Cricket News: Latest Cricket News, Live Scores, Results, Upcoming match Schedules | Times of India

Sportstar - IPL

तुम मुझको कब तक रोकोगे || TUM MUJHKO KAB TAK ROKOGE ||

तुम मुझको कब तक रोकोगे 

तुम मुझको कब तक रोकोगे || TUM MUJHKO KAB TAK ROKOGE ||
"अगर जिंदगी में सफल होना है
तो अपने काम के प्रति सकारात्मक सोच रखें.." 

तुम मुझको कब तक रोकोगे 

मुठ्ठी में कुछ सपने लेकर, भरकर जेबों में आशाएं ।

दिल में है अरमान यही, कुछ कर जाएं… कुछ कर जाएं… ।।

सूरज-सा तेज़ नहीं मुझमें, दीपक-सा जलता देखोगे ।

सूरज-सा तेज़ नहीं मुझमें, दीपक-सा जलता देखोगे…

अपनी हद रौशन करने से, तुम मुझको कब तक रोकोगे…तुम मुझको कब तक रोकोगे… ।।

मैं उस माटी का वृक्ष नहीं जिसको नदियों ने सींचा है…

मैं उस माटी का वृक्ष नहीं जिसको नदियों ने सींचा है …

बंजर माटी में पलकर मैंने…मृत्यु से जीवन खींचा है… ।

मैं पत्थर पर लिखी इबारत हूँ… मैं पत्थर पर लिखी इबारत हूँ ..

शीशे से कब तक तोड़ोगे..

मिटने वाला मैं नाम नहीं… तुम मुझको कब तक रोकोगे… तुम मुझको कब तक रोकोगे…।।

इस जग में जितने ज़ुल्म नहीं, उतने सहने की ताकत है…

इस जग में जितने ज़ुल्म नहीं, उतने सहने की ताकत है ….

तानों के भी शोर में रहकर सच कहने की आदत है । ।

मैं सागर से भी गहरा हूँ.. मैं सागर से भी गहरा हूँ…

तुम कितने कंकड़ फेंकोगे ।

चुन-चुन कर आगे बढूँगा मैं… तुम मुझको कब तक रोकोगे…तुम मुझको कब तक रोकोगे..।।

झुक-झुककर सीधा खड़ा हुआ, अब फिर झुकने का शौक नहीं..

झुक-झुककर सीधा खड़ा हुआ, अब फिर झुकने का शौक नहीं..

अपने ही हाथों रचा स्वयं.. तुमसे मिटने का खौफ़ नहीं…

तुम हालातों की भट्टी में… जब-जब भी मुझको झोंकोगे…

तब तपकर सोना बनूंगा मैं… तुम मुझको कब तक रोकोगे…तुम मुझको कब तक रोक़ोगे…।।

तुम मुझको कब तक रोकोगे || TUM MUJHKO KAB TAK ROKOGE ||
"जीतने की इच्छा सभी में होती है,
लेकिन जीतने के लिए कठिन तैयारी बहुत ही कम लोग करते हैं.."

लालच बुरी बला : पंचतंत्र || Lalach Buri Bla : Panchtantra ||

लालच बुरी बला

अतिलोभो न कर्तव्यो लोभं नैव परित्यजेत् । 
अतिलोभाऽभिभूतस्य चक्रं भ्रमति मस्तके॥

धन के अति लोभ से मनुष्य धन-संचय के चक्र में ऐसा फँस जाता है, जो केवल कष्ट ही कष्ट देता है।

लालच बुरी बला : पंचतंत्र || Lalach Buri Bla : Panchtantra ||

एक नगर में चार ब्राह्मण-पुत्र रहते थे। चारों में गहरी मैत्री थी। चारों ही निर्धन थे। निर्धनता को दूर करने के लिए चारों चिन्तित थे। उन्होंने अनुभव कर लिया था कि अपने बन्धु-बान्धवों में धनहीन जीवन व्यतीत करने की अपेक्षा शेर-हाथियों से भरे कंटीले जंगल में रहना अच्छा है। निर्धन व्यक्ति को सब अनादर की दृष्टि से देखते हैं, बन्धु-बान्धव भी उससे किनारा कर लेते हैं, अपने ही पुत्र पौत्र भी उससे मुख मोड़ लेते हैं। पत्नी भी उससे विरक्त हो जाती है। मनुष्यलोक में धन के बिना न यश सम्भव है, न सुख। धन हो तो कायर भी वीर हो जाता है, कुरूप भी सुरूप कहलाता है और मूर्ख भी पण्डित बन जाता है।

यह सोचकर उन्होंने धन कमाने के लिए किसी दूसरे देश को जाने का निश्चय किया। अपने बन्धु बान्धवों को छोड़ा, अपनी जन्मभूमि से विदा ली और विदेश यात्रा के लिए चल पड़े।

चलते-चलते क्षिप्रा नदी के तट पर पहुँचे। वहाँ नदी के शीतल जल में स्नान करने के बाद महाकाल को प्रणाम किया। थोड़ी दूर आगे जाने पर उन्हें एक जटाजूटधारी योगी दिखाई दिए। इन योगिराज का नाम भैरवानन्द था। योगिराज इन चारों नौजवान ब्राह्मणपुत्रों को अपने आश्रम में ले गए और उनसे प्रवास का प्रयोजन पूछा। चारों ने कहा-हम अर्थसिद्धि के लिए यात्री बने हैं। धनोपार्जन ही हमारा लक्ष्य है। अब या तो धन कमाकर ही लौटेंगे या मृत्यु का स्वागत करेंगे। इस धनहीन जीवन से मृत्यु ही अच्छी है। 

