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Ayurveda The Synthesis of Yoga and Natural Remedies-38- Diabetes

मधुमेह

       डायबिटीज(मधुमेह) ऐसी बीमारी है, जिससे हर साल दुनिया भर में हजारों लोग प्रभावित होते हैं । यह एक ऐसी बीमारी है जो शरीर की इंसुलिन का उत्पादन या उपयोग करने की क्षमता को प्रभावित करती है। इंसुलिन एक प्रकार का हार्मोन होता है, जो भोजन को ऊर्जा में बदलता है। जो लोग इस बीमारी से पीड़ित हो जाते हैं, उनके शरीर में इंसुलिन पर्याप्त मात्रा में नहीं बनता है और इसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है।
              आजकल मधुमेहएक आम बीमारी है। आनुवांशिक डायबिटीज ठीक नहीं होती है। तात्कालिक, जिनका अनुवांशिक नहीं है, उनका ठीक होता है। शुगर होने से वजन तेजी से कम होता है। थोड़ी चोट पर खून बहुत निकलता है। प्यास बहुत लगती है। मूत्र के बाद उस पर चीटियां आ जाती हैं।
मधुमेह होने का कारण :-(Causes Of  Diabetes ):-
         
#  अनियमित खान - पान
#  वजन अधिक होना
#  आनुवांशिक भी हो सकता है

मधुमेह के लक्षण (Symptoms of Diabetes):-

#  प्यास ज्यादा लगना और मुँह सुखना
#  भूख ज्यादा लगना और थकावट होना
#  शरीर का घाव जल्दी ठीक नहीं होना
#  बार बार यूरिन आना और उस जगह चींटी आना
#  शरीर में कमजोरी होना और वजन घटना
          चक्कर का अधिक आना मतलब शुगर का बहुत कम होना। मधुमेह रोग में शुरू में तो भूख बहुत लगती है, लेकिन धीरे-धीरे भूख कम हो जाती है। शरीर सूखने लगता है, कब्ज की शिकायत रहती है और रोगी का वजन कम होता जाता है। शरीर में कहीं भी जख्म घाव होने पर वह जल्दी भरता नहीं है।
           अधिक चक्कर आने पर गुड़ के रस में नींबू मिलाकर देने पर यदि अच्छा महसूस होता है मतलब कि उसकी शुगर लो है, जिनकी शुगर कम होती है उनको गुड़ के रस में नींबू डालकर और थोड़ा नमक डालकर दिन भर में दो-तीन बार पीना चाहिए।
            जिनकी शुगर बढ़ी हुई है, उनको दूध और दूध की बनी कोई भी चीज नहीं खाना चाहिए। गुड़ और काकवी खा सकते हैं। बढ़ी हुई शुगर वालों को सूर्यास्त के पहले खाना खा लेना चाहिए। सवेरे का खाना 8:00 से 9:00 के बीच में, शाम का खाना 5:00 से 6:00 के बीच में खा लेना चाहिए। फल कोई भी खा सकते हैं। कम शुगर वाला व्यक्ति कुछ भी खा सकता है।
            भोजन के पहले मीठा खाएं भोजन के बाद में खट्टा खाएं शुगर कभी नहीं होगी। एल्युमिनियम के बर्तन का खाना कभी नहीं खाना चाहिए। भोजन के पहले भरपूर सलाद खाएं।

मधुमेह से बचने के घरेलू उपचार (Home Remedies For Diabetes):-

#   जामुन मधुमेह के रोगी के लिए सर्वोत्तम दवाई है। सीधे जामुन खाना लाभदायक तो है ही लेकिन जामुन की गुठली का चूर्ण ताजे पानी के साथ दिन में दो - तीन बार लेने पर मधुमेह में बहुत लाभकारी होता है। इसके साथ जामुन के हरे पत्ते की चटनी बनाकर एक गिलास पानी में प्रतिदिन पीने से लाभ होता है।

#   प्रतिदिन रात्रि विश्राम से पहले त्रिफला चूर्ण लेने से लाभ होता है।

#   करेले के पत्ते का रस प्रतिदिन लेने से मधुमेह में आराम मिलता है।

#  जामुन का बीज और करेले का बीज बराबर मात्रा में लेकर दोनों का पाउडर बना लें। एक चम्मच खाना खाने से 1 घंटे पहले या आधे घंटे बाद मुंह में डालकर चूसना है, ताकि लार के साथ औषधि पेट में जाए।
दूसरी विधि -  खाना खाने के बाद एक चम्मच पाउडर गरम पानी के साथ पी लें।
#    रात में गर्म पानी में दो चम्मच मेथी दाना भिगोकर रख दें और सुबह उठकर उसका पानी सुबह सुबह खाली पेट पीना है और ऊपर से मेथी दाना चबा चबा कर खा लें।

#    फाइबर युक्त और रेशेदार वस्तुएं ज्यादा खाएं और फैट बढ़ाने वाली चीजें कम खाएं।
मधुमेह के लिए योग, प्राणायाम और आसन

#   100 ग्राम मेथीदाना, 100 ग्राम तेजपत्ता, सौ ग्राम नीम की निंबोली, 100 ग्राम जामुन की गुठली, 100  ग्राम करेले का बीज, 100 ग्राम आमला, 100 ग्राम बेलपत्र, 100 ग्राम गुड़मार बूटी, 50 ग्राम कुटकी 100 ग्राम दारूहल्दी, 10 ग्राम बंग भस्म, 20 ग्राम शिलाजीत सबको चूर्ण बनाकर सुबह-शाम खाने से 1 घंटे पहले या बाद में दिन में दो बार गुनगुने पानी के साथ लें।


Sunday

इतवार 
🍁🍁खुद को इतना भी न बचाया कर , 
बारिशें हो तो भींग जाया कर। 
चाँद लाकर कोई नहीं देगा , 
अपने चेहरे से जगमगाया कर।🍁🍁
एक सुबह इक मोड़ पर 
मैंने कहा उसे रोककर, 
हाथ बढ़ा ऐ जिंदगी 
आँख मिलाकर बात कर।  

