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Fenugreek Seeds || मेथी दाने || 16 Benefits of eating Fenugreek Seeds ||

 मेथी दाने का महत्व

सर्दियों के शुरू होते ही सब्जी बाजार में मेथी के पत्ते (साग) खूब मिलते हैं। कुछ लोग इन पत्तों का उपयोग साग बनाने में करते हैं तो कुछ लोग सब्जी बनाते हैं और कुछ लोग इसकी पूड़ी बनाते हैं।भोजन का स्वाद और सुगंध बढ़ाने के लिए मेथी का प्रयोग प्रायः हर घर में किया जाता है। मेथी को सब्जी तथा इसके दानों को मसाले के रूप में हमारे भोजन में प्रयोग किया जाता है। लगभग हर प्रदेश में मेथी की खेती की जाती है। इसका पौधा एक से दो फुट लम्बा होता है जिसमें जनवरी से मार्च के महीनों में फूल लगते हैं। आज हम इस अंक में मेथी के बीज की उपयोगिता की चर्चा करेंगे।

Fenugreek Seeds || मेथी दाने || 16 Benefits of eating Fenugreek Seeds ||

त्रिफला के बाद आजवाइन, जीरा, हींग और इसके बाद एक सबसे अच्छी वस्तु है हमारी रसोई में जिसका नाम है मेथी का दाना। मेथी का दाना वात और कफ नाशक है। मेथी दाना पित्त को बढ़ाती है। अतः जिनको पित्त की बीमारी पहले से है, वह मेथी का उपयोग ना करें।

  1. मेथी स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक होती है। पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए मेथी बहुत फायदेमंद होती है। 
  2. मेथी अपच, गैस और पेटदर्द में भी फायदेमंद है।    
  3. मेथी डॉयबिटीज़ के लिए बहुत उपयोगी है। मेथी का पाउडर लेना उतना फायदेमंद नहीं है, जितना की उसे रात में पानी में भिगो कर खाना है। 
  4. कब्जियत की शिकायत होने पर मेथी दाने का उपयोग करना चाहिए।
  5. मेथी के दाने कोलेस्ट्रोल को कम करते हैं।
  6. जिस अचार में भी मेथी है, वह अचार नहीं औषधि है। अजवाइन डाला हुआ अचार भी औषधि है।
  7. किसी भी फल के अचार में डाली हुई इस प्रकार की औषधियां फल से ज्यादा असरदार होती हैं।अजवाइन और मेथी दाना दो ऐसी औषधियां हैं जो जिस वस्तु में पड़ती हैं, उसके असर को कम कर देती हैं और अपने असर को बढ़ा देती हैं।
  8. वात और कफ की बीमारियों में इस प्रकार के अचार बहुत ही लाभकारी होते हैं। रात को भिगो हुई मेथी से ज्यादा असरकारक अचार में डाली हुई मेथी होती है। अचार में डाली हुई मेथी का असर कम से कम 20 गुना ज्यादा होता है। यही बात अजवाइन के साथ भी है।
  9. अचार में मेथी, अजवाइन, जीरा, हींग, दालचीनी यह सब डालने के बाद अचार औषधि हो जाता है। मेथी दाना खाने से पित्त की समस्याओं में जैसे गैस अधिक बनना, जलन होना, मुँह सुख जाना आदि समस्याएं आने लगती हैं।
  10. हाई बी.पी. के लिए सबसे अच्छा मेथी दाना है। एक चम्मच मेथी दाना रात को गर्म पानी में डालकर छोड़ देना है और सुबह बासी मुंह पानी पी लेना और मेथी चबा चबाकर खाना है।
  11. भूख नहीं लगना, दमा, बहुमूत्र, सायटिका, पेट तथा मांसपेशियों के दर्द से बचने के लिए अपने भोजन में रोजाना मेथी को शामिल करें।
  12. जले हुए जगह पर मेथी दाना पानी में पीसकर लेप करने से जलन शांत होगा और घाव जल्दी भरेगा।
  13. किसी तरह की अंदरूनी चोट के दर्द को दूर करने के लिए मेथी के पत्तों को पीसकर उस जगह पर लगाने से आराम मिलता है। इससे सूजन भी दूर होती है।
  14. मेथी दानों के लड्डू बनाकर 3 महीने तक सुबह शाम सेवन करने से कमर दर्द में आराम मिलता है।
  15. मेथी के नियमित सेवन से गठिया से होने वाले दर्द में आराम मिलता है।
  16. हरी मेथी की सब्जी के सेवन से खून की कमी की शिकायत दूर होती है। 
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Importance of Fenugreek Seeds


As soon as winter starts, fenugreek leaves (saag) are available in abundance in the vegetable market. Some people use these leaves to make saag, some people make vegetables and some people make puri from it. Fenugreek is used in almost every household to increase the taste and aroma of food. Fenugreek is used as a vegetable and its seeds as a spice in our food. Fenugreek is cultivated in almost every state. Its plant is one to two feet long, in which flowers bloom in the months of January to March. Today, in this issue, we will discuss the usefulness of fenugreek seeds.
Fenugreek Seeds || मेथी दाने || 16 Benefits of eating Fenugreek Seeds ||

After Triphala, there is ajwain, cumin, asafoetida and after this, there is one best thing in our kitchen whose name is fenugreek seeds. Fenugreek seeds destroy Vata and Kapha. Fenugreek seeds increase bile. Therefore, those who already have bile disease, should not use fenugreek.
  1. Fenugreek is very beneficial for health. Fenugreek is very beneficial in curing digestive problems.
  2. Fenugreek is also beneficial in indigestion, gas and stomachache.
  3. Fenugreek is very useful in diabetes. Taking fenugreek powder is not as beneficial as eating it after soaking it in water overnight.
  4. Fenugreek seeds should be used in case of constipation.
  5. Fenugreek seeds reduce cholesterol.
  6. Any pickle that has fenugreek in it is not a pickle but a medicine. Pickle with celery is also a medicine.
  7. This type of medicine added to the pickle of any fruit is more effective than the fruit itself. Celery and fenugreek seeds are two such medicines that reduce the effect of the thing in which it is added and increase their own effect.
  8. This type of pickle is very beneficial in the diseases of Vata and Kapha. Fenugreek added to pickle is more effective than fenugreek soaked overnight. The effect of fenugreek added to pickle is at least 20 times more. The same is true for celery.
  9. After adding fenugreek, celery, cumin, asafoetida, cinnamon to pickles, the pickle becomes a medicine. Eating fenugreek seeds helps in pitta related problems like excessive gas formation, burning sensation, dry mouth etc.
  10. Fenugreek seeds are the best for high BP. Leave one spoon of fenugreek seeds in hot water overnight and drink the water on an empty stomach in the morning and chew the fenugreek.
  11. Include fenugreek in your diet daily to avoid loss of appetite, asthma, polyuria, sciatica, stomach and muscle pain.
  12. Applying a paste of fenugreek seeds ground in water on a burnt area will soothe the burning sensation and the wound will heal quickly.
  13. To relieve pain due to any kind of internal injury, grinding fenugreek leaves and applying them on that area provides relief. It also relieves swelling.
  14. Making laddus of fenugreek seeds and consuming them every morning and evening for 3 months provides relief from back pain.
  15. Regular consumption of fenugreek provides relief from arthritis pain.
  16. Consumption of green fenugreek vegetable relieves the problem of anemia.
Fenugreek Seeds || मेथी दाने || 16 Benefits of eating Fenugreek Seeds ||

स्वामी विवेकानन्द || Swami Vivekananda

स्वामी विवेकानन्द

जन्म: 12 जनवरी 1863, कलकत्ता
मृत्यु: 4 जुलाई 1902,
 कलकत्ता के पास

स्वामी विवेकानंद जी वेदों – उपनिषदों के महान ज्ञाता और एक प्रखर वक्ता रहे हैं। उनका सनातन धर्म और संस्कृति के प्रचार प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने विश्वभर में वेदांत दर्शन का प्रसार किया और पूरे विश्व को सनातन धर्म और संस्कृति से परिचित कराया। स्वामी विवेकानंद जी ने कर्म योग, राज योग, ज्ञान योग, भक्ति योग जैसे विचारों को हम तक पहुंचाया है। 1985 से उनका जन्मदिन भारत में राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है।
स्वामी विवेकानन्द || Swami Vivekananda

आज स्वामी विवेकानंद जी की जयंती भी है। स्वामी विवेकानन्द का जन्म 12 जनवरी सन् 1863 को कलकत्ता में एक कुलीन कायस्थ परिवार में हुआ था। उनका औपचारिक नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था। पिता का नाम विश्वनाथ दत्त था, जो कलकत्ता हाईकोर्ट के एक प्रसिद्ध वकील थे। नरेंद्रनाथ की माँ भुवनेश्वरी देवी एक गृहिणी और अत्यंत धार्मिक महिला थीं। उनका अधिकांश समय भगवान शिव की पूजा-अर्चना में व्यतीत होता था।