योगिराज ने उनके निश्चय की परीक्षा के लिए जब कहा कि धनवान् बनना तो दैव के अधीन है, तब उन्होंने उत्तर दिया-यह सच है कि भाग्य ही पुरुष को धनी बनाता है, किन्तु साहसिक पुरुष भी अवसर का लाभ उठाकर अपने भाग्य का बदला लेते हैं। पुरुष का पौरुष कभी-कभी दैव से भी अधिक बलवान् हो जाता है। इसलिए आप हमें भाग्य का नाम लेकर निरुत्साह न करें। हमने अब धनोपार्जन का प्रण पूरा करके ही लौटने का निश्चय किया है। आप अनेक सिद्धियों को जानते हैं। आप चाहें तो हमें सहायता दे सकते हैं। हमारा पथ-प्रदर्शन कर सकते हैं। योगी होने के कारण आपके पास महती शक्तियाँ हैं। हमारा निश्चय भी महान है। महान ही महान की सहायता करता है।

भैरवानन्द को उनकी दृढ़ता देखकर प्रसन्नता हुई। प्रसन्न होकर धन कमाने का रास्ता बतलाते हुए उन्होंने कहा- तुम हाथों में दीपक लेकर हिमालय पर्वत की ओर जाओ। वहाँ जाते-जाते जब तुम्हारे हाथ का दीपक नीचे गिर पड़े तो ठहर जाओ। जिस स्थान पर दीपक गिरे उसे खोदो। वहीं तुम्हें धन मिलेगा। धन लेकर वापस चले आओ।

चारों युवक हाथों में दीपक लेकर चल पड़े। कुछ दूर जाने के बाद उनमें से एक के हाथ का दीपक भूमि पर गिर पड़ा। उस भूमि को खोदने पर उन्हें ताम्रमयी भूमि मिली। वह ताँबे की खान थी। उसने कहा-यहाँ जितना चाहो, ताँबा ले लो। अन्य युवक बोले-मूर्ख ! ताँबे से दरिद्रता दूर नहीं होगी। हम आगे बढ़ेंगे। आगे इससे अधिक मूल्य की वस्तु मिलेगी। उसने कहा- तुम आगे जाओ, मैं तो यहीं रहूँगा। यह कहकर उसने यथेष्ट ताँबा लिया और घर लौट आया।

शेष तीनों मित्र आगे बढ़े। कुछ दूर जाने के बाद उनमें से एक के हाथ का दीपक ज़मीन पर गिर पड़ा। उसने ज़मीन खोदी तो चाँदी की खान पाई। प्रसन्न होकर बोला- यहाँ जितनी चाहो चाँदी ले लो, आगे मत जाओ । शेष दो मित्र बोले- पीछे ताँबे की खान मिली थी। यहाँ चाँदी की खान मिली है; निश्चय ही आगे सोने की खान मिलेगी। इसलिए हम तो आगे ही बढ़ेंगे। यह कहकर दोनों मित्र आगे बढ़ गए।

उन दो में से एक के हाथ से फिर दीपक गिर गया, खोदने पर उसे सोने की खान मिल गई। उसने कहा-यहाँ जितना चाहो सोना ले लो। हमारी दरिद्रता का अन्त हो जाएगा। सोने से उत्तम कौन-सी चीज़ है। आओ, सोने की खान से यथेष्ट सोना खोद लें और घर ले चलें। उसके मित्र ने उत्तर दिया - मूर्ख ! पहले ताँबा मिला था, फिर चाँदी मिली, अब सोना मिला है; निश्चय ही आगे रत्नों की खान होगी। सोने की खान छोड़ दे और आगे चल । किन्तु वह न माना। उसने कहा- मैं सोना लेकर ही चला जाऊँगा, तुझे आगे जाना हो तो जा ।

अब वह चौथा युवक एकाकी आगे बढ़ा। रास्ता बड़ा विकट था। काँटों से उसके पैर छलनी हो गए। बर्फीले रास्तों पर चलते-चलते शरीर जीर्ण-शीर्ण हो गया, किन्तु वह आगे ही आगे बढ़ता गया।

बहुत दूर जाने के बाद उसे एक मनुष्य मिला, जिसका सारा शरीर से • लथपथ था और जिसके मस्तक पर चक्र घूम रहा था। उसके पास खून जाकर चौथा युवक बोला—तुम कौन हो? तुम्हारे मस्तक पर चक्र क्यों घूम रहा है? यहाँ कहीं जलाशय हो तो बतलाओ, मुझे प्यास लगी है। यह कहते ही उसके मस्तक का चक्र उतरकर ब्राह्मण युवक के मस्तक पर लग गया। युवक के आश्चर्य की सीमा न रही। उसने कष्ट से कराहते हुए पूछा- यह क्या हुआ? यह चक्र तुम्हारे मस्तक से छूटकर मेरे मस्तक पर क्यों लग गया।

अजनवी मनुष्य ने उत्तर दिया-मेरे मस्तक पर भी यह इसी तरह अचानक लग गया था। अब यह तुम्हारे मस्तक से तभी उतरेगा जब कोई व्यक्ति धन के लोभ में घूमता हुआ यहाँ तक पहुँचेगा और तुमसे बात करेगा।

युवक ने पूछा- यह कब होगा? अजनबी- - अब कौन राजा राज्य कर रहा है? युवक - वीणा वत्सराज ।

अजनबी मुझे काल का ज्ञान नहीं। मैं राजा राम के राज्य में दरिद्र हुआ था और सिद्धि का दीपक लेकर यहाँ तक पहुंचा था। मैंने भी एक और मनुष्य से यही प्रश्न किए थे, जो तुमने मुझसे किए हैं। युवक -किन्तु इतने समय में तुम्हें भोजन व जल कैसे मिलता रहा? अजनवी - यह चक्र धन के अति लोभ पुरुष के लिए बना है। इस चक्र के मस्तक पर लगने के बाद मनुष्य को भूख-प्यास, नींद, जरा-मरण आदि नहीं सताते, केवल चक्र घूमने का कष्ट ही सताता रहता है। यह व्यक्ति अनन्त काल तक कष्ट भोगता है।

