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बगुला भगत

बगुला भगत

एक वन प्रदेश में एक बहुत बडा तालाब था। हर प्रकार के जीवों के लिए खाद्य सामग्री होने से वहां नाना प्रकार के जीव, पक्षी, मछलियां, कछुए और केकडे आदि वास करते थे। वहीं नजदीक एक बगुला रहता था। अपना भोजन पाने के लिए उसे परिश्रम करना बिल्कुल अच्छा नहीं लगता था। तालाब के जल जंतु उसे जानते थे। वे अपनी सुरक्षा के लिए हमेशा सचेत रहते थे। बगुले को मछलियां पकडने के लिए बड़ी मेहनत करनी पडती थी, जो उसे खलती थी। कोई जलजीव न मिल पाने से वह प्रायः भूखा ही रह जाता। एक टांग पर खड़ा यही सोचता रहता कि क्या उपाय किया जाए कि बिना हाथ-पैर हिलाए रोज भोजन मिले? एक दिन उसे एक उपाय सूझा तो वह उसे आजमाने बैठ गया।

बगुला भगत

बगुला तालाब के किनारे खड़ा हो गया और लगा आंखों से आंसू बहाने। एक केकडे ने उसे आंसू बहाते देखा तो वह उसके निकट आया और पूछने लगा 'मामा, क्या बात है? भोजन के लिए मछलियों का शिकार करने की बजाय खड़े आंसू बहा रहे हो?'

बगुले ने ज़ोर की हिचकी ली और भर्राए गले से बोला- 'बेटे, बहुत कर लिया मछलियों का शिकार। अब मैं यह पाप कार्य और नहीं करुंगा। मेरी आत्मा जाग उठी हैं। इसलिए मैं निकट आई मछलियों को भी नहीं पकड़ रहा हूं। तुम तो देख ही रहे हो।'

केकडा बोला 'मामा, शिकार नहीं करोगे, कुछ खाओगे नहीं तो मर नहीं जाओगे?'

बगुले ने एक और हिचकी ली 'ऐसे जीवन का नष्ट होना ही अच्छा है बेटे, वैसे भी हम सबको जल्दी मरना ही है। मुझे ज्ञात हुआ है कि शीघ्र ही यहां बारह वर्ष लंबा सूखा पड़ने वाला है।'

बगुले ने केकड़े को बताया कि यह बात उसे एक त्रिकालदर्शी महात्मा ने बताई हैं, जिसकी भविष्यवाणी कभी ग़लत नहीं होती। केकड़े ने जाकर सबको बताया कि कैसे बगुले ने बलिदान व भक्ति का मार्ग अपना लिया हैं और सूखा पड़ने वाला हैं।

उस तालाब के सारे जीव मछलियां, कछुए, केकडे, बत्तखें व सारस आदि दौड़े दौड़े बगुले के पास आए और बोले 'भगत मामा, अब तुम ही हमें कोई बचाव का रास्ता बताओ। अपनी अक्ल लड़ाओ। तुम तो महाज्ञानी बन ही गए हो।'

बगुले ने कुछ सोचकर बताया कि वहां से कुछ कोस दूर एक जलाशय हैं, जिसमें पहाडी झरना बहकर गिरता हैं। वह कभी नहीं सूखता। यदि जलाशय के सब जीव वहां चले जाएं तो बचाव हो सकता हैं। अब समस्या यह थी कि वहां तक जाया कैसे जाएं? बगुले भगत ने यह समस्या भी सुलझा दी 'मैं तुम्हें एक-एक करके अपनी पीठ पर बिठाकर वहां तक पहुंचाऊंगा क्योंकि अब मेरा सारा शेष जीवन दूसरों की सेवा करने में गुजरेगा।' सभी जीवों ने गद्-गद् होकर ‘बगुला भगतजी की जै’ के नारे लगाए। अब बगुला भगत के पौ-बारह हो गई। वह रोज एक जीव को अपनी पीठ पर बिठाकर ले जाता और कुछ दूर ले जाकर एक चट्टान के पास जाकर उसे उस पर पटककर मार डालता और खा जाता। कभी मूड हुआ तो भगतजी दो फेरे भी लगाते और दो जीवों को चट कर जाते. तालाब में जीवों की संख्या घटने लगी। चट्टान के पीछे मरे जीवों की हड्डियों का ढेर बढने लगा और भगत जी की सेहत बनने लगी। खा-खाकर वह खूब मोटे हो गए। मुख पर लाली आ गई और पंख चर्बी के तेज से चमकने लगे। उन्हें देखकर दूसरे जीव कहते 'देखो, दूसरों की सेवा का फल और पुण्य भगतजी के शरीर को लग रहा है।'

बगुला भगत मन ही मन खूब हंसता। वह सोचता कि देखो दुनिया में कैसे-कैसे मूर्ख जीव भरे पडे हैं, जो सबका विश्वास कर लेते हैं। ऐसे मूर्खों की दुनिया में थोडी चालाकी से काम लिया जाए तो मजे ही मजे हैं। बिना हाथ-पैर हिलाए खूब दावत उडाई जा सकती है. संसार से मूर्ख प्राणी कम करने का मौक़ा मिलता है. बैठे-बिठाए पेट भरने का जुगाड हो जाए तो सोचने का बहुत समय मिल जाता हैं।

बहुत दिन यही क्रम चला। एक दिन केकडे ने बगुले से कहा 'मामा, तुमने इतने सारे जानवर यहां से वहां पहुंचा दिए, लेकिन मेरी बारी अभी तक नहीं आई।' भगत जी बोले 'बेटा, आज तेरा ही नंबर लगाते हैं, आजा मेरी पीठ पर बैठ जा।'

केकडा खुश होकर बगुले की पीठ पर बैठ गया। जब वह चट्टान के निकट पहुंचा तो वहां हड्डियों का पहाड देखकर केकडे का माथा ठनका। वह हकलाया 'यह हड्डियों का ढेर कैसा है? वह जलाशय कितनी दूर है, मामा?'

