः ।
सन्न्यासयोगमुक्तात्मा विमुक्तो मामुपैष्यसि ॥9.28॥

भावार्थ : 
इस प्रकार, जिसमें समस्त कर्म मुझ भगवान के अर्पण होते हैं- ऐसे संन्यासयोग से युक्त चित्तवाला तू शुभाशुभ फलरूप कर्मबंधन से मुक्त हो जाएगा और उनसे मुक्त होकर मुझको ही प्राप्त होगा। ॥28॥

समोऽहं सर्वभूतेषु न मे द्वेष्योऽस्ति न प्रियः ।
ये भजन्ति तु मां भक्त्या मयि ते तेषु चाप्यहम्‌ ॥9.29॥

भावार्थ : 
मैं सब भूतों में समभाव से व्यापक हूँ, न कोई मेरा अप्रिय है और न प्रिय है, परंतु जो भक्त मुझको प्रेम से भजते हैं, वे मुझमें हैं और मैं भी उनमें प्रत्यक्ष प्रकट (जैसे सूक्ष्म रूप से सब जगह व्यापक हुआ भी अग्नि साधनों द्वारा प्रकट करने से ही प्रत्यक्ष होता है, वैसे ही सब जगह स्थित हुआ भी परमेश्वर भक्ति से भजने वाले के ही अंतःकरण में प्रत्यक्ष रूप से प्रकट होता है) हूँ॥29॥

अपि चेत्सुदुराचारो भजते मामनन्यभाक्‌ ।
साधुरेव स मन्तव्यः सम्यग्व्यवसितो हि सः ॥9.30॥

भावार्थ : 
यदि कोई अतिशय दुराचारी भी अनन्य भाव से मेरा भक्त होकर मुझको भजता है तो वह साधु ही मानने योग्य है, क्योंकि वह यथार्थ निश्चय वाला है। अर्थात्‌ उसने भली भाँति निश्चय कर लिया है कि परमेश्वर के भजन के समान अन्य कुछ भी नहीं है॥30॥

क्षिप्रं भवति धर्मात्मा शश्वच्छान्तिं निगच्छति ।
कौन्तेय प्रतिजानीहि न मे भक्तः प्रणश्यति ॥9.31॥

भावार्थ : 
वह शीघ्र ही धर्मात्मा हो जाता है और सदा रहने वाली परम शान्ति को प्राप्त होता है। हे अर्जुन! तू निश्चयपूर्वक सत्य जान कि मेरा भक्त नष्ट नहीं होता॥31॥

मां हि पार्थ व्यपाश्रित्य येऽपि स्यु पापयोनयः ।
स्त्रियो वैश्यास्तथा शूद्रास्तेऽपि यान्ति परां गतिम्‌ ॥9.32॥

भावार्थ : 
हे अर्जुन! स्त्री, वैश्य, शूद्र तथा पापयोनि चाण्डालादि जो कोई भी हों, वे भी मेरे शरण होकर परमगति को ही प्राप्त होते हैं॥32॥

किं पुनर्ब्राह्मणाः पुण्या भक्ता राजर्षयस्तथा ।
अनित्यमसुखं लोकमिमं प्राप्य भजस्व माम्‌ ॥9.33॥

भावार्थ : 
फिर इसमें कहना ही क्या है, जो पुण्यशील ब्राह्मण था राजर्षि भक्तजन मेरी शरण होकर परम गति को प्राप्त होते हैं। इसलिए तू सुखरहित और क्षणभंगुर इस मनुष्य शरीर को प्राप्त होकर निरंतर मेरा ही भजन कर॥33॥

मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु ।
मामेवैष्यसि युक्त्वैवमात्मानं मत्परायण: ॥9.34॥

भावार्थ : 
मुझमें मन वाला हो, मेरा भक्त बन, मेरा पूजन करने वाला हो, मुझको प्रणाम कर। इस प्रकार आत्मा को मुझमें नियुक्त करके मेरे परायण होकर तू मुझको ही प्राप्त होगा॥34॥

कॉस्मॉस एट्रोसैन्गिनियस || Cosmos Atrosanguineus || Chocolate cosmos || चॉकलेट कॉस्मॉस

