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Sunderkand-9

सुंदरकांड 
Hanuman wrote the first Ramayana but he dumped it in ocean due to ...
हनुमानजी का रावण को समझाना
चौपाई (Chaupai – Sunderkand)
राम चरन पंकज उर धरहू।
लंका अचल राजु तुम्ह करहू॥
रिषि पुलस्ति जसु बिमल मयंका।
तेहि ससि महुँ जनि होहु कलंका॥
इसलिए तू रामचन्द्रजीके चरणकमलोंको हृदयमें धारण कर और उनकी कृपासे लंकामें अविचल राज कर॥
महामुनि पुलस्त्यजीका यश निर्मल चन्द्रमाके समान परमउज्वल है इसलिए तू उस कुलके बीचमें कलंक के समान मत हो॥ जय सियाराम जय जय सियाराम
राम नाम बिनु गिरा सोहा।
देखु बिचारि त्यागि मद मोहा॥
बसन हीन नहिं सोह सुरारी।
सब भूषन भूषित बर नारी॥
हे रावण! तू अपने मनमें विचार करके मद और मोहको त्यागकर अच्छी तरह जांचले कि रामके नाम बिना वाणी कभी शोभा नहीं देती॥
हे रावण! चाहे स्त्री सब अलंकारोसे अलंकृत और सुन्दर क्यों होवे परंतु वस्त्रके बिना वह कभी शोभायमान नहीं होती। ऐसेही रामनाम बिना वाणी शोभायमान नहीं होती॥ जय सियाराम जय जय सियाराम
राम बिमुख संपति प्रभुताई।
जाइ रही पाई बिनु पाई॥
सजल मूल जिन्ह सरितन्ह नाहीं।
बरषि गएँ पुनि तबहिं सुखाहीं॥
हे रावण! जो पुरुष रामचन्द्रजीसे विमुख है उसकी संपदा और प्रभुता पानेपर भी पानेके बराबर है। क्योंकि वह स्थिर नहीं रहती किन्तु तुरंत चली जाती है॥
देखो, जिन नदियों के मूल में कोई जलस्रोत नहीं है, वहां बरसात हो जाने के बाद फिर सब जल सुख ही जाता है, कही नहीं रहता॥ जय सियाराम जय जय सियाराम
सुनु दसकंठ कहउँ पन रोपी।
बिमुख राम त्राता नहिं कोपी॥
संकर सहस बिष्नु अज तोही।
सकहिं राखि राम कर द्रोही॥
हे रावण! सुन, मै प्रतिज्ञा कर कहता हूँ कि रामचन्द्रजीसे विमुख पुरुषका रखवारा कोई नहीं है॥
हे रावण! रामचन्द्रजीसे द्रोह करनेवाले तुझको ब्रह्मा, विष्णु और महादेव भी बचा नहीं सकते॥ जय सियाराम जय जय सियाराम
दोहा (Doha – Sunderkand)
मोहमूल बहु सूल प्रद त्यागहु तम अभिमान।
भजहु राम रघुनायक कृपा सिंधु भगवान 23
हे रावण! मोह्का मूल कारण और अत्यंत दुःख देनेवाली अभिमानकी बुद्धिको छोड़कर कृपाके सागर भगवान् श्री रघुवीरकुलनायक रामचन्द्रजीकी सेवा कर 23 जय सियाराम जय जय सियाराम
रावण ने हनुमानजी की पूँछ जलाने का हुक्म दिया
चौपाई (Chaupai – Sunderkand)
जदपि कही कपि अति हित बानी।
भगति बिबेक बिरति नय सानी॥
बोला बिहसि महा अभिमानी।
मिला हमहि कपि गुर बड़ ग्यानी॥
यद्यपि हनुमानजी रावणको अति हितकारी और भक्ति, ज्ञानधर्म और नीतिसे भरी वाणी कही, परंतु उस अभिमानी अधमके उसके कुछ भी असर नहीं हुआ॥
इससे हँसकर बोला कि हे वानर! आज तो हमको तु बडा ज्ञानी गुरु मिला॥ जय सियाराम जय जय सियाराम
मृत्यु निकट आई खल तोही।
लागेसि अधम सिखावन मोही॥
उलटा होइहि कह हनुमाना।
मतिभ्रम तोर प्रगट मैं जाना॥
हे नीच! तू मुझको शिक्षा देने लगा है. सो हे दुष्ट! कहीं तेरी मौत तो निकट नहीं गयी है?
रावणके ये वचन सुन पीछे फिरकर हनुमान्‌ने कहा कि हे रावण! अब मैंने तेरा बुद्धिभ्रम स्पष्ट रीतिसे जान लिया है॥ जय सियाराम जय जय सियाराम
सुनि कपि बचन बहुत खिसिआना।