बगुला भगत ठां-ठां करके खूब हंसा और बोला 'मूर्ख, वहां कोई जलाशय नहीं है। मैं एक- एक को पीठ पर बिठाकर यहां लाकर खाता रहता हूं। आज तेरी बारी है।

केकडा सारी बात समझ गया। वह सिहर उठा परन्तु उसने हिम्मत न हारी और तुरंत अपने जंबूर जैसे पंजों को आगे बढाकर उनसे दुष्ट बगुले की गर्दन दबोच ली और तब तक दबाए रखी, जब तक उसके प्राण पखेरु न उड गए। फिर केकडा बगुले भगत का कटा सिर लेकर तालाब पर लौटा और सारे जीवों को सच्चाई बता दी कि कैसे दुष्ट बगुला भगत उन्हें धोखा देता रहा?

अतः हमेशा सचेत रहें। आंख मूंदकर कभी किसी का भरोसा न करें। जो जागत है सो पावत है, जो सोवत है सो खोवत है। 

पंजाब का राज्य पक्षी (State Bird of Punjab) || राजबाज़ (Accipiter gentilis) || उत्तरी गोशाक (Northern Goshawk) ||

पंजाब का राजकीय/राज्य पक्षी (State Bird of Punjab)

आज एक बार फिर चलते हैं चिड़ियों की दुनिया में और मिलते हैं पंजाब के राजकीय पक्षी राजबाज से। पंजाब का राज्य पक्षी "राजबाज़ (Northern Goshawk)" है। यह घने जंगलों में रहना पसंद करते हैं। अन्य सभी बाजों की तरह, यह उत्तरी गोशाक (Northern Goshawk) भी एक मांसाहारी पक्षी है। उत्तरी गोशाक (Northern Goshawk) पूरी दुनिया में पाया जाता है; हालाँकि, बाज़ मुख्य रूप से उत्तरी एशिया, उत्तरी अमेरिका, कनाडा, हिमालय के कुछ क्षेत्रों आदि में पाया जाता है।

पंजाब का राज्य पक्षी (State Bird of Punjab) || राजबाज़ (Accipiter gentilis) || उत्तरी गोशाक (Northern Goshawk) ||

यह एक छोटे आकार का धारीदार बाज़ होता है, इसका आकार केवल 45 से 60 सेंटीमीटर के बीच होता है। मादा राजबाज़ का आकार 55 से 70 सेंटीमीटर के बीच होता है। वजन में यह 550 ग्राम से लेकर 1400 ग्राम तक का होता है। मादा का वजन नर से अधिक होता है। नर बाज़ के पंखों का फैलाव 85 से 105 सेंटीमीटर तक हो सकता है, जबकि मादा के पंखों का फैलाव 100 सेंटीमीटर से लेकर 125 सेंटीमीटर तक होता है। इनकी पूंछ की लंबाई 18 से 28 सेंटीमीटर के बीच होती है। 

पंजाब का राज्य पक्षी (State Bird of Punjab) || राजबाज़ (Accipiter gentilis) || उत्तरी गोशाक (Northern Goshawk) ||

इस बाज़ के पंख छोटे और मजबूत होते हैं, जिससे कि इन्हें तुरंत तेज गति मिल जाती है, इनकी एक लंबी पूछ होती है जो कि इन्हें कलाबाजियां करने में और शिकार करते समय तुरंत मुड़ने में सहायता प्रदान करती है, जिससे कि ये जंगलों में वृक्षों के बीच आसानी से तेज गति से उड़ सकते हैं। 

राजबाज़ को पहचानने का सबसे अच्छा तरीका इस के  पूरे शरीर पर पाए जाने वाले भूरे रंग की धारियां है जो कि इसके सफेद पेट पर बनी होती हैं और दूर से ही नजर आती हैं। यह घने जंगलों में काफी तेज गति से उड़ सकता है तथा शिकार कर सकता है। अक्सर शिकार खोजने के लिए यह जंगलों के ऊपर उड़ता रहता है शिकार दिख जाने पर यह अचानक से गोता लगा देता है तथा झाड़ियों में आकर गिर जाता है। इसकी गति 50 से 60  किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है। 

पंजाब का राज्य पक्षी (State Bird of Punjab) || राजबाज़ (Accipiter gentilis) || उत्तरी गोशाक (Northern Goshawk) ||

यह अपना घोंसला तिनकों और पत्तियों से बनाता है, यह एक बार में दो से चार अंडे देता है। इसके अंडों का रंग नीलापण लिए हुए सफेद होता है। अंडे सेने का कार्य ज्यादातर मादा ही करती है। कभी-कभी जब मादा शिकार पर जाती है तब नर भी अंडे सेने का काम करता है। इन अंडों से 30 से 38 दिन में बच्चे निकल आते हैं। जब यह बच्चे 36 से 42 दिन के हो जाते हैं, तो यह उड़ना प्रारंभ करते हैं। तीन से चार महीने का होने पर यह बच्चे पूरी तरह स्वतंत्र हो जाते हैं तथा शिकार करना सीख जाते हैं। इन पक्षियों का जीवन काल 10 से 12 वर्ष का होता है। 

English Translate

State Bird of Punjab

Today once again let's go to the world of birds and meet Rajbaz, the state bird of Punjab. The state bird of Punjab is the "Rajbaaz (Northern Goshawk)". It likes to live in dense forests. Like all other hawks, this northern goshawk is also a carnivore. The Northern Goshawk is found all over the world; However, the falcon is mainly found in northern Asia, North America, Canada, some regions of the Himalayas, etc.


पंजाब का राज्य पक्षी (State Bird of Punjab) || राजबाज़ (Accipiter gentilis) || उत्तरी गोशाक (Northern Goshawk) ||

It is a small striped falcon, its size is only between 45 to 60 cm. The size of female Rajbaz is between 55 to 70 cm. In weight it ranges from 550 grams to 1400 grams. The female weighs more than the male. The wingspan of a male falcon can range from 85 to 105 cm, while that of a female ranges from 100 cm to 125 cm. Their tail length is between 18 to 28 cm.