रोज तेरे जीने के लिए,
इक सुबह मुझे मिल जाती है। 
मुरझाती है कोई शाम अगर,
तो रात कोई खिल जाती है।। 

मैं रोज सुबह तक आता हूँ ,
और रोज शुरू करता हूँ सफर।   
हाथ बढ़ा ऐ जिंदगी ,
आँख मिलाकर बात कर ।।


❤❤क्यूँ किसी के ख्यालों में खोया जाये 
क्यूँ किसी की यादों में रोया जाये ,
इस दुनियाँ के झमेलों में पड़ना है बेकार 
आज संडे है चलो जी भर के सोया जाये।। ❤❤

लक्खण मृग (Lakhad deer)

लक्खण मृग 

लक्खण मृग (Lakhad deer)

                  हजारों साल पहले मगध जनपद के निकटवर्ती वन में हजार हिरणों का एक समूह रहता था, जिसके राजा के 2 पुत्र थे - लक्खण और काल। जब मृगराज वृद्ध होने लगा तो उसने अपने दोनों पुत्रों को उत्तराधिकारी घोषित किया और प्रत्येक के संरक्षण में पांच पांच सौ मृग प्रदान किए, ताकि वे सुरक्षित आहार विहार का आनंद प्राप्त कर सकें।
     
                उन्हीं दिनों से फसल काटने का समय भी निकट था तथा मगध वासी अपने लहलहाते खेतों को आवारा पशुओं से सुरक्षित रखने के लिए अनेक प्रकार के उपक्रम और खाइयों का अपने खेतों की रक्षा के लिए निर्माण कर रहे थे। मृगों की सुरक्षा के लिए वृद्ध पिता ने अपने दोनों पुत्रों को अपने मृग समूहों को लेकर किसी सुदूर और सुरक्षित पहाड़ी पर जाने का निर्देश दिया।

लक्खण मृग (Lakhad deer)

              काला एक स्वेच्छाचारी मृग था। वह तत्काल अपने मृगों को लेकर पहाड़ी की ओर प्रस्थान कर गया। उसने इस बात की तनिक भी परवाह नहीं की कि लोग सूरज की रोशनी में उनका शिकार भी कर सकते हैं। फलतः रास्ते में ही उसके कई साथी मारे गए।
        लक्खण एक बुद्धिमान और प्रबुद्ध मृग था। उसे यह ज्ञान था कि मगध वासी दिन के उजाले में उनका शिकार भी कर सकते हैं, अतः उसने पिता द्वारा निर्दिष्ट पहाड़ी के लिए रात के अंधेरे में प्रस्थान किया। उसकी इस बुद्धिमानी से उसके सभी साथी सुरक्षित पहाड़ी पर पहुंच गए।

लक्खण मृग (Lakhad deer)

              4 महीनों के बाद जब लोगों ने फसल काट ली तो दोनों ही मृग बंधु अपने अपने अनुचरों  के साथ अपने निवास स्थान को लौट आए। जब वृद्ध पिता ने लक्खण के सारे साथियों को जीवित और काला के अनेक साथियों के मारे जाने का कारण जाना तो उसने खुले दिल से लक्खण की बुद्धिमत्ता की भूरि  भूरि प्रशंसा की।


उम्मीद है आपको यह कहानी पसंद आयी होगी। 

English Translate

Lakhad deer

  Thousands of years ago, there lived a group of thousand deer in the adjacent forest of Magadha district, whose king had 2 sons - Lakhan and Kaal. When the mrigaraja began to grow old, he declared his two sons as heirs and provided five to five deer under the protection of each, so that they could enjoy safe feeding viharas.
लक्खण मृग (Lakhad deer)
     
                From those days the harvesting time was also near and the Magadh residents were constructing a variety of undertakings and trenches to protect their fields, to keep their waving fields safe from stray animals. In order to protect the antelope, the old father instructed his two sons to go to a remote and safe hill with their antelope groups.

              Kala was an arbitrary antelope. He immediately departed towards the hill with his antelope. He did not even care that people could hunt him in the sunlight. As a result, many of his companions were killed on the way.
        Lakhan was an intelligent and enlightened antelope. He had the knowledge that Magadhites could hunt them in broad daylight, so he left for the hill designated by his father in the dark of night. With this intelligence, all his companions reached the safe hill.

लक्खण मृग (Lakhad deer)

              After 4 months, when the people reaped the crop, both the deer brothers returned to their places of residence with their servants. When the old father learned the reason for killing all of Lakhan's companions alive and many of Kala's companions, he openly praised Lakhan's intelligence.
Hope you like this story.

Ayurveda The Synthesis of Yoga and Natural Remedies-37- Benefits of White Onion

सफेद प्याज
         सफेद प्याज ना केवल खाने के स्वाद को बढ़ाती है बल्कि इसके इस्तेमाल से सौंदर्य सहित कई बीमारियों से निजात पाया जा सकता है। हमारे भारतीय घरों में प्याज रोजाना इस्तेमाल होता है, परंतु यह स्वाद बढ़ाने के लिए होता है, इसको डालने से सब्जी स्वादिष्ट बनती है। आज हम इसके कुछ औषधीय गुणों के बारे में भी चर्चा करेंगे।

