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बैद्यनाथ धाम, देवघर, झारखंड (रावणेश्वर महादेव ज्योतिर्लिंग) || Baidyanath Dham, Deoghar, Jharkhand (Ravneshwar Mahadev Jyotirlinga)

बैद्यनाथ धाम, देवघर

देवाधिदेव महादेव के ज्योतिर्लिंगों में से एक रावणेश्वर महादेव, बैद्यनाथ धाम (देवघर, झारखंड) है। इस ज्योतिर्लिंग की कुछ विशिष्टताएँ हैं।

बैद्यनाथ धाम, देवघर, झारखंड (रावणेश्वर महादेव ज्योतिर्लिंग)

सामान्यतः शिव मन्दिरों के शिखर पर कलश और त्रिशूल लगा होता है, किन्तु बैद्यनाथ धाम मन्दिर विश्व का इकलौता मन्दिर है, जिसके ऊपर त्रिशूल नहीं "पञ्चशूल" स्थापित है, इसीलिए इस शिव मन्दिर का महत्व अन्य से विशिष्ट है।

बैद्यनाथ धाम, देवघर, झारखंड (रावणेश्वर महादेव ज्योतिर्लिंग)

ऐसी मान्यता है जिस प्रकार काशी शिव के त्रिशूल पर टिका हुआ है और बाबा विश्वनाथ काशी की सुरक्षा स्वयं करते हैं उसी प्रकार बैद्यनाथ धाम पञ्चशूल पर टिका हुआ है और इसकी सुरक्षा बाबा रावणेश्वर करते हैं। ये पञ्चशूल सम्पूर्ण देवघर नगर का सुरक्षा कवच है।

पञ्चशूल दर्शन का महत्व शिवलिङ्ग स्पर्श के समतुल्य माना जाता है। यह पञ्चशूल विश्व गौरव है।

बैद्यनाथ धाम, देवघर, झारखंड (रावणेश्वर महादेव ज्योतिर्लिंग)

बाबा बैद्यनाथ मन्दिर का स्वर्ण कलश व पञ्चशूल भगवान शिव के पञ्चरूप रुद्रावतार हैं। यह लगभग २०७५ वर्ष पुरातन मन्दिर माना जाता है। इस पञ्चशूल को प्रतिवर्ष एक बार शिवरात्रि में नीचे उतार कर लाया जाता है और पञ्चशूल का विधि विधान से पूजन अर्चन, अभिषेक विशेष प्रक्रिया से किया जाता है। पूजन के उपरांत पञ्चशूल को पुनः स्थापित कर दिया जाता है। 

हर हर महादेव 🙏
जय भोलेनाथ 
🙏

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Baidyanath Dham, Deoghar

One of the Jyotirlingas of Devadhidev Mahadev is Ravneshwar Mahadev, Baidyanath Dham (Devghar, Jharkhand). This Jyotirlinga has some specialties.

बैद्यनाथ धाम, देवघर, झारखंड (रावणेश्वर महादेव ज्योतिर्लिंग)

Generally, Kalash and Trishul are installed on the top of Shiva temples, but Baidyanath Dham Temple is the only temple in the world, on which "Panchshul" is installed instead of Trishul, that is why the importance of this Shiva temple is special from others.

It is believed that just as Kashi rests on Shiva's Trishul and Baba Vishwanath himself protects Kashi, similarly Baidyanath Dham rests on Panchshul and Baba Ravaneshwar protects it. This Panchshool is the protective shield of the entire Deoghar city.

The importance of Panchshool Darshan is considered equivalent to touching Shivalinga. This Panchshool is world pride.

बैद्यनाथ धाम, देवघर, झारखंड (रावणेश्वर महादेव ज्योतिर्लिंग)

The golden Kalash and Panchshul of Baba Baidyanath Temple are the five forms of Rudravatar of Lord Shiva. This temple is considered to be about 2075 years old. This Panchshool is brought down once every year during Shivratri and Panchshool is worshiped with rituals and a special process called Abhishek. After the worship, Panchshool is reinstalled.

Har Har Mahadev 🙏
Jai Bholenath 🙏

रख सकों तो एक निशानी हूँ मैं

रख सको तो एक निशानी हूँ मैं

Rupa Oos ki ek Boond
"ए जिंदगी
नसीहत गिरते पत्थरो को
रुकने की मूर्ख ही देता है
बारिश की बूंदों को भी अपने
अंजाम का पता होता है..❣️"

रख सकों तो एक निशानी हूँ मैं

खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं

रोक ना पाए जिसको ये सारी दुनिया

वो एक बूंद आँख का पानी हूँ मैं…


सबको प्यार देने की आदत है हमें

अपनी अलग पहचान बनाने की आदत है हमें

कितना भी गहरा जख़्म दे कोई

उतना ही ज्यादा मुस्कुरानें की आदत है हमें..