This falcon has short and strong wings that allow it to gain quick speed, a long tail that allows it to perform acrobatics and make quick turns while hunting, allowing it to fly through the trees at high speed with ease.

पंजाब का राज्य पक्षी (State Bird of Punjab) || राजबाज़ (Accipiter gentilis) || उत्तरी गोशाक (Northern Goshawk) ||

The best way to identify the Kingfisher is the brown stripes found all over its body which are made on its white belly and are visible from a distance. It can fly and hunt very fast in dense forests. Often it keeps flying over the forests to find the prey, when the prey is seen, it suddenly dives and falls in the bushes. Its speed can be from 50 to 60 kilometers per hour.

पंजाब का राज्य पक्षी (State Bird of Punjab) || राजबाज़ (Accipiter gentilis) || उत्तरी गोशाक (Northern Goshawk) ||

It builds its nest from straws and leaves, it lays two to four eggs at a time. The color of its eggs is white with a bluish tint. Most of the work of hatching eggs is done by the female. Sometimes the male also incubates the eggs while the female goes hunting. Kids come out of these eggs in 30 to 38 days. When these children are 36 to 42 days old, they start flying. At the age of three to four months, these children become completely independent and learn to hunt. The life span of these birds is 10 to 12 years.

भारत के सभी राज्यों के राजकीय पक्षियों की सूची |(List of State Birds of India)

सावन के अमरूद

सावन के अमरूद

मेरी लिखी कहानी "सावन के अमरूद" ,प्रतिष्ठित समाचार पत्र "शहर समता" में दिनाँक 19 जुलाई को प्रकाशित हुई है। संपादक मण्डल, शहर समता का हार्दिक आभार।

प्रस्तुत कहानी में दो युवा दिलों की नोक झोंक तथा उमड़ रहे जज्बातों को प्रदर्शित किया गया है। कहानी अखबार के पेज संख्या 4 पर प्रकाशित हुई है।

आप सभी इसे पढ़ें और अपनी राय से मुझे अवश्य अवगत कराएं।

सावन के अमरूद


"जिंदगी में जब तक कुछ हसीन न हो, कुछ खूबसूरत न हो तो जीने का आनंद ही नहीं आता। दो पल की जिंदगी मिली है, खुशियों को मिल- बांटकर ही जीना चाहिए।"

प्रिया के मन में उमड़ रहे इन्हीं विचारों की श्रृंखला को उसके  मोबाइल की कर्कश घंटी ने तोड़ा।  "हलो"

" हां प्रिया,सुनील बोल रहा हूँ।"

"नाम बताने की जरूरत नहीं है जनाब, आपकी आवाज ही काफी है।" प्रिया उत्साह से बोली। 

"यार, गांव से पंजाब जा रहा हूं। लखनऊ में ट्रेन आने का और दूसरी ट्रेन के बीच तीन घंटे का अंतराल है। मैं क्या करूंगा?"

"तो मुझसे क्या चाहते हो?"

"तुम हमेशा ही हमको सजेशन देती हो और इतिहास गवाह है तुम्हारे सजेशन मैं हमेशा मानता हूँ।"

"अच्छा जी, तो ये बात है। मेरा सजेशन चाहिए। ऐसा करो स्टेशन पर बैठकर कोई मूवी निपटा लो।"

" मूवी तो मैं ट्रेन में भी निपटा लूंगा। यहां का कुछ बताओ। आ सको तो  स्टेशन पर आ जाओ।  घंटे बातें करेंगे। तीन घंटे कॉल पर बात तो करोगी नहीं। सामने बैठी रहोगी तो तुम्हें देखते हुए ही तीन घंटे कब बीत जाएंगे पता भी नहीं लगेगा।"

"वाह जी वाह, बटरिंग करना तो कोई तुमसे सीखे। अब अगर तुम यह सोच रहे हो कि तुम बोलोगे तो मैं दौड़ती हुई आ जाऊंगी तो तुम गलत सोच रहे हो।"

"सोच तो ऐसा ही रहा हूं और मैं गलत भी नहीं सोच रहा हूँ। बहुत दिन बीत गए तुम्हारा दीदार किये। ऑफिस से मेरे लिए एक दिन की छुट्टी ले लो और इसमें बुराई ही क्या है?"

"लेकिन घर पर मम्मी....."

"किसी से कुछ कहने की जरूरत नहीं है। तुम रोज़ ऑफिस जाती हो, आज ऑफिस के बजाय इधर आ जाओ। अब और बातें ना बनाओ, आधे घंटे में पहुंच जाऊंगा चुपचाप चली आओ।"

"अच्छा ठीक है देखती हूं।"

"देखना - वेखना कुछ नहीं है। बस तुम आ रही हो। इसे मेरी रिक्वेस्ट समझो या आर्डर,तुम्हे आना है।"

"अच्छा बाबा आ जाऊंगी स्टेशन पहुंचने के दस मिनट पहले बता देना। मुझे घर से स्टेशन  आने में दस मिनट ही लगते हैं। और हां सुनो, ज्यादा पहले ही मत बता देना ताकि मैं स्टेशन  पहुंचकर भटकती रहूं और तुम्हारी ट्रेन लेट हो। हां, कुछ खाना हो तो वह भी बता दो साथ में लेती आऊंगी।"

"नहीं खाने के लिए कुछ लाने की जरूरत नहीं, बस तुम आ जाना इतना ही काफी है।"

