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10 जातक कथाएं हिंदी कहानियां

10 जातक कथाएं हिंदी कहानियां

10 जातक कथाएं हिंदी कहानियां

  जातक कहानियों के विषय में सुना तो सभी ने होगा। इन कथाओं में भगवान बुद्ध के पूर्व जन्मों की कथाएं हैं और हर कथाओं के माध्यम से कोई ना कोई संदेश दिया गया है। जातक कथाएं बौद्ध ग्रंथ त्रिपिटक का भाग हैं। जातक कथाओं को विश्व की प्राचीनतम लिखित कहानियों में गिना जाता है। जिसमें लगभग 550 कहानियों का संग्रह है। इन कथाओं की निश्चित संख्या का बोध नहीं है। इन कथाओं में मनोरंजन के माध्यम से नीति और धर्म को समझाने का प्रयास किया गया है। यह सभी कथाएं गौतम बुद्ध के जीवन पर आधारित है। इसलिए सभी कथाएं प्राय: उपदेशात्मक हैं, परंतु उनका साहित्यिक रूप भी निखरा हुआ है। उपदेशात्मक होने के साथ-साथ ये कथाएं कलात्मक भी हैं। इन कथाओं का रूप लोक साहित्य का भी है, जिसमें मनुष्य के साथ-साथ पशु पक्षियों की कथाएं भी हैं। इन्हें सात भागों में वर्गीकृत किया गया है।

1. व्यवहारिक नीति संबंधी कथाएं
2. पशु पक्षियों की कथाएं
3. हास्य और विनोद से पूर्ण कथाएं
4. रोमांचकारी लंबी कथाएं या उपन्यास
5. नैतिक वर्णन
6. कथन मात्र
7. धार्मिक कथाएं

यहाँ 10 जातक कथाएं प्रस्तुत की गयी हैं :-

Ayurveda The Synthesis of Yoga and Natural Remedies - 47 - Ear Disease

 कान के रोग - फोड़े फुंसी, दर्द तथा कान बहना

कान के रोग आम तौर पर बच्चों में ज्यादा देखने को मिलते हैं। कान में कई प्रकार के रोग हो सकते हैं। जैसे - कान का बहना, फोड़े -फुंसी, करण शूल, बहरापन आदि। कान बहने से तात्पर्य है कि कान से पस निकलता है। कुछ लोग को जन्म से कान के रोग होते जबकि कुछ को बाद में इस समस्या का सामना करना पड़ता है। 
कान की बीमारियाँ विशेष रूप से चिंताजनक होती हैं क्यूँकि वे दर्द, असुविधा या गंभीर श्रवण हानि का कारण बन सकती हैं। कान की बीमारियों के लक्षण को पहचान कर उचित तथा तत्काल उपचार से आने वाली जटिलता को रोका जा सकता है। 
कर्ण रोग का कारण (Causes of Ear Disease):- 

#   कान की सफाई नहीं करने से
#   कान में फोड़ा होने से किसी चोट या एक्सीडेंट की वजह से 
#   कान का पर्दा फटने के कारण 
#   गले में टॉन्सिल होने या सर्दी जुकाम होने के कारण
#   वायरल संक्रमण से 
#   कभी -कभी सिर में चोट लगने के कारण भी कान के रोग हो जाते हैं 
#   कभी - कभी एलर्जी और आनुवांशिक कारण भी हो सकते हैं 


कर्ण रोग के लक्षण (Symptoms of Ear Disease):- 

#   पीले रंग का पीप निकलता है। कभी-कभी पीप बदबूदार भी होता है 
#   सुनाई कम देने लगता है 
#   कान में दर्द होने लगता है
#   कान में आवाज गूंजना 
#   कान में खुजली होना 

कर्ण रोग के घरेलू उपचार (Home Remedies For Ear Disease):-
कान में फोड़े फुंसी और दर्द होने पर निम्नलिखित उपचार कर सकते हैं