Benefits of  White Onion (सफेद प्याज  के फायदे ):-
#   प्याज पित्त को शांत करने वाली सबसे अच्छी औषधि है। यदि पित्त बिगड़ा है जैसे - गैस बनना, खट्टी डकार आना, मुंह में पानी आना, खाने का पाचन नहीं होना, उल्टी होना इन बीमारियों के लिए प्याज सबसे अच्छी दवा है।
#   लू लगने के बाद के सभी रोगों में प्याज सबसे अच्छी औषधि है।
#   आंखों का एक रोग है, जिसे कैटरेक्ट (मोतियाबिंद) कहते हैं। मोतियाबिंद को गलाने की ताकत प्याज में होती है।
#   आंखें ठीक रखने के लिए और आंखों में कभी चश्मा ना लगे तो प्याज का रस अपनी आंखों में डालें।
#   सफेद प्याज की औषधि युक्त होता है, इसलिए सफेद प्याज का ही प्रयोग करें। लाल वाले प्याज में कोई भी औषधीय गुण नहीं होता है।
#  सफेद प्याज का रस एक चम्मच, एक चम्मच नींबू का रस, तीन चार चम्मच शहद और एक चम्मच गुलाब जल इन चारों को मिलाकर एक कांच की बोतल में भरकर अच्छे से मिला लें। उसके बाद रोज रात को सोते समय एक एक बूंद आंखों में डालें। 1 महीने तक लगातार डालने पर मोतियाबिंद कट कर निकल जाता है। चार-पांच महीने तक खराब नहीं होता है।  इसको घर के तापमान पर भी रख सकते हैं।
#   ग्लूकोमा आंखों में हमेशा काला-काला ही दिखना। उसकी भी यह सबसे अच्छी औषधि है।
#   आंखों में रेटिनल डिटैचमेंट होने पर भी यह औषधि बहुत काम आती है।
#   अनिद्रा में भी फायदेमंद है, प्याज के बीजों की बनाई हुई चाय अनिद्रा रोगों को दूर करती है।
#   प्याज के 10 - 20 मिलीलीटर रस में एक चम्मच शहद मिलाकर दिन में दो-तीन बार चाटने से नजला मिलता है।

#  गले के रोग में इसको सिरके में पीसकर चाटने से आराम मिलता हैं।
#  इस कंद को कुचलकर सुंघाने से मूर्छा और हिस्टीरिया से होने वाली बेहोशी दूर हो जाती है।
#  गांठ, फोड़े, फुंसी, नारू, कंठमाला इत्यादि रोगों पर इसको घी में तलकर बांधने से अथवा इसके रस को लगाने से लाभ मिलता है।
#  जहरीले कीड़ों के काटने पर इसका रस मलने से दंश जनित दाह मिट जाती है। 
#  प्याज का 10 - 20 मिलीलीटर ताजा रस दिन में तीन बार तक तीन महीने तक पीने से गुर्दे और मसाने की पथरी गलकर निकल जाती है।
#  सफ़ेद प्याज के निरंतर सेवन से तथा रस को बालों में लगाने से बालों का झड़ना रुकता है।

दुनिया का सबसे खूबसूरत बच्चा - Duniya ka sabse Khubsurat Baccha

दुनिया का सबसे खूबसूरत बच्चा

दुनिया का सबसे खूबसूरत बच्चा (Duniya ka sabse Khubsurat Baccha)

शहंशाह अकबर अपनी सल्तनत में सभी का बहुत अच्छे से ख्याल रखते थे। कोई उनकी सुविधाओं से वंचित ना रह जाए इसलिए वह वहां भेष बदल बदल कर घूमा करते थे और लोगों के बीच जाकर लोगों की परेशानियों का अनुभव करते थे कि कोई उनकी सल्तनत में दुखी तो नहीं है।

1 दिन शहंशाह अकबर अपने दरबार में अपने बेटे को गोद में खिला रहे थे। अकबर का बेटा बहुत खूबसूरत था। लोग उसे देखते ही तारीफ किए बिना नहीं रहते थे।
             जब अकबर अपने बेटे को खिला रहे थे तो दरबार में बैठे सभी लोग उसकी तारीफ करने लगे।
दरबारी - जहांपना आपका बेटा दुनिया का सबसे खूबसूरत बच्चा है। शहजादे जैसा दुनिया में और दूसरा कोई बच्चा नहीं है।

अकबर - हां मुझे भी ऐसा ही लगता है।

दरबारी -  हां हां जहांपना बिल्कुल।

अकबर - तुम क्या कहते हो बीरबल। तुम्हें क्या लगता है ? हमारा शहजादा दुनिया का सबसे खूबसूरत बच्चा है।
बीरबल - जहांपना मुझे ऐसा नहीं लगता, लेकिन मैं यह नहीं कह रहा शहजादे खूबसूरत नहीं हैं ।

अकबर - क्या, क्या तुम्हें ऐसा लगता है हमारे शहजादे खूबसूरत नहीं हैं।

बीरबल - नहीं जहांपना मैंने ऐसा तो नहीं कहा। मेरी बात को आप गलत ना समझें।  मेरे कहने का मतलब है कि शहजादे खूबसूरत तो हैं , लेकिन और भी कुछ बच्चे दुनिया में खूबसूरत हो सकते हैं।

दुनिया का सबसे खूबसूरत बच्चा (Duniya ka sabse Khubsurat Baccha)

अकबर - क्या तुम्हारे कहने का मतलब है शहजादे पूरी दुनिया में सबसे खूबसूरत नहीं हैं।

बीरबल - जहांपना मेरे कहने का मतलब है कि दुनिया में शहजादे ही एक ऐसे नहीं है जो सबसे खूबसूरत हैं।

अकबर -  बीरबल, आज तुमने हमारे दिल को बहुत ठेस पहुंचाई है। तुम साबित करके दिखाओ शहजादे से भी ज्यादा और खूबसूरत कोई बच्चा है। उसे हमारे सामने पेश करो।

बीरबल - जी जहांपना, मुझे लगता है और मुझे पूरा भरोसा है। मैं इस बात को साबित कर सकता हूं।

अकबर - जाओ इस बात को साबित करके दिखाओ और तब तक मुझे अपनी शक्ल मत दिखाना।

                और फिर क्या था बीरबल शहजादे से भी ज्यादा खूबसूरत बच्चे की तलाश में निकल गए। कुछ दिनों बाद बीरबल  दरबार में हाजिर  हुए।

अकबर - बीरबल, क्या तुम्हें शहजादे से ज्यादा खूबसूरत बच्चा मिल गया?