इस अजनबी दुनिया में अकेला ख़्वाब हूँ मैं

सवालों से खफा छोटा सा जवाब हूँ मैं

जो समझ ना सके मुझे उनके लिए कौन

जो समझ गए उनके लिए खुली किताब हूँ मैं..


आँख से देखोगे तो खुश पाओगे

दिल से पूछोगे तो दर्द का सैलाब हूँ मैं

अगर रख सकों तो एक निशानी हूं मैं

खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं…

Rupa Oos ki ek Boond
"जिंदगी हर रोज नए सितम दिखाती है
यही इंसान को सही मायने में
जीना सिखाती है..❣️"

तीन गुरु

तीन गुरु

बहुत समय पहले की बात है, किसी नगर में एक बेहद प्रभावशाली महंत रहते थे । उन के पास शिक्षा लेने हेतु कई शिष्य आते थे। एक दिन एक शिष्य ने महंत से सवाल किया, स्वामीजी आपके गुरु कौन है? आपने किस गुरु से शिक्षा प्राप्त की है?” महंत शिष्य का सवाल सुन मुस्कुराए और बोले, मेरे हजारो गुरु हैं! यदि मै उनके नाम गिनाने बैठ जाऊ तो शायद महीनो लग जाए। लेकिन फिर भी मै अपने तीन गुरुओ के बारे मे तुम्हे जरुर बताऊंगा।

Rupa Oos ki ek Boond

एक था चोर..

एक बार में रास्ता भटक गया था और जब दूर किसी गाव में पंहुचा तो बहुत देर हो गयी थी। सब दुकाने और घर बंद हो चुके थे। लेकिन आख़िरकार मुझे एक आदमी मिला जो एक दीवार में सेंध लगाने की कोशिश कर रहा था। मैने उससे पूछा कि मै कहा ठहर सकता हूं, तो वह बोला की आधी रात गए इस समय आपको कहीं आसरा मिलना बहुत मुश्किल होंगा, लेकिन आप चाहे तो मेरे साथ ठहर सकते हो। मै एक चोर हु और अगर एक चोर के साथ रहने में आपको कोई परेशानी नहीं होंगी तो आप मेरे साथ रह सकते है।

वह इतना प्यारा आदमी था कि मै उसके साथ एक महीने तक रह गया! वह हर रात मुझे कहता कि मै अपने काम पर जाता हूं, आप आराम करो, प्रार्थना करो। जब वह काम से आता तो मै उससे पूछता की कुछ मिला तुम्हे? तो वह कहता की आज तो कुछ नहीं मिला पर अगर भगवान ने चाहा तो जल्द ही जरुर कुछ मिलेगा। वह कभी निराश और उदास नहीं होता था, हमेशा मस्त रहता था।

जब मुझे ध्यान करते हुए सालों-साल बीत गए थे और कुछ भी हो नहीं रहा था तो कई बार ऐसे क्षण आते थे कि मैं बिलकुल हताश और निराश होकर साधना-वाधना छोड़ लेने की ठान लेता था। और तब अचानक मुझे उस चोर की याद आती जो रोज कहता था कि भगवान ने चाहा तो जल्द ही कुछ जरुर मिलेगा।

और मेरा दूसरा गुरु एक कुत्ता था।

एक बहुत गर्मी वाले दिन मै बहुत प्यासा था और पानी के तलाश में घूम रहा था कि एक कुत्ता दौड़ता हुआ आया। वह भी प्यासा था। पास ही एक नदी थी। उस कुत्ते ने आगे जाकर नदी में झांका तो उसे एक और कुत्ता पानी में नजर आया जो की उसकी अपनी परछाई थी। कुत्ता उसे देख बहुत डर गया। वह परछाई को देखकर भौकता और पीछे हट जाता, लेकिन बहुत प्यास लगने के कारण वह वापस पानी के पास लौट आता। अंततः, अपने डर के बावजूद वह नदी में कूद पड़ा और उसके कूदते ही वह परछाई भी गायब हो गई। उस कुत्ते के इस साहस को देख मुझे एक बहुत बड़ी सिख मिल गई। अपने डर के बावजूद व्यक्ति को छलांग लगा लेनी होती है। सफलता उसे ही मिलती है जो व्यक्ति डर का साहस से मुकाबला करता है।

और मेरा तीसरा गुरु एक छोटा बच्चा है।

मै एक गांव से गुजर रहा था कि मैंने देखा एक छोटा बच्चा एक जलती हुई मोमबत्ती ले जा रहा था। वह पास के किसी गिरजाघर में मोमबत्ती रखने जा रहा था। मजाक में ही मैंने उससे पूछा की क्या यह मोमबत्ती तुमने जलाई है? वह बोला, जी मैंने ही जलाई है। तो मैंने उससे कहा की एक क्षण था जब यह मोमबत्ती बुझी हुई थी और फिर एक क्षण आया जब यह मोमबत्ती जल गई। क्या तुम मुझे वह स्त्रोत दिखा सकते हो जहा से वह ज्योति आई?