यह कहकर वह चला गया और वह अति लोभी ब्राह्मण युवक कष्ट भोगने के लिए वहीं रह गया। थोड़ी देर बाद खून से लथपथ हुआ वह इधर-उधर घूमते-घूमते उस मित्र के पास पहुँचा जिसे स्वर्ण की सिद्धि हुई थी, और जो अब स्वर्णकण बटोर रहा था। उससे चक्रधर ब्राह्मण-युवक ने सब वृत्तान्त कह सुनाया। स्वर्ण-सिद्धि युवक ने चक्रधर युवक को कहा कि मैंने तुझे आगे जाने से रोका था तूने अब मेरा कहना नहीं माना। बात यह है कि तुझे ब्राह्मण होने के कारण विद्या तो मिल गई, कुलीनता भी मिली; किन्तु भले-बुरे को परखनेवाली बुद्धि नहीं मिली। विद्या की अपेक्षा बुद्धि का स्थान ऊँचा है। विद्या होते हुए जिनके पास बुद्धि नहीं होती, वे हिंसकारकों की तरह नष्ट हो जाते हैं।

चक्रधर ने पूछा-किन हिंसकारकों की तरह? स्वर्ण-सिद्धि ने तब अगली कथा सुनाई ;

वैज्ञानिक मूर्ख

माता वैष्‍णो देवी के पास गांव में मिला 'अरबों-खरबों का खजाना

माता वैष्‍णो देवी के पास गांव में मिला 'अरबों-खरबों का खजाना

13 फरवरी को जम्मू-कश्मीर में माता वैष्‍णो देवी से थोड़ी दूर पर मौजूद "रियासी" जिले में अरबों का खजाना मिला है। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने कहा कि उन्हें पहली बार जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले सलाल हेमना गांव में 59 लाख टन का लिथियम इनफर्ड रिसोर्सेज (जी3) का भंडार मिला है। जहां 59 लाख टन का लिथियम मिला है वह गांव माता वैष्‍णो देवी से थोड़ी दूर पर ही मौजूद है। 

माता वैष्‍णो देवी के पास गांव में मिला 'अरबों-खरबों का खजाना

ऐसे में सूत्रों का मानना है कि अरबों के मिले इस खनिज भंडार से भारत के बिजनेस में एक बड़ा बदलाव आने वाला है। जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के अनुसार, जम्मू के रियासी जिले के सलाल हेमना गांव के 15 किलोमीटर के दायरे में करीब 59 लाख टन लिथियम संसाधन मिला है। यह लिथियम भारत सरकार द्वारा बनाए जा रहे इलेक्ट्रिक वाहनों में यूज की जाने वाली बैटरी के बेहद महत्वपुर्ण है।

माता वैष्‍णो देवी के पास गांव में मिला 'अरबों-खरबों का खजाना

दरअसल, भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों में लिथियम बैटरी का उपयोग किया जाता है, जिसके लिए लिथियम बाहर से मंगाना पड़ता है। वहीं अब भारत में ही लिथियम का भंडार मिलने के बाद अब इसे नीलामी के लिए ले जाया जाएगा। इतना ही नहीं लिथियम का भंडार मिलने के बाद से रियासी के लोग एक तरह सोने की धरती पर रह रहे है। 

रियासी जिले के 15 किलोमीटर के दायरे में न केवल लिथियम मिला है बल्कि भारी मात्रा में गोल्‍ड रिजर्व भी मिला है। जिससे एक्सपर्ट का मानना है कि यह भारत की किस्मत को बदलने में एक सुनहरा अवसर है। लिथियम एक ग्रीक शब्द है जो 'लिथोस' शब्द से आया है। इसका मतलब 'पत्थर' होता है। यह अलौह धातु है। इसका इस्तेमाल मोबाइल-लैपटॉप, गाड़ियों समेत सभी तरह की चार्जेबल बैटरी बनाने में किया जाता है। भारत से पहले यह ऑस्ट्रेलिया, चिली और अर्जेंटिना जैसे देशों में बड़ी मात्रा में पाया जाता है।

माता वैष्‍णो देवी के पास गांव में मिला 'अरबों-खरबों का खजाना

English Translate

'Treasure worth billions' found in village near Mata Vaishno Devi

On February 13, a treasure worth billions was found in Jammu and Kashmir's "Reasi" district, a short distance from Mata Vaishno Devi. The Geological Survey of India said that for the first time they have found Lithium Inferred Resource (G3) reserves of 5.9 million tonnes in Salal Hemna village in Reasi district of Jammu and Kashmir. The village where 59 lakh tonnes of lithium has been found is just a short distance away from Mata Vaishno Devi.

माता वैष्‍णो देवी के पास गांव में मिला 'अरबों-खरबों का खजाना

In such a situation, sources believe that a big change is going to come in India's business with this mineral deposit worth billions. According to the Geological Survey of India, about 5.9 million tonnes of lithium resources have been found within a radius of 15 kilometers of Salal Hemna village in Reasi district of Jammu. This lithium is very important for the battery used in electric vehicles being made by the Government of India.

Actually, the Government of India uses lithium batteries in electric vehicles, for which lithium has to be imported from outside. At the same time, after getting the reserves of lithium in India itself, it will now be taken for auction. Not only this, since the discovery of lithium deposits, the people of Reasi are living on a golden land.