#   सरसों का तेल कान में डालने से फोड़े फुंसी ठीक होते हैं
#   तिल्ली के तेल में लहसुन की कलियों को पकाएं और वह तेल ठंडा होने पर कान में डालें
#   दर्द होने पर प्याज का रस हल्का गर्म करके कानों में डालने से आराम मिलता है
#   तुलसी के पत्तों के रस में थोड़ा सा कपूर मिलाकर गर्म करें और कान में डालें
#   कान में गोमूत्र डालने से फोड़े फुंसी ठीक होते हैं
#   कान में स्वमूत्र डालने से कान का दर्द रुक जाता है 
#   धतूरे का रस कान में डालने से कान का दर्द रुक जाता है 
#   बरगद का दूध कान में डालने से कान का दर्द रुक जाता है 
#   एलोवेरा का रस हल्का गर्म करके दो बूंद कान में डालने से कान बहना ठीक होता है 
              कान के रोगों से बचाव के लिए कुछ सावधानी की जरुरत है। अपने कानों की सफाई के लिए कॉटन बड्स का प्रयोग ना करें, कानों में कोई नुकीली वस्तु खुजली या सफाई के लिए ना डालें। इस तरह की वस्तुओं के प्रयोग से कान को नुक्सान हो सकता है। अगर कोई बहुत ज्यादा शोर वाली जगह पर काम करता हो तो कान को सुरक्षित रखने वाले उपकरण का इस्तेमाल करे। थोड़ी सावधानी रख कर बड़ी जटिलता से बचा जा सकता है।   

Sunday

इतवार 
💦💦जिंदगी में जो करना चाहते हैं वो जरूर कीजिये,
 ये मत सोचिये के लोग क्या कहेंगे। 
क्यूँकि लोग तो तब भी कुछ कहते हैं,
जब हम कुछ नहीं करते।  💦💦

मैं तुम सब की ओर निहार रहा हूं ,
स्थान मुझे भी दो तुम अपने बीच ;
सबसे नीचे धूल भरी धारणी पर। 

जहाँ  ना आसन का देना है मूल्य ,
जहां खींचकर रेखा कुछ है लेना ;
जहां मान- अपमान का ना है भेद ,
स्थान वहां दो मुझको अपने बीच। 

जहां आवरण बाहर का ना रहे कुछ ,
जहां रहे परिचय अपना उन्मुक्त ;
अपना कहने को ना जहां कुछ भी हो। 

जहाँ ना ढके रहे अपने को सत्य ,
वही खड़ा रह परम धाम से 'उनके'
भर लूंगा मैं अपना सारा दैन्य  ,
स्थान वहां दो मुझको अपने बीच। 

💞💞 एक बचपन का जमाना था,
 जिसमें खुशियों का खजाना था। 
चाहत चांद को पाने की थी,
 पर दिल तितली का दीवाना था। 💞💞

The Story of the Golden Swan ~ सुनहरे पंखों वाले हंस की कहानी

 सुनहरे पंखों वाले हंस की कहानी

Jatak kahaniyan - The Story of the Golden Swan ~ सुनहरे पंखों वाले हंस की कहानी

वाराणसी में कभी एक कर्तव्यनिष्ठ व शीलवान गृहस्थ रहा करता था। तीन बेटियों और एक पत्नी के साथ उसका एक छोटा सा संसार था। किंतु अल्पायु में ही उसका निधन हो गया।

मरणोपरांत उस गृहस्थ का पुनर्जन्म स्वर्ण हंस के रूप में हुआ। पूर्व जन्म के उपादान और संस्कार उसमें इतने प्रबल थे कि वह अपने मनुष्य योनि के घटनाक्रम और उनकी भाषा को विस्मृत नहीं कर पाया। पुनर्जन्म के परिवार का मोह और उनके प्रति उसका लगव उसके वर्तमान को भी प्रभावित कर रहा था। एक दिन वह अपने मोह के आवेश में आकर वाराणसी को उड़ चला। जहां उसकी पूर्व जन्म की पत्नी और तीन बेटियां रहा करती थीं।

Jatak kahaniyan - 10 - The Story of the Golden Swan ~ सुनहरे पंखों वाले हंस की कहानी 

घर के मुंडेर पर पहुंचकर जब उसने अपनी पत्नी और बेटियों को देखा तो उसका मन खिन्न हो उठा क्योंकि उसके मरणोपरांत उसके परिवार की आर्थिक दशा दयनीय हो चुकी थी। उसकी पत्नी और बेटियां अब सुंदर वस्त्रों की जगह चिथड़ों में दिख रही थीं। वैभव के सारे सामान भी वहां से तिरोहित हो चुके थे। फिर भी पूरे उल्लास के साथ उसने अपनी पत्नी और बेटियों का आलिंगन कर उन्हें अपना परिचय दिया और वापस लौटने से पूर्व उन्हें अपना एक सोने का पंख भी देता गया। जिसे बेचकर उसके परिवार वाले अपने दारिद्र्य को कम कर सकें।