कॉस्मॉस एट्रोसैन्गिनियस 

मिलते हैं चौकाने वाले अनोखे फूलो की दुनियाँ के एक और फूल से। 

ये मेक्सिको के जंगली फूल हैं, इनके लिए कहा जाता है की ये 100 साल पहले ही विलुप्त हो गए थे। इनकी सिर्फ एक प्रजाति का क्लोन 1902 में बनाया गया। ये फूल गर्मियों में वैनिला जैसी खुशबू देते हैं। शायद यही वजह है कि इन्हें चॉकलेट कॉस्मॉस भी कहा जाता है।

कॉस्मॉस एट्रोसैन्गिनियस || Cosmos Atrosanguineus || Chocolate cosmos || चॉकलेट कॉस्मॉस

ये अनोखे फूल मखमली गोल पंखुड़ियों और गहरे भूरे रंग के केंद्रों के साथ गहरे मैरून रंग की होती हैं। उनकी सबसे अच्छी विशेषता उनकी चॉकलेटी खुशबू है। इन फूलों को बगीचे, कंटेनरों में लगाया जा सकता है। एक चॉकलेट-सुगंधित फूल! गहरे लाल-भूरे, कभी-कभी लगभग काले, लंबे, पतले, लाल भूरे रंग के तनों पर मखमली फूल शुरुआती गर्मियों से शरद ऋतु तक खिलते हैं। चॉकलेट कॉसमॉस मेक्सिको का एक कंद-जड़ वाला, कोमल बारहमासी मूल है, जिसे घर के अंदर भी रखा जा सकता है। 

कॉस्मॉस एट्रोसैन्गिनियस || Cosmos Atrosanguineus || Chocolate cosmos || चॉकलेट कॉस्मॉस

इस अत्यधिक मांग वाले फूल को पहली बार 1885 में एक बीज सूची में व्यावसायिक रूप से पेश किया गया था। हालाँकि, अधिकांश किस्में बाँझ बीज का उत्पादन करती हैं, इसलिए इन फूलों को डहेलिया की जड़ों के समान कंद की जड़ों के माध्यम से उगाया जाता है। 21 वीं सदी की शुरुआत में पुराने ओक और देवदार के जंगलों में चॉकलेट कॉसमॉस पाया गया था। हाल के वर्षों में, कई नई किस्मों को पेश किया गया है।

कॉस्मॉस एट्रोसैन्गिनियस || Cosmos Atrosanguineus || Chocolate cosmos || चॉकलेट कॉस्मॉस

चॉकलेट कॉसमॉस की चॉकलेटी खुशबू वैनिलीन की उपस्थिति के कारण होती है, जो कोको में पाया जाने वाला एक कार्बनिक यौगिक भी है। इसकी सुगंध गर्म दिनों में सबसे अधिक होती है। अधिक आसानी से सुगंध का आनंद लेने के लिए उन्हें एक आंगन या बैठने की जगह के पास कंटेनरों में लगा सकते हैं। 

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Cosmos Atrosanguineus (Chocolate cosmos)

Meet another flower from the world of shockingly unique flowers.

These are wild flowers of Mexico, which are said to have become extinct 100 years ago. The drone of only one of their species was made in 1902. These flowers give off a vanilla-like scent in summer. Perhaps this is the reason why it is also called Chocolate Cosmos.

कॉस्मॉस एट्रोसैन्गिनियस || Cosmos Atrosanguineus || Chocolate cosmos || चॉकलेट कॉस्मॉस

These unique flowers are deep maroon in color with a velvety round ide and dark brown appearance. Its best feature is its chocolaty smell. These flowers can be put in containers. A chocolate-scented flower! Dark reddish-brown, sometimes almost black, long, speckled, velvety flowers on reddish-brown stems bloom from early summer to autumn. Chocolate cosmos is a tuberous, tender root native from Mexico that can be grown indoors.

कॉस्मॉस एट्रोसैन्गिनियस || Cosmos Atrosanguineus || Chocolate cosmos || चॉकलेट कॉस्मॉस

This highly sought-after flower was first introduced commercially in 1885 in an catalog of seeds. However, most sightsees produce seeds, so these flowers are routed through pumpkin roots in a similar fashion to dahlia roots. Dense thickets of old oak and cedar were found in the Chocolate Cosmos in the early 21st century. In recent years, many new information has come to the fore.