बचपन से ही नरेन्द्र अत्यन्त कुशाग्र बुद्धि के तो थे ही और नटखट भी थे। अपने साथी बच्चों के साथ वे खूब शरारत करते और मौका मिलने पर अपने अध्यापकों के साथ भी शरारत करने से नहीं चूकते थे। उनके घर में नियमपूर्वक रोज पूजा-पाठ होता था। धार्मिक प्रवृत्ति की होने के कारण माता भुवनेश्वरी देवी को पुराण,रामायण, महाभारत आदि की कथा सुनने का बहुत शौक था। परिवार के धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण के प्रभाव से बालक नरेन्द्र के मन में बचपन से ही धर्म एवं अध्यात्म के संस्कार गहरे होते गये। माता-पिता के संस्कारों और धार्मिक वातावरण के कारण बालक के मन में बचपन से ही ईश्वर को जानने और उसे प्राप्त करने की लालसा दिखायी देने लगी थी। ईश्वर के बारे में जानने की उत्सुकता में कभी-कभी इनके प्रश्न इनके माता-पिता और कथावाचक पण्डित तक को निरुत्तर कर देते थे। 

 नरेंद्र बाल्यावस्था से प्रतिभा के धनी थे ही, उन पर मां सरस्वती की कृपा भी थी। नरेन्द्रनाथ को बचपन में रहस्यमय अनुभव हुए और ईश्वर के अस्तित्व के बारे में उनकी आध्यात्मिक जिज्ञासा बढ़ती गई। 16 वर्ष की आयु में 1869 में स्वामी जी ने कलकत्ता विश्व विद्यालय के एंट्रेंस एग्जाम में बैठे और इस एग्जाम में उन्हें सफलता मिली। इसके बाद इसी विश्वविद्यालय ने उन्होंने स्नातक की उपाधि प्राप्त की। इस दौरन उनकी भेंट काली भक्त परमहंस महाराज जी से हुई, जो विवेकानंद की आध्यात्मिक यात्रा के शीर्ष पर थे। 

प्रारंभ में नरेन्द्रनाथ, जो ब्रह्म समाज के सदस्य थे और पश्चिमी तर्क और बुद्धिवाद के संपर्क में थे, रामकृष्ण की पवित्र प्रथाओं और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण पर संदेह करते थे। हालांकि, समय के साथ उन्होंने रामकृष्ण जी को अपना गुरु स्वीकार कर लिया और अपने दिन रहस्यवादी रामकृष्ण जी के सान्निध्य में बिताए, दिव्यता के बारे में सीखा और अपना आध्यात्मिक विश्वदृष्टिकोण बनाया। रामकृष्ण ने नरेन्द्रनाथ को अपना आध्यात्मिक उत्तराधिकारी चुना और 1886 में अपनी मृत्यु से कुछ समय पहले उन्होंने नरेन्द्रनाथ और अन्य शिष्यों को भिक्षुत्व की दीक्षा दी।                      

सन 1893 में अमेरिका के शिकागो शहर में आयोजित धर्म सम्मेलन में स्वामी जी ने भारत का प्रतिनिधित्व किया था। इस सम्मेलन में स्वामी जी के भाषण की पूरी दुनिया में प्रशंसा की गई। इससे भारत देश को एक नई पहचान मिली। . 

1900 में विवेकानंद अपनी दूसरी विदेश यात्रा से भारत लौटे। उनका स्वास्थ्य खराब रहने लगा और दो साल बाद 4 जुलाई 1902 को बेलूर के रामकृष्ण मठ में ध्यानावस्था में महासमाधि धारण कर स्वामी जी पंचतत्व में विलीन हो गए। उनकी मृत्यु के समय उनकी उम्र सिर्फ 39 वर्ष थी, लेकिन उन्होंने अपने कार्यों, दर्शन और शिष्यों के माध्यम से एक स्थायी विरासत छोड़ी । उनकी शिक्षाएं और व्याख्यान आज भी भारत और दुनिया भर में व्यापक रूप से पढ़े और माने जाते हैं। 

विवेकानंद ने अपने जीवनकाल में जो संगठन स्थापित किए थे, उनका समय के साथ विस्तार हुआ है। वास्तव में, रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन के अब वैश्विक स्तर पर 200 से अधिक केंद्र हैं और ये भारत के बाहर 20 से अधिक देशों में मौजूद हैं। 1894 और 1900 में विवेकानंद जी ने क्रमशः न्यूयॉर्क शहर और सैन फ्रांसिस्को में दो वेदान्त समाजों की स्थापना की, जो पश्चिम में अपनी तरह के पहले थे।

इस वर्ष (2025) राष्ट्रीय युवा दिवस की थीम (National Youth Day 2025 Theme)

 1984 में आज के दिन को ही "राष्ट्रीय युवा दिवस" के रूप में मनाने की घोषणा सरकार ने की थी। तभी से प्रतिवर्ष एक थीम के साथ 12 जनवरी को "राष्ट्रीय युवा दिवस" मनाया जाता है। इस वर्ष राष्ट्रीय युवा दिवस का विषय "राष्ट्र निर्माण के लिए युवा सशक्तिकरण" है। इसके साथ ही इस वर्ष इसकी थीम "युवा एक स्थायी भविष्य के लिए: लचीलेपन और जिम्मेदारी के साथ राष्ट्र को आकार देना" (Youth for a Sustainable Future: Shaping the Nation with Resilience and Responsibility) है।

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#विवेकानंद, 
#शिकागोसम्मेलन

प.पू. रामकृष्ण परमहंसजी || Ramakrishna Paramhansji

प.पू. रामकृष्ण परमहंसजी

पिछले हफ्ते संतों की कथा में हमने संत तुकाराम महाराज जी के बारे में पढ़ा। इस क्रम को आगे बढ़ाते हैं और आज बात करते हैं प.पू. रामकृष्ण परमहंसजी की। 

कौन थे प.पू. रामकृष्ण परमहंसजी?

श्रीरामकृष्ण परमहंसजी माँ काली के अनन्य भक्त थे तथा भक्ति और साधना के आदर्श उदाहरण हैं। कालीमाता ने भी उनपर कितना और कैसे प्रेम किया? आज पढ़ते हैं यह भक्तिमय प्रसंग। 

प.पू. रामकृष्ण परमहंसजी || Ramakrishna Paramhansji

प.पू. रामकृष्ण परमहंसजी का जन्म 18 फरवरी 1836 को कोलकाता से लगभग साठ मील उत्तर-पश्चिम में कामारपुकुर नामक गाँव में हुआ था। उनके माता-पिता, क्षुद्रराम चट्टोपाध्याय और चंद्रमणि देवी थे, जो बहुत गरीब थे, लेकिन बहुत ही सरल स्वभाव के थे। छह साल की उम्र में परमहंसजी ने काले बादलों की पृष्ठभूमि में उड़ते हुए सफेद सारसों की उड़ान को देखकर पहली बार परमानंद का अनुभव किया। उम्र के साथ परमानंद में प्रवेश करने की यह प्रवृत्ति तीव्र होती गई। जब वे सात वर्ष के थे, तब उनके पिता की मृत्यु ने उनके आत्मनिरीक्षण को और गहरा कर दिया और दुनिया से उनकी वैराग्यता को और बढ़ा दिया।

​जब श्री रामकृष्ण सोलह वर्ष के हुए, तो उनके भाई रामकुमार उन्हें पुरोहिती के पेशे में सहायता करने के लिए कोलकाता ले गए। 1855 में रानी रासमणि द्वारा निर्मित दक्षिणेश्वर में काली मंदिर का अभिषेक किया गया और रामकुमार जी को उस मंदिर में मुख्य पुजारी बनाया गया, परंतु ​​कुछ महीने बाद ही उनकी मृत्यु हो गई। इनकी मृत्यु के पश्चात रामकृष्ण परमहंसजी को पुजारी नियुक्त किया गया। 

वे प्रतिदिन देवी की पूजा करते थे; परंतु उन्हें कभी देवी के दर्शन नहीं हुए थे। एक बार उन्हें ऐसा लगा कि ‘यदि देवी यहीं हैं, तो वे मुझे दर्शन क्यों नहीं देतीं?’ तब रामकृष्ण परमहंसजी ने माँ काली के प्रति गहन भक्ति विकसित की और पुरोहिती कर्तव्यों के अनुष्ठानों को भूलकर उनकी छवि की प्रेमपूर्ण आराधना में घंटों बिताने लगे और देवी के दर्शन हेतु व्याकुल होकर प्रार्थना करने लगे। वे देवी से प्रार्थना करते थे कि "हे देवी! आप वास्तव में यदि यही हैं, तो मैं आपका रूप क्यों नहीं देख सकता?"