वह बच्चा हँसा और मोमबत्ती को फूंख मारकर बुझाते हुए बोला, अब आपने ज्योति को जाते हुए देखा है। कहा गई वह? आप ही मुझे बताइए।

मेरा अहंकार चकनाचूर हो गया, मेरा ज्ञान जाता रहा। और उस क्षण मुझे अपनी ही मूढ़ता का एहसास हुआ। तब से मैंने कोरे ज्ञान से हाथ धो लिए।

🪷शिक्षा🪷


मित्रो, शिष्य होने का अर्थ क्या है? शिष्य होने का अर्थ है पुरे अस्तित्व के प्रति खुले होना। हर समय हर ओर से सीखने को तैयार रहना। जीवन का हर क्षण, हमें कुछ न कुछ सीखने का मौका देता है। हमें जीवन में हमेशा एक शिष्य बनकर अच्छी बातो को सीखते रहना चाहिए। यह जीवन हमें आये दिन किसी न किसी रूप में किसी गुरु से मिलाता रहता है, यह हम पर निर्भर करता है कि क्या हम उस महंत की तरह एक शिष्य बनकर उस गुरु से मिलने वाली शिक्षा को ग्रहण कर पा रहे हैं की नहीं!

     ॐ शांति

अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह का राज्य पक्षी (State Bird of Andaman and Nicobar Islands )

      अंडमान जंगली कबूतर (Columba palumboides)/ अंडमान वुड पिजन ( कोलंबा पालुंबोइड्स )

भारत राज्य के राजकीय पक्षियों के क्रम को आगे बढ़ाते हुए आज चर्चा करते हैं, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के राजकीय पक्षी की। यह बहुत ही खूबसूरत चिड़िया है, जिसका नाम अंडमान जंगली कबूतर है। इसका सिर सफेद, लाल पीले नोक वाली चोंच और लाल पंजे होते हैं। इसका बाकी शरीर काला होता है। अंडमान वुड पिजन ( कोलंबा पालुंबोइड्स ) एक बड़ा कबूतर है, जिसकी लंबाई 35 से 40 सेमी और वजन 510 ग्राम से 520 ग्राम होता है।

अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह का राज्य पक्षी (State Bird of Andaman and Nicobar Islands )

ये लकड़ी के कबूतर की प्रजातियाँ भारत के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के लिए स्थानिक हैं। ये अंडमान लकड़ी कबूतर प्रजातियाँ घने चौड़ी पत्तियों वाले सदाबहार जंगलों में निवास करती हैं। ये लकड़ी के कबूतर मोनोटाइपिक प्रजातियां हैं।         

इन पक्षियों का सिर और गर्दन सिल्वर ग्रे रंग के होते हैं। गर्दन का रंग धीरे-धीरे गले, स्तन, पेट और निचले पंखों के हल्के भूरे रंग के साथ विलीन हो जाता है। पीठ, दुम, पंख और पूंछ गहरे काले भूरे रंग की हैं। ऊपरी गहरे भूरे आवरण पर हरी चमक है। चोंच गुलाबी लाल रंग की होती है, जिसका अगला सिरा पीलापन लिए होता है। आईरिस पीले रंग की होती हैं। आंखों के आसपास की नंगी त्वचा लाल-गुलाबी रंग की होती है। पैर लाल गुलाबी रंग के हैं।  इन कबूतरों की आवाज़ एक विशिष्ट हूटिंग "हूह" ध्वनि है।          

अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह का राज्य पक्षी (State Bird of Andaman and Nicobar Islands )

इन अंडमान लकड़ी कबूतर प्रजातियों में उच्च वन निर्भरता है। ये प्रजातियाँ 0 से 100 मीटर की ऊँचाई पर पाई जाती हैं। वे घने चौड़ी पत्ती वाले सदाबहार जंगलों और उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय नम तराई के जंगलों में निवास करते हैं।

इन लकड़ी कबूतर प्रजातियों का आहार ज्यादातर फल हैं। फल, जामुन और अंजीर उनका प्राथमिक भोजन हैं। ये प्रजातियाँ वृक्षवासी हैं, शायद ही कभी जंगल की ज़मीन पर उतरती हैं। वे मितव्ययी हैं, विभिन्न प्रकार के फल, जामुन और अंजीर पर रहते हैं। वे पके फलों की तलाश में एक द्वीप से दूसरे द्वीप तक उड़ते रहते हैं।