बीरबल - जहांपना मैं दरबार में यही बताने आया हूं कि मैंने सबसे खूबसूरत बच्चा ढूंढ लिया है।

अकबर -  ढूंढ लिया है तो उसे दरबार में क्यों नहीं लाए? कहां है।

बीरबल - जहांपना, मैं उस बच्चे को तो यहां नहीं ला सका, लेकिन मैं आपको वहां जरूर ले जाऊंगा। ताकि आप कुछ समझ पाए।

अकबर -  यहां क्यों नहीं आ सकता ? अच्छा ठीक है मैं ही वहां जाऊंगा। कल सुबह हम लोग वहां जाएंगे।

बीरबल -  जी जहांपना, हम कल सुबह ही वहां जाएंगे। लेकिन जहांपना हमें वहां भेष  बदलकर जाना होगा। अकबर - ठीक है।

           शहंशाह अकबर और बीरबल अगली सुबह उस बच्चे के पास जाते हैं, जो बच्चा बहुत ही गरीब होता है और छोटी सी झोपड़ी में रहता है और वह वहां मिट्टी में खेलता होता है। गंदे वस्त्र पहने हुए था।
बीरबल - यह है दुनिया का सबसे खूबसूरत बच्चा।
अकबर -  तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है, जो इतने बदसूरत बच्चे को दुनिया का सबसे खूबसूरत बच्चा बता रहे हो।

                 यह सुनकर बच्चा  बहुत जोरों से रोने लगता है। उसी समय बच्चे की माँ वहां पर आती है और अकबर से कहती है -"तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरे बच्चे को बदसूरत कहने की। मेरा लाल दुनिया का सबसे खूबसूरत बच्चा है। आज के बाद तुमने ऐसी बात कहीं तो मैं तुम्हारी हड्डी पसली तोड़ दूंगी। चले जाओ यहां से, आज के बाद यहां मत आना।  अपनी शक्ल कभी मत दिखाना।"

दुनिया का सबसे खूबसूरत बच्चा (Duniya ka sabse Khubsurat Baccha)
       
      उसके बाद वह अपने बच्चे को लाड़ दुलार करने लगी।  मेरा बच्चा दुनिया का सबसे खूबसूरत बच्चा है। उस बच्चे की माँ की यह बात सुनकर अकबर बिल्कुल खामोश हो गए।
बीरबल - कुछ समझ आया जहांपना।
अकबर -मैं अच्छी तरह समझ गया बीरबल। मां-बाप के लिए उसका बच्चा चाहे कैसा भी हो उसके लिए दुनिया का सबसे खूबसूरत बच्चा होता है। अकबर तुम सही कह रहे हो।
बीरबल - हर मां बाप के लिए अपना बच्चा खूबसूरत होता है। मेरे कहने का मकसद सिर्फ इतना था कि आप दुनिया की चापलूसी में ना फंस कर शहजादे को अच्छी तालीम दें। मैं तो सिर्फ आपका भला चाहता हूं।
अकबर -  बीरबल तुमने एक बार फिर से साबित कर दिया कि तुम हमारे सच्चे दोस्त हो। तुमने बिना डरे हमें यह बात समझाया। बहुत खूब बीरबल। 

English Translate

Duniya ka sabse Khubsurat Baccha

                Emperor Akbar took very good care of everyone in his sultanate.  Nobody is deprived of their facilities, so he used to roam there disguised and go among the people and feel the troubles of the people that someone is unhappy in their sultanate.

               On day 1, Emperor Akbar was feeding his son in his lap in his court.  Akbar's son was very beautiful.  People did not live without praising him on seeing him.
              When Akbar was feeding his son, everyone in the court started praising him.
 Courtier - Your son is the most beautiful child in the world.  There is no other child in the world like Shahzade.


 Akbar - Yes I think so too.

 Darbari - Yes, yes, where to go.

 Akbar - What do you say Birbal.  What do you think?  Our princess is the most beautiful child in the world.
 Birbal - I don't think so, but I am not saying that she is not beautiful.

 Akbar - What, do you think our princess is not beautiful?

 Birbal - No, I did not say so.  Don't get me wrong  I mean to say that Shahzade is beautiful, but some other children can be beautiful in the world.

 Akbar - Do you mean shehzade is not the most beautiful in the whole world.

 Birbal - I mean to say that the princess is not the only one in the world who is the most beautiful.

 Akbar - Birbal, today you have hurt our heart a lot.  You can prove and show that there is a child more beautiful than the princess.  Present it to us.

 Birbal - Yes, I think and I am very confident.  I can prove this.

 Akbar - Go prove it and do not show me your face till then.

                 And what was it then Birbal went out in search of a more beautiful child than Shehzade.  A few days later Birbal attended the court.

 Akbar - Birbal, did you find a baby more beautiful than Shahzade?

 Birbal - I have come to the court to tell you that I have found the most beautiful child.

 Akbar - If you have found it then why not bring it to the court?  Where.

 Birbal - Wherever, I could not bring that child here, but I will definitely take you there.  So that you can understand something.

दुनिया का सबसे खूबसूरत बच्चा (Duniya ka sabse Khubsurat Baccha)


 Akbar - Why can't I come here?  Ok ok i will go there  Tomorrow morning we will go there.

 Birbal - Yes, we will go there tomorrow morning.  But wherever we have to go there disguise.  Akbar - Okay.
            Emperor Akbar and Birbal go next morning to the child who is very poor and lives in a small hut and plays in the mud there.  Was wearing dirty clothes.
 Birbal - This is the most beautiful child in the world.
 Akbar - You have lost your mind, who is calling such an ugly child the most beautiful child in the world.
                  Hearing this, the child starts crying very loudly.  At the same time, the child's mother comes there and says to Akbar - "How dare you call my child ugly. My red is the most beautiful child in the world. After today you will break my ribs somewhere  Go away from here, do not come here after today. Never show your face. "

              After that, she started caressing her child.  My child is the most beautiful child in the world.  Akbar became completely silent on hearing this child's mother.
 Birbal - Got some sense.
 Akbar - I understand Birbal very well.  For a parent, whatever his child is, it is the most beautiful child in the world.  Akbar you are right.
 Birbal - For every parent, their child is beautiful.  My only purpose was to say that you give good training to Shahzade by not getting caught in the flattery of the world.  I only wish you well.
 Akbar - Birbal You have proved once again that you are our true friend.  You explained this to us without fear.  Very good Birbal.