माता वैष्‍णो देवी के पास गांव में मिला 'अरबों-खरबों का खजाना

Not only lithium has been found within a radius of 15 kilometers of Reasi district, but a large amount of gold reserve has also been found. Due to which experts believe that this is a golden opportunity to change the fate of India. Lithium is a Greek word derived from the word 'lithos'. It means 'stone'. It is non-ferrous metal. It is used in making all types of chargeable batteries including mobile-laptops, vehicles. Before India, it is found in large quantities in countries like Australia, Chile and Argentina.

श्रीमद्भगवद्गीता ||अध्याय सात - ज्ञानविज्ञान योग || अनुच्छेद 01 - 07 ||

 श्रीमद्भगवद्गीता (Shrimad Bhagwat Geeta)

इस ब्लॉग के माध्यम से हम सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता प्रकाशित करेंगे, इसके तहत हम सभी 18 अध्यायों और उनके सभी श्लोकों का सरल अनुवाद हिंदी में प्रकाशित करेंगे। 

श्रीमद्‍भगवद्‍गीता के 18 अध्यायों में से अध्याय 1,2,3,4,5 और 6 के पूरे होने के बाद आज प्रस्तुत है, अध्याय 7 के सभी अनुच्छेद। 

श्रीमद्भगवद्गीता ||अध्याय सात ज्ञानविज्ञान योग ||

अथ सप्तमोऽध्यायः- ज्ञानविज्ञानयोग

अध्याय सात के अनुच्छेद 01 - 07

अध्याय सात      - ज्ञानविज्ञानयोग

                    01-07 विज्ञान सहित ज्ञान का विषय,इश्वर की व्यापकता
                    08-12 संपूर्ण पदार्थों में कारण रूप से भगवान की व्यापकता का कथन
                    13-19 आसुरी स्वभाव वालों की निंदा और भगवद्भक्तों की प्रशंसा
                    20-23 अन्य देवताओं की उपासना और उसका फल 
                    24-30 भगवान के प्रभाव और स्वरूप को न जानने वालों की निंदा और जाननेवालों की महिमा

अध्याय सात के अनुच्छेद 01-07 में विज्ञान सहित ज्ञान का विषय,इश्वर की व्यापकता बताया गया है।  

श्रीमद्भगवद्गीता

श्रीभगवानुवाच 

मय्यासक्तमनाः पार्थ योगं युञ्जन्मदाश्रयः ।
असंशयं समग्रं मां यथा ज्ञास्यसि तच्छृणु ॥

भावार्थ : 

श्री भगवान बोले- हे पार्थ! अनन्य प्रेम से मुझमें आसक्त चित तथा अनन्य भाव से मेरे परायण होकर योग में लगा हुआ तू जिस प्रकार से सम्पूर्ण विभूति, बल, ऐश्वर्यादि गुणों से युक्त, सबके आत्मरूप मुझको संशयरहित जानेगा, उसको सुन॥1॥ 

ज्ञानं तेऽहं सविज्ञानमिदं वक्ष्याम्यशेषतः ।
यज्ज्ञात्वा नेह भूयोऽन्यज्ज्ञातव्यमवशिष्यते ॥

भावार्थ : 

मैं तेरे लिए इस विज्ञान सहित तत्व ज्ञान को सम्पूर्णतया कहूँगा, जिसको जानकर संसार में फिर और कुछ भी जानने योग्य शेष नहीं रह जाता॥2॥

मनुष्याणां सहस्रेषु कश्चिद्यतति सिद्धये ।
यततामपि सिद्धानां कश्चिन्मां वेत्ति तत्वतः ॥

भावार्थ : 

हजारों मनुष्यों में कोई एक मेरी प्राप्ति के लिए यत्न करता है और उन यत्न करने वाले योगियों में भी कोई एक मेरे परायण होकर मुझको तत्व से अर्थात यथार्थ रूप से जानता है॥3॥

भूमिरापोऽनलो वायुः खं मनो बुद्धिरेव च ।
अहङ्‍कार इतीयं मे भिन्ना प्रकृतिरष्टधा ॥
अपरेयमितस्त्वन्यां प्रकृतिं विद्धि मे पराम्‌ ।
जीवभूतां महाबाहो ययेदं धार्यते जगत्‌ ॥

भावार्थ : 

पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, मन, बुद्धि और अहंकार भी- इस प्रकार ये आठ प्रकार से विभाजित मेरी प्रकृति है। यह आठ प्रकार के भेदों वाली तो अपरा अर्थात मेरी जड़ प्रकृति है और हे महाबाहो! इससे दूसरी को, जिससे यह सम्पूर्ण जगत धारण किया जाता है, मेरी जीवरूपा परा अर्थात चेतन प्रकृति जान॥4-5॥

एतद्योनीनि भूतानि सर्वाणीत्युपधारय ।
अहं कृत्स्नस्य जगतः प्रभवः प्रलयस्तथा ॥

भावार्थ : 

हे अर्जुन! तू ऐसा समझ कि सम्पूर्ण भूत इन दोनों प्रकृतियों से ही उत्पन्न होने वाले हैं और मैं सम्पूर्ण जगत का प्रभव तथा प्रलय हूँ अर्थात्‌ सम्पूर्ण जगत का मूल कारण हूँ॥6॥

मत्तः परतरं नान्यत्किञ्चिदस्ति धनञ्जय ।
मयि सर्वमिदं प्रोतं सूत्रे मणिगणा इव ॥

भावार्थ : 

हे धनंजय! मुझसे भिन्न दूसरा कोई भी परम कारण नहीं है। यह सम्पूर्ण जगत सूत्र में सूत्र के मणियों के सदृश मुझमें गुँथा हुआ है॥7॥