एक दिन की बात है कि श्रीरामकृष्णजी देवी के सामने उनका स्मरण कर पूजा कर रहे थे। देवी के दर्शन न होने के कारण वे कहने लगे कि ‘यदि मुझे देवी के दर्शन नहीं होते, तो मेरे जीवन का क्या अर्थ है? मुझे यह जीवन ही नहीं चाहिए।’ ऐसा बोलकर उन्होंने देवी के हाथ में स्थित शस्त्र उठा लिया और वे स्वयंपर वार करने ही वाले थे कि इतने में मूर्ति से साक्षात कालीमाता प्रकट हुईं। भगवान का स्मरण निष्ठा और लगन से करने पर भगवान प्रकट होते है, इस बात का उदहारण भक्त प्रल्हाद और रामकृष्ण परमहंस जी ने प्रस्तुत किया है। 


इस प्रसंग के उपरांत रामकृष्ण परमहंसजी में देवी के प्रति भक्ति और अधिक बढ गई। रामकृष्ण कभी अपनी चिंता नहीं करते थे। जैसे छोटा बालक अपनी माता से सबकुछ मांग लेता है, उसी प्रकार रामकृष्णजी माता से सबकुछ मांगते थे। वे प्रत्येक कृत्य देवी की आज्ञा से ही करते थे। देवी काली उनकी माता ही थी। उनके पास माता की छोटी मूर्ति थी, जिससे वे सदैव बातें करते थे। वे देवी को भोजन खिलाते और देवी भी उसे ग्रहण कर लेतीं थीं।


जब रामकृष्णजी काली माता के अनुसंधान में रहते अर्थात उनका अखंड स्मरण करते थे, तब वे देहभान भूल इतना आनंदित होकर नाचते-गाते थे कि कभी कभी वे अचेत हो जाते थे। इस प्रकार उनकी उच्च स्तर की भाव की अवस्था रहती थी, परंतु उनकी जीवनशैली तो लोगों को पागलों के जैसी लगती थी ।


एक बार एक व्यक्ति ने उनसे पूछा, "आप ऐसा कहते हैं कि देवी हर एक वस्तु में और प्राणी में है, तो आप इस छोटी सी मूर्ति को कालीमाता कैसे कहते हैं ?" उस समय रामकृष्णजी ने उससे पूछा, "सूर्य पृथ्वी से कितना बडा है?" उस व्यक्ति ने यह उत्तर दिया, "सूर्य पृथ्वी से ९ लाख गुना बडा है।" तब रामकृष्णजी ने उससे पूछा, "वह इतना बडा होते हुए भी हमें इतना छोटा क्यों दिखाई देता है?" उस व्यक्ति ने उत्तर दिया, "सूर्य भले ही पृथ्वी से ९ लाख गुना बडा हो, परंतु वह हम से बहुत दूर है इसलिए वह हमें इतना छोटा दिखाई देता है।" इसपर रामकृष्ण परमहंसजी बोले, "इसी प्रकार काली माता आपसे बहुत दूर हैं इसलिए वे आपको छोटी दिखती हैं। मैं तो देवी के गोद में ही होता हूं, इसलिए वे मुझे बड़ी लगती हैं। आप उनकी ओर बाह्य दृष्टि से देखते हैं, परंतु मैं उनकी ओर श्रद्धा के साथ सृष्टि के शक्तिरूप में देखता हूं।"

केरल का राजकीय फूल - अमलतास (गोल्डन शावर ट्री) || State Flower of - Kerala - Golden Shower Tree

केरल का राजकीय फूल - अमलतास

सामान्य नाम:  अमलतास (गोल्डन शावर ट्री)
स्थानीय नाम: कनिकोन्ना
वैज्ञानिक नाम: ' कैसिया फ़िस्टुला (Cassia fistula) '
केरल का राजकीय फूल - अमलतास (गोल्डन शावर ट्री) || State Flower of - Kerala - Golden Shower Tree

आप सभी भी सड़क किनारे पेड़ से लटके हुए पीले पीले झुंडों में लटके हुए फूल देखे होंगे तथा फूल झड़ने के पश्चात लंबे लटके फल, जी हां हम बात कर रहे हैं अमलतास के पेड़ की। यही अमलतास का फूल केरल का राजकीय पुष्प है। अमलतास एक खूबसूरत पेड़ है, जो आमतौर पर मध्यम आकार का होता है। इसकी पत्तियां आकार में बड़ी गहरे हरे रंग की होती हैं और फूल पीले रंग के होते हैं, जो गुच्छों में खिलते हैं। प्राचीन काल से ही अमलतास के पेड़ की शाखा, फल और पत्तियों को दवा के रूप में उपयोग में लाया जाता रहा है। केरल भारत का एकलौता ऐसा राज्य जहां सबसे पहले और सबसे ज़्यादा आयुर्वेदिक दवाईओं का इस्तेमाल किया जाता है।  

केरल का राजकीय फूल - अमलतास (गोल्डन शावर ट्री) || State Flower of - Kerala - Golden Shower Tree

राज्य पशु   –  हाथी
राज्य पक्षी  –  हॉर्नबिल
राज्य वृक्ष  –  नारियल
राजकीय भाषा  –  मलयालम
राजकीय नृत्य  – कथकली (Kathakali) 
राज्य पुष्प  –  अमलतास,  ‘कनिकोन्ना’
राजकीय फल  –  कटहल
राजकीय मछली  –  ग्रीन क्रोमाइड

केरल का राजकीय पुष्प अमलतास (गोल्डन शावर ट्री) है। ये फूल केरल के विशु त्यौहार का प्रतीक हैं और इस पेड़ को 20 रुपये के टिकट पर छापा गया था। यह पेड़ आमतौर पर श्रीलंका के बौद्ध मंदिरों में भी उगाया जाता है, जहाँ इसे सिंहली नाम एहेला के नाम से जाना जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम कैसिया फ़िस्टुला है। इसे पर्जिंग कैसिया, इंडियन लेबर्नम, कानी कोना, या पुडिंग-पाइप ट्री के नाम से भी जाना जाता है। यह फैबेसी परिवार का एक फूलदार पौधा है। यह भारत के अलावा, दक्षिण-पूर्व एशिया के आस-पास के क्षेत्रों में भी पाया जाता है। 
केरल का राजकीय फूल - अमलतास (गोल्डन शावर ट्री) || State Flower of - Kerala - Golden Shower Tree

अमलतास का पेड़ 5 से 15 मीटर तक ऊंचा होता है। इस पेड़ पर मार्च से जुलाई के बीच सुनहरे पीले रंग के फूल लगते हैं। इसके फल लंबे और बेलनाकार होते हैं, जो देखने में किसी डंडे की तरह दिखते हैं। फल हरे रंग के होते हैं और पक जाने पर यह फल गहरे भूरे रंग के दिखाई देते हैं। इस पेड़ के फूल, तने और पत्तों में कई प्रकार के पोषक तत्व होते हैं, जो कई प्रकार की शारीरिक समस्याओं के इलाज के तौर पर प्रयोग में लाए जाते हैं। 

कुछ जगहों पर लोगों का मानना है की "जिस समय अमलतास के पेड़ पर फूल खिलते है, इसके दो महीनो के अंदर अंदर बारिश जरूर होती है।" यह दक्षिणी एशिया का मूल निवासी है। दक्षिणी पाकिस्तान से पूर्व में भारत से म्यांमार और दक्षिण में श्रीलंका तक विश्व उत्सव में फूलों का धार्मिक महत्व है। 

मध्यम आकार का यह पेड़ मलयालम कैलेंडर के अनुसार अप्रैल में के महीने में खिलता है, जब केरल वासी विशु मनाते हैं। यह उष्णकटिबंधीय और उसे उद्देश्य उपोष्ण कटिबंधीय क्षेत्र में सजावटी पौधे के रूप में व्यापक रूप से उगाया जाता है। इसमें प्रचुर मात्रा में फूल आते हैं और पेड़ पीले रंग की वनस्पतियों से ढक जाते हैं, लगभग कोई भी पत्ती दिखाई नहीं देती। 
केरल का राजकीय फूल - अमलतास (गोल्डन शावर ट्री) || State Flower of - Kerala - Golden Shower Tree

English Translate 

State flower of Kerala - Amaltas

Common name: Amaltas (Golden Shower Tree)
Local name: Kanikonna
Scientific name: 'Cassia fistula'

You all must have seen yellow flowers hanging in bunches from the trees on the roadside and long hanging fruits after the flowers fall, yes we are talking about the Amaltas tree, this Amaltas flower is the state flower of Kerala. Amaltas is a beautiful tree, which is usually of medium size. Its leaves are large in size and dark green and the flowers are yellow in color, which bloom in bunches. Since ancient times, the branches, fruits and leaves of the Amaltas tree have been used as medicine. Kerala is the only state in India where Ayurvedic medicines are used first and most.
केरल का राजकीय फूल - अमलतास (गोल्डन शावर ट्री) || State Flower of - Kerala - Golden Shower Tree
State Animal – Elephant
State Bird – Hornbill
State Tree – Coconut
State Language – Malayalam
State Dance – Kathakali
State Flower – Amaltas, ‘Kanikonna’
State Fruit – Jackfruit
State Fish – Green Chromide

The state flower of Kerala is Amaltas (Golden Shower Tree). These flowers are the symbol of Vishu festival of Kerala and this tree was printed on the 20 rupee stamp. This tree is also commonly grown in Buddhist temples in Sri Lanka, where it is known by the Sinhalese name Ehela. Its scientific name is Cassia fistula. It is also known as Purging Cassia, Indian Laburnum, Kani Kona, or Pudding-Pipe Tree. It is a flowering plant of the Fabaceae family. Apart from India, it is also found in the surrounding areas of South-East Asia.
केरल का राजकीय फूल - अमलतास (गोल्डन शावर ट्री) || State Flower of - Kerala - Golden Shower Tree
Amaltas tree is 5 to 15 meters high. Golden yellow flowers bloom on this tree between March and July. Its fruits are long and cylindrical, which look like a stick. The fruits are green in color and when ripe, these fruits appear dark brown. The flowers, stem and leaves of this tree contain many types of nutrients, which are used as a treatment for many types of physical problems.