Ayurveda The Synthesis of Yoga and Natural Remedies-36- Benefits of Giloy

Giloy(गिलोय )
              इस कोरोना काल के दहशत भरे और निरंतर लंबे होते जा रहे दिनों में हम सभी की आवश्यकता शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना है, लेकिन आज हम आपको एक ऐसी अमृत बेल के बारे में बताने जा रहे हैं जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ साथ कई प्रकार की बीमारियों से भी हमारी रक्षा कर सकने में समर्थ है।यानि सोने में सुहागा। इस ब्लॉग में इसके पूर्व भी इस बेल के गुणों के बारे में चर्चा की जा चुकी है लेकिन आज वक्त की जरूरत है कि इसके असंख्य गुणों को आप सभी के साथ पुनः साझा किया जाय।
जी हां, हम बात कर रहे हैं अमृत बेल गिलोय की जो सर्वत्र सुलभ है।

#   गिलोय ही एक  ऐसी बेल है, जिसे आप सौ मर्ज की एक दवा कह सकते हैं। इसलिए इसे संस्कृत में अमृता नाम दिया गया है।

            इसका वानस्पिक नाम (Botanical name) टीनोस्पोरा कॉर्डीफोलिया (tinospora cordifolia है। इसके पत्ते पान के पत्ते जैसे दिखाई देते हैं और जिस पौधे पर यह चढ़ जाती है, उसे मरने नहीं देती। इसके बहुत सारे लाभ आयुर्वेद में बताए गए हैं, जो न केवल आपको सेहतमंद रखते हैं, बल्कि आपकी सुंदरता को भी निखारते हैं। आइए जानते हैं गिलोय के फायदे…

गिलोय बढ़ाती है रोग प्रतिरोधक क्षमता

गिलोय एक ऐसी बेल है, जो व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा कर उसे बीमारियों से दूर रखती है। इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो शरीर में से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का काम करते हैं। यह खून को साफ करती है, बैक्टीरिया से लड़ती है। लिवर और किडनी की अच्छी देखभाल भी गिलोय के बहुत सारे कामों में से एक है। ये दोनों ही अंग खून को साफ करने का काम करते हैं।

ठीक करती है बुखार

अगर किसी को बार-बार बुखार आता है तो उसे गिलोय का सेवन करना चाहिए। गिलोय हर तरह के बुखार से लडऩे में मदद करती है। इसलिए डेंगू के मरीजों को भी गिलोय के सेवन की सलाह दी जाती है। डेंगू के अलावा मलेरिया, स्वाइन फ्लू में आने वाले बुखार से भी गिलोय छुटकारा दिलाती है।

गिलोय के फायदे – डायबिटीज के रोगियों के लिए

गिलोय एक हाइपोग्लाइसेमिक एजेंट है यानी यह खून में शर्करा की मात्रा को कम करती है। इसलिए इसके सेवन से खून में शर्करा की मात्रा कम हो जाती है, जिसका फायदा टाइप टू डायबिटीज के मरीजों को होता है।

पाचन शक्ति बढ़ाती है

यह बेल पाचन तंत्र के सारे कामों को भली-भांति संचालित करती है और भोजन के पचने की प्रक्रिया में मदद कती है। इससे व्यक्ति कब्ज और पेट की दूसरी गड़बडिय़ों से बचा रहता है।

कम करती है स्ट्रेस

गलाकाट प्रतिस्पर्धा के इस दौर में तनाव या स्ट्रेस एक बड़ी समस्या बन चुका है। गिलोय एडप्टोजन की तरह काम करती है और मानसिक तनाव और चिंता (एंजायटी) के स्तर को कम करती है। इसकी मदद से न केवल याददाश्त बेहतर होती है बल्कि मस्तिष्क की कार्यप्रणाली भी दुरूस्त रहती है और एकाग्रता बढ़ती है।

बढ़ाती है आंखों की रोशनी

गिलोय को पलकों के ऊपर लगाने पर आंखों की रोशनी बढ़ती है। इसके लिए आपको गिलोय पाउडर को पानी में गर्म करना होगा। जब पानी अच्छी तरह से ठंडा हो जाए तो इसे पलकों के ऊपर लगाएं।

अस्थमा में भी फायदेमंद

मौसम के परिवर्तन पर खासकर सर्दियों में अस्थमा को मरीजों को काफी परेशानी होती है। ऐसे में अस्थमा के मरीजों को नियमित रूप से गिलोय की मोटी डंडी चबानी चाहिए या उसका जूस पीना चाहिए। इससे उन्हें काफी आराम मिलेगा।

गठिया में मिलेगा आराम

गठिया यानी आर्थराइटिस में न केवल जोड़ों में दर्द होता है, बल्कि चलने-फिरने में भी परेशानी होती है। गिलोय में एंटी आर्थराइटिक गुण होते हैं, जिसकी वजह से यह जोड़ों के दर्द सहित इसके कई लक्षणों में फायदा पहुंचाती है।

अगर हो गया हो एनीमिया, तो करिए गिलोय का सेवन

भारतीय महिलाएं अक्सर एनीमिया यानी खून की कमी से पीडि़त रहती हैं। इससे उन्हें हर वक्त थकान और कमजोरी महसूस होती है। गिलोय के सेवन से शरीर में लाल रक्त कणिकाओं की संख्या बढ़ जाती है और एनीमिया से छुटकारा मिलता है।

 रक्त विकार 

 गिलोय से आमाशयगत अम्लता कम होती है। यह हृदय को बल देने वाली, रक्त विकार तथा पांडुरोग में गुणकारी है।

बाहर निकलेगा कान का मैल

कान का जिद्दी मैल बाहर नहीं आ रहा है तो थोड़ी सी गिलोय को पानी में पीस कर उबाल लें। ठंडा करके छान के कुछ बूंदें कान में डालें। एक-दो दिन में सारा मैल अपने आप बाहर जाएगा।

कम होगी पेट की चर्बी

गिलोय शरीर के उपापचय (मेटाबॉलिजम) को ठीक करती है, सूजन कम करती है और पाचन शक्ति बढ़ाती है। ऐसा होने से पेट के आस-पास चर्बी जमा नहीं हो पाती और आपका वजन कम होता है।

खूबसूरती बढ़ाती है गिलोय

गिलोय न केवल सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है, बल्कि यह त्वचा और बालों पर भी चमत्कारी रूप से असर करती है….