कॉस्मॉस एट्रोसैन्गिनियस || Cosmos Atrosanguineus || Chocolate cosmos || चॉकलेट कॉस्मॉस

The chocolaty smell of the Chocolate Cosmos is due to the presence of vanillin, a derivative also found in cocoa. Its smell is maximum on hot days. They can be taken in containers near the patio or seating area to enjoy the flavor more easily.

महिमा खाटू श्याम की || Mahima Khatu Shyam ki ||

भगवान खाटू श्याम की महिमा

भगवान खाटू श्याम की महिमा से कौन भला अपरिचित है। उनकी महिमा उनकी कृपा अटूट है, अपने भक्तों पर। यूं हीं नहीं कहते "हारे का सहारा बाबा खाटू श्याम हमारा", ऐसे बने खाटू श्याम भगवान। 

खाटू श्याम बर्बरीक के रूप है। श्रीकृष्ण ने ही बर्बरीक को खाटूश्यामजी नाम दिया था। भगवान श्रीकृष्ण के कलयुगी अवतार खाटू श्यामजी खाटू में विराजित हैं। 

महिमा खाटू श्याम की

वीर घटोत्कच और मौरवी को एक पुत्ररतन की प्राप्ति हुई, जिसके बाल बब्बर शेर की तरह होने के कारण इनका नाम बर्बरीक रखा गया। बर्बरीक को आज हम खाटू के श्याम, कलयुग के अवतार, श्याम सरकार, तीन बाणधारी, शीश के दानी, खाटू नरेश व अन्य अनगिनत नामों से जानते व मानते हैं। कृष्ण वीर बर्बरीक के महान् बलिदान से काफ़ी प्रसन्न हुये और वरदान दिया कि कलियुग में तुम श्याम नाम से जाने जाओगे, क्योंकि कलियुग में हारे हुये का साथ देने वाला ही श्याम नाम धारण करने में समर्थ है। खाटूनगर तुम्हारा धाम बनेगा और उनका शीश खाटूनगर में दफ़नाया गया। ब्राह्मण ने बालक बर्बरीक से दान की अभिलाषा व्यक्त की, इस पर वीर बर्बरीक ने उन्हें वचन दिया कि अगर वो उनकी अभिलाषा पूर्ण करने में समर्थ होगा तो अवश्य करेगा। कृष्ण ने उनसे शीश का दान माँगा। बालक बर्बरीक क्षण भर के लिये चकरा गया, परन्तु उसने अपने वचन की दृढ़ता जताई। 

बालक बर्बरीक ने ब्राह्मण से अपने वास्तविक रूप से अवगत कराने की प्रार्थना की और कृष्ण के बारे में सुन कर बालक ने उनके विराट रूप के दर्शन की अभिलाषा व्यक्त की, कृष्ण ने उन्हें अपना विराट रूप दिखाया। उन्होंने बर्बरीक को समझाया कि युद्ध आरम्भ होने से पहले युद्धभूमि की पूजा के लिये एक वीर्यवीर क्षत्रिय के शीश के दान की आवश्यकता होती है, उन्होंने बर्बरीक को युद्ध में सबसे वीर की उपाधि से अलंकृत किया, अतैव उनका शीश दान में माँगा।

महिमा खाटू श्याम की

बर्बरीक ने उनसे प्रार्थना की कि वह अंत तक युद्ध देखना चाहता है, श्री कृष्ण ने उनकी यह बात स्वीकार कर ली।

फाल्गुन माह की द्वादशी को उन्होंने अपने शीश का दान दिया। भगवान ने उस शीश को अमृत से सींच कर सबसे ऊँची जगह पर रख दिया, ताकि वह महाभारत युद्ध देख सके। उनका सिर युद्धभूमि के समीप ही एक पहाड़ी पर सुशोभित किया गया, जहाँ से बर्बरीक सम्पूर्ण युद्ध का जायजा ले सकते थे।