वीरांगना मतांगनी हाजरा || Matangini Hazra The Freedom Fighter ||

वीरांगना मतांगनी हाजरा

आज बात करते हैं एक ऐसी वीरांगना की जिन्हें इतिहास में मुकम्मल स्थान न मिल सका और जिन्होंने गोलियां लगने के बाद भी तिरंगे को नीचे गिरने नहीं दिया। इनका नाम है- "वीरांगना मतांगनी हाजरा"। जिनकों इतिहास के साथ हुए छेड़छाड़ के कारण किताबों में उचित स्थान न मिल पाया। जो नाम प्रसिद्धि इन्हें मिलनी चाहिए थी वो ना मिल पाई। राजनीतिक प्रपंचों के कारण आज भी कई वीरांगनाओं को वो सम्मान नही मिल पाया जिनकी हकदार थीं वो। 

वीरांगना मतांगनी हाजरा || Matangini Hazra The Freedom Fighter ||

मातंगिनी हाजरा का जन्म पूर्वी बंगाल (वर्तमान बांग्लादेश) के मिदनापुर जिले के होगला ग्राम में एक अत्यन्त निर्धन गरीब परिवार में 19 अक्टूबर सन 1870 को हुआ था। गरीबी के कारण 12 वर्ष की अवस्था में ही उनका विवाह ग्राम अलीनान के 62वर्षीय विधुर त्रिलोचन हाजरा से कर दिया गया। इस पर भी दुर्भाग्य ने उनका साथ ना छोड़ा। विवाह के छह वर्ष बाद ही कम आयु में वह निःसन्तान ही विधवा हो गयीं। मतांगनी हाजरा के पति की पहली पत्नी से उत्पन्न पुत्र उनसे बहुत ही नफरत करता था। उसने उन्हें घर से निकाल दिया। अतः मातंगिनी एक अलग झोपड़ी में रहकर मजदूरी कर जीवनयापन करने लगीं। 

गाँव वालों के दुःख-सुख में सदा सहभागी रहने के कारण वे पूरे गाँव में माँ के समान पूज्य हो गयीं। जब सन 1932 में महात्मा गांधी जी के नतृत्व में स्वाधीनता आंदोलन प्रारम्भ हुआ। उस समय वंदेमातरम के जयघोष भरे जुलूस भारत के हर कोने हर गली से गुज़रा करते थे। इसी क्रम में एक दिन बंदेमातरम जयघोष मतांगनी जी के घर के पास से निकला, तो उनको भी उसमें जुड़ने की इक्षा उत्पन्न हुई एवम मतांगनी जी ने बंगाली परंपरा के अनुसार संखबादन से जुलूस का स्वागत किया और जुलूस के साथ चल दीं। तामलुक के कृष्णगंज बाजार में पहुँचकर एक सभा हुई वहाँ मातंगिनी ने सबके साथ स्वाधीनता संग्राम में तन, मन, धन से संघर्ष करने की शपथ ली। यहीं से शुरू हुआ मतांगनी हाजरा जी के जीवन का एक अलग और महवपूर्ण सफर। 

वीरांगना मतांगनी हाजरा || Matangini Hazra The Freedom Fighter ||

17 जनवरी, 1933 को "करबन्दी आन्दोलन" को दबाने के लिए बंगाल के तत्कालीन गर्वनर एण्डरसन तामलुक आये तो उनके विरोध में प्रदर्शन हुआ। जिसमें वीरांगना मातंगिनी हाजरा सबसे आगे काला झण्डा लिये डटी थीं।  वह ब्रिटिश शासन के विरोध में नारे लगाते हुई दरबार तक पहुँच गयीं। इस पर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और छह माह का सश्रम कारावास देकर मुर्शिदाबाद जेल में बन्द कर दिया। 

इसी क्रम में सन 1935 में तामलुक क्षेत्र भीषण बाढ आयी, जिसके कारण सारे क्षेत्र में चेचक एवम हैजा की महामारी अपने चरम पर आ गयी। उस समय अपने क्षेत्र के लोगो की जनसमूह की मदद के लिये मातंगिनी अपनी जान की चिन्ता किये बिना राहत कार्य में जुट गयीं। 

सन 1942 में जब "भारत छोड़ो आन्दोलन" ने जोर पकड़ा तो मातंगिनी उसमें सबकुछ भूल कर पूरी तरह रम गयीं। जब 8 सितम्बर को तामलुक में हुए एक प्रदर्शन में पुलिस की गोली से तीन स्वाधीनता सेनानी मारे गये थे तब लोगों ने इसके विरोध में 29 सितम्बर को और भी बड़ी रैली निकालने का निश्चय किया। इसके लिये मातंगिनी ने गाँव-गाँव में दिन रात घूमकर रैली के लिए 5,000 लोगों को तैयार किया और सबको ले कर दोपहर में सरकारी डाक बंगले पर पहुँच गयीं। जब मातंगिनी एक चबूतरे पर खड़ी होकर नारे लगवा रही थीं तब पुलिसकर्मियों ने फायर कर दिया, जिससे एक गोली उनके बायें हाथ में लगी जिससे तिरंगा झंडा हाथ से छूट गिरने वाला था। उन्होंने तिरंगे झण्डे को गिरने से पहले ही दूसरे हाथ में ले लिया। तभी दूसरी गोली उनके दाहिने हाथ में और तीसरी उनके माथे पर लगी, मातंगिनी की मृत देह वहीं लुढ़क गयी।

वीरांगना मतांगनी हाजरा || Matangini Hazra The Freedom Fighter ||

मतांगनी के इस बलिदान से पूरे क्षेत्र में इतना जोश उमड़ा कि दस दिन के अन्दर ही लोगों ने अंग्रेजों को खदेड़कर वहाँ स्वाधीन सरकार स्थापित कर दी, जिसने 21 महीने तक काम किया। ऐसी थी वीरांगना मतांगनी उन्हें बंगाल में लोग बूढ़ी गांधी के नाम से जानते हैं। शत शत नमन है ऐसी वीरांगना को उनके इस तरह स्वाधीनता की लड़ाई में शहीद होने के कारण दिसम्बर सन 1974 में भारत की प्रधानमन्त्री इन्दिरा गान्धी ने अपने प्रवास के समय तामलुक में मांतगिनी हाजरा की मूर्ति का अनावरण कर उन्हें अपने श्रद्धासुमन अर्पित किये।

सौजन्य - विकिपीडिआ 

Matangini Hazra The Freedom Fighter

Today let's talk about such a heroine who could not get a perfect place in history and who did not let the tricolor fall down even after being hit by bullets. Her name is "Veerangana Matangani Hazra". Those who could not find proper place in the books due to tampering with history. The name and fame that he should have got, he could not get. Due to political issues, even today many heroines could not get the respect they deserved.