IUCN (इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर) ने कबूतर प्रजातियों को वर्गीकृत और मूल्यांकन किया है और इसे "खतरे के निकट" के रूप में सूचीबद्ध किया है। 

English Translate

Andaman Wood Pigeon (Columba palumboides)

Continuing the sequence of state birds of India, today let us discuss the state bird of Andaman and Nicobar Islands. This is a very beautiful bird, whose name is Andaman Wild Pigeon. It has a white head, red beak with yellow tip and red claws. The rest of its body is black. The Andaman wood pigeon (Columba palumboides) is a large pigeon, measuring 35 to 40 cm in length and weighing 510 g to 520 g.

अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह का राज्य पक्षी (State Bird of Andaman and Nicobar Islands )

These wood pigeon species are endemic to the Andaman and Nicobar Islands of India. These Andaman wood pigeon species inhabit dense broad-leaved evergreen forests. These wood pigeons are monotypic species.

The head and neck of these birds are silver gray in color. The neck color gradually merges with the light brown color of the throat, breast, belly and lower wings. The back, rump, wings and tail are dark blackish brown. The dark brown upper coverts have a green sheen. The beak is pinkish red, whose front end is yellow. Iris are yellow in colour. The bare skin around the eyes is red-pink in color. The legs are reddish pink. The call of these pigeons is a distinctive hooting "huh" sound.

These Andaman wood pigeon species have high forest dependence. These species are found at altitudes of 0 to 100 meters. They inhabit dense broadleaf evergreen forests and tropical and subtropical moist lowland forests.

अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह का राज्य पक्षी (State Bird of Andaman and Nicobar Islands )

The diet of these wood pigeon species is mostly fruits. Fruits, berries and figs are their primary food. These species are arboreal, rarely descending to the forest floor. They are frugal, living on a variety of fruits, berries and figs. They fly from one island to another in search of ripe fruits.

The IUCN (International Union for Conservation of Nature) has classified and evaluated the pigeon species and lists it as "near threatened".

भारत के सभी राज्यों के राजकीय पक्षियों की सूची |(List of State Birds of India)

गीता के सभी 18 अध्यायों का सार मात्र 18 वाक्यों में

गीता के सभी 18 अध्यायों का सार मात्र 18 वाक्यों में

हिंदुओं का धर्म ग्रंथ है चार वेद, वेदों का सार है उपनिषद और उपनिषदों का सार है गीता अर्थात हम कह सकते हैं कि गीता सभी ग्रंथों का सार है। इसीलिए श्रीमद्भागवत गीता हिंदुओं का सर्वमान्य ग्रंथ है। महाभारत के 18 अध्यायों में से एक भीष्म पर्व का हिस्सा है, भगवतगीता। गीता में कुल 18 अध्याय हैं और 18 अध्यायों की कुल श्लोक संख्या 700 है।