खाटू की स्थापना राजा खट्टवांग ने की थी। खट्टवां ने ही बभ्रुवाहन के बर्बरीकद्ध के देवरे में बर्बरीक के सिर की प्राण प्रतिष्ठा करवाई थी।

खाटू की स्थापना के विषय में अन्य मत प्रचलित है।

महिमा खाटू श्याम की

कई विद्वान् इसे महाभारत के पहले का मानते हैं, तो कई इसे ईसा पूर्व के समय का मानते है, लेकिन कुल मिलाकर विद्वानों की एकमत राय यह है कि बभु्रवाहन के देवरे में सिर की प्रतिमा की स्थापना महाभारत के पश्चात्‌ हुई।

उनका शीश खाटू में दफ़नाया गया था और बाद में वहाँ सफ़ेद संगमरमर का खाटू श्यामजी मंदिर बनावाया गया था। एक बार एक गाय उस स्थान पर आकर अपने स्तनों से दुग्ध की धारा स्वतः ही बहा रही थी, बाद में खुदायी के बाद वह शीश प्रकट हुआ, जिसे कुछ दिनों के लिये एक ब्राह्मण को सुपुर्द कर दिया गया। एक बार खाटू के राजा को स्वप्न में मन्दिर निर्माण के लिये और वह शीश मन्दिर में सुशोभित करने के लिये प्रेरित किया गया। 

तदन्तर उस स्थान पर मन्दिर का निर्माण किया गया और कार्तिक माह की एकादशी को शीश मन्दिर में सुशोभित किया गया, जिसे बाबा श्याम के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। खाटू श्याम जी का मुख्य मंदिर राजस्थान के सीकर ज़िले के गाँव खाटू में बना हुआ है।

खाटू श्याम मंदिर कहाँ स्थित है ?

राजस्थान के सीकर जिले में इनका भव्य मंदिर स्थित है, जहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। लोगों का विश्वास है कि बाबा श्याम सभी की मुरादें पूर करते हैं और रंक को भी राजा बना सकते हैं, बाबा खाटू श्याम का संबंध महाभारत काल से माना जाता है। यह पांडुपुत्र भीम के पौत्र थे। 

श्याम मंदिर बहुत ही प्राचीन है

खाटू श्यामजी मंदिर में प्रत्येक वर्ष फाल्गुन मास शुक्ल पक्ष में बड़े मेले का आयोजन होता है। हर साल इस मेले में काफ़ी संख्या में देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं। यह मेला फागुन सुदी दशमी के आरंभ और द्वादशी के अंत में लगता है। हज़ारों श्रद्धालु यहाँ पदयात्रा करके पहुँचते हैं, वहीं कई लोग दंडवत करते हुए खाटू नरेश के दरबार में हाज़िरी देते हैं। यहाँ के एक दुकानदार रामचंद्र चेजारा के मुताबिक नवमी से द्वादशी तक लगने वाले मेले में लाखों श्रद्धालु आते हैं। प्रत्येक एकादशी और रविवार को भी यहाँ भक्तों की लंबी कतारें लगी होती हैं। यहाँ भक्तों के जीवन के समस्त पाप समाप्त हो जाते हैं और प्रभु के दर्शन मात्र से उसके जीवन में खुशियाँ और सुख शान्ति का भंडार भरना प्रारम्भ हो जाता है। 

जय खाटू श्याम हारे का सहारा बाबा श्याम हमारा

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Glory of Lord Khatu Shyam

Who is unfamiliar with the glory of Lord Khatu Shyam. His glory his grace is inexhaustible, on his devotees. They don't just say "Baba Khatu Shyam Hamara, the support of the loser", this is how Khatu Shyam became God.

Khatu Shyam is the form of Barbarik. It was Shri Krishna who gave Barbaric the name Khatushyamji. Khatu Shyamji, the Kalyugi incarnation of Lord Krishna, is seated in Khatu.