वीरांगना मतांगनी हाजरा || Matangini Hazra The Freedom Fighter ||

Matangini Hazra was born on 19 October 1870 in a very poor family in Hogla village of Midnapore district of East Bengal (present-day Bangladesh). Due to poverty, at the age of 12, she was married to Trilochan Hazra, a 62-year-old widower of village Alinan. Despite this, misfortune did not leave him. She became a childless widow at a young age only after six years of marriage. Matangani Hazra's husband's son from his first wife hated him very much. He threw them out of the house. Therefore, Matangini lived in a separate hut and started living as a laborer.

Due to being always involved in the sorrows and happiness of the villagers, she became worshiped like a mother in the whole village. When the independence movement started in the year 1932 under the leadership of Mahatma Gandhi. At that time processions filled with chants of Vande Mataram used to pass through every street in every corner of India. In this sequence, one day when Bande Mataram Jayghosh passed by Matangani ji's house, he also had a desire to join it and Matangani ji welcomed the procession from Sankhbadan according to the Bengali tradition and went with the procession. After reaching Tamluk's Krishnaganj market, a meeting was held where Matangini along with everyone took an oath to struggle with body, mind and wealth in the freedom struggle. A different and important journey in the life of Matangani Hazra started from here itself.

वीरांगना मतांगनी हाजरा || Matangini Hazra The Freedom Fighter ||

On January 17, 1933, when the then Governor of Bengal Anderson came to Tamluk to suppress the "Karbandi Movement", there was a protest against him. In which the heroine Matangini Hazra stood at the forefront carrying the black flag. She reached the court raising slogans against the British rule. On this the police arrested him and imprisoned him in Murshidabad Jail after giving him rigorous imprisonment for six months.

In this sequence, in the year 1935 there was a severe flood in the Tamluk region, due to which the epidemic of small pox and cholera came to its peak in the entire region. At that time, without worrying about her life, Matangini got involved in relief work to help the people of her area.

In 1942, when the "Quit India Movement" gained momentum, Matangini completely immersed herself in it forgetting everything. When three freedom fighters were killed in a demonstration in Tamluk on September 8, the people decided to take out an even bigger rally on September 29 to protest against it. For this, Matangini went from village to village day and night to prepare 5,000 people for the rally and took them all to the government post office in the afternoon. When Matangini was raising slogans while standing on a platform, the policemen opened fire, a bullet hit her left hand, causing the tricolor flag to fall from her hands. He took the tricolor flag in the other hand even before it fell. Just then the second bullet hit his right hand and the third on his forehead, Matangini's dead body rolled there.

Due to this sacrifice of Matangani, there was so much enthusiasm in the whole area that within ten days, people drove out the British and established an independent government there, which worked for 21 months. Such was the heroic Matangani, people in Bengal know her by the name of old Gandhi. Hundreds of salutations to such a heroine, because of her martyrdom in the fight for independence, in December 1974, during her stay in Tamluk, India's Prime Minister Indira Gandhi unveiled the statue of Mantgini Hazra and paid tribute to her.

वीरांगना मतांगनी हाजरा || Matangini Hazra The Freedom Fighter ||

@रूपा ओस की एक बूंद
@RupaOoskiekBoond


चाय पियो कुल्लड़ खाओ || Chai Piyo Kulhad Khao ||

चाय पियो कुल्लड़ खाओ

चाय के शौकीनों के लिए कुल्हड़ में चाय पीना कोई खास बात नही है, पर क्या आपने कभी कुल्हड़ को खाया भी है? है न चौंकाने वाली खबर!!! जी हां ऐसा ही कुछ नजारा देखने को मिला प्रयागराज के किसान मेला में। प्रयागराज के पटेल सेवा संस्थान में 9 दिवसीय किसान मेला चल रहा है। इस किसान मेले में किसानों से संबंधित हर दुकानों की स्टाल लगी है। उन्हीं स्टालों में कुल्हड़ वाली चाय की दुकान लोगों को अपनी ओर खींच रही है। 

चाय पियो कुल्लड़ खाओ || Chai Piyo Kulhad Khao ||

एक तो स्वादिष्ट चाय दूसरे कुल्हड़ खाने की सुविधा, मेले में आने वाले लोगों के लिए उपलब्ध है। उत्तर प्रदेश के देवरिया से आई महिला समूह की महिलाओं ने इस किसान मेले में "चाय पियो कुल्लड़ खाओ" की स्टाल खोली है,जिसमें ऑर्गेनिक चाय के साथ खास तरीके के बने चॉकलेटी स्वाद के कुल्हड़ में ग्राहकों को चाय दिया जा रहा है। चाय तो लोगों को खूब पसंद आ रही है, वहीं इसके कुल्लड़ का स्वाद भी लोगों को खूब भा रहा है।