गीता के सभी 18 अध्यायों का सार मात्र 18 वाक्यों में

 *ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🌹*

*अध्याय 1 - गलत सोच ही जीवन की एकमात्र समस्या है।*

*अध्याय 2 - सही ज्ञान ही हमारी सभी समस्याओं का अंतिम समाधान है।*

*अध्याय 3 - निःस्वार्थता ही प्रगति और समृद्धि का एकमात्र मार्ग है।*

*अध्याय 4 - प्रत्येक कार्य प्रार्थना का कार्य हो सकता है।*

*अध्याय 5-व्यक्तित्व के अहंकार को त्यागें और अनंत के आनंद का आनंद लें।*

*अध्याय 6 - प्रतिदिन उच्च चेतना से जुड़ें।*

*अध्याय 7 - आप जो सीखते हैं उसे जिएं।*

*अध्याय 8 - अपने आप को कभी मत छोड़ो।*

*अध्याय 9 - अपने आशीर्वाद को महत्व दें।*

*अध्याय 10 - चारों ओर देवत्व देखें।*

*अध्याय 11 - सत्य को जैसा है वैसा देखने के लिए पर्याप्त समर्पण करें।*

*अध्याय 12 - अपने मन को उच्चतर में लीन करें।*

*अध्याय 13 - माया से अलग होकर परमात्मा से जुड़ो।*

*अध्याय 14 - एक ऐसी जीवन-शैली जिएं जो आपकी दृष्टि से मेल खाती हो।*

*अध्याय 15 - देवत्व को प्राथमिकता दें।*

*अध्याय 16 - अच्छा होना अपने आप में एक पुरस्कार है।*

*अध्याय 17 - सुखद पर अधिकार चुनना शक्ति की निशानी है।*

*अध्याय 18 - चलो चलें, ईश्वर के साथ मिलन की ओर बढ़ते हैं।*

गीता में ज्ञानयोग, कर्म योग, भक्ति योग, राजयोग, एकेश्वरवाद आदि की बहुत सुन्दर ढंग से चर्चा की गई है। इसमें आत्मा के देह त्यागने, मोक्ष प्राप्त करने तथा दूसरा शरीर धारण करने की प्रक्रिया का पूर्ण वर्णन किया गया है। आज के संदर्भ में अगर बात करें तो गीता मनुष्य को कर्म का महत्व समझाती है। गीता में श्रेष्ठ मानव जीवन का सार बताया गया है।

@JaishreeKrishna

सैगा/साइगा एंटीलोप || Saiga antelope

सैगा एंटीलोप

'सैगा एंटीलोप' एक ऐसा जानवर जो दिखने में किसी हिरण की तरह ही होते हैं, लेकिन इनकी लंबी बेढंगी नाक इन्हें सबसे अलग और खास बनाती है। 'सैगा/साइगा एंटीलोप' रूस और कजाकिस्तान जैसे देश में पाए जाते हैं।

सैगा/साइगा एंटीलोप || Saiga antelope

यह मध्यम आकार का खुर वाला स्तनपायी है, जो पेड़ रहित स्टेपी देश में झुंड में रहता है। एक समय यह पोलैंड से पश्चिमी मंगोलिया तक आम था। शिकार और निवास स्थान के विनाश के कारण यह बहुत कम हो गया है और अब यह दक्षिण-पश्चिमी रूस, कजाकिस्तान और मंगोलिया के स्थानों में मौजूद है। 

सैगा की सबसे उत्कृष्ट विशेषता इसकी सूजी हुई थूथन और नीचे की ओर निर्देशित नासिका है। थथन साँस की हवा को गर्म और नम करने का कार्य करता है। यह जानवर की गंध की तीव्र अनुभूति से संबंधित हो सकता है और यह रूटिंग कॉल के लिए ध्वनि कक्ष के रूप में भी काम कर सकता है। 

सैगा/साइगा एंटीलोप || Saiga antelope

वयस्क साइगा कंधे पर लगभग 76 सेमी (30 इंच) लंबा होता है और इसका वजन 31 से 43 किलोग्राम (68 से 95 पाउंड) होता है। सैगा कंधे पर 61-81 सेमी (24-32 इंच) खड़ा होता है, और इसका वजन 26-69 किलोग्राम (57-152 पाउंड) होता है। सिर और शरीर की लंबाई आम तौर पर 100 और 140 सेमी (39 और 55 इंच) के बीच होती है। सैगा की एक प्रमुख विशेषता नीचे की ओर निर्देशित, निकट दूरी पर फूले हुए नासिका छिद्रों की जोड़ी है। चेहरे की अन्य विशेषताओं में गालों और नाक पर काले निशान शामिल हैं। साथ ही 1 ⁄ 2  इंच लंबे कान होते हैं। गर्मियों के प्रवास के दौरान, साइगा की नाक झुंड द्वारा उड़ाई गई धूल को छानने में मदद करती है और जानवर के खून को ठंडा करती है। सर्दियों में, यह ठंडी हवा को फेफड़ों तक ले जाने से पहले गर्म कर देता है। मादाएं नर से लगभग तीन-चौथाई आकार की होती हैं। 

सैगा/साइगा एंटीलोप || Saiga antelope

2002 से साइगा को अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ द्वारा गंभीर रूप से लुप्तप्राय माना गया है। नर साइगा के सींग एम्बर-पीले रंग के होते हैं, जो कुछ हद तक वीणा के आकार के होते हैं। इन सींगों को चीनी चिकित्सा में अत्यधिक महत्व दिया जाता है और यही मुख्य कारण है कि साइगा का इतने व्यापक रूप से शिकार किया गया है। 19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी की शुरुआत में, पश्चिमी साइगाओं को सींग, मांस और खाल के लिए इतनी अंधाधुंध हत्या कर दी गई कि वे कुछ छोटी, बिखरी हुई आबादी में सिमट कर रह गए। सोवियत संघ ने 1921 में शिकार पर प्रतिबंध लगा दिया और जल्द ही साइगाओं ने अपनी सीमा बढ़ा दी। 

सैगा/साइगा एंटीलोप || Saiga antelope

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Saiga Antelope

'Saiga Antelope' is an animal that looks similar to a deer, but its long, shapeless nose makes it different and special. 'Saiga/Saiga Antelope' are found in countries like Russia and Kazakhstan.