महिमा खाटू श्याम की

Veer Ghatotkach and Maurvi were blessed with a son, who was named Barbarik because of his hair being like that of a lion. Today we know and believe Barbarik by the names of Khatu ke Shyam, Kalyug ke Avatar, Shyam Sarkar, Teen Bandhari, Sheesh ke Dani, Khatu Naresh and countless other names. Krishna was very pleased with the great sacrifice of Veer Barbarik and gave a boon that in Kaliyuga you will be known by the name Shyam, because in Kaliyuga only the one who supports the loser is able to bear the name Shyam. Khatunagar will become your abode and his head was buried in Khatunagar. The Brahmin expressed the desire of charity to the child Barbarik, on this the brave Barbarik promised him that if he is able to fulfill his wish, he will definitely do so. Krishna sought his head as benefaction. The child barbaric was confused for a moment, but he expressed the firmness of his word.

Child Barbarik prayed to Brahmin to inform about his real form and after hearing about Krishna, the child expressed his desire to see his great form, Krishna showed him his great form. He explained to Barbarik that before the start of the war, the donation of the head of a Viryaveer Kshatriya is required for the worship of the battlefield, he decorated Barbarik with the title of the most heroic in the war, so he asked for his head in donation.

Barbarik prayed to him that he wanted to see the war till the end, Shri Krishna accepted his request.

He donated his head on the Dwadashi of Falgun month. God irrigated that head with nectar and placed it on the highest place, so that he could see the Mahabharata war. His head was decorated on a hill near the battlefield, from where Barbarika could watch the entire battle.

Khatu was founded by King Khattwang. It was Khatwan who got Barbarik's head consecrated in the brother-in-law of Barbarika of Babhruvahan.

There is another opinion regarding the establishment of Khatu.

Some scholars consider it to be before the Mahabharata, while some consider it to be before the time of BC, but overall the unanimous opinion of the scholars is that the statue of the head was established in the Devra of Babhurvahan after the Mahabharata.

His head was buried in Khatu and later the white marble Khatu Shyamji temple was built there. Once a cow came to that place and automatically a stream of milk was flowing from her breasts, later after digging that head appeared, which was handed over to a Brahmin for a few days. Once the king of Khatu was inspired in a dream to build a temple and that head to beautify the temple.

Later, a temple was constructed at that place and the Ekadashi of the month of Kartik was decorated in the Sheesh temple, which is celebrated as the birthday of Baba Shyam. The main temple of Khatu Shyam ji is built in Khatu village of Sikar district of Rajasthan.

Where is Khatu Shyam Temple situated?

His grand temple is located in Sikar district of Rajasthan, where a large number of devotees come every year. People believe that Baba Shyam fulfills everyone's wishes and can even make Ranka a king, Baba Khatu Shyam's relation is believed to be from the Mahabharata period. He was the grandson of Panduputra Bhima.

महिमा खाटू श्याम की

Shyam Mandir is very ancient

Every year a big fair is organized in the Khatu Shyamji temple in the Shukla Paksha of Falgun month. Every year a large number of devotees from India and abroad visit this fair. This fair takes place at the beginning of Phagun Sudi Dashami and at the end of Dwadashi. Thousands of devotees reach here by foot, while many people pay obeisance and attend the court of Khatu Naresh. According to Ramchandra Chejara, a shopkeeper here, lakhs of devotees visit the fair which is held from Navami to Dwadashi. There are long queues of devotees here on every Ekadashi and also on Sundays. Here all the sins of the devotee's life are ended and the store of happiness and peace starts filling in his life just by seeing the Lord.

Jai Khatu Shyam Hare Ka Sahara Baba Shyam Hamara

एनीमिया के कारण और उपचार || Causes and Treatment of Anemia ||

एनीमिया के कारण और उपचार 


रक्तक्षय जिसको आधुनिक विज्ञान में 'एनीमिया' और आयुर्वेद में 'पांडुरोग' कहते हैं। 

एनीमिया एक ऐसी बीमारी है, जो ज्यादातर महिलाओं और बच्चों में पाई जाती है। इस रोग में रोगी की त्वचा का रंग फीका पड़ जाता है। इस विषय को हम आधुनिक विज्ञान और आयुर्वेद दोनों के अनुसार समझेंगे।