बोन फ्रेक्टर में 

हड्डी में चोट लगने पर गिलोय  का जूस पीने पर और पत्तियों को हल्का गरम कर चोट वाली जगह पर लगाने से दर्द में आराम।

जवां रखती है गिलोय

गिलोय में एंटी एजिंग गुण होते हैं, जिसकी मदद से चेहरे से काले धब्बे, मुंहासे, बारीक लकीरें और झुर्रियां दूर की जा सकती हैं। इसके सेवन से आप ऐसी निखरी और दमकती त्वचा पा सकते हैं, जिसकी कामना हर किसी को होती है। अगर आप इसे त्वचा पर लगाते हैं तो घाव बहुत जल्दी भरते हैं। त्वचा पर लगाने के लिए गिलोय की पत्तियों को पीस कर पेस्ट बनाएं। अब एक बरतन में थोड़ा सा नीम या अरंडी का तेल उबालें। गर्म तेल में पत्तियों का पेस्ट मिलाएं। ठंडा करके घाव पर लगाएं। इस पेस्ट को लगाने से त्वचा में कसावट भी आती है।
बालों की समस्या भी होगी दूर

अगर आप बालों में ड्रेंडफ, बाल झडऩे या सिर की त्वचा की अन्य समस्याओं से जूझ रहे हैं तो गिलोय के सेवन से आपकी ये समस्याएं भी दूर हो जाएंगी।

गिलोय का प्रयोग ऐसे करें:

अब आपने गिलोय के फायदे जान लिए हैं, तो यह भी जानिए कि गिलोय को इस्तेमाल कैसे करना है…

गिलोय जूस

गिलोय की डंडियों को छील लें और इसमें पानी मिलाकर मिक्सी में अच्छी तरह पीस लें। छान कर सुबह-सुबह खाली पेट पीएं। अलग-अलग ब्रांड का गिलोय जूस भी बाजार में उपलब्ध है।

काढ़ा

चार इंच लंबी गिलोय की डंडी को छोटा-छोटा काट लें। इन्हें कूट कर एक कप पानी में उबाल लें। पानी आधा होने पर इसे छान कर पीएं। अधिक फायदे के लिए आप इसमें लौंग, अदरक, तुलसी भी डाल सकते हैं।

पाउडर

यूं तो गिलोय पाउडर बाजार में उपलब्ध है। आप इसे घर पर भी बना सकते हैं। इसके लिए गिलोय की डंडियों को धूप में अच्छी तरह से सुखा लें। सूख जाने पर मिक्सी में पीस कर पाउडर बनाकर रख लें।

गिलोय वटी

बाजार में गिलोय की गोलियां यानी टेबलेट्स भी आती हैं। अगर आपके घर पर या आस-पास ताजा गिलोय उपलब्ध नहीं है तो आप इनका सेवन करें।

साथ में अलग-अलग बीमारियों में आएगी काम

अरंडी यानी कैस्टर के तेल के साथ गिलोय मिलाकर लगाने से गाउट(जोड़ों का गठिया) की समस्या में आराम मिलता है।इसे अदरक के साथ मिला कर लेने से रूमेटाइड आर्थराइटिस की समस्या से लड़ा जा सकता है।चीनी के साथ इसे लेने से त्वचा और लिवर संबंधी बीमारियां दूर होती हैं।आर्थराइटिस से आराम के लिए इसे घी के साथ इस्तेमाल करें।कब्ज होने पर गिलोय में गुड़ मिलाकर खाएं।

साइड इफेक्ट्स का रखें ध्यान

वैसे तो गिलोय को नियमित रूप से इस्तेमाल करने के कोई गंभीर दुष्परिणाम अभी तक सामने नहीं आए हैं लेकिन चूंकि यह खून में शर्करा की मात्रा कम करती है। इसलिए इस बात पर नजर रखें कि ब्लड शुगर जरूरत से ज्यादा कम न हो जाए। *गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को गिलोय के सेवन से बचना चाहिए। पांच साल से छोटे बच्चों को गिलोय न दें।

एक निवेदन :---अभी वर्षाऋतु का काल है अपने घर में बड़े गमले या आंगन में जंहा भी उचित स्थान हो गिलोय की बेल अवश्य लगायें यह बहु उपयोगी वनस्पति ही नही बल्कि आयुर्वेद का अमृत और ईश्वरीय वरदान है।

आज यहां आप सबके बीच एक जानकारी साझा करना चाहती हूं। इस ब्लॉग में गिलोय के बारे में दो बार पोस्ट डाला जा चुका है और सिर्फ इसके फायदे को बताया गया है। क्योंकि हर जगह सिर्फ इसके फायदे की ही चर्चा है। इस कोरोना काल में यह काढ़े के रूप में लगभग हर घर में इस्तेमाल हो रहा है।

Ayurveda The Synthesis of Yoga and Natural Remedies-36- Benefits of Giloy

          जो लोग भी गिलोय का सेवन करते हैं उन्हें किसी भी तरह का बुखार होने की संभावना बहुत कम हो जाती है। फिर भी यहां ऐसी घटना हुई है जिसमें लगातार गिलोय का सेवन करने के बाद भी कई लोगों को बुखार हुआ है। इस बात को सोचते हुए कि आखिर क्यों गिलोय के सेवन के बावजूद भी सभी लोग बीमार हुए, यह तथ्य सामने आया कि सभी लोग उसी गिलोय का सेवन कर रहे थे जो एक जहरीले जगह पर चढ़ा हुआ था। और गिलोय की यह प्रवृत्ति होती है कि वह जिस पर भी चढ़ता है उसका गुण उसके अंदर आ जाता है।