In some places, people believe that "when the flowers bloom on the Amaltas tree, it definitely rains within two months." It is native to South Asia. Flowers have religious significance in world festivals from southern Pakistan to India in the east to Myanmar and Sri Lanka in the south.
केरल का राजकीय फूल - अमलतास (गोल्डन शावर ट्री) || State Flower of - Kerala - Golden Shower Tree
This medium-sized tree blooms in the month of April according to the Malayalam calendar, when the people of Kerala celebrate Vishu. It is widely grown as an ornamental plant in the tropical and subtropical region. It flowers abundantly and the tree is covered with yellow vegetation, almost no leaves are visible.

अमलतास के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुणों के बारे में जानने के लिए क्लिक करें

मुंशी प्रेमचंद्र की कहानियाँ.. मानसरोवर-2 ...मिस पद्मा

मानसरोवर-2 ...मिस पद्मा

मिस पद्मा - मुंशी प्रेमचंद | Miss Padma by Munshi Premchand

कानून में अच्छी सफलता प्राप्त कर लेने के बाद मिस पद्मा को एक नया अनुभव हुआ, वह था जीवन का सूनापन। विवाह को उन्होंने एक अप्राकृतिक बंधन समझा था और निश्चय कर लिया था कि स्वतंत्र रहकर जीवन का उपभोग करूँगी। एम. ए. की डिग्री ली, फिर कानून पास किया और प्रैक्टिस शुरू कर दी। रूपवती थी, युवती थी, मृदुभाषिणी थी और प्रतिभाशालिनी भी थी। मार्ग में कोई बाधा न थी। देखते-देखते वह अपने साथी नौजवान मर्द वकीलों को पीछे छोड़कर आगे निकल गयी और अब उसकी आमदनी कभी-कभी एक हजार से भी ऊपर बढ़ जाती । अब उतने परिश्रम और सिर-मगजन की आवश्यकता न रही। मुकदमें अधिकतर वही होते थे, जिनका उसे पूरा अनुभव हो चुका था, उसके विषय में किसी तरह की तैयारी की उसे जरूरत न मालूम होती। 
मिस पद्मा - मुंशी प्रेमचंद | Miss Padma by Munshi Premchand

अपनी शक्तियों पर कुछ विश्वास भी हो गया था। कानून में कैसे विजय मिला करती हैं, इसके कुछ लटके भी उसे मालूम हो गये थे। इसलिये उसे अब बहुत अवकाश मिलता था और इसे वह किस्से-कहानियाँ पढ़ने, सैर करने, सिनेमा देखने, मिलने-मिलाने में खर्च करती थी। जीवन को सुखी बनाने के लिए किसी व्यसन की जरूरत को वह खूब समझती थी। उसने फूल और पौधे लगाने का व्यसन पाल लिया था। तरह-तरह के बीज और पौधे मँगाती औऱ उन्हें उगते-बढ़ते, फूलते-फलते देखकर खुश होती; मगर जीवन में सूनपने का अनुभव होता रहता था। यह बात न थी कि उसे पुरुषों से विरक्ति हो। नहीं, उसके प्रेमियों की कमी न थी। अगर उसके पास केवल रूप और यौवन होता, तो भी उपासकों का अभाव न रहता; मगर यहाँ तो रूप और यौवन के साथ धन भी थी। फिर रसिक-वृन्द क्यों चूक जाते? पद्मा को विलास से घृणा थी नहीं, घृणा थी पराधीनता से, विवाह को जीवन का व्यवसाय बनाने से। जब स्वतंत्र रहकर भोग-विलास का आनन्द उठाया जा सकता हैं, तो फिर क्यों न उठाया जाय? भोग में उसे कोई नैतिक बाधा न थी, इसे केवल देह की एक भूख समझती थी। इस भूख को किसी साफ-सुथरी दुकान से भी शान्त किया जा सकता हैं। और पद्मा को साफ-सुथरी दुकाम की हमेशा तलाश रहती थी। ग्राहक दुकान में वहीं चीज लेता हैं, जो उसे पसन्द आती हैं। पद्मा भी वहीं चीज चाहती थी। यों उसके दर्जनों आशिक थे- कई वकील, कई प्रोफेसर, कई डॉक्टर, कई रईस। मगर ये सब-के-सब ऐय्यास थे- बेफिक्र, केवल भौरे की तरह रस लेकर उड़ जाने वाले। ऐसा एक भी न था, जिस पर वह विश्वास कर सकती। अब उसे मालूम हुआ कि उसका मन केवल भोग नहीं चाहता, कुछ और भी चाहता हैं। वह चीज क्या थी? पूरा आत्म-समर्पण और यह उसे न मिलता था।

उसके प्रेमियों में एक मि. प्रसाद था- बड़ा ही रूपवान और धुरन्धर विद्‌वान। एक कॉलेज में प्रोफेसर था। वह भी मुक्त-भोग का आदर्श का उपासक था और पद्मा उस पर फिदा थी। चाहती थी उसे बाँधकर रखे, सम्पूर्णतः अपना बना ले; लेकिन प्रसाद चंगुल में न आता था।

सन्ध्या हो गयी थी। पद्मा सैर करने जा रही थी कि प्रसाद आ गये। सैर करना मुल्तवी हो गया। बातचीत में सैर से कहीं ज्यादा आनन्द था और पद्मा आज प्रसाद से कुछ दिल की बात कहने वाली थी। कई दिन के सोच-विचार के बाद उसने कह डालने का निश्चय किया।

उसने प्रसाद की नशीली आँखों से आँखें मिलाकर कहा- तुम यहीं मेरे बँगले में आकर क्यों नहीं रहते?

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प्रसाद ने कुटिल-विनोद के साथ कहा- नतीजा यह होगा कि दो-चार महीने में यह मुलाकात बन्द हो जायेगी।

‘मेरी समझ में नही आया, तुम्हारा आशय क्या हैं।’

‘आशय वहीं हैं, जो मैं कह रहा हूँ ।’

‘आखिर क्यों?’

‘मैं अपनी स्वाधीनता न खोना चाहूँगा, तुम अपनी स्वतन्त्रता न खोना चाहोगी। तुम्हारे पास तुम्हारे आशिक आयेंगे, मुझे जलन होगी। मेरे पास मेरी प्रेमिकाएँ आयेंगी, तुम्हें जलन होगी। मनमुटाव होगा, फिर वैमनस्य होगा और तुम मुझे घर से निकाल दोगी। घर तुम्हारा है ही! मुझे बुरा लगेगा ही, फिर यह मैत्री कैसे निभेगी?’

दोनो कई मिनट तक मौन रहे। प्रसाद ने परिस्थिति को इतने स्पष्ट, बेलाग, लट्ठमार शब्दों में खोलकर रख दिया था कि कुछ कहने की जगह न मिलती थी।
सम्पूर्ण मानसरोवर कहानियाँ मुंशी प्रेमचंद्र
आखिर प्रसाद ही को नुकता सूझा। बोला- जब तब हम दोनों यह प्रतिज्ञा न कर लें कि आज से मैं तुम्हारा हूँ और तुम मेरी हो, तब तक एक साथ निर्वाह नहीं हो सकता!

‘तुम यह प्रतिज्ञा करोंगे?’

‘पहले तुम बतलाओ।’

‘मैं करूँगी।’

‘तो मैं भी करूँगा।’

‘मगर इस एक बात के सिवा मैं और सभी बातों में स्वतंत्र रहूँगी!’

‘और मैं भी इस एक बात के सिवा हर बात में स्वतंत्र रहूँगा।’

‘मंजूर।’

‘मंजूर!’

‘तो कब से?’

‘जब से तुम कहो।’

‘मैं तो कहती हूँ, कल ही से।’

‘तय। लेकिन अगर तुमने इसके विरुद्ध आचारण किया तो?’

‘और तुमने किया तो?’

‘तुम मुझे घर से निकाल सकती हो; लेकिन मैं तुम्हें क्या सजा दूँगा?’