बेगि हरहु मूढ़ कर प्राना॥
सुनत निसाचर मारन धाए।
सचिवन्ह सहित बिभीषनु आए॥
हनुमान्‌के वचन सुनकर रावणको बड़ा कोध आया, जिससे रावणने राक्षसोंको कहा कि हे राक्षसो! इस मूर्खके प्राण जल्दी लेलो अर्थात इसे तुरंत मार डालो॥
इस प्रकार रावण के वचन सुनतेही राक्षस मारनेको दौड़ें तब अपने मंत्रियोंके साथ विभीषण वहां  पहुँचे॥ जय सियाराम जय जय सियाराम
नाइ सीस करि बिनय बहूता।
नीति बिरोध मारिअ दूता॥
आन दंड कछु करिअ गोसाँई।
सबहीं कहा मंत्र भल भाई॥
बड़े विनयके साथ रावणको प्रणाम करके बिभीषणने कहा कि यह दूत है। इसलिए इसे मारना नही चाहिये; क्योंकि यह बात नीतिसेविरुद्ध है॥
हे स्वामी! इसे आप और एक दंड दे दीजिये पर मारें मत। बिभीषणकी यह बात सुनकर सब राक्षसोंने कहा कि हे भाइयो! यह सलाह तो अच्छी है॥ जय सियाराम जय जय सियाराम
सुनत बिहसि बोला दसकंधर।
अंग भंग करि पठइअ बंदर॥
रावण इस बातको सुनकर बोला कि जो इसको मारना ठीक नहीं है तो इस बंदरका कोई अंग भंग करके इसे भेज दो॥ जय सियाराम जय जय सियाराम
दोहा (Doha – Sunderkand)
कपि कें ममता पूँछ पर सबहि कहउँ समुझाइ।
तेल बोरि पट बाँधि पुनि पावक देहु लगाइ 24
सब लोगोने समझा कर रावणसे कहा कि वानरका ममत्व पूंछ पर बहुत होता है। इसलिए इसकी पूंछमें तेलसे भीगेहुए कपडे लपेटकर आग लगा दो 24
राक्षसोंने हनुमानजी की पूँछ में आग लगा दीइसलिए रावण ने लगवाई थी हनुमान की ...
चौपाई (Chaupai – Sunderkand)
पूँछहीन बानर तहँ जाइहि।
तब सठ निज नाथहि लइ आइहि॥
जिन्ह कै कीन्हिसि बहुत बड़ाई।
देखउ मैं तिन्ह कै प्रभुताई॥
जब यह वानर पूंछहीन होकर अपने मालिकके पास जायेगा, तब अपने स्वामीको यह ले आएगा॥ इस वानरने जिसकी अतुलित बढाई की है भला उसकी प्रभुताको मैं देखूं तो सही कि वह कैसा है? जय सियाराम जय जय सियाराम
बचन सुनत कपि मन मुसुकाना।
भइ सहाय सारद मैं जाना॥
जातुधान सुनि रावन बचना।
लागे रचैं मूढ़ सोइ रचना॥
रावनके ये वचन सुनकर हनुमानजी मनमें मुस्कुराए और मनमें सोचने लगे कि मैंने जान लिया है कि इस समय सरस्वती सहाय हुई है। क्योंकि इसके मुंहसे रामचन्द्रजीके आनेका समाचार स्वयं निकल गया॥
तुलसीदासजी कहते है कि वे राक्षसलोग रावणके वचन सुनकर वही रचना करने लगे अर्थात तेलसे भिगो भिगोकर कपडे उनकी पूंछमें लपेटने लगे॥ जय सियाराम जय जय सियाराम
रहा नगर बसन घृत तेला।
बाढ़ी पूँछ कीन्ह कपि खेला॥
कौतुक कहँ आए पुरबासी।
मारहिं चरन करहिं बहु हाँसी॥
उस समय हनुमानजीने ऐसा खेल किया कि अपनी पूंछ इतनी लंबी बढ़ा दी जिसको लपेटने के लिये नगरीमें कपडा, घी तेल कुछ भी बाकी रहा॥
नगरके जो लोग तमाशा देखनेको वहां आये थे वे सब लातें मार मारकर बहुत हँसते हैं॥ जय सियाराम जय जय सियाराम
बाजहिं ढोल देहिं सब तारी।
नगर फेरि पुनि पूँछ प्रजारी॥
पावक जरत देखि हनुमंता।
भयउ परम लघुरूप तुरंता॥
अनेक ढोल बज रहे हे, सबलोग ताली दे रहे हैं, इस तरह हनुमानजीको नगरीमें सर्वत्र फिराकर फिर उनकी पूंछमें आग लगा दी॥
हनुमानजीने जब पूंछमें आग जलती देखी तब उन्होने तुरंत बहुत छोटा स्वरूप धारण कर लिया॥जय सियाराम जय जय सियाराम
इसलिए रावण ने लगवाई थी हनुमान की ...

