सब कुछ वैसे ही चलता है..
सब कुछ वैसे ही चलता है
जैसे चलता था
जब तुम थे
रात भी वैसे ही सर मूँदे आती है
दिन वैसे ही आँखें मलता जागता है
तारे सारी रात जमाईयाँ लेते हैं
सब कुछ वैसे ही चलता है,
जैसे चलता था जब तुम थे
सूरज सुबह वैसे ही आता है
शाम ढले चला जाता है
तारे वैसे ही टिमटिमाते हैं
रात होते चाँद भी वैसे ही आ जाता
मेरी खिड़की पर
जैसे आता था जब तुम थे
काश तुम्हारे जाने पर,
कुछ फ़र्क़ तो पड़ता जीने में
प्यास न लगती पानी की या,
इच्छा न होती खाने की
नाखून बढ़ना बंद हो जाते
बाल हवा में न उड़ते या
धुआँ निकलता साँसों से
सब कुछ वैसे ही चलता है
जैसे चलता था जब तुम थे
बस इतना फ़र्क पड़ा है
तुम्हारे जाने पर,
जब रातों में नींद नहीं आती
तुम्हारे "सो जाओ" की जगह
सोने के लिए
सिर्फ इक नींद की गोली होती
बाकी सब कुछ वैसे ही चलता है
जैसे चलता था जब तुम थे ...
अब तक रुका हुआ हूँ वहीं रात रोक के..🌙"
आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में" सोमवार 31 मार्च 2025 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद! !
ReplyDelete"पांच लिंकों के आनन्द में" इस रचना को स्थान देने के लिए हार्दिक आभार।
Deleteकिसी के खो जाने के बाद ही ,उसकी असल कीमत मालूम पड़ती है ।
ReplyDeleteक्या करे कुछ लोग समजते है कुछ अपने अहम मे है
ReplyDeleteKya bat h
ReplyDeleteVery good
ReplyDelete🙏🙏💐💐
ReplyDelete🕉सुप्रभात वंदन 🕉️☕️☕️
🚩🚩ॐ नमः शिवाय 🚩🚩
🙏जय शिव शम्भू 🚩🚩🚩
🙏हर हर महादेव 🚩🚩🚩
🙏महादेव का आशीर्वाद आप और आपके परिवार पर हमेशा बना रहे 🙏
👍👍👍निशब्द 🙏🙏
🙏🙏स्वस्थ रहिये मस्त रहिये अपना ख्याल रखिये 🙏🙏