‘तुम मुझे त्याग देना, और क्या करोगे?’

‘जी नहीं, तब इतने से चित्त को शान्ति न मिलेगी। तब मैं चाहूँगा तुम्हे जलील करना; बल्कि तुम्हारी हत्या करना।’

‘तुम बहुत निर्दयी हो, प्रसाद?’

‘जब तक हम दोनों स्वाधीन हैं, हम किसी को कुछ कहने का हक नहीं, लेकिन एक बार प्रतिज्ञा में बँध जाने के बाद फिर न मैं इसकी अवज्ञा सह सकूँगा, न तुम सह सकोगी। तुम्हारे पास दंड का साधन हैं, मेरे पास नहीं। कानून मुझे कोई भी अधिकार नहीं देगा। मैं तो केवल अपनी पशुबल से प्रतिज्ञा का पालन कराऊँगा और तुम्हारे इतने नौकरों के सामने मैं अकेला क्या कर सकूँगा?’

‘तुम तो चित्र का श्याम पक्ष ही देखते हो! जब मैं तुम्हारी हो रही हूँ, तो यह मकान, नौकर-चाकर और जायदाद सब कुछ तुम्हारा हैं। हम-तुम दोनों जानते हैं कि ईर्ष्या से ज्यादा घृणित कोई सामाजिक पाप नहीं हैं। तुम्हें मुझसें प्रेम हैं या नहीं, मैं नहीं कह सकती; लेकिन तुम्हारे लिए मैं सब कुछ सहने, सब कुछ करने के लिए तैयार हूँ ।’

‘दिल से कहती हो पद्मा?’

‘सच्चे दिल से।’

‘मगर न-जाने क्यों तुम्हारे ऊपर विश्वास नहीं आ रहा हैं?’

‘मैं तो तुम्हारे ऊपर विश्वास कर रही हूँ ।’

‘यह समझ लो, मै मेहमान बनकर तुम्हारे घर में न रहूँगा, स्वामी बनकर रहूँगा।’

‘तुम घर के स्वामी ही नही, मेरे स्वामी बनकर रहोगे। मैं तुम्हारी स्वामिनी बन कर रहूँगी।’

3

प्रो. प्रसाद और मिस पद्मा दोनों साथ रहते हैं और प्रसन्न हैं। दोनों ही ने जीवन का जो आदर्श मन में स्थिर कर लिया था, वह सत्य बन गया हैं। प्रसाद को केवल दो-सौ रुपये वेतन मिलता हैं; मगर अप वह अपनी आमदनी का दुगुना भी खर्च कर दे तो परवाह नहीं। पहले वह कभी-कभी शराब पीता था, अब रात-दिन शराब में मस्त रहता है। अब उसके लिए अलग अपनी कार हैं, अलग नौकर हैं, तरह-तरह की बहुमूल्य चीजें मँगवाता रहता है और पद्मा बड़े हर्ष से उसकी सारी फिजूल-खर्जियाँ बर्दाश्त करती हैं। नहीं, बर्दाश्त करने का प्रश्न नहीं। वह खुद उसे अच्छे-से-अच्छे सूट पहनाकर अच्छे-से-अच्छे ठाठ में रखकर, प्रसन्न होती है। जैसी घड़ी इस वक़्त प्रसाद के पास है, शहर के बड़े-बड़े रईस के पास न होगी और पद्मा जितना ही उससे दबती है, प्रसाद उतना ही उसे दबाता है। कभी-कभी उसे नागवार भी लगता हैं, पर किसी अज्ञात कारण से अपने को उसके वश में पाती है। प्रसाद को जरा भी उदास या चिन्तित देखकर उसका मन चंचल हो जाता है। उस पर आवाजें कसी जाती हैं; फबतियाँ चुस्त की जाती हैं। जो उसके पुराने प्रेमी हैं, वे उसे जलाने और कुढ़ाने का प्रयास भी करते हैं; पर वह प्रसाद के पास आते ही सब कुछ भूल जाती है। प्रसाद ने उस पर पूरा आधिपत्य पा लिया है और उसे इसका ज्ञान पद्मा को उसने बारीक आँखों से पढ़ा है और उसका शासन अच्छी तरह पा गया है।

मगर जैसे राजनीति के क्षेत्र में अधिकार दुरुपयोग की ओर जाता है, उसी तरह प्रेम के क्षेत्र में भी वह दुरुपयोग की ओर ही जाता है और जो कमजोर है, उसे तावान देना पड़ता है। आत्माभिमानी पद्मा अब प्रसाद की लौड़ी थी और प्रसाद उसकी दुर्बलता का फायदा उठाने से क्यों चूकता? उसने कील की पतली नोक चुभा ली थी और बड़ी कुशलता से उत्तरोत्तर उसे अन्दर ठोंकता जाता था। यहाँ तक कि उसने रात को देर से आना शुरू किया। पद्मा को अपने साथ न ले जाता, उससे बहाना करता कि मेरे सिर में दर्द है औऱ जब पद्मा घुमने जाती तो अपनी कार निकाल लेता और उड़ जाता। दो साल गुजर गये और पद्मा को गर्भ था। वह स्थूल भी हो चली थी। उसके रूप में पहले की-सी नवीनता और मादकता न रह गई थी। वह घर की मुर्गी थी, साग बराबर।

एक दिन इसी तरह पद्मा लौटकर आयी, तो प्रसाद गायब थे। वह झुँझला उठी। इधर कई दिन से वह प्रसाद का रंग बदला हुआ देख रही थी। आज उसने कुछ स्पष्ट बाते कहने का साहस बटोरा। दस बज गये, ग्यारह बज गये, बारह बज गये, पद्मा उसके इन्तजार में बैठी थी। भोजन ठंड़ा हो गया, नौकर-चाकर सो गये। वह बार-बार उठती, फाटक पर जाकर नजर दौड़ाती। बाहर-एक बजे के करीब प्रसाद घर आये।

पद्मा ने साहस बटोरा था; पर प्रसाद के सामने जाते ही उसे इतनी कमजोरी मालूम हुई। फिर भी उसने जरा कड़े स्वर में पूछा- आज इतनी रात तक कहाँ थे? कुछ खबर है, कितनी रात है?

4

प्रसाद को वह इस वक़्त असुन्दरता की मूर्ति-सी लगी। वह एक विद्यालय की छात्रा के साथ सिनेमा देखने गया था। बोला- तुमको आराम से सो जाना चाहिए था। तुम जिस दशा में हो, उसमें तुम्हें, जहाँ तक हो सके, आराम से रहना चाहिए।

पद्मा का साहस कुछ प्रबल हुआ- तुमसे पूछती हूँ, उसका जवाब दो। मुझे जहन्नुम में भेजो!

‘तो तुम भी मुझे जहन्नुम में जाने दो।’

‘तुम मेरे साथ दगा कर रहे हो, यह मैं साफ देख रही हूँ ।’

‘तुम्हारी आँखों की ज्योति कुछ बढ़ गयी होगी!’

‘मैं इधर कई दिनो से तुम्हारा मिजाज कुछ बदला हुआ देख रही हूँ ।’

‘मैं तुम्हारे साथ अपने को बेचा नहीं है। अगर तुम्हारा जी मुझसे भर गया हो, तो मैं आज जाने को तैयार हूँ ।’

‘तुम जाने की धमकी क्या देते हो! यहाँ तुमने आकर कोई बड़ा त्याग नहीं किया है।’

‘मैंने त्याग नहीं किया हैं? तुम यह कहने का साहस कर रही हो। मैं देखता हूँ, तुम्हारा मिजाज़ बिगड़ रहा है। तुम समझती हो, मैंने इसे अपंग कर दिया। मगर मैं इसी वक़्त तुम्हें ठोकर मारने को तैयार हूँ, इसी वक़्त, इसी वक़्त!’