निबुकि चढ़ेउ कप कनक अटारीं।
भईं सभीत निसाचर नारीं॥
और बंधन से निकलकर पीछे सुवर्णकी अटारियोंपर चढ़ गए, जिसको देखतेही तमाम राक्षसोंकी स्त्रीयां भयभीत हो गयी॥ जय सियाराम जय जय सियाराम
दोहा (Doha – Sunderkand)
हरि प्रेरित तेहि अवसर चले मरुत उनचास।
अट्टहास करि गर्जा कपि बढ़ि लाग अकास 25
उस समय भगवानकी प्रेरणासे उनचासो पवन बहने लगे और हनुमानजीने अपना स्वरूप ऐसा बढ़ाया कि वह आकाशमें जा लगा फिर अट्टहास करके बड़े जोरसे गरजे 25 जय सियाराम जय जय सियाराम
SAF Lord Hanuman Ji SAFR3299 Sparkle Coated Digital Print Painting ...

Ayurveda The Synthesis of Yoga and Natural Remedies-29- Waat,Pitt Aur Cough

वात, पित्त और कफ 
वात, पित और कफ को आसान भाषा में समझिए ...

         इस कोरोना के दौर में ज्यादातर लोग काढ़े का सेवन कर रहे हैं। हमारी भारतीय परंपरा भी चाय न होकर काढ़ा ही है। काढ़ा ही हमारे लिए उपयुक्त भी है, चाय की तुलना में, सिर्फ थोड़ा सा ध्यान अपने शरीर की प्रकृति पर देना है। संपूर्ण आयुर्वेद तीन दोषों पर आधारित है - वात, पित्त और कफ।  इसी को त्रिदोष भी कहते हैं। 
वात, पित्त और कफ क्या है - vat pit aur kaf kya ...
        किसी भी मनुष्य को स्वस्थ रहने के लिए उसके शरीर में वात,पित्त और कफ का संतुलन होना अत्यवश्यक है। हर इंसान मूलतः वात,पित्त अथवा कफ में किसी एक प्रवृत्ति का होता है। कोरोना काल में  काढ़ा सभी के लिए लाभदायक है, लेकिन पित्त और वात प्रकृति के लोगों को काढ़ा एक दिन में 20-40 ml से ज्यादा नहीं लेना चाहिए। कफ प्रकृति वालों को काढ़ा ज्यादा मात्रा में भी फ़ायदा करेगा। वात प्रकृति वालों को एसिडिक चीज़ों से परहेज करना चाहिए। वही पित्त प्रकृति वालों को काली मिर्च और दालचीनी  का सेवन कम मात्रा में करना चाहिए। कफ प्रकृति वालों को ठण्डी चीजों से परहेज करना चाहिए।
            आयुर्वेद के अनुसार हर महीने में पथ्य और अपथ्य का भी विचार करना चाहिए।
वात, पित्त और कफ क्या है - vat pit aur kaf kya ...

, चैत (मार्च-अप्रेल) में गुड़, वैशाख (अप्रैल-मई) में तेल, जेठ (मई-जून) में यात्रा, आषाढ़ (जून-जौलाई) में बेल, सावन (जौलाई-अगस्त) में हरे साग, भादों (अगस्त-सितम्बर) में दही, क्वार (सितम्बर-अक्तूबर) में दूध, कार्तिक (अक्तूबर-नवम्बर) में मट्ठा, अगहन (नवम्बर-दिसम्बर) में जीरा, पूस (दिसम्बर-जनवरी) में धनियां, माघ (जनवरी-फरवरी) में मिश्री, फागुन (फरवरी-मार्च) में चने खाना हानिप्रद होता है।
वात, पित्त और कफ क्या है - vat pit aur kaf kya ...


            आज का यह ब्लॉग मुख्यतः इस पेपर कटिंग पर आधारित है। इसको पढ़कर लग रहा कि पुराने समय में बुजुर्ग खेल- खेल में कहावतों के माध्यम से कितनी ही ज्ञानप्रद बातें सीखा देते थे, जो ज्यादातर लोगों को ज्ञात थी। आज के इस विज्ञान के युग में हम इन जानकारियों से दूर होते जा रहे। अतः हमें इन कहावतों से सीख लेकर अपने खान - पान की आदतों में सुधार करना चाहिए।
 कब क्या नहीं खाना चाहिए 
चैते गुड़, वैशाखे तेल, जेठ के पंथ, अषाढे बेल। 
सावन साग, भादो मही, कुवार करेला, कार्तिक दही। 
अगहन जीरा, पूसै धना, माघै मिश्री, फाल्गुन चना। 
जो कोई इतने परिहरै, ता घर वैद, पैर नहिं धरै।।