 इस घटना के पश्चात हंस समय-समय पर उनसे मिलने वाराणसी आता रहा और हर बार उन्हें सोने का एक पंख देकर जाता था। बेटियां तो हंस की दान शीलता से संतुष्ट थीं मगर उसकी पत्नी बड़ी ही लोभी  प्रवृत्ति की थी। उसने सोचा क्यों ना वह उस हंस के सारे पंख निकाल कर एक ही पल में धनी बन जाए। बेटियों को भी उसने अपने मन की बात कही। मगर उसकी बेटियां ने उसका कड़ा विरोध किया। 

अगली बार जब वह हंस वहां आया तो संयोगवश उसकी बेटियां वहां नहीं थीं। उसकी पत्नी ने तब उसे बड़े प्यार से पुचकारते हुए अपने करीब बुलाया। नल- प्रपंच के खेल से अनभिज्ञ वह हंस खुशी- खुशी अपनी पत्नी के पास दौड़ता चला गया। मगर यह क्या उसकी पत्नी ने बड़ी बेदर्दी से उसकी गर्दन पकड़ उसके सारे पंख एक ही झटके में नोंच डालें और खून से लथपथ उसके शरीर को लकड़ी के एक टीले पर फेंक दिया। फिर जब वह उन सोने के पंखों को समेटना चाह रही थी तो उसके हाथों सिर्फ साधारण पंख ही लग सके। क्योंकि उस हंस के पंख उसकी इच्छा के प्रतिकूल नोंचे जाने पर साधारण हंस के समान हो जाते थे। 
Jatak kahaniyan - 10 - The Story of the Golden Swan ~ सुनहरे पंखों वाले हंस की कहानी
बेटियां जब लौटकर घर आयीं तो उन्होंने अपने पूर्व जन्म के पिता को खून से सना देखा; उसके सोने के पंख भी लुप्त थे। उन्होंने सारी बात समझ ली और तत्काल ही हंस की भरपूर सेवा सुश्रुषा कर कुछ ही दिनों में उसे स्वस्थ कर दिया। 

स्वभावतः उसके पंख फिर से आने लगे। मगर अब वह सोने के नहीं थे। जब हंस के पंख इतने निकल गए कि वह उड़ने के लिए समर्थ हो गया, तब वह उस घर से उड़ गया और कभी भी वाराणसी में दोबारा दिखाई नहीं पड़ा।

Moral(शिक्षा):- लालच का फल सदैव बुरा होता है।

English Translate

Story of golden winged goose


Varanasi once used to be a dutiful and a modest householder. He had a small world with three daughters and a wife. But he died at an early age.

Posthumously, the householder was reborn as the Golden Swan. Pre-births and rituals were so strong in him that he could not forget the events of his human vagina and his language. The family's love for reincarnation and his attachment to them was affecting his present as well. One day he came under the guise of his fascination and flew to Varanasi. Where his former-born wife and three daughters lived.

Jatak kahaniyan - 10 - The Story of the Golden Swan ~ सुनहरे पंखों वाले हंस की कहानी

When he saw his wife and daughters upon reaching the Mundar of the house, he was upset because after his death the financial condition of his family had become miserable. His wife and daughters were now seen in tatters instead of beautiful clothes. All the goods of Vaibhav had also disappeared from there. Nevertheless, he embraced his wife and daughters with full enthusiasm and introduced himself to them and even gave them one of his gold wings before returning. By selling it, his family can reduce his dignity.

 After this incident, Hans used to come to Varanasi from time to time to visit him every time with a feather of gold. The daughters were satisfied with Swan's charity, but his wife was very greedy. He thought why not remove all the feathers of that goose and become rich in an instant. He also spoke his mind to the daughters. But his daughters strongly opposed him.

The next time the swan came there, incidentally his daughters were not there. His wife then fondly called him closer to him. Unknown to the game of Nal-Prapanch, he went on running happily to his wife. But what if his wife mercilessly held her neck, peeled all her wings in one stroke and threw her blood-soaked body on a wooden mound. Then when she wanted to cover those gold wings, only simple wings could be found on her hands. Because the wings of that goose became like an ordinary goose when it was not drawn against his will.
Jatak kahaniyan - 10 - The story of the Golden Swan ~ The story of swan with golden wings
When the daughters returned home, they saw their former-born father stained with blood; His gold wings were also lost. He understood the whole thing and immediately started swan with full service and made him healthy in a few days.