            यह बात किसी भी लेबोरेटरी के जांच के आधार पर नहीं कही जा रही है, सिर्फ एक ऑब्जरवेशन है और आपसे साझा करने का इतना ही मकसद है कि गिलोय के सेवन से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि वह किसी नुकसानदायक वृक्ष या स्थान पर चढ़ी हुई ना हो। सबसे अच्छा नीम के पेड़ पर चढ़ी गिलोय है। 

एक बात और ...... किसी भी चीज का सेवन जो स्वास्थ्य की दृष्टि से अच्छा भी है, जरूरत से ज्यादा नुकसान ही पहुंचाती है

अति सर्वत्र वर्जयेत्

Sunderkand-11

सुंदरकांड 
Hanuman Jayanti 2020, Date, Puja Timing, Muhurat & Birth Place Of ...
हनुमानजी सुग्रीव से मिले
चौपाई (Chaupai – Sunderkand)
जौं होति सीता सुधि पाई।
मधुबन के फल सकहिं कि खाई॥
एहि बिधि मन बिचार कर राजा।
आइ गए कपि सहित समाजा॥
सुग्रीवको आनंद क्यों हुआ? उसका कारण कहते हैं। सुग्रीवने मनमें विचार किया कि जो उनको सीताजीकी खबर नहीं मिली होती तो वे लोग मधुवनके फल कदापि नहीं खाते॥
राजा सुग्रीव इस तरह मनमें विचार कर रहे थे। इतनेमें समाजके साथ वे तमाम वानर बहां चले आये॥ जय सियाराम जय जय सियाराम
आइ सबन्हि नावा पद सीसा।
मिलेउ सबन्हि अति प्रेम कपीसा॥
पूँछी कुसल कुसल पद देखी।
राम कृपाँ भा काजु बिसेषी॥
सबने आकर सुग्रीव के चरणों में सिर नवाया। और आकर उन सभीने नमस्कार किया तब बड़े प्यारके साथ सुग्रीव उन सबसे मिले॥
सुग्रीवने सभीसे कुशल पूंछा तब उन्होंने कहा कि नाथ! आपके चरण कुशल देखकर हम कुशल हैं और जो यह काम बना है सो केवल रामचन्द्रजीकी कृपासे बना है॥ जय सियाराम जय जय सियाराम
नाथ काजु कीन्हेउ हनुमाना।
राखे सकल कपिन्ह के प्राना॥
सुनि सुग्रीव बहुरि तेहि मिलेऊ।
कपिन्ह सहित रघुपति पहिं चलेऊ॥
हे नाथ! यह काम हनुमानजीने किया है। यह काम क्या किया है मानो सब वानरोंके इसने प्राण बचा लिये हैं॥
यह बात सुनकर सुग्रीव उठकर फिर हनुमानजीसे मिले और वानरोंके साथ रामचन्द्रजीके पास आए॥ जय सियाराम जय जय सियाराम
राम कपिन्ह जब आवत देखा।
किएँ काजु मन हरष बिसेषा॥
फटिक सिला बैठे द्वौ भाई।
परे सकल कपि चरनन्हि जाई॥
वानरोंको आते देखकर रामचन्द्रजीके मनमें बड़ा आनन्द हुआ कि ये लोग काम सिद्ध करके गये हैं॥ राम और लक्ष्मण ये दोनों भाई स्फटिकमणिकी शिलापर बैठे हुए थे। वहां जाकर सब वानर दोनों भाइयोंके चरणोंमें गिरे॥ जय सियाराम जय जय सियाराम
दोहा (Doha – Sunderkand)
प्रीति सहित सब भेंटे रघुपति करुना पुंज॥
पूछी कुसल नाथ अब कुसल देखि पद कंज 29
करुणानिधान श्रीरामचन्द्रजी प्रीतिपूर्वक सब वानरोंसे मिले और उनसे कुशल पूँछा. तब उन्होंने कहा कि हे नाथ! आपके चरणकमलोंको कुशल देखकर (चरणकमलोंके दर्शन पाने से) अब हम कुशल हें 29 जय सियाराम जय जय सियाराम
हनुमानजी और सुग्रीव रामचन्द्रजी से मिले
कब, कहां और कैसे मिले बजरंगबली से ...
चौपाई (Chaupai – Sunderkand)
जामवंत कह सुनु रघुराया।
जा पर नाथ करहु तुम्ह दाया॥
ताहि सदा सुभ कुसल निरंतर।
सुर नर मुनि प्रसन्न ता ऊपर॥
उस समय जाम्बवान ने रामचन्द्रजीसे कहा कि हे नाथ! सुनो, आप जिसपर दया करते हो॥
उसके सदा सर्वदा शुभ और कुशल निरंतर रहते हें। तथा देवता मनुष्य और मुनि सभी उसपर सदा प्रसन्न रहते हैं॥ जय सियाराम जय जय सियाराम
सोइ बिजई बिनई गुन सागर।
तासु सुजसु त्रैलोक उजागर॥
प्रभु कीं कृपा भयउ सबु काजू।
जन्म हमार सुफल भा आजू॥
और वही विजयी (विजय करनेवाला), विनयी (विनयवाला) और गुणोंका समुद्र होता है और उसकी सुख्याति तीनों लोकोंमें प्रसिद्ध रहती है॥
यह सब काम आपकी कृपासे सिद्ध हुआ हैं। और हमारा जन्म भी आजही सफल हुआ है॥ जय सियाराम जय जय सियाराम
नाथ पवनसुत कीन्हि जो करनी।
सहसहुँ मुख जाइ सो बरनी॥
(
जो मुख लाखहु जाइ बरणी॥)
पवनतनय के चरित सुहाए।
जामवंत रघुपतिहि सुनाए॥
हे नाथ! पवनपुत्र हनुमानजीने जो काम किया है उसका हजार मुखों से भी वर्णन नहीं किया जा सकता
(