कब क्या खाना चाहिए 
चैत चना, वैसाखे बेल, जैठे शयन, आषाढे खेल, सावन हररे, भादो तिल। 
कुवार मास गुड़ सेवै नित, कार्तिक मूल, अगहन तेल, पूस करे दूध से मेल। 
माघ मास घी - खिचड़ी खाये, फाल्गुन उठ नित प्रातः नहाय।। 

Sunday.. इतवार ..रविवार

इतवार (Sunday)

गुरु पूर्णिमा की शुभकामनायें 



 रुके न तू, झुके न तू

सतरंगी है सवेरा, खूबसूरत होगी शाम
फिक्रचिंताओं काहोगा काम तमाम
खुश रहकर जीने कादेना है पैगाम
आप सब को मेरा इतवार का प्रणाम।
Happy Sunday Wishes posted by Zoey Cunningham
🍁🍁झूठ कहते हैं कि संगत का असर होता है 
आज तक ना काँटों को महकना आया ना फूलों को चुभना 🍁🍁

धरा हिला, गगन गूंजा 
नदी बहा, पवन चला 
विजय तेरी विजय तेरी 
ज्योति सी जल, जला 
भुजा भुजा, फड़क फड़क 
रक्त में धड़क धड़क 

रुके न तू, थके न तू 
झुके न तू, धमे न तू 
सदा चले, थके न तू 
रुके न तू, झुके न तू
Guru Purnima Know Everything About Guru | Guru Purnima 2020 ...


🌼होंठो पर मुस्कान, 
हर मुश्किल काम को आसान कर देती है 🌼


चांद पर खरगोश (Rabbit on the moon)

चांद पर खरगोश

जातक कथाओं के क्रम को आगे बढ़ाते हुए आज एक खरगोश की दानवीरता की कहानी की चर्चा करते हैं। 

चांद पर खरगोश (Rabbit on the moon)

             गंगा के किनारे एक वन में एक खरगोश रहता था। उसके तीन मित्र थे- बंदर, सियार और ऊदबिलाव। चारों ही मित्र दानवीर बनना चाहते थे। एक दिन बातचीत करते हुए उन्होंने उपोसथ के दिन परम दान का निर्णय लिया, क्योंकि उस दिन के दान का संपूर्ण फल प्राप्त होता है। ऐसी बुद्ध धर्म की अवधारणा है। (उपोसथ बौद्धों के धार्मिक महोत्सव का दिन होता है)

            जब उपोसथ का दिन आया तो सुबह सवेरे सारे ही मित्र भोजन की तलाश में अपने अपने घरों से बाहर निकले। घूमते हुए ऊदबिलाव की नजर जब गंगा तट पर रखी सात लोहित मछलियों पर पड़ी, तो वह उन्हें अपने घर ले आया। उसी समय सियार भी कहीं से दही की हांडी और मांस का टुकड़ा चुरा लाया। उछलता- कूदता  बंदर भी किसी बाग में से पके आम का गुच्छा तोड़ अपने घर ले आया।
चांद पर खरगोश (Rabbit on the moon)

 तीनों मित्रों ने उन्हीं वस्तुओं को दान में देने का संकल्प लिया। किंतु उनका चौथा मित्र खरगोश कोई साधारण प्राणी नहीं था। उसने सोचा कि यदि वह अपने भोजन अर्थात घास पात का दान करेगा, तो दान पाने वाले को उसका कोई लाभ नहीं होगा। अतः उसने उपोसथ  के अवसर पर याचक को परम संतुष्ट करने के उद्देश्य से स्वयं को ही दान में देने का निर्णय लिया। 
            उसके स्वयं के त्याग का निर्णय संपूर्ण ब्रह्मांड को दोलायमान करने लगा और सक्क  के आसन को भी तप्त करने लगा। वैदिक परंपरा में सक्क को शक्र या इंद्र करते हैं। सक्क ने जब इस अति अलौकिक घटना का कारण जाना तो सन्यासी के रूप में वह उन चारों मित्रों की दान परायणता की परीक्षा लेने स्वयं ही उनके घरों पर पहुंचे। 

चांद पर खरगोश (Rabbit on the moon)

           ऊदबिलाव, सियार और बंदर ने सक्क को अपने अपने घरों से कमशः मछलियां, मांस और दही एवं पके आम के गुच्छे दान में देना चाहा किंतु सक्क ने उनके द्वारा दी गई वस्तुओं को ग्रहण नहीं किया। फिर वह खरगोश के पास पहुंचे और दान की याचना की। 
           खरगोश ने दान के उपयुक्त अवसर को जान याचक को अपने संपूर्ण शरीर के मांस को अंगीठी में सेंक कर देने का प्रस्ताव रखा। जब अंगीठी जलाई गई तो उसने तीन बार अपने रोमों को झटका ताकि उसके रोम में बसे छोटे जीव आग में जल ना जाए। फिर वह बड़ी शालीनता के साथ जलती आग में खुद पर पड़ा। 