सैगा/साइगा एंटीलोप || Saiga antelope

It is a medium-sized hoofed mammal, living in herds in treeless steppe country. At one time it was common from Poland to western Mongolia. It has declined greatly due to hunting and habitat destruction and is now present in locations in southwestern Russia, Kazakhstan, and Mongolia.

The saiga's most outstanding feature is its swollen snout and downwards-directed nostrils. Throat works to warm and humidify the inhaled air. This may be related to the animal's keen sense of smell and may also serve as a sound chamber for routing calls.

सैगा/साइगा एंटीलोप || Saiga antelope

The adult saiga stands about 76 cm (30 in) tall at the shoulder and weighs 31 to 43 kg (68 to 95 lb). The saiga stands 61–81 cm (24–32 in) tall at the shoulder, and weighs 26–69 kg (57–152 lb). Head and body length is typically between 100 and 140 cm (39 and 55 in). A prominent feature of the saiga is a pair of downward-directed, closely spaced flared nostrils. Other facial features include dark marks on the cheeks and nose. It also has 1 ⁄ 2 inch long ears. During summer migration, the saiga's nose helps filter dust kicked up by the herd and cools the animal's blood. In winter, it warms cold air before it is carried to the lungs. Females are about three-fourths the size of males.

सैगा/साइगा एंटीलोप || Saiga antelope

The saiga has been considered critically endangered by the International Union for Conservation of Nature since 2002. The horns of the male saiga are amber-yellow, somewhat harp-shaped. These horns are highly valued in Chinese medicine and are the main reason why saigas have been so widely hunted. In the late 19th and early 20th centuries, western saigas were killed so indiscriminately for horns, meat, and hides that they were reduced to a few small, scattered populations. The Soviet Union banned hunting in 1921, and saigas soon expanded their range.

"जगन्नाथ पुरी" जहां भगवान कृष्ण धड़कते दिल ह्रदय के साथ आज भी जीवित हैं

 "जगन्नाथ पुरी" जहां भगवान कृष्ण धड़कते दिल के साथ आज भी जीवित हैं 

भगवान् कृष्ण ने जब देह छोड़ा तो उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनका सारा शरीर तो पांच तत्व में मिल गया, लेकिन उनका हृदय बिल्कुल सामान्य एक जिन्दा आदमी की तरह धड़क रहा था और वो बिल्कुल सुरक्षित था। उनका हृदय आज तक सुरक्षित है जो भगवान् जगन्नाथ की काठ की मूर्ति के अंदर रहता है और उसी तरह धड़कता है, ये बात बहुत कम लोगों को पता है। 

"जगन्नाथ पुरी" जहा भगवान कृष्ण धड़कते दिल ह्रदय के साथ आज भी जीवित हैं

महाप्रभु का महा रहस्य

हर 12 साल में बदली जाती है मूर्तियां 

महाप्रभु जगन्नाथ (श्री कृष्ण) को कलियुग का भगवान भी कहते है। पुरी (उड़ीसा) में जग्गनाथ स्वामी अपनी बहन सुभद्रा और भाई बलराम के साथ निवास करते हैं। मगर रहस्य ऐसे है कि आजतक कोई न जान पाया। हर 12 साल में महाप्रभु की मूर्ती को बदला जाता है, उस समय पूरे पुरी शहर में ब्लैकआउट किया जाता है। यानी पूरे शहर की लाइट बंद की जाती है। लाइट बंद होने के बाद मंदिर परिसर को crpf की सेना चारो तरफ से घेर लेती है, उस समय कोई भी मंदिर में नही जा सकता। 

"जगन्नाथ पुरी" जहा भगवान कृष्ण धड़कते दिल ह्रदय के साथ आज भी जीवित हैं

ये पूरी प्रक्रिया हर 12 साल में एक बार होती है। उस समय सुरक्षा बहुत ज्यादा होती है। 12 साल में जब ये मूर्तियां बदली जाती हैं, तो मंदिर की सुरक्षा सीआरपीएफ के हवाले कर दी जाती है। किसी का भी प्रवेश इस दौरान वर्जित होता है। अंधेरा होने के.बाद कोई भी इस मंदिर में नहीं जा सकता। इन मूर्तियों को बदलने के लिए सिर्फ एक पुजारी को मंदिर में जाने की अनुमति होती है और उसके लिए भी पुजारी के हाथों मे दस्ताने पहनाए जाते हैं और अंधेरे के बावजूद आंखों में पट्टी बांधी जाती है ताकि पुजारी भी मूर्तियों को ना देख सके। 

ब्रह्म पदार्थ का रहस्य 

पुरानी मूर्ति से जो नई मूर्ति बदली जाती है उसमें एक चीज वैसी की वैसी ही रहती है वह है ब्रह्म पदार्थ। इस ब्रह्म पदार्थ को पुरानी मूर्ति से निकालकर नई मूर्ति में डाल दिया जाता है। 