सुनील ने फोन रख दिया था।  फोन रखने के बाद, प्रिया सुनील के ख्यालों में खो गयी। अभी चंद महीने पहले ही की ही तो बात है, वह अपने ऑफिस की तरफ से एक ट्रेनिंग के सिलसिले में पंजाब गयी थी। वहां सुनील से उसकी मुलाकात हुई। वह, वहां पर ट्रेनिंग देता था। पहली मुलाकात के बाद ही उसे सुनील की आंखों में अपने लिए कुछ विशेष दिखा। पहले दिन ही इंट्रोडक्शन में यह पता चल गया था कि सुनील और प्रिया के गांव अगल- बगल हैं। परदेश में अगर कोई अपने गांव का मिल जाय तो बहुत खुशी मिलती है। यहां पर भी दोनों का खुश होना स्वाभाविक ही था, लेकिन अगल- बगल के गांव के निवासी होने के अलावा भी कुछ दूसरी खुशी थी जिसे सुनील के अतिरिक्त प्रिया ने भी महसूस किया था। एक महीने के सघन प्रशिक्षण की अवधि कब समाप्त हो गयी, प्रिया को पता ही न चला। उस एक महीने में सुनील ने प्रिया की सारी आवश्यकताओं का ध्यान रखा। प्रायः शाम के समय वे दोनों कही टहलने निकल जाते थे और रात में खाना खाकर ही लौटते थे। लौटने के बाद  भी दोनों  देर रात तक फोन पर बातें करते रहते थे। सुनील और प्रिया इस एक महीने में इतने ज्यादा घुल- मिल गए थे कि लगता था उनकी पहचान बरसों पुरानी है। प्रिया याद कर रही थी कि सुनील को उसके खुले बाल बहुत पसंद थे और वह हमेशा उसके बालों की तारीफ करते हुए गुनगुनाता था

"इन जुल्फों की छांव में,
      इक शाम मुझको दे दो,
जो उम्र भर न भूले
         सौगात हमको दे दो।"

तभी मोबाइल की घंटी से उसकी तंद्रा टूटी;

"सुनो, मेरी ट्रेन दस मिनट में पहुंच जाएगी, आ जाओ।"

प्रिया ने 'हां' कहते हुए मोबाइल रखा और शीघ्रता से अपने बालों को संवारकर,स्कूटी निकालकर स्टेशन की तरफ चल दी। स्टेशन पहुँचकर प्रिया ने सुनील को फोन करके यह बताया कि वह स्टेशन पहुँच गयी है।

सुनील हंसते हुए बोला,

-"मुझे पता था ऐसा ही कुछ होने वाला है। मेरी ट्रेन बस पहुंचने वाली है। मिलने के लिए बेचैन रहती हो और जताती नहीं हो।"

" ज्यादा खुश मत हो ऐसी कोई बात नहीं, बस जल्दी से आ जाओ।"

सुनील के आते ही प्रिया उसे जी भर निहारती है। लंबा कद,सुदर्शन चेहरा,आंखों में वही कशिश,सब कुछ वैसा ही था। सुनील में कुछ भी नही बदला था।

सुनील ने उसके सामने आकर हाथ हिलाते हुए कहा

"क्या हुआ मैडम,कहाँ खोई हैं आप?"

"हम  कितने दिनों बाद मिल रहे हैं सुनील?"

प्रश्न के जवाब में प्रिया ने भी प्रश्न पूछा

" यही कोई 6- 7 महीने हुए होंगे।"

" तुम्हारी गणित कमज़ोर है। पूरे 8 महीने 9 दिन बाद मिल रहे हो वह भी इस ट्रेन की वजह से

चलो कोई नहीं, कहीं जगह देख कर बैठते हैं। 

हां,कहीं चलकर बैठते हैं।मैं आज तुम्हारे लिए गांव से खास सावन के अमरूद लाया हूँ। 

"सच! सावन के अमरूद!

मुझे अमरूद बहुत पसंद हैं और सावन के अमरूदों की बात ही अलग है। लेकिन बरसात में तो गरमागरम पकौड़ी के साथ मसालेदार चाय का मजा ही अलग होता है।" 

"तुम एक बार मेरे गाँव के अमरूद खाओगी तो चाय-पकौड़ी सब भूल जाओगी। ऐसे दिलकश स्वाद वाले अमरूद कहीं मिलते नही हैं।"

"अच्छा जी, इतनी तारीफ! तब तो खाना पड़ेगा। मुँह में पानी आ रहा है।"

लेकिन यहां पर तो प्लेटफॉर्म के अलावा बैठने की कोई जगह ही नहीं है।" प्रिया अधीरता से बोली।

 "कैसे आई हो?" सुनील ने प्रश्न किया।

"और कैसे आऊंगी। स्कूटी से ही।" 

"अरे वाह! फिर इस सुहाने मौसम में इस स्टेशन पर कौन बैठेगा? चलो आज़ाद पार्क चलते हैं। वहीं बैठकर अमरूद खाएंगे।

" नहीं नहीं, यहीं रुकते हैं और प्लेटफॉर्म पर ही अमरूद खा लेते हैं। अगर बारिश हो गई तो तुम भीग जाओगे फिर ट्रेन के सफर  में मुश्किल होगी। "

" तुम्हारे साथ के लिए तो कोई भी मुश्किल सह लूंगा। मुझे यहां नहीं बैठना हैं। मुझे तुम्हारे साथ स्कूटी पर पीछे बैठ के घूमना है, अब चलो।"

प्रिया को पता था कि सुनील मानने वाला नहीं। वह मुस्कुराते हुए बोली

"अब तुम मानोगे तो हो नहीं। चलो, लेकिन यदि बारिश आ गई तो....

"बारिश आएगी, तब की तब देखेंगे।"

प्रिया और सुनील  स्कूटी पर बैठकर आज़ाद पार्क की तरफ चल पड़े। सावन का महीना था।  आसमान में छाई घनघोर घटाएं उन दोनों जवां दिलों की धड़कन बढ़ा रही थीं। स्टेशन के बाहर आकर वो दोनों सड़क पर चले जा रहे थे। सड़क के दोनों तरफ हरियाली की चादर बिछी थी। प्रकृति भी श्रृंगार करके उन्हें रिझा रही थी। बीच बीच में मोर के बोलने की आवाज उनके दिलों में सनसनी पैदा कर रही थी। हवा के झोकों के साथ प्रिया के खुले बाल लहराकर पीछे बैठे सुनील के चेहरे पर स्पर्श कर रहे थे। प्रिया के पास से आती भीनी खुशबू सुनील को दीवाना बना रही थी। अचानक एक स्पीड ब्रेकर पर स्कूटी उछली और सुनील अपनी जगह से आगे छिटककर, प्रिया से जा सटा। तुरंत ही उसने अपने को पीछे किया लेकिन चंद सेकंड की यह क्रिया सुनील के साथ प्रिया को भी उद्देलित कर गयी। 