चांद पर खरगोश (Rabbit on the moon)

           सक्क उसकी दानवीरता पर स्तब्ध हो उठे। चिरकाल तक उन्होंने ऐसी दानवीरता ना देखी थी और ना ही सुनी थी। 
          हां, आश्चर्य; आग ने खरगोश को नहीं जलाया। क्योंकि वह आग जादुई थी। सक्क के द्वारा किए गए परीक्षण का एक मायाजाल था। सम्मोहित सक्क ने तब खरगोश का प्रशस्ति गान किया और चांद के ही एक पर्वत को अपने हाथों से मसलकर चांद पर खरगोश का निशान बना दिया और कहा, "जब तक इस चांद पर खरगोश का निशान रहेगा तब तक हे खरगोश; जगत तुम्हारी दानवीरता को याद रखेगा। 

Moral/ शिक्षा  मनुष्य को यथाशक्ति दान अवश्य करना चाहिए।

चांद पर खरगोश (Rabbit on the moon)

English Translate

Rabbit on the moon

The Jatakas discuss the story of the generosity of a rabbit today, furthering the order of the stories.

             A rabbit lived in a forest on the banks of the Ganges. He had three friends - Bandar, Jackal and Beaver. All four friends wanted to become danavir. While talking one day, they decided to make the ultimate donation on the day of Uposath, because the full fruit of that day's donation is received. Such is the concept of Buddhism. (Uposath is the day of the Buddhist religious festival).

            When the day of Upasoth came, all the friends came out of their homes in the morning in search of food. When the wandering beaver caught sight of seven low-lying fish on the banks of the Ganges, he brought them to his home. At the same time, Jackal also stole yogurt handi and a piece of meat from somewhere. The jumping monkey also broke a bunch of ripe mangoes from a garden and brought it to his house. The three friends pledged to donate the same items. But his fourth friend Rabbit was not an ordinary creature. He thought that if he donated his food, that is, weed, then the person receiving the donation would have no benefit. Therefore, on the occasion of Upasath, he decided to donate himself for the purpose of making the petitioner absolutely satisfied.

चांद पर खरगोश (Rabbit on the moon)

            The decision of his own renunciation began to oscillate the entire universe and healed the posture of Sakka. In the Vedic tradition, Sakka is called Shakra or Indra. When Sakka learned the reason of this very supernatural event, he himself arrived at their homes as a sannyasin to test the charity charity of the four friends.

    The beaver, the jackal and the monkey wanted to donate fish, meat and yogurt and ripe mango flakes from their homes to Sakka, but Sakka did not accept the items given by them. He then approached the rabbit and pleaded for alms.

           The rabbit proposed the opportunity of donation to bake his or her entire body of flesh in the fireplace. When the brazier was burnt, he jerked his follicles three times so that the small creatures in his follicles would not burn in the fire. Then he found himself in a burning fire with great decency.

           Sakka was shocked at his charity. For a long time, he had not seen or heard such charity.

चांद पर खरगोश (Rabbit on the moon)

          Yes, surprise; The fire did not burn the rabbit. Because that fire was magical. There was a hallucination of the trial conducted by Sakka. Hypnotized Sakka then praised the rabbit and mashed a mountain of the moon with his own hands and made a rabbit sign on the moon and said, "As long as there is a mark of rabbit on this moon, O rabbit, remember the world your charity Will keep

Moral / education

 One must donate as much power as possible.

Ayurveda The Synthesis of Yoga and Natural Remedies-28-Epilepsy

मिर्गी
मिर्गी (अपस्मार) / Epilepsy - कारण , लक्षण ...