एनीमिया के कारण और उपचार || Causes and Treatment of Anemia ||

1.  रक्तस्राव के कारण

  • आयुर्वेद के अनुसार तीनों दोषों के अधिक होने पर रक्तक्षय होता है।  अधिक व्यायाम करना, अधिक नमकीन भोजन करना, पावटा, उदेड और तिल के तेल का अधिक सेवन करना, दिन में सोना, मल मूत्र के तेजी से आने पर भी विसर्जित न करना अर्थात इस प्राकृतिक गति को अवरुद्ध करना। चिंता, भय जैसे मानसिक कारण, क्रोध, शोक आदि इन सभी से शरीर प्रभावित हो सकता है और आगे रक्तस्राव हो सकता है।
  • ब्लड आयरन के उत्पादन के लिए ब्लड आयरन की आवश्यकता होती है।  यदि एनीमिया विकार है, तो रक्त में आयरन का उत्पादन ठीक से नहीं होगा और इसलिए एनीमिया हो जाएगा। सीधे शब्दों में कहें, अगर भोजन ठीक से नहीं पचता है, तो अगली धातु ठीक से नहीं बनेगी।
  • आधुनिक विज्ञान के अनुसार आयरन की कमी, 'बी-12' तथा 'बी' वर्ग के अन्य विटामिनों की कमी तथा शरीर से खून की कमी से एनीमिया रोग होता है।

2.  शरीर में रक्तस्राव के विभिन्न कारण:

एनीमिया के कारण और उपचार || Causes and Treatment of Anemia ||

  • कीड़े होना
  • बवासीर
  • महिलाओं में मासिक धर्म की समस्या
  • पेट के अल्सर और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां
  • गुर्दा रोग
  • क्षय रोग जैसे गंभीर रोग
  • लंबे समय तक शरीर से खून निकलने के कारण अंततः रोगी को एनीमिया की समस्या हो जाती है।

3.  शरीर में खून की कमी के लक्षण

  • त्वचा का रूखा दिखना
  • नपुंसकता
  • जरा-सी मेहनत से भी थकान
  • धडकन तेज होना 
  • दक्षता में कमी 
  • उत्साह की कमी

उपरोक्त लक्षण नजर आने पर जरूरी है कि मरीज डॉक्टर से जांच करवाएं।  बहुत से लोग अपना समय घरेलू उपचार करने में व्यतीत करते हैं।  जब शरीर को दवा की जरूरत होती है, तो दवा न लेने से एनीमिया जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। फिर डॉक्टर की सलाह पर ही दवाएं लेनी चाहिए।  एनीमिया के सटीक कारण का पता लगाना और उसके अनुसार इलाज करना केवल एक चिकित्सक द्वारा जांच के बाद ही समझा जा सकता है। 

4.  रक्ताल्पता में उपयोगी आहार

  • एनीमिया से पीड़ित लोगों को दवाओं का निम्नलिखित संयोजन लेना चाहिए, और किसी एक पदार्थ का अधिक मात्रा में सेवन नहीं करना चाहिए। 
  • उदाहरण के लिए, बहुत से लोग मानते हैं कि यदि किसी भोजन में आयरन होता है, तो वे इसे बार-बार या अत्यधिक मात्रा में सेवन करते हैं। अति करने के बजाय संतुलन बनाने की जरूरत है।  हम जो भोजन करते हैं उसका ठीक से पचना और उससे बेहतर धातुओं का उत्पादन करना ही हमारी 'इम्युनिटी' है।
  • दाल चावल खाते समय नींबू अवश्य निचोड़ लेना चाहिए;  क्‍योंकि चावल का आयरन बिना नींबू के पच नहीं पाएगा।
  • रोटी और मक्खन खाना चाहिए। 
  • पालक, लाल साग(मठ), चाकवत,मेथी जैसी हरी सब्जियों को पकाते समय लोहे की कढ़ाई में ही पकाएं। जब सब्जियां पक जाएं तो इन्हें दूसरे बर्तन में निकाल कर रख लें। 
  • दाल, कड़ी और सब्जियां बनाते समय इसमें कुछ करी पत्ते डाल दें। कई लोग करी पत्ते को अलग करके खाते हैं।  उन्हें ऐसा न करते हुए करी पत्ते का सेवन जरूर करना चाहिए। करी पत्ते की चटनी का सेवन भी कर सकते हैं। 
  • फलों में आंवला, अनार, अंगूर और चीकू शामिल करना चाहिए। आयरन से भरपूर अंजीर, स्ट्रॉबेरी और खुबानी जैसे फल का सेवन करना चाहिए। 
  • गाजर, मूली और चुकंदर का सलाद बनाते समय मूंगफली का कुट डालें या नींबू निचोड़ लें। 
  • खून की कमी के रोगियों को कभी-कभार गुड़ नारियल के पदार्थ,  गुड़ और नारियल से बने उबले हुए मोदक, गेहूं गुड़ की खीर और पूरन को भोजन में शामिल करना चाहिए, इससे लाभ होता है।
  • पालक, टमाटर और गाजर का सूप लें।  घर का बना सूप ताजा और गर्म ही परोसा जाना चाहिए।  चूंकि 'इंस्टेंट' सूप हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है, इसलिए इससे सख्ती से बचना चाहिए (रेडीमेड सूप का उपयोग न करें)।