थोड़ी देर बाद बरसात होने लगी। रिमझिम वर्षा की भीनी फुहारे

दोनों के तन और मन को भिगोने लगीं। थोड़ी देर में वे दोनों पानी से तरबतर हो गए। प्रिया भी काफी धीमी स्कूटी चला रही थी। पानी मे भीगे हुए प्रिया के बालों से ओस की बूंद के समान टपकती हुई बूंदे सुनील के मन मे सिहरन पैदा कर रही थीं। उसकी चांदी के समान चमकती हुई  पीठ से टपकती हुई पानी की बूंदे सुनील को रोमांचित कर रही थीं। वर्षा के कारण सड़क भी सुनसान थी। प्रिया की धवल पीठ पर गिरती हुई बूंदों पर सुनील ने हौले से अंग्रेज़ी का पी और एस अक्षर बनाया। प्रिया सिहर उठी उसने कुछ बोलना चाहा, लेकिन उसके दिल ने उसे चुप रहने को कहा। वर्षा की तीव्रता बढ़ गयी थी।  पानी के वेग के कारण स्कूटी चलाना मुश्किल हो रहा था। इस घनघोर वृष्टि में आज़ाद पार्क में जाना मूर्खता थी। उस बारिश में खड़े होकर अमरूद खाना संभव नही था। वर्षा की तीव्रता और बढ़ गयी थी। बिजली की चमक के साथ मेघों की गड़गड़ाहट दहशत पैदा कर रही थी। किसी वृक्ष के नीचे भी नही खड़ा हुआ जा सकता था।प्रिया के लिए स्कूटी चलाना लगभग असंभव हो रहा था। तभी उन्हें सड़क के पास एक निर्माणाधीन मकान दिखाई पड़ा। प्रिया ने आनन-फानन में स्कूटी रोकी और वे दोनों द्रुत गति से उस मकान के अंदर आ गए। उस मकान में एक कमरे की अस्थाई छत के नीचे उन्होंने शरण ली। भारी वर्षा के कारण वहां कार्य कर रहे मजदूर भी पलायन कर गए थे। 

सुनील ने अपने बैग से अमरूद निकाला और अपने हाथों से प्रिया को खिलाने लगा। प्रिया इसके लिए तैयार थी। प्रिया ने भी सुनील के बैग से एक अमरूद निकाला और सुनील को दिया।। सुनील  अपने दांतों से अमरूद  को हल्के से काटते हुए प्रिया की ओर देखकर शरारत से मुस्कुराया। फिर वे दोनों ही वहीं फर्श पर बैठकर बिना कुछ बोले अमरूद  खाने लगे। अमरूद की मिठास उन लोगों को विभोर कर रही थी। अचानक प्रिया ने मोबाइल पर समय देखकर कहा कि डेढ़ घंटे बीत गए और अब उन्हें जल्द ही स्टेशन पहुँचना होगा। सुनील को स्टेशन पर छोड़कर उसे घर भी पहुँचना होगा लेकिन सुनील ने कुछ नही सुना। उसकी ट्रेन आने में अभी भी डेढ़ घंटा था और इसीलिए वह निश्चिन्त था। अमरूद खाकर, अति अधिकार पूर्वक प्रिया के कुर्ते से अपना हाथ पोंछते हुए उसने अपनी आंखें प्रिया पर गड़ा दीं। 

प्रिया उसकी आँखों की कशिश में खोकर रह गयी। बाहर वर्षा के साथ हवा भी मतवाली हो रही थी। बरसात की तेजी के साथ उनके दिलों की धड़कनें भी बढ़ती जा रही थीं। तभी सुनील ने अपने हाथों से उसके नर्म, रेशमी जुल्फों को संवारना शुरू कर दिया। प्रिया कसमसाने लगी। प्रिया के बालों में अपनी ऊंगलियां फिराते हुए वह उनसे खेलने लगा। वह प्रिया की रेशमी जुल्फों को अपनी उंगलियों से गोल घेरा बनाता था और हटाता था। समय रुक सा गया था। प्रिया ने अपनी आंखें बंद कर ली थीं। सुनील का मधुर स्पर्श उसे सुखकर लग रहा था। पहले उसने  सोचा कि वह सुनील को ऐसा करने से मना करे लेकिन उसका दिल उसे ऐसा करने से रोक रहा था। सुनील, प्रिया के रूप यौवन की सरिता में बहने लगा था। पीले रंग के कुर्ते और सफेद लेगिंग में प्रिया, अप्रितम सुंदरी लग रही थी। उसके गले मे पहनी हुई सोने की चेन भी और ज्यादा दमक रही थी।  दोनों की भावनाएं उफान पर थीं।

बाहर पानी का वेग कम हो रहा था।  कुछ देर बाद बाहर वर्षा थम  गई थी और उस मकान के अंदर का भी तूफान थम गया था।

सुनील की ट्रेन आने में मात्र चालीस मिनट का समय शेष बचा था अतः वे दोनों स्कूटी पर बैठकर स्टेशन की ओर चल दिये। स्टेशन पहुँचकर विदा के समय सुनील ने कहा -

थैंक्यू प्रिया, मेरे दिन को इतना हसीन बनाने के लिए।"

"तुम्हे भी थैंक्यू इस खूबसूरत दिन को मुझे देने के लिए।"

"जल्द ही फिर आऊंगा और फिर तुम्हारे साथ अमरूद खाऊंगा।" सुनील शरारत से बोला। 

प्रिया ने उसे कनखियों से देखा और मुस्कुरा दी।

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत मंगल पांडे की जयंती आज || Mangal Pandey Birth Anniversary : 19 जुलाई ||