Naturally his wings started coming again. But now he was not of gold. When the wings of the swan came out so much that he was able to fly, he flew from that house and never appeared again in Varanasi.

Ayurveda The Synthesis of Yoga and Natural Remedies- 46 - Cataract

 मोतियाबिंद




यह अधिकतर वृद्धावस्था में पाया जाने वाला रोग है। लेकिन आजकल किसी भी उम्र में हो सकता है। मोतियाबिंद के रोग में आंख के अंदर का लेंस सफेद हो जाता है, जिस कारण वस्तुएं साफ दिखाई नहीं देती या फिर बिल्कुल दिखना बंद हो जाता है। इसे सफ़ेद मोतिया भी कहते हैं। 


मोतियाबिंद का कारण (Causes of Cataract):-

#  उचित पौष्टिक आहार की कमी
#  वृद्धावस्था में नेत्र लेंस के ऊपर पाई जाने वाली झिल्ली का स्वरूप बदलने के कारण
#  मधुमेह रोग हो जाने के कारण
#  उच्च रक्तचाप के कारण 

मोतियाबिंद के लक्षण (Symptoms of Cataract):-

#  आंखों की रोशनी धीरे-धीरे कम हो जाती है। शुरुआत में दूर की वस्तुएं साफ दिखाई देती हैं और नजदीक की वस्तुएं धुंधली दिखती हैं। 
#  एक ही वस्तु के कई बिंब बनने लगते हैं
#  आंखों के सामने काले रंग का धब्बा सा दिखाई देने लगता है

मोतियाबिंद के घरेलू उपचार (Home Remedies For Cataract):-

#  सुबह-शाम एक गिलास गाजर का रस पीने से मोतियाबिंद में लाभ होता है
#  देसी गाय का मूत्र आंखों में डालने से काफी लाभ होता है
#  रात में पानी में भिगोए हुई लहसुन की कलियों को प्रातः काल उठकर खाएं और पानी पी लें, मोतियाबिंद में लाभ होगा
#  शुद्ध शहद आंखों में लगाने से भी मोतियाबिंद में लाभ होता है
#  सूखा धनिया और सौंफ और देसी शक्कर बराबर मात्रा में मिलाकर पाउडर बनाएं। सुबह-शाम जल से सेवन करें। 
#  अंकुरित गेहूं और अंकुरित चना खाने से मोतियाबिंद में लाभ होता है
#  सफेद प्याज का रस और शहद 1 अनुपात 2 की मात्रा में गुलाब जल में मिलाएं और आंखों में डालने से मोतियाबिंद दूर होता है

जादुई गधा - Jadui Gadha

जादुई गधा 

जादुई गधा (Jadui Gadha)

एक दिन शहंशाह अकबर ने अपनी रानी को बेष कीमती हार तोहफे में दिया।  रानी उस बेष कीमती हार को देखकर बहुत खुश हुई। 

अकबर -  ये लीजिए आपके लिए हमारी तरफ से यह तोहफा। 

रानी - यह तो बहुत ही खूबसूरत है। ऐसा हार मेरे पास एक भी नहीं है। मुझे यह बहुत पसंद आया। बहुत खूबसूरत है। 

अकबर - हां रानी हो भी क्यों ना खूबसूरत, मैंने इसे खास कारीगरों से बनवाया है। खास आपके लिए। 

रानी - यह मुझे बहुत पसंद है। इसे मैं हमेशा अपने पास रखूंगी। इसे अपने से अलग नहीं होने दूंगी। मैं बहुत खुशनसीब हूं जहांपनाह। 

अकबर - हमें बहुत खुशी हुई आपको यह हार पसंद आया। आप इसे जब भी पहनेंगी, इसमें हमें आपका प्यार नजर आएगा। 

रानी - शुक्रिया जहांपनाह!

 फिर जब सुबह रानी सो कर उठती हैं और  नहा कर तैयार होती हैं तो उन्हें अपना हार नहीं मिलता है। वह बहुत दुखी हो जाती हैं। 

रानी - कहां गया हार अभी तो यही रखा था। रात जब मैं सोई थी तभी मैंने उसे यही रखा था। कहां चला गया मेरा हार।  कहीं खो गया,  दासियों  दासियों कोई है ? 