ब्रह्म पदार्थ को लेकर यह मान्यता है कि अगर इसे किसी ने भी देख लिया तो उसकी तुरंत मौत हो जाएगी। इस ब्रह्म पदार्थ को श्रीकृष्ण से जोड़ा जाता है। 

मंदिर के अंदर घना अंधेरा रहता है। पुजारी की आँखों पर पट्टी बंधी होती है। पुजारी के हाथ में दस्ताने होते हैं, वो पुरानी मूर्ती से "ब्रह्म पदार्थ" निकालता है और नई मूर्ती में डाल देता है। ये ब्रह्म पदार्थ क्या है? आजतक किसी को नहीं पता इसे आजतक किसी ने नहीं देखा। हज़ारों सालो से ये एक मूर्ती से दूसरी मूर्ती में ट्रांसफर किया जा रहा है। ये क्या है कोई नही जानता। 

"जगन्नाथ पुरी" जहा भगवान कृष्ण धड़कते दिल ह्रदय के साथ आज भी जीवित हैं

आजतक कोई भी पुजारी ये नहीं बता पाया की महाप्रभु जगन्नाथ की मूर्ती में आखिर ऐसा क्या है ? कुछ पुजारियों का कहना है कि जब हमने उसे हाथ में लिया तो खरगोश जैसा उछल रहा था, आंखों पर पट्टी होती थी और हाथों में  दस्ताने थे, तो हम सिर्फ महसूस कर पाए। 

सोने की झाड़ू से होती है सफाई :

आज भी हर साल जगन्नाथ यात्रा के उपलक्ष्य में सोने की झाड़ू से पुरी के राजा खुद झाड़ू लगाने आते हैं। 

सिंहद्वार का क्या है रहस्य 

भगवान जगन्नाथ मंदिर के सिंहद्वार से पहला कदम अंदर रखते ही समुद्र की लहरों की आवाज अंदर सुनाई नहीं देती, जबकि आश्चर्य में डाल देने वाली बात यह है कि जैसे ही मंदिर से एक कदम बाहर रखेंगे, वैसे ही समुद्र की आवाज सुनाई देंगी। 

जगन्नाथ मंदिर के पास ही चिताएं भी जलती हैं, माना जाता है कि सिंहद्वार के अंदर प्रवेश करने से पहले चिताओं की गंध आती है, लेकिन द्वार के अंदर प्रवेश करते ही यह गंध आनी बंद हो जाती है। 

मंदिर के ऊपर नहीं उड़ते कोई पक्षी

ज्यादातर मंदिरों के शिखर पर पक्षी बैठे-उड़ते देखे जाते हैं, लेकिन जगन्नाथ मंदिर के ऊपर से कोई पक्षी नहीं गुजरता। 

नहीं बनती मंदिर की परछाई

इस मंदिर से जुड़ा एक रहस्य यह भी है कि कितनी भी धूप में इस मंदिर की परछाई कभी नहीं बनती। 

झंडे का रहस्य 

इस मंदिर के ऊपर एक झंडा लगा हुआ है जिसे रोज शाम को बदलाना जरूरी होता है। इसके पीछे यह मान्यता है कि अगर इस झंडे को नहीं बदला गया तो यह मंदिर आने वाले 18 सालों में बंद हो जाएगा। झंडा हमेशा हवा की उल्टी दिशा में लहराता है। 

"जगन्नाथ पुरी" जहा भगवान कृष्ण धड़कते दिल ह्रदय के साथ आज भी जीवित हैं

रसोई घर का रहस्य 

(मंदिर में कभी नहीं होती प्रसाद की कमी)

इस मंदिर का रसोई घर दुनिया के सबसे बड़े रसोई घरों में से एक है। यहां 500 रसोइये और उनके 300 सहयोगी काम करते हैं। कहा जाता है कि इस मंदिर में कितने भी भक्त आ जाएं लेकिन कभी प्रसाद कम नहीं पड़ता, लेकिन जैसे ही मंदिर के बंद होने का समय आता है तो यह प्रसाद अपने आप खत्म हो जाता है। यहां बनने वाला प्रसाद 7 बर्तनों में बनता है, जिसे एक ही लकड़ी के चूल्हे पर बनाया जाता है।.यहां की खास बात यह है कि इस लकड़ी के चूल्हे पर सबसे पहले सातवें स्थान पर सबसे ऊपर रखे हुए बर्तन का प्रसाद बनकर तैयार होता है ना कि सबसे नीचे रखे हुए बर्तन का। दिन में किसी मंदिर में हर दिन बनने वाला प्रसाद भक्तों के लिए कभी कम नहीं पड़ता, लेकिन हैरान करने वाली बात ये है कि जैसे ही मंदिर के पट बंद होते हैं वैसे ही प्रसाद भी खत्म हो जाता है। ये सब बड़े आश्चर्य की बात है। 