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत मंगल पांडे की जयंती आज

मंगल पांडे, यह नाम किसी भी पहचान का मोहताज नहीं, देश का बच्चा-बच्चा जानता है कि देश के पहले स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत मंगल पांडे ने की थी। मंगल पांडे ऐसे स्वतंत्रता सेनानी हैं, जिन्होंने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ पहली गोली चलाई थी। मंगल पांडे ने देश में अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह की जो चिंगारी जलाई थी, वह कहीं ज्वाला का रूप ना ले ले इस डर से अंग्रेज प्रशासन ने उन्हें फांसी की सजा तय दिन से 10 दिन पहले ही दे दी थी।

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत मंगल पांडे की जयंती आज || Mangal Pandey Birth Anniversary : 19 जुलाई ||

आज मंगल पांडे जी की जन्म तिथि पर जानते हैं, अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता का बिगुल बजाने वाले मंगल पांडे की वीर गाथा। 

देश के पहले स्वतंत्रता सेनानी मंगल पांडे का जन्म 19 जुलाई 1827 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नगवा गांव में हुआ था। वह सरयूपारीण ब्राह्मण परिवार से थे। उनके पिता का नाम दिवाकर पांडे और मां का नाम अभय रानी पांडे था। उनका उनका बचपन आम बच्चों की तरह ही बीता। 1849 में मात्र 22 वर्ष की उम्र में वे ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में बंगाल नेटिव इन्फेंट्री (BNI) बटालियन की 34वीं रेजीमेंट में पैदल सेना के सिपाही के रूप में भर्ती किए गए। इस रेजीमेंट में ज्यादातर ब्राह्मणों को ही भर्ती किया जाता था।

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत मंगल पांडे की जयंती आज || Mangal Pandey Birth Anniversary : 19 जुलाई ||

1850 में सिपाहियों के लिए नई इनफील्ड राइफल लाई गई। इन नई इनफील्ड राइफलों के कारतूस में गाय और सुअर की चर्बी मिली होती थी। इस कारतूसों को उपयोग करने से पहले  मुंह से काटना पड़ता था। ऐसे में यह बात हिंदुओं के साथ-साथ मुस्लिमों की धार्मिक भावनाओं के साथ भी खिलवाड़ था। 

मंगल पांडे ने इस बात का विरोध किया और अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। 29 मार्च 1957 को मंगल पांडे ने विद्रोह कर कारतूस का इस्तेमाल करने से मना कर दिया, जिसके चलते उन्हें सेना से निकाल दिया गया। पांडे ने विद्रोह करते हुए कई सिपाहियों को साथ ले लिया और अंग्रेज अफसर हेअरसेय पर हमला बोल दिया। उन्होंने 'मारो फिरंगी को' का नारा दिया था। बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और उनका कोर्ट मार्शल हुआ। मुकदमे के दौरान उन्होंने अंग्रेज अफसरों के खिलाफ विद्रोह की बात स्वीकार ली और उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई। तय किया गया कि उन्हें 18 अप्रैल को फांसी दी जाएगी, लेकिन अंग्रेजों को डर था कि पांडे द्वारा फूंका गया बिगुल जल्द ही आग की तरह पूरे हिंदुस्तान में फैल जाएगा। भारी विद्रोह के अंदेशे के भयवश तय दिन से 10 दिन पहले ही मंगल पांडे को 8 अप्रैल को ही फांसी दे दी थी। 

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Today is the birth anniversary of Mangal Pandey, the forerunner of the Indian freedom struggle

Mangal Pandey, this name does not need any recognition, every child of the country knows that Mangal Pandey started the country's first freedom struggle. Mangal Pandey is such a freedom fighter, who fired the first shot against the British Government. Fearing that the spark of rebellion against the British that Mangal Pandey had lit in the country might turn into a flame, the British administration had given him the death sentence 10 days before the scheduled day.
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत मंगल पांडे की जयंती आज || Mangal Pandey Birth Anniversary : 19 जुलाई ||
Today, on the birth date of Mangal Pandey, we know the heroic story of Mangal Pandey, who played the bugle of freedom against the British.
The country's first freedom fighter Mangal Pandey was born on 19 July 1827 in Nagwa village of Ballia district of Uttar Pradesh. He belonged to Saryuparin Brahmin family. His father's name was Diwakar Pandey and mother's name was Abhay Rani Pandey. His childhood was spent like ordinary children. In 1849, at the age of 22, he joined the British East India Company's army as an infantry soldier in the 34th Regiment of the Bengal Native Infantry (BNI) Battalion. Mostly Brahmins were recruited in this regiment.
In 1850 a new Enfield rifle was introduced for the sepoys. The cartridges of these new Enfield rifles were mixed with cow and pig fat. These cartridges had to be cut from the mouth before use. In such a situation, this thing was playing with the religious sentiments of Hindus as well as Muslims.
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत मंगल पांडे की जयंती आज || Mangal Pandey Birth Anniversary : 19 जुलाई ||
Mangal Pandey opposed this and opened a front against the British rule. On 29 March 1957, Mangal Pandey rebelled and refused to use cartridges, due to which he was expelled from the army. Pandey revolted and took many soldiers with him and attacked the British officer Hearsey. He gave the slogan 'Maro Firangi Ko'. He was later arrested and court martialled. During the trial, he confessed to mutiny against the British officers and was sentenced to death. It was decided that he would be hanged on 18 April, but the British feared that the bugle blown by Pandey would soon spread like a fire across India. Mangal Pandey was hanged on 8th April itself, 10 days before the scheduled day due to the apprehension of heavy rebellion.