 रानी  के बुलाने पर वहां एक दासी आती है। दासी क्या हुआ महारानी जी? रानी हमारा हार कहीं खो गया है। हमें उसे ढूंढने में मदद कीजिए। रात सोने से पहले हमने उसे यहीं रखा था। लेकिन अब वह यहां नहीं है। 

दासी - महारानी जी! आप कोई दूसरा हार पहन लीजिए आपके पास तो कई हार है। 

रानी - नहीं -नहीं बिल्कुल नहीं, वह हार बहुत खास हार है। हमें वह जहाँपनाह ने बहुत प्यार से दिया था। हमें वही हार चाहिए। कोई और दूसरा नहीं चाहिए। यह बात कह कर रानी मायूस होकर बैठ जाती हैं। तभी वहां थोड़ी ही देर में अकबर आते हैं।

 अकबर - क्या हुआ आपको? आप इतनी उदास क्यों बैठी है?

 रानी - जहांपनाह! आपने जो हार हमें तोहफे में दिया था, वह कहीं खो गया है। 

अकबर - खो गया है, क्या मतलब, आप कहना क्या चाहती हैं? कहीं वह आपने गिरा तो नहीं दिया। 

रानी - जहांपनाह मैंने रात सोने से पहले उसे यही उतार कर रखा था। फिर ना जाने वह कहां चला गया। जहांपनाह हमें माफ कर दीजिए। हम आपके तोहफे की हिफाजत नहीं कर पाए और वह रोने लगी। 

अकबर - महारानी! आप रोए मत। वह बस मामूली सा तोहफा था। हम आपके लिए उससे भी अच्छा हार बनवा देंगे, हम आपसे वादा करते हैं और हम आपको वह हर भी ढूंढ कर देंगे। बस आप परेशान ना हों। आज आप हमारे कमरे में ही ठहर जाइए। 

सिपाही - तुम दूसरे सिपाहियों और दोसियों को लेकर जाओ और रानी के पुरे कमरे के हर कोने में जाकर ढूंढो हार को। 

सिपाही - जहांपनाह! महल के दूसरे हिस्सों में भी चोरियां हो चुकी हैं।  हम सभी ने उस चोर को पकड़ने की बहुत कोशिश की, लेकिन हम नाकामयाब हुए। आज तक उस चोर को हम नहीं पकड़ पाए। 

अकबर - क्या महल के दूसरे हिस्सों में भी चोरी हो चुकी है। इसकी खबर हमें क्यों नहीं दी गई ? जाओ पहले हार महारानी के कमरे में ढूंढो। अगर वहां नहीं मिलता है तो हम कुछ और सोचेंगे। 

(तभी सिपाही थोड़ी देर बाद आता है)

सिपाही - जहांपनाह हम सब ने हार सब जगह ढूंढ लिया लेकिन हार कहीं नहीं मिला। अकबर अब मामला गंभीर है। अब सिर्फ बीरबल ही इस मामले को सुलझा सकते हैं। सिपाहियों बीरबल को अभी हमारे पास बुलाया जाए। हमें वह आज ही चाहिए। 

बीरबल थोड़ी देर में वहां हाजिर होते हैं। 

बीरबल - जहांपनाह! आपने इतनी रात हमें याद क्यों किया?

अकबर - बीरबल! दरअसल बात यह है, हमने अपनी रानी को तोहफे में एक बेष कीमती हार दिया था। लेकिन रानी जब सुबह उठी तो हार वहां नहीं था। रानी बहुत उदास हैं। हम उन्हें उदास नहीं देख सकते। आपको हार आज रात ही ढूंढना होगा। 

बीरबल - अच्छा तो यह मामला है। जहां पर एक बात तो पक्की है, चोर कहीं कोई सिपाहियों और दसियों में से ही है। इस बात का पता लगाने के लिए मुझे अपने एक दोस्त को बुलाकर लाना पड़ेगा। 

जादुई गधा (Jadui Gadha)

अकबर - दोस्त, कौन सा दोस्त? और आप क्यों जाना चाहते हैं? हमें बताइए हम आपके दोस्त को बुलवा देते हैं। 

बीरबल - नहीं जहाँपनाह उसको बुलाने सिर्फ मैं ही जा सकता हूं। मेरा दोस्त कोई ऐसा वैसा दोस्त नहीं है। उस पर जादुई शक्तियां हैं। जो हमें चोर को पकड़ने में मदद करेंगे। 