Causes and treatment of anemia


Blood loss which is called 'Anemia' in modern science and 'Pandurog' in Ayurveda.

Anemia is one such disease, which is mostly found in women and children. In this disease, the color of the patient's skin becomes discolored. We will understand this subject according to both modern science and Ayurveda.
एनीमिया के कारण और उपचार || Causes and Treatment of Anemia ||

1. Causes of bleeding

  • According to Ayurveda, anemia occurs when all the three doshas are in excess. Exercising more, eating more salty food, consuming more pavata, udad and sesame oil, sleeping during the day, not immersing even when urine comes fast means blocking this natural movement. Mental causes like anxiety, fear, anger, grief etc. all these can affect the body and lead to further bleeding.
  • Blood iron is needed for the production of blood iron. If anemia is the disorder, iron will not be produced properly in the blood and hence anemia will occur. Simply put, if the food is not digested properly, the next metal will not be formed properly.
  • According to modern science, deficiency of iron, deficiency of 'B-12' and other vitamins of 'B' group and lack of blood from the body causes anemia.

2. Various causes of bleeding in the body:

  • having worms
  • hemorrhoid
  • menstrual problem in women
  • Serious diseases like stomach ulcers and cancer
  • kidney disease
  • serious diseases such as tuberculosis
  • Due to bleeding from the body for a long time, eventually the patient becomes anemic.

3. Symptoms of anemia in the body

  • dry skin
  • impotence
  • fatigue from exertion
  • palpitation
  • loss of efficiency
  • lack of enthusiasm
एनीमिया के कारण और उपचार || Causes and Treatment of Anemia ||
If the above symptoms are seen, it is necessary that the patient should get the doctor examined. Many people spend their time doing home remedies. When the body needs the medicine, not taking the medicine can lead to serious problems like anemia. Then medicines should be taken only on the advice of the doctor. Finding out the exact cause of anemia and treating it accordingly can be understood only after examination by a doctor.

4. Diet useful in anemia

  • People suffering from anemia should take the following combination of medicines, and should not take any one substance in excess.
  • For example, many people believe that if a food contains iron, they consume it frequently or in excessive amounts. There is a need to strike a balance instead of overdoing it. Our 'immunity' is to digest the food we eat properly and produce better metals from it.
  • Lemon must be squeezed while eating lentils and rice; Because the iron of rice will not be digested without lemon.
  • Bread and butter should be eaten.
  • While cooking green vegetables like spinach, red greens (math), chakwat, fenugreek, cook them in an iron pan only. When the vegetables are cooked, take them out in another vessel and keep them.
  • Add some curry leaves to it while cooking dal, curry and vegetables. Many people eat curry leaves separately. While not doing so, they must consume curry leaves. Curry leaves chutney can also be consumed.
  • Fruits should include amla, pomegranate, grapes and chiku. Iron-rich fruits like figs, strawberries and apricots should be consumed.
  • Add crushed peanuts or squeeze lemon while making carrot, radish and beetroot salad.
  • Anemic patients should occasionally include jaggery coconut material, boiled modak made of jaggery and coconut, wheat jaggery kheer and puran in the food, it is beneficial.
  • Have spinach, tomato and carrot soup. Homemade soup should be served fresh and hot. Since 'instant' soup is injurious to our health, it should be strictly avoided (don't use readymade soup).