वह कोई आदमी जो लाख मुखोंसे कहना चाहे तो भी वह कहा नहीं जा सकता)
हनुमानजीकी प्रशंसाके वचन और कार्य जाम्बवानने रामचन्द्रजीको सुनाये॥ जय सियाराम जय जय सियाराम
सुनत कृपानिधि मन अति भाए।
पुनि हनुमान हरषि हियँ लाए॥
कहहु तात केहि भाँति जानकी।
रहति करति रच्छा स्वप्रान की॥
उन वचनोंको सुनकर दयालु श्रीरामचन्द्वजीने उठकर हनुमानजीको अपनी छातीसे लगाया॥
और श्रीरामने हनुमानजीसे पूछा कि हे तात! कहो, सीता किस तरह रहती है? और अपने प्राणोंकी रक्षा वह किस तरह करती है? जय सियाराम जय जय सियाराम
दोहा (Doha – Sunderkand)
नाम पाहरू दिवस निसि ध्यान तुम्हार कपाट।
लोचन निज पद जंत्रित जाहिं प्रान केहिं बाट 30
हनुमानजीने कहा कि हे नाथ यद्यपि सीताजीको कष्ट तो इतना है कि उनके प्राण एक क्षणभर रहे। परंतु सीताजीने आपके दर्शनके लिए प्राणोंका ऐसा बंदोबस्त करके रखा है कि रात दिन अखंड पहरा देनेके वास्ते आपके नामको तो उसने सिपाही बना रखा है (आपका नाम रात-दिन पहरा देनेवाला है) और आपके ध्यानको कपाट बनाया है (आपका ध्यान ही किवाड़ है) और अपने नीचे किये हुए नेत्रोंसे जो अपने चरणकी ओर निहारती है वह यंत्रिका अर्थात् ताला है. अब उसके प्राण किस रास्ते बाहर निकलें 30
हनुमानजी ने श्रीराम को सीताजी का सन्देश दिया
Why Did Lord Rama Deceive Hanuman Ji For Going To Vishnuloka ...
चौपाई (Chaupai – Sunderkand)
चलत मोहि चूड़ामनि दीन्ही।
रघुपति हृदयँ लाइ सोइ लीन्ही॥
नाथ जुगल लोचन भरि बारी।
बचन कहे कछु जनककुमारी॥
और चलते समय मुझको यह चूड़ामणि दिया हे. ऐसे कह कर हनुमानजीने वह चूड़ामणि रामचन्द्रजीको दे दिया। तब रामचन्द्रजीने उस रत्नको लेकर अपनी छातीसे लगाया॥
तब हनुमानजीने कहा कि हे नाथ! दोनो हाथ जोड़कर नेत्रोंमें जल लाकर सीताजीने कुछ वचनभी कहे है सो सुनिये॥ जय सियाराम जय जय सियाराम
अनुज समेत गहेहु प्रभु चरना।
दीन बंधु प्रनतारति हरना॥
मन क्रम बचन चरन अनुरागी।
केहिं अपराध नाथ हौं त्यागी॥
सीताजीने कहा है कि लक्ष्मणजीके साथ प्रभुके चरण धरकर मेरी ओरसे ऐसी प्रार्थना करना कि हे नाथ! आप तो दीनबंधु और शरणागतोके संकटको मिटानेवाले हो॥
फिर मन, वचन और कर्मसे चरणोमें प्रीति रखनेवाली मुझ दासीको आपने किस अपराधसे त्याग दिया है॥
अवगुन एक मोर मैं माना।
बिछुरत प्रान कीन्ह पयाना॥
नाथ सो नयनन्हि को अपराधा।
निसरत प्रान करहिं हठि बाधा॥
हाँ, मेरा एक अपराध पक्का (अवश्य) हैं और वह मैंने जान भी लिया है कि आपसे बिछुरतेही (वियोग होते ही) मेरे प्राण नही निकल गये॥
परंतु हें नाथ! वह अपराध मेरा नहीं है किन्तु नेत्रोका है; क्योंकि जिस समय प्राण निकलने लगते है उस समय ये नेत्र हठ कर उसमें बाधा कर देते हैं (अर्थात् केवल आपके दर्शनके लोभसे मेरे प्राण बने रहे हैं) जय सियाराम जय जय सियाराम
बिरह अगिनि तनु तूल समीरा।
स्वास जरइ छन माहिं सरीरा॥
नयन स्रवहिं जलु निज हित लागी।
जरैं पाव देह बिरहागी॥
हे प्रभु! आपका विरह तो अग्नि है, मेरा शरीर तूल (रुई) है। श्वास प्रबल वायु है। अब इस सामग्रीके रहते शरीर क्षणभरमें जल जाय इसमें कोई आश्चर्य नहीं॥
परंतु नेत्र अपने हितके लिए अर्थात् दर्शनके वास्ते जल बहा बहा कर उस विरह की आग को शांत करते हैं, इससे विरह की आग भी मेरे शरीरको जला नहीं पाती॥ जय सियाराम जय जय सियाराम
सीता कै अति बिपति बिसाला।
बिनहिं कहें भलि दीनदयाला॥
हनुमानजी ने कहा कि हे दीनदयाल! सीताकी विपत्ति ऐसी भारी है कि उसको कहना ही अच्छा है॥ जय सियाराम जय जय सियाराम
दोहा (Doha – Sunderkand)
निमिष निमिष करुनानिधि जाहिं कलप सम बीति।
बेगि चलिअ प्रभु आनिअ भुज बल खल दल जीति 31
हे करुणानिधान! हे प्रभु! सीताजीके एक एक क्षण, सौ सौ कल्पके समान व्यतीत होते हैं। इसलिए जल्दी चलकर और अपने बाहुबलसे दुष्टोंके दलको जीतकर उनको जल्दी ले आइए 31 जय सियाराम जय जय सियाराम
मंगलवार के दिन करें ये जबरदस्त टोटके ...
 जय श्री राम