सोमेश्वर मंदिर, कोलार || Someshwara Temple, Kolar ||

सोमेश्वर मंदिर, कोलार

सोमेश्वर मंदिर कोलार क्षेत्र के मध्य में स्थित है और इस शहर के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। सोमेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर में उन्हें भगवान सोमेश्वर के नाम से पूजा जाता है।

सोमेश्वर मंदिर, कोलार || Someshwara Temple, Kolar ||

सोमेश्वर मंदिर भारत के कर्नाटक राज्य के कोलार शहर में स्थित है, जिसे तमिल राजा चोल ने बनवाया था। यह 14वीं शताब्दी के विजयनगर युग की द्रविड़ शैली का एक अलंकृत निर्माण है। सोमेश्वर, हिंदू भगवान शिव का दूसरा नाम है, जो मंदिर के प्रमुख देवता हैं। यह मंदिर राष्ट्रीय महत्व के स्मारक के रूप में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित है। 

सोमेश्वर मंदिर, कोलार || Someshwara Temple, Kolar ||

द्रविड़ वास्तुकला में बने इस मंदिर के प्रवेश द्वार पर बना विशाल गोपुर इस मंदिर के निर्माण में चोलों के हाथ की गवाही देता है। मंदिर में भारी प्राकार दीवारें, एक कल्याण मंतप (विवाह कक्ष), विशाल स्तंभों वाला एक मुख मंडप, एक वसंत मंतप (विवाह मंच) और देवी पार्वती के लिए एक मंदिर है। कल्याण मंडप में 64-16 भुजाओं वाले स्तंभ हैं, जिनमें से कुछ पर पुरुषों को घुड़सवारी करते हुए और अन्य पर पौराणिक कहानियों का चित्रण है। स्तंभों पर की गई नक्काशी पर यूरोपीय, चीनी और थाई शैली का प्रभाव है।

सोमेश्वर मंदिर, कोलार || Someshwara Temple, Kolar ||

कल्याण मंडप का शीर्ष भाग चीनी शैली की वास्तुकला को दर्शाता है। इसके अलावा, यज्ञशाला और मंदिर के भंडार कक्ष की दीवारों पर विजयनगर शिलालेख पाए जाते हैं, जो 15वीं शताब्दी ईस्वी पूर्व के हैं। इस भव्य मंदिर का चौखट शुद्ध विजयनगर शैली में द्वारपालों (रक्षकों) के साथ खुदा हुआ है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर एक ग्रेनाइट बैल बना हुआ है। मंदिर में विजयनगर शैली में कल्याणी नामक एक बड़ा सीढ़ीदार टैंक भी है।

आंतरिक मंडप में आठ खूबसूरत मूर्तियों के साथ-साथ कुंभ कलश, लताएं, वनस्पतियां, केले के फूल, शेर, हाथी, बैल, भगवान वेंकटेश्वर, भगवान वेणुगोपाल, भगवान अंजनेय, देवी लक्ष्मी, श्री रामानुजाचार्य और कई अन्य जटिल नक्काशी हैं। मुख्य मंदिर के साथ, मंदिर परिसर में देवी माँ पार्वती का एक और मंदिर भी स्थित है जहाँ आप नंदी की एक और सुंदर मूर्ति देख सकते हैं।

सोमेश्वर मंदिर, कोलार || Someshwara Temple, Kolar ||

कोलार लगभग सोने का पर्याय है। यह शहर 5वीं शताब्दी से अपने सोने के भंडार के लिए जाना जाता है।

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Someshwara Temple, Kolar

Someshwara Temple is situated in the heart of Kolar region and is one of the famous temples of the city. Someshwar Temple is dedicated to Lord Shiva. He is worshiped in this temple by the name of Lord Someshwar.

The Someshwara Temple is located in the city of Kolar in the Indian state of Karnataka, which was built by the Tamil king Chola. It is an ornate Dravidian style construction of the 14th century Vijayanagara era. Someshwar, another name for the Hindu god Shiva, is the presiding deity of the temple. The temple is protected by the Archaeological Survey of India as a monument of national importance.

सोमेश्वर मंदिर, कोलार || Someshwara Temple, Kolar ||

The huge gopura built at the entrance of this temple built in Dravidian architecture testifies to the hand of the Cholas in the construction of this temple. The temple has massive prakara walls, a kalyana mantapa (marriage hall), a mukha mantapa with massive pillars, a vasanta mantapa (marriage platform) and a shrine for goddess Parvati. The Kalyana Mandapa has 64-16 side pillars, some depicting men riding horses and others depicting mythological stories. The carvings on the pillars are influenced by European, Chinese and Thai styles.

सोमेश्वर मंदिर, कोलार || Someshwara Temple, Kolar ||

The top portion of the Kalyana Mandapa reflects the Chinese style of architecture. In addition, Vijayanagara inscriptions are found on the walls of the sacrificial hall and the store room of the temple, which date back to the 15th century CE. The door frame of this grand temple is inscribed with dvarapalas (guards) in pure Vijayanagara style. A granite bull is made at the entrance of the temple. The temple also has a large terraced tank called Kalyani in the Vijayanagara style.

सोमेश्वर मंदिर, कोलार || Someshwara Temple, Kolar ||

The inner mandapa has eight beautiful sculptures as well as intricate carvings of Kumbh Kalash, creepers, flora, banana flowers, lions, elephants, bulls, Lord Venkateswara, Lord Venugopala, Lord Anjaneya, Goddess Lakshmi, Sri Ramanujacharya and many more. Along with the main temple, another temple of Goddess Parvati is also located in the temple complex where you can see another beautiful idol of Nandi.

Kolar is almost synonymous with gold. The city is known for its gold deposits from the 5th century.

आज अमावस है

आज अमावस है

आज का दिन बहुत ही विशेष है। हमारे चारों ओर एक विशेष तरह की ऊर्जा रहेगी आज। पूर्णिमा का चांद जहां हमें बाहर की और विकसित करता है। हमें भावुक बनाता है। हमारे विचारों को ताकत और चुंबकीय शक्ति देता है, वहीं अमावस का चांद हमारे अंदर की और गहरा, अध्यात्मिक और विशेष तरह की ऊर्जा से भर देता है।

आज अमावस है

इस महीने 17 जुलाई 2023 को अर्थात आज सोमवार को है। सोमवार के दिन अमावस्या को सोमवती अमावस्या भी कहते हैं तथा सावन अमावस्या को हरियाली अमावस्या भी कहा जाता है। हिंदू धर्म में सोमवार और शनिवार को आने वाली अमावस्या बहुत खास होती है। हिंदू धर्म में अमावस्या का विशेष महत्व है। हिंदू धर्म में कैलेंडर और हिंदू पंचाग की तारीख चंद्रमा के अनुसार बदलती रहती है। 