पद्मा का साहस जैसे बुझ गया था। प्रसाद अपना ट्रँक सँभाल रहा था। पद्मा ने दीन-भाव से कहा- मैंने तो ऐसी कोई बात नहीं कहीं, जो तुम इतना बिगड़ उठे। मैं तो केवल तुमसे पूछ रहीं थी, कहाँ थे। क्या मुझे इतना भी अधिकार नहीं देना चाहते? मैं कभी तुम्हारी इच्छा के विरुद्ध कोई काम नहीं करती और तुम मुझे बात-बात पर डाँटते रहते हो। तुम्हें मुझ पर जरा भी दया नहीं आती। मुझे तुमसे कुछ भी तो सहानुभूति मिलनी चाहिए। मैं तुम्हारे लिए क्या कुछ करने को तैयार नहीं हूँ ? और आज जो मेरी दशा हो गयी है, तो तुम मुझसे आँखे फेर लेते हो। 

उसका कंठ रुँध गया और मेज पर सिर रखकर फूट-फूटकर रोने लगी। प्रसाद ने पूरी विजय पायी।

पद्मा के लिए मातृत्व अब बड़ा ही अप्रिय प्रसंग था। उस पर चिंता मँडराती रहती। कभी-कभी वह भय से काँप उठती और पछताती। प्रसाद की निरंकुशता दिन-दिन बढती जाती थी। क्या करे, क्या न करें। गर्भ पूरा हो गया था, वह कोर्ट न जाती थी। दिन-भर अकेली बैठी रहती थी। प्रसाद सन्ध्या समय आते, चाय-वाय पीकर फिर उड़ जाते, तो ग्यारह-बारह बजे से पहले न लौटते। वह कहाँ जाते हैं, यह भी उससे छिपा न था। प्रसाद को तो जैसे उसकी सूरत से नफरत थी। पूर्ण गर्भ, पीला मुख, चिन्तित, सशंक, उदास। फिर भी वह प्रसाद को श्रृंगार और आभूषण से बाँधने की चेष्टा से बाज न आती थी। मगर वह जितना ही प्रयास करती, उतना ही प्रसाद का मन उसकी ओर से फिरता था। इस अवस्था में श्रृंगार उसे और भी भद्दा लगता।

प्रसव-वेदना हो रही थी। प्रसाद का पता नहीं। नर्स मौजूद थी, लेडी डॉक्टर मौजूद थी; मगर प्रसाद का न रहना पद्मा की प्रसव वेदना को और भी दारूण बना रहा था।

बालक को गोद में देखकर उसका कलेजा फूल उठा, मगर फिर प्रसाद को सामने न पाकर उसने बालक की ओर से मुँह फेर लिया। मीठे फल में जैसे कीड़े पड़ गये हों।

पाँच दिन सौर-गृह में काटने के बाद जैसे पद्मा जेलखाने से निकली- नंगी तलवार बनी हुई। माता बनकर वह अपने में एक अद्भूत शक्ति का अनुभव कर रही थी।

उसने चपरासी को चेक देकर बैंक भेजा। प्रसव-सम्बन्धी कई बिल अदा करने थे। चपरासी खाली हाथ लौट आया।

पद्मा ने पूछा- रुपये?

‘बैंक बाबू ने कहा, रुपये प्रसाद बाबू निकाल ले गये।’

पद्मा को गोली लग गयी। बीस हजार रुपये प्राणों की तरह संचित कर रखे थे, इसी शिशु के लिए। हाय! सौर से निकलने पर मालूम हुआ, प्रसाद विद्‌यालय की एक बालिका को लेकर इंगलैंड की सैर करने चले गये । झल्लायी हुई घर में आयी, प्रसाद की तसवीर उठाकर जमीन पर पटक दी और उसे पैरों से कुचला। उसका जितना सामान था, उसे जमा करके दियासलाई लगा दी और उसके नाम पर थूक दिया।

एक महीना बीत गया था। पद्मा अपने बँगले के फाटक पर शिशु को गोद में लिए खड़ी थी। उसका क्रोध अब शोकमय निराशा बन चुका था। बालक पर कभी दया आती, कभी प्यार आता, कभी घृणा होती। उसने सड़क पर देखा, एक यूरोपियन लेडी अपने पति के साथ अपने बालक को गाड़ी में बिठाये लिये चली जा रही थी। उसने हसरत-भरी आँखों से उस खुशनसीब जोड़े को देखा और उसकी आँखे सजल हो गयीं।

चमगादड़ के बारे में ३० रोचक तथ्य || 30 Interesting Facts About the Bat

चमगादड़ के बारे में रोचक तथ्य

कहते हैं की धरती पर मौजूद हर एक जीव हमारे दैनिक जीवन को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से प्रभावित करते हैं। क्या आप कभी सोच सकते हैं कि चमगादड़ भी हमारे जीवन को प्रभावित करते हैं? तो चलिए आज जानते हैं, चमगादड़ के विषय में कुछ रोचक बातें। चमगादड़ हमारी दुनिया में सबसे ज़्यादा गलत समझे जाने वाले जानवरों में से एक हैं, चमगादड़ों को दुष्ट प्राणी और बीमारी फैलाने वाला माना जाता है। जबकि यह सच नहीं है। चमगादड़ अद्भुत जानवर हैं जो दुनिया भर के कई पारिस्थितिकी तंत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

चमगादड़ के बारे में ३० रोचक तथ्य || 30 Interesting Facts About the Bat

  1. चमगादड़ दुनिया का एकमात्र ऐसा जीव है, जो स्तनधारी भी है और उड़ने की क्षमता भी रखता है। पूरी दुनिया में इस जीव की 1400 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं। चमगादड़ का वैज्ञानिक नाम काइरोप्टेरा है, जिसका ग्रीक भाषा में अर्थ है ‘हाथ का पंख’। 
  2. यह नाम चमगादड़ की लंबी उंगलियों को दर्शाता है, जो एक पतली झिल्ली से जुड़ी होती है। चमगादड़ भले ही उड़ते हैं लेकिन वह पक्षियों की श्रेणी में नहीं आते हैं। 
  3. शायद आपको जानकर हैरानी हो कि चमगादड़ की अधिकांश प्रजातियां कीड़े खाती हैं, कुछ प्रजातियां फल और फूल भी खाती हैं, कुछ केवल खून पीकर ही जीवित रहती हैं और कुछ चमगादड़ मछली, मेंढक, छिपकली आदि चीजें भी खाते हैं। 
  4. एक छोटा चमगादड़ एक रात में सैकड़ों की संख्या में कीड़े खा सकता है। एक छोटा चमगादड़ प्रति घंटे 600 मच्छरों को खा जाता है। 
  5. खून पीने वाले चमगादड़ की प्रजातियों को "पिशाच चमगादड़" कहा जाता है। इन चमगादरों के काटने से रेबीज (एक प्रकार की बीमारी) हो सकता है। 
  6. आकार के आधार पर चमगादरों को दो श्रेणी में रखा गया है। बड़े आकार के चमगादड़ को मेगा बैट और छोटे आकार के चमगादड़ को माइक्रो बैट कहा जाता है।
  7. चीन और जापान में चमगादड़ को सौभाग्य और शुभ संकेत का प्रतीक माना जाता है। दुनिया में सबसे ज्यादा चमगादड़ अमेरिका में पाया जाता है।
  8. साधारणतया चमगादड़ का जीवन काल 20 वर्ष होता है, लेकिन कुछ प्रजातियां ऐसी भी होती हैं, जो 30 वर्ष तक जीवित रह सकती हैं। 
  9. चमगादड़ 60 मील प्रति घंटे (या अधिक) की गति से उड़ सकते हैं।
  10. चमगादड़ अपनी अद्भुत सुनने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं।चमगादड़ आंखों से कम, बल्कि ध्वनि तरंगों की मदद से देखते हैं। चमगादड़ अपने कान को घुमा भी सकते हैं, जिससे उन्हें ध्वनि की दिशा का पता लगाने में मदद मिलती है।
  11. ऐसा कहा जाता है कि जानवर जितना छोटा होता है, उसकी आयु उतनी ही कम होती है, लेकिन चमगादड़ लंबी आयु के इस नियम को तोड़ते हैं। हालाँकि अधिकांश चमगादड़ जंगल में 20 साल से कम जीते हैं, लेकिन वैज्ञानिकों ने छह ऐसी प्रजातियों का दस्तावेजीकरण किया है जो 30 साल से ज़्यादा जीती हैं। 
  12. सबसे लम्बे समय तक जीवित रहने वाला चमगादड़ 41 वर्ष का है।2006 में साइबेरिया के एक छोटे से चमगादड़ ने 41 साल की उम्र में विश्व रिकॉर्ड बनाया था। 
  13. चमगादड़ ग्रह पर सबसे प्राचीन निवासियों में से एक माने जाते हैं।
  14. चमगादड़ अपने शरीर के तापमान को 50 डिग्री तक बदल सकते हैं। 
  15. बिल्लियों की तरह चमगादड़ भी खुद को साफ करते हैं। चमगादड़ गंदे होने के बजाय खुद को साफ करने में बहुत समय लगाते हैं। कुछ तो एक-दूसरे को भी साफ करते हैं। चिकने फर के अलावा, सफाई करने से परजीवियों को नियंत्रित करने में भी मदद मिलती है। 
  16. केवल कुत्ते ही पिल्ले पैदा करने वाले जीव नहीं हैं। शिशु चमगादड़ों को पिल्ले कहा जाता है, और चमगादड़ों का समूह एक "कॉलोनी" कहलाता है। 
  17. चमगादड़ की बीट का उपयोग बारूद बनाने के लिए किया जा सकता है। 
  18. चमगादड़ का सिर 180 डिग्री तक मुड़ जाता है। सभी चमगादड़ उल्टे नहीं लटकते हैं।
  19. जैसा कि हम सुनते चले आए हैं कि चमगादड़ देख नहीं सकते, पर वास्तव में चमगादड़ अंधे नहीं होते बल्कि वह इंसानों की तुलना में बेहतर देख सकते हैं। 
  20. चमगादड़ों की सबसे बड़ी गुफा टेक्सास में है, जहाँ करीब 2 करोड़ चमगादड़ रहते हैं।  
  21. चमगादड़ पृथ्वी पर लगभग हर जगह पाए जाते हैं। 
  22. उड़ान के दौरान चमगादड़ों का दिल एक मिनट में 1,000 बार धड़कता है। 
  23. दुनिया के सबसे लम्बे चमगादड़ के पंखो की लम्बाई 5 से 6 फुट तक की है।
  24. सभी चमगादड़ शीत निद्रा में नहीं रहते। हालाँकि भालू और चमगादड़ दो सबसे प्रसिद्ध शीतनिद्राजीवी हैं, लेकिन सभी चमगादड़ अपनी सर्दियाँ गुफाओं में नहीं बिताते। 
  25. कुछ प्रजातियाँ, जैसे धब्बेदार चमगादड़, ठंड पड़ने पर भोजन की तलाश में गर्म क्षेत्रों की ओर पलायन करके जीवित रहती हैं। 
  26. चमगादड़ों के प्राकृतिक शिकारी बहुत कम हैं - बीमारी सबसे बड़े खतरों में से एक है। वैसे तो उल्लू, बाज और सांप चमगादड़ खाते हैं, लेकिन यह उन लाखों चमगादड़ों की तुलना में कुछ भी नहीं है जो व्हाइट-नोज़ सिंड्रोम से मर रहे हैं। 
  27. अन्य स्तनधारियों की तरह, मादा चमगादड़ अपने शावकों को कीड़ों से नहीं, बल्कि स्तनदूध से दूध पिलाती हैं। 
  28. अधिकांश चमगादड़ एक ही शावक को जन्म देते हैं। कम से कम एक प्रजाति ऐसी है जिसके जुड़वाँ बच्चे आम तौर पर होते हैं और वह है पूर्वी लाल चमगादड़। मादा चमगादड़ वसंत में गुफाओं, मृत पेड़ों और चट्टानों की दरारों में नर्सरी कॉलोनियाँ बनाती हैं । 
  29. कभी सोचा है कि चमगादड़ पेड़ पर हमेशा उल्टा ही क्यों लटके रहते हैं? असल में चमगादड़ की शारीरिक बनावट दूसरे पक्षियों से भिन्न होती है।
  30. जमीन या पेड़ पर बैठे पक्षी अपने पैरों पर जोर देकर तुरंत तेज गति से उड़ान भरने में सक्षम होते हैं, जबकि चमगादड़ ऐसा नहीं कर पाते, क्योंकि उनके पैर इतने मजबूत नहीं होते कि वे दूसरे पक्षियों की तरह उड़ान भर सकें।
चमगादड़ के बारे में ३० रोचक तथ्य || 30 Interesting Facts About the Bat