      मिर्गी एक केंद्रीय तंत्रिका तंत्र संबंधी विकार है।  इसमें मस्तिष्क में तंत्रिका कोशिका की गतिविधि बाधित हो जाती है, जिसके कारण दौरे या कुछ समय तक असामान्य व्यवहार उत्तेजना और कभी-कभी बेहोशी हो जाती है।
     शारीरिक तथा मानसिक रूप से कमजोर व्यक्तियों को मिर्गी अधिकांश रूप से आती है। अत्यधिक शराब पीना, अधिक शारीरिक श्रम, सिर में चोट लगने से यह बीमारी हो सकती है।
मिर्गी के लक्षण (Symptoms of Epilepsi):-  अलग- अलग व्यक्तियों में इसके लक्षण भिन्न भिन्न होते।
#   इस रोग में अचानक दौरा पड़ता है और रोगी गिर पड़ता है।
#   हाथ और गर्दन अकड़ जाती है।
#   पलकें एक जगह रुक जाती हैं।
#   रोगी हाथ पैर पटकता है।
#   जीभ अकड़ जाने से बोली नहीं निकलती।
#   मुंह से पीला झाग निकलता है।
#   दांत किटकिटाना और शरीर में कपकपी होना सामान्य रूप से देखा जाता है।
#  चारों तरफ या तो काला अंधेरा दिखाई देता है या सब चीजें सफेद दिखाई देती हैं।
              इस तरह के दौरे 10-15 मिनट से लेकर 1-2 घंटे तक के भी हो सकते हैं। पुनः जब रोगी को होश आता है तब थका हुआ होता है और सो जाता है।
मिर्गी होने का कारण :-(Causes Of  Epilepsi):-मिर्गी से पीड़ित लोगों में से लगभग आधे मरीजों में किसी विशेष कारण की पहचान नहीं हो पाती है।अन्य व्यक्तियों में अलग अलग कारण से यह बीमारी होती है।
#  कुछ मरीजों में यह जेनेटिक होता है
#  सिर पर चोट लगने से
#  अत्यधिक शराब पीना से
#  अधिक शारीरिक श्रम से
मिर्गी के दौरे **********... - Dr Bhardwaj's Ayurvedic ...
मिर्गी से बचने के घरेलू उपचार (Home Remedies For Epilepsi):-
उसके घरेलू उपचार निम्नलिखित हैं।
#   देशी गाय का घी हल्का गरम कर दोनों नासिका में डालना बहुत लाभकारी है ।
#   दौरा पड़ने पर रोगी को दाईं करवट लिताएं ताकि उसके मुंह से सभी झाग आसानी से निकल जाए।
#   दौरा पड़ने के समय रोगी को कुछ भी ना खिलाएं, बल्कि दौरे के समय अमोनिया का या चूने की गंध सुंघानी चाहिए। इससे उसकी बेहोशी दूर हो सकती है।
#   ब्राह्मी बूटी का रस एक चम्मच प्रतिदिन सुबह-शाम पिलाएं।
#   20 ग्राम शंखपुष्पी का रस और 2 ग्राम कुटकी का चूर्ण शहद के साथ मिलाकर चाटें।
#  नीम की कोमल पत्तियों, अजवाइन और काला नमक इन सब को पानी में पीसकर पेस्ट बनाकर सेवन करें।
#  शरीफा के पत्तों के रस की कुछ बूंदें रोगी के नाक में डालने से जल्दी होश आता है।
#  नींबू के रस में हींग मिलाकर चटाने से काफी लाभ पहुंचता है।
#  प्याज का रस पानी में घोलकर पिलाने से भी आराम मिलता है।
#  तुलसी के 4-5 पत्ते कुचलकर उसमें कपूर मिलाकर रोगी को सुंघाएं।
#  मेहंदी के पत्तों का रस दूध में मिलाकर पिलाने से लाभ होता है।

रेत से चीनी अलग करना - Ret se Chini Alag Karna

रेत से चीनी अलग करना

रेत से चीनी अलग करना (Ret se Chini Alag Karna)

जब भी बुद्धिमत्ता, चतुराई और हाजिर-जवाबी की बात होती है, तो सबसे पहला नाम बीरबल का आता है। वहीं, अकबर-बीरबल की जुगलबंदी किसी से छुपी नहीं है। ऐसा कहा भी जाता है कि बीरबल को बादशाह अकबर के नवरत्नों में से एक अनमोल रत्न माना जाता था। अकबर-बीरबल से जुड़ी ऐसी कई कहानियां हैं, जो हर किसी को गुदगुदाती हैं। साथ ही एक खास सीख भी दे जाती हैं।अकबर-बीरबल की कहानियां हमेशा से सभी के लिए प्रेरणादायक रही हैं।

इस क्रम को बढ़ाते हैं, एक नयी कहानी से  

एक बार बादशाह अकबर, बीरबल और सभी मंत्रीगण दरबार में बैठे हुए थे। सभा की कार्यवाही चल रही थी। एक-एक करके राज्य के लोग अपनी समस्याएं लेकर दरबार में आ रहे थे। इसी बीच वहां एक व्यक्ति दरबार में पहुंचा। उसके हाथ में एक मर्तबान था। सभी उस मर्तबान की ओर देख रहे थे, तभी अकबर ने उस व्यक्ति से पूछा – ‘क्या है इस मर्तबान में?’