अमावस्या क्या है? यह वह रात है जब चंद्रमा पूरी तरह से दिखाई नहीं देता है। अमावस्या की रात हर 30 दिन के बाद आती है, ऐसा कहा जा सकता है कि अमावस्या हर महीने में एक बार आती है। चंद्रमा के घटने और बढ़ने को पक्ष कहा जाता है, शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष दो प्रकार के होते हैं। जब अमावस्या सोमवार को पड़ती है तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है और जब अमावस्या शनिवार को पड़ती है तो उसे शनि अमावस्या कहा जाता है।

आज अमावस है

अगर इस रात का हम फायदा उठाना सीख जाएं, तो यह हमें एकाग्रचित कर देगा। यह बिखरे हुए व्यक्तित्व को एकत्रित कर सकता है। मस्तिष्क में फालतू की इकट्ठी हुई यादों से उभरने वाले विचारों से मुक्ति दिलाता है और हमारे जीवन को किसी एक व्यवहारिक दिशा की ओर बढ़ने में मदद करता है।

पूर्णिमा की रात की तरह इसमें भी विशेष स्थिति में रहना, व्यवहार करना आ जाए तो यह अमावस की रात संपूर्ण जीवन को बदल सकती है। यह हमारे जीवन के बहुत गहरे पहलुओं पर काम करता है। मानसिक चेतना के अंदर छुपी हुई गहरी संवेदनाओ को गहरा कर देता है और उन्हें पूर्णता की ओर धकेलता है।

अमावस की रात गहरी होती है, काली होती है। इस दिन हमें अर्जुन की तरह काम करना चाहिए और चिड़िया की आंख पर निशाना लगाना चाहिए। इस दिन वह लक्ष्य पूरा हो सकता है, जो हमारे अंतर्मन की गहराइयों में छुपा हुआ है। तंत्र साधकों के लिए योगियों के लिए, बिजनेसमैन के लिए और जो बीमार हैं, उनको स्वयं खुद को ठीक करने के लिए यह दिन और रात बहुत खास है।

आज अमावस है

बस हमें इसका उपयोग और प्रयोग करना आ जाए। इसके साथ तमन्यता आ जाये। आम व्यक्ति के लिए भी यह रात किसी एक बड़े लक्ष्य को साध सकती है। यही विशेषता है इस रात की। 

जीवन बस एक जन्म कुंडली और किसी ज्योतिषाचार्य के एक समाधान पर निर्धारित नहीं है। जीवन को समझना होगा इसके साथ काम करना होगा जागरूक होकर जीवन के हर पहलू को समझना होगा फिर ये वह सब कुछ देगा जो हमारे लिए जरूरी है।

रात को कुछ देर ध्यान में बैठें, आत्मचिंतन करें अपने कार्यों के बारे में, जीतना गहरा चिंतन आज करेंगे, उसके उत्तर आज जल्दी मिलेंगे यही आज के दिन की विशेषता है। एकांत में बैठने से गहन चिंतन करने से प्लानिंग करने से आज के दिन सही और जल्दी उत्तर मिलते ही हैं. अन्य दिनों के मुकाबले। 

इस बात की सत्यता कितनी है, मुझे इसकी जानकारी नहीं है। मैंने पढ़ा और आप सभी के साथ साझा कर रही हूँ। आज के दिन जानने की कोशिश करती हूँ आप सभी भी कीजियेगा। 

🕉️ॐ नमः शिवाय 🙏

फूल का जीवन, क्या जीवन ?

फूल का जीवन, क्या जीवन?


Rupa Oos ki ek Boond

"उदासियों की वजह तो बहुत है जिंदगी में,
पर बेवजह खुश रहने का मजा कुछ और है..❣️"


मैंने एक फूल से कहा

कल तुम मुरझा जाओगे:..!

फिर क्यों मुस्कुराते हो..?

व्यर्थ में यह ताजगी ...

किस लिए लुटाते हो..?

 

फूल चुप रहा...!!


इतने में एक तितली आई ..!

पल भर आनंद लिया ..!

और उड गई ..!!

एक भौंरा आया..!

गान सुनाया ..!

सुगंध बटोरी..!

और आगे बढ गया ..!!

एक मधुमक्खी आई..!

पल भर भिन भिनाई ..!

पराग समेटा .. और ...

झूमती गाती चली गई..!!

खेलते हुए एक बालक ने ...

स्पर्श सुख लिया ..!

रूप-लावण्य निहारा..!

मुस्कुराया और..!

खेलने लग गया..!


तब फूल बोला-

मित्र: 

क्षण भर को ही सही...

मेरे जीवन ने कितनों...

को सुख दिया..!

क्या तुमने भी कभी..

ऐसा किया..?

कल की चिन्ता में ...

आज के आनंद में ...

विराम क्यों करूँ..?

माटी ने जो...

रूप, रंग, रस, गंध दिए ..

उसे बदनाम क्यों करूँ..?

मैं हँसता हूँ, क्योंकि...

हँसना मुझे आता हैं..!

मैं खिलता हूँ, क्योंकि ...

खिलना मुझे सुहाता हैं..!

मैं मुरझा गया तो क्या..?

कल फिर एक..

नया फूल खिलेगा ..!

न कभी मुस्कान रुकी हैं ..न ही सुगंध .!!

जीवन तो एक सिलसिला है ..!

इसी तरह चलेगा..!!

जो आपको मिला है ...

उस में खुश रहिये..!

और प्रभु का ...

शुक्रिया कीजिए..!

क्योंकि हम जो ...

जीवन जी रहे हैं.. 

वो जीवन कई लोगों ने ...

देखा तक नहीं है..!


खुश रहिये ..!

मुस्कुराते रहिये..!

और अपनों को भी ...

*खुश रखिए* ..!!

Rupa Oos ki ek Boond

"खुशी एक फूल से सुगंध की तरह विकिरण करती है 
और सभी अच्छी चीजों को आपकी ओर खींचती है..❣️"