अकबर - जाइए बीरबल अब तो हम भी आपके उस दोस्त से मिलने के लिए बेसब्री से इंतजार करेंगे। 

बीरबल - जहांपनाह आप रानी के कमरे में पहरा देने वाले सिपाही और दसियों को बुलाइए। मैं अभी अपने दोस्त को लेकर आता हूं। 

"तभी थोड़ी देर में बीरबल एक गधे को लेकर महल में आते हैं।" 

अकबर - बीरबल ये क्या मजाक है? हमने तो तुम्हें तुम्हारा दोस्त लाने को कहा था। यह तो गधा है। 

बीरबल - जी जहांपनाह ! यही मेरा दोस्त है, जिसे जादुई शक्ति आती है। यही हमारी चोर पकड़ने में मदद करेगा। 

अकबर - ये कैसे तुम्हारी मदद करेगा कि चोर कौन है? 

"बीरबल एक तंबू में गधे को खड़ा कर देते हैं।"

बीरबल - इसके अंदर एक-एक करके सिपाहियों को भेजिए और इन सब को गधे की पूंछ पकड़कर यह बोलना है कि मैंने चोरी नहीं की। जब यह सारे लोग गधे की पूछ पकड़ लेंगे, तभी मेरा दोस्त बताएगा चोर कौन है। 

अकबर - ठीक है, सिपाही और दसियों आप सभी लोग एक - एक कर गधे की  पूंछ पकड़िए। 

"फिर सभी सिपाहि और दासी गधे की पूछ पकड़ते हैं। "

बीरबल - अब मैं अपने दोस्त से पूछ कर आता हूं कि चोर कौन है?

" कुछ देर बाद, जहांपनाह! हमें इन सभी के हाथ सूंघने हैं और सभी का हाथ सूंघने के बाद, यह सिपाही चोर है। 

सिपाही - नहीं, जहांपनाह  मैंने कोई चोरी नहीं की है। मैंने तो आपकी इतने वर्षों से सेवा की है। इस गधे की गवाही कुछ साबित नहीं करती है। 

अकबर - बीरबल तुम कैसे कह सकते हो कि यही चोर है? तुम गधे की बात कैसे समझ सकते हो?

बीरबल - जहांपनाह! मैंने उस गधे की पूछ पर एक खास तरह का इत्र लगा दिया था। इसलिए मैंने इन सभी को गधे की पूंछ पकड़ने को कहा और जहांपनाह मैं यह भी जानता था कि चोर पकड़े जाने के डर से गधे की पूछ नहीं पकड़ेगा। उस इत्र की खुशबू सभी के हाथों में से आ रही है, लेकिन जब मैंने इसके हाथ सूंघे तो इसके हाथों में वह खुशबू नहीं आ रही है। इसलिए यही चोर है। 

अकबर - नमक हराम! हम तुम्हें इसकी सजा देंगे। 

सिपाही - नहीं जहाँपनाह मुझे माफ कर दीजिए। मैं लालची हो गया था। मुझे माफ कर दीजिए। मैं चोरी की हुई सारी चीजें लौटा दूंगा। बस मुझे माफ कर दीजिए। 

अकबर - नहीं तुम्हें माफ नहीं किया जा सकता। जिस थाली में खाते हो उसी में छेद करते हो। सिपाही इसे कालकोठरी में डाल दो। बीरबल एक बार फिर आपने अपनी चतुराई से उस चोर को पकड़वा दिया, शुक्रिया। 

बीरबल - शुक्रिया जहांपनाह। 

जादुई गधा (Jadui Gadha)

English Translate

Jadui Gadha

 One day Emperor Akbar gave his queen a precious precious necklace.  The queen was very happy to see the precious precious necklace.

 Akbar - Here is our gift for you.

 Rani - It is very beautiful.  I do not have such a necklace.  I liked it very much.  Is very beautiful

 Akbar - Yes, even if you are a queen, I have made it with special craftsmen.  Special for you

 Rani - I like it very much.  I will always keep it with me.  Will not let it separate from itself.  I am very happy where my daughter is.

 Akbar - We are very happy that you liked this necklace.  Whenever you wear it, we will see your love in it.

 Rani - Thank you Jahanpahan!

  Then when Rani wakes up in the morning and is ready to take a bath, she does not get her necklace.  She becomes very sad.

 Rani - Where did the necklace still remain.  I kept it the same night when I slept.  Where has my necklace gone  Somewhere lost, maidens maidens anyone?

