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पूर्व जन्म से जुड़े कुछ रोचक रहस्य

पूर्व जन्म से जुड़े कुछ रोचक रहस्य

मुझे नहीं पता कि ब्लॉग के पाठकों में कितने लोग पूर्व जन्म को मानते हैं, कितने नहीं। हो सकता है कुछ लोग इससे इत्तेफाक रखते होंगे और कुछ लोग ऐसे भी होंगे जो पूर्व जन्म को नहीं मानते होंगे। ज्योतिष शास्त्र की एक बड़ी अवधारणा यह है कि मनुष्य के वर्तमान जीवन में जो कुछ भी अच्छा या बुरा अनायास घट रहा है, उसे पिछले जन्म का प्रारब्ध माना जाता है। पोस्ट आगे लिख रही हूँ, अपनी सहमति या असहमति जो भी हो, कमेंट बॉक्स में जरूर साझा कीजियेगा। 

पूर्व जन्म से जुड़े कुछ रोचक रहस्य

आइये जानते है पूर्व जन्म से जुड़े कुछ रोचक रहस्य 

आपने अक्सर सुना होगा जब किसी के घर की मृत्यु होती है, उसके पश्चात कुछ ही अवधि में किसी संतान के जन्म लेने पर कहा जाता है जाने वाला इस संतान के रूप में बापस आ गया। 

पूर्वजन्मों के कर्मों से ही हमें इस जन्म में माता-पिता, भाई-बहन, पति-पत्नि, प्रेमी-प्रेमिका, मित्र-शत्रु, सगे-सम्बन्धी इत्यादि संसारके जितने भी रिश्ते नाते हैं,सब मिलते हैं। क्योंकि इन सबको हमें या तो कुछ देना होता है या इनसे कुछ लेना होता है। वैसे ही सन्तान के रुप में हमारा कोई पूर्वजन्म का 'सम्बन्धी' ही आकर जन्म लेता है, जिसे शास्त्रों में चार प्रकार से बताया गया है :-

ऋणानुबन्ध- 

पूर्व जन्म का कोई ऐसा जीव जिससे आपने ऋण लिया हो या उसका किसी भी प्रकार से धन नष्ट किया हो, वह आपके घर में सन्तान बनकर जन्म लेगा, आपका धन बीमारी में या व्यर्थ के कार्यों में तब तक नष्ट करेगा, जब तक उसका हिसाब पूरा ना हो जाये ।

शत्रुपुत्र-

पूर्व जन्म का कोई दुश्मन आपसे बदला लेने के लिये आपके घर में सन्तान बनकर आयेगा और बड़ा होने पर माता-पिता से मारपीट, झगड़ा या उन्हें सारी जिन्दगी किसी भी प्रकार से सताता ही रहेगा। हमेशा कड़वा बोलकर उनकी बेइज्जती करेगा व उन्हें दुःखी रखकर खुश होगा !

उदासीनपुत्र

इस प्रकार की सन्तान ना तो माता-पिता की सेवा करती है और ना ही कोई सुख देती है, बस उनको उनके हाल पर मरने के लिए छोड़ देती है विवाह होने पर यह माता-पिता से अलग हो जाते हैं। 

सेवकपुत्र 

पूर्व जन्म में यदि हमने किसी की खूब सेवा की है, तो वह अपनी की हुई सेवा का ऋण उतारने के लिए आपका पुत्र या पुत्री बनकर आता है और आपकी सेवा करता है, जो बोया है वही तो काटोगे। अपने माँ-बाप की सेवा की है तो ही आपकी औलाद बुढ़ापे में आपकी सेवा करेगी अन्यथा कोई पानी पिलाने वाला भी पास नहीं होगा। 

यह सब बातें केवल मनुष्य पर ही लागू होती हैं। इन चार प्रकार में कोई सा भी जीव आ सकता है। जैसे यदि कोई किसी गाय कि निःस्वार्थ भाव से सेवा की है, तो वह भी पुत्र या पुत्री बनकर आ सकती है। यदि गाय को स्वार्थ वश पालकर उसको दूध देना बन्द करने के पश्चात घर से निकाल दिया, तो वह ऋणानुबन्ध पुत्र या पुत्री बनकर जन्म लेगी। यदि किसी ने किसी निरपराध जीव को सताया है, तो वह आपके जीवन में शत्रु बनकर आयेगा और आपसे बदला लेगा। इसलिये जीवन में कभी किसी का बुरा ना करें। क्योंकि प्रकृति का नियम है कि आप जो भी करोगे, उसे वह आपको इस जन्म में या अगले जन्म में सौ गुना वापिस करके देगी। यदि आपने किसी को एक रुपया दिया है, तो समझो आपके खाते में सौ रुपये जमा हो गये हैं। यदि आपने किसी का एक रुपया छीना है, तो समझो आपकी जमा राशि से सौ रुपये निकल गये। 

ज़रा सोचिये, "हम कौन सा धन साथ लेकर आये थे और कितना साथ लेकर जायेंगे ?

मरने पर जो सोना-चाँदी, धन-दौलत बैंक में पड़ा रह गया, समझो वो व्यर्थ ही कमाया। औलाद अगर अच्छी और लायक है, तो उसके लिए कुछ भी छोड़कर जाने की जरुरत नहीं है, खुद ही खा-कमा लेगी और औलाद अगर बिगड़ी या नालायक है तो उसके लिए जितना मर्ज़ी धन छोड़कर जाओ,वह चंद दिनों में सब बरबाद करके ही चैन लेगी। मैं, मेरा, तेरा और सारा धन यहीं का यहीं धरा रह जायेगा, कुछभी साथ नहीं जायेगा। साथ यदि कुछ जायेगा भी तो सिर्फ नेकियाँ ही साथ जायेंगी। इसलिए जितना हो सके नेकी करें, सत्कर्म करें और सभी के के साथ मिलजुल कर प्रेम से रहें। 

18 comments:

  1. सनातन का यह स्पष्ट मत है कि 84 लाख भोग योनियों के पश्चात मनुष्य जन्म ,हमे अपने कर्मों को काटने के लिए मिलता है। हम जाने अनजाने में रोज ही एक दूसरे के साथ कर्म बंधन में बंधते हैं। मनुष्य जीवन का उद्देश्य ही है कि आप कर्म के बंधन से मुक्त होकर अपने मूल यानि परमात्मा में विलीन हो जाएं। कदाचित इसीलिए वो परम शक्ति मनुष्य के रूप में हमे कई जन्मों तक अवसर प्रदान करती है लेकिन अगर हमारी कर्म की गठरी भारी होती जाती है तो फिर से उस आत्मा को भोग योनि में डाल दिया जाता है।

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  2. Aaj aapne bahut acha vishay chuna hai. Mujhe nahi lagta ki koi post se asahmat hoga. Kyuki ye saty Sanatan hai.

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  3. आपका कथन सत्य है जैसा बोया जाता है उसी तरह काटना भी पड़ता है

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  4. Sahi kaha aapne maine is cheez ka anubhav kiya hai mam

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    1. Aap chahe to apna anubhav bhi yaha share kar sakte..

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  5. नेकी कर दरिया में डाल।कर भला सो हो भला।

    यही हमें जीवन में अपनाना चाहिए।

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  6. पुनर्जन्म एक सत्य है ये सिर्फ सनातन में विदित है

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  7. पुराण की बात सत्य है

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  8. Therefore, do as many good deeds as possible, do good deeds and live together in love with everyone. What you sow, you reap.

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