चाय पियो कुल्लड़ खाओ || Chai Piyo Kulhad Khao ||

कुल्हड़ की ये है खासियत

"चाय पियो कुल्हड़ खाओ" सुनने में बड़ा अजीब सा लग रहा है, पर ये अब बात सच है क्योंकि अब एक ऐसा कुल्लड़ बनाया गया है, जिसमें हम चाय का आनंद ले सकेंगे साथ ही चॉकलेट की तरह उस कुल्हड़ को भी खा सकेंगे, जिससे कि अब इस बात की भी फिक्र नहीं होगी कि चाय बेचने वाले और चाय पीने वाले दोनों लोग कुल्हड़ कहां फेकेने और गंदगी नहीं होने के साथ किसी प्रकार का कोई प्रकृति को नुकसान नहीं पहुंचेगा। दुकादार को ऑर्गेनिक चाय परोसने का ये फायदा है कि चाय की दुकान और आसपास गंदगी नहीं फैलेगी और स्वच्छता का भी ख्याल रखा जा सकेगा। यूँ कह लें कि स्वच्छता और सेहत का ख्याल रखते हुए इस कुल्लड़ को बनाया गया है। यह कुल्हड़ स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा बनाया गया है, जिन्होंने इसे खेतों में उगाए गए मोटे अनाजों को मिलाकर बनाया है।

चाय पियो कुल्लड़ खाओ || Chai Piyo Kulhad Khao ||

इसको बनाते समय मडवा, मक्का, राई जैसे अनाजों का प्रयोग किया गया है। साथ ही इसमें चॉकलेट फ्लेवर को भी मिलाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और बढ़िया हो जाता है। फिलहाल यह कुल्हड़ अभी तो थोड़ा महंगा पड़ रहा है, लेकिन जैसे-जैसे मोटे अनाजों का उत्पादन किसान बढ़ाना शुरू करेंगे और यह कुल्हड़ चलन में आ जाएगा तो इसकी लागत कम हो जाएगी।

drink tea eat kulhad

Drinking tea in Kulhad is not a special thing for tea lovers, but have you ever eaten Kulhad? Isn't it shocking news!!! Yes, such a sight was seen in the Kisan Mela of Prayagraj. A 9-day Kisan Mela is going on at Patel Seva Sansthan in Prayagraj. In this farmer's fair, stalls of every shops related to farmers have been set up. The tea shop with Kulhad in the same stalls is attracting people towards itself.

चाय पियो कुल्लड़ खाओ || Chai Piyo Kulhad Khao ||

One, the facility of eating delicious tea and the other Kulhad, is available for the people coming to the fair. A women's group from Deoria, Uttar Pradesh has opened a stall "Chai Pyo Kullad Khao" in this Kisan Mela, in which tea is being served to the customers in specially made chocolate flavored kulhads made with organic tea. People are liking the tea very much, while the taste of its Kullad is also being liked by the people.

This is the specialty of the Kulhad

"Chai peo kulhad khao" sounds very strange to hear, but it is now true because now such a kulhad has been made, in which we will be able to enjoy tea as well as eat that kulhad like chocolate. That now there will be no worry about where both the tea seller and the tea drinker will throw the ax and there will be no pollution and no harm to nature. The advantage of serving organic tea to the shopkeeper is that dirt will not spread in and around the tea shop and cleanliness can also be taken care of. Just say that this Kullad has been made keeping in mind cleanliness and health. This kulhad is made by the women of the self-help group, who have made it by mixing coarse grains grown in the fields.

चाय पियो कुल्लड़ खाओ || Chai Piyo Kulhad Khao ||

Grains like Madwa, Maize, Rye have been used while making this. Along with this, chocolate flavor is also added to it, which makes it taste even better. At present, this kulhad is getting a bit expensive, but as soon as the farmers start increasing the production of coarse grains and this kulhad comes into use, its cost will come down.

दारुहरिद्रा | Daruharidra | दारूहल्दी |

दारुहरिद्रा (Daruharidra)

दारू क्या होती है यह तो सभी जानते होंगे, जो शरीर के लिए नुकसानदायक होती है पर क्या आप दारूहल्दी के बारे में जानते हैं जो हमारे लिए बेहद फायदेमंद होती है? दारू हल्दी का दूर-दूर तक दारू से कोई लेना देना नहीं है। यह एक बहुत ही उत्तम जड़ी बूटी है, जो बहुत वर्षों से हमारे आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में उपयोग में लाई जाती रही है। कई पुराने ग्रंथों में चिकित्सा के लिए दारुहरिद्रा के प्रयोग की व्याख्या मिलती है। दारूहल्दी को किनगोड़ भी कहा जाता है।

दारूहल्दी के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

दारूहल्दी अर्थात दारूहरिद्रा क्या है?

दारूहल्दी समुद्र तल से 1200 से 1800 मीटर की ऊंचाई पर उगने वाली एक कंटीली झाड़ी है। दारुहल्दी के तने की छाल खुरदरी खांचयुक्त होती है। इसके पत्ते लंबे चौड़े और चार्मिल होते हैं तथा गहरे हरे रंग के और चमकीले होते हैं। इसके फूल छोटे होते हैं और फल 7 से 10 मिली मीटर लंबे, अंडाकार, लाल या श्याम नीले रंग के होते हैं। इसमें फूल आने का समय मार्च से अप्रैल तथा फल आने का समय मई से जून तक का होता है।

जानते हैं दारूहल्दी के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुणों के बारे में

दारूहल्दी के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

आयुर्वेद में दारूहल्दी के का इस्तेमाल का प्रयोग कान की बीमारी, आंखों के रोग, घाव को सुखाने में, मुंह की बीमारी, चर्म रोग तथा डायबिटीज आदि रोगों में किया जाता है।

बुखार होने पर

दारू हल्दी की जड़ की छाल से काढ़ा बनाएं। 10 से 20 मिलीलीटर की मात्रा में इस काढ़े का सेवन करने से लाभ होता है।