अब ये जानिए कि चमगादड़ हमारे दैनिक जीवन को प्रभावित कैसे करते हैं?

क्या आप जानते हैं कि 300 से ज़्यादा फलों की प्रजातियाँ परागण के लिए चमगादड़ों पर निर्भर हैं? चमगादड़ नट्स, अंजीर और कोको के बीज फैलाने में मदद करते हैं। चमगादड़ों के बिना, हमारे पास एगेव या प्रतिष्ठित सगुआरो कैक्टस जैसे पौधे भी नहीं होते। हर रात, चमगादड़ अपने शरीर के वजन के बराबर कीड़े खा सकते हैं, जिनकी संख्या हज़ारों में होती है, जो किसानों के फसल को बर्बाद करती हैं। इसतरह ये चमगादड़ वनपालों और  किसानों को कीटों से अपनी फ़सलों की रक्षा करने में मदद करता है ।

चमगादड़ के बारे में ३० रोचक तथ्य || 30 Interesting Facts About the Bat

चमगादड़ चिकित्सा जगत के लिए प्रेरणादायी चमत्कार हैं। लगभग 80 दवाइयाँ पौधों से आती हैं, जो अपने अस्तित्व के लिए चमगादड़ों पर निर्भर हैं। 

संरक्षण प्रयासों से चमगादड़ प्रजातियों को पुनर्जीवित करने में मदद मिल सकती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले 15 वर्षों में उत्तरी अमेरिका की चमगादड़ प्रजातियों में से 52% की जनसंख्या में भारी गिरावट का खतरा है। दस अमेरिकी प्रजातियों को लुप्तप्राय के रूप में सूचीबद्ध किया गया है, जबकि एक और को संकटग्रस्त के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। इन अद्भुत जानवरों को आवास की हानि और बीमारी सहित कई खतरों का सामना करना पड़ता है, लेकिन सहयोगात्मक, अंतर्राष्ट्रीय संरक्षण प्रयास एक अंतर ला सकते हैं। दक्षिण-पश्चिमी अमेरिका और मैक्सिको में, सहयोग ने एक प्रजाति, कम लंबी नाक वाले चमगादड़ को ठीक होने और लुप्तप्राय प्रजातियों की सूची से हटाए जाने वाली पहली चमगादड़ प्रजाति बनने में मदद की है। 1988 में, 14 ज्ञात बसेरा रेंज में 1,000 से कम चमगादड़ होने का अनुमान लगाया गया था। 2018 तक - तीस साल बाद - 75 बसेरा में अनुमानित 200,000 चमगादड़ थे।

चमगादड़ के बारे में ३० रोचक तथ्य || 30 Interesting Facts About the Bat

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Interesting facts about bats

It is said that every living creature on earth affects our daily life directly or indirectly. Can you ever imagine that bats also affect our lives? So let's know today, some interesting facts about bats. Bats are one of the most misunderstood animals in our world, bats are considered evil creatures and disease spreaders. While this is not true. Bats are amazing animals that play an important role in many ecosystems around the world.

चमगादड़ के बारे में ३० रोचक तथ्य || 30 Interesting Facts About the Bat

  1. Bats are the only creature in the world, which is also a mammal and also has the ability to fly. More than 1400 species of this creature are found all over the world. The scientific name of bats is Chiroptera, which means 'wing of the hand' in Greek language.
  2. This name refers to the long fingers of the bat, which are connected by a thin membrane. Even though bats fly, they do not fall in the category of birds.
  3. You might be surprised to know that most species of bats eat insects, some species also eat fruits and flowers, some survive only by drinking blood and some bats also eat fish, frogs, lizards etc.
  4. A small bat can eat hundreds of insects in a night. A small bat eats 600 mosquitoes per hour.
  5. The species of bats that drink blood are called "vampire bats". The bite of these bats can cause rabies (a type of disease).
  6. Based on size, bats are classified into two categories. Large-sized bats are called mega bats and small-sized bats are called micro bats.
  7. In China and Japan, bats are considered a symbol of good luck and auspicious sign. The highest number of bats in the world is found in America.
  8. Generally, the life span of a bat is 20 years, but there are some species that can live up to 30 years.
  9. Bats can fly at a speed of 60 miles per hour (or more).
  10. Bats are known for their amazing hearing abilities. Bats see not with their eyes but with the help of sound waves. Bats can also move their ears, which helps them detect the direction of sound.
  11. It is said that the smaller the animal, the shorter its lifespan, but bats break this rule of longevity. Although most bats live less than 20 years in the wild, scientists have documented six species that live more than 30 years.
  12. The longest-living bat is 41 years old. In 2006, a small bat from Siberia set a world record at the age of 41.
  13. Bats are considered to be one of the most ancient inhabitants on the planet.
  14. Bats can change their body temperature by up to 50 degrees.
  15. Like cats, bats also clean themselves. Bats spend a lot of time cleaning themselves rather than getting dirty. Some even clean each other. Besides the smoother fur, grooming also helps control parasites.
  16. Dogs aren't the only animals that produce puppies. Baby bats are called pups, and a group of bats is called a "colony."
  17. Bat droppings can be used to make gunpowder.
  18. A bat's head can turn 180 degrees. Not all bats hang upside down.
  19. As we have been hearing, bats can't see, but in reality bats are not blind, but they can see better than humans.
  20. The largest bat cave is in Texas, where about 20 million bats live.
  21. Bats are found almost everywhere on Earth.
  22. During flight, the heart of bats beats 1,000 times a minute.
  23. The wingspan of the world's longest bat is 5 to 6 feet.
  24. Not all bats hibernate. Although bears and bats are the two most well-known hibernators, not all bats spend the winter in caves.
  25. Some species, such as the spotted bat, survive by migrating to warmer areas in search of food when it gets cold.
  26. Bats have very few natural predators - disease is one of the biggest threats. While owls, hawks and snakes eat bats, that's nothing compared to the millions of bats that are dying from white-nose syndrome.
  27. Unlike other mammals, female bats feed their young with breast milk, not insects.
  28. Most bats give birth to a single baby. At least one species commonly has twins: the eastern red bat. Female bats form nursery colonies in caves, dead trees and rock crevices in the spring.
  29. Ever wonder why bats always hang upside down on trees? Bats have a different anatomy than other birds.
  30. Birds sitting on the ground or trees are able to fly instantly at high speed by putting pressure on their legs, whereas bats cannot do this because their legs are not strong enough to fly like other birds.
चमगादड़ के बारे में ३० रोचक तथ्य || 30 Interesting Facts About the Bat

Now know how bats affect our daily life?