On the call of the queen, a maid comes there.  What happened, maid, Maharani?  The queen has lost our necklace somewhere.  Help us find it.  We had kept it here before nightfall.  But now he is not here.

 Maid - Her Majesty!  If you wear another necklace, you have many necklaces.

 Rani - No - not at all, that necklace is a very special necklace.  Jahanpanah gave us very lovingly.  We want the same defeat.  Nobody wants another.  Saying this, the queen sits down in despair.  Then Akbar comes there in a short time.

  Akbar - What happened to you?  Why are you sitting so sad?

  Queen - Jahanpanah!  The necklace you gave us as a gift is lost somewhere.

 Akbar - Lost, what do you mean?  Did you drop it somewhere?

 Rani - Jahanpanah I kept it off before going to sleep at night.  Then do not know where he went.  Please forgive us.  We could not protect your gift and she started crying.

 Akbar - Her Majesty!  You don't cry  He was just a modest gift.  We will make a better necklace for you than that, we promise you and we will find you for that too.  Just don't worry.  Today you stay in our room.

 Soldier - Take the other soldiers and friends and go to every corner of the queen's room and find the necklace.

 Soldier - Jahanpanah!  There have been burglaries in other parts of the palace as well.  We all tried hard to catch the thief, but we failed.  Till today we could not catch that thief.

 Akbar - Has the other parts of the palace also been stolen.  Why was it not communicated to us?  Go find the necklace first in the Queen's room.  If not found there we will think of something else.

 (Then the soldier arrives after a while)

 Soldier - Wherever we all find defeat everywhere but defeat is not found anywhere.  Akbar is now serious.  Now only Birbal can solve this matter.  Soldiers Birbal should be called to us now.  We need it today.

 Birbal is there for a while.

जादुई गधा (Jadui Gadha)

 Birbal - Jahanpahan!  Why did you miss us so many nights?

 Akbar - Birbal!  Actually the thing is, we gave our queen a precious precious necklace as a gift.  But when the queen woke up in the morning, the defeat was not there.  Rani is very depressed.  We cannot see them sad.  You have to find the necklace tonight.

 Birbal - Okay, this is the case.  Where one thing is confirmed, the thief is somewhere among the soldiers and tens.  I have to call a friend to find out about this.

 Akbar - friend, which friend?  And why do you want to leave?  Tell us we invite your friend.

 Birbal - No, only I can go where the wall is called.  My friend is not such a friend.  He has magical powers.  Who will help us catch the thief.

 Akbar - Go Birbal, now we too will be waiting impatiently to meet your friend.

 Birbal - Jahanpanah You call the guards and tens of guards in the queen's room.  I bring my friend now.

 "Then in a while Birbal comes to the palace carrying a donkey."

 Akbar - Birbal What is this joke?  We hold you to bring your friend.  This is a donkey.

 Birbal - Yes!  This is my friend who has magic power.  This will help us catch the thief.

Akbar - how will it help you who is the thief?

 "Birbal makes a donkey stand in a tent."

 Birbal - Send soldiers inside it one by one and all of them have to hold the tail of the donkey and say that I did not steal.  When all these people will catch the question of donkey, then my friend will tell who the thief is.

 Akbar - Okay, the soldiers and tens of you all, one by one, hold the tail of the donkey.

 "Then all the soldiers and maids get hold of the donkey."

 Birbal - Now I ask my friend who is the thief?

 "After some time, Jahanpanah! We have to smell the hands of all these and after sniffing the hands of all these soldiers, this soldier is a thief."

 Soldier - No, where have I not stolen the wall.  I have served you for so many years.  The testimony of this donkey proves nothing.

 Akbar - Birbal, how can you say that this is a thief?  How can you understand the matter of donkey?

 Birbal - Jahanpahan!  I had put a special perfume on that donkey's request.  So I told all these to hold the tail of the donkey and where I also knew that the thief would not catch the donkey for fear of being caught.  The fragrance of that perfume is coming from the hands of all, but when I smell its hands, it does not smell in its hands.  Therefore, this is a thief.

 Akbar - Namak Haram!  We will punish you for this.

 Soldier - No, forgive me.  I was greedy.  please forgive me.  I will return everything stolen.  Just forgive me

 Akbar - No you cannot be forgiven.  You make holes in the plate on which you eat.  Soldiers put it in the dungeon.  Birbal once again, you cleverly got the thief caught, thank you.

 Birbal - Thanks Jahanpanah.