"जगन्नाथ पुरी" जहा भगवान कृष्ण धड़कते दिल ह्रदय के साथ आज भी जीवित हैं

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"Jagannath Puri" where Lord Krishna is still alive with a beating heart

When Lord Krishna left his body, his last rites were performed. His entire body got mixed into the five elements, but his heart was beating like a normal living person and he was completely safe. His heart is safe till today, which lives inside the wooden idol of Lord Jagannath and beats like that, very few people know this.

Mahaprabhu's great secret

Statues are changed every 12 years

Mahaprabhu Jagannath (Shri Krishna) is also called the Lord of Kaliyuga. Jagannath Swami resides in Puri (Orissa) with his sister Subhadra and brother Balram. But the secret is such that no one has been able to know it till date. The idol of Mahaprabhu is replaced every 12 years, at which time a blackout is observed in the entire Puri city. That means the lights of the entire city are switched off. After the lights are switched off, CRPF forces surround the temple premises from all sides, at that time no one can enter the temple.

"जगन्नाथ पुरी" जहा भगवान कृष्ण धड़कते दिल ह्रदय के साथ आज भी जीवित हैं

This entire process happens once every 12 years. There is a lot of security at that time. When these idols are replaced every 12 years, the security of the temple is handed over to CRPF. Entry of anyone is prohibited during this period. No one can enter this temple after dark. To change these idols, only a priest is allowed to go to the temple and for that too, gloves are worn on the priest's hands and despite the darkness, his eyes are blindfolded so that even the priest cannot see the idols.

mystery of brahma substance

In the new idol which is replaced by the old idol, one thing remains the same and that is the substance of Brahma. This Brahma substance is taken out from the old idol and put into the new idol.

There is a belief regarding Brahma substance that if anyone sees it, he will die immediately. This Brahma substance is linked to Shri Krishna.

"जगन्नाथ पुरी" जहा भगवान कृष्ण धड़कते दिल ह्रदय के साथ आज भी जीवित हैं

There is dense darkness inside the temple. The priest's eyes are blindfolded. The priest has gloves on his hands, he takes out the "Brahma substance" from the old idol and puts it in the new idol. What is this Brahma substance? No one knows till date, no one has seen it till date. For thousands of years it is being transferred from one idol to another. No one knows what this is.

Till date no priest has been able to tell what is there in the idol of Mahaprabhu Jagannath? Some priests say that when we held him in our hands, he was jumping like a rabbit, he was blindfolded and had gloves on his hands, so we could only feel it.

Cleaning is done with a golden broom:

Even today, every year on the occasion of Jagannath Yatra, the king of Puri himself comes to sweep with a golden broom.

What is the secret of Singhdwar

As soon as you take the first step inside the Singhdwar of Lord Jagannath Temple, the sound of the sea waves is not heard inside, whereas the surprising thing is that as soon as you take a step out of the temple, the sound of the sea will be heard.

Pyres are also burnt near the Jagannath temple, it is believed that before entering inside the Singhdwar, the smell of the pyre comes, but this smell stops as soon as you enter inside the gate.

No birds fly over the temple

Birds are seen sitting and flying on the tops of most of the temples, but no bird passes over the Jagannath temple.

The temple does not cast a shadow

Another mystery related to this temple is that no matter how much sunlight a shadow is formed in this temple.

mystery of the flag

There is a flag on top of this temple which needs to be changed every evening. The belief behind this is that if this flag is not changed then this temple will be closed in the coming 18 years. The flag always flies in the opposite direction of the wind.

kitchen secrets

(There is never any shortage of Prasad in the temple)

The keep house of this temple is one of the largest kitchens in the world. 500 cooks and 300 of their associates work here. It is said that no matter how many devotees come to this temple, the Prasad never falls short, but as soon as the time comes for the temple to be closed, the Prasad automatically ends. The Prasad made here is made in 7 utensils, which are prepared on the same wooden stove. The special thing here is that on this wooden stove, the Prasad is first prepared from the vessel placed at the seventh position at the top. Not the vessel kept at the bottom. The Prasad made every day in a temple never falls short for the devotees, but the surprising thing is that as soon as the doors of the temple are closed, the Prasad also ends. All this is a matter of great surprise.

भगवान जगन्नाथ मंदिर महाप्रसाद || Lord Jagannath Temple Mahaprasad

🚩 Jai Shri Jagannath 🚩
🚩 जय श्री जगन्नाथ 🚩