उसने कहा, ‘महाराज इसमें चीनी और रेत का मिश्रण है।’ अकबर ने फिर पूछा ‘किसलिए?’ अब दरबारी ने कहा – ‘गलती माफ हो महाराज, लेकिन मैंने बीरबल की बुद्धिमत्ता के कई किस्से सुने हैं। मैं उनकी परीक्षा लेना चाहता हूं। मैं यह चाहता हूं कि बीरबल इस रेत में से बिना पानी का इस्तेमाल किए, चीनी का एक-एक दाना अलग कर दें।’ अब सभी हैरानी से बीरबल की ओर देखने लगे।
         अब अकबर ने बीरबल की ओर देखा और कहा, ‘देख लो बीरबल, अब तुम कैसे इस व्यक्ति के सामने अपनी बुद्धिमानी का परिचय दोगे।’ बीरबल ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘महाराज हो जाएगा, यह तो मेरे बाएं हाथ का काम है।’ अब सभी लोग हैरान थे कि बीरबल ऐसा क्या करेंगे कि रेत से चीनी अलग हो जाएगी? तभी बीरबल उठे और उस मर्तबान को लेकर महल में मौजूद बगीचे की ओर बढ़ चले। उनके पीछे वह व्यक्ति भी था।

        अब बीरबल बगीचे में एक आम के पेड़ के नीचे पहुंचे। अब वह मर्तबान में मौजूद रेत और चीनी के मिश्रण को एक आम के पेड़ के चारों तरफ फैलाने लगे। तभी उस व्यक्ति ने पूछा, ‘अरे यह क्या कर रहे हो?’ इस पर बीरबल ने कहा, ‘ये आपको कल पता चलेगा।’ इसके बाद दोनों महल में वापस आ गए। अब सभी को कल सुबह का इंतजार था। अगली सुबह जब दरबार लगा, तो अकबर और सारे मंत्री एक साथ बगीचे में पहुंचे। साथ में बीरबल और वह व्यक्ति भी था। सभी आम के पेड़ के पास पहुंच गए।

सभी ने देखा कि अब वहां सिर्फ रेत पड़ी हुई है। दरअसल, रेत में मौजूद चीनी को चीटियों ने अपने बिल में इकट्ठा कर लिया था और बची-खुची चीनी को कुछ चीटियां उठाकर अपने बिल में ले जा रही थीं। इस पर उस व्यक्ति ने पूछा, ‘चीनी कहां गई?’ तो बीरबल ने कहा, ‘रेत से चीनी अलग हो गई है।’ सभी जोर-जोर से हंसने लगे। बीरबल की यह चतुराई देख अकबर ने उस व्यक्ति से कहा, ‘अगर अब तुम्हें चीनी चाहिए, तो तुम्हें चीटियों के बिल में घुसना पड़ेगा।’ इस पर सभी ने फिर से ठहाका लगाया और बीरबल की तारीफ करने लगे।

Moral/शिक्षा:- 
किसी को नीचा दिखाने का प्रयास आपके लिए हानिकारक हो सकता है।

English Translate

Ret se Chini Alag Karna

रेत से चीनी अलग करना (Ret se Chini Alag Karna)
             Whenever it comes to intelligence, cleverness and spot-retaliation, the first name comes from Birbal.  At the same time, Akbar-Birbal's jugalbandi is not hidden from anyone.  It is also said that Birbal was considered one of the precious jewels of Emperor Akbar.  There are many stories related to Akbar-Birbal, which tickles everyone.  Along with this, a special lesson is also given. Akbar-Birbal stories have always been inspiring for everyone.
 
        Once Emperor Akbar, Birbal and all the ministers were sitting in the court.  The proceedings of the assembly were going on.  One by one the people of the state were coming to the court with their problems.  Meanwhile, a person reached the court there.  He had a jar in his hand.  Everyone was looking at that jar, then Akbar asked the person - "What is in this jar?"

         He said, ‘Maharaj it is a mixture of sugar and sand’. Akbar then asked ‘For what?’ Now the courtier said - “err maaf ho maharaj, but I have heard many stories of Birbal’s intelligence.  I want to test them.  I want Birbal to separate every single grain of sugar from this sand without using water. ”Surprisingly everyone started looking at Birbal.

          Now Akbar looked at Birbal and said, "Look, Birbal, now how will you show your intelligence to this person." Birbal smilingly said, "Maharaj will be done, this is the work of my left hand."  Now everyone was wondering what Birbal would do if the sugar would be separated from the sand?  Then Birbal got up and took the jar and proceeded towards the garden in the palace.  He was also the person behind them.

         Now Birbal reached the garden under a mango tree.  Now he started spreading the mixture of sand and sugar in the jar around a mango tree.  Then the person asked, "Hey what are you doing?" To this, Birbal said, "You will know tomorrow." After this, both of them returned to the palace.  Now everyone was waiting for tomorrow morning.  The next morning when the court was held, Akbar and all the ministers reached the garden together.  Birbal and that person were also together.  All reached near the mango tree.