घाव सुखाने के लिए

दारूहल्दी की जड़ की छाल को पीसकर घाव पर लगाने से घाव जल्दी सूख जाता है।

सूजन होने पर

दारू हल्दी की जड़ के पेस्ट को सूजन वाली जगह पर लगाने से लाभ होता है।

दारूहल्दी के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

मधुमेह रोग में

10 से 20 ग्राम दारूहल्दी का काढ़ा बनाकर सेवन करने से मधुमेह के रोग में लाभ होता है।

त्वचा संबंधी समस्या

त्वचा पर घाव, अल्सर, एक्ने आदि की समस्या होने पर नारियल के तेल में दारू हल्दी का चूर्ण मिलाकर प्रभावित स्थान पर लगाने से लाभ होता है।

जोड़ों के दर्द में

अगर जोड़ों में दर्द की समस्या है तो दारू हल्दी को दूध के साथ सेवन उबालकर पीने से लाभ होता है।

पीलिया होने पर

दारुहल्दी के 5-10 मिली रस में निम्बू के पत्ते के रस को 1 चम्मच मधु मिलाकर पीने से भी पीलिया में फायदा होता है।

एनीमिया में

सुबह दारुहल्दी के रस (5-10 मिली) या काढ़ा (10-30 मिली) में मधु मिलाकर सेवन करें। इससे एनीमिया में फायदा होता है। यह पीलिया में भी लाभ पहुंचाता है।
दारूहल्दी के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

विभिन्न भाषाओं में दारूहल्दी के नाम

दारुहरिद्रा का वानस्पतिक नाम बरबेरिस एरिस्टैटा (Berberis aristata DC., Syn-Berberis macrophylla K. Koch), बरबेरीडेसी (Berberidaceae) है। 

Hindi – दारुहलदी, दारुहरदी; उत्तराखण्ड-किंगोरा (Kingora)

English – इण्डियन बर्बेरी (Indian barberry), ट्री टरमेरिक (Tree turmeric), नेपाल बर्बेरी (Nepal barberry)  

Sanskrit – दार्वी, दारुहरिद्रा, पर्जन्या, पर्जनी, पीता, पीतद्रु, पीतद, पीतदारु, पीतक, हरिद्रव

Kannada – दोद्दामरदरिसिन (Doddamaradrisin), बगीसूट्रा (Bagisutra)

Gujarati – दारुहलदर (Daruhaldar)

Telugu – मानिपुसपु (Manipusupu), दारूहरिद्रा (Daruharidra), कस्थूरी पुष्पा (Kasthoori pushpa)

Tamil –  (berberis aristata in tamil) – मर मंजिल (Mar manjal), उसिक्कला (Usikkala)

Bengali – दारुहरिद्रा (Daruharidra)

Nepali – चित्रा (Chitra), केस्से (Kissie)

Punjabi – सुमलु (Sumalu), सीमलु (Simalu)

Marathi – दारुहल्दी (Daruhaldi), जरकि हलद (Jarki halad)

Malayalam (berberis aristata malayalam) – मरदारिसिना (Maradarisina), मरमांजल (Maramanjal)

Himichal Pradesh – काम्मुल (Kammul), काशमल (Kashmal)

Arabic – दार हल्द (Dar hald), आरगीस (Aargis);

Persian – दार चोब (Dar chob), चित्रा (Chitra), जिरिश्क (Zirishk)

दारूहल्दी के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

दारू हल्दी के नुकसान

  • दारू हल्दी रक्त में शर्करा के स्तर को कम करता है, इसलिए मधुमेह वाले लोग इसका उपयोग डॉक्टर की सलाह से करें। 
  • सीमित मात्रा में प्रयोग करने से इसका कोई भी नुकसान नहीं होता है।
English Translate

Daruharidra

Everyone must know what alcohol is, which is harmful for the body, but do you know about turmeric which is very beneficial for us? Daru Haldi has nothing to do with alcohol far and wide. It is a wonderful herb, which has been used in our Ayurvedic system of medicine for many years. Many old texts explain the use of Daruharidra for medicine. Daruhaldi is also known as Kingod.
दारूहल्दी के फायदे, नुकसान, उपयोग और औषधीय गुण

What is Daruhaldi i.e. Daruharidra?

Daruhaldi is a thorny shrub growing at an altitude of 1200 to 1800 meters above sea level. The bark of barberry stem is rough and grooved. Its leaves are long, wide and charmil and are dark green in color and shiny. Its flowers are small and the fruits are 7 to 10 mm long, oval, red or dark blue in colour. The flowering time is from March to April and the fruiting time is from May to June.

Know about the advantages, disadvantages, uses and medicinal properties of Daru Haldi

In Ayurveda, the use of turmeric is used in ear disease, eye disease, drying of wounds, mouth disease, skin disease and diabetes etc.

having a fever

Make a decoction from the bark of turmeric root. Consuming this decoction in the quantity of 10 to 20 ml is beneficial.

to dry wounds

Grinding bark of turmeric root and applying it on the wound dries it quickly.

when swollen

Applying the paste of turmeric root on the swollen area is beneficial.

in diabetes

Consuming a decoction of 10 to 20 grams of turmeric is beneficial in diabetes.

skin problem

If there is a problem of wound, ulcer, acne etc. on the skin, mixing liquor and turmeric powder in coconut oil and applying it on the affected area is beneficial.

in joint pain

If there is a problem of pain in the joints, then boiling turmeric with milk and drinking it is beneficial.

having jaundice

Drinking 5-10 ml juice of barberry mixed with 1 spoon of lemon leaf juice is also beneficial in jaundice.

in anemia

Take barberry juice (5-10 ml) or decoction (10-30 ml) mixed with honey in the morning. This is beneficial in anemia. It is also beneficial in jaundice.