Did you know that more than 300 fruit species depend on bats for pollination? Bats help spread the seeds of nuts, figs and cocoa. Without bats, we wouldn't have plants like agave or the iconic saguaro cactus. Every night, bats can eat their body weight in insects, numbering in the thousands, which destroys farmers' crops. In this way, these bats help foresters and farmers protect their crops from pests.

Bats are an inspiring wonder for the medical world. About 80 medicines come from plants, which depend on bats for their survival.

चमगादड़ के बारे में ३० रोचक तथ्य || 30 Interesting Facts About the Bat

Conservation efforts can help revive bat species. Experts estimate that 52% of North America's bat species are at risk of a massive population decline in the next 15 years. Ten U.S. species are listed as endangered, while another is listed as threatened. These amazing animals face many threats, including habitat loss and disease, but collaborative, international conservation efforts can make a difference. In the southwestern U.S. and Mexico, collaboration has helped one species, the lesser long-nosed bat, recover and become the first bat species to be removed from the endangered species list. In 1988, there were estimated to be fewer than 1,000 bats in 14 known roosting ranges. By 2018 – thirty years later – there were an estimated 200,000 bats in 75 roosting ranges.

योगमाया मंदिर अथवा जोगमाया मंदिर, महरौली || Shri Yogmaya Temple, Mehrauli

योगमाया मंदिर अथवा जोगमाया मंदिर

आज एक ऐसे मंदिर की चर्चा करेंगे जो अन्‍य मंदिरों की तरह बहुत ज्‍यादा लोकप्रिय और सुुंदर तो नहीं है, पर बावजूद इसके मंदिर की महत्‍ता बिल्‍कुल भी कम नहीं है। इस मंदिर की वास्‍तुशिल्‍प और संरचना भी बहुत सादी  है। यह है दिल्ली के महरौली में स्थित "श्री योगमाया मंदिर" जिसको "जोगमाया मंदिर" के नाम से भी जाना जाता है। योगमाया मंदिर कुतुब मीनार से सौ मीटर की दूरी पर महरौली के पास में स्थित है। लोगों के बीच ऐसी धारणा है कि इस मंदिर को खुद भगवान कृष्ण ने बनाया है। 

योगमाया मंदिर अथवा जोगमाया मंदिर, महरौली || Shri Yogmaya Temple, Mehrauli

योगमाया मंदिर एक प्राचीन हिन्दू मंदिर है, जो देवी योगमाया को समर्पित है। कहा जाता है कि यह मंदिर पांच हजार वर्ष पुराना है। इसकी स्थापना पांडवों ने की थी। योगमाया भगवान कृष्ण की बड़ी बहन थीं। पांडवों ने उन्हीं के वरदान से विजय गाथा लिखी थी। मान्यता है कि यहां दर्शन मात्र से बड़े से बड़े संकट दूर हो जाते हैं। यह मंदिर दिल्ली के प्रमुख मंदिरों में से है। ऐसा माना जाता है कि श्री योगमाया मंदिर उन पांच मंदिरों में से एक है, जो कि महाभारत काल से हैं। 

दिल्ली के लोगों के बीच योगमाया मंदिर कम मशहूर है, परन्तु महरौली में रहने वाले लोगों में यह खासा प्रचलित है। यहाँ के लोग रोज इस मंदिर में पूजा अर्चना करने आते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार महरौली को पहले योगमाया देवी के नाम पर योगिनीपुरम कहा जाता था। मंदिर 5000 साल पुराना बताया जाता है। आश्‍चर्य की बात यह है कि ये मंदिर किसी इंसान ने नहीं बल्कि खुद भगवान ने बनवाया है। 

योगमाया मंदिर अथवा जोगमाया मंदिर, महरौली || Shri Yogmaya Temple, Mehrauli

महाभारत तो लगभग सभी लोगों ने देखी होगी और भगवान श्री कृष्ण के जन्म का मंजर सबको याद होगा। योगमाया भगवान कृष्ण की बहन थीं, जिनका जन्‍म उन्‍हीं के साथ हुआ था। योगमाया वह देवी हैं, जिन्‍हें भगवान कृष्ण के पिता ने यमुना नदी को पार करके लाया गया था और कृष्ण की जगह पर देवकी के बगल में रख दिया था। कंस ने इन्हें भी देवकी के अन्‍य संतानों की तरह मारना चाहा, लेकिन देवी योगमाया उसके हाथों से निकलकर अदृश्य हो गई थीं और अपने वास्तिवक रूप में सामने आकर कंस की मृत्यु की भविष्यवाणी कीं।

कहा जाता है कि देवी योगमाया आदि शक्ति मां लक्ष्मी की अवतार हैं। उन्हें सतगुण प्रदान देवी भी कहते हैं। इसी वजह से मंदिर में किसी भी तरह की बलि पर प्रतिबंध है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, योगमाया का अर्थ दैवीय भ्रम है और कई लोग उन्‍हें सभी प्राणियों की माता के रूप में पूजते हैं। योगमाया के अलावा, मंदिर में भगवान राम, शिव, गणेश और अन्य देवता भी विराजमान हैं।

योगमाया मंदिर अथवा जोगमाया मंदिर, महरौली || Shri Yogmaya Temple, Mehrauli

970 ईसवी से फारसी शासक गजनी द्वारा नुकसान पहुंचाए जाने के बावजूद भी मंदिर पिछले 5,000 वर्षों से खड़ा है। स्थानीय पुजारी के अनुसार, यह गजनी और बाद में मामलुकों द्वारा नष्ट किए गए 27 मंदिरों में से एक है। यह एकमात्र जीवित मंदिर है जो सल्तनत से पहले से उपयोग में है। मंदिर का सबसे पहले जीर्णोद्धार मुगल सम्राट अकबर द्वितीय (1806-37) के शासनकाल के दौरान लाला सेठमल द्वारा किया गया था।

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Yogmaya Temple or Jogmaya Temple

Today we will discuss a temple which is not very popular and beautiful like other temples, but despite this the importance of the temple is not less at all. The architecture and structure of this temple is also very simple. This is "Shri Yogmaya Temple" located in Mehrauli, Delhi, which is also known as "Jogmaya Temple". Yogmaya Temple is located near Mehrauli at a distance of hundred meters from Qutub Minar. There is a belief among the people that this temple was built by Lord Krishna himself.

योगमाया मंदिर अथवा जोगमाया मंदिर, महरौली || Shri Yogmaya Temple, Mehrauli

Yogmaya Temple is an ancient Hindu temple, which is dedicated to Goddess Yogmaya. It is said that this temple is five thousand years old. It was established by the Pandavas. Yogmaya was the elder sister of Lord Krishna. The Pandavas wrote the Vijay Gatha with her blessings. It is believed that even the biggest problems are solved by just visiting here. This temple is one of the major temples of Delhi. It is believed that Shri Yogmaya Mandir is one of the five temples which are from the Mahabharata period.

Yogmaya Mandir is less famous among the people of Delhi, but it is quite popular among the people living in Mehrauli. People here come to worship in this temple every day. According to the mythological story, Mehrauli was earlier called Yoginipuram in the name of Yogmaya Devi. The temple is said to be 5000 years old. The surprising thing is that this temple was not built by any human but by God himself.

योगमाया मंदिर अथवा जोगमाया मंदिर, महरौली || Shri Yogmaya Temple, Mehrauli

Almost everyone must have seen Mahabharata and everyone must remember the scene of Lord Shri Krishna's birth. Yogmaya was Lord Krishna's sister, who was born along with him. Yogmaya is the goddess who was brought by Lord Krishna's father after crossing the Yamuna river and was placed next to Devaki in place of Krishna. Kansa wanted to kill them like other children of Devaki, but Goddess Yogmaya slipped out of his hands and became invisible and appeared in her real form and predicted Kansa's death.

It is said that Goddess Yogmaya is the incarnation of Adi Shakti Maa Lakshmi. She is also known as Satgun Pradaan Devi. This is why any kind of sacrifice is prohibited in the temple. According to Hindu mythology, Yogmaya means divine illusion and many people worship her as the mother of all creatures. Apart from Yogmaya, Lord Rama, Shiva, Ganesha and other deities are also enshrined in the temple.

योगमाया मंदिर अथवा जोगमाया मंदिर, महरौली || Shri Yogmaya Temple, Mehrauli

The temple has stood for the last 5,000 years despite damage caused by the Persian ruler Ghazni since 970 AD. According to the local priest, it is one of the 27 temples destroyed by Ghazni and later by the Mamluks. It is the only surviving temple that has been in use since before the Sultanate. The temple was first renovated by Lala Sethmal during the reign of the Mughal emperor Akbar II (1806–37).