 Everyone noticed that now there is only sand lying there.  Actually, the ants had collected the sugar in the sand in their burrows and were taking some of the remaining sugar in their burrows.  At this the person asked, "Where did the sugar go?" Birbal said, "The sugar has separated from the sand." Everyone started laughing loudly.  Seeing this cleverness of Birbal, Akbar said to the person, "If you want sugar now, you will have to enter the bill of ants." Everyone laughed again and praised Birbal.
रेत से चीनी अलग करना (Ret se Chini Alag Karna)

 Moral / Education: -

 Trying to degrade someone can be harmful for you.

Ayurveda The Synthesis of Yoga and Natural Remedies-27- Low Blood Pressure

निम्न रक्तचाप
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             रक्तचाप का सामान्य ना  होकर उच्च या निम्न स्तर पर होना, स्वस्थ्य के लिए हानिकारक ही होता है, लेकिन निम्न रक्तचाप को अक्सर लोग गंभीरता से नहीं लेते, जिसके हानिकारक परिणाम हो सकते हैं। किसी भी सामान्य व्यक्ति का  ब्लड प्रेशर 120/80 के स्तर पर नार्मल माना जाता है। इसमें थोड़ा बहुत अंतर भी सामान्य माना जाता है। परन्तु यदि इसका स्तर 90/60 या इससे कम है तो इसे निम्न रकतचाप माना जाता है।

निम्न रक्तचाप होने का कारण :-(Causes Of  Low Blood Pressure :- 
         व्यक्ति के भोजन ना करने से अथवा अधिक आयु होने से निम्न रक्तचाप होता है। यानी कि बुढ़ापे में सामान्य रूप से यह बीमारी होती है। पाचन तंत्र ठीक ना होने से यह बीमारी होती है। मानसिक रूप से असफलता निराशा और हताशा से भी निम्न रक्तचाप हो सकता है।
#  खून की कमी 
#  कमजोरी होना व पोषण की कमी 
#  हृदय रोग होने पर भी ब्लड प्रेशर लो हो जाता है 
#  पानी की कमी 
#  महिलाओं को गर्भावस्था में 
#  अगर किसी और बीमारी के कारण लगातार दवाइयों का सेवन करते हैं, तो भी लो ब्लड प्रेशर की समस्या हो जाती है
उच्च रक्तचाप होने के लक्षण (Symptoms of High Blood Pressure :- 
      इसके कुछ प्रमुख लक्षण हैं :
#   चक्कर आना
#   थकान होना
#   नाड़ी धीरे चलना
#   मानसिक तनाव
#   हाथ पैर ठंडे पड़ना
#  त्वचा में पीलापन 
#  शरीर ठंडा पड़ना
         इसके लक्षण हैं। रक्त दबाव की स्थिति में सास बहुत तेज चलती है। थकावट बहुत जल्दी लगती है। धूप बहुत लगती है। पसीना बहुत आता है। मन में तनाव बहुत रहता है। नींद नहीं आती है। रक्त दबाव में धमनियों पर दबाव पड़ता है।
निम्न रक्तचाप से बचने के घरेलू उपचार (Home Remedies For control Low Blood Pressure :-
7 Low Blood Pressure Home Remedies - Healthy Hildegard
       इसके घरेलू उपचार निम्न हैं :-
#   एक गिलास पानी में 20 ग्राम गुड़ थोड़ा सा काला या सेंधा नमक और नींबू निचोड़ कर दिन में दो से तीन बार पीऐं।
#   अनार के रस में थोड़ा सा नमक डालकर, गन्ने के रस में थोड़ा नमक डालकर, संतरे के रस में थोड़ा सा नमक डालकर या अनानास के रस में नमक डालकर पिएं। 
#  गुड़, मिश्री, मक्खन और काली मिर्च मिलाकर लें।
#  एक गिलास गाय के दूध में एक चम्मच घी डालकर रोज रात में सोते समय पिएं।
#  पानी में नमक डालकर या गुड़ और नमक दोनों डालकर पिएं।
#  कच्चे लहसुन का प्रयोग अधिकांश करें। एक या दो कली रोज दांतो से कुचल कर खाएं, रक्त प्रवाह ठीक रहता है।
#   अर्जुन की छाल का काढ़ा पीने से आराम मिलता है। या अर्जुन की छाल के पाउडर को दूध में मिला कर गुड़ डालकर पिएं।
#  एक तोला मेथी दाना लेकर उसका काढ़ा बनाएं, इसमें शहद मिलाकर चाय की तरह पियें, रोग दूर हो जाएगा।
#  अनार का रस मिश्री डालकर, लाभ पहुंचाता है।
#   चुकंदर का रस नमक डालकर नियमित पीने से लाभ होता है।
#   प्रतिदिन प्याज का सेवन करते रहने से रक्तचाप की समस्या प्रायः नहीं होती है।
11 Instant Remedies for Low Blood Pressure