जादुई गधा (Jadui Gadha)

दुनिआँ का सबसे अजीब जीव - टार्डीग्रेड (Tardigrade)

टार्डीग्रेड

 हमारी पृथ्वी पर लाखों प्रकार की प्रजातियां मौजूद हैं, जिनके बारे में वैज्ञानिक आज भी बहुत कम जानते हैं। हर दिन वैज्ञानिकों को हजारों नई प्रजातियां देखने को मिलती हैं। कुछ तो बहुत सूक्ष्म हैं तो कई विशाल आकार की हैं। ऐसा ही एक सूक्ष्म जीव है जिसे टार्डीग्रेड (tardigrade) कहते हैं।  इसे पानी का भालू भी कहा जाता है।


दुनिआँ का सबसे अजीब जीव -  टार्डीग्रेड (Tardigrade)

यह जल में रहने वाला आठ-टाँगों वाला सूक्ष्मप्राणी है। इन्हें सन् 1773 में योहन गेट्ज़ा नामक जीववैज्ञानिक ने पाया था। टार्डीग्रेड पृथ्वी पर पर्वतों से लेकर गहरे महासागरों तक और वर्षावनों से लेकर अंटार्कटिका तक लगभग हर जगह रहते हैं।

टार्डीग्रेड पृथ्वी का सबसे प्रत्यास्थी (तरह-तरह की परिस्थितियाँ झेल सकने वाला) प्राणी है। यह 1 केल्विन (−272 °सेंटीग्रेड) से लेकर 420 केल्विन (150 °सेंटीग्रेड) का तापमान और महासागरों की सबसे गहरी गर्तो में मौजूद दबाव से छह गुना अधिक दबाव झेल सकते हैं।मानवों की तुलना में यह सैंकड़ों गुना अधिक विकिरण (रेडियेशन) में जीवित रह सकते हैं और अंतरिक्ष के व्योम में भी कुछ काल तक ज़िन्दा रहते हैं। यह 30 वर्षों से अधिक बिना कुछ खाए-पिए रह सकते हैं और धीरे-धीरे लगभग पूरी शारीरिक क्रियाएँ रोक लेते हैं और उनमें सूखकर केवल 3% जल की मात्रा रह जाती है। इसके बाद जल व आहार प्राप्त होने पर यह फिर क्रियाशील हो जाते हैं और शिशु जन सकते हैं।

वैज्ञानिको के शोध के अनुसार टार्डीग्रेड का अस्तित्व सूर्य के खत्म होने तक रहेगा. वैज्ञानिको का यह विश्वास है की टार्डीग्रेड पृथ्वी पर अंतिम जीवित रूप होंगे और मनुष्यो से भी अधिक समय तक जीवित रहेंगे. उन्होंने ये भी माना की ये विशाल तबाही में भी जिंदा रह सकते है. रिसर्च यह भी बताती है की मनुष्यो की तुलना में टार्डीग्रेड दस बिलियन सालो तक जीवित रहेंगे।

दुनिआँ का सबसे अजीब जीव -  टार्डीग्रेड (Tardigrade)

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Tardigrade

  There are millions of species on our earth, about which scientists still know very little.  Every day, scientists get to see thousands of new species.  Some are very subtle and many are of enormous size.  One such microbe is called tardigrade.  It is also called water bear.

 It is an eight-legged microscope living in water.  They were found in 1773 by a biologist named Yohan Getza.  Tardigrades live almost everywhere on Earth, from mountains to deep oceans and from rainforests to Antarctica.

दुनिआँ का सबसे अजीब जीव -  टार्डीग्रेड (Tardigrade)

 The Tardigrade is the most resilient (to withstand a wide variety of conditions) of the Earth.  It can withstand temperatures ranging from 1 Kelvin (−272 ° C) to 420 Kelvin (150 ° C) and six times more than the pressure present in the deepest troughs of the oceans. This is hundreds of times more radiation than humans  Can survive in life and also live in space for some time.  They can live without eating or drinking for more than 30 years and gradually stop almost complete physical activity and after drying they only have 3% water content.  After receiving water and food, they become active again and the baby can be born.

 According to research by scientists, the existence of Tardigrade will last till the sun is over.  Scientists believe that Tardigrades will be the last living form on earth and will live longer than humans.  They also believed that they can stay alive even in this huge catastrophe.  Research also suggests that Tardigrades will live for ten